Relationship Tips: कभी तलाक नहीं होगा, अगर हसबैंडवाइफ फौलो करेंगे यह रिलेशनशिप रूल

Relationship Tips: शादी एक खूबसूरत बंधन है, लेकिन इसे निभाना उतना ही मुश्किल भी है. पहले के जमाने में जब रिश्तों की समझ और एक दूसरे के प्रति प्यार हुआ करता था तब लोग जिंदगी भर साथ निभा लेते थे बिना किसी शिकायत के मगर आज के दौर में हालात बदल चुके हैं. तलाक जैसे शब्द आम हो गए हैं, मानो अब रिश्तों की अहमियत कम हो गई हो. इस बदलाव की एक बड़ी वजह सोशल मीडिया भी है. आजकल बहुत से लोग इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब वीडियोज में दिखाए गए ‘परफेक्ट कपल्स’ को देखकर अपनी शादीशुदा जिंदगी से कंपेयर करने लगते हैं. अगर किसी वीडियो में दिखाया गया कि एक पति रोज अपनी पत्नी के लिए खाना बनाता है या पत्नी रोज अपने पति के पैर दबाती है, तो असल जिंदगी के रिश्तों में भी वैसी ही उम्मीदें जागने लगती हैं.

दिक्कत तब होती है जब ये उम्मीदें हकीकत नहीं बन पाती. बहुत से वीडियो सिर्फ व्यूज और लाइक्स के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन लोग उन्हें सच मान बैठते हैं. जबकि हर रिश्ता अलग होता है और हर इंसान की सोच अलग होती है. आज के समय में हर कोई कमाता है फिर चाहे वे पति हो या पत्नी क्योंकि महंगाई भरे इस दौर में एक की कमाई से घर चलाना काफी मुश्किल हो चुका है. महंगाई की बात ना भी करें तो आजकल लड़कियां भी चाहती हैं कि वे किसी पर डिपेंडेंट ना रहें और खुद पैसे कमाएं.

इसी के चलते दोनों में बराबर की ईगो भी जन्म ले लेती है और ऐसे में जब घर की जिम्मेदारियों की बात आती है तो पति सोचता है कि यह तो सिर्फ पत्नी का ही काम है लेकिन ऐसी सोच रखना बिल्कुल गलत है. अगर पत्नी कमाने जा सकती है तो पति को भी घर के काम करने में शर्म नहीं आनी चाहिए. अगर आप पूरे दिन काम करके थक जाते हैं ठीक उसी तरह आपकी पत्नी भी थकती है. आप सारी जिम्मेदारियां पत्नी पर नहीं डाल सकते.

दूसरी ओर, यह समझना भी जरूरी है कि अगर एक कमा भी रही है और सेल्फ डिपेंडेंट है तो इसका यह मतलब नहीं कि वह अपने पति की इज्जत करना छोड़ दे या फिर घर की जिम्मेदारियों से खुद को अलग कर ले. शादी एक ऐसा रिश्ता है जिसमें आपने एक-दूसरे का साथ देने का वादा किया है, तो फिर रिश्ते में ‘मैं’ और ‘तुम’ की जगह ‘हम’ होना चाहिए. अगर आपका पति घर के कामों में आपकी मदद करता है, तो यह उसकी समझदारी है. ऐसे में पत्नी का भी यह फर्ज़ बनता है कि वह ना सिर्फ पति के इमोशंस को समझे, बल्कि घर की बाकी जिम्मेदारियों में भी अपनी हिस्सेदारी निभाए.

रिश्ते में ईगो की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. सच्चा रिश्ता वही होता है जहां दोनों एक-दूसरे की बात सुनें, समझें और बिना किसी से तुलना किए एक दूसरे का साथ निभाएं. Relationship Tips

Sex Tips: कितना जरूरी सैक्स में अंगों को चूमना

Sex Tips: रेनू महीने में 26 दिन अपने पार्टनर के साथ सैक्स करती थी और शायद ही कोई दिन ऐसा जाता होगा जब वह पूरी तरह संतुष्ट नहीं होती थी. उसे अपनी सैक्स लाइफ बहुत शानदार लग रही थी.

