News Story : खेल का ‘विश्वगुरु’ है फुटबाल

News Story. आजकल मनोरंजन के साधन इतने ज्यादा बढ़ गए हैं कि किसी एक पर टिके रहना बड़ा मुश्किल हो जाता है. भारत में तो क्रिकेट का अपना ही जलवा है. विजय पर इस खेल की खुमारी का अलग ही लैवल रहता है.

अब विजय 15 साल के क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी का दीवाना है. चूंकि महिला क्रिकेट का वर्ल्ड कप चल रहा है तो वह उन के मैच भी देखता है. वह स्मृति मंधाना के खेल और खूबसूरती दोनों का फैन है.

ऊपर से फुटबाल का वर्ल्ड कप भी चल रहा है, तो खेल के दीवानों की पौबारह हो रखी है. विजय की भी बल्लेबल्ले. इसी चक्कर में वह पिछले कई दिनों से घर से बाहर कम ही जाता है. इस से घर पर मम्मी परेशान और बाहर अनामिका.

चूंकि अनामिका अपने नए फ्लैट में शिफ्ट हुई है तो वह थोड़ा बिजी थी, पर आज उस ने सोच लिया था कि विजय के घर जा कर उस की खबर लेगी.

पर विजय साहब तो विजय साहब हैं. वे तो घर पर भारत और बंगलादेश के बीच चल रहे महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप मैच का मजा ले रहे थे.

मैच अभी शुरू ही हुआ था कि अनामिका दनदनाती हुई विजय के कमरे में गई. वहां तो माहौल ही अलग था. टीवी पर मैच चल रहा, विजय कुरसी पर पसरा हुआ, टेबल पर कोल्डड्रिंक और चिप्स रखे थे…

यह देख कर अनामिका का दिमाग खराब हो गया. उस का पारा चढ़ गया. उसे लगा कि विजय का सिर फोड़ दे पर उसे ऐसा कुछ सामान दिख नहीं रहा था कि वह विजय से पंगे लेती. सब से बड़ी बात तो यह थी कि विजय को पता ही नहीं चला कि अनामिका उस के पीछे खड़ी थी.

तभी अनामिका को एक खुराफात सूझी. फर्श पर एक नई फुटबाल पड़ी थी. उस ने फुटबाल पर इस तरह किक मारी कि पहले तो वह विजय के सिर पर लगी, फिर साइड वाली दीवार पर और उस से टकरा कर खिड़की से बाहर निकल गई.

‘‘गोल…’’ अनामिका जोर से चिल्लाई और तेजतेज हंसने लगी.

अचानक लगी फुटबाल से विजय का सिर झन्ना गया. वह चिल्लाया, ‘‘पागल की बच्ची, कौन इतनी तेज मारता है. और यह कैसा मजाक है…’’

‘‘ओ हैलो, यह मजाक नहीं है बल्कि मेरे फुटबाल खेलने का स्किल है. तुम ने देखा नहीं कि मैं ने किस एंगल से और कितनी फोर्स से फुटबाल को किक मार कर उसे खिड़की से बाहर भेज दिया. जाओ बच्चे, नीचे से फुटबाल ले कर आओ.’’

तब तक विजय के सिर का दर्द थोड़ा कम हुआ. वह बोला, ‘‘ओ मेरी मेसी, बस कर. जो मैच सामने चल रहा है उसे देख. आज भारत को जीतना ही होगा, नहीं तो हम सैमीफाइनल में नहीं जा पाएंगे. अगला मैच आस्ट्रेलिया के साथ है, जिस ने अपने पिछले मैच में पाकिस्तान को बुरी तरह हरा दिया था.’’

‘‘तो मुझे उस से क्या… पहले तुम गेंद नीचे से लाओ और फिर मेरी किक की तारीफ करो,’’ कहते हुए अनामिका एक कुरसी पर बैठ गई.

विजय बेमन से अपने कमरे से बाहर निकला. उसे बाहर देख कर मम्मी ने ताना कसा, ‘‘बाहर निकल आई नई दुलहन… क्या सेवा की जाए मेरी लाडली की?’’

‘‘मम्मी, प्लीज, आप तो कुछ मत कहो. अंदर एक तूफान काफी है मेरी जिंदगी में हलचल मचाने के लिए,’’ विजय ने कहा.

‘‘अच्छा, नीचे जा रहा है तो दुकान से थोड़ा पनीर ले आना. अनामिका को पनीर की भुज्जी पसंद है,’’ मम्मी ने कहा.

विजय ने नीचे जा कर पहले फुटबाल उठाई, फिर दुकान से पनीर और एक कोल्डड्रिंक ले कर ऊपर आ गया.

इधर, अनामिका ने चैनल बदल कर फीफा वर्ल्ड कप के मैच की हाइलाइट्स लगा ली थी.

‘‘यार, तुम ने क्रिकेट मैच क्यों हटाया? ये तो वैसे भी हाइलाइट्स हैं. तुम फिर कभी देख लेना,’’ विजय ने अनामिका से कहा.

‘‘क्या क्रिकेटक्रिकेट लगा रखा है. बेटा, फुटबाल देख लो. इस खेल में जो मजा है वह क्रिकेट में कभी नहीं मिल सकता,’’ अनामिका ने कहा.

‘‘पर मुझे  क्रिकेट देखना है.’’

