भूपेश सरकार का कोरोना काल

छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल सरकार कोरोना अर्थात कोविड-19 को लेकर इतनी मशगूल है कि राजधानी रायपुर से लेकर आम शहरों तक कोरोना को लेकर ऐसे ऐसे मंजर  दिखाई देते हैं की साफ साफ  सवाल किया  जा सकता है कि कोरोना को लेकर सरकार इतनी लचर व्यवस्था  कैसे कर सकती है.

छत्तीसगढ़ में कोरोना को लेकर कोई ठोस रणनीति तैयारी अथवा शासन प्रशासन की गतिविधि नजर नहीं आती. लोगों को मानो भेड़ बकरियों की तरह चरने के लिए छोड़ दिया गया है. कहीं कोई नियम कानून, कायदा दिखाई नहीं देता. यह सारे हालात देखकर  कहा जा सकता है कि भूपेश बघेल सरकार कोरोना  को लेकर ऐसी ऐसी गलतियां कर रही है जो आने वाले समय में जनजीवन पर भारी पड़ सकती हैं. हालांकि छत्तीसगढ़ में कोरोना बेहद काबू में है .मगर जैसी परिस्थितियां निर्मित हुई है, उससे यह अभी भी विस्फोटक रूप ले सकती है. आज जब दुनिया में कोरोना को लेकर हाहाकार मचा हुआ है.हम अपने देश में ही देख रहे हैं कि दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात में किस तरह स्थिति बेकाबू हुई जा रही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन असहाय हो चुका है. ऐसे में इस भीषण संक्रमणकारी बीमारी को छत्तीसगढ़ में जिस सहजता  से लिया जा रहा है वह बेहद चिंताजनक है. इस  रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ की जमीनी हकीकत बयां की जा रही है-

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अपने गाल बजाती भूपेश  सरकार!

भूपेश बघेल सरकार निसंदेह प्रारंभिक समय काल में कोरोना को लेकर बेहद अलर्ट थी. शासन प्रशासन चुस्त-दुरुस्त था ऐसा प्रतीत होता था कि इस भयंकर महामारी को बहुत ही गंभीरता से लिया जा रहा है. उस समय काल में सरकार की चहुँ ओर  हो प्रशंसा हो रही थी मीडिया में भी यह संदेश प्रमुख था कि छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार कोविड-19 को लेकर बेहद गंभीर है और सफलता की और आगे बढ़ रही है मगर जैसे-जैसे समय व्यतीत होगा चला गया कोरोना को लेकर के भूपेश बघेल सरकार के हाथ-पांव ठंडे पड़ने लगे. सरकार ने भी बड़ी गंभीरता के साथ गांव और शहरों को लाक डाउन करने में पूरी ताकत झोंक दी और यह स्थिति की सरकार की बिना इजाजत के  कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता था.

उस समय काल में छत्तीसगढ़ में कोरोना काबू में था.इसी दरमियान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार से कोरोना को लेकर के बड़ा पैकेज मांगा या यह 30,000 करोड़ रुपए का था. सरकार लोगों के हित में खड़ी दिखाई दे रही थी मगर छत्तीसगढ़ में साहब गुटका तंबाकू, गुड़ाखू जैसी प्रतिबंधित चीजें हवाओं में उड़ रही थी और उन्हें रोकने वाला कोई नहीं था ऐसा प्रतीत होता था कि मानो छत्तीसगढ़ में सरकार नाम की कोई चिड़िया है ही नहीं. इस दरमियान एक तरफ सरकार अपने गाल बजा रही थी दूसरी तरफ ब्लैक मार्केटिंये और ऐसी महामारियो का लाभ उठाने वाले लोग लाखों-करोड़ों रुपये से अपनी थैलियां भर रहे  थे. जिन पर सरकार का कोई अंकुश नहीं था हां छोटी-छोटी दुकानों के चालान कर रहे थे मगर तब तक वे लाखों रुपए कमा चुके थे.

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कहां है कोरोना विषाणु !

