Crime Story: शर्मनाक कमांडो काजल दहेज लोभी पति ने मारा

Crime Story: रक्षा मंत्रालय. यह शब्द सुनते ही सब से पहला खयाल यही आता है कि ऐसा मंत्रालय जो देश की रक्षा के लिए बनाया गया है, ताकि भारत के बाहरी और भीतरी दुश्मन इस देश को हलके में लें.
अब कमांडो शब्द पर ध्यान देते हैं. इसे सुनते ही एक ऐसे शख्स की इमेज मन में कौंध जाती है, जो तन और मन से इतना मजबूत होता है कि अगर अपनी पर जाए तो कइयों पर अकेला ही भारी पड़ जाए.
अब काजल और अंकुर की बात करते हैं. काजल दिल्ली पुलिस की जांबाज महिला कमांडो थी और अंकुर रक्षा मंत्रालय में क्लर्क के पद पर काम करता है.

दोनों ने प्रेम विवाह किया था. अंकुर काजल दिल्ली के मोहन गार्डन में रहते थे. उन का एक डेढ़ साल का बेटा भी है. काजल 4 महीने के पेट से थी. ऊपरी तौर पर यह शादी बड़ी शांत लग रही थी. पतिपत्नी दोनों कमाऊ, सरकारी नौकरी, गोद में बेटा और दूसरे बच्चे के आने की तैयारी. छोटा परिवार, खुशियां अपार.
पर 22 जनवरी, 2026 की रात को कुछ ऐसा हुआ, जिस ने इस शादी की पोल खोल दी और साथ ही इस बात का भी खुलासा कर दिया कि मजबूत से मजबूत औरत भी अपने घर में कितनी अबला बन कर रह जाती है. काजल को तो अपने औरत होने की कीमत अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी.


22 जनवरी, 2026 की रात के तकरीबन 10 बजे काजल पर उस के पति अंकुर ने जानलेवा हमला किया. सिर पर लोहे के डंबल से कई वार किए गए, जिस से काजल को गंभीर चोटें आईं. हमले के बाद आरोपी पति अंकुर ही काजल को मोहन गार्डन में बने तारक अस्पताल ले कर गया. अस्पताल में काजल की हालत बेहद नाजुक थी. वहां के डाक्टरों ने काजल को गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश के एक निजी अस्पताल में रैफर किया, जहां कई दिनों तक जिंदगी और मौत के बीच खेलने के बाद आखिरकार 27 जनवरी, 2026 को काजल ने दम तोड़ दिया. दहेज बना इस खून की वजह लव मैरिज और दहेज की मांग?

क्या यह सवाल थोड़ा अटपटा नहीं है? बिलकुल है, क्योंकि जब 2 लोग अपनी मरजी से प्यार में पड़ कर शादी करते हैं, तो उन में दहेज जैसी सामाजिक बुराई की जगह तो कहीं से नहीं बनती है, पर काजल के परिवार वालों का आरोप है कि शादी के महज 15 दिन बाद ही काजल के ससुराल पक्ष ने गाड़ी और पैसों की मांग शुरू कर दी थी. काजल को ताने दिए जाने लगे थे और उसे सताया जाने लगा था. कई बार समझौता कराने की कोशिश भी हुई.


इतना ही नहीं, काजल ने दिल्ली में अलग रहने का फैसला भी किया, लेकिन आरोप है कि पति अंकुर वहां भी गाड़ी और पैसों की मांग को ले कर उस के साथ मारपीट करता रहता था. काजल के परिवार के मुताबिक, काजल सबकुछ सहती रही, क्योंकि उसे अपने कैरियर और होने वाले बच्चे की चिंता थी.
काजल का परिवार दावा कर रहा है कि वह सबकुछ सहती रहती थी. पर क्यों? क्या वह अपाहिज थी? नहीं, वह तो 27 साल की जांबाज कमांडो थी. क्या वह अपना कैरियर और होने वाला बच्चा बचा पाई? नहीं. आज दोनों ही इस दुनिया में नहीं हैं.


मर्द मारे तो क्या गलत तो क्या यह मान लिया जाए कि जब काजल जैसी मजबूत औरत अपनी ससुराल में पिट सकती है, तो फिर एक आम घरेलू औरत पर तो परिवार की इज्जत की खातिर जुल्म होते ही रहते होंगे? इस बात को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, पर जरा गहराई से सोचा जाए तो भारतीय समाज में आज भी लड़कियों को इस तरह से पाला जाता है कि उन्हें हर हाल में मर्द के साए की जरूरत पड़ती ही पड़ती है. घर में पिता और भाई और सुसराल में पति ही उन का रक्षक है. पर अगर औरतें ही पति से होने वाली पिटाई को सही मानती हों तो? कुछ साल पहले बीबीसी ने इसी सवाल पर एक रिपोर्ट छापी थी.