‘‘बोरिंग गेम. पब्लिक का बेवकूफ बनाते हैं. दुनिया में इस तरह ढिंढोरा पीटते हैं जैसे हर जगह क्रिकेट ही खेला जाता है और भारत तो ‘विश्वगुरु’ है इस खेल का, जबकि ऐसा नहीं है. असली हीरो तो फुटबाल है,’’ अनामिका ने अपनी बात रखी.

‘‘तुम्हारे कहने का मतलब है कि फुटबाल ‘खेलों का विश्वगुरु’ है, क्रिकेट नहीं?’’ विजय ने सवाल किया.

‘‘हां, फुटबाल को ‘खेलों का विश्गुरु’ बोल सकते हैं,’’ अनामिका ने कहा.

‘‘जरा एक्सप्लेन करेंगी आप?’’

क्यों नहीं. फीफा में 211 देश हैं, जबकि आईसीसी में 12 टैस्ट मैच खेलने वाले देश हैं. फुटबाल 2022 का वर्ल्ड कप फाइनल मुकाबला डेढ़ अरब लोगों ने देखा था, जबकि क्रिकेट वर्ल्ड कप का फाइनल मुकाबला 30 करोड़ लोगों ने.

‘‘इस फुटबाल वर्ल्ड कप को जीतने वाली टीम को 400 करोड़ रुपए से ज्यादा का इनाम मिलेगा, जबकि आईपीएल की विजेता टीम को महज 20 करोड़ रुपए मिले थे,’’ अनामिका बोली.

‘‘तुम्हारे कहने का मतलब है कि जब लोग फुटबाल देखते हैं तो दुनिया रुक जाती है?’’ विजय से सवाल दागा.

‘‘कह सकते हैं. एक बार तो युद्ध रुक गया था,’’ अनामिका ने कहा.

‘‘कब और किस के बीच?’’ विजय ने हैरान हो कर पूछा.

‘‘मैं ने एक अखबार में पढ़ा था. दरअसल, ब्राजील के महान फुटबाल खिलाड़ी पेले ने अपने कैरियर का ज्यादातर समय सांतोस फुटबाल क्लब में बिताया था. 1960 के दशक में पेले की वजह से सांतोस फुटबाल क्लब दुनिया की सब से मशहूर फुटबाल क्लबों में से एक थी. यह टीम पूरे वर्ल्ड में पहचानी जाती थी और दुनिया के हर कोने में फ्रैंडली मैचों में हिस्सा लेती थी.

‘‘एक ऐसा ही मैच 4 फरवरी 1969 को नाइजीरिया के एक युद्धग्रस्त क्षेत्र में खेला गया था. इस मैच में सांतोस का सामना बेनिन सिटी के एक क्लब से हुआ था.

सांतोस की टीम 26 जनवरी 1969 को नाइजीरिया पहुंची थी. तब नाइजीरिया में गृहयुद्ध चल रहा था. नाइजीरिया और बायाफ्रा के बीच लड़ाई थी. इस लड़ाई में हजारों लोगों की जान गई थी, वहीं लाखों लोग बेघर हो गए थे.

‘‘हालांकि, ऐसा कहा जाता है कि पेले के वहां पहुंचते ही नाइजीरिया और बायाफ्रा के बीच लड़ाई 48 घंटे से ज्यादा समय के लिए रुक गई थी. यह एक तरह का सीजफायर था. क्या क्रिकेट ने कभी युद्ध रुकवाया है?’’ अनामिका ने सवाल किया.

‘‘यह क्या बात हुई? और कोई तुलना हो तो बताओ?’’ विजय ने खीज कर कहा.

‘‘फुटबाल के मुकाबले क्रिकेट बोरियत भरा खेल है. फुटबाल में 90 मिनट का रोमांच होता, जबकि क्रिकेट खासकर जब टैस्ट मैच होता है, तो 5 दिन में बहुत बार बोरिंग हो जाता है. वनडे में भी तकरीबन 8 घंटे और ट्वेंटी20 में 4 घंटे तो लगते ही हैं.

‘‘फुटबाल का खेल इतना ज्यादा फास्ट होता है कि गेंद जैसे मैदान पर नाचती दिखती है, जबकि क्रिकेट में मैदान पर 13 खिलाड़ी होते हैं, पर उन में से ज्यादातर किसी हरकत में नहीं दिखाई देते हैं. गेंदबाज, बल्लेबाज और फील्डर ही एक्टिव दिखता है.

‘‘फुटबाल के खेल में एक सस्ती सी फुटबाल 22 खिलाडि़यों को मैदान पर दौड़ाती है. साथ में रैफरी भी दौड़ते हैं. एक खिलाड़ी मैदान में तकरीबन 10 किलोमीटर बड़ी तेजी से दौड़ लेता हैं. इस में स्प्रिंट, जंप, टैकल, बिना रुके भागना शामिल होता है.

‘‘क्रिकेट में बैट्समैन 22 गज भागता है, फिर 2 मिनट रैस्ट. फील्डर 90 फीसदी टाइम खड़ा रहता है. स्लिप में खड़े हो तो ऊंघ भी लो. कितनी बार मैदान पर क्रिकेट खिलाड़ी खुद में ताकत और ताजगी लाने के लिए फुटबाल खेल रहे होते हैं,’’ अनामिका बोली.

‘‘सिर्फ अच्छी किक मारने से कोई खिलाड़ी नहीं बन जाता. किसी भी खेल को खेलने से पहले उस के बारे में जानना भी जरूरी है. अच्छा, इस बार के फुटबाल वर्ल्ड कप के बारे में तुम क्या जानती हो?’’ विजय ने पूछा.

