Crime Story: शर्मनाक कमांडो काजल दहेज लोभी पति ने मारा

Crime Story: रक्षा मंत्रालय. यह शब्द सुनते ही सब से पहला खयाल यही आता है कि ऐसा मंत्रालय जो देश की रक्षा के लिए बनाया गया है, ताकि भारत के बाहरी और भीतरी दुश्मन इस देश को हलके में लें.
अब कमांडो शब्द पर ध्यान देते हैं. इसे सुनते ही एक ऐसे शख्स की इमेज मन में कौंध जाती है, जो तन और मन से इतना मजबूत होता है कि अगर अपनी पर जाए तो कइयों पर अकेला ही भारी पड़ जाए.
अब काजल और अंकुर की बात करते हैं. काजल दिल्ली पुलिस की जांबाज महिला कमांडो थी और अंकुर रक्षा मंत्रालय में क्लर्क के पद पर काम करता है.

दोनों ने प्रेम विवाह किया था. अंकुर काजल दिल्ली के मोहन गार्डन में रहते थे. उन का एक डेढ़ साल का बेटा भी है. काजल 4 महीने के पेट से थी. ऊपरी तौर पर यह शादी बड़ी शांत लग रही थी. पतिपत्नी दोनों कमाऊ, सरकारी नौकरी, गोद में बेटा और दूसरे बच्चे के आने की तैयारी. छोटा परिवार, खुशियां अपार.
पर 22 जनवरी, 2026 की रात को कुछ ऐसा हुआ, जिस ने इस शादी की पोल खोल दी और साथ ही इस बात का भी खुलासा कर दिया कि मजबूत से मजबूत औरत भी अपने घर में कितनी अबला बन कर रह जाती है. काजल को तो अपने औरत होने की कीमत अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी.


22 जनवरी, 2026 की रात के तकरीबन 10 बजे काजल पर उस के पति अंकुर ने जानलेवा हमला किया. सिर पर लोहे के डंबल से कई वार किए गए, जिस से काजल को गंभीर चोटें आईं. हमले के बाद आरोपी पति अंकुर ही काजल को मोहन गार्डन में बने तारक अस्पताल ले कर गया. अस्पताल में काजल की हालत बेहद नाजुक थी. वहां के डाक्टरों ने काजल को गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश के एक निजी अस्पताल में रैफर किया, जहां कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच खेलने के बाद आखिरकार 27 जनवरी, 2026 को काजल ने दम तोड़ दिया. दहेज बना इस खून की वजह लव मैरिज और दहेज की मांग?

क्या यह सवाल थोड़ा अटपटा नहीं है? बिलकुल है, क्योंकि जब 2 लोग अपनी मरजी से प्यार में पड़ कर शादी करते हैं, तो उन में दहेज जैसी सामाजिक बुराई की जगह तो कहीं से नहीं बनती है, पर काजल के परिवार वालों का आरोप है कि शादी के महज 15 दिन बाद ही काजल के ससुराल पक्ष ने गाड़ी और पैसों की मांग शुरू कर दी थी. काजल को ताने दिए जाने लगे थे और उसे सताया जाने लगा था. कई बार समझौता कराने की कोशिश भी हुई.


इतना ही नहीं, काजल ने दिल्ली में अलग रहने का फैसला भी किया, लेकिन आरोप है कि पति अंकुर वहां भी गाड़ी और पैसों की मांग को ले कर उस के साथ मारपीट करता रहता था. काजल के परिवार के मुताबिक, काजल सबकुछ सहती रही, क्योंकि उसे अपने कैरियर और होने वाले बच्चे की चिंता थी.
काजल का परिवार दावा कर रहा है कि वह सबकुछ सहती रहती थी. पर क्यों? क्या वह अपाहिज थी? नहीं, वह तो 27 साल की जांबाज कमांडो थी. क्या वह अपना कैरियर और होने वाला बच्चा बचा पाई? नहीं. आज दोनों ही इस दुनिया में नहीं हैं.


मर्द मारे तो क्या गलत तो क्या यह मान लिया जाए कि जब काजल जैसी मजबूत औरत अपनी ससुराल में पिट सकती है, तो फिर एक आम घरेलू औरत पर तो परिवार की इज्जत की खातिर जुल्म होते ही रहते होंगे? इस बात को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, पर जरा गहराई से सोचा जाए तो भारतीय समाज में आज भी लड़कियों को इस तरह से पाला जाता है कि उन्हें हर हाल में मर्द के साए की जरूरत पड़ती ही पड़ती है. घर में पिता और भाई और सुसराल में पति ही उन का रक्षक है. पर अगर औरतें ही पति से होने वाली पिटाई को सही मानती हों तो? कुछ साल पहले बीबीसी ने इसी सवाल पर एक रिपोर्ट छापी थी.


दरअसल, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण या (एनएफएचएस-5) की रिपोर्ट में कहा गया था कि औसतन
40 फीसदी से ज्यादा औरतों ने पतियों द्वारा कुछ हालात में पत्नियों को पीटना सही बताया था, जैसे अगर औरतें घर या बच्चों की अनदेखी करती हैं. सासससुर का खयाल नहीं रखती हैं. बिना बताए घर से बाहर निकलती हैं वगैरह. समस्या यहीं से बड़ी हो जाती है, जब देश की 51 फीसदी से ज्यादा औरतें यह स्वीकार कर लेती हैं कि पति से पिटना को बड़ा मुद्दा नहीं है. जो पति आप से प्यार करता है, कभीकभार वह आप पर हाथ उठा दे तो कोई बड़ी बात नहीं.


धर्मवादी सोच हावी यह पति को परमेश्वर मानने वाली सोच का नतीजा है, जो धर्म के ठेकेदार सदियों से औरतों के मन में भर रहे हैं. उन्हें बचपन से ही सिखा दिया जाता है कि घर से लड़की की डोली उठेगी
तो उस की लाश ही ससुराल से उठनी चाहिए, फिर चाहे पति कितना ही जल्लाद क्यों हो. यहीं से औरत को मर्द का गुलाम बनने की सीख पुख्ता होती है. कमांडो काजल अपने कैरियर और बच्चों (एक तो अभी दुनिया में आया ही नहीं था) के लिए जुल्म सह रही थी. पर वह तो अपने पैरों पर मजबूती से खड़ी थी, फिर क्यों उस ने पति के पहले वार पर ही जोरदार जवाब नहीं दिया?