दरअसल, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण या (एनएफएचएस-5) की रिपोर्ट में कहा गया था कि औसतन
40 फीसदी से ज्यादा औरतों ने पतियों द्वारा कुछ हालात में पत्नियों को पीटना सही बताया था, जैसे अगर औरतें घर या बच्चों की अनदेखी करती हैं. सासससुर का खयाल नहीं रखती हैं. बिना बताए घर से बाहर निकलती हैं वगैरह. समस्या यहीं से बड़ी हो जाती है, जब देश की 51 फीसदी से ज्यादा औरतें यह स्वीकार कर लेती हैं कि पति से पिटना को बड़ा मुद्दा नहीं है. जो पति आप से प्यार करता है, कभीकभार वह आप पर हाथ उठा दे तो कोई बड़ी बात नहीं.


धर्मवादी सोच हावी यह पति को परमेश्वर मानने वाली सोच का नतीजा है, जो धर्म के ठेकेदार सदियों से औरतों के मन में भर रहे हैं. उन्हें बचपन से ही सिखा दिया जाता है कि घर से लड़की की डोली उठेगी
तो उस की लाश ही ससुराल से उठनी चाहिए, फिर चाहे पति कितना ही जल्लाद क्यों हो. यहीं से औरत को मर्द का गुलाम बनने की सीख पुख्ता होती है. कमांडो काजल अपने कैरियर और बच्चों (एक तो अभी दुनिया में आया ही नहीं था) के लिए जुल्म सह रही थी. पर वह तो अपने पैरों पर मजबूती से खड़ी थी, फिर क्यों उस ने पति के पहले वार पर ही जोरदार जवाब नहीं दिया?


यह सवाल बहुत ज्यादा अहम है हर उस औरत के लिए, जो परिवार बचाने के लिए कोल्हू के बैल की तरह जुटी पड़ी रहती है, पर इस से अंकुर जैसे मर्दों को कोई फर्क नहीं पड़ता है. घरेलू हिंसा इसी गंदी मर्दवादी सोच का नतीजा है.   

Crime Story: डेटिंग ऐप झूठा प्यार और फिरौती

Crime Story: राजस्थान. कभी मोबाइल स्क्रीन पर शुरू हुई एक बातचीत धीरेधीरे भरोसे में बदली. भरोसे से लालच पैदा हुआ और लालच ने हत्या की राह खोल दी. दुष्यंत शर्मा हत्याकांड की कहानी आज भी उतनी ही सिहरन पैदा करती है, जितनी साल 2018 में की थी. अब इसी कहानी में एक नया चैप्टर जुड़ गया है. इस हत्याकांड की मुख्य दोषी प्रिया उर्फ नेहा सेठ एक बार फिर चर्चा में है. इस बार वजह उस की शादी है, जो वह जेल की सलाखों के बीच मिले नए प्रेमी के साथ करने जा रही है.


आजीवन कारावास की सजा काट रही प्रिया सेठ को शादी के लिए 15 दिन की पैरोल दी गई है. जेल के भीतर बना रिश्ता अब सामाजिक रस्मों में बदलने की तैयारी में है. यह खबर सामने आते ही दुष्यंत शर्मा हत्याकांड एक बार फिर लोगों की यादों में ताजा हो गया है. वही सवाल फिर खड़े हो गए हैं. क्या घिनौने अपराध के बाद जिंदगी को नई शुरुआत मिल सकती है या फिर कानून सजा देता है, लेकिन जिंदगी रुकती नहीं?


राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद जिला पैरोल एडवाइजरी कमेटी ने प्रिया सेठ की ओर से पेश रिप्रजैंटेशन को स्वीकार करते हुए उसे 15 दिन की पैरोल मंजूर की. इसी के साथ हत्या के एक और दोषी हनुमान प्रसाद को भी पैरोल दी गई. दोनों इस समय जयपुर की खुली जेल में सजा काट रहे हैं.
दिखावे की जिंदगी और बढ़ता लालच प्रिया सेठ की जिंदगी बाहर से जितनी चमकदार दि
खती
थी, अंदर से उतनी ही उलझी हुई थी.

पुलिस जांच में सामने आया था कि वह सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स के जरीए अमीर नौजवानों से मेलजोल बढ़ाती थी. महंगे कपड़े, ब्रांडेड परफ्यूम, हवाई यात्राएं और आलीशान लाइफ स्टाइल उस का शौक बन चुके थे. बताया गया कि उस का मासिक खर्च तकरीबन डेढ़ लाख रुपए तक पहुंच गया था. इसी दौरान प्रिया सेठ की जिंदगी में दीक्षांत कामरा आया. दोनों के बीच प्रेम संबंध बने और वे लिवइन रिलेशनशिप में रहने लगे. लेकिन दीक्षांत पर तकरीबन 21 लाख रुपए का कर्ज था. यही कर्ज धीरेधीरे एक खतरनाक साजिश की वजह बना.