छत्तीसगढ़ में इन दिनों कोरोना कोविड-19 को लेकर सारे दरवाजे खुल चुके हैं .कहीं कोई नियम कानून का पालन नहीं हो रहा है. कोरोना महामारी से जो सबक सरकार को लेने चाहिए सरकार उन्हें नहीं लेना चाहती. और फिर वही ढर्रा शुरू हो गया है जो कोरोना काल के पूर्व था.

छत्तीसगढ़ जैसे पूर्व में था वैसा ही सब कुछ चल रहा है. जबकि पंद्रह  वर्षों बाद भाजपा से मुक्त होकर प्रदेश को एक नया नेतृत्व मिला है. कांग्रेस डेढ़ दशक तक विपक्ष में थी और संघर्ष करती रही मगर ऐसा लगता है कि सत्ता में आने के बाद भाजपा का या कहें सत्ता का रंग कांग्रेस पर भी चढ़ चुका है.  यही कारण है कि इस महामारी का कोई भी सबक कोई भी समीक्षा करके मूलभूत बदलाव सरकार ने शासन प्रशासन की व्यवस्था में करने का कोई प्रयास नहीं किया है शहर की गलियां हो या गांव की आज भी गंदगी के ढेर हैं. जहां से फिर कोई संक्रमण कारी बीमारी फूट  सकती है. महामारी के समय में भी करोड़ों रुपए का गोलमाल होता स्पष्ट दिखाई दिया. शासन-प्रशासन ऐसा है हो गया था लोगों को कोई भी राहत देने का काम छत्तीसगढ़ सरकार करते हुए दिखाई नहीं दी. जो भी प्रयास हुए वह भी “थोथा चना बाजे घना” वाली स्थिति में था. सरकार ने पूरे छत्तीसगढ़ को खोल दिया है कोई भी कहीं भी आ जा सकता है.सोशल डिस्टेंसिंग समाप्त हो चुकी है, फिजिकल डिस्ट्रेसिंग कहीं दिखाई नहीं देती. सड़क के दुकाने, बाजार मे सब कुछ पूर्ववत हो चला है. ऐसे में सवाल यह है कि अगरचे आगे कोरोना का विस्फोट हुआ तो छत्तीसगढ़ सरकार इसे कैसे रोक पाएगी?

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भूपेश बघेल: साकी, प्याले में शराब डाल दे

छत्तीसगढ़ में शराबबंदी को अपना हथियार बनाकर 2018 के विधानसभा चुनाव में सत्ता की वैतरणी पार करने वाले भूपेश बघेल मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद शराबबंदी के मामले पर कैसे करवट बदल रहे हैं, यह सारा देश देख चुका है. अब जब कोरोना का संकट सर पर है, शराबबंदी को लेकर भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार के उछल कूद के नजारे देखकर सत्ता की उथली नीतियों पर आप और हम हंस  भी नहीं सकते. जहां 15 वर्ष तक सत्ता के बाहर जाकर कांग्रेस  की हालत पतली हो गई थी और  आदर्श बघारने लगी थी वहीं सत्ता सिंहासन  में बैठने के बाद वही कांग्रेस और उसके चेहरे शराबबंदी को लेकर  नित्य नए-नए तर्क दे रहे हैं.

कथनी और करनी में जो अंतर आया है वह राजनीति की असलियत को नंगे पन के साथ  उघाड़ कर सामने रख देता है. यहां हम आपको बताना चाहते हैं कोरोना वायरस महामारी के पश्चात लाक डाउन की स्थिति में भी छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल की सरकार ने दोनों हाथों से शराब बेचा. शायद आपको विश्वास ना हो … मगर यह 100 फीसदी सही बात है. आप शायद कल्पना भी नहीं कर सकते कि 22 मार्च 2020 को जब प्रधानमंत्री के आह्वान पर संपूर्ण देश में लॉक डाउन था छत्तीसगढ़ में देसी और विदेशी शराब की दुकाने खुली हुई थी जिसकी बड़ी निंदा हुई. मगर सरकार ने इस पर कोई नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए दो शब्द कहने से भी गुरेज किया.

