अनसोशल बनाता सोशल मीडिया

दुनिया की आबादी 8.02 अरब के पार हो चुकी है. इन में से 5.3 अरब इंटरनैट यूजर्स हैं. सोशल मीडिया यूजर्स की संख्या सब से ज्यादा चीन में है. लेकिन एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में भारत में 1 अरब स्मार्टफोन यूजर्स होंगे. पूरी दुनिया में सोशल मीडिया पर सब से ज्यादा समय इंडिया वाले बिताते हैं. अपनी भूख, प्यास, नींद और रिश्तों को दरकिनार कर भारतीय लोग इस बाबत अमेरिका और चीन को पीछे छोड़ चुके हैं.

दुनिया में इंडियंस के सब से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट्स

रिसर्च फर्म ‘रेडसियर’ के मुताबिक, इंडियन यूजर्स हर दिन कम से कम 7.3 घंटे अपने स्मार्टफोन पर बिताते हैं. इन में से अधिकतर टाइम वे सोशल मीडिया पर बिताते हैं, जबकि अमेरिकन यूजर्स का औसतन स्क्रीन टाइम 7.1 घंटे है और चीनी यूजर्स 5.3 घंटे सोशल मीडिया पर बिताते हैं. अमेरिका और ब्रिटेन में एक इंसान के औसतन 7 सोशल मीडिया अकाउंट हैं, जबकि एक भारतीय कम से कम 11 सोशल मीडिया अकाउंट्स पर मौजूद है.

रिसर्च जर्नल पबमेड के मुताबिक, करीब 70 फीसदी लोग बिस्तर पर सोने जाने के बाद भी मोबाइल पर नजरें गड़ाए रहते हैं और सोशल मीडिया पर व्यस्त रहते हैं.

एक स्टडी के अनुसार, एक अमेरिकन व्यक्ति औसतन हर साढ़े 6 मिनट पर अपना फोन चैक करता है और पूरे दिन में तकरीबन डेढ़ 150 बार. वहीं भारतीय दिन में 4.9 घंटे यानी तकरीबन 5 घंटे अपने फोन पर बिताते हैं. यानी, महीने के डेढ़ सौ घंटे और साल के 1,800 घंटे.

जर्नल पबमेड की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर ज्यादा ऐक्टिव रहने वाले लोगों में नींद की कमी रहती है और जिस का असर उन के मैंटल हैल्थ पर पड़ता है. व्यक्ति में डिप्रैशन और भूलने की बीमारी देखी जा सकती है. साइबर बुलिंग, अफवाहें, नैगेटिव कमैंट्स और गंदी गालियां यूजर्स को डिप्रैशन में ला देती हैं. एक सर्वे के मुताबिक, करीब 60 फीसदी यूजर्स औनलाइन एब्यूज के शिकार होते हैं.

मोबाइल के चलते बिगड़ रहे हैं रिश्ते

साइकैट्रिस्ट डा. राजीव मेहता का कहना है कि सोशल साइट्स पर बिजी रहने वाले लोगों की सामाजिक जिंदगी खत्म सी होने लगती है. आप घर वालों और दोस्तों से बात नहीं करते. आपसी रिश्ते खराब होने लगते हैं. इमोशनल जुड़ाव नहीं रहता. रिश्तों में शेयरिंग, केयरिंग नहीं रहती. व्यक्ति का दायरा सीमित हो जाता है और मन में कुंठाएं घर कर जाती हैं. यहां तक कि नए कपल भी सोशल साइट्स पर इतने खोए रहते हैं कि उन की पर्सनल लाइफ डिस्टर्ब हो जाती है जो एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर की वजह बनती है.

साहिल और प्रियंका की शादी अभी पिछले साल ही हुई थी. दोनों की अरेंज मैरिज थी.  साहिल को सोशल मीडिया की जबरदस्त लत थी. औफिस से आ कर भी वह सोशल मीडिया पर एक्टिव रहता, जिस से प्रियंका को बहुत चिढ़ होती. उस का कहना था कि पूरे दिन वह घर पर अकेली होती है. कोई बात करने वाला भी नहीं होता उस के साथ. तो कम से कम रात में तो वह उसे थोड़ा समय दे. लेकिन पत्नी की बात अनसुनी कर वह मोबाइल पर रील देखदेख कर हंसता रहता. उस के कानों में अपनी पत्नी की बात घुसती ही नहीं थी.

एक दिन गुस्से में प्रियंका ने भी कह दिया कि जब मोबाइल से इतना ही प्यार है तो उस से शादी क्यों की? उस पर साहिल ने भी कह दिया, ‘हां है, तो क्या कर लोगी?’ और इसी बात पर दोनों में ?ागड़े शुरू हो गए. आज प्रियंका अपने मायके में है और उन के बीच तलाक का मामला चल रहा है.

बात पार्टनर से न कर के, लोग फोन पर नजरें टिकाए होते हैं. पार्टनर कुछ बोल रहा है लेकिन आप फोन पर गेम खेलने और रील देखने में व्यस्त हैं. सामने बैठे व्यक्ति से कोई कनैक्शन नहीं और मीलों दूर बैठे किसी इंसान से फोन पर चैंटिंग चल रही है.

डा. रौबर्ट्स लिखते हैं कि उन की स्टडी में शामिल 92 फीसदी लोगों ने कहा कि पार्टनर की हर वक्त मोबाइल फोन चैक करने की आदत उन के रिश्तों को खराब कर रही है. स्टडी में शामिल लगभग सभी लोगों ने कहा कि पार्टनर का फोन हर वक्त उन के हाथों में ही होता है.

रिसर्चगेट की एक और स्टडी कहती है कि मोबाइल फोन एडिक्शन के कारण कपल के बीच तनाव और दूरियां पैदा हो रही हैं. इस स्टडी में शामिल 70 फीसदी लोगों का कहना था कि मोबाइल फोन के कारण वे अपने पार्टनर से साथ पूरी तरह से कनैक्ट नहीं कर पाते क्योंकि वह 100 फीसदी कभी मौजूद ही नहीं होता.

सिर्फ बड़े ही नहीं, बल्कि हम युवा भी सोशल मीडिया पर ऐक्टिव रहते हैं जिस का असर हमारे रिश्ते पर तो पड़ता ही है, हमारे मैंटल हैल्थ पर भी यह बुरा असर डालता है.

मेरी एक दोस्त की 19 साल की बहन यामिनी का सपना डाक्टर बनने का था. उस के पेरैंट्स ने उस का एडमिशन एक अच्छे मैडिकल कालेज में करवाया भी. मगर उस का मन अब पढ़ाई में बिलकुल नहीं लगता. वह देररात तक मोबाइल पर लगी रहती है. अपनी फोटो क्लिक कर सोशल मीडिया पर अपलोड करती है. जब उस के पेरैंट्स उस से कुछ कहते हैं या सम?ाते हैं तो वह उन से बहस पर उतारू हो जाती है और ?ागड़ने लगती है. अपनी किताबें उठा कर फेंकने लगती है कि उसे कोई डाक्टर नहीं बनना. नहीं चाहिए उसे कुछ.

कई बार उस ने खुद को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है जिस के कारण उस के पेरैंट्स डरेडरे रहते हैं. मोबाइल पर ज्यादा ऐक्टिव रहने के कारण वह चिड़चिड़ी हो गई है. उस का बिहेवियर खराब हो गया है. वह घर में किसी से ज्यादा बात भी नहीं करती.

जब हमें अपेक्षा के अनुरूप अपने पोस्ट किए फोटो पर लाइक्स और कमैंट्स नहीं मिलते हैं तब हम अवसाद में चले जाते हैं. पढ़ाई में अरुचि होने लगती है. हमें कुछ भी अच्छा नहीं लगता. सोशल मीडिया पर ऐप्स के जरिए अपनी तसवीरें फिल्टर कर लोग यह बताने की कोशिश करते हैं कि वे अपनी जिंदगी में बहुत खुशहाल हैं. लेकिन जब उन के उसी फोटो पर लाइक्स और कमैंट्स नहीं आते तो वे तनाव और जलन के शिकार हो कर मैंटल हैल्थ खो बैठते हैं.

साइकैट्रिस्ट का कहना है कि फिल्टर्स फन के लिए तो ठीक है लेकिन जब इन का इस्तेमाल ?ाठे दिखावे के लिए होने लगे तो यह समस्या की वजह बन जाता है. फोटो, वीडियो और पोस्ट पर आने वाले कमैंट्स, लाइक्स और शेयर यूजर के लिए रिवार्ड पौइंट्स की तरह काम करते हैं. इस से लोगों को अजीब सी खुशी मिलती है जिस से ब्रेन का रिवार्ड सैंटर एक्टिवेट हो जाता है और यही कारण है कि यूजर सोशल साइट्स पर ज्यादा समय बिताते हैं. उन्हें लगता है कि उन की पोस्ट लोगों को पसंद आएगी और खूब वायरल होगी. लेकिन जब ऐसा नहीं होता तब वे तनाव और डिप्रैशन के शिकार होने लगते हैं.

देररात तक जागने से पैदा हो रही है समस्या

विशेषज्ञों का कहना है कि मस्तिष्क में रेटिकुलर एक्टिवेटिंग सिस्टम होता है जिस में कई तरह के न्यूरोट्रांसमीटर निकलते हैं जो सरकाडियम रिद्म को संतुलित करते हैं. देररात तक जागने से ये असुंलित हो जाते हैं जो हमारी दिनचर्या को प्रभावित करते हैं.

स्टैनफोर्ड मैडिकल स्कूल के न्यूरोसाइंस डिपार्टमैंट की एक रिसर्च के मुताबिक, मोबाइल फोन हमारे मस्तिष्क के डोपामाइन सैंटर्स को एक्टिव करता है. यही कारण है कि हम कोई जरूरी काम न होने पर भी हर थोड़ी देर में अपना फोन उठा लेते हैं. अगर फोन पास न हो तो हमें घबराहट और बेचैनी होने लगती है.

नशे की तरह सोशल मीडिया

सोशल मीडिया की लत लोगों के सिर चढ़ कर बोल रही है. एक फोन हाथ में न हो तो हम बेचैन हो उठते हैं. सोशल मीडिया हमारे जीवन में ज्यादा ही दखल देने लगा है. आज लोग वर्चुअल दुनिया में इतने ज्यादा खो गए हैं कि अपनों से और दुनियादारी से दूर हो गए हैं, लेकिन बता दें कि वक्त पड़ने पर यह वर्चुअल दुनिया आप का साथ नहीं देने वाली.

सोशल मीडिया एक नशे की तरह बन गया है जिस के बिना लोगों का दिन शुरू नहीं होता. लेकिन यह शौक स्वास्थ्य के लिए खतरा बनता जा रहा है जो न केवल लोगों के शारीरिक, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा रहा है. रिसर्च के अनुसार, वीडियो गेम खेलने के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले हैडफोन, ईयरबड और म्यूजिक वैन्यू का प्रभाव कानों में पड़ता है जो लोगों की सुनने की क्षमता को कम कर रहा है.

सोशल मीडिया का नैगेटिव असर इतना खतरनाक हो जाता है कि लोग जान देने के बारे में सोचने लगते हैं. सोशल मीडिया के सुसाइड कनैक्शन पर जब जर्नल औफ यूथ एंड एडोलसैंस ने रिसर्च की तो डरावने वाले फैक्ट सामने आए. इस में पता चला कि सोशल मीडिया पर कोई जितना ज्यादा वक्त बिताता है, उस के खुद को नुकसान पहुंचाने का खतरा उतना ही बढ़ जाता है.

