मुरादाबाद से 11 किलोमीटर दूर दिल्ली रोड पर एक कस्बा है पाकबड़ा. यह कस्बा राष्ट्रीय राजमार्ग-24 के दोनों ओर बसा हुआ है. कासिम सैफी अपनी पत्नी गुल हाशमीन के साथ इसी कस्बे में रहता था. वह आरटीआई कार्यकर्ता था. इस के अलावा वह किसी के साथ मिल कर प्रौपर्टी डीलिंग का भी काम करता था.

कासिम सैफी 27 दिसंबर, 2018 को अपनी पत्नी से यह कह कर गया था कि मुरादाबाद जा रहा है और वहीं से जमीन खरीदफरोख्त के लिए कहीं जाएगा. उसे घर लौटने में देर हो सकती है.

कासिम जब शाम 7 बजे तक घर नहीं पहुंचा तो उस के भाई आसफ अली ने कासिम को फोन किया. उस ने बताया कि वह किसी के साथ बैठ कर प्रौपर्टी संबंधी बात कर रहा है. उस ने यह भी बताया कि रात 9-10 बजे तक घर पहुंच जाएगा.

कासिम जब रात 10 बजे तक भी घर नहीं पहुंचा तो आसफ अली ने उसे फिर से फोन किया. उस के फोन की घंटी तो बज रही थी लेकिन वह उठा नहीं रहा था. आसफ ने सोचा, हो सकता है किसी जरूरी काम में व्यस्त होने की वजह से काल रिसीव न कर पा रहा हो. इसलिए उस ने थोड़ी देर बाद फिर से कासिम को फोन किया. इस बार भी उस के फोन पर घंटी तो जा रही थी पर उस ने फोन नहीं उठाया.

कासिम ने इस से पहले कभी ऐसा नहीं किया था. घर वालों के फोन करने पर वह काल जरूर रिसीव करता था. भले ही थोड़ी देर बात करे, जबकि उस दिन वह फोन ही नहीं उठा रहा था.

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सभी घर वाले चिंतित थे. कासिम चूंकि आरटीआई कार्यकर्ता था, इसलिए घर वालों को और ज्यादा चिंता होने लगी. घर वाले रात भर चिंता में बैठे उसी के आने का इंतजार करते रहे. बीचबीच में वह उस का मोबाइल नंबर भी डायल करते रहे. हर बार फोन तो मिल जाता, पर बात नहीं हो रही थी. घंटी जा रही थी, लेकिन वह उठा नहीं रहा था. बैठेबैठे उन की रात बीत गई.

अगले दिन 28 दिसंबर को भी कासिम के परिवार वालों ने उस की तलाश की पर उन्हें उस का कोई पता नहीं चल सका. उन्होंने कासिम के दोस्तों और जानपहचान वालों को फोन कर के उस के बारे में जानने की कोशिश की लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. बेटे की कोई जानकारी न मिलते देख 29 दिसंबर को कासिम के पिता साबिर हुसैन कुछ लोगों के साथ थाना पाकबड़ा पहुंच गए.

थानाप्रभारी नीरज कुमार शर्मा को उन्होंने अपने 32 वर्षीय बेटे कासिम के गायब होने की जानकारी दी. इस पर थानाप्रभारी ने कहा कि कहीं वह नाराज हो कर तो नहीं चला गया.

‘‘नहीं साहब, नाराज होने का सवाल ही नहीं उठता. मेरा लड़का आरटीआई कार्यकर्ता है. वह पढ़ालिखा और समझदार है. मुझे डर है कि उस के साथ कहीं कोई अनहोनी न हो गई हो.’’ साबिर हुसैन ने आशंका जताई.

यह सुन कर थानाप्रभारी ने उन से कहा, ‘‘अगर आप को किसी पर शक हो तो बताइए. कभी उस का किसी से झगड़ा तो नहीं हुआ था?’’

‘‘साहब, छोटेमोटे झगड़े को छोड़ दें तो हमारी किसी से कोई दुश्मनी नहीं है.’’ साबिर हुसैन ने बताया.

थानाप्रभारी नीरज कुमार शर्मा ने साबिर हुसैन को यह कह कर घर भेज दिया कि कासिम के बारे में कहीं से कोई सुराग मिले तो पुलिस को जरूर बताना और किसी पर शक हो तो वह भी बताना.