‘‘डार्लिंग, जल्दी करो न… मैं अब और इंतजार नहीं कर सकती,’’ रेनू अपने पार्टनर को अपने प्राइवेट पार्ट पर अपना मुंह रख कर ओरल सैक्स के लिए जोश में लाती थी.

‘‘बस 2 मिनट और मेरी जान, नीचे भी पहुंच ही जाऊंगा, बस थोड़ा ऊपर से भी मजे लेने दो न,’’ कह कर रेनू का पार्टनर उस के स्तनों को चूमने और सहलाने में मस्त हो जाता था. इस सब में रेनू इतनी ज्यादा जोश में भर जाती थी कि वह जबरदस्ती अपने पार्टनर को नीचे धकेल कर उस के सिर को नीचे की तरफ झुका कर अपने अंग पर प्यार करने को कहने लगती.

‘‘बोलो मेरी जान, अब आ रहा है न मजा,’’ रेनू का पार्टनर जीभ अंदर डाल कर एक बार उस से पूछता.

रेनू बिना कोई शब्द कहे केवल ‘हम्म’ में जवाब देती. इस से उस का पार्टनर समझ जाता कि अब रेनू गहरे प्रेम सागर का मजा ले रही है और जब रेनू ऐसे शांत हो जाती थी, तो बस खेल एक मिनट का रह जाता था. इस शांति के बाद रेनू एक मिनट बाद ही अपने पार्टनर को बस करने को कहती. उस का पार्टनर समझ जाता था कि अब रेनू पूरी तरह संतुष्ट हो चुकी है.

सैक्स के इस पूरे खेल में रेनू को जिस घड़ी का इंतजार सब से ज्यादा रहता था, वह यही था कि कब उस का पार्टनर उस की छाती सहलाने के बाद उस के अंग पर अपनी जीभ चला कर उस की आग को शांत करे और उस का पार्टनर इस मामले में बिलकुल परफैक्ट था, जिसे रेनू की पलपल की टाइमिंग का पूरा अंदाजा रहता था कि कब वह किस लैवल तक जोश में आ रही है और कब उस के निजी अंगों में प्रीसैक्स लुब्रिकेशन (चिकनाहट आना) हो रहा है.

लेकिन अगर हम भारतीय माहौल में सैक्स संबंधों की बात करें, तो एक सवाल उठता है कि आखिर कितनी औरतें हैं जो रेनू की तरह अपनी सैक्स लाइफ में संतुष्ट होती हैं? कितने पार्टनर अपनी लव पार्टनर के निजी अंगों पर ओरल सैक्स ट्राई करते हैं?

अगर हम विज्ञान और कुदरत के सैक्स से जुड़े नियम देखें तो बहुत सी बातें चौंकाने वाली हैं. जिस प्रोसैस को को आम आदमी गंदा समझता है, असल में वह गंदा नहीं है.

अगर आप को लगता है कि सैक्स अंगों को होंठों से चूमा जाए या उन पर जीभ का इस्तेमाल किया जाए तो आप बीमार पड़ जाएंगे, तो आप गलत हैं. दरअसल, होता क्या है कि जब हम अपनी पार्टनर के स्तनों को सहलाना शुरू करते हैं और साथ ही साथ उस की कमर, जांघ और स्तनों के बीच के हिस्से को चूमते और चाटते हैं, तो उस के द्वारा औरत के शरीर में जो सैंसेशन बनता है, उस से उस के निजी अंगों में लुब्रिकेशन शुरू हो जाता है.

यूएस लाइब्रिकेशन में लैक्टबेसिलस नाम का बैक्टीरिया होता है जो उस के इर्दगिर्द पहले से जमा बैक्टीरिया को मारने की ताकत रखता है और साथ ही साथ इस की टाइमिंग देखें तो हम जब फोरप्ले के द्वारा अपनी पार्टनर को जोश में लाते हैं, तो उसी दौरान जैसे ही हम उस के निजी अंग की तरफ अपना
मुंह ले कर जाते हैं, हमारे मुंह में लार बनती है, जिस के चलते हम खुद इतना उत्सुक हो जाते हैं कि औरत के निजी अंग पर जीभ लगाने को उतावले हो जाते हैं.