सोशल मीडिया के दुष्परिणाम

-इस की लत से छुटकारा मिलना मुश्किल होता है.

-इस से उदासी बढ़ती है और सेहत इग्नोर होती है.

-खुद में हीनभावना पैदा होती है.

-लोगों की हैल्थ पर बुरा असर पड़ता है.

-रिश्तों में दूरियां पैदा होती हैं.

यूनिवर्सिटी औफ पेन्सिलवेनिया की एक स्टडी के मुताबिक, लोग अपना अकेलापन दूर करने के लिए सोशल मीडिया की तरफ भागते हैं. लेकिन वे जितना ज्यादा वक्त सोशल मीडिया पर बिताते हैं, उन का अकेलापन उतना ही बढ़ता जाता है. स्टडी में यह भी पाया गया कि जैसे ही लोग सोशल मीडिया यूज करना कम कर देते हैं, उन का अकेलापन कम होने लगता है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यूएचओ ) के एक हालिया अध्ययन में सामने आया है कि लंबे समय तक तेज शोर में रहने से सुनने की क्षमता इस कदर प्रभावित हो रही है कि उस से उबरने की संभावना भी घट रही है. इस के साथ ही, इन वीडियो गेमर्स में टिनिटस की समस्या भी देखी गई है. टिनिटस से पीडि़तों को अकसर कान में रहरह कर घंटी, सीटी और सनसनाहट जैसी आवाजें सुनाई पड़ती हैं.

ब्रिटिश मैडिकल जर्नल (बीएमजे) पब्लिक हैल्थ में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, सोशल मीडिया और वीडियो गेमर्स अकसर कई घंटों तक तेज आवाज में मोबाइल देखते हैं. इस से ध्वनि का स्तर कानों के लिए निर्धारित सुरक्षित सीमा के करीब या उस से अधिक होता है.

शोधकर्ताओं ने उत्तर अमेरिका, यूरोप, दक्षिणपूर्व एशिया, आस्ट्रेलिया और एशिया के 9 देशों में 53,833 लोगों पर किए गए

14 अध्ययनों की समीक्षा की है. रिसर्च में पाया गया कि मोबाइल में ध्वनि का औसत स्तर 43.2 डेसिबल (डीबी) से 80-89 डीबी के बीच था. गेमिंग की अवधि घटा कर जोखिम कम किया जा सकता है.

शोध के मुताबिक, दुनियाभर में वीडियो गेम्स आज खाली समय को भरने का बेहद लोकप्रिय साधन बन गए हैं. कहना गलत न होगा कि तकनीकी का इस्तेमाल आज पढ़ाई के लिए कम और मनोरंजन के लिए ज्यादा होने लगा है. एक अनुमान के अनुसार, 2022 के दौरान दुनियाभर में इन गेमर्स का आंकड़ा 300 करोड़ से ज्यादा था.

वयस्क के लिए कितनी ध्वनि सीमा निर्धारित

रिपोर्ट के मुताबिक, सप्ताह में किसी वयस्क को 86 डेसिबल (डीबी ) शोर में केवल 10 घंटे, 90 डेसिबल में 4 घंटे, 92 डेसिबल में ढाई घंटे, 95 डेसिबल में एक घंटा और 98 डेसिबल में 38 मिनट से ज्यादा नहीं रहना चाहिए. यदि वे इस से ज्यादा समय इस शोर में रहते हैं तो उन के सुनने की क्षमता प्रभावित होने की ज्यादा आशंका है.

युवा ज्यादा खेलते हैं वीडियो गेम

तीन अलगअलग अध्ययनों में देखा गया है कि लड़कियों की तुलना में लड़के ज्यादा वीडियो गेम खेलते हैं. एक अध्ययन में सामने आया है कि अमेरिका में एक करोड़ से ज्यादा लोग वीडियो या कंप्यूटर गेम खेलते समय तेज या बहुत तेज शोर के संपर्क में आ सकते हैं.

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 60 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग 30 फीसदी लोगों में सुनने की क्षमता कम होने लगती है. हालांकि, जिस प्रकार से कम उम्र के लोगों में भी इस का जोखिम देखा जा रहा है वह काफी चिंताजनक है.

कोरोनाकाल में जब लोग एकदूसरे से दूर थे, अकेले थे, तब यही एक फोन ही सहारा था मन बहलाने के लिए और एकदूसरे को आपस में जोड़े रखने के लिए. बच्चे भी औनलाइन पढ़ाई करते थे, आज भी करते हैं. लेकिन अब लोग सोशल मीडिया में आकंठ तक डूब चुके हैं.

कहते हैं, सुविधाएं अपने साथ समस्याएं भी ले कर आती हैं. आज मोबाइल और इंटरनैट की वजह से इंसान की जिंदगी आसान तो हुई है लेकिन दूसरी तरफ बड़ी समस्याएं भी पैदा हुई हैं. कुछ समस्याएं आर्थिक नुकसान पहुंचा रही हैं तो कई जानलेवा बन रही हैं. इंटरनैट के बढ़ते प्रसार के साथ साइबर क्राइम में तेजी से इजाफा हुआ है. इस की चपेट में पुरुष महिला, बच्चे, युवा सब हैं. भारत समेत समूचे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में डिजिटलाइजेशन जिस तेजी से बढ़ रहा है, उसी तेजी से साइबर अपराध बढ़ने की भी आशंका है.

दूर बैठे अपराधी अलगअलग तरकीबों के जरिए लोगों को लूट रहे हैं. कई बार धोखे से तो कई बार सीनाजोरी करते हुए ब्लैकमेल कर के. सैक्सटोर्शन भी उन में से एक है. इस की वजह से बहुत लोगों ने अपनी जान दे दी.

पिछले दोतीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अकेले मुंबई में सैक्सटोर्शन के केस में तेजी से उछाल आया है. साल 2021 में सैक्सटोर्शन के 54 केस दर्ज हुए थे, जिन में से 24 ऐसे थे जिन में पीडि़त से 10 लाख से ज्यादा पैसे वसूले गए थे. साल 2022 में सैक्सटोर्शन के कुल 77 केस दर्ज हुए थे. इन 77 मामलों में से 22 में पीडि़तों से आरोपियों ने 10 लाख से ज्यादा पैसे वसूले थे. 71 वर्षीय मुंबई के एक व्यापारी से सैक्सटोर्शन रैकेट चलाने वालों ने 51 लाख रुपए वसूले थे. इस तरह गैंग के लोग सोशल मीडिया के जरिए लोगों को टारगेट कर के अपना शिकार बनाते हैं.

पिछले सालभर में गुजरात में सैक्सटोर्शन के मामलों में शिकायतों की संख्या एक साल में ही 85 फीसदी तक देखी गई. देश के दूसरे हिस्सों में भी सैक्सटोर्शन के मामले आते रहे हैं.

कैसे फंसते हैं लोग

सैक्सटोर्शन रैकेट चलाने वाले गैंग में कई लोग एकसाथ मिल कर काम करते हैं. इन में महिलाएं और लड़कियां भी होती हैं. ये लोग सोशल मीडिया के जरिए अपना शिकार खोजते हैं. जो लोग हाईप्रोफाइल दिखते हैं, उन को गैंग की लड़कियां फेसबुक पर फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजती हैं.

इस के बाद धीरेधीरे वे उन से संपर्क बढ़ाती हैं. उस के बाद मोबाइल नंबर ले कर उन से बात करने लगती हैं. मौका देख कर व्हाट्सऐप कौल के जरिए अश्लील बातचीत भी करती हैं. इस तरह से सामने वाला

उस के जाल में फंस जाता है. दुख की बात तो यह है कि बच्चे और युवा भी इस

गंदे खेल का शिकार बन रहे हैं. इसलिए पेरैंट्स को चाहिए कि वे बच्चों को गाइड करें और खुद के स्क्रीन टाइम को भी नियंत्रित करें.

सैक्सटोर्शन 2 शब्दों से मिल कर बना है. ‘सैक्स’ और ‘एक्सटोर्शन’. यह एक साइबर क्राइम है, जिस का शिकार कोई भी बन सकता है. साइबर क्राइम से बचने के लिए सब से पहला मंत्र यही है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम से कम किया जाए और इसे इस्तेमाल करते समय सावधानी बरती जाए क्योंकि ‘सावधानी हटी तो दुर्घटना घटी.’

सोशल मीडिया से कैसे बनाएं दूरी

डा. मैक्सवेल लिखते हैं कि इस लत को छोड़ना सिगरेट, शराब छोड़ने जितना चुनौतीपूर्ण काम है. इस से छुटकारा पाने के लिए सब से पहले जरूरी है लत से नजात पाने का इरादा और यह इरादा तब तक नहीं हो सकता जब तक हमें यह न सम?ा आ जाए कि यह लत भले ही हमारा थोड़ा मनोरंजन करती है पर लौंग टर्म में यह हमारी हैल्थ और रिलेशन, दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है.

एक्सपर्ट का कहना है कि सोशल मीडिया के बुरे असर से बचने के लिए सब से पहले अपनी प्राथमिकताएं तय करना जरूरी है. अकेलापन और डिप्रैशन से बचना है तो सोशल मीडिया का इस्तेमाल कम से कम करना होगा.

रोज 30 मिनट से कम इन ऐप्स को यूज करने से फोमो के साथ ही दूसरे बुरे असर से भी बच सकते हैं. गिल्फर्ड जर्नल की रिपोर्ट भी यही बताती है कि सोशल मीडिया से दूरी बना कर उदासी, डिप्रैशन और अकेलेपन से नजात पाई जा सकती है.

सोशल मीडिया पर एंटी ट्रांसजैंडर कंटैंट से मचा बवाल, किस की जिम्मेदारी

मीडिया में एलजीबीटीक्यू कम्युनिटी के राइट्स की वकालत करने वाली ग्रुप ‘ग्लाड’ ने अपनी रिपोर्ट में फेसबुक, इंस्टाग्राम और थ्रेड्स सहित मेटा के टौप सोशल प्लेटफौर्मों पर एंटी ट्रांसकंटैंट के बारे में बताया. यह रिपोर्ट जून 2023 से ले कर मार्च 2024 के बीच की है.

रिपोर्ट में बताया गया कि इन प्लेटफौर्म्स पर ट्रांस विरोधी चीजें डाली जाती हैं और मेटा पौलिसी के बावजूद प्लेटफौर्म इस पर कोई कार्यवाही नहीं करता. इस में एंटी ट्रांस स्लर, प्रोपगंडा, डीह्यूउमनाइजिंग स्टीरियोटाइप, लेबलिंग ट्रांस, सेक्सुअल प्रीडेटर्स जैसा कंटैंट देखने को मिला है. विज्ञापन वाली सरकार गूगल और मेटा में सोशल मीडिया विज्ञापनों में बढ़ोतरी देखी गई है.

गूगल विज्ञापन पारदर्शिता केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी, 2024 से 19 मार्च, 2024 के बीच पौलिटिकल विज्ञापनों पर कुल 101.28 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं. जिस में से अकेले भाजपा ने सोशल मीडिया कैम्पेन के लिए 31 करोड़ रुपए खर्च किए हैं. इस के अलावा मेटा एड लाइब्रेरी के अनुसार भाजपा ने पिछले 90 दिनों में 1198 ऐड के लिए 7 करोड़ के लगभग पैसा खर्च किए हैं. कोचिंग का धंधा जेईई की तैयारी के लिए फेमस कोचिंग इंस्टिट्यूट फिटजी अपने विज्ञापन के चलते विवाद में घिर गया है.