पुलिस की चुप्पी देख घर वाले मिले एसपी से

कई दिन बीत गए, पुलिस भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी. कासिम के घर वाले थाने का चक्कर लगातेलगाते परेशान हो गए तो थकहार कर वे 3 जनवरी, 2019 को एसएसपी जे. रविंद्र गौड़ से मिले. एसएसपी ने उन की बात को गंभीरता से ले कर उसी समय पाकबड़ा के थानाप्रभारी को तुरंत कासिम के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर काररवाई करने को कहा.

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एसएसपी का आदेश मिलते ही थानाप्रभारी ने कासिम सैफी के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कर उस के घर वालों से इस संबंध में बात की. दरअसल, जांच के लिए यह जानना जरूरी था कि कासिम अधिकांशत: किसकिस के साथ रहता था, उस के दोस्त कौनकौन हैं.

साबिर हुसैन ने बताया कि मुरादाबाद के रामगंगा विहार में अलका नाम की एक महिला रहती है, जो अपने परिचित विकास चौधरी के साथ प्रौपर्टी डीलिंग का धंधा करती है. रामगंगा विहार में ही उस का औफिस है. कासिम उसी के पास जाता था. उसी के औफिस में बैठ कर आरटीआई के कागजात तैयार करता था.

यह जानकारी मिलने के बाद थानाप्रभारी ने कासिम के मोबाइल फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. कालडिटेल्स की जांच में पता चला कि कासिम के फोन से अंतिम बार जिस नंबर पर बात हुई, वह नंबर विकास चौधरी का था. आश्चर्य की बात यह थी कि कासिम के फोन की लोकेशन कभी हरियाणा, पंजाब की तो कभी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की मिली थी.

थानाप्रभारी उसी दिन पुलिस टीम के साथ मुरादाबाद के रामगंगा विहार पहुंच गए और विकास चौधरी को पूछताछ के लिए उस के औफिस से पाकबड़ा ले आए. उन्होंने विकास से कासिम के बारे में पूछताछ की तो उस ने बताया कि 27 दिसंबर को वह कासिम सैफी को प्रौपर्टी दिखाने के लिए लदावली गांव ले गया था. उस के बाद वह अपने घर जाने की बात कह कर चला गया था.

विकास ने जितने आत्मविश्वास के साथ यह बात पुलिस को बताई, उस से पुलिस को लगा कि विकास सच बोल रहा है. तफ्तीश के दौरान ही विकास की बिजनैस पार्टनर और सपा नेत्री अलका दूबे एक वकील को ले कर थाना पाकबड़ा पहुंची. अपने प्रभाव के इस्तेमाल और पहुंच का फायदा उठा कर वह विकास चौधरी को थाने से छुड़ा ले गई.

इस के बाद पुलिस ने विकास चौधरी द्वारा कही गई बातों की जांच शुरू कर दी. उस ने बताया था कि लदावली जाने के लिए उन्होंने अकबर के किले के पास से बस पकड़ी थी. इसलिए पुलिस ने अकबर के किले पर लगे सीसीटीवी कैमरों की 27 दिसंबर की फुटेज देखी. उस फुटेज में कासिम सैफी और विकास चौधरी मुजफ्फरनगर जाने वाली एक बस में चढ़ते दिखाई दिए.

फुटेज देख कर थानाप्रभारी का माथा ठनका कि मुजफ्फरनगर जाने वाली जिस बस में वे दोनों बैठ कर गए थे, उस में लदावली गांव का न तो टिकट बनता था और न ही वह बस लदावली गांव में रुकती थी. लिहाजा आगे की पूछताछ के लिए पुलिस ने विकास चौधरी को फिर से उठा लिया.

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विकास चौधरी ने खोला रहस्य

जब उस से सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने स्वीकार कर लिया कि कासिम सैफी अब जीवित नहीं है. उस ने उस की हत्या कर लाश एक खेत में छिपा दी है.

उस ने बताया कि कासिम उस की जाति की लड़कियों पर अश्लील कमेंट करता था. इस के अलावा अलका दूबे पर भी वह बुरी नजर रखता था, जिस की वजह से उस की हत्या करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

विकास ने आगे बताया कि 27 दिसंबर को वह शामली में एक प्रौपर्टी दिखाने के बहाने से उसे साथ ले गया था. वहां पर गांव भभीसा का रहने वाला एक दोस्त कुलदीप मिला. उस की मोटरसाइकिल पर बैठ कर हम लोग शाहपुर गांव के गन्ने के एक खेत में पहुंचे. वहीं पर हम ने उस के पेट और पीठ में गोली मार कर उस की हत्या कर दी. उस की लाश खेत में छोड़ कर वह मुरादाबाद आ गया था और कुलदीप कासिम का मोबाइल फोन ले कर सहारनपुर रेलवे स्टेशन चला गया था.