‘‘मैं ने एक बड़े अखबार में पढ़ा था कि फीफा वर्ल्ड कप 2026 बेहद खास है. ऐतिहासिक, क्योंकि इस में पहली बार 48 टीमें खेल रही हैं. यह 12 जून से शुरू हो चुका है और इस का फाइनल मुकाबला 19 जुलाई को खेला जाएगा,’’ अनामिका बोली.

‘‘और बताओ इस के बारे में?’’ विजय ने कहा.

‘‘यह वर्ल्ड कप 3 देशों में आयोजित किया गया है, जिस में संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको शामिल हैं. ऐसा पहली बार हुआ है, जब फीफा वर्ल्ड कप 3 देशों की मेजबानी में खेला जा रहा है,’’ अनामिका बोली.

‘‘कुछ और रोचक बात बताओ?’’ विजय आज अनामिका का फुटबाल ज्ञान लेने के मूड में था.

‘‘इस बार 12 ग्रुप बनाए गए हैं, हर ग्रुप में 4 टीमें हैं. इस से कुल मैच 64 से बढ़ कर 104 हो गए हैं. यही वजह है कि यह टूर्नामैंट 39 दिनों तक खेला जाएगा,’’ अनामिका बोली.

‘‘क्या इस बदलाव से किसी को कोई फायदा हुआ है?’’ विजय ने पूछा.

‘‘हां, हुआ है. इस बदलाव से अफ्रीका, एशिया और कनाडा, मैक्सिको, अमेरिका क्षेत्र की ज्यादा टीमों को मौका मिला है. कुल 16 शहर मैचों की मेजबानी कर रहे हैं, जिन में वैंकूवर से ले कर मैक्सिको सिटी और मियामी तक शामिल हैं. अमेरिका में सब से ज्यादा मैच हो रहे हैं खासकर क्वार्टर फाइनल से आगे के सभी नौकआउट मैच उसी के स्टेडियमों में होंगे,’’ अनामिका ने अपनी बात रखी.

‘‘बहुत खूब. तुम तो बहुतकुछ जानती हो. वैसे, इस बार के फुटबाल वर्ल्ड कप में जो फुटबाल इस्तेमाल की जा रही है, उस की जानकारी भी बेहद रोचक है,’’ विजय ने बताया.

‘‘अच्छा, जरा बताओ तो सही इस बारे में. मु?ो तो लगा था कि जनाब को सिर्फ क्रिकेट का ही ज्ञान है,’’ अनामिका बोली.

‘‘मैं ने भी खबरों से ही इस बारे में जानकारी ली है. एडिडास द्वारा विकसित यह हाईटैक फुटबाल आधुनिक तकनीक, अनोखे डिजाइन और सांस्कृतिक प्रतीकों का शानदार मिश्रण है. इस का नाम भी काफी यूनिक है, ट्रायोंडा,’’ विजय बोला.

‘‘इस नाम का मतलब क्या है?’’ अनामिका ने पूछा.

‘‘ट्रायोंडा 2 शब्दों से मिल कर बना है, ट्राय (यानी 3) और ओंडा. ओंडा स्पैनिश भाषा का शब्द है, जिस का मतलब होता है, लहर. इस तरह ट्रायोंडा का मतलब होता है, 3 लहरें. यह नाम 2026 फीफा वर्ल्ड कप के 3 मेजबान देशों, अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको, की एकता और सांझा फुटबाल संस्कृति को दिखाता है,’’ विजय बोला.

‘‘और कोई ऐसी खासीयत इस ट्रायोंडा फुटबाल की?’’ अब अनामिका को मजा आ रहा था.

‘‘ट्रायोंडा का डिजाइन साधारण फुटबाल की तरह नहीं है. इस में लाल, नीले और हरे रंग का विशेष मिक्स दिखाई देता है, जो तीनों मेजबान देशों का प्रतिनिधित्व करता है. लाल रंग कनाडा का प्रतीक है. नीला रंग अमेरिका को दिखाता है और हरा रंग मैक्सिको की पहचान से जुड़ा है.

‘‘इस के अलावा गेंद पर सितारे (यूएसए), मैपल लीफ (कनाडा) और ईगल (मैक्सिको) के प्रतीक भी शामिल किए गए हैं. इतना ही नहीं, ट्रायोंडा की सब से बड़ी तकनीकी खासीयत इस की 4 पैनल वाली संरचना है. यह फीफा मैन्स वर्ल्ड कप के इतिहास की पहली आधिकारिक गेंद है, जिस में केवल 4 थर्मली बौन्डेड पैनल इस्तेमाल किए गए हैं. इस से गेंद की सतह ज्यादा स्मूद बनती है और उस की उड़ान पर बेहतर कंट्रोल मिलता है.

‘‘इतना ही नहीं, इस गेंद के अंदर एक उन्नत मोशन सैंसर चिप लगाई गई है, जो गेंद की गति और दिशा से संबंधित डाटा रियल टाइम में भेजती है. यह तकनीक वीडियो असिस्टैंट रैफरी को औफसाइड, हैंडबाल और अन्य विवादित फैसलों में ज्यादा सटीक जानकारी देने में मदद करती है.

‘‘स्मार्ट होने की वजह से यह गेंद चार्जेबल है, जिसे हर नए मैच से पहले मोबाइल की तरह चार्ज करना होता है. इस चार्जिंग की वजह गेंद में लगी स्मार्ट चिप है, जो मैच के दौरान एक्टिव रह कर गेंद की एकएक हरकत का डाटा कंप्यूटर को देती है,’’ विजय ने बताया.