यह विवाद सोशल मीडिया पर खूब गरमाया है. दरअसल फिटजी ने एक विज्ञापन बनाया जिस में उस ने एक स्टूडैंट को पौइंट करते दिखाया कि अगर वह फिटजी से ही अपनी पढ़ाई जारी रखती बजाय किसी और इंस्टिट्यूट जाने के तो ज्यादा स्कोर करती. इस विज्ञापन के बाद सोशल मीडिया ने फिटजी को आड़े हाथों ले लिया. एलन मस्क पर मुकदमा सोशल मीडिया प्लेटफौर्म एक्स, जो पहले ट्विटर के नाम से जाना जाता था, के पूर्व सीईओ पराग अग्रवाल और एक्स के कई एक्स औफिशियल्स ने एलन मस्क के खिलाफ मुकदमा दायर कर दिया है.

मीडिया रिपोर्ट्स में ऐसा दावा किया गया है कि यह मुकदमा नौकरी से निकाले जाने के बाद हर्जाने के तौर पर दिए जाने वाले वेतन को ले कर है. पराग अग्रवाल के अलावा एलन मस्क के खिलाफ मुकदमा करने वाले 4 टौप एक्स औफिशियल भी हैं. मुकदमा लगभग 12.8 करोड़ के भुगतान को ले कर है. इन्फ्लुएंसर्स की रेज बैटिंग हाल के वर्षों में, इंटरनैट वर्ल्ड से ‘रेज बैटिंग’ शब्द ज्यादा सुनाई देने लगा है. सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के लिए यह जल्दी फेमस होने का मीडियम बन गया है. रेज बैटिंग तब होती है जब कोई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स जानबू?ा कर यूजर्स का ध्यान पाने के लिए ऐसे पोस्ट डालता है जिस से उसे नैगेटिव रैस्पौंस मिलें. यह काम इन्फ्लुएंसर्स खूब करते हैं वे क्रिंज वीडियो बनाते हैं.

यह टिकटौक, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफौर्म्स में देखा जा रहा है. सोशल मीडिया लती टीनएजर्स 26 सितंबर से 23 अक्तूबर, 2023 तक किए गए प्यू रिसर्च के सर्वे के अनुसार लगभग तीनचौथाई टीनएजर्स तब ज्यादा खुश रहते हैं जब वे अपने फोन के बिना रहते हैं. इस दौरान वे खुद को शांत और खुश महसूस करते हैं. रिसर्च में यह भी पता चला है कि टीनएजर्स यह जानते हुए भी कि वे अपनी स्क्रीन टाइम के साथ कोम्प्रोमाइज करने को तैयार नहीं है.

पार्टटाइम आईएएस फुलटाइम यूट्यूबर दीपक रावत स्टाइलिश, हैंडसम

आईएएस अधिकारी दीपक रावत अपनी यूट्यूब वीडियोज को ले कर अकसर चर्चाओं में रहते हैं. वीडियो में वे सिंघम स्टाइल में छोटी दुकानों/खुम्टियों पर छापा मारते दिखाई देते हैं. आईएएस दीपक रावत देखनेदिखाने के खेल में कहीं फंस तो नहीं गए हैं? ‘हाथ कंगन को आरसी क्या, पढ़ेलिखे को फारसी क्या’. यह कहावत आईएएस अधिकारी दीपक रावत पर फिट बैठती है क्योंकि काम भले उन का चूंचूं का मुरब्बा हो पर यूट्यूब पर हवा ऐसी बना के रखते हैं कि फिल्मी सिंघम भी पानी न मांगे. देखनेदिखाने के खेल में वे माहिर हो चुके हैं.

इस के लिए उन्होंने यूट्यूब को चुना है, जिस के शौर्ट वीडियोज इफरात से यहांवहां तैरते रहते हैं. जब देश के बड़ेबड़े नेता खुद को दिखाने की होड़ में लगे हों तो यह आईएएस क्यों न लगें भला. साफसाफ कहने का मतलब यह है कि अगर कोई काम होता है तो भला दिखने से कौन रोक सकता है पर अगर दिखाने के लिए ही काम हो तो क्या ही भला? ‘नायक’ मूवी में अनिल कपूर मीडिया के साथ रेड (छापा) मारने निकल जाता है.

गड़बड़ी मिलने पर फैसला लेने में कोई देरी नहीं, झट मंगनी पट ब्याह. ऐसा सा कुछ रियल लाइफ का दीपक रावत दिखाते हैं पर समस्या यह कि वह रील लाइफ के अनिल कपूर जैसे ही नकली लगते हैं. यूट्यूबर रेड स्पैशलिस्ट उत्तराखंड के कुमाऊं जोन का कमिशनर दीपक रावत 2007 बैच के आईएएस अफसर हैं. 1977 मसूरी, उत्तराखंड में जन्म हुआ उन का. अभी 46 साल के हैं. शुरुआती पढ़ाई उत्तराखंड से करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी और जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से अपनी एमफिल तक की पढ़ाई पूरी की. पद की तरह लंबा कद, क्लीन शेव, आंखों पर चश्मा, सरकारी गाड़ी और नायक जैसी पर्सनैलिटी दीपक को बाकी अधिकारियों से अलग तो करती है.

आईएएस का पद बड़ा है. सरकार की व्यवस्था बनाए रखने में इन का इंपोर्टेंट रोल होता है. बाकायदा सरकार से मोटी सैलरी मिलती है. लाइफ सिक्योरिटी के साथ पावर भी हाथ आता है. कुछ लोग इस पावर का इस्तेमाल मदारी के बंदर के हाथ में रखे पाउडर की तरह करते हैं जिसे कभी अपने माथे पे, गाल पर या फिर अपने पेट पर मलते हैं. दीपक रावत यूट्यूब की रेड (छापा) स्पैशलिस्ट हैं.

उन की अधिकतर वीडियोज छोटे दुकानदारों, फुटपाथियों पर रेड डालने की दिखाई देती हैं, मानो वे यूट्यूब पर ही रेड डाल रहे हों. रेड के समय मीडिया की जरूरत नहीं पड़ती पर उन का अपना यूट्यूब चैनल है. चैनल में लगभग 43 लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर्स हैं. वीडियोज में रावत की अलगअलग जगह मारी गई रेड्स हैं. दीपक रावत पाजामा, जैकेट, सिर पर गरम टोपी और पैरों में चप्पल पहने एक हवलदार के साथ दिखाई देते हैं. उन की तरारी आंखें कनखियों से कैमरों को ही देखती हैं, शायद प्रधानमंत्री मोदी उन के प्रेरणास्रोत हों.

यह भी हो सकता है कि अब अपनी वीडियो में उन्होंने काला चश्मा पहनने का रिवाज इसलिए शुरू कर दिया हो ताकि लोगों की नजर कैमरा देखते उन की आंखों पर न पड़े. उन की एक वीडियो में 2 लड़के हैं जो बुलेट बाइक चला कर कहीं जा रहे हैं, लेकिन हैलमेट नहीं लगाने के जुर्म में दीपक रावत के यूट्यूब अदालत में दिखाई देते हैं. रावत की स्टाइल फिल्म ‘नायक’ के अनिल कपूर जैसा ही है. ज्यादा किचकिच नहीं, बस कुछ सवाल जिस के ‘हां न’ में जवाब और फिर थोड़ा सा ज्ञान देने के बाद फैसला सुना दिया जाता है.

बुलेट वाले लड़के को सम झाया जाता है कि रोड ऐक्सिडैंट में 200 से ज्यादा लोग मर चुके हैं, इसलिए हैलमेट लगाया करो. सजा के तौर पर लाइसैंस 3 महीने के लिए रद्द करने के साथ बुलेट जब्त कर ली जाती है. ताकत के हिसाब से शिकंजा अब आप कहेंगे कि इस में गलत क्या है, गलती थी तो सजा मिलनी ही चाहिए. नहीं जी, गलती कुछ नहीं. गलती हलके चरित्र पर है. हाल ही में उन की एक वीडियो वायरल हुई जिस में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अधिकारियों की क्लास लगाते दिखाई देते हैं जैसे दीपक अपनी वीडियो में लगाते हैं. मामला सड़क के गड्ढों को ले कर होता है. अखबार में खबर आने के कारण मुख्यमंत्री गुस्से में होते हैं.

अधिकारियों से जब पूछा जाता है तो वे एकदूसरे पर टालने लगते हैं. जब दीपक से कहा जाता है तो दीपक कुछ कह नहीं पाते. बस, ‘जी सर, जी सर’ कह कर रह जाते हैं जैसे वीडियो में रेड के समय दीपक के सामने लोग करते दिखाई देते हैं. इसे देख कर लगता है कि 43 लाख फौलोअर्स वाले यह सिंघम भीगी बिल्ली बन गए हैं. जाहिर सी बात है, मुख्यमंत्री के पास आईएएस से ज्यादा पावर होती है, इसलिए उन से पंगा दीपक को मुश्किल में डाल सकता था. वरना यह तेजतर्रार आईएएस सड़क पर गड्ढों के कारण मौत का आंकड़ा और सरकार के बजट में रोड सैफ्टी को ले कर कम होता बजट भी, मुख्यमंत्री को जरूर बता ही सकता था. पर नहीं, इस में प्रशासन की बदनामी होती.

धामी और रावत भी पिसते. इसलिए रावत अपनी ताकत के हिसाब से ही रेड डालते हैं, वहां पर ही जहां उन का बस चल सके. गूगल सर्च की जरूरत वैसे रावत सिर्फ सिंघम वाले काम ही नहीं करते बल्कि वह अपने सब्सक्राइबर्स के मनोरंजन के लिए भी वीडियोज बनाते रहते हैं. कैलाश पर्वत और लैंसडाउन की भी वीडियो बनाए हैं. जगहजगह घूमते हुए भी बनाते हैं. जैसे, वे दिखाते हैं, ‘उत्तराखंड के एक पहाड़ पर पादक पत्थर है (पैर के निशान)’. अब इसे दिखाने के लिए उन के साथ कई लोगों के पादक भी साथ जाते हैं. इस पैर के निशान को राम से जोड़ दिया गया और दीपक इसे ‘वैरी इंटरैस्टिंग’ कहते मोहित हो जाते हैं.

सवाल यह कि ‘वैरी इंटरैस्टिंग’ किस लिए, इस ऊलजलूल बात के लिए? इतना पढ़ेलिखे आईएएस अधिकारी होने के बावजूद दीपक रावत अपने एक वीडियो में एक मंदिर में पानी में तैर रहे पत्थर को चमत्कारी बताते हैं. वे उस पत्थर को चमत्कारी बताते हैं जिस पर जय श्रीराम लिखा है. इस से तो यही साबित होता है कि ओल्ड राजिंदर नगर या मुखर्जी नगर की कोचिंग फैक्ट्रियों में आईएएस तो बनाए जाते होंगे पर तार्किक नागरिक नहीं.