डेटिंग ऐप से मौत तक
दुष्यंत शर्मा से प्रिया की मुलाकात डेटिंग ऐप टिंडर के जरीए हुई थी. दुष्यंत टिंडर पर विवान कोहली नाम की फर्जी पहचान से मौजूद था. वह शादीशुदा था, लेकिन खुद को दिल्ली का अमीर बिजनैसमैन बताता था. उस की प्रोफाइल एक रईस और कामयाब इनसान की तसवीर पेश करती थी. यही झूठ उस की सब से बड़ी कमजोरी बन गया. 3 महीने तक बातचीत चली. भरोसा गहराया. फरवरी, 2018 में दोनों ने आमनेसामने मिलने का फैसला किया. प्रिया ने दुष्यंत को किराए के मकान में मिलने के लिए बुलाया.

दुष्यंत खुशीखुशी वहां पहुंच गया. उसे अंदाजा नहीं था कि यह मुलाकात पहले से रची गई साजिश का हिस्सा है. जैसे ही दुष्यंत मकान में दाखिल हुआ, प्रिया के साथ मौजूद दीक्षांत कामरा और लक्ष्य वालिया ने उसे काबू में कर लिया. इस के बाद दुष्यंत के परिवार को फिरौती के लिए फोन किया गया. पिता की बेबसी दुष्यंत के पिता रामेश्वर प्रसाद शर्मा को बेटे का फोन आया. कांपती आवाज में दुष्यंत कह रहा था, ‘पापा ये लोग मुझे मार डालेंगे. 10 लाख रुपए दे कर मुझे बचा लीजिए.’


इस के बाद प्रिया सेठ ने फोन छीन लिया और पैसे जमा करने का दबाव बनाने लगी. परिवार के पास इतनी बड़ी रकम नहीं थी. किसी तरह 3 लाख रुपए का इंतजाम किया गया. इस के बावजूद आरोपियों का लालच खत्म नहीं हुआ. सूटकेस में बंद एक जिंदगी पहले दुष्यंत का गला घोंटने की कोशिश की गई, फिर तकिए से उस का मुंह दबाया गया. जब वह फिर भी जिंदा रहा, तो दीक्षांत ने चाकू लाने को कहा. प्रिया चाकू ले कर आई और दुष्यंत का गला काट दिया गया.


हत्या के बाद लाश को सूटकेस में बंद किया गया. पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर चाकू से कई वार किए गए. 4 मई, 2018 को जयपुर के बाहर एक गांव में सूटकेस में दुष्यंत की लाश मिली. दुष्यंत के पिता ने 3 मई, 2018 को झोटवाड़ा थाने में अपहरण का मामला दर्ज कराया था. उसी रात आमेर थाना क्षेत्र में लैश मिलने की सूचना ने पूरे मामले को उजागर कर दिया. पुलिस ने तेजी से जांच शुरू की और 4 मई को प्रिया सेठ, दीक्षांत कामरा और लक्ष्य वालिया को गिरफ्तार कर लिया.


अदालत का सख्त फैसला
पूछताछ के दौरान 1-1 कर पूरी साजिश सामने गई. मोबाइल चैट, काल डिटेल्स और दूसरे तकनीकी सुबूतों ने आरोपियों की भूमिका साफ कर दी. बाद में प्रिया सेठ ने भी अपना अपराध स्वीकार कर लिया. उस ने बताया कि यह पूरी योजना उस के प्रेमी दीक्षांत कामरा पर चढ़े तकरीबन 21 लाख रुपए के कर्ज को चुकाने के लिए बनाई गई थी. यह मामला अदालत में चला. अभियोजन पक्ष ने गवाहों के बयान और तकनीकी सुबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस पेश किया.

सुनवाई के बाद अदालत ने 24 नवंबर, 2023 को प्रिया सेठ, दीक्षांत कामरा और लक्ष्य वालिया को भारतीय दंड संहिता की धारा 342, 302, 201 और 120 बी के तहत दोषी ठहराते हुए तीनों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. आज का सवाल सजा के दौरान प्रिया सेठ की नजदीकियां हत्या के एक और दोषी हनुमान प्रसाद से बढ़ीं. जेल के भीतर बना यह रिश्ता अब शादी तक पहुंच गया है. 15 दिन की पैरोल ने समाज के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं.


दुष्यंत शर्मा हत्याकांड सिर्फ एक अपराध नहीं है. यह डिजिटल युग में रिश्तों की खतरनाक हकीकत है. झूठी पहचान, दिखावा, लालच और एक गलत फैसला, जिस ने एक नौजवान की जिंदगी छीन ली.
कानून ने सजा दी है, लेकिन पीडि़त परिवार का दर्द आज भी जस का तस है. यही इस खुलासे की सब से कड़वी हकीकत है.                        

राकेश खुडिया

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