यह सवाल बहुत ज्यादा अहम है हर उस औरत के लिए, जो परिवार बचाने के लिए कोल्हू के बैल की तरह जुटी पड़ी रहती है, पर इस से अंकुर जैसे मर्दों को कोई फर्क नहीं पड़ता है. घरेलू हिंसा इसी गंदी मर्दवादी सोच का नतीजा है.   

Crime Story: डेटिंग ऐप झूठा प्यार और फिरौती

Crime Story: राजस्थान. कभी मोबाइल स्क्रीन पर शुरू हुई एक बातचीत धीरेधीरे भरोसे में बदली. भरोसे से लालच पैदा हुआ और लालच ने हत्या की राह खोल दी. दुष्यंत शर्मा हत्याकांड की कहानी आज भी उतनी ही सिहरन पैदा करती है, जितनी साल 2018 में की थी. अब इसी कहानी में एक नया चैप्टर जुड़ गया है. इस हत्याकांड की मुख्य दोषी प्रिया उर्फ नेहा सेठ एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह उस की शादी है, जो वह जेल की सलाखों के बीच मिले नए प्रेमी के साथ करने जा रही है.


आजीवन कारावास की सजा काट रही प्रिया सेठ को शादी के लिए 15 दिन की पैरोल दी गई है. जेल के भीतर बना रिश्ता अब सामाजिक रस्मों में बदलने की तैयारी में है. यह खबर सामने आते ही दुष्यंत शर्मा हत्याकांड एक बार फिर लोगों की यादों में ताजा हो गया है. वही सवाल फिर खड़े हो गए हैं. क्या घिनौने अपराध के बाद जिंदगी को नई शुरुआत मिल सकती है या फिर कानून सजा देता है, लेकिन जिंदगी रुकती नहीं?


राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद जिला पैरोल एडवाइजरी कमेटी ने प्रिया सेठ की ओर से पेश रिप्रजैंटेशन को स्वीकार करते हुए उसे 15 दिन की पैरोल मंजूर की. इसी के साथ हत्या के एक और दोषी हनुमान प्रसाद को भी पैरोल दी गई. दोनों इस समय जयपुर की खुली जेल में सजा काट रहे हैं.
दिखावे की जिंदगी और बढ़ता लालच प्रिया सेठ की जिंदगी बाहर से जितनी चमकदार दि
खती
थी, अंदर से उतनी ही उलझी हुई थी.

पुलिस जांच में सामने आया था कि वह सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स के जरीए अमीर नौजवानों से मेलजोल बढ़ाती थी. महंगे कपड़े, ब्रांडेड परफ्यूम, हवाई यात्राएं और आलीशान लाइफ स्टाइल उस का शौक बन चुके थे. बताया गया कि उस का मासिक खर्च तकरीबन डेढ़ लाख रुपए तक पहुंच गया था. इसी दौरान प्रिया सेठ की जिंदगी में दीक्षांत कामरा आया. दोनों के बीच प्रेम संबंध बने और वे लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगे. लेकिन दीक्षांत पर तकरीबन 21 लाख रुपए का कर्ज था. यही कर्ज धीरेधीरे एक खतरनाक साजिश की वजह बना.


डेटिंग ऐप से मौत तक
दुष्यंत शर्मा से प्रिया की मुलाकात डेटिंग ऐप टिंडर के जरीए हुई थी. दुष्यंत टिंडर पर विवान कोहली नाम की फर्जी पहचान से मौजूद था. वह शादीशुदा था, लेकिन खुद को दिल्ली का अमीर बिजनैसमैन बताता था. उस की प्रोफाइल एक रईस और कामयाब इनसान की तसवीर पेश करती थी. यही झूठ उस की सब से बड़ी कमजोरी बन गया. 3 महीने तक बातचीत चली. भरोसा गहराया. फरवरी, 2018 में दोनों ने आमनेसामने मिलने का फैसला किया. प्रिया ने दुष्यंत को किराए के मकान में मिलने के लिए बुलाया.

दुष्यंत खुशीखुशी वहां पहुंच गया. उसे अंदाजा नहीं था कि यह मुलाकात पहले से रची गई साजिश का हिस्सा है. जैसे ही दुष्यंत मकान में दाखिल हुआ, प्रिया के साथ मौजूद दीक्षांत कामरा और लक्ष्य वालिया ने उसे काबू में कर लिया. इस के बाद दुष्यंत के परिवार को फिरौती के लिए फोन किया गया. पिता की बेबसी दुष्यंत के पिता रामेश्वर प्रसाद शर्मा को बेटे का फोन आया. कांपती आवाज में दुष्यंत कह रहा था, ‘पापा ये लोग मुझे मार डालेंगे. 10 लाख रुपए दे कर मुझे बचा लीजिए.’


इस के बाद प्रिया सेठ ने फोन छीन लिया और पैसे जमा करने का दबाव बनाने लगी. परिवार के पास इतनी बड़ी रकम नहीं थी. किसी तरह 3 लाख रुपए का इंतजाम किया गया. इस के बावजूद आरोपियों का लालच खत्म नहीं हुआ. सूटकेस में बंद एक जिंदगी पहले दुष्यंत का गला घोंटने की कोशिश की गई, फिर तकिए से उस का मुंह दबाया गया. जब वह फिर भी जिंदा रहा, तो दीक्षांत ने चाकू लाने को कहा. प्रिया चाकू ले कर आई और दुष्यंत का गला काट दिया गया.


हत्या के बाद लाश को सूटकेस में बंद किया गया. पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर चाकू से कई वार किए गए. 4 मई, 2018 को जयपुर के बाहर एक गांव में सूटकेस में दुष्यंत की लाश मिली. दुष्यंत के पिता ने 3 मई, 2018 को झोटवाड़ा थाने में अपहरण का मामला दर्ज कराया था. उसी रात आमेर थाना क्षेत्र में लैश मिलने की सूचना ने पूरे मामले को उजागर कर दिया. पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की और 4 मई को प्रिया सेठ, दीक्षांत कामरा और लक्ष्य वालिया को गिरफ्तार कर लिया.