दीपक रावत में इतना दम भी नहीं है कि वे कह सकें कि यह चमत्कारी पत्थर नहीं, बल्कि प्यूमिस पत्थर है. वैसे विज्ञान हमें इस पत्थर के बारे में बहुतकुछ बताता है लेकिन रावत का चैनल आईएएस के डंडे और जादुई बातों से भरा है. विज्ञान ने इस पत्थर को प्यूमिस नाम दिया है. जब ज्वालामुखी से बहुत अधिक मात्रा में पानी और गैसों वाला लावा निकलता है तो सूख कर पत्थर का आकार ले लेता है. इस पत्थर में बहुत सारे छेद होते हैं और इस का घनत्व ज्यादा होने के कारण यह पानी में तैरने लगता है. क्या रावत को इस बात का पता नहीं था. चलो मान लिया कि नहीं भी हो सकता है. लेकिन क्या किसी ने टोका नहीं. उन के पास एप्पल का फोन है.

आजकल दफ्तरों में सरकारी वाईफाई होता है, थोड़ा सा गूगल सर्च ही कर लेते. चार ज्ञान की बातें अपनी वीडियो के माध्यम से अपने फौलोअर्स को भी दे देते जो पत्थर को चमत्कारी मान कर पंडों को दानदक्षिणा दे आते हैं पर यहां दीपक रावत की गलती नहीं, धर्म और चमत्कार के नाम पर जब देश में नेता बेवकूफ बना ही रहे हैं तो व्यूज बटोरने में क्या गलत है? फिल्मी सिंघम पर्सनैलिटी रावत के वीडियो की एक खासीयत है. इस में पूरी रेड नहीं होती है बल्कि रेड का एक कटाछंटा हिस्सा होता है.

जाहिर सी बात है, सब्सक्राबर्स ज्यादा लंबा वीडियो देखने में इंटरैस्ट नहीं लेंगे और ‘वैरी इंटरैस्टिंग’ वाली बात डिसइंटरैस्ंिटग हो जाएगी. इसलिए वीडियो में रावत के डायलौग जैसी लाइनों को रखा जाता है, जैसे ‘जितना पूछा जाए उतना ही जवाब दो’, ‘खबरदार, कभी ऐसा दोबारा किया तो’, ‘सील कर दो’. रावत अपने यूट्यूब चैनल का नायक हैं तो जाहिर है कि उन्हीं के हिसाब से ही तो डायलौग काटेछांटे जाएंगे. 2018 नैनीताल की एक घटना तो याद होगी, जिस में सबइंस्पैक्टर गगनदीप सिंह ने मौब (भीड़) से एक मुसलिम लड़के को बचाया था.

लड़का अपनी गर्लफ्रैंड से मिलने मंदिर में जाता है. इस की खबर लोगों को लग जाती है. उस के बाद लोग उस लड़के को जान से मारने को तैयार हो गए थे लेकिन गगनदीप सिंह ने अपनी जान पर खेल कर उस लड़के की जान बचाई. इस घटना के बाद मीडिया के पूछने पर गगनदीप ने कहा था कि वह सिर्फ अपनी ड्यूटी कर रहा था. रातोंरात गगनदीप कई लोगों का स्टार बन गया और ऐसा करने के लिए उसे अपने साथ कैमरामैन रखने की जरूरत नहीं पड़ी थी क्योंकि अच्छाई कोई दिखाने की बात नहीं बल्कि आप की रोजमर्रा की आदत होती है. बतौर आईएएस, रावत की सैलरी अच्छी है तो सिर्फ यह कहना कि ये सब पैसिव इनकम के लिए किया जा रहा है, गलत होगा.

वे अपनी पहचान जिले तक सीमित नहीं रखना चाहते बल्कि फेमस होना चाहते हैं. जिस से उन्हें दूरदूर के लोग भी जानें और पहचानने लग जाएं. लेकिन वे ऐसा अपने काम के जरिए नहीं बल्कि यूट्यूब के जरिए करना चाहते हैं. देखनेदिखाने की होड़ पिछले दिनों नरेंद्र मोदी ने गुजरात के पंचकुई तट पर अरब सागर की गहराई में जा कर प्राचीन द्वारका के भव्य दर्शन किए. प्राचीन समय से ले कर आज तक गरीबी व अन्याय की भव्यता वैसे भी बनी ही हुई है, द्वारका की भव्यता से मन खुश कर लेना ही बढि़या है. इस से समुद्र की गहराई तो सम झ आएगी ही, साथ में, वोट मिलेंगे बोनस में. आज दीपक रावत की पहचान उन के आईएएस पद पर रह कर किए गए काम की वजह से कम, उन के काम के समय की वीडियो शूटिंग से ज्यादा है.

टीवीएफ को ‘एस्पिरेंट्स’ सीरीज के अगले सीजन के लिए रावत को ही बतौर मुख्य अभिनेता रख लेना चाहिए क्योंकि रावत को अब कैमरे का भी अच्छा ज्ञान हो गया है, स्टाइल तो बढ़िया है ही. किसी भी प्रशासनिक अधिकारी की ड्यूटी है कि वे अपने इलाके में एक बेहतर सिस्टम बनाएं जो आम नागरिकों के लिए आसान और अच्छा हो. लेकिन यह जनाब सिस्टम की गलती से होने वाली समस्याओं को अपने यूट्यूब वीडियो में इस्तेमाल करते हैं. लोगों को दंड देने वाली वीडियो में मजा आता है, जैसे प्रशासन का बुलडोजर देखने के व्यूज सोशल मीडिया पर वैसे ही ढेरों रहते हैं, रावत भी उसी दंड का इस्तेमाल कर खूब व्यूज बटोर रहे हैं.

लवर औन मोबाइल औफ

एक तरफ सोशल मीडिया पर रिलेशनशिप आसानी से बनने लगे हैं वहीं दूसरी तरफ इसी के चलते टूट भी रहे हैं. हद से ज्यादा सोशल मीडिया में घुसे रहना रिश्तों में खटास लाता है. जरूरी है कि पार्टनर के साथ रहते सोशल मीडिया को म्यूट कर दिया जाए.

ब्लैक शौर्ट ड्रैस पहनी 20 साल की सारा आधे घंटे से अपने मोबाइल फोन में लगी हुई है. कभी वह टेबल पर सजी डिश की फोटो खींच रही है तो कभी वैन्यू का बूमरैंग बना रही है, कभी सैल्फी क्लिक कर रही है. इस के साथ वह तुरंत ही इन्हें अपनी इंस्टा स्टोरी, व्हाट्सऐप और स्नैपचैट पर लगा रही है. यह हाल उस का तब है जब वह पहले से ही विशेष से इस वैन्यू पर अपनी कई रील बनवा चुकी है.

विशेष काफी देर से यह सब देख रहा है. लेकिन कुछ बोल नहीं रहा. वह बस इंतजार कर रहा है कि कब सारा अपना फोन साइड में रखे और उस से बातें करे. लेकिन सारा को तो फुरसत ही नहीं है सोशल मीडिया से.

हद तो तब हो गई जब सारा इंस्ट्राग्राम पर लाइव चली गई. वह भी तब जब वह अपने पार्टनर के साथ डेट पर आई है. कौफी, पिज्जा, पास्ता सब ठंडा हो गया लेकिन सारा के हाथ से फोन नहीं छूटा. यह बात विशेष को बिलकुल भी अच्छी नहीं लगी. उस का पेशेंस अब जवाब दे चुका है.

विशेष सारा से भौंहें चढ़ाते हुए कहता है, ‘‘यह हमारी डेट है, तुम्हारा कोई व्लौग वीडियो नहीं, जो तुम फोन में ही लगी रहो. मैं भी चाहूं तो फोन में लग सकता हूं, बूमरैंग बना सकता हूं पर मुझे तुम्हारे साथ वक्त बिताना है. तुम्हारी वाइब एंजौय करनी है. तुम से बातें करनी हैं. तुम्हारा हाथ पकड़ कर बैठना है. लेकिन तुम अपना मोबाइल छोड़ो तो न. मुझे तो ऐसा लग रहा है कि तुम मेरे साथ डेट पर नहीं आईं बल्कि अपने फोन के साथ आई हो.’’

यह सब सुन कर सारा ने कहा, ‘‘वेट न विशेष, अभी मैं इंस्टा पर लाइव हूं. तुम थोड़ा वेट नहीं कर सकते.’’

यह सुन कर विशेष ने थोड़ी देर इंतजार किया, फिर वहां से उठ कर चल दिया. इस के बावजूद सारा ने अपना इंस्टा लाइव बंद नहीं किया. 5 मिनट बाद जब वह असल दुनिया में आई तो देखा विशेष सामने नहीं था. उस ने उसे कौल किया.

गुस्से में विशेष ने उस की कौल नहीं उठाई. सारा ने कई बार कौल किया लेकिन इस का कोई फायदा नहीं हुआ.

कई दिन हो गए विशेष और सारा के बीच में कोई बात नहीं हुई. न सारा ने अपने बिहेवियर के लिए सौरी कहा, न ही विशेष ने पैचअप करने की कोशिश की. फिर एक दिन विशेष को अपने म्यूचुअल फ्रैंड से पता चला कि सारा किसी और को डेट कर रही है और उसे वह लड़का सोशल मीडिया में ही मिला था.

सारा का विशेष से दूसरा ब्रेकअप था. उस के दोनों ब्रेकअप होने की वजह सोशल मीडिया पर हद से ज्यादा समय बिताना था. रील्स की लत उसे ऐसी लगी है कि बातें करतेकरते वह रील भी देखती रहती है. वह हर वक्त सोशल मीडिया में ही घुसी रहती थी, फिर चाहे वह किसी रोमांटिक डेट पर आई हो या गोवा के बीच पर सनराइज का मजा ले रही हो. 24 घंटे उस के हाथ में मोबाइल ही होता था.

सोशल मीडिया की यह लत हर दूसरे यंगस्टर को है. मैट्रो सिटी में रहने वालों के रिश्ते भी सोशल मीडिया पर बन कर टूट रहे हैं. सारा और विशेष का उदाहरण ही है, जहां उन के रिलेशनशिप टूटने या उस में मनमुटाव आने का कारण सोशल मीडिया व उन का मोबाइल फोन का ज्यादा यूज करना है.

दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन करने वाली 19 साल की ईशा कहती है, ‘‘यह जो दौर चल रहा है वह दिखावट का दौर है. यंगस्टर्स पर्सनल लाइफ सोशल मीडिया पर परोसना पसंद करते हैं. असल में इन्हें लाइक, शेयर और सब्सक्राइब की लत लगी है और इसे पाने के लिए ये हौस्पिटल में बीमार पड़ी अपने परिवार की सदस्या की रील बनाने से भी नहीं हिचकिचाते.

यंगस्टर्स सोशल मीडिया का इतना दीवाना है कि वह अपने हर मूमैंट को कैप्चर करना चाहता है, चाहे वह पार्टनर के साथ प्राइवेट मूमैंट ही क्यों न हो. वह जल्दी से इन्हें इंस्टाग्राम फेसबुक, स्नैपचैट, व्हाट्सऐप जैसे सोशल साइट्स पर अपलोड करना चाहता है.

इन में ऐसे भी कुछ लोग हैं जो रियल लाइफ से ज्यादा रील लाइफ में जीते हैं. दिन में 10 बार अपना स्टेटस अपडेट करते हैं. इतने से भी मन नहीं भरता तो दूसरे के व्हाट्सऐप स्टेटस देखते रहते हैं. कभी उन की इंस्टाग्राम स्टोरी तो कभी रील देखने लगते हैं. यही है अब यंगस्टर्स की लाइफ. क्या पर्सनल क्या प्राइवेट, सब सोशल मीडिया पर देखा जा सकता है.