यह वह कुदरती क्रिया है, जिस के द्वारा पार्टनर जैसे ही महसूस करती है कि उस के निजी अंग के अंदर उस के पार्टनर की जीभ ने प्रवेश किया है, तो वह इतनी उत्सुक हो जाती है कि सैक्सुअल इंटरकोर्स के किए इंतजार नहीं कर पाती. यह वह पल होता है जब वह सैक्स की शुरुआत के बाद केवल एक या 2 मिनट में संतुष्टि पा लेती है. Sex Tips

Relationship Advice: आपसी कलह की नुमाइश न लगाएं

Relationship Advice: कुछ दिन पहले की बात है. दिल्ली मैट्रो में एक जोड़ा चढ़ा. लड़का और लड़की दोनों की उम्र 24-25 साल के आसपास रही होगी. दोनों ही कमाऊ लग रहे थे. लड़की खूबसूरत थी और लड़का हैंडसम. दोनों ने कपड़े भी अच्छे ब्रांडेड पहने हुए थे.

पर थोड़ी देर के बाद उन दोनों में ऐसा कुछ हुआ कि बाकी सवारियों के कान उन की बातों पर लग गए.

लड़की ने लड़के से पूछा, ‘‘क्या आप शुक्रवार की शाम को अपने दोस्तों के साथ बैठे थे?’’

लड़का बोला, ‘‘हां, बैठा था. तो क्या हुआ?’’

‘‘तुम सब ने ड्रिंक भी की थी न?’’ लड़की ने जैसे उस लड़के की पोल खोलते हुए कहा.

‘‘हां, की थी. तुम मुद्दे की बात करो न कि क्या पूछना चाहती हो?’’ लड़के की आवाज में थोड़ी कड़वाहट आ गई थी.

‘‘वहां तुम सब ने बकवास भी की थी…’’ लड़की ने तेज आवाज में कहा.

‘‘जब लड़के पीने बैठते हैं, तो बकवास ही करते हैं. पर तुम मेरी जासूसी क्यों कर रही हो?’’ लड़का अब और तेज आवाज में बोला.

लड़की कुछ बोलती उस से पहले ही लड़के ने उस का हाथ ?ाटक कर कहा, ‘‘तुम्हें यह सब किस ने बताया?’’

लड़की ने जबान नहीं खोली, जबकि लड़का उस पर हावी हो गया. वह गुस्से में तमतमाते हुए बोला, ‘‘कौन है, नाम बता? मुझे गुस्सा मत दिला. जब इतना कुछ जानती है, तो नाम भी बता दे. अब डर क्यों रही है?’’

लड़की ने पहले तो अपना हाथ छुड़ाया और बड़बड़ाते हुए एक खाली सीट पर जा कर ‘धम्म’ से बैठ गई.

उन दोनों की यह आपसी लड़ाई सब ने सुनी और अनसुना भी कर दिया. पर यहां एक सवाल जरूर मन में उठा कि लोग अपनी पर्सनल बातों में इतने ज्यादा क्यों खो जाते हैं, जो अनजान लोगों के सामने अपनी भड़ास निकाल देते हैं और ऐसा जताते हैं कि कोई सुने तो सुने उन की बला से?

मजे की बात तो यह है कि यह वही पीढ़ी है, जो अपने घर में मां, बूआ, मौसी, चाचा, चाची जैसी अपने से बड़ी पीढ़ी को इस बात पर कोसती है कि वे लोग पीठ पीछे एकदूसरे की बुराई क्यों करते हैं या पड़ोस में क्या चल रहा है, इस पर मजे ले कर बातें क्यों करते हैं?

मैट्रो या बस जैसी सार्वजनिक सवारियों में यह आम हो गया है कि लोग आमनेसामने या फिर फोन पर चुगलखोरी करते दिखाई देते हैं. सास अपनी बहू की पोल खोलती दिख जाती है, तो बहू अपनी ननद के किस्से अपनी मां को सुनाती नजर आती है.

मर्द और लड़के भी इस सब में पीछे नहीं हैं. कोई औफिस में बौस की बखिया उधेड़ रहा होता है, तो कोई अपनी प्रेमिका को ब्लौक करने के किस्से सुना रहा होता है.