अदालत का सख्त फैसला
पूछताछ के दौरान 1-1 कर पूरी साजिश सामने गई. मोबाइल चैट, काल डिटेल्स और दूसरे तकनीकी सुबूतों ने आरोपियों की भूमिका साफ कर दी. बाद में प्रिया सेठ ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उस ने बताया कि यह पूरी योजना उस के प्रेमी दीक्षांत कामरा पर चढ़े तकरीबन 21 लाख रुपए के कर्ज को चुकाने के लिए बनाई गई थी. यह मामला अदालत में चला. अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान और तकनीकी सुबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस पेश किया.

सुनवाई के बाद अदालत ने 24 नवंबर, 2023 को प्रिया सेठ, दीक्षांत कामरा और लक्ष्य वालिया को भारतीय दंड संहिता की धारा 342, 302, 201 और 120 बी के तहत दोषी ठहराते हुए तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. आज का सवाल सजा के दौरान प्रिया सेठ की नजदीकियां हत्या के एक और दोषी हनुमान प्रसाद से बढ़ीं. जेल के भीतर बना यह रिश्ता अब शादी तक पहुंच गया है. 15 दिन की पैरोल ने समाज के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.


दुष्यंत शर्मा हत्याकांड सिर्फ एक अपराध नहीं है. यह डिजिटल युग में रिश्तों की खतरनाक हकीकत है. झूठी पहचान, दिखावा, लालच और एक गलत फैसला, जिस ने एक नौजवान की जिंदगी छीन ली.
कानून ने सजा दी है, लेकिन पीडि़त परिवार का दर्द आज भी जस का तस है. यही इस खुलासे की सब से कड़वी हकीकत है.                        

राकेश खुडिया

Crime Story: हाथरस में औनर किलिंग-सैनिक को दी प्यार की सजा

Crime Story: जगह थी उत्तर प्रदेश की हाथरस और तारीख थी 5 फरवरी, 2026. दोपहर के तकरीबन 3 बजे सादाबाद कोतवाली इलाके के आगराअलीगढ़ नैशनल हाईवे पर चंद्रा हाउस के पास एक सैनिक की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. एक इको कार और बाइक सवार हमलावरों ने भारतीय सेना के सैनिक की कार को घेर लिया था और इस के बाद उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी.


इस तरह अचानक हमला हुआ तो वह सैनिक अपनी जान बचाने के लिए भागा, लेकिन हमलावरों ने दौड़ादौड़ा कर उसे गोलियों से भून दिया. उस सैनिक का नाम अखिलेश चौधरी था जो गांव समदपुर का रहने वाला था और हाथरस कोर्ट में पेशी से वापस लौट रहा था. पुलिस ने इस हत्याकांड को सुलझाने में तेजी दिखाई और मारे गए सैनिक अखिलेश चौधरी की पत्नी की बूआ के 2 बेटों को गिरफ्तार किया. दरअसल, सैनिक अखिलेश चौधरी ने अपने गांव की ही एक लड़की से लवमैरिज की थी. इस बात से लड़की के परिवार वाले उन की जान के दुश्मन बन गए थे. इस के बाद यह कांड हो गया.


हाथरस पुलिस ने गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों बौबी उर्फ विशाल और राजा उर्फ राहुल के पास से 2 तमंचे, कारतूस और वारदात में इस्तेमाल की गई एक इको कार बरामद की. पुलिस की पूछताछ के दौरान इस हत्याकांड को अंजाम देने वाले आरोपियों ने खुलासा किया कि फौजी अखिलेश चौधरी ने उन के परिवार की एक लड़की से लव मैरिज की थी. इस के चलते परिवार की समाज में बेइज्जती हो रही थी. इस बदनामी का कलंक मिटाने के लिए उन्होंने अखिलेश चौधरी की हत्या की योजना बनाई.


मारे गए सैनिक अखिलेश चौधरी की बहन ने 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया, जबकि पत्नी निधि ने एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर सादाबाद कोतवाली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे. निधि ने पुलिस की मिलीभगत से उस के पति हत्या का आरोप लगाया था. सैनिक अखिलेश चौधरी की बहन ने तो प्रदेश सरकार से अपील भी की कि उस के भाई की हत्या करने वालों के घरों पर बुलडोजर चला दिया जाए.    

 

Crime Story: औरत की दीवानगी काट दी मर्दानगी

Crime Story: गोवा के बाद मुंबई दूसरा ऐसा शहर है, जहां के लोग नए साल का जश्न पूरे जोरशोर और जोश से मनाते हैं. इस के लिए कई दिन पहले से प्लान भी बनने लगते हैं कि इस बार 31 दिसंबर और 1 जनवरी के बीच की रात को क्याक्या करना है. अगर घर पर ही पार्टी देनी है, तो किसकिस को बुलाना है, खाने में क्याक्या आइटम रखना है, डांस और म्यूजिक का क्या इंतजाम करना है और इन सब से भी ज्यादा अहम बात यह कि मेहमानों का स्वागत कैसे करना है और उन्हें तोहफे में क्या देना है.


मुंबई के सांताक्रूज (पूर्व) इलाके में रहने वाली 25 साला कंचन देवी महतो ने भी नए साल के स्वागत का प्लान बना रखा था. एक आटोरिकशा ड्राइवर की पत्नी और 2 बच्चों की मां कंचन देवी ने अपने 44 साला आशिक और रिश्तेदार जोगिंदर लखन महतो को मिठाई खाने के लिए अपने घर आने का न्योता दिया था, जिसे स्वीकार करने की कोई वजह जोगिंदर जैसे आशिक के पास नहीं होती. पेशे से कैब ड्राइवर जोगिंदर भी सांताक्रूज (पूर्व) में ही रहता था. कंचन देवी का न्यू ईयर प्लान कितना खतरनाक था, इस से पहले यह जान लें कि उस की और जोगिंदर की आशिकी तकरीबन 7 साल पुरानी थी. जब भी मौका मिलता था, वे दोनों एकदूसरे से मिल कर अपने तन और मन की प्यास बु? लिया करते थे, क्योंकि शादीशुदा और बालबच्चेदार होने के चलते दोनों को एहतियात बरतनी पड़ती थी.