सोशल मीडिया पर ऐक्टिव

लोग कितना वक्त सोशल मीडिया पर बिताते हैं, वर्ल्ड स्टेटिक्स नाम के एक ट्विटर अकाउंट पर इस की जानकारी दी गई. इस रिपोर्ट के मुताबिक, नाइजीरिया सब से ऊपर है, जहां लोग करीब साढ़े 4 घंटे सोशल मीडिया पर ऐक्टिव रहते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल मीडिया पर सब से कम जापान के लोग ऐक्टिव रहते हैं. जापान के लोग सिर्फ 49 मिनट ही सोशल मीडिया पर बिताते हैं. यही कारण है कि वे टैक्नोलौजी में सब से आगे हैं. अगर जापान टैक्नोलौजी से अपना हाथ खींच ले तो दुनिया से 16 फीसदी टैक्नोलौजी गायब हो जाए. वहीं स्वीडन में यूजर्स करीब 1 घंटे 11 मिनट हर दिन सोशल मीडिया पर बिताते हैं.

अगर भारत की बात करें तो करीब 30 देशों की इस लिस्ट में भारत का 14वां स्थान है. यहां एक यूजर एक दिन में करीब 2 घंटे 44 मिनट सोशल मीडिया पर खर्च करता है. भारत में 3 में से 1 व्यक्ति सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता है. अमेरिका में यह 2 घंटे 11 मिनट है. चीन में 2 घंटे 1 मिनट है. इस के अलावा कनाडा, आस्ट्रेलिया, स्पेन, डेनमार्क और यूके में लोग करीब 2 घंटे सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं.

पिछले कुछ सालों से सोशल मीडिया हमारी लाइफ, वर्क और रिलेशन पर इफैक्ट कर रही है. जहां एक ओर सोशल मीडिया से रिलेशनशिप बनते हैं तो बहुत से टूटते भी हैं.

सोशल मीडिया से रिलेशनशिप पर असर

सोशल मीडिया का ज्यादा यूज एक रिलेशनशिप को कितना इफैक्ट करता है, यह एक सर्वे में बताया गया. इस सर्वे में 2 हजार लोगों की प्राइवेट लाइफ, कम्युनिकेशन और ट्रस्ट का आंकलन किया गया और यह जाना गया कि वे एक कपल्स के तौर पर औनलाइन कितनी सामग्री साझा करते हैं.

सर्वे में 52 फीसदी कपल ने बताया कि वे वीक में 3 से ज्यादा बार अपने रिलेशनशिप की फोटोज, वीडियोज औनलाइन पोस्ट करते हैं. इस में हैरान करने वाली बात यह थी कि इन में से सिर्फ 10 फीसदी लोगों ने बताया कि वे अपने रिश्ते से ‘बहुत खुश’ हैं.

हर कोई सोशल मीडिया पर अपने रोमांटिक मूमैंट को दिखाना पसंद करता है, खासकर अपने वैकेशन को. लेकिन सर्वे से यह पता चला कि जो कपल यह दिखाने के लिए सोशल मीडिया पर बारबार पोस्ट करते हैं कि वे अपने पार्टनर की कितनी सराहना करते हैं.

सोशल मीडिया के जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने से रिलेशनशिप पर बुरा असर पड़ता है. जो कपल्स सोशल मीडिया पर अपनी प्राइवेट लाइफ ज्यादा शेयर करते हैं, उन के रिलेशन पर इस का नैगेटिव इफैक्ट पड़ता है. इस से कपल के बीच ट्रस्ट की कमी होती है. इस से शाई पार्टनर भी अनकंफर्टेबल फील करता है.

सोशल मीडिया पर ज्यादा समय बिताने के कारण आप अपने पार्टनर को समय नहीं दे पाते, जिस से आपस में कम्युनिकेशन गैप हो जाता है. अपने रिलेशन को मजबूत बनाने के लिए एकदूसरे से बातचीत करते रहना बहुत जरूरी है. जो कपल अपने पार्टनर को औनलाइन दिखाना पसंद करते हैं, वे अपने रिलेशन में ज्यादा खुश नहीं होते हैं. इस के कई कारण होते हैं.

सोशल मीडिया पर बारबार पोस्ट करना, स्पैशली कपल सैल्फी, दरअसल दूसरों का अटैंशन पाने का एक तरीका होता है. जो कपल अपने रिलेशनशिप में खुश नहीं हैं, वे अपने रिलेशन में महसूस होने वाली कमी की भरपाई के लिए ज्यादा से ज्यादा कपल पोस्ट का सहारा लेते हैं.

सोशल मीडिया पर लगातार दूसरे कपल्स के खुशी के पलों को देखने से कई कपल्स में जलन और अपने रिश्ते में स्पार्क की कमी की भावना पैदा होती है. लगातार हैप्पी मूमैंट्स और रोमांटिक मूमैंट्स को पोस्ट करने से कपल्स पर एक आइडियल इमेज पेश करने का प्रैशर आ जाता है, जो स्ट्रैसफुल और नकली हो सकता है. यह आइडियल कपल दिखने का प्रैशर सोशल मीडिया पर ज्यादा ऐक्टिव रहने का एक कारण है.

जो कपल अपने रिश्तों में कम सिक्योर फील करते हैं, वे सोशल मीडिया पर ‘हैप्पी रिलेशनशिप’ की इमेज पेश करने की कोशिश करते रहते हैं. इन पोस्ट के जरिए वे खुद को यह समझाने की कोशिश करते हैं कि सबकुछ ठीक है. सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल करने से रिश्ते के भीतर मीनिंगफुल कम्युनिकेशन और किसी बहस को सौल्व कर के तरीके तक पहुंचने पर लगने वाला समय काफी ज्यादा हो सकता है.

अगर कोई अपने पार्टनर के साथ बात करने के बजाय इंस्टाग्राम फीड को स्क्रौल करने में ज्यादा इंटरैस्ट दिखाता है तो इस से आप के रिलेशन पर नैगेटिव इफैक्ट पड़ता है. जितना ज्यादा टाइम आप अपने फोन पर बिताएंगे, उतना ही ज्यादा आप अपने पार्टनर के साथ बिताए गए हैप्पी मूमैंट और मौजमस्ती के छोटेछोटे मूमैंट्स को मिस कर देंगे.

सोशल मीडिया पर कई लोग अपने इमोशंस, अपनी पर्सनल लाइफ में चल रही प्रौब्लम्स को शेयर करते हैं. अपने रिलेशनशिप की छोटीछोटी बातें शेयर करना सही नहीं है. इस से पार्टनर हर्ट हो सकता है. बेहतर यह है कि सोशल मीडिया को बहस की जगह न बनाएं बल्कि आपस में बात कर मुद्दों को सुलझाएं.

लिवइन का साइड इफैक्ट, कैसे फंस गए ओए इंदौरी

इंदौर के एमआईजी थाने में 19 दिसंबर, 2023 को एक रेप केस दर्ज कराया गया. यह केस धारा 376 के तहत दर्ज किया गया और आरोपी बनाया गया हाल के समय में फेमस यूट्यूबर ओए इंदौरी को, जो अपने इंदौरी ऐक्सैंट के लिए फेमस है.

वैसे ओए इंदौरी का असली नाम रोबिन अग्रवाल जिंदल है जो कि इंदौर का रहने वाला है, इसलिए इस ने अपने यूट्यूब चैनल का नाम भी ‘ओए इंदौरी – अब हंसेगा इंडिया’ रखा है. उस पर अब तक 2,784,323,079 व्यूज हैं. इस ने अपना यूट्यूब चैनल 2017 में शुरू किया था लेकिन कोविड में जब सब अपनेअपने घरों में बंद थे तो लोगों ने खाली बैठेबैठे यूट्यूब का खूब इस्तेमाल किया. उसी समय ओए इंदौरी फेमस हो गया.

ओए इंदौरी के वीडियोज में कौमेडी और प्रैंक देखने को मिलता है. उस का एक इंस्टाग्राम अकाउंट भी है, जिस की आईडी है श4द्गट्ठद्बठ्ठस्रशह्म्द्ब. जिस पर उस के 7.4 मिलियन फौलोअर्स हैं. इस अकाउंट पर उस ने अब तक 1,413 पोस्ट की हैं. उस के इंस्टाग्राम बायो में लिखा है- ‘आई विल मेक यू लाफ.’ हालांकि जिस तरह के कंटैंट वह बनाता था उस पर हंसना तो दूर, उसे झेलना भी एक टास्क जैसा है.

ओए इंदौरी उर्फ रोबिन सोशल मीडिया पर सामान्य स्तर के व्यूअर्स के बीच फेमस चेहरा है. साल 2019 में कलर्स टीवी के एक शो में ओए इंदौरी ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी. बिना टैलेंट के बस फौलोअर्स के दम पर लोगों को भी मुकाम मिलता है, यह इस का सटीक उदाहरण ओए इंदौरी से समझ जा सकता है. उस शो को कौमेडियन भारती सिंह और उस के पति हर्ष लिम्बाचिया ने होस्ट किया था.

असल में विवाद तब खड़ा हुआ जब एक पीड़िता ने ओए इंदौरी उर्फ रोबिन अग्रवाल जिंदल पर रेप का केस दर्ज कराया. शिकायतकर्ता युवती खुद को तलाकशुदा बता रही है. उस का कहना है कि ओए इंदौरी ने उसे शादी का झांसा दे कर उस से शारीरिक संबंध बनाए हैं और बाद में किसी और लड़की से सगाई कर ली.

युवती ने कहा कि वह जब इंदौर आई थी तो उसे घर ढूंढ़ने में परेशानी हो रही थी. उस वक्त ओए इंदौरी ने उस की हैल्प की थी. बस, तभी से वे दोनों अच्छे दोस्त बन गए थे. उस के बाद ओए इंदौरी ने उस से अपने दिल की बात कही. वे दोनों लिवइन रिलेशनशिप में आ गए. उस दौरान उन के बीच फिजिकल रिलेशन बने. तब ओए इंदौरी ने उस से कहा था कि वह उस से ही शादी करेगा.

लेकिन 23 नंवबर को ओए इंदौरी की इंस्टाग्राम पोस्ट से पता चला कि उस की इंगेजमैंट किसी और से हो चुकी है. इस के बाद युवती ने पुलिस स्टेशन में केस दर्ज कराया. इस से पहले भी युवती ने मार्च के महीने में भी रिपोर्ट दर्ज कराई थी. लेकिन आपसी समझाता होने के बाद युवती ने केस वापस ले लिया. अब चूंकि ओए इंदौरी ने अपना वादा नहीं निभाया तो युवती फिर से पुलिस स्टेशन पहुंच गई. ओए इंदौरी के खिलाफ केस दर्ज कराने वाली युवती एक प्राइवेट कंपनी में जौब करती है.

गौरतलब है कि रोबिन ने कुछ समय पहले ही इंदौर के एक बड़े होटल में सगाई की है. उस की मंगेतर भी फेमस सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर है. उस का नाम अलिशा राजपूत है. उस के इंस्टाग्राम पर 7.31 मिलियन फौलोअर्स हैं. इस रिंग सैरेमनी में सोशल मीडिया की कई हस्तियां शामिल हुई थीं.