ऐसा होता क्यों है? क्यों हम अनजान लोगों के सामने अपने घरकुनबे का पुराण बांचने लग जाते हैं? इस की वजह यह है कि हमें यह सीख देने वाला शायद कोई बचा ही नहीं है कि सार्वजनिक जगह पर हमें कैसे बरताव करना है. और जब से सोशल मीडिया में ‘रीलरील’ खेलने का दौर चला है, तब से ऐसा लगने लगा कि हर कोई ‘गौसिप गैंग’ का हिस्सा बन गया है.

यहां सीख देने वाला कौन है? दरअसल, कुदरत ने हमें सुनने और बोलने की सैंस (इंद्रियां) तो दे दी है, पर कब और कितना बोलना है और कितना सुनना है, यह जो ‘व्यावहारिक बुद्धि’, जिसे इंगलिश में ‘कौमन सैंस’ कहते हैं, को इस्तेमाल करना हम भूलते जा रहे हैं.

पहले टीचर, परिवार और आसपड़ोस के बड़ेबूढ़े नई पीढ़ी को बता दिया करते थे कि इस ‘कौमन सैंस’ का कैसे इस्तेमाल करना है, पर अब तो स्कूलों में ऐसी बातें सिखाना गुजरे जमाने की बात हो गई है और अपनों की सुनता ही कौन है.

कभीकभार इस के नतीजे बहुत बुरे भी होते हैं, जो सार्वजनिक जगहों पर अमूमन दिखाई दे जाते हैं. जैसे क्रिकेट एक खेल है, जो मनोरंजन के लिए खेला जाता है, पर नासमझी की वजह से यह खेल का मैदान खूनी लड़ाई में बदलते देर नहीं लगती है.

18 फरवरी, 2025 को आकाश नाम का एक लड़का शाम को अपने दोस्तों के साथ फरीदाबाद के अगवानपुर चौक के पास बने दुर्गा बिल्डर के खाली प्लाट में क्रिकेट खेल रहा था. खेल के दौरान गेंद वहां मौजूद एक लड़के को लग गई, जिस से झगड़ा हो गया.

आसपास के लोगों ने उस समय मामला शांत करा दिया, लेकिन तकरीबन 15 मिनट बाद वही लड़का 5-6 साथियों के साथ लाठीडंडे और हौकी ले कर लौटा और आकाश पर हमला कर दिया. उन लोगों ने आकाश को इतना पीटा कि एक महीने अस्पताल में रहने के बाद उस की मौत हो गई.

इस वारदात में एक की जान गई और बाकी कोर्टकचहरी के चक्कर में फंसेंगे. पर ऐसी वारदात से एक सीख लेनी चाहिए कि कोई भी विवाद छोटी सी बात से शुरू होता है और हमारा अहम उसे इतना ज्यादा तूल दे देता है कि खेल का मनोरंजन मौत के मातम में बदल जाता है.

ऐसा ही कुछ घरेलू समस्याओं को सार्वजनिक जगह पर जाहिर करने से होता है. बहुत बार मैट्रो या बस वगैरह में 2 जानपहचान वालों की चुगलखोरी हाथापाई तक में बदलते देर नहीं लगाती है.

एक बार एक जोड़ा इस बात पर बहस करने लगा कि लड़की का पहना हुआ टौप कितने का होगा. लड़की ने ज्यादा कीमत बताई तो लड़के ने कहा कि सस्ता माल है. इसी बात पर उन दोनों ने अपने रिश्ते को सब के सामने उघाड़ना शुरू कर दिया. आखिर में लड़की ने लड़के को चांटा जड़ दिया और मैट्रो से उतर गई.

दिक्कत यह है कि हम आपसी गपशप और चुगलखोरी के साथ निजी बातों को सार्वजनिक करने के फर्क को समझ गए हैं. पहले गांवदेहात में लोग गपशप ज्यादा किया करते थे. उसी में बीच में चुगलखोरी और निजी बातों का तड़का लगा दिया जाता था और बात आईगई हो जाती थी.