हालांकि, नजदीकी रिश्तेदार होने से उन्हें दूसरे माशूक और आशिक की तरह चोरीछिपे नहीं मिलना पड़ता था, लेकिन जिस मकसद से वे मिलते थे, उस में सावधानी जरूर रखनी पड़ती थी. पिछले कुछ दिनों से वही हो रहा था, जो ऐसे नाजायज रिश्तों में अकसर अपराध की वजह बनता है. कंचन देवी जोगिंदर के पीछे हाथ धो कर पड़ गई थी कि अब तुम बिन रहा और सहा नहीं जातातुम अपनी पत्नी को छोड़ कर मु? से शादी कर लोमैं भी तो सबकुछ छोड़ने के लिए तैयार हूं. इस मांग और जिद से जोगिंदर इस कदर घबराया था कि नवंबर, 2025 में मुंबई छोड़ कर अपने घर बिहार वापस चला गया था. लेकिन कंचन देवी अब भी जिद पर अड़ी थी और हर कभी फोन कर उस पर शादी करने का दबाव बनाती रहती थी.
नए साल पर कंचन देवी ने जोगिंदर लखन को बुलाया तो वह मना नहीं कर पाया. ऐसे नाजायज संबंधों की एकलौती खूबी यह होती है कि हमबिस्तरी का लुत्फ चोरी के आम सरीखा आता है और इन्हें छोड़ पाना आसान नहीं रह जाता.


जब जोगिंदर लखन कंचन देवी के घर पहुंचा जो दोनों बच्चों को सुला कर तमाम तैयारियों के साथ वह उस का ही इंतजार कर रही थी. दोनों ने पहले जीभर कर 2 महीने की अपनी प्यास बु?ाई, फिर कंचन मिठाई ले कर गई. कर दिया बड़ा कांड रात के तकरीबन डेढ़ बजे कंचन देवी और जोगिंदर बिना कपड़ों के थे. कंचन देवी के भरेपूरे जिस्म और सैक्स हरकतों की गिरफ्त में आया जोगिंदर उस वक्त कसमसा उठा, जब कंचन देवी ने एकाएक ही बिना उसे संभलने का मौका दिए चाकू से उस का प्राइवेट पार्ट काट डाला.
यह था नए साल का महबूबा का तोहफा जिसे जोगिंदर तो जोगिंदर, इस घटना को पढ़ने और इस के बारे में सुनने वाले लोग तय है कि जिंदगीभर नहीं भुला पाएंगे. लहूलुहान और तड़पता जोगिंदर लखन गिरतापड़ता जैसेतैसे घर पहुंचा, तो उस का बेटा उसे ले कर तुरंत वीएन देसाई अस्पताल पहुंचा और इलाज शुरू करवाया. यहां से मरहमपट्टी कर डाक्टरों ने उसे सायन अस्पताल रैफर कर दिया, जहां उस के प्राइवेट पार्ट को दोबारा जोड़ने के लिए 2 आपरेशन हुए.


नए साल के इस पहले और अनूठे जुर्म की खबर मिलते ही तुरंत हरकत में आई वाकोला पुलिस कंचन देवी के घर पहुंची, तो पाया कि वह बच्चों समेत पहले ही फरार हो चुकी थी. पर जल्द ही कुर्ला रेलवे स्टेशन से वह गिरफ्तार भी कर ली गई. पुलिस ने बीएनएस यानी भारतीय न्याय संहिता की धारा 118 (2) के तहत मामला दर्ज कर के कंचन देवी को जेल भेज दिया. आरोप साबित होने पर उसे 10 साल की सजा हो सकती है. लेकिन जोगिंदर को जो सजा मिली, उसे वह जिंदगीभर नहीं भूल पाएगा. भूल तो आगरा का योगेश भी नहीं पाएगा कि उस का भी प्राइवेट पार्ट कटा था. लेकिन काटने वाली पत्नी या माशूका नहीं, बल्कि उस की सगी भाभी थी.


उत्तर प्रदेश में प्रयागराज जिले के मलखानपुर के बाशिंदे राम आसरे के 5 बेटों में से दूसरे नंबर के बेटे उदय कुमार की शादी मंजू से हुई थी. जैसा कि ऐसी करीबी रिश्तेदारी में अकसर होता है, मंजू के देवर उमेश का टांका अपनी भाभी की छोटी बहन अंजू (बदला हुआ नाम) से भिड़ गया यानी अफेयर हो गया. दोनों एकदूसरे से बेइंतिहा प्यार करने लगे और शादी करने के कसमेवादे भी हो गए. दोनों के घर वालों ने भी इस बाबत बातचीत करना शुरू कर दिया था. भाभी ने लिया बदला बात यहां तक किसी के एतराज या हर्ज की नहीं थी. मंजू खुद भी चाहती थी कि अंजू उस की देवरानी बन कर इस घर में जाए, जिस से मांबाप के सिर से एक लड़की की जिम्मेदारी और उतरे. सबकुछ तकरीबन पक्का था कि एक दिन उमेश ने अंजू से शादी करने से इनकार कर दिया. इस से मंजू को हैरानी हुई, लेकिन सबकुछ उस के बस में नहीं था. उस ने उमेश को सम?ाने की बहुत कोशिश की, पर वह टस से मस हुआ.


इस इनकार से अंजू डिप्रैशन में चली गई और जान देने की बात करने लगी. अपनी बहन को इस हालत में देख कर मंजू को गुस्सा आना लाजिमी था, क्योंकि उस की बहन अंजू मन ही मन उमेश को पति मान बैठी थी और शादी से पहले अपना सबकुछ उमेश को सौंप चुकी थी. चूंकि देवर और बहन के अफेयर को परवान चढ़ने देने में मंजू का रोल अहम था, इसलिए वह इस धोखे से बदले की आग में जलने लगी और जब यह अगन बरदाश्त नहीं हुई, तो उस ने उमेश को उस की बहन से बेवफाई करने पर सबक सिखाने का फैसला कर लिया. 16 अक्तूबर, 2025 की रात जब घर में सभी सो रहे थे, तब मंजू चुपके से उठी, हाथ में चाकू लिया और उमेश के नजदीक जा कर उस का प्राइवेट पार्ट काट डाला. मंजू ने उमेश के प्राइवेट पार्ट पर 1-2 नहीं, बल्कि 4 वार किए, जिस से वह चिल्ला कर उठ बैठा. आवाज सुन कर सारा घर जाग
गया और उमेश को अस्पताल पहुंचाया. उस का प्रयागराज के रूपरानी नेहरू अस्पताल में लंबा इलाज चला. जोगिंदर की तरह उस का भी आपरेशन हुआ, तब कहीं जा कर जान बची, लेकिन जो चीज चली गई, उस की भरपाई कोई डाक्टर अब नहीं कर सकता.