योजना के अनुसार कुलदीप ने मृतक का फोन साइलेंट कर के सहारनपुर रेलवे स्टेशन पर आई एक सुपरफास्ट टे्रन के शौचालय में छिपा दिया, ताकि उस के फोन की लोकेशन बदलती रहे.

विकास चौधरी द्वारा कासिम की हत्या का खुलासा होने के बाद पुलिस ने उस की निशानदेही पर शामली के कांधला थाने के गांव शाहपुर में सतवीर के गन्ने के खेत से कासिम सैफी की लाश बरामद कर ली. यह 10 जनवरी, 2019 की बात है. कासिम के घर वालों को उस की हत्या की खबर मिली तो घर में कोहराम मच गया.

विकास चौधरी ने कासिम की हत्या किए जाने की जो वजह बताई थी वह मृतक के घर वालों के गले नहीं उतर रही थी. परिवार के लोगों का कहना था कि अलका दूबे से कासिम के नजदीकी संबंध नहीं थे. वह शरीफ, समझदार और नेकनीयत वाला आदमी था. उन्होंने कहा कि अभियुक्त विकास चौधरी गलत आरोप लगा कर पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है.

11 जनवरी, 2019 को शामली से कासिम का शव मुरादाबाद लाया गया. पोस्टमार्टम के बाद उस की लाश उस के घर वालों को सौंप दी गई. इस के बाद कस्बे के सैकड़ों लोग उन के साथ हो गए. कासिम की हत्या का सही खुलासा न करने का आरोप लगाते हुए लोगों ने कासिम का शव थाने में रख कर हंगामा करना शुरू कर दिया.

भीड़ ने थाने में तोड़फोड़ भी की. इतना ही नहीं हत्यारोपी विकास चौधरी को हवालात से खींचने की भी कोशिश की. विरोध पर पुलिसकर्मियों से धक्कामुक्की की गई.

थाने में बवाल मचाने के बाद गुस्साए लोग दिल्ली लखनऊ हाइवे नंबर 24 पर पहुंच गए. उन्होंने कासिम का शव सड़क पर रख कर जाम लगा दिया.

सूचना मिलते ही एसएसपी जे. रविंद्र गौड़, एसपी (सिटी) अंकित मित्तल, सीओ (हाइवे) अपर्णा गुप्ता, सीओ (सिविल लाइंस) राजेश कुमार टीम के वहां पहुंच गए.

एसएसपी ने आक्रोशित भीड़ को समझाया और आश्वासन दिया कि केस की फिर से जांच कराई जाएगी. जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उस के खिलाफ सख्त काररवाई की जाएगी. आरोपी चाहे कितना भी असरदार क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा. एसएसपी के इस आश्वासन के बाद लोगों ने जाम खोला. इस के बाद लोग कासिम का शव दफनाने को तैयार हुए.

भारी पुलिस फोर्स के बीच कासिम सैफी के शव को दफनाया गया. पुलिस ने विकास चौधरी से पूछताछ कर 11 जनवरी 2019 को उसे जेल भेज दिया.

चूंकि लोगों ने अलका दूबे पर गंभीर आरोप लगाए थे, इसलिए एसएसपी जे. रविंद्र गौड़ ने सीओ (हाइवे) अपर्णा गुप्ता को निर्देश दिया कि अलका दूबे को हिरासत में ले कर पूछताछ करें. सीओ अपर्णा गुप्ता पुलिस को ले कर जब रामगंगा विहार स्थित उस के घर पहुंची तो उस के घर व औफिस पर ताला लगा मिला.

इतना ही नहीं, उस के दोनों मोबाइल फोन भी स्विच्ड औफ थे. उस के अंडरग्राउंड हो जाने के बाद पुलिस का शक और बढ़ गया. पुलिस ने उस के संभावित ठिकानों पर दबिश डाली, लेकिन सफलता नहीं मिली. लिहाजा पुलिस ने अपने मुखबिरों को सतर्क कर दिया.

