⚲

Story in Hindi : बी प्रैक्टिकल – प्रमोशन के लिए क्या करना पड़ा

Story in Hindi. बीके सिंह ईस्ट ऐंड वैस्ट कंपनी में काम करते हैं. वे जन्मजात प्रैक्टिकल आदमी हैं. कायदे से उन के जैसे काबिल आदमी का प्रमोशन हो जाना चाहिए. वह भी तब, जब जोनल मैनेजर अपनी जाति का हो. लेकिन जुगाड़ बैठ नहीं रहा है.

दरअसल, बीके सिंह का मुकाबला एक दूसरे प्रैक्टिकल आदमी से है. दूसरा यानी केपी पांडे. वे चतुर तो हैं ही, बैकग्राउंड से मजबूत भी हैं. वे 10-20 हजार रुपए यों ही खर्च कर सकते हैं.

यह तो खतरे की घंटी है. सावधान हो गए बीके सिंह. उन को गिरने से पहले ही संभलने की आदत है. मन ही मन उन्होंने एक ऐसी चाल सोची, जिस की काट केपी पांडे के पास नहीं थी.

केपी पांडे विधुर हैं और बीके सिंह एक खूबसूरत पत्नी के पति. बीके सिंह की किस्मत से जलने वालों में जोनल मैनेजर भी थे. जोनल मैनेजर ने शादियां तो की थीं 3, पर 2 स्वर्ग सिधार गईं, एक ने तलाक दे दिया.

अरबपति आदमी पति न हो, तो लड़कियां चिंतित हो जाती हैं. जोनल मैनेजर की चिंता करने वालियों की भी कमी नहीं थी. यह चिंतन शिविर उन की टपकती हुई लार को धार बना रहा था.

एक दिन बीके सिंह ने अपनी पत्नी सुलोचना को कह ही दिया, ‘‘सोच रहा हूं कि बौस को किसी दिन डिनर पर बुला लूं. कैसा रहेगा?’’

‘‘कौन से बौस को? तुम्हारे तो कई बौस हैं. अभी तो बौस शायद खन्ना हैं, जिन से तुम्हारी बिलकुल नहीं बनती.’’

बात को काटते हुए बीके सिंह ने कहा, ‘‘जोनल मैनेजर को बुलाने की सोच रहा हूं. वे कई बार कह चुके हैं कि घर के खाने का मजा ही कुछ और है. बेचारे विधुर जिंदगी जी रहे हैं.’’

‘‘क्यों… हैट्रिक तो वे लगा ही चुके हैं. अब उन्हें क्या परेशानी है? वे एक और ले आएं.’’

बातचीत से यह अंदाजा तो लग ही जाता है कि सुलोचना उन पत्नियों में से नहीं हैं, जो केवल ‘जी हां’ कहती हैं. वह वकालत में ग्रेजुएट थी. प्रैक्टिस शुरू नहीं की थी. उसे अपने पति के पैतरे पसंद नहीं थे.

उसे जो बात पसंद नहीं आती, साफसाफ कहना पसंद करती थी. यह सच बीके सिंह पर भी शादी के सालभर के अंदर ही सामने आ चुका था.

बीके सिंह ने बच्चे पैदा करने की योजना पर बात करने की कोशिश की, तो सुलोचना ने साफ मना कर दिया. उस का मानना था कि पहले एकदूसरे को जान तो लें कि बच्चे पाल भी सकेंगे या नहीं. कम से कम 2 साल तो पूरे हो जाने दो.

बीके सिंह को अगर शाप देना आता, तो कमंडल से पानी ले कर सुलोचना को शाप दे देते, ‘ऐ दुष्ट बालिके, तू ने बाबा की आत्मा को कष्ट दिया है. जा, तू अनंतकाल तक मां नहीं बनेगी. पर ऐसा हो न सका.

‘‘मैं इस रविवार को ही उन्हें खाने पर बुला लेता हूं,’’ ऐसा कह कर बीके सिंह ने अपनी बात रखी.