‘‘मतलब खिलाड़ी से ज्यादा गेंद हाईफाई हो गई है इस वर्ल्ड कप में?’’ अनामिका के मुंह से निकला.

‘‘कह सकती हो,’’ विजय ने कहा.

‘‘इस का मतलब फुटबाल ही खेल का असली ‘विश्वगुरु’ है. यह खेल ताकत और स्टैमिना का अद्भुत मेल है. सालों पहले जब यह खेल शुरू हुआ था तो अमीरों का खेल माना जाता था और ऊंचे तबके के लोग ही मनोरंजन के लिए इसे खेलते थे, पर बाद में गरीबों की गलियों तक जा पहुंचा और स्लम बस्तियों के मजबूत लड़के आए और अपने खेल स्किल की वजह से दुनिया में छा गए.

‘‘सेनेगल के सादियो माने, कनाडा के अल्फोंसो डेविस, पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो, फ्रांस के एडिल रामी, ब्राजील के पेले नेमार और रोबर्टो कार्लोस, अर्जेंटीना के डिएगो माराडोना… ऐसे बहुत से नाम हैं, जो स्लम से निकल कर फुटबाल के बेताज बादशाह बने,’’ अनामिका बोली.

‘‘तुम से बहस करने में कोई नहीं जीत सकता. भूख लग रही है. मम्मी ने तुम्हारी मनपसंद पनीर की भुज्जी बनाई है,’’ विजय ने कहा.

‘‘अरे वाह, चलो फिर चलते हैं,’’ इतना कह कर अनामिका ने दोबारा फर्श पर रखी फुटबाल के किक मारने की एक्टिंग की.

विजय अपना सिर बचाने के लिए नीचे झुका, तो अनामिका हंस पड़ी और बोली, ‘‘बेटा, मेरा किक मारने पर कंट्रोल है. डरो मत, ऐसा कुछ नहीं होगा. मम्मी के पास चलते हैं और पनीर भुज्जी का लुत्फ लेते हैं,’’ अनामिका बोली और कमरे से भाग गई. News Story

टेस्ट सीरीज के लिए टीम इंडिया का हुआ ऐलान, रोहित शर्मा IN, केएल राहुल OUT

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) मुख्य चयनकर्ताओं ने दक्षिण अफ्रीका के साथ होने वाली तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए टीम की घोषणा कर दी है. टीम में दो मुख्य बदलाव किए गए हैं. ओपनर लोकेश राहुल को बाहर कर दिया गया है जबकि रोहित शर्मा की वापसी हुई है. युवा खिलाड़ी शुभमन गिल को टीम में शामिल किया है.

चयनकर्ताओं ने विकेटकीपर के तौर पर ऋषभ पंत और ऋद्धिमान साहा दोनों के नाम हैं. स्पिन डिपार्टमेंट में आर. अश्विन, रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव हैं. जसप्रीत बुमराह, ईशांत शर्मा के अलावा मोहम्मद शमी के जिम्मे तेज आक्रमण रहेगा. वेस्टइंडीज दौरे से बाहर रहे अश्विन को टीम में बुला लिया गया है. अश्विन को टीम में शामिल न किए जाने के बाद चयनकर्ताओं के ऊपर सवाल उठाए गए थे. इस मामले पर टीम के मुख्य कोच रवि शास्त्री को बयान देना पड़ा था. हालांकि अश्विन की जगह पर हनुमा विहारी को टीम में शामिल किया गया था जिस खिलाड़ी ने अपनी प्रतिभा से सबका मुंह बंद कर दिया था.

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टीम इंडिया की ओर से बल्लेबाज का आगाज रोहित शर्मा करेंगे. दूसरे सलामी बल्लेबाज मयंक अग्रवाल होंगे. उधर, हनुमा विहारी मध्यक्रम में (छठे नंबर पर) में बने रहेंगे. रोहित शर्मा ने आखिरी बार मेलबर्न टेस्ट (26-30 दिसंबर 2018) में नंबर-6 पर बल्लेबाजी करते हुए 63 और पांच रनों की नाबाद पारी खेली थी, लेकिन इसके बाद वह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के चौथे और आखिरी टेस्ट के अलावा बाद में वेस्टइंडीज सीरीज के लिए भी नहीं चुने गए.

रोहित शर्मा ने अब तक 27 टेस्ट मैचों के करियर में कभी टेस्ट में ओपनिंग नहीं की है. उन्होंने नंबर-3 पर चार मैच खेले हैं और 21.40 की औसत से 107 रन बनाए. उनके तीनों टेस्ट शतक नंबर-6 पर आए हैं. दूसरी तरफ कैरेबियाई सीरीज में सबसे अधिक रन (289) बनाने वाले हनुमा विहारी पर टीम की निगाहें होगीं.

टीम के मुख्य चयनकर्ता एमएसके प्रसाद का कहना है कि हम रोहित शर्मा को टेस्ट में ओपनिंग का मौका देना चाहते हैं. ऐसा पहली बार होगा जब रोहित शर्मा टीम की ओपनिंग करेंगे. रोहित शर्मा का वनडे का रिकॉर्ड शानदार है. वो इस मौके को भुनाना चाहेंगे. रोहित शर्मा की भी दिली ख्वाइश रही है कि वो सफेद जर्सी में देश के लिए खेल पाएं. अब उनकी मुराद पूरी होती दिख रही है. हालांकि ऐसा पहली बार नहीं हो रहा. रोहित शर्मा ने 27 टेस्ट मैच खेले हैं जिसमें उन्होंने 1585 रन भी बनाए हैं. रोहित शर्मा ने वेस्टइंडीज के खिलाफ कोलकाता के ईडन गार्डेंस मैदान पर 6 नवंबर 2013 को टेस्ट मैच में डेब्यू किया था.