असल खिलाड़ी थी अलका दूबे

इसी दौरान पुलिस को अलका दूबे के बारे में सूचना मिली कि वह सीमावर्ती जिले रामपुर की मिलक तहसील में कहीं रह रही है. सीओ अपर्णा गुप्ता की टीम ने इस सूचना पर काम करना शुरू किया. इस के बाद 14 जनवरी, 2019 को पुलिस टीम ने अलका दूबे को रामपुर जिले की तहसील मिलक से हिरासत में ले लिया.

सीओ अपर्णा गुप्ता ने अलका दूबे को मुरादाबाद के महिला थाने ले जा कर उस से पूछताछ की तो वह खुद को बेकसूर बताते हुए बारबार बयान बदलती रही. उस ने बताया कि मृतक कासिम से उस की मुलाकात मुरादाबाद कचहरी में हुई थी. इस से ज्यादा वह उस के बारे में कुछ नहीं जानती.

पुलिस को लगा कि वह उसे गुमराह कर रही है, तब उस से सख्ती से पूछताछ की गई. पुलिस की सख्ती के आगे अलका दूबे को सच बोलने के लिए मजबूर होना पड़ा. उस ने कासिम सैफी की हत्या की जो कहानी बताई वह बड़ी रहस्यमयी निकली—

अलका दूबे राजनीति में सक्रिय थी. वह समाजवादी पार्टी की जिला सचिव थी. सपा की जिला कार्यकारिणी में ही हारून सैफी भी जिला सचिव था. हारून सैफी पाकबड़ा का रहने वाला था और वहां का प्रधान रह चुका था.

पार्टी के कार्यक्रमों में हारून सैफी और अलका दूबे की अकसर मुलाकात होती रहती थी. चूंकि वह सपा जिला कार्यकारिणी में समान पद पर थे, इसलिए दोनों की फोन पर भी अकसर बातें होती रहती थीं.

करीब 3-4 महीने पहले मुरादाबाद की कचहरी में अलका की मुलाकात हारून सैफी से हुई. उस समय हारून बेहद परेशान दिखाई दे रहा था. अलका के पूछने पर उस ने बताया कि पाकबड़ा निवासी कासिम ने उसे और उस के घर वालों को परेशान कर रखा है.

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कासिम और हारून सैफी की दुश्मनी

दरअसल हुआ यह था कि हारून सैफी की पत्नी शायदा बेगम, बेटी नौरीन, एक रिश्तेदार आरिफ और आरिफ की पत्नी कैसरजहां ने फरजी डाक्यूमेंट बनवा कर रानी लक्ष्मीबाई पेंशन और समाजवादी पेंशन का लाभ लिया था. आरिफ ने पास सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान भी थी.

यह जानकारी पाकबड़ा निवासी आरटीआई कार्यकर्ता कासिम सैफी को मिली तो उस ने संबंधित विभागों में आरटीआई लगाने के बाद शिकायत की. उस की शिकायत पर गंभीरता से काररवाई करते हुए संबंधित विभाग ने उपरोक्त सभी से पेंशन हेतु दिए गए पैसे जमा कराने का नोटिस दे दिया था.

बताया जाता है कि कासिम सैफी और हारून सैफी में पिछले 10 सालों से रंजिश चली आ रही थी. दोनों के बीच दुश्मनी की शुरुआत ग्राम पंचायत चुनाव से शुरू हुई थी. करीब 10 साल पहले हारून और कासिम ने चुनाव लड़ने की शुरुआत की थी.

हारून सैफी ने बिरादरी की पंचायत में लोगों को अपने हक में कर के कासिम सैफी को चुनाव लड़ने से रोक दिया था. पंचायत चुनाव जीतने के बाद हारून सैफी ने कासिम के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था. यहीं से दोनों के बीच दुश्मनी शुरू हो गई थी.

इस के बाद कासिम हारून के खिलाफ लगातार शिकायत करने लगा. अप्रैल 2014 में कासिम ने हारून व उस की पत्नी शायदा बेगम के खिलाफ वोटर लिस्ट में धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी थी.

हारून सैफी ने फरजी तरीके से 2 पहचान पत्र भी बनवा रखे थे. उस ने ब्राइट फ्यूचर के नाम से एक गैर सरकारी संस्था (एनजीओ) भी बना रखी थी. अपने इसी एनजीओ के नाम से उस ने मुरादाबाद प्राधिकरण से मोटी रकम की प्रौपर्टी खरीदी थी.