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मर रहे है  आम लोग…

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में संदिग्ध परिस्थितियों में दो लोगों की मौत हो गई. मौत शराब नहीं मिलने और  स्पिरिट पीने की वजह से हुई बताई जा रही है.दरअसल, लाॅकडाउन होने की वजह से शराब दुकानें  बंद है, फलत: कुछ  दोस्तों ने स्पिरिट पीकर अपनी लत दूर करने की कोशिश की, मगर  उन्हे अपनी  जिंदगी से हाथ धोना पड़ गया.यह  घटना रायपुर के गोलाबाजार थाना क्षेत्र में बाँसटाल की है. यहां रहने वाले तीन लोगों ने शराब की जगह स्पिरिट का सेवन कर लिया . इससे उनकी तबियत बिगड़ गई. फिर इनमें से दो लोग असगर खान (43 वर्ष) और दिनेश समुंदर (45 वर्ष) की मौत हो गई है. रायपुर के महापौर  एजाज ढेबर बताते हैं – जिस तरह कोरोना वायरस के मद्देनजर शराब की दुकानें बंद की गई है. यह उसका ही असर है. महापौर ने बताया  उनके पास यह खबर भी आई है कि एक युवक ने शराब ना मिलने की वजह से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली .

सरकार चाहती है प्याले छलका लो…

उपरोक्त दो युवकों की मौत की बिनाह पर भूपेश बघेल की सरकार यह पटकथा तैयार कर रही है कि कैसे शराब की दुकाने जल्द से जल्द छत्तीसगढ़ में खुल जाएं. दरअसल, यह माना जा रहा है कि छत्तीसगढ़ में सरकार के हाथों में शराब दुकानें चल रही हैं जो  दुधारू गाय के समान है. इस बिजनेस से बेपनाह पैसा आता है. इसका सबसे ज्वलंत तथ्य यही है कि जब देशभर में 14 अप्रैल 2020 तक लाक डाउन है तब सरकार की तरफ से यह बात बारंबार सामने लायी गई है की आगामी 0 7 अप्रैल तक ही शराब दुकानें बंद हैं. यानी यह कहा जा सकता है कि जैसे ही हालत थोड़ी भी   सामान्य होंगे छत्तीसगढ़ की सरकार सबसे पहले देशी और विदेशी शराब की दुकानों पर खोल देगी. क्योंकि प्रतिदिन करोड़ों रुपए की इनकम सरकार को शराब से होती रही है. अब सच यही  है  की छत्तीसगढ़ की जनता, आम गरीब आदमी, भूखा मर जाए कोरोना  की चपेट में आकर  तिल तिल कर मर जाए, छत्तीसगढ़ की  सरकार को उससे कोई लेना देना नहीं है. लोकतंत्र के इस  संवैधानिक छत्रछाया में यह सब बेहद दर्दनाक और दुखद है.

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भूपेश बघेल की अमेरिका यात्रा के कुछ यक्ष-प्रश्न

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अमेरिका यात्रा प्रदेश में चर्चा का और आलोचना का सबब बनी हुई है. छत्तीसगढ़ सरकार का तर्क है भूपेश बघेल की अमेरिका यात्रा से छत्तीसगढ़ की शान, मान मे वृद्धि हुई है. अमेरिका से छत्तीसगढ़ उद्योग धंधे, पैसे आएंगे. जबकि विपक्ष विशेषकर डॉ. रमन सिंह और धरमलाल कौशिक ने भूपेश बघेल की अमेरिका यात्रा पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि एक तरफ छत्तीसगढ़ में किसान त्राहि-त्राहि कर रहे हैं, खून के आंसू बहा रहे हैं. सरकार धान का एक-एक दाना खरीदा नहीं पा रही है और मुख्यमंत्री अमेरिका जैसे समृद्ध देश में पिकनिक मना रहे है.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अमेरिका यात्रा पर जिस तरह भाजपा हमलावर हुई है उससे कांग्रेस तिलमिला गई है और 15 वर्ष भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री और मंत्रियों के विदेश यात्रा का ब्यौरा मांग रही है.कांग्रेस कहती है भूपेश बघेल की अमेरिका यात्रा सफल है भाजपा कहती है कि भूपेश बघेल  की यात्रा असफल है! और छत्तीसगढ़ की अस्मिता उड़ान पर प्रश्नचिन्ह लगाने वाली है. अब सवाल है कि यहां की आवाम अमेरिका यात्रा को लेकर क्या धारणा बनाती है या जिस तरह भाजपा के 15 वर्षों के कार्यकाल में डॉ रमन सिंह और उनका मंत्रिमंडल विदेश भ्रमण करता रहा,अधिकारी विदेश मे खरीददारी करते रहे वहीं सब कुछ कांग्रेस की सरकार में भी होगा? यह एक बड़ा यक्ष प्रश्न है जिसका जवाब शायद न कांग्रेस के पास है न भाजपा के पास.

