Crime Story: राजस्थान. कभी मोबाइल स्क्रीन पर शुरू हुई एक बातचीत धीरेधीरे भरोसे में बदली. भरोसे से लालच पैदा हुआ और लालच ने हत्या की राह खोल दी. दुष्यंत शर्मा हत्याकांड की कहानी आज भी उतनी ही सिहरन पैदा करती है, जितनी साल 2018 में की थी. अब इसी कहानी में एक नया चैप्टर जुड़ गया है. इस हत्याकांड की मुख्य दोषी प्रिया उर्फ नेहा सेठ एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह उस की शादी है, जो वह जेल की सलाखों के बीच मिले नए प्रेमी के साथ करने जा रही है.
आजीवन कारावास की सजा काट रही प्रिया सेठ को शादी के लिए 15 दिन की पैरोल दी गई है. जेल के भीतर बना रिश्ता अब सामाजिक रस्मों में बदलने की तैयारी में है. यह खबर सामने आते ही दुष्यंत शर्मा हत्याकांड एक बार फिर लोगों की यादों में ताजा हो गया है. वही सवाल फिर खड़े हो गए हैं. क्या घिनौने अपराध के बाद जिंदगी को नई शुरुआत मिल सकती है या फिर कानून सजा देता है, लेकिन जिंदगी रुकती नहीं?
राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद जिला पैरोल एडवाइजरी कमेटी ने प्रिया सेठ की ओर से पेश रिप्रजैंटेशन को स्वीकार करते हुए उसे 15 दिन की पैरोल मंजूर की. इसी के साथ हत्या के एक और दोषी हनुमान प्रसाद को भी पैरोल दी गई. दोनों इस समय जयपुर की खुली जेल में सजा काट रहे हैं.
दिखावे की जिंदगी और बढ़ता लालच प्रिया सेठ की जिंदगी बाहर से जितनी चमकदार दि
खती थी, अंदर से उतनी ही उलझी हुई थी.
पुलिस जांच में सामने आया था कि वह सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स के जरीए अमीर नौजवानों से मेलजोल बढ़ाती थी. महंगे कपड़े, ब्रांडेड परफ्यूम, हवाई यात्राएं और आलीशान लाइफ स्टाइल उस का शौक बन चुके थे. बताया गया कि उस का मासिक खर्च तकरीबन डेढ़ लाख रुपए तक पहुंच गया था. इसी दौरान प्रिया सेठ की जिंदगी में दीक्षांत कामरा आया. दोनों के बीच प्रेम संबंध बने और वे लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगे. लेकिन दीक्षांत पर तकरीबन 21 लाख रुपए का कर्ज था. यही कर्ज धीरेधीरे एक खतरनाक साजिश की वजह बना.
डेटिंग ऐप से मौत तक
दुष्यंत शर्मा से प्रिया की मुलाकात डेटिंग ऐप टिंडर के जरीए हुई थी. दुष्यंत टिंडर पर विवान कोहली नाम की फर्जी पहचान से मौजूद था. वह शादीशुदा था, लेकिन खुद को दिल्ली का अमीर बिजनैसमैन बताता था. उस की प्रोफाइल एक रईस और कामयाब इनसान की तसवीर पेश करती थी. यही झूठ उस की सब से बड़ी कमजोरी बन गया. 3 महीने तक बातचीत चली. भरोसा गहराया. फरवरी, 2018 में दोनों ने आमनेसामने मिलने का फैसला किया. प्रिया ने दुष्यंत को किराए के मकान में मिलने के लिए बुलाया.
दुष्यंत खुशीखुशी वहां पहुंच गया. उसे अंदाजा नहीं था कि यह मुलाकात पहले से रची गई साजिश का हिस्सा है. जैसे ही दुष्यंत मकान में दाखिल हुआ, प्रिया के साथ मौजूद दीक्षांत कामरा और लक्ष्य वालिया ने उसे काबू में कर लिया. इस के बाद दुष्यंत के परिवार को फिरौती के लिए फोन किया गया. पिता की बेबसी दुष्यंत के पिता रामेश्वर प्रसाद शर्मा को बेटे का फोन आया. कांपती आवाज में दुष्यंत कह रहा था, ‘पापा ये लोग मुझे मार डालेंगे. 10 लाख रुपए दे कर मुझे बचा लीजिए.’
इस के बाद प्रिया सेठ ने फोन छीन लिया और पैसे जमा करने का दबाव बनाने लगी. परिवार के पास इतनी बड़ी रकम नहीं थी. किसी तरह 3 लाख रुपए का इंतजाम किया गया. इस के बावजूद आरोपियों का लालच खत्म नहीं हुआ. सूटकेस में बंद एक जिंदगी पहले दुष्यंत का गला घोंटने की कोशिश की गई, फिर तकिए से उस का मुंह दबाया गया. जब वह फिर भी जिंदा रहा, तो दीक्षांत ने चाकू लाने को कहा. प्रिया चाकू ले कर आई और दुष्यंत का गला काट दिया गया.
हत्या के बाद लाश को सूटकेस में बंद किया गया. पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर चाकू से कई वार किए गए. 4 मई, 2018 को जयपुर के बाहर एक गांव में सूटकेस में दुष्यंत की लाश मिली. दुष्यंत के पिता ने 3 मई, 2018 को झोटवाड़ा थाने में अपहरण का मामला दर्ज कराया था. उसी रात आमेर थाना क्षेत्र में लैश मिलने की सूचना ने पूरे मामले को उजागर कर दिया. पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की और 4 मई को प्रिया सेठ, दीक्षांत कामरा और लक्ष्य वालिया को गिरफ्तार कर लिया.
अदालत का सख्त फैसला
पूछताछ के दौरान 1-1 कर पूरी साजिश सामने आ गई. मोबाइल चैट, काल डिटेल्स और दूसरे तकनीकी सुबूतों ने आरोपियों की भूमिका साफ कर दी. बाद में प्रिया सेठ ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उस ने बताया कि यह पूरी योजना उस के प्रेमी दीक्षांत कामरा पर चढ़े तकरीबन 21 लाख रुपए के कर्ज को चुकाने के लिए बनाई गई थी. यह मामला अदालत में चला. अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान और तकनीकी सुबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस पेश किया.
सुनवाई के बाद अदालत ने 24 नवंबर, 2023 को प्रिया सेठ, दीक्षांत कामरा और लक्ष्य वालिया को भारतीय दंड संहिता की धारा 342, 302, 201 और 120 बी के तहत दोषी ठहराते हुए तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. आज का सवाल सजा के दौरान प्रिया सेठ की नजदीकियां हत्या के एक और दोषी हनुमान प्रसाद से बढ़ीं. जेल के भीतर बना यह रिश्ता अब शादी तक पहुंच गया है. 15 दिन की पैरोल ने समाज के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.
दुष्यंत शर्मा हत्याकांड सिर्फ एक अपराध नहीं है. यह डिजिटल युग में रिश्तों की खतरनाक हकीकत है. झूठी पहचान, दिखावा, लालच और एक गलत फैसला, जिस ने एक नौजवान की जिंदगी छीन ली.
कानून ने सजा दी है, लेकिन पीडि़त परिवार का दर्द आज भी जस का तस है. यही इस खुलासे की सब से कड़वी हकीकत है.
राकेश खुडिया