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विराट कोहली (कप्तान), मयंक अग्रवाल, रोहित शर्मा, चेतेश्वर पुजारा, अजिंक्य रहाणे (उपकप्तान), हनुमा विहारी, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), ऋद्धिमान साहा (विकेटकीपर), आर. अश्विन, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, मोहम्मद शमी, जसप्रीत बुमराह , ईशांत शर्मा, शुभमन गिल.

टी-20 सीरीज के बाद भारत और साउथ अफ्रीका की टीमें विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप के तहत तीन मैचों की टेस्ट सीरीज खेलेंगी. टेस्ट सीरीज का पहला मैच दो अक्टूबर से विशाखापत्तनम में, दूसरा 10 अक्टूबर से पुणे में और तीसरा 19 अक्टूबर से रांची में खेला जाएगा.

बियांका पैदा भी नहीं हुई थीं जब सेरेना ने जीता था पहला यूएस ओपन

साल का चौथा और आखिरी ग्रैंड स्लैम यूएस ओपन का शानदार समापन हुआ. पुरुष वर्ग में ये खिलाब स्पेनिश खिलाड़ी राफेल नडाल के पास गया तो महिला एकल वर्ग में बियांका एंड्रेस्‍क्‍यू के पास. बियांका ने इतिहास रच दिया और जिसको हराया वो कोई और नहीं बल्कि 23 बार की ग्रैंड स्लैम विजेता टेनिस की महान खिलाड़ी सेरेना विलियम्स. विलियम्स मां बनने के बाद पहली बार टेनिस कोर्ट में उतरी थीं. अमेरिका की खिलाड़ी के साथ पूरा क्राउड था. हजारों लोगों की भीड़ सेरेना को 24वां ग्रैंड स्लैम जीतते हुए देखना चाहती थी. भीड़ हर बार से कुछ ज्यादा थी. साफ था कि मां बनने के बाद पहली बार सेरेना विलियम्स के हाथों में ग्रैंड स्लैम की ट्राफी लोग देखना चाहते थे लेकिन हजारों लोगों की उम्मीद तोड़ कर एक नया इतिहास कायम किया कनाडा की महज 19 साल की खिलाड़ी बियांका एंड्रेस्‍क्‍यू ने.

19 साल की बियांका एंड्रेस्‍क्‍यू ग्रैंडस्‍लैम जीतने वाली पहली कनाडाई हैं. उन्‍होंने अमेरिका की सेरेना विलियम्‍स को सीधे सेटों में 6-3,7-5 से हराया. इस जीत के साथ ही बियांका ग्रैंडस्‍लैम जीतने वाली दूसरी सबसे कम उम्र की विजेता बन गई हैं. उनसे पहले 2006 में रूस की मारिया शारापोवा ने यह रिकॉर्ड बनाया था. बियांका ने काफी तेजी से सफलता की सीढ़ियां चढ़ी हैं. पिछले साल इन्‍हीं दिनों में वह रैंकिंग में टॉप 200 के बाहर थीं. लेकिन इन 12 महीनों में वह 15वीं रैंक पर पहुंच चुकी हैं.

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बियांका के लिए आसान नहीं था. सेरेना कोर्ट में बहुत चालाकी से गेम प्ले करती हैं. लेकिन बियांका ने फुर्ती और आक्रामता के साथ गेम खेला. बियांका ने बिग हिटिंग, बिग सर्विंग शैली का आक्रामक खेल दिखाते हुए सेरेना को सीधे सेटों में 6-3, 7-5 से हरा दिया. जीत की खुशी के साथ इस खिलाड़ी ने जता दिया कि दिल बड़ा कैसे किया जाता है. इस खिलाड़ी ने तुरंत सेरेना का अभिवादन किया. क्योंकि वो जानती थी कि जिस खिलाड़ी को उसने हराया उसको इस खेल का मास्टर कहा जाता है.

पिछले साल बियांका यूएस ओपन के लिए क्‍वालिफाई भी नहीं कर पाई थीं. पिछले 2 साल से वह यूएस ओपन के क्‍वालिफाइंग में पहले राउंड में ही हार रही थीं. 2019 की शुरुआत बियांका ने जबरदस्‍त तरीके से ही और बीएनपी परिबास ओपन जीता. लेकिन फिर एक चोट की वजह से पूरे क्‍ले कोर्ट और ग्रास कोर्ट के सीजन से बाहर रहीं. लेकिन वापसी करते ही जीत की राह पर चल पड़ीं. इस साल टॉप 10 खिलाड़ियों के खिलाफ बियांका का रिकॉर्ड 8-0 का है.

बियांका के माता-पिता रोमानिया के रहने वाले हैं. लेकिन दोनों कनाडा शिफ्ट हो गए और यहां की नागरिकता ले ली. उस समय बियांका की उम्र 11 साल थी. दिलचस्‍प बात है कि विबंलडन का खिताब जीतने वाली सिमोना हालेप भी रोमानिया से हैं.