सुलोचना ने भी ज्यादा बहस नहीं की, तो बीके सिंह ने उसे हां के रूप में लिया और रविवार को जोनल मैनेजर को डिनर पर बुला लाए.

जोनल मैनेजर हिंदी कविताओं के रसिया थे, साथ ही हनी सिंह के गानों के दीवाने भी.

डिनर सर्व कर रही सुलोचना को उन्होंने इशारा कर के बात बीके सिंह से कही, ‘‘हिंदी कविताओं में तो एक ही कवि हुए सुमित्रानंदन पंत… बाले तेरे रूपजाल में कैसे उलझा दूं लोचन. उन के बाद के कवि तो रोते रह गए. उस के बाद भी एक कवि और हो गए. नाम याद नहीं आ रहा. उन की कविता है, ‘अगर मैं ने किसी के होंठ चूमे, अगर मैं ने किसी की मदभरी अंगड़ाइयां चूमीं. महज इस से किसी का पुण्य, मुझ पर पाप कैसे बन गया?’ वाह… वाह… इसे कहते हैं कविता.’’

जोनल मैनेजर को पता था कि यहां कविताएं उन के अलावा किसी और को नहीं आतीं. जो पढ़ेंगे, वह सही ही होगी. वैसे भी बौस जो करते हैं, सही करते हैं. हुआ भी यही. सुलोचना मटन का डोंगा रख कर जा चुकी थी.

सुलोचना के चले जाने से जोनल मैनेजर साहब नाराज हो रहे थे. उन्होंने घूर कर बीके सिंह को देखा.

बीके सिंह प्रैक्टिकल आदमी थे. तुरंत वे बात की तह तक पहुंच गए. सुलोचना को आवाज दी, ‘‘अरे, जरा दही लाना.’’

सुलोचना दही ले कर आई. जोनल मैनेजर साहब ने हनी सिंह की चर्चा छेड़ दी, ‘‘दुनिया में जीना कितना मुश्किल

है. देखो बेचारे हनी सिंह को. उस पर बारबार बेहूदगी फैलाने के आरोप लगा दिए जाते हैं. वह तो गायक है. कलाकार इन चीजों से परे होता है. मैं कहता हूं कि मर्दऔरत का संबंध तो सदियों से चला आ रहा सच है.’’

‘‘आदमी की सोच ही अब छोटी हो गई है सर. एक बच्ची नंगी पड़ी हो, तो भी हमें बेहूदगी नजर नहीं आती है, क्योंकि हम उसे औरत की नजर से नहीं देखते. सोच का ही सारा खेल है,’’ बीके सिंह ने कहा.

जोनल मैनेजर साहब खुश हो रहे थे कि बात की दिशा बिलकुल सटीक जा रही है. बात को और पकड़ाने के लिए उन्होंने सीधे सुलोचना से कहा, ‘‘आप को भी साथ में डिनर कर लेना चाहिए था.’’

‘‘जी नहीं, मैं मांसाहारी नहीं हूं,’’ छोटा सा जवाब दे कर वह चुप हो गई.

जोनल मैनेजर साहब के गरम त पर दो बूंद पानी पड़ा. वे बीके सिंह से बोले, ‘यह गलत बात है सिंह. सुलोचना अगर मांसाहारी नहीं हैं, तो शाकाहारी खाना बनवा लेते. तीनों मिल कर खाना खाते.’’

जोनल मैनेजर साहब को पूरी उम्मीद थी कि सुलोचना अपना कीमती समय उन की झोली में डाल देगी, लेकिन वह तो वहां से जा चुकी थी.

जोनल मैनेजर ने जल्दीजल्दी खाना खत्म किया और कार में बैठ कर चले गए. जाते समय सुलोचना नमस्कार करने के लिए हाजिर हुई, लेकिन इस से उन का मन नहीं भरा.