पर अब चूंकि बातें करने की जगह और समय की कमी से हम मोबाइल फोन पर या कहीं भी आमनेसामने निजी बातों का पिटारा खोल कर बैठ जाते हैं. वहीं सारी गड़बड़ होती है. भीड़ में लोग आप की बातों को अनुसना करते हुए भी बड़े ध्यान से सुनते हैं और अनचाहे में ऐसी बातों के राजदार बन जाते हैं, जो बेहद निजी होती हैं.

नई पीढ़ी को इस सामाजिक बुराई से बचने के लिए अपने घरपरिवार वालों पर ध्यान देना चाहिए. उन के साथ समय बिताना चाहिए और घर की बातों को घर पर ही सुलझाना चाहिए. इस आदत से आप अपने रिश्ते बचा सकते हैं और कभी बात लड़ाई तक पहुंच भी जाए तो ठंडे दिमाग से उसे सुलझाने की कोशिश कर सकते हैं. सैंस के साथसाथ कौमन सैंस का भी इस्तेमाल करें. Relationship Advice

Happy Married Life: शरमाए नहीं, शादी से पहले पूछें – कितना कमाते हो

Happy Married Life: शादी हमारी जिंदगी का वो पल होता है जिसमें ना सिर्फ दो दिल बल्कि दो परिवार आपस में जुड़ते हैं. यह जिंदगी का एक ऐसा फैसला है, जहां रिश्तों की डोर सिर्फ प्यार से नहीं, बल्कि समझदारी और जिम्मेदारी से भी बंधती है. अकसर देखा जाता है कि शादी के बाद कुछ परेशानियां सामने आने लगती हैं क्योंकि हमें सामने वाले की आदतों, सोच और लाइफस्टाइल की पूरी जानकारी नहीं होती. ऐसा कहा भी जाता है कि शादी करना तो आसान है, लेकिन शादी को ठीक तरीके से निभा पाना उतना ही मुश्किल होता है. इस रिश्ते के लिए केवल प्यार काफी नहीं होता, बल्कि एकदूसरे को समझना, हर सिचुएशन में साथ निभाना और आपसी सोच की रिस्पैक्ट करना होता है.

एक सक्सेसफुल मैरिड लाइफ के लिए जरूरी है कि आप अपने होने वाले लाइफ पार्टनर को अच्छी तरह से जानें और समझें. क्योंकि शादी के बाद अगर सोच और आदतें मैच नहीं होगी, तो कई तरह की मुश्किलें सामने आ सकती हैं इसलिए आज हम आपको इन 3 जरूरी बातों के बारे में बताएंगे, जो आपको बिना किसी झिझक के अपने पार्टनर से शादी से पहले ही पूछ लेनी चाहिए.

फाइनेंस

जिंदगी के सफर को आरामदायक और सेफ बनाने के लिए फाइनेंशियल स्टेबिलिटी होना बेहद जरूरी होती है. ऐसे में यह जानना भी उतना ही जरूरी है कि आपका होने वाला लाइफ पार्टनर कितना कमाता है और क्या उस पर कोई लोन है. अक्सर लोग ऐसी बात करने से हिचकिचाते हैं लेकिन सच्चाई यही है कि शादी के पहले एकदूसरे की फाइनेंशियल स्थिति को समझना एक समझदारी भरा कदम होता है. इससे आप दोनों को फ्यूचर प्लानिंग करने में आसानी होगी.

फैमिली प्लानिंग

देखा गया है कि शादी के बाद कपल्स के बीच फैमिली प्लानिंग को लेकर लड़ाई हो जाती हैं. किसी एक को जल्दी बच्चा चाहिए होता है, जबकि दूसरा इसके लिए तैयार नहीं होता. ऐसे में यह बहुत जरूरी है कि आप शादी से पहले ही अपने पार्टनर से इस बारे में खुलकर बातचीत करें. ऐसी बातचीत से ना सिर्फ आपके माइंड में क्लैरिटी रहेगी बल्कि आप बेबी प्लानिंग के साथ साथ सेविंग्स भी कर सकते हैं. इसके साथ ही सेविंग कब और किस तरह बच्चे और आपके लिए हेल्पफुल हो सकती है इसे प्लान कर सकते हैं.