कासिम ने संबंधित विभागों में आरटीआईलगाकर फरजी पहचानपत्र और जमीन खरीदने के लिए जो मोटी रकम एमडीए को दी थी उस की आमदनी के स्रोत की जानकारी मांगी थी. कासिम सैफी द्वारा हारून सैफी और उस के परिवार पर लगाई गई आरटीआई से हारून बहुत परेशान हो गया था.

वह किसी भी तरह कासिम से छुटकारा पाना चाहता था. हारून ने अपनी परेशानी अलका दूबे को बताते हुए उस से कहा, ‘‘देखिए, इस समय हमारी सरकार नहीं है, अधिकारी भी हमारी बात नहीं सुन रहे. यदि चाहो तो तुम मेरी मदद कर सकती हो.’’

‘‘बताइए, मैं किस तरह आप की मदद कर सकती हूं.’’ अलका बोली.

‘‘आप बस इतना कर दो कि उसे अपने जाल में फंसा कर किसी तरह रास्ते से हटा दो. इस के लिए मैं 10 लाख रुपए दूंगा.’’ हारून ने कहा, ‘‘मैं समझता हूं कि यह काम आप के आसान होगा.’’

अलका ने बनाई योजना

10 लाख रुपए की बात सुन कर अलका को लालच आ गया. उस ने कहा, ‘‘देखिए मेरा एक बिजनैस पार्टनर है विकास चौधरी. वह बहुत दबंग है. रामगंगा विहार में वह मेरे ही घर में रहता है. मैं उस से बात करूंगी. यदि वह चाहेगा तो आप का यह काम हो जाएगा.’’

‘‘अलकाजी, मैं विकास चौधरी को जानता हूं. आप चाहेंगी तो काम हो जाएगा.’’ कहते हुए हारून सैफी ने अलका को एडवांस में 50 हजार रुपए दिए और कहा कि बाकी रकम काम होने के बाद दे दूंगा. इस से पहले अलका कासिम सैफी को नहीं जानती थी.

50 हजार की रकम हाथ में आने के बाद अलका ने हारून से कासिम का मोबाइल नंबर ले लिया. इस के बाद अलका ने हारून सैफी से कहा कि अब आप निश्ंिचत हो कर जाइए, बाकी काम मेरा है.

अलका ने यह बात अपने बिजनैस पार्टनर विकास चौधरी को बताई तो पैसों के लालच में विकास कासिम को ठिकाने लगाने के लिए तैयार हो गया.

लेकिन इस के पहले अलका को कासिम से जानपहचान करनी थी. अक्तूबर 2018 की दिवाली से पहले की बात है. अलका ने कासिम सैफी को फोन कर के कहा, ‘‘हैलो कासिम भाई, कैसे हैं?’’ कासिम को आवाज अनजानी लगी तो वह बोला, ‘‘आप कौन, सौरी मैं ने पहचाना नहीं.’’

‘‘मैं मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी की जिला सचिव बोल रही हूं.’’ अलका ने कहा.

‘‘सपा के जिला सचिव पूर्व प्रधान हारून सैफी भी हैं, आप उन्हें तो जानती होंगी?’’ कासिम ने पूछा.

‘‘हां वो भी हैं लेकिन मेरा काम महिलाओं की समस्याएं हल करना व उन के काम करवाना है. मुझे तो बस अपने काम से मतलब. हारून सैफी क्या करते हैं मुझे नहीं मालूम, वैसे भी उन से मेरी ज्यादा बनती भी नहीं है. मेरा अपना प्रौपर्टी खरीदनेबेचने का काम है.’’ अलका ने बताया.

‘‘चलो कोई बात नहीं. अब यह बताओ मैडम की मुझे कैसे याद किया?’’ कासिम बोला.

‘‘कासिम भाई, मुझे कहीं से यह पता लगा कि आप आरटीआई कार्यकर्ता हैं. हमारी तरह आप भी समाजसेवा से जुड़े हुए हैं. देखो, पहले सपा सरकार थी तो हमारे सारे काम चुटकियों में हो जाते थे, लेकिन अब भाजपा की सरकार है. अब तो अफसर भी निगाहें फेर कर बात करते हैं. कुछ अफसरों के खिलाफ आरटीआई डलवानी है इसी संबंध में मुझे आप की मदद चाहिए.’’ अलका बोली.

‘‘कैसी मदद.’’ कासिम ने पूछा.