जोनल मैनेजर साहब के जाते ही बीके सिंह की साढ़ेसाती शुरू हो गई. वह उलझ पड़े, ‘‘अगर 2 मिनट उन के पास बैठ जाती, तो क्या बिगड़ जाता. घर आया मेहमान है, थोड़ा प्रैक्टिकल होना पड़ता है. काम भागे तो नहीं जा रहे थे.’’

‘‘कहां बैठ जाती… उस की गोद में… देखा नहीं, कैसे घूर रहा था वह. तुम अपनी बातें अपने पास ही रखो. मुझे ये चोंचले पसंद नहीं हैं.’’

इस बात को अभी 5 दिन भी नहीं बीते थे कि जोनल मैनेजर साहब की लार बदस्तूर टपकने लगी. उन्होंने बीके सिंह को बुलाया. उस दिन के खाने की तारीफ की. सुलोचना के गुणों की तारीफ की. संस्कारों पर भाषण दिया. लगे हाथ यह कहना भी नहीं भूले कि अगले महीने गुप्ता रिटायर हो रहा है. उस की जगह ईस्ट जोन को एक ईमानदार और मेहनती सबमैनेजर चाहिए.

बीके सिंह ने इसे अपने लिए औफर समझा. उन्होंने अगले रविवार आने का जोनल मैनेजर साहब को न्योता दे दिया.

सुलोचना को इस बात से न तो पहले कोई परेशानी थी, न अब है. उस ने नौकरानी से कह दिया कि एक आदमी का खाना ज्यादा बनेगा.

नियत समय से एक घंटा पहले ही अपनी नीयत संभाले जोनल मैनेजर साहब तशरीफ ले आए. इस बार उन के पास गानों की सीडी के साथसाथ एक किताब भी थी ‘लोलिता’.

बीके सिंह मिठाई लाने अभीअभी मार्केट चले गए थे. उन्हें अंदाजा नहीं होगा कि साहब एक घंटा पहले ही घर आ जाएंगे.

जोनल मैनेजर साहब ने आते  सुलोचना के हाथ में वह किताब रखी और बोले, ‘‘यह पुस्तक वर्ल्ड फेम की है. लोलिता नाम की एक किशोरी की कहानी है. आम सोच का पाठक इस में सैक्स देखता है, लेकिन यह एक चिंतन है. आप इसे जरूर देखें. आप तो एक सुलझी हुई औरत हैं.’’

सुलोचना ने किताब ले तो ली, लेकिन उसे उन के सामने ही टेबिल पर रख कर अंदर कमरे में जा कर तकिए पर नया कवर चढ़ाने लगी.

जब सुलोचना पानी ले कर जोनल मैनेजर के पास आई, तो उन्होंने कहा, ‘‘आप इतनी खूबसूरत हैं… मौडलिंग वगैरह क्यों नहीं कर लेतीं?’’

इस पर सुलोचना ने जो कहा, उस की उम्मीद नहीं थी, ‘‘आप की उम्र इतनी ज्यादा हो गई है. आप किसी आश्रम में क्यों नहीं चले जाते?’’

जोनल मैनेजर साहब यह सुन कर सोचने लगे, ‘क्या यह बदनसीब नहीं जानती कि उन के पति की किस्मत उन के ही हाथों में कैद है? क्या इस अभागी को इस बात की भी जानकारी नहीं कि वे अगर खुश हो जाएं, तो उस की जिंदगी बना सकते हैं?’

अब जोनल मैनेजर साहब अपने असली रूप में आने लगे,  ‘‘आप मेरी बेइज्जती कर रही हैं. मैं ने आप की तारीफ की और आप मेरी बुराई कर रही हैं. यह शिष्टाचार नहीं है.’’

‘‘इस में बुराई वाली बात कहां से आ गई. बूढ़ा होना कोई गुनाह नहीं है. सभी लोग बूढ़े होते हैं. यह बेइज्जती कैसे हो गई? एक सचाई आप ने कही और एक सचाई मैं ने.