ओए इंदौरी पर लगे रेप आरोप के बारे में एमआईजी थाने के एसआई सचिन आर्य ने बताया कि रोबिन जिंदल पुत्र मिथिलेश अग्रवाल निवासी महालक्ष्मी नगर के खिलाफ शादी का झांसा दे कर रेप करने का मामला दर्ज किया गया है. केस दर्ज होने के बाद ओए इंदौरी फरार है. फिलहाल हम उस तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. केस दर्ज होने के बाद ओए इंदौरी ने अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है.

इस केस के बाद ओए इंदौरी बुरी तरह फंस गया है. साथ ही, उस का फेम भी खतरे में आ गया है. वैसे भी, किसी इन्फ्लुएंसर की लाइफ मुश्किल ही 6 महीने से ऊपर टिकती है. ओए इंदौरी जैसे किसी नामचीन इन्फ्लुएंसर के साथ यह होना अपवाद नहीं है. सोशल मीडिया की चमक, लोगों के बीच फेमस होना और खुद को बड़ा आदमी समझाने की भूल ऐसे लफड़ों में फंसा ही डालती है. लिवइन गलत नहीं पर संबंध किस से कैसे निभते हैं, यह समझ होना जरूरी है.

आजकल यंगस्टर्स बड़ी संख्या में लिव इनरिलेशनशिप को अपना रहे हैं. लिवइन रिलेशनशिप में रहते हुए आप ऐसे ही किसी केस में न फंसें, इस के लिए जरूरी है कि यंगस्टर्स को लिवइन रिलेशनशिप के बारे में सही जानकारी हो.

लिवइन के कंसीक्वेंसेस

लिवइन रिलेशनशिप का मतलब ‘शादी जैसा रिश्ता’ होता है. जब एक अनमैरिड लड़का और लड़की मैरिड कपल की तरह एक ही छत के नीचे रहते हैं तो उसे लिवइन रिलेशनशिप माना जाता है. लेकिन भारत के कानून में लिवइन रिलेशनशिप को ढंग से परिभाषित नहीं किया गया है. यहां लिवइन रिलेशनशिप को 2 अनमैरिड लोगों के बीच ‘नेचर औफ मैरिज’ के तौर पर रखा जाता है.

लिवइन रिलेशनशिप में रह रही महिला भी घरेलू हिंसा कानून का इस्तेमाल कर सकती है. सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, ‘‘अगर कोई महिला किसी आदमी के साथ लिवइन में रहती है और महिला यह नहीं जानती कि आदमी पहले से मैरिड है तो इस सिचुएशन में दोनों पार्टनर्स के साथ रहने को ‘डोमैस्टिक रिलेशनशिप’ माना जाएगा.’’ ऐसी हालत में महिला को घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत गुजारा भत्ता लेने का अधिकार दिया गया है.

2011 में एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि लिवइन रिलेशनशिप में रहने वाली महिला को सीआरपीसी की धारा 125 के तहत भरणपोषण पाने का अधिकार है और महिला को यह कह कर मना नहीं किया जा सकता कि उस ने कोई वैध शादी नहीं की थी.

अगर कोई लड़का और लड़की लिवइन में रहना चाहते हैं तो दोनों का अनमैरिड होना जरूरी है. अगर किसी पार्टनर की पहले शादी हुई है तो उस के डायवोर्स के पेपर जारी होने के बाद ही वह कानूनी रूप से लिवइन में रह सकता है वरना यह व्यभिचार में आएगा.

भारत में लिवइन रिलेशनशिप का कल्चर भी बढ़ रहा है. 2018 में एक सर्वे हुआ था. इस सर्वे में शामिल 80 फीसदी लोगों ने लिवइन रिलेशनशिप को सपोर्ट किया था. इन में से 26 फीसदी ने कहा था कि अगर मौका मिला तो वे भी लिवइन रिलेशन में रहेंगे.

सुप्रीम कोर्ट ने लता वर्सेस यूपी राज्य, एआईआर 2006 एससी 2522 में यह माना कि एक एडल्ट महिला अपनी पसंद के किसी भी व्यक्ति से शादी करने या अपनी पसंद के किसी भी व्यक्ति के साथ रहने के लिए आजाद थी. जैसेजैसे लोग लिवइन रिलेशनशिप को प्रायोरिटी देने लगे, रेप के झूठे केसेस बढ़ते चले गए. कई केसेस में ब्रेकअप के बाद महिला पार्टनर रेप की झठी एफआईआर फाइल कराती है.

बात करें अगर कानून की, तो भारतीय दंड संहिता 1860 के सैक्शन 375 के तहत रेप को डिफाइन किया गया है. इस में कहा गया है कि इन सिचुएशंस में माना जाएगा कि एक पुरुष ने एक महिला का ‘रेप’ किया है-

  1. अगर किसी महिला से शादी का झांसा दे कर संबंध बनाए गए हों.
  2. जब महिला के साथ उस की सहमति के बिना सैक्सुअल रिलेशन बनाया जाए.
  3. जब महिला फिजिकल रिलेशन बनाने के लिए इस डर के साथ सहमति दे कि ऐसा न करने पर उसे या उस के किसी प्रिय व्यक्ति को चोट या जान का खतरा है.
  4. जब ऐसा करने की सहमति देते समय महिला मन से अस्वस्थ हो या किसी भी तरह मानसिक रूप से बीमार हो.
  5. जब महिला नशे की वजह से या किसी अन्य मूर्खतापूर्ण या हानिकारक चीज की वजह से सैक्सुअल रिलेशन बनाने की प्रकृति और रिजल्ट्स को समझने में अक्षम है और सहमति देती है.
  6. जब महिला 16 साल की उम्र से कम है फिर चाहे सैक्स मरजी से हो या बिना मरजी के.

ओए इंदौरी के केस में देखा जाए तो शादी का झांसा दे कर फिजिकल रिलेशन बनाने के चार्जेज लग सकते हैं. अब देखना यह होगा कि इस मामले के आखिर में क्या होता है. सारे परिणाम इस सुझाव की तरफ इशारा करते हैं कि अगर आप लिवइन रिलेशनशिप में हैं या आने की सोच रहे हैं तो आप को इस के सारे कानून और अधिकार पता हों ताकि बाद में आप किसी पचड़े में न पड़ें.

सोशल मीडिया : भरम फैलाती खबरों का दलदल

Social News in Hindi: एक नया इसथान (स्थान) गांव-गढ़ौत, तहसील-मैहर, जिला-सतना में नया ऊदगम (उद्गम). 13 वर्ष की कन्या से जो भी अर्जी करता है उस की मनोकामना पूरी होती है. 21 लोगों को फैलाओ आप की भी मनोकामना पूरी होगी. प्रेम से बोलो जय माता दी. ह्वाट्सऐप पर यह मैसेज 29 जुलाई, 2018 की देर रात भोपाल के एक ग्रुप में किसी ने डाला था जिस के साथ एक लड़की की तसवीर भी थी जिस में उस के बाल बिखरे हुए थे और वह गले में फूलों की माला पहने हुए थी. लड़की के माथे पर एक लंबा सा टीका भी लगा था. लड़की के पीछे किसी देवीदेवता की फोटो थी जिस से लग रहा था मानो वह कोई सिद्ध है.

इस मैसेज में मनोकामना पूरी करने के लिए लोगों को गढ़ौत गांव नहीं बुलाया गया था बल्कि मैसेज फौरवर्ड करने की सलाह दी गई थी जिसे कई लोगों ने किया भी और देखते ही देखते यह चमत्कारिक मैसेज कई ह्वाट्सऐप ग्रुपों में फैल गया.

यह और इस तरह के कई ऊटपटांग मैसेज आज के दौर की हकीकत बयान करते हैं कि लोग सोशल मीडिया की लत के चलते दिमाग से इतने पैदल हुए जा रहे हैं कि अपना भलाबुरा और सहीगलत सोच ही नहीं पाते हैं.

बात जहां तक किसी लड़की से अर्जी लगाने पर मनोकामना पूरी होने की थी तो यह लोगों को धर्म के नाम पर ठगने और बेवकूफ बनाने वाली बात थी जिस का मकसद इस मैसेज को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने का था.

विलाशक जमाना सोशल मीडिया का है लेकिन अफसोस की बात यह है कि यही सोशल मीडिया झूठी और भ्रामक खबरों का दलदल बनता जा रहा है जिस में रोजाना करोड़ों लोग धंसते जा रहे हैं.

एक और बानगी

ब्रेकिंग न्यूज- मुख्य चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित राजस्थान में विधानसभा चुनावों कि तारिखों का किया ऐलान. 15 दिसंबर से होगा पहले चरण का मतदान. कुल 4 चरणों में होगा मतदान.

15 दिसंबर, 5 जनवरी, 7 जनवरी, 20 जनवरी

4 चरणों में होंगे विधानसभा चुनाव

जून के महीने से वायरल हो रहे इस मैसेज का कोई सिरपैर नहीं है. जिस ने भी इसे बनाया होगा उसे ‘कि’ और ‘की’ की मात्रा लगाने की भी तमीज नहीं है. तारीख शब्द में भी ‘रि’ की मात्रा गलत है. यह मैसेज भी झूठा था, यह 4 महीनों में हर किसी को समझ आ चुका है लेकिन इस के बाद भी लोग इसे वायरल किए जा रहे हैं तो इस के पीछे छिपी मंशा सिर्फ लोगों को बेवकूफ बना कर मजा लूटने की ही है.

चुनाव वाले मैसेज और 13 साल की लड़की वाले मैसेज में फर्क सिर्फ इतना है कि चुनाव वाला मैसेज वायरल करने से सीधे किसी को कोई नुकसान नहीं हो रहा है लेकिन लड़की वाले मैसेज का मकसद दोहरा है. पहला लुत्फ उठाना और दूसरा धार्मिक अंधविश्वास को फैलाना.

दहशत फैलाते मैसेज

ऊपर के दोनों मैसेज जिन्हें खबर की शक्ल दे कर वायरल किया गया, वे बेमकसद नहीं थे. एक में खुदगर्जी भी थी, पर दूसरे में नहीं थी. यह आदमी की फितरत है कि उसे झूठी खबरें फैलाने में एक खास किस्म का सुख मिलता है फिर इस से किस का कैसा नुकसान होता है, यह झूठी खबरें फैलाने वाले नहीं सोचते.

लेकिन चिंता की बात वे खबरें भी हैं जो इस तरह बनाई और वायरल की जाती हैं कि जिन में 2 धर्मों, जातियों या संप्रदायों के बीच कटुता बढ़े. इस तरह की खबरें जाहिर हैं एक खास मकसद से एक खास तबके के लोग गढ़ते हैं जिन से दहशत फैलती है और माहौल भी बिगड़ता है.

एक वायरल मैसज में अकसर बताया जाता है कि रतलाम से राजस्थान होते हुए गायों से भरा एक ट्रक मुंबई या पाकिस्तान ले जाया जा रहा है. ट्रक ले जाने वाले मुसलमान हैं जो इन गायों को काटेंगे. यह हिंदू धर्म के  खिलाफ है. लिहाजा, गाय को माता मानने वाले लोग इस मैसेज को ज्यादा से ज्यादा इतना फौरवर्ड करें कि बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचे.

मैसेज के साथ गायों से भरा एक ट्रक भी अटैच होता है. मैसेज फैलाने के लिए मां की कसम भी दी जाती है.