इन सब में सबसे चौंकाने वाली बात तो ये है कि सेरेना विलियम्‍स ने जब पहली बार 1999 में यूएस ओपन जीता था उस समय बियांका पैदा भी नहीं हुई थीं. सेरेना के नाम 6 यूएस ओपन खिताब है. वहीं बियांका ने पहली ही बार इस टूर्नामेंट में जगह बनाई थी और जीत दर्ज करने में कामयाब रहीं. उन्‍होंने मोनिका सेलेस की बराबरी की है, जिन्‍होंने अपने चौथे ही ग्रैंडस्‍लैम में ही खिताब जीत लिया था.

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यूएस ओपन के फाइनल में दर्शक सेरेना का समर्थन कर रहे थे. सेरेना ने जब भी कोई पॉइंट जीता तो जोरदार शोर हुआ. एक समय तो ऐसा भी आया जब तेज शोर और सेरेना के समर्थन में हो रही नारेबाजी के चलते बियांका ने अपने कानों पर हाथ रख लिए. मैच जीतने के बाद प्रेजेंटर से बातचीत में उन्‍होंने सेरेना की हार के लिए दर्शकों से माफी मांगी. बियांका ने कहा, ‘मैं काफी दुखी हूं. मुझे पता है कि आप लोग सेरेना को जिताना चाहते थे.

जब से बियांका ने ये खिताब अपने नाम किया तब से सोशल मीडिया में वो छा गई हैं. उनका प्रोफाइल तलाशने के बाद पता चलता है कि वो फैशन और मौडलिंग की भी शौकीन हैं. बियांका की कई ग्लैमरस पिक्चर्स सोशल मीडिया में वायरल हो रही है. लोग उनकी तुलना भारत की टेनिस सनसनी सानिया मिर्जा ने कर रहे हैं. सानिया जब कोर्ट पर पहली बार उतरी थीं तो उनकी खूबसूरती के चर्चे खूब हुए थे.

टीम की चिंता या फिर तेंदुलकर जैसी विदाई की चाहत रखते हैं धोनी

लंबे बालों के साथ जब वो पहली बार क्रीज पर आया तो सभी ने उस खिलाड़ी की हेयर स्टाइल की तारीफ की लेकिन उसके बाद केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया ही उनकी मुरीद हो गई. शायद आप समझ गए होंगे हम किसकी बात कर रहे हैं. हम बात कर रहे हैं महेंद्र सिंह धोनी की. वो धोनी जितने भारत को क्रिकेट विश्व कप भी जिताया, टी-20 विश्व कप भी जिताया, एशिया कप भी जिताया और चैंपियन ट्रॉफी भी हम जीतकर आए. लेकिन समय के साथ सबके खेल में बदलाव आता है. ये हमने पहले भी कई खिलाड़ियों के साथ देखा है. क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर भी आखिरी समय स्ट्रगल कर रहे थे. उनके भी संन्यास की बातें उठने लगीं थीं. लेकिन उस खिलाड़ी के जैसे हर किसी के नसीब पर वैसी विदाई नसीब नहीं होती.

विश्व कप 2019 में लोगों ने अनुमान लगाया था कि लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर टीम इंडिया विश्व कप उठाएगी और एम एस धोनी की विदाई भी उसी तरह होगी जैसे 2011 में मुंबई के वानखेड़े मैदान पर सचिन तेंदुलकर की हुई थी. लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. भारत की आकांक्षाओं को न्यूजीलैंड से मुकम्मल नहीं होने दिया और भारत को सेमीफाइनल में ही हार कर टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता देखना पड़ा. विश्व कप के दौरान पूरी टीम अस्त-व्यस्त दिखी. धोनी को लेकर सवाल उठते रहे. कहा जाने लगा कि धोनी को अब मैनेजमेंट ढो रहा है, सच यो ये था कि धोनी को टीम में जगह उनके खेल को लेकर नहीं था बल्कि मैदान में उनके अनुभवों को लेकर था. इंग्लैंड के साथ मैच हारने के बाद भी धोनी के ऊपर सवाल उठे. सवाल तभी भी उठे जब न्यूजीलैंड के खिलाफ धोनी का रन बनाने के औसत 50 से भी कम का होने लगा. ऐसा लगने लगा था कि हेलीकॉप्टर शॉट्स खेलने वाला ये बल्लेबाज आज एक-एक रन में स्ट्रगल कर रहा है. धोनी क्रीज पर जम तो जाते थे लेकिन वो बड़े शॉट्स नहीं खेल पा रहे थे. सेमीफाइऩल में न्यूजीलैंड के खिलाफ मुकाबले में रवींद्र जडेजा की पारी जब तक चल रही थी जब तक धोनी की बल्लेबाजी पर कोई ज्यादा गौर नहीं कर रहा था लेकिन उसके बाद धोनी का खेल वाकई जीत वाला नहीं था.

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धोनी को संन्यास लेना चाहिए या नहीं ये उऩका निजी फैसला है लेकिन टीम मैनेंजमेंट को ये सोचना चाहिए कि धोनी से रिटायरमेंट की बात करें और उनसे पूछें कि उनका क्या प्लान है. भारत के विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने भी खुलासा किया था कि चयनकर्ताओं ने उनसे कोई भी बात नहीं कि और सीधे टीम से निकाल दिया गया. ऐसा ही गौतम गंभीर के साथ भी हुआ.