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भूपेश बघेल की निवेशकों के साथ बैठक

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल  ने पहले चरण में सैन फ्रांसिस्को में करीब 250 निवेशकों से संवाद किया. आधिकारिक  जानकारी के अनुसार, बघेल को अमेरिकी निवेशकों से छत्तीसगढ़ में उद्योग लगाने के लिए अनेक  प्रस्ताव मिले हैं. यात्रा के अगले पड़ाव के लिए मुख्यमंत्री और छत्तीसगढ़ की टीम बोस्टन गयी जहां बघेल इंस्टीट्यूट फॉर कम्पीटिटीवनेस में वहां के औद्योगिक प्रतिनिधियों को छत्तीसगढ़ में निवेश करने के लिए आमंत्रित किया.

यात्रा के पहले पड़ाव में मुख्यमंत्री बघेल ने सैन फ्रांसिस्को के सिलिकन वैली और रेड वुड शोर्स में औद्योगिक प्रतिनिधियों और निवेशकों से सीधी चर्चा की.उन्होंने निवेशकों को बताया कि छत्तीसगढ़ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के लिए भारत के शीर्ष राज्यों में शामिल है। उन्होंने भरोसा जताया कि छत्तीसगढ़ निवेश करने के लिए सबसे अच्छी जगह है, क्योंकि यह देश के मध्य में स्थित है और यहां बेहतर कनेक्टिविटी है.

उन्होंने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति निवेशकों के लिए काफी अनुकूल है।बघेल ने एक इंटरव्यू मे कहा, ”हमारा राज्य खनिज समृद्ध है और हमारे यहां खनिज आधारित कई उद्योग हैं। हम अमेरिका की कंपनियों और निवेशकों को आने तथा मुख्य क्षेत्रों में अवसर तलाशने का न्यौता देते हैं.”छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  अमेरिका के कई शहरों की यात्रा पर रहे. वह इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर राज्य की, निवेशकों के अनुकूल और कारोबार सुगम नीतियों की जानकारी देते रहे .

भूपेश बघेल की दृष्टि 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि उनकी सरकार अगले कुछ साल राज्य के लोगों की क्रयशक्ति बढ़ाने पर ध्यान देगी. राज्य सरकार गरीबी हटाने तथा खनिज, इस्पात एवं विद्युत जैसे मुख्य उद्योगों के साथ ही कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, सूचना प्रौद्योगिकी, जैव इथेनॉल, इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र एवं परिधान, इंजीनियरिंग एवं रक्षा, उच्च शिक्षा, दवा, वाहन आदि जैसे क्षेत्रों के लिये भी प्रतिबद्ध है.

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मुख्यमंत्री के अनुसार, ” हमारा लक्ष्य लोगों की क्रयशक्ति बढ़ाना है. यदि लोगों के पास खरीदने का पैसा नहीं हो तो इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि हम कितने उद्योग लगाते हैं.बघेल ने कहा कि इस संतुलन को बनाये रखने के लिये लोगों की क्रयशक्ति बढ़ाना महत्वपूर्ण है, जो अंतत: उद्योगों और कंपनियों को फायदा  छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल का अमेरिका की कंपनियों को राज्य में निवेश का न्योता दिया .

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अमेरिका की कंपनियों को राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करने के लिये आमंत्रित किया. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार खनिज व इस्पात जैसे मुख्य क्षेत्रों के साथ ही छत्तीसगढ़ के सर्वांगीण विकास में ध्यान केंद्रित कर रही है.”

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