ऐसे भड़काऊ मैसेज न केवल हिंदूमुसलमानों के बीच दरार डाल कर हिंसा फैलाते हैं बल्कि दहशत का माहौल भी बनाते हैं. कट्टरवादी बिना किसी जांचपड़ताल किए इन्हें सच मान लेते हैं और मैसेज आगे खिसका देते हैं.

गौहत्या और गौतस्करी को ले कर मौब लिंचिंग अब बेहद आम है जिस में अकसर मरने वाला मुसलमान या दलित ही होता है.

इस बहस से परे कोई यह नहीं सोचता कि बड़े पैमाने पर साजिश रची जा रही है और आम लोगों को धर्म और देवीदेवताओं की आड़ ले कर उकसाया जा रहा है. हमारी माता गाय को कोई कत्लखाने ले जाए यह किसी को गवारा नहीं होता. ये वही लोग होते हैं जिन्हें अपने महल्ले की गाय से कोई लगाव या उस के लिए श्रद्धा नहीं होती पर बात धर्म की आती है तो इन का खून खौल उठता है.

धर्म से इतर इस तरह की झूठी खबरों से कैसे लोगों को डराया जाता है इसे समझने के लिए 2 मैसेज देखना काफी है जो हर उस शख्स ने पढ़े होंगे जो सोशल मीडिया पर हैं.

काकड़ीघाट, अल्मोड़ा से भिखारी की शक्ल में 500 लोगों को मार कर कलेजे और किडनी निकाल रहे हैं. 6-7 लोग पकड़े भी गए हैं. जो पकड़े गए हैं उन्होंने कड़ी पूछताछ के बाद 500 लोगों को मारने की बात कबूली है. कृपया सावधान रहें. 15 से 20 लोगों की टोली आई है. उन के साथ बच्चे और लेडीज भी हैं और उन के पास हथियार भी हैं. आधी रात को वे किसी भी वक्त आते हैं और बच्चों के रोने की आवाज आती है.

यह मैसेज खबर जैसा लगता है इसलिए लोग दहशत में आ जाते हैं और यह नहीं सोच पाते कि 500 लोगों की हत्या हो गई और न्यूज चैनल, अखबार और पत्रिकाएं हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं. फिर यह सोचने की उम्मीद तो लोगों से करनी ही नहीं चाहिए कि किसी को हथियार से मार कर उस की किडनी या कलेजा निकाल भी लिया जाए तो वह किसी काम का नहीं रह जाता.

ऐसा ही एक और मैसेज देखें. ‘अलर्ट उत्तराखंड’ खासकर घरेलू महिलाओं से अनुरोध है कि किसी भी अजनबी जैसे कबाड़ी वाला, फेरी वाला या भिखारी कोई भी हो, उस के लिए दरवाजा न खोलें और न ही कोई बात करें. बस, हल्ला कर के भगा दें. गलती से भी ये शब्द न कहें, ‘अभी कोई घर में नहीं है, बाद में आना’ या ‘चले जाओ’. घर में अगर कुत्ता है तो उसे खोल दो उसी टाइम और मेन गेट मत खोलो. अपना और अपने बच्चों का ध्यान रखिए. सतर्क रहें, सुरक्षित रहें.

इस तरह के मैसेज से खासतौर से पूरे उत्तराखंड में ऐसी दहशत फैली थी कि वहां के अपर पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने 20 जुलाई, 2018 को कहा था कि सोशल मीडिया पर इस तरह की झूठी खबरें भेजना दंडनीय अपराध है. नैनीताल में ऐसे 2 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था जो ऐसी झूठी खबरें फैला रहे थे.

अशोक कुमार ने लोगों से अपील की थी कि वे फेसबुक, ट्विटर या ह्वाट्सऐप पर पोस्ट डालने या फौरवर्ड करने से पहले अपने दिमाग से काम लें और कोई भी मैसेज या वीडियो शेयर करने से पहले उस की सचाई का पता लगा लें.

समझें अपनी जिम्मेदारी

सरकार भी अब अखबारों में बड़ेबड़े इश्तिहार देने लगी है जिन में जनता से वही अपील की जाती है जो उत्तराखंड के आला पुलिस अफसर ने की. पर इस के बाद भी लोग भ्रामक खबरों को फैलाने से बाज नहीं आ रहे हैं तो इस की एक बड़ी वजह तुरंत उन के खिलाफ कोई कार्यवाही न होना है.

सख्त कानून बन जाए और कार्यवाही होने भी लगे तो कोई खास फर्क अब लोगों पर पड़ेगा ऐसा लगता नहीं, क्योंकि उन्हें सच्ची से ज्यादा झूठी खबरें अच्छी लगती हैं. वजह, उन में मिर्चमसाला, हिंसा, छलकपट सब होता है.

इन से ऐसे बचें

जरूरत इस बात की है कि लोग भ्रामक खबरों के दलदल में न फंसें. इस में मजा आता है लेकिन वह मजा कभी भी सजा बन सकता है. हर वह आदमी गैरजिम्मेदार ही कहा जाएगा जो भ्रामक खबरें फैलाने में उन लोगों का काम आसान करता है जो उन्हें अपनी खुदगर्जी, दुकानदारी और धर्म समेत सियासत के लिए बनाते हैं.

जब भी ऐसी खबरें सोशल मीडिया पर दिखें तो उन्हें नजरअंदाज करें और पोस्ट करने वाले को लताड़ लगाने की हिम्मत दिखाएं. इस से भी जरूरी और अहम बात यह है कि आप इस दलदल में बिलकुल न फंसें, समझदार बनें और अपना जिम्मेदारी भरा रोल बखूबी निभाएं.

बिग बॉस 16: अर्चना ने ’50 शेडस ऑफ ग्रे’ के हीरो से की अंकित की तुलना

बिग बॉस 16 गेम में 360 डिग्री का बदलाव देखा गया है. लंबे समय बाद चार लोगों की टीम में से कोई घर का कप्तान बना है. अंकित गुप्ता ने कप्तानी का कार्य जीता और घर के नए राजा बने.  वह अब राज करने जा रहे है. बिग बॉस 16 में अंकित गुप्ता का सफर धीमा और स्थिर रहा है, अब वह खुलने लगे  है. उन्हे इतना पसंद किया जा रहा है की अर्चना गौतम ने उनकी तुलना 50 शेड्स ऑफ ग्रे के जेमी डोनर्न से भी कर दी.

 

 

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अर्चना को लगता की अंकित जेमी डोनर्न की तरह दिखते है:

ऐसा तब होता है जब अर्चना गौतम और प्रियंका चाहर चौधरी, अंकित गुप्ता के बारे में चर्चा कर रही होती है. अर्चना कहती है की अगर उन्हे अंकित जैसा आदमी उनकी जिंदगी में मिले तो वह क्या करेंगी. वह इसे सुनती है और कहती है की अगर ऐसा हर रात होता है तो वे नशे में हो जाएंगे और शरारती बात करेंगे. वह ऐसा कार्य करता है जैसे वह चाबुक मार रहा हो. इसके बाद अर्चना इसमे शामिल हो जाती है. वह कहती है, ‘मैं इसके साथ ठरकी हो रखी हु’ और खूब हस्ती हूं.

 

 

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घरवालों पर भड़कीं अर्चना:

बिग बॉस के घर का एक वीडियो सोशल मीडिया के चक्कर काट रहा है. इस वीडियो के मुताबिक, अर्चना घरवालों की क्लास लगाती नजर आ रही है. अर्चना सभी को रोटियां बर्बाद करने को लेकर डांट रही हैं. अर्चना ने रूम में आकर सभी पर उंगली उठाते हुए कहा- रोटियां रखी हुई हैं, कम से कम ये देख लेना कि आप जो लोग रोटी बचाते हो, वो कितनी बेकार तरीके से रखी हुई है. किसी-किसी को रोटियां मिलती भी नहीं है. यहां तक कि दाल सबकुछ रखी हुई है

Such A Boring Day: शहनाज़ गिल का लेटेस्ट वीडियो हुआ वायरल, आखिर क्यों बोर हो रही हैं सना

शहनाज़ गिल के फेमस डायलॉग ‘त्वाडा कुत्ता टॉमी, साडा कुत्ता कुत्ता’… को अपने म्यूजिक से रीमिक्स करके सोशल मीडिया पर धूम मचाने  वाले म्यूजिक प्रोडूसर यशराज मुखाटे (Yashraj Mukhate) एक बार फिर से सुर्ख़ियों में है. यशराज का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है, जिसमें वो शहनाज़ के एक और डायलॉग ‘बोरिंग डे ‘को अपना म्यूजिक दे रहे हैं. बता दें की बिग बॉस फेम शहनाज़ गिल के पहले डायलॉग वीडियो को उनके फैंस ने काफी पसंद किया था.

 

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मज़ेदार बात ये है की इस वीडियो को बनाने में खुद शहनाज़ ने यशराज की मदद की. वीडियो में शहनाज़ गिल यशराज के साथ जमकर डांस और मस्ती करते हुए नज़र आ रही हैं. सोशल मीडिया पर इस गाने ने धूम मचाई हुई है . फैंस वीडियो को काफी पसंद कर रहे हैं और  लगातार अपनी प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं.

यश राज  ने अपने और शहनाज़ के इस वीडियो को ‘बोरिंग डे’ नाम भी दिया है. यशराज मुखाटे  पहले से ही  शहनाज़ गिल के बिग बॉस डायलॉगस को अपने  म्यूजिक के जादू से रिमिक्स बनाते आ रहे हैं. अब इस नए वीडियो से यशराज ने शहनाज़ के फैंस को खुश किया है. फैंस बोल रहे हैं  ‘मज़ा आ गया ‘

तेरह साल का लड़का, क्यों फांसी चढ़ गया!

आज देश का उच्चतम न्यायालय ऑनलाइन गेम्स को लेकर चिंतित है और सरकार को  निर्देश दे रहा है. दूसरी तरफ उसका भयावह रूप सामने आ गया, जब एक 13 साल के लड़के ने ऑनलाइन गेम्स में चालीस हजार रूपए की चपत लग जाने के बाद, मैं मां को कैसे मुंह दिखाऊंगा, सोच कर के दुखी होकर आत्महत्या कर ली है.

आपको ऑनलाइन के भयानक रूप का एहसास करना है तो आपको उस मां के आंसू देखने होंगे, महसूस करने होंगे जिसका एक नौनिहाल ऑनलाइन गेम्स के चक्कर में फंस कर मौत को गले लगा लेता है.

आज जिस तरीके से ऑनलाइन गेम लोगों विशेष तौर पर बच्चों के बीच प्रचलित है और जिसके कारण कितने ही लोग बर्बाद हो रहे हैं उसकी कोई गणना नहीं है. एक तरफ हम तेजी से अंजान दौड़ में भागे चले जा रहे हैं, दूसरी तरफ अपने ही युवा पीढ़ी को पुरी तरह से बर्बाद करने के लिए छोड़ रखा है. यह सब क्यों हो रहा है, और इस सब के पीछे का क्या षड्यंत्र है, इस चक्रव्यू के संदर्भ में आज हम भी रिपोर्ट में आपको आगाह करते हुए तथ्यात्मक जानकारी प्रस्तुत कर रहे हैं. जिसके आधार पर आप अपने घर, अपने आसपास नौनिहालों पर निगाह रखते हुए उनकी भविष्य को स्वच्छ बना सकते हैं.