भारतीय टीम वेस्टइंडीज के दौरे पर है जहां पर टीम दो टेस्ट, दो टी20 और तीन वनडे खेलने है. दौरा पूरा भी हो गया है. केवल एक टेस्ट मैच खेला जा रहा है. यहां पर भी धोनी का चयन नहीं किया गया. बाद में चयनकर्ताओं की तरफ से ये कहा गया कि धोनी ने इस दौरे के लिए अपने आपको अनुप्लब्ध बताया था. लेकिन सच्चाई यही है कि धोनी को टीम मे जगह ही नहीं दी गई थी. धोनी पैरा-कमांडो की ट्रेनिंग के लिए कश्मीर चले गए. वहां वो आर्मी के साथ ट्रेनिंग करते रहे और सोशल मीडिया में कई वीडियो उनके आते रहे जिसमें वो वॉलीबॉल खेलते दिखे कहीं पर वो एक्सरसाइज करते दिखे.

वेस्टइंडीज दौरे के बाद भारतीय क्रिकेट टीम का चयन दक्षित अफ्रीका के खिलाफ होने वाले टी-20 के लिए किया गया. उसमे भी धोनी का चयन नहीं किया गया. यहां भी चयनकर्ताओं का वहीं घिसा पिटा बयान आया कि धोनी उपलब्ध नहीं है. जबकि यहां भी सच्चाई छिपाई गई. अब धोनी को लेकर कहा जा रहा है कि उनको टीम की चिंता है इसलिए वो संन्यास नहीं ले रहे. मतलब कि धोनी को लगता है कि अभी तक उनके जगह पर कोई परफेक्ट खिलाड़ी नहीं आया इसलिए वो संन्यास नहीं आया. लेकिन धोनी को और टीम दोनों को एक दूसरे के बगैर रहने की आदत डालती होगी. इस बात में कोई शक नहीं है कि धोनी महान खिलाड़ी है लेकिन मुझे याद सुनील गावस्कर की एक बात याद आती है उन्होंने कहा था कि आपको तब संन्यास ले लेना चाहिए जब लोग ये कहने लगें कि ये संन्यास कब लेगा. मसलन की धोनी को अब खुद संन्यास की घोषणा कर देनी चाहिए.

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धोनी के मन में क्या है ये तो महज धोनी ही जानते हैं लेकिन मेरे अनुसार धोनी टी-20 विश्व कप के बाद संन्यास की घोषणा जरुर करेंगे. धोनी हमेशा से चौंकाने वाले फैसले लेते रहे हैं. जब उन्होंने कप्तानी छोड़ी थी तभी भी चौंका दिया था उसके बाद क्रिकेट के मैदान पर भी उनके कई निर्णय चौंकाने वाले होते हैं. फिलहाल वक्त यही कह रहा है कि धोनी को संन्यास ने लेना चाहिए.

रोजर फेडरर को पहले ही सेट में मात देने वाले सुमित नांगल के बारे में जानिए,

क्रिकेट भारत की आत्मा में बसता है. ये बात सच है लेकिन क्रिकेट के अलावा बाकी खेलों में भी अब भारतीय तिरंगा लहराने लगा है. क्रिकेट विश्व कप में भारतीय टीम की हार ने करोड़ों खेल प्रेमियों का दिल तोड़ दिया था. उस हार के सदमें में कई क्रिकेट प्रेमियों ने खाना भी नहीं खाया था. लेकिन बीते एक पखवाड़ा में भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे विश्व में अपना दमखम दिखाया है. पहले भारत की स्टार शटलर पीवी सिंधु ने विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल लाकर हिंदुस्तान को गौरन्वांवित किया, उसके बाद युवा टेनिस खिलाड़ी सुमित नागल ने जो किया वो अपने आपने में एक चौंकाने वाला है.

अक्सर खिलाड़ी की वाह-वाही तब होती है जब वो मैच जीत जाता है लेकिन सुमित नांगल के साथ ऐसा नहीं हुआ. सुमित नांगल मैच हार भी गए फिर भी उनको पूरे देश की तमाम बड़ी हस्तियों से शाबासी मिली. हरियाणा के झज्जर जिले में जन्म लेने वाले 22 वर्षीय नांगल का डेब्यू मैच ही रोजर फेडरर के साथ पड़ गया. अब आप समझ ही गए होंगे कि किसी का डेब्यू मैच हो उसके सामने वो खिलाड़ी हो जिसको इस खेल का महान खिलाड़ी कहा जाता हो तो फिर उस खिलाड़ी की सांसे तेज होना तो लाजिमी है लेकिन नांगल की सांसे तेज नहीं हुईं बल्कि टेनिस बैट से निकलने वाले शॉट्स तेज हो गए.

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साल के चौथे ग्रैंड स्लैम यूएस ओपन के पहले ही राउंड में सुमित का सामना टेनिस जगत के दिग्गज रोजर फेडरर से हुआ. मंगलवार को न्यूयॉर्क के आर्थर ऐश स्टेडियम में 22 साल के जोशिले क्वालिफायर सुमित नागल ने 38 साल के तजुर्बेकार फेडरर को जोरदार टक्कर दी. 20 बार ग्रैंड स्लैम विजेता रोजर फेडरर ने नागल को हल्के में ले लिया. फेडरर को यही गलती भारी पड़ गई. नांगल ने फेडरर को पहले सेट में 6-4 से हराकर अपनी ग्रांड ओपनिंग दी. फेडरर को समझ आ गया था कि ये कोई साधारण खिलाड़ी नहीं है. अंत में स्विस स्टार फेडरर ने नागल को 4-6, 6-1, 6-2, 6-4 से मात दी.