‘‘हम दोनों मिल कर भाजपा सरकार के भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ आरटीआई डालेंगे. उन के सबूत मैं दूंगी. आप मुरादाबाद के रामगंगा विहार स्थित मेरे औफिस आ जाइए इस बारे में और डिटेल्स से बात कर लेंगे.’’ इस दौरान अलका ने उसे अपने औफिस का पता भी दे दिया.

कासिम भांप नहीं पाया अलका की चाल को

कासिम सैफी अलका की योजना से अनभिज्ञ था. एक दिन वह उस के औफिस पहुंच गया. वहीं पर अलका ने विकास चौधरी से उस की मुलाकात कराई. इस के बाद कासिम का अलका के औफिस में आनाजाना शुरू हो गया.

धीरेधीरे वह उन के साथ प्रौपर्टी डीलिंग का धंधा भी करने लगा. अलका कासिम को पूरी तरह अपने विश्वास में लेने के बाद ही योजना को अंजाम देना चाहती थी. इसलिए उस ने योजना को अंजाम देने में जल्दबाजी नहीं दिखाई.

अलका दूबे से घनिष्ठता बढ़ जाने के बाद कासिम सैफी का ज्यादातर समय अलका के साथ उस के औफिस में ही बीतता था. वहीं पर बैठ कर वह आरटीआई के कागजात तैयार करता. विकास चौधरी से भी कसिम की गहरी दोस्ती हो गई थी.

एक दिन विकास ने कासिम से कहा, ‘‘कासिम भाई शामली से खेती की जमीन का सौदा आया है. बताते हैं कि वह जमीन मौके की है. मैं चाहता हूं कि हम दोनों उस जमीन को एक बार देख आएं. बात बन गई तो मैं खरीदार का भी जुगाड़ कर लूंगा. सब कुछ ठीक रहा तो हम इस में मोटा पैसा कमा सकते हैं.’’

चूंकि कासिम को विकास पर भरोसा था इसलिए वह जमीन देखने जाने के लिए तैयार हो गया. फिर 27 दिसंबर, 2018 को विकास चौधरी कासिम सैफी को साथ ले कर बस से शामली के लिए निकल गया. जैसे ही वह दोनों शामली पहुंचे विकास चौधरी का दोस्त कुलदीप मोटरसाइकिल ले कर आ गया. कुलदीप वहीं पास के एक गांव में रहता था.

वह कासिम और विकास को मोटरसाइकिल पर बैठा कर शाहपुर गांव की तरफ चल दिया. वहीं गन्ने के एक खेत में ले जा कर विकास ने अपने साथ लाए तमंचे से कासिम को 2 गोलियां मारीं. एक गोली उस के पेट में और दूसरी पीठ में लगी. कुछ ही देर में उस की वहीं मौत हो गई.

हत्या को दूसरा रूप देने के लिए विकास चौधरी ने कासिम सैफी की पेंट उतार दी. हत्या करने के बाद विकास चौधरी वापस मुरादाबाद आ गया. जबकि कुलदीप कासिम का मोबाइल ले कर सहारनपुर रेलवे स्टेशन चला गया. जहां उस ने अमृतसर जाने वाली एक ट्रेन के टौयलेट में मोबाइल साइलेंट मोड पर कर के छिपा कर रख दिया.

हत्या के बाद हारून सैफी ने अलका दूबे को 50 हजार रुपए और दिए थे. हारून ने उस से कहा था कि वह उमरा करने सउदी अरब जा रहा है, बाकी के 9 लाख रुपए वह लौटने के बाद दे देगा.

हारून ने अलका से यह भी कहा था कि अगर कभी हत्या का राज खुल भी जाएगा तो वह मुकदमे का सारा खर्चा वहन करेगा और हर महीने 10 हजार रुपए विकास चौधरी के घर वालों को देता रहेगा. हारून 3 जनवरी को सऊदी अरब चला गया.

पुलिस ने अलका दूबे से पूछताछ के बाद उस से 27 हजार रुपए भी बरामद किए. फिर 16 जनवरी, 2019 को कुलदीप वर्मा को भी गिरफ्तार कर के दोनों को न्यायालय में पेश कर के जेल भेज दिया.

अब पुलिस को हारून सैफी के सऊदी अरब से लौटने का इंतजार था. उस का 15 दिन बाद लौटने का कार्यक्रम था. कथा लिखे जाने तक हारून भारत नहीं पहुंचा था. पुलिस ने उस के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया था, जिस से उस के विदेश से लौटते ही उसे एयरपोर्ट पर ही गिरफ्तार किया जा सके.

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