यहां यह भी महत्वपूर्ण तथ्य है कि जिस तरीके से आज बच्चे ऑनलाइन गेम्स में अपना बेशकीमती समय दे रहे हैं, उसके कारण जहां उनकी शिक्षा पर गहरा असर पड़ रहा है वहीं स्वास्थ्य भी खतरे में है. एक तरफ परिवार के अभिभावक एक तरह से कुंभकरणी निद्रा में है दूसरी तरफ सरकार भी अपने दायित्व का निर्वहन ईमानदारी से नहीं कर रही है. यही कारण है कि मामला आज देश के सर्वोच्च न्यायालय में संज्ञान में है.

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मैं चालीस हजार रुपए हार गया हूं

नाबालिक बच्चा जिसके लिए आज के समय में पचास  सौ रुपए  बहुत बड़ी वैल्यू रखता है अगर रूपए चालीस हजार हार जाता है तो उसकी मानसिक दशा क्या होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.

मध्यप्रदेश के छतरपुर में एक मां ने ऑनलाइन गेम में पैसे खर्च करने को लेकर 13 साल के इकलौते बेटे को डपट दिया, और बस इतनी सी बात पर लड़के ने फांसी लगा ली. पुलिस को मौके से सुसाइड नोट मिला है. किशोर ने अंतिम पत्र में स्वीकार करते हुए बताया  कि- फ्री फायर खेलते हुए 40 हजार रुपए गंवा बैठा हूं. साथ ही, लिखा है- आई एम सॉरी मां, डोंट क्राइ. इस संवेदनशील मामले की गूंज अनुगूंज बहुत दूर तक हो रही है.

दरअसल, मध्य प्रदेश में  छतरपुर में विवेक पांडेय अपनी पत्नी प्रीति पांडेय, बेटे कृष्णा और बेटी के साथ सुखमय जीवन व्यतीत कर रहे थे . विवेक एक पैथालॉजी संचालक हैं, जबकि प्रीति जिला अस्पताल में कार्यरत हैं.कृष्णा 6वीं स्टेंडर्ड का होनहार छात्र था.30 जुलाई 2021दिन शुक्रवार दोपहर 3 बजे पिता पैथोलॉजी पर थे, जबकि मां प्रीति अस्पताल में थीं. इसी दौरान प्रीति को को अपने बैंक अकाउंट से 1500 रुपए कटने का मैसेज मोबाइल पर मिला. प्रीति ने घर पर मौजूद बेटे को फोन लगाया और पूछा कि यह पैसे क्यों कट गए.

कृष्णा ने बताया, यह ऑनलाइन गेम के कारण कट गए हैं. इस पर प्रीति को गुस्सा आ गया  उसे डपट लगा दी. उसके बाद जो हुआ उस की कल्पना नहीं की जा सकती. 13 वर्ष के कृष्णा ने मां की नाराजगी से अवसाद में आकर के फांसी  लगा आत्महत्या कर ली.

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जब अचानक कृष्णा कमरे में चला गया.और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया तो घर में मौजूद बड़ी बहन ने कुछ देर बाद दरवाजा खटखटाया, तो जवाब नहीं मिला.बेटी ने पिता को इस बारे में बताया.माता-पिता तुरंत घर पहुंचे. दरवाजा तोड़कर देखा, तो अंदर कृष्णा फंदे पर लटका हुआ था.और सब कुछ खत्म हो चुका था.

13 साल के कृष्णा ने  सुसाइड नोट में मां को संबोधित करते हुए लिखा है- मां आप मत रोना!
दरअसल, इस घटना से ऑनलाइन गेम्स की भयावहता का आपको एहसास हो सकता है. विगत कुछ महीनों से कृष्णा पांडेय ऑनलाइन गेम फ्री फायर का शिकार हो गया था. उसकी संवेदना की झलक पत्र में देखने को मिलेती है.

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बच्चों के साथ जोर जुल्म, मां भी कम जालिम नहीं!

मुंशी प्रेमचंद ने कई साल पहले ‘ईदगाह’ नाम से एक कहानी लिखी थी, जिस में 4-5 साल का हामिद अपनी दादी अमीना के साथ रहता है और ईद पर वह बाजार से कोई खिलौना या मिठाई खरीदने के बजाय दुकानदार से मोलभाव कर के 3 पैसे में अपनी बूढ़ी दादी के लिए चिमटा खरीदता है, ताकि रोटी बनाते समय उन के हाथ न जलें.

पर, अगर कोई इसी गरम चिमटे से किसी मासूम को दाग दे, तो उसे कैसा महसूस होगा? यह कोई कहानी नहीं है, बल्कि हरियाणा के फरीदाबाद की राजीव कालोनी में इसी मार्च महीने में ऐसा हकीकत में हुआ. शर्म और दुख की बात तो यह रही कि ऐसा घटिया काम करने वाली एक औरत थी, जिस ने अपनी सौतेली बेटी को सताने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

मामला कुछ यों था कि फरीदाबाद के सैक्टर 58 थाना के तहत आने वाली राजीव कालोनी से पुलिस को यह खबर मिली कि एक औरत अपनी सौतेली बेटी को रोजाना मारतीपीटती थी. पुलिस हरकत में आई और बताए गए घर पर दबिश दी. वहां से मिली पीडि़त लड़की का मैडिकल कराया गया. उस के बदन पर चोट और जलने के निशान मिले.

जब इस पूरे मामले की जांचपड़ताल की गई तो पता चला कि उस 16 साल की लड़की की सौतेली मां जबरन उस से घर के सारे काम कराती थी. जब कभी वह थक कर बैठ जाती थी, तब उस की सौतेली मां उसे बुरी तरह पीटती थी. कई बार तो गरम चिमटे से दाग देती थी.

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यह कोई एकलौती घटना नहीं है, जब किसी बच्चे को अपनों द्वारा ही इतना ज्यादा सताया गया हो. सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो तैरते मिल जाएंगे, जिन में कोई औरत या मर्द बंद कमरे में किसी बच्चे की बेदर्दी से पिटाई कर रहे होते हैं. कोई चोरी छिपे ऐसी करतूतों को कैमरे में कैद कर लेता है और इंटरनैट की आभासी दुनिया में शेयर कर देता है. इन मामलों में मांएं भी पीछे नहीं हैं. इसी साल फरवरी महीने में दिल्ली महिला आयोग ने हरिनगर इलाके से 8 साल के एक ऐसे बच्चे को बचाया, जिस के साथ उस की सौतेली मां लंबे समय से मारपीट कर रही थी.

बच्चे ने बताया कि उस की मां उसे रोजाना पीटती थी. कई बार उसे खाना तक नहीं देती थी. उसे घर से बाहर निकाल देती थी. जब मां घर से बाहर जाती थी, तो उसे बांध कर जाती थी. बच्चे के मैडिकल टैस्ट से पता चला कि उस के हाथ, पैर, गरदन, पीठ समेत पूरे शरीर पर जख्मों के निशान थे. सही से खाना नहीं मिलने के चलते वह बच्चा कमजोर भी हो गया था.

अब एक असली मां की भी करतूत देख लो. महाराष्ट्र में मुंबई के पास ठाणे शहर के मुंबा इलाके में एक औरत हीना शेख का 2 साल पहले अपने शौहर फयाज शेख से तलाक हो गया था. 3 साल के बेटे की कस्टडी हीना शेख को मिली थी, पर वह अपने पति से मिलने वाले मुआवजे से खुश नहीं थी, इसलिए उस ने 28 फरवरी, 2021 को पैसों की डिमांड बढ़ाने के लिए अपने बेटे की जम कर पिटाई कर के उस का वीडियो बना दिया और फयाज शेख को भेज दिया.

मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जुविनाइल जस्टिस ऐक्ट के सैक्शन 75 के तहत हीना शेख को गिरफ्तार कर लिया. उस वीडियो में वह अपने बेटे को बेरहमी से पीट रही थी. पिटाई के बाद वह उसे बिस्तर पर खड़ा कर के पूछती है, ‘तुझे तेरे बाप के पास जाना है?’

रोता हुआ बच्चा कहता है कि उसे नहीं जाना है, लेकिन मां उस के पैर, जांघों, पीठ, कंधे और मुंह पर लगातार मारती है. वह उसे यह कह कर पीटने लगती है कि उस का बाप उस के लिए केवल 6,000 रुपए देता है और 10,000 रुपए से ज्यादा का खाना यह बच्चा खाता है.

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यहां जिन खबरों का जिक्र किया गया है, वे ऐसे कांड हैं जिन को देखसुन कर किसी का भी दिल दहल जाए. अमूमन कोई मां अपने बच्चे को किसी बात पर पीट दे, यह कोई हैरानी वाली बात नहीं है. बचपन में तकरीबन हर कोई अपनी मां के हाथों पिटा होगा या डांट खाई होगी. इस में मां के मूड के साथसाथ बच्चे की गलती भी बड़ी वजह होती थी. बच्चे ने झूठ बोला, होमवर्क नहीं किया, गाली दी या किसी से मारपीट कर दी, चोरी की या कोई ऐसी बदमाशी कर दी, जो माफी के लायक नहीं थी, तो मां बेमन से पिटाई कर देती थी, फिर वह बेटा हो या बेटी.

लेकिन वहां मां का एक ही मकसद होता है, बच्चे में सुधार लाना. पर जब कोई मां नफरत या किसी लालच में अपने बच्चे को सताती है या बेरहमी से पीटती है, तो मामला फरीदाबाद जैसा संगीन हो जाता है. राजीव कालोनी में रहने वाली मां को अपनी सौतेली बेटी से प्यार नहीं था, यह बात समझ में आती है और वह उस से घर का सारा काम अपनी इसी भड़ास को निकालने के लिए कराती होगी, पर गरम चिमटे से दागना तो अपराध है. हालांकि 16 साल की लड़की से जबरदस्ती घर के काम कराना भी गैरकानूनी है.
दिल्ली के हरिनगर की औरत ने तो अपने 8 साल के सौतेले बेटे को सताने में कोई कसर ही नहीं छोड़ी. किसी मासूम को भूखा रखना कहां की इनसानियत है.

इसी तरह ठाणे की हीना शेख लालच में इतनी अंधी हो गई थी कि उस ने अपने तलाकशुदा शौहर से मुआवजे की रकम बढ़वाने के लिए अपने बेटे को ही बलि का बकरा बना डाला. उसे बेदर्दी से पीटा ही नहीं, बल्कि उस का वीडियो तक बना डाला.इस तरह के मामले बच्चों को घर से भागने की वजह बनते हैं. कौन बच्चा बिना बात रोजरोज की मार खाएगा?

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एक पुरानी कहावत है कि बच्चे कच्ची मिट्टी के समान होते हैं. उन्हें कुम्हार की तरह जिस आकार में ढालेंगे, वे वैसे ही बनते चले जाएंगे. मां अपने बच्चों की वही कुम्हार होती है. उस के हाथ जितने सधे होंगे, बच्चे उतने ही निखरेंगे. बच्चों के साथ एक हद तक कड़ाई करनी चाहिए, पर इतनी भी नहीं कि वे ऐसी राह पर चल पड़ें, जहां से लौटना मुश्किल हो जाए.

बच्चों को ‘ईदगाह’ कहानी के हामिद जैसा दयालु बनाएं, जिसे अपनी खुशी से ज्यादा बूढ़ी दादी की चिंता थी. अगर कहीं वही दादी भविष्य में उसे उसी चिमटे से दागती तो क्या कोई दूसरा बच्चा इस तरह का तोहफा अपनी मां या दादी के लिए लाने की सोचता? बिलकुल नहीं.

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