आम हो रहे ऐसे अपराध देशभर में अब हर कभी और हर कहीं मर्दों के प्राइवेट पार्ट औरतों द्वारा काटे जाने की वारदात बेहद आम हो चली हैं, जो काफीकुछ सोचने के लिए मजबूर करती हैं. 17 दिसंबर, 2025 को पंजाब के लुधियाना में उस वक्त सनसनी मच गई थी, जब सीएमसी अस्पताल में अमित नाम का एक नौजवान अपना कटा लटकता सा प्राइवेट पार्ट ले कर इलाज के लिए पहुंचा था. डाक्टरों के पूछने पर अमित ने मनगढ़ंत कहानी यह बताई कि जालंधर बाईपास के पास कुछ बदमाशों ने उसे घेर कर लूटा और प्राइवेट पार्ट काट कर चलते बने. इलाज शुरू हुआ और फिर पुलिस आई तो असली कहानी सामने आई कि अमित का प्राइवेट पार्ट बदमाशों ने नहीं, बल्कि उस की माशूका रेखा ने काटा था. दरअसल, अमित और रेखा एकदूसरे से प्यार करते थे और मौजमस्ती के लिए शहर के इंडोअमेरिकन होटल में कमरा ले कर ठहरे थे. वहीं दोनों में ?ागड़ा हो गया. वजह वही पुरानी थी. रेखा जिद कर रही थी कि इतने दिन हो गए मुहब्बत करते हुए, शादी कब करोगे?


रेखा को सैकड़ों बार भोग चुका अमित अब गले में ढोल लटकाने के मूड में नहीं था, सो उस ने साफ मना कर दिया. इस बात पर दोनों में हाथापाई होने लगी. गुस्साई रेखा ने कटर से अमित का प्राइवेट पार्ट काट डाला. गुस्सा अमित को भी गया, तो उस ने पहले तो रेखा को ताबड़तोड़ घूंसे मारे और फिर गला दबा कर उस की हत्या कर दी. जाहिर है कि अमित को तगड़ी सजा होगी, लेकिन रेखा जो सजा दे गई है, वह जिंदगीभर उसे सालती रहेगी. मर्दों से कम नहीं औरतें आखिरकार पेशे से नर्स रेखा में इतनी ताकत और हिम्मत आई कहां से, जो उस ने लंबेतगड़े अमित का प्राइवेट पार्ट काट डाला? इतनी ही हिम्मत और ताकत कंचन देवी में भी गई थी और इतनी ही हिम्मत मंजू में भी गई थी. हालांकि, जब उस ने देवर का प्राइवेट पार्ट काटा, तब वह गहरी नींद में सो रहा था. मंजू ने आगेपीछे की परवाह नहीं की और ही ससुराल और मायके वालों के बारे में कुछ सोचा.


दरअसल, औरतें अब पहले जैसी नाजुक नहीं रह गई हैं और मर्दों के हाथों खाए धोखे को किस्मत मान कर चुप नहीं बैठती हैं. सजा देने के लिए वे कानून पर भरोसा करती हैं या नहीं करती, यह ऐसी दर्जनों वारदात से साफ है कि नहीं करतीं, क्योंकि अदालतें धोखे को धोखा ही कई बार नहीं मानतीं, उलटे फैसले में यह कह देती हैं कि दोनों बालिग थे और रजामंदी से सैक्स संबंध बने थे, इसलिए कोई मामला ही नहीं बनता.
बात एक हद तक सही भी है, लेकिन इन औरतों की नजर और नजरिए से देखें, तो उन्होंने मर्द का सब से अहम और नाजुक अंग काट कर धोखे का बदला ही लिया है और ज्यादातर मामलों में वे तय कर चुकी थीं कि इस से बेहतर सबक और सजा कोई हो नहीं सकती कि मर्द जिंदगीभर सैक्स सुख के लिए तरसता रहे और जब भी तरसे तो उन्हें याद जरूर करे.


कोई दर्जनभर मामले प्राइवेट पार्ट काटने के देखें, तो सम? आता है कि तकरीबन सभी में मर्द या तो बिना कपड़ों के था या फिर सिर्फ अंडरवियर में था, जिस से पत्नी या माशूका को ज्यादा मशक्कत नहीं करना पड़ी और उस ने सहूलियत से अपनी मंशा को अंजाम दे दिया. अब वह दौर गया कि माशूका या पत्नी अपनी किस्मत को कोसते हुए खामोश रह जाती थीं. जब से लड़कियां कमानेखाने बाहर निकली हैं या नौकरियां करने लगी हैं, तब से इस तरह के जुर्म और बढ़े हैं. मर्द औरत के हाथों पिट भी खूब रहे हैं और उन की हत्याएं भी माशूका या पत्नी कर रही हैं. पर हत्या जैसे संगीन अपराध के लिए आमतौर पर औरतों को दूसरे मर्द का साथ या सहारा चाहिए रहता है. प्राइवेट पार्ट काटने में यह जरूरी नहीं रह जाता, क्योंकि मर्द पूरे भरोसे के साथ उन के सामने हथियार डाल चुका होता है और उसे सपने में भी यह अंदाजा नहीं रहता कि थोड़ी देर पहले जो पत्नी या माशूका बिस्तर में उस के साथ तरहतरह से मजे लूट और लुटा रही थी, उस के दिमाग में कितना खतरनाक प्लान पनप रहा है.