लाइफस्टाइल

आज के समय में हर इंसान की लाइफस्टाइल अलग होती है, कोई सुबह जल्दी उठकर दिन की शुरुआत करना पसंद करता है, तो किसी को देर तक सोना और रात में जागना अच्छा लगता है. कोई पार्टी और सोशल गैदरिंग में खुश रहता है जबकि किसी को शांति और सुकून भरा माहौल चाहिए होता है. ऐसे में शादी से पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि आपके होने वाले पार्टनर और उसके परिवार की लाइफस्टाइल कैसी है. इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि क्या आप उस माहौल में खुद को ढ़ाल पाएंगे या नहीं. यह बातचीत आगे चलकर आपके रिश्ते को बेहतर बनाने में काम आ सकती हैं. Happy Married Life

पति की जबरदस्ती से बचें कुछ इस तरह

Sex News in Hindi: श्वेता खाना खा कर सोने चली गई थी. उस का पति प्रदीप अभी घर नहीं लौटा था. पहले रात के खाने पर श्वेता पति का देर रात तक इंतजार करती थी. कुछ दिनों के बाद प्रदीप ने कहा कि अगर वह 10 बजे तक घर न आए तो खाने पर उस का इंतजार न किया करे. इस के बाद प्रदीप के आने में देर होने पर श्वेता खाना खा कर लेट जाती थी. उस दिन भी वह लेट तो गई थी, मगर उसे नींद नहीं आ रही थी. वह अपने संबंधों के बारे में सोच रही थी. उसे लग रहा था जैसे वह पति की जबरदस्ती का शिकार हो रही है. प्रदीप ज्यादातर देर रात घर लौटता था. इस के बाद कभी सो जाता था, तो कभी श्वेता को शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर करने लगता था. नींद के आगोश में पहुंच चुकी श्वेता को तब संबंध बनाना अच्छा नहीं लगता था. श्वेता को कभीकभी लगता जैसे पति प्यार न कर के बलात्कार कर रहा हो.

श्वेता अपने को यह सोच कर समझाती कि पति की शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिए ही शादी होती है, इसलिए उसे केवल पति की जरूरतों को पूरा करना चाहिए. इस जोरजबरदस्ती में श्वेता को 4 साल के विवाहित जीवन में 1-2 बार ही ऐसा लगा था कि प्रदीप प्यार के साथ संबंध बना सकता है, ज्यादातर श्वेता जोरजबरदस्ती का ही शिकार बनी थी. इस का प्रभाव उस के ऊपर कुछ इस तरह पड़ा कि वह शारीरिक संबंधों से चिढ़ने लगी. श्वेता और प्रदीप का 1 बेटा था. श्वेता जब कभी अपनी सहेली शालिनी से मिलती तो उसे पता चलता कि उन का पतिपत्नी का रिश्ता मजे में चल रहा है. एक दिन जब श्वेता ने अपनी परेशानी शालिनी को बताई, तो वह उसे सैक्स काउंसलर के पास ले गई.

पति से करें बात

काउंसलर ने बातचीत कर के यह जानने की कोशिश की कि श्वेता की परेशानी क्या है? श्वेता ने काउंसलर को बताया कि उस का पति उस समय उस से सैक्स संबंध बनाने की कोशिश करता है जब उस का मन नहीं होता है. कई बार जब वह इस के लिए मना करती है, तो वह जोरजबरदस्ती पर उतर आता है. इस से श्वेता का सैक्स संबंधों से मन उचट गया है. काउंसलर रेखा पांडेय ने श्वेता को सलाह देते हुए कहा कि इस बारे में पति से आराम से बात करें और यह बातचीत सैक्स संबंधों के समय न कर के बाद में की जाए. इस के लिए प्यार से पति को मनाने की कोशिश की जाए. अगर पति कभी नशे की हालत में सैक्स संबंध बनाने की कोशिश करे तो उस समय कुछ न कह कर नशा उतरने के बाद बात करें. नशे की हालत में बात समझ में नहीं आती उलटे कभीकभी लड़ाईझगड़े से मामला बिगड़ जाता है.