हरियाणा को खिलाड़ियों की धरती भी कहा जाता है. ओलंपिक में पदक जीतने वाले ज्यादातर खिलाड़ी इसी प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं. सुमित नागल भी हरियाणा के झज्जर जिले के जैतपुर गांव से हैं. परिवार में किसी की खेलों में जरा भी दिलचस्पी नहीं रही. उनके फौजी पिता सुरेश नागल को टेनिस में रुचि थी. सुमित को उनके पिता ने ही टेनिस खिलाड़ी बनाने के बारे में सोचा. सुरेश को एक रोज ख्याल आया कि उनका बेटा भी तो दूसरे खिलाड़ियों की तरह खेलता नजर आ सकता है. हरियाणा के सुमित नागल ने आठ साल की उम्र में टेनिस खेलना शुरू किया था.

सुमित के परिवार को उनकी ट्रेनिंग के लिए दिल्ली शिफ्ट होना पड़ा. 2010 में अपोलो टायर वालों की टैलेंट सर्च प्रतियोगिता में सुमित चुन लिए गए. दो साल तक उन्होंने स्पॉन्सर किया. सुमित ने महेश भूपति की एकेडमी में भी ट्रेनिंग ली थी. पिछले नौ साल से वो कनाडा, स्पेन, जर्मनी में ट्रेनिंग कर चुके हैं.

आंकड़ों के हिसाब से अगर भारत में टेनिस खिलाड़ियों की बात करें तो सानिया मिर्जा, लिएंडर पेस, महेश भूपति, रोहन बोपन्ना, सोमदेव देववर्मन, युकी भांबरी, अंकिता रैना इनका नाम ही सबसे ज्यादा लिया जाता है लेकिन अब इस लिस्ट में सुमित नांगल का नाम जुड़ गया. लिएंडर पेस भारत के शानदार टेनिस खिलाड़ी हैं. युगल और मिश्रित युगल में इनके नाम कुल चौदह ग्रैंड स्लैम खिताब है. डेविस कप में भारत के लिए उनका योगदान अकल्पनीय है. 1996 में अटलांटिक ओलंपिक खेलों में इन्होने कांस्य पदक जीता था. इसके बाद नंबर आता है महेश भूपति का. महेश भूपति के नाम चार ग्रैंड स्लैम युगल खिताब है. टेनिस खिलाडी लिएंडर के साथ उनकी जोड़ी शानदार रही है. महेश ने दोहा में 2006 में लिएंडर पेस के साथ एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता था. भूपति डेविस कप में भी भारत के लिए भाग ले चुके हैं. भूपति ने कुल 46 डेविस कप खेले हैं जिनमे से 28 में जीत और 18 हार हाथ लगी.

वह भारतीय टेनिस के इतिहास में सर्वोच्च महिला टेनिस खिलाड़ियों में से एक हैं सानिया मिर्जा. इन्होने तीन प्रमुख मिश्रित युगल जीते 2009 ऑस्ट्रेलियन ओपन, 2012 फ्रेंच ओपन और 2014 में अमेरिकी ओपन. 2014 के एशियाई खेलों में सानिया ने साकेत मिरेनी के साथ मिश्रित युगल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता और महिलाओं की डबल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था. अक्टूबर 2014 में डब्ल्यूटीए फाइनल में जीत हासिल की थी.

सोमदेव देवबर्मन ने 2002 में टेनिस खेलना शुरू कर दिया था और 2004 में एफ 2 कोलकाता चैम्पियनशिप में जीत के साथ सुर्खियों में आये. सोमदेव ने राष्ट्रमंडल खेल 2010 में एकल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था साथ ही एशियाई खेल 2010 में एकल और डबल्स इवेंट में भी स्वर्ण पदक हासिल किया.

इन सबके अलावा हमको दो नाम कभी नहीं भूलना चाहिए. जिन्होंने भारत को टेनिस से अवगत कराया. या यूं कहें कि भारत में टेनिस के जन्मदाता ही यही खिलाड़ी रहे हैं. पहला नाम आता है रमेश कृष्णन भारत के प्रसिद्ध टेनिस प्रशिक्षक और पूर्व टेनिस खिलाड़ी हैं. 1970 के दशक के अंत में जूनियर विंबल्डन और फ्रेंच ओपन में पुरुष एकल का खिताब जीता था. वर्ष 1980 के दशक में तीन ग्रैंड स्लैम के क्वार्टर फ़ाइनल तक पहुंचे और डेविस कप टीम में भी फ़ाइनल तक पहुंचे थे. रमेश कृष्णन 2007 में भारत के डैविस कप कप्तान रहे थे. इनके पिता रामनाथन कृष्णन थे जोकि भारत के प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी रहे हैं. इन्हें 1998 में भारत सरकार ने ‘पद्मश्री’ सम्मान से सम्मानित किया था.

दूसरा नाम आता है विजय अमृतराज. अमृतराज के छोटे भाई आनंद और अशोक देश का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले खिलाड़ी थे. विजय ने अपना पहला ग्रांड प्रिक्स 1970 में खेला था। 1973 में वह विंबलडन और यू.एस. ओपन के क्वॉर्टर फाइनल तक पहुंचे, जहाँ उन्हें यान कोडेस और केन रोजवैल जैसे दिग्गज ही हरा सके.

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