तकरीबन सभी मामलों में औरतों ने सैक्स का लुत्फ लेने और देने के बाद ही मर्द को हमेशा के लिए मजे से महरूम किया. ऐसा ही एक मामला बीती 7 जनवरी को सोनीपत से सामने आया था, जिस में सरिता नाम की एक औरत ने अपने पति रामकिशन की हत्या प्राइवेट पार्ट दबा कर कर दी थी. रामकिशन एक मैरिज गार्डन में केयरटेकर की नौकरी करता था और गांजा पीने की लत का शिकार था. यहां तक तो सरिता बरदाश्त करती रही, लेकिन परेशान उस वक्त हो उठती जब पोर्न फिल्में देखने का भी आदी हो गया रामकिशन जबरन उसे भी पोर्न फिल्में दिखाता था और उन्हीं के मुताबिक जिस्मानी ताल्लुक बनाने के लिए मजबूर करने लगता था. इसी बात के चलते सरिता तंग चुकी थी, इसलिए उस ने सतपाल नाम के एक नौजवान की मदद से रामकिशन की हत्या कर दी.                     


अमेरिका से आया घातक चलन
भारत में मर्दों के प्राइवेट पार्ट काटने का जुर्म अब फैशन की शक्ल में पसर रहा है, लेकिन यह बहुत पुराना नहीं है. पिछले 5 सालों में ऐसी वारदात बढ़ी हैं. इन की छानबीन बताती है कि शायद पहली एफआईआर साल 2017 में केरल के तिरुअनंतपुरम में दर्ज हुई थी, जिस पर देशभर का ध्यान गया था. 23 साला कानून की एक छात्रा ने एक धर्मगुरु हरि स्वामी का प्राइवेट पार्ट काट डाला था और खुद ही पुलिस को खबर की थी. हरि स्वामी छात्रा के बीमार पिता को तंत्रमंत्र और ?ाड़फूंक के जरीए ठीक करने के बहाने घर में आताजाता था. इसी दौरान उस ने छात्रा का यौन शोषण करना शुरू कर दिया था, जो कोई 3 साल तक चला. इस से छात्रा तंग गई और उस ने रहेगा बांस और बजेगी बांसुरी की तर्ज पर हरि स्वामी का प्राइवेट पार्ट ही काट डाला. हालांकि, इस से पहला ऐसा कभी नहीं हुआ था या नहीं हुआ होगा, यह गारंटी से नहीं कहा जा सकता. मुमकिन यह है कि कोई रिपोर्ट ही दर्ज हुई हो या फिर लोकलाज के चलते मामलों ने तूल पकड़ा हो. अब मामले जानबू? कर तूल दिए जाते हैं, ताकि औरतों को बदनाम किया जा सके और उन की इमेज बिगाड़ी जा सके.


यहां मकसद कतई अपराधी औरतों या किसी भी किस्म के अपराध की वकालत करना नहीं है, लेकिन इस हकीकत से इनकार नहीं किया जा सकता कि जब कोई औरत किसी अपराध को अंजाम देती है, तो मीडिया उसे बढ़ाचढ़ा कर पेश करता है. पेश क्या करता है, अपनी दुकान चलाने के लिए सुर्खियां लगा कर बेचता है. यह उस की मजबूरी भी दिखती है, क्योंकि प्राइवेट पार्ट काटे जाने पर मीडिया में ही प्रचलित यह कहावत काम करती है कि कुत्ता आदमी को काटे तो कोई खास खबर नहीं बनती, लेकिन कोई आदमी अगर कुत्ते को काट ले, तो जरूर खबर खास हो जाती है. दुनियाभर की बात करें तो पहला चर्चित मामला अमेरिका के वर्जिनिया राज्य से  साल 1993 के जून महीने में सामने आया था. 24 साला बेहद खूबसूरत लारेना बाबिट की शादी 26 साला जौन बेन बाबिट से साल 1989 में हुई थी. 23 जून, 1993 को लारेना ने जौन का प्राइवेट पार्ट काट डाला था, क्योंकि घटना की शाम जौन जबरदस्ती सैक्स पर उतारू हो आया था, जबकि लारेना की रत्तीभर इच्छा भी उस वक्त सैक्स की नहीं थी. यह सौ फीसदी रेप करने जैसा था, क्योंकि जितना लारेना मना करती जा रही थी, उतना ही जौन उस पर हावी हुआ जा रहा था.


यह मुकदमा दुनियाभर में चर्चित रहा था. अदालत में लारेना ने बयान दिया था कि रेप करने के बाद जौन जब सो गया तो वह बिस्तर से उठी, किचन में जा कर पानी पिया जहां उसे प्लेटफार्म पर रखा चाकू दिख गया और जिसे हाथ में ले कर वह वापस बैडरूम में आई और सोते हुए जौन का प्राइवेट पार्ट काट डाला.
लारेना यहीं नहीं रुकी, बल्कि उस ने कटा हुआ प्राइवेट पार्ट उठाया और अपनी कार में बैठ कर चली गई और काफी देर तक वह सड़कों पर बेमकसद घूमती रही. लेकिन उसे कार चलाने में दिक्कत हो रही थी, क्योंकि एक हाथ में उस ने कटा हुआ प्राइवेट पार्ट थामा हुआ था, जिसे कुछ देर बाद एक खेत में फेंक दिया. कुछ देर सोचने के बाद उस ने ही पुलिस को फोन कर सारी बात बता दी. पुलिस ने लारेना को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन मुकदमे की कार्रवाई के दौरान जो कई बातें उजागर हुईं उन से जौन का असल चेहरा सामने आया कि वह अव्वल दर्जे का लंपट था और जिस के कई और लड़कियों से भी अफेयर थे. असलियत लारेना की भी सामने आई कि उस ने एक पागलपन के तहत प्राइवेट पार्ट काटा था, इसलिए उसे 45 दिन की मामूली सजा के बाद वहां के कानून के तहत बरी कर दिया गया.