पति हर समय गलत होता है, यह भी नहीं मान लेना चाहिए. उसे इस के लिए हमेशा टालना सही नहीं होता है. हो सकता है कि कभी आप का मन न हो, बावजूद इस के आप को सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए. सैक्स पति और पत्नी दोनों की जरूरत होती है. इसलिए इस से जुड़ी किसी भी परेशानी को हल करने के लिए पतिपत्नी दोनों को मिल कर सोचना चाहिए. जब आप खुल कर एकदूसरे से बात करेंगे तो सारी गलतफहमियां दूर हो जाएंगी.

क्यों करनी पड़ती जबरदस्ती

सैक्स दांपत्य जीवन की सब से अहम चीज होती है, यह बात पतिपत्नी दोनों को पता होती है. ऐसे में सवाल उठता है कि तब सैक्स संबंध के लिए जबरदस्ती क्यों करनी पड़ती है? कई बार कभी पति या पत्नी को कोई ऐसी बीमारी हो जाती है, जिस से सैक्स संबंधों से मन उचट जाता है. ऐसे में बहुत ही धैर्य और समझदारी की जरूरत होती है. सब से पहले अपने साथी की जरूरत को समझने की कोशिश करें. अगर कोई शारीरिक परेशानी है, तो उस का इलाज किसी योग्य डाक्टर से कराएं. सैक्स की ज्यादातर बीमारियों की वजह मानसिक ही होती है. इस के लिए आपस में बात करें. अगर बात न बने तो मनोरोगचिकित्सक से भी बातचीत कर सकती हैं.

सैक्स के प्रति पत्नी की नकारात्मक सोच ही पति को कभीकभी जबरदस्ती करने के लिए मजबूर करती है. कुछ पत्नियां सैक्स को गंदा काम मान कर उस से संकोच करती हैं. अगर आप भी इसी तरह के विचार रखती हैं, तो यह सही नहीं है. आप के इस तरह के विचार पति को जबरदस्ती करने के लिए उकसाते हैं  पति की जबरदस्ती से बचने के लिए इस तरह की नकारात्मक सोच से बचना चाहिए. इस मानसिकता के चलते न तो आप स्वयं कभी खुश रह सकती हैं और न ही पति को खुश रख पाएंगी. ऐसा कर के आप कभी सैक्स का आनंद न स्वयं ले पाएंगी और न कभी अपने पति को ही यह सुख दे पाएंगी. जबरदस्ती से बचने के लिए सैक्स के प्रति अपनी सोच को सकारात्मक बनाएं.

बहाने बनाने से बचें

आमतौर पर पतियों को यह शिकायत होती है कि पत्नियां बहाने बनाती हैं, जिस के चलते जबरदस्ती करनी पड़ती है. इन शिकायतों में बच्चों के बड़े होने, मूड ठीक न होने और घर में एकांत की कमी होना मुख्य कारण होते हैं. रमेश प्रधान का कहना है कि मैं जब भी अपनी पत्नी के साथ सैक्स करने की पहल करता था, वह बच्चों और परिवार का बहाना कर टाल जाती थी. इस का मैं ने हल यह निकाला कि सप्ताह में 1 बार पत्नी को ले कर आउटिंग पर जाने लगा. इस के बाद हमारे संबंध सही रूप से चलने लगे. अब पत्नी को यह अच्छा लगने लगा है. हमारे संबंध अब सहज हो गए हैं. पत्नी के बहाना बनाने का असर यह होता है कि जब कभी पत्नी को हकीकत में कोई परेशानी होगी तब भी पति को लगेगा कि वह बहाना बना रही है.

अत: मूड न होने पर भी साथी को सहयोग देने की कोशिश करें. इस से उस की जबरदस्ती से बच सकती हैं. पति का समीप आना पत्नी की अंदर की भावनाओं को जगा देता है. इस से पत्नी भी उत्तेजित हो जाती है. पति जबरदस्ती करने से बच जाता है. आप का मूड न हो तो भी उसे बनाया जा सकता है. आप को पति को बताना पड़ेगा कि मूड बनाने के लिए वह क्या करे. अगर कभी पति जबरदस्ती करे तो आप को उसे सहयोग दे कर जबरदस्ती से बचना चाहिए. पति जबरदस्ती करने लगे और आप भी संबंध न बनाने पर अड़ गईं, तो इस से संबंधों में दरार पड़ सकती है.

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