यह कहानी बहुत लंबी और दिलचस्प है. जौन को इस मामले और मुकदमे से शोहरत तो मिली ही साथ ही डाक्टरों ने आपरेशन कर उस का प्राइवेट पार्ट जोड़ दिया, जो पुलिस ने लारेना की निशानदेही पर बरामद किया था. इस से भी ज्यादा हैरत की बात यह कि वह पहले की तरह काम भी करने लगा. इतना काम करने लगा कि जौन ने 2 पोर्न फिल्मो में काम भी किया और कुछ टीवी शो में भी वह दिखा.
इस मामले को दुनियाभर के मीडिया ने कवरेज दिया था, क्योंकि बात वही आदमी द्वारा कुत्ते को काटे जाने की खबर जैसी थी.       

Crime Story: देवर के चक्कर में पति की हत्या

Crime Story: हरियाणा के सोनीपत जिले के थाना गन्नौर क्षेत्र के गांव झरगढ़ी के रहने वाले शाहनवाज की शादी 9 साल पहले साल 2016 में उत्तर प्रदेश के शामली जिले के थाना कांधला क्षेत्र के गांव गढ़ी दौलत की रहने वाली महफरीन से हुई थी.


शादी के बाद शाहनवाज और महफरीन की जिंदगी मजे से चल रही थी. शाहनवाज दिनभर काम कर के जब शाम को घर वापस लौटता, को महफरीन उस पर अपना भरपूर प्यार लुटाती थी. दोनों की जिंदगी हंसीखुशी से गुजर रही थी. इस दौरान महफरीन ने 2 बच्चों को जन्म दिया. पहला लड़का तकरीबन
8 साल का है, जबकि दूसरा लड़का तकरीबन 4 साल का है. जैसा कि सभी परिवारों में होता है, रिश्तेदार आतेजाते रहते हैं. शाहनवाज के मामा का लड़का तसव्वुर का भी वहां आनाजाना था. जब कभी तसव्वुर और महफरीन मिलते तो देवरभाभी होने के नाते एकदूसरे से हंसीमजाक भी करलेते थे.

शाहनवाज इसे यह सोच कर नजरअंदाज कर देता था कि देवरभाभी में मजाक तो चलता ही रहता है.
पिछले तकरीबन 6 महीने से महफरीन और तसव्वुर में अचानक से नजदीकियां ज्यादा बढ़ गई थीं. दोनों ने एकदूसरे का मोबाइल नंबर भी शेयर कर लिया था.
‘‘भाभी, आप मु? बहुत अच्छी लगती हो,’’ एक दिन तसव्वुर ने महफरीन से कहा.
इस पर महफरीन ने जवाब दिया, ‘‘रहने दो.’’ ‘‘रब करे आप को किसी की नजर लगे…’’ तसव्वुर ने कहा, ‘‘मैं आप को दिल से कह रहा हूं कि आप बहुत खूबसूरत हो.’’ हिम्मत कर के तसव्वुर ने अपने दिल की बात भी कह दी, ‘‘भाभी, मैं तुम से प्यार करता हूं और तुम्हारे बगैर रह नहीं सकता.’’


तसव्वुर के मुंह से यह बात सुन कर महफरीन को थोड़ी देर के लिए अजीब सा लगा, लेकिन जब दोनों में काफी देर तक बात हुई, तो महफरीन भी तसव्वुर को अपना दिल दे बैठी.
इस के बाद तो उन दोनों में घंटों बात होने लगी, फिर दोनों चोरीछिपे मिलने भी लगे. दोनों ने प्यार की तमाम हदों को पार कर दिया.


पर जब देखो तब और घंटों तसव्वुर से बात करने पर शाहनवाज को महफरीन पर शक हो गया. उस ने 1-2 बार महफरीन को समझाया भी, लेकिन वह नहीं मानी और लगातार तसव्वुर से संबंध जारी रखे.
3 अगस्त की रात को शाहनवाज ने महफरीन को मोबाइल पर किसी से बात करते रंगे हाथ पकड़ लिया, ‘‘किस से बात कर रही थी? क्या चल रहा है?’’ महफरीन बोली, ‘‘कुछ भी नहीं, मैं तो बस…’’शाहनवाज ने गुस्से में उस का फोन छीना और देखा कि कौल लौग में बारबार तसव्वुर का नाम था. वह भड़क उठा और महफरीन की पिटाई कर दी.


उस रात महफरीन की आंखों में सिर्फ आंसू नहीं थे, नफरत और बदले की आग भी थी. महफरीन ने उसी रात तसव्वुर को  फोन कर कहा, ‘‘अब बहुत हो गया, उसे रास्ते से हटाना होगा.’’रात में ही महफरीन और तसव्वुर ने एक ऐसी योजना बनाई, जिस का किसी को अंदाजा भी नहीं था. इस के बाद महफरीन ने शाहनवाज से ऐसा बरताव किया जैसे पिटाई के बाद वह शाहनवाज की बात मान गई हो.

उस ने शाहनवाज को इस का जरा भी अहसास नहीं होने दिया कि उस के दिमाग में क्या चल रहा है.
7 अगस्त, 2025 को शामली जनपद के गांव खुरगान के बाशिंदे और शाहनवाज के ममेरे साले इमलाक की शादी थी. महफरीन और शाहनवाज ने मिल कर शादी में जाने का प्रोग्राम बनाया.


महफरीन बोली, ‘‘हम बाइक पर जाएंगे, ताकि जल्दी पहुंच सके, क्योंकि हरियाणा की बसों में बहुत भीड़ चल रही है. फिर गांव तक पहुंचने के लिए साधन भी नहीं मिलता है. बसअड्डे पर खड़े होकर घंटों इंतजार करना पड़ता है. अपनी बाइक होगी तो आसानी से घर तक पहुंच जाएंगे.’’


‘‘हां, यह सही रहेगा गरमी भी बहुत ज्यादा है. अपना साधन होगा तो पहुंचने में आसानी रहेगी,’’ शाहनवाज ने जवाब दिया, फिर थोड़ा रुक कर बोला, ‘‘एक दिन पहले चलेंगे. काफी दिन हो गए, तुम्हारे परिवार वालों से भी नहीं मिला हूं मैं. वे भी कहते रहते हैं…’’‘‘रात को तुम्हारे मायके गांव गढ़ी दौलत चलेंगे अगले दिन वहीं से खुगरान चलेंगे,’’ शाहनवाज ने अपना प्लान बताया.


जैसा कि महफरीन और शाहनवाज ने शादी के लिए प्रोग्राम बनाया था, उसी के मुताबिक 6 अगस्त, 2025 को दोनों बाइक पर सवार हो कर गांव गढ़ी दौलत पहुंच गए.शाहनवाज को देख कर महफरीन के मायके वाले भी बहुत खुश हुए. सभी ने घर और परिवार का हालचाल पूछा. दामादजी घर पर आए थे, तो शाहनवाज की खातिरदारी भी अच्छी तरह से हुई.


7 अगस्त की सुबह शाहनवाज अपनी बीवी महफरीन को बाइक पर बैठा कर गांव खुरगान के लिए निकल पड़ा. गांव में पहुंचने से पहले कसबा कैराना में उस ने कुछ सामान भी खरीदा और फिर से चल पड़ा.
बाइक पर पीछे बैठी महफरीन फोन पर बारबार किसी से बात कर रही थी. बाइक की स्पीड तेज होने के चलते वह समझ नहीं पा रहा था. उसे केवल इतना ही समझ आया कि शायद शादी वाले घर से फोन रहे होंगे कि कितनी देर में पहुंचोगे.


लेकिन महफरीन किसी से कोडवर्ड में बात कर रही थी. उस ने बोला, ‘मंजिल आने वाली है…’ थोड़ा आगे चलने पर उस ने फिर से कोडवर्ड में बात की, ‘पुल पार करोऔर इस के बाद फोन पर फिर से कहाबस थोड़ा इंतजार करो.’ महफरीन के इन कोडवर्ड से खून और धोखे की गंध रही थी. सुबह के 10 बज रहे थे. शाहनवाज और महफरीन की बाइक नैशनल हाईवे पर दौड़ी जा रही थी.

जब वे पानीपतहरिद्वार नैशनल हाईवे पर बने एक फ्लाईओवर से थोड़ा आगे बेरी के बाग के निकट पहुंचे, तो पीछे से 2 बाइकों पर सवार 4 लड़कों ने ओवरटेक कर शाहनवाज की बाइक में टक्कर मार दी और शाहनवाज को डंडा मार कर बाइक रुकवा ली. उन्होंने चाकू से शाहनवाज पर ताबड़तोड़ कई वार किए. एक लड़के ने उस पर तमंचे से गोली चलाई. गंभीर रूप से घायल शाहनवाज सड़क पर नीचे गिर गया. वारदात को अंजाम देने के बाद वे सभी हमलावर फरार हो गए.


शाहनवाज की आंखों में दर्द और धोखे कीलक थीशायद आखिरी बार उस ने महफरीन को देखा, जो चुपचाप खड़ी थी. महफरीन ने डायल 112 को फोन किया और पुलिस को सूचना दी, ‘‘हम पर हमला हुआ है. बदमाशों ने मेरे पति को मार डाला.’’ पुलिस मौके पर पहुंची और सड़क पर घायल पड़े शाहनवाज को अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे मरा हुआ घोषित कर दिया. जानकारी पा कर सोनीपत से शाहनवाज के परिवार वाले भी कैराना पहुंच गए. उन्होंने पुलिस को डेढ़ लाख रुपए की दूल्हे के लिए ले जाई जा रही नोटों की माला और बाइक लूटने की सूचना दी.


एसपी रामसेवक गौतम, एएसपी संतोष कुमार सिंह और सीओ कैराना श्याम सिंह मौके पर पहुंचे. इस दौरान पुलिस ने मौके से शाहनवाज की बाइक भी बरामद की. फोरैंसिक टीम ने पहुंच कर सुबूत जुटाए.
वहीं, अस्पताल में महफरीन जमीन पर गिर कर बारबार बेहोशी का नाटक करने लगी, रोती रही. महफरीन की तरफ से कैराना कोतवाली में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई गई.

2 डाक्टरों की टीम द्वारा शाहनवाज की लाश का पोस्टमार्टम कराया गया
तो उस के शरीर में गोली लगना भी पाया गया, चाकुओं से वार किए गए थे, सो अलग.कैराना पुलिस के मुताबिक, महफरीन के बयान लिए तो उस ने पुलिस को चाकुओं से हमला करना ही बताया. पुलिस को महफरीन की बातों में दम नहीं लगा. उस की आंखों में पति की मौत के आंसू जरूर थे, लेकिन पकड़े जाने का डर भी साफ दिख रहा था.


पुलिस ने महफरीन को दोबारा से बयान लेने के लिए बुलाया, तो उस ने बयान देने से मना कर दिया. इस पर पुलिस को शक हुआ तो पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए उठा लिया. इसी दौरान केस के खुलासे के लिए लगाई गई टीमों ने जब महफरीन की कौल डिटेल खंगाली तो सारे राज खुलते चले गए.
तसव्वुर से महफरीन की लगातार बातचीत और लोकेशन शेयरिंग से पूरा राज खुला. पुलिस की कड़ी पूछताछ में महफरीन टूट गई.


‘‘हांमैं ने करवाया मर्डरतसव्वुर से प्यार करती हूं. शाहनवाज ने मारा था  पिटाई सह नहीं पाई.’’
महफरीन ने आगे बताया कि शाहनवाज ने उसे तसव्वुर से मोबाइलपर बात करते हुए रंगे हाथ पकड़ा था. इस के बाद दोनों के बीच  झगड़ा हुआ. शाहनवाज ने उस की पिटाई भी की थी. इसी के बाद उस ने प्रेमी तसव्वुर के साथ मिल कर शाहनवाज की हत्या की योजना बनाई. उस का काम सिर्फ लोकेशन देना था.

हत्या की प्लानिंग के तहत उसे शाहनवाज को सही समय पर सही जगह तक ले जाना था.
कैराना और आसपास लगे 10 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों में 2 बाइकों पर सवार 4 हमलावर नजर आए.फुटेज से उन की बाइक का नंबर मिला. इस के कुछ ही घंटों में हत्या के आरोपी तसव्वुर और शोएब को पकड़ लिया गया. पुलिस की जांच में सामने आया है कि हत्या में इस्तेमाल तमंचा और चाकू गढ़ी दौलत गांव के एक नौजवान ने मुहैया कराए थे.   

लेखक     महेश कांत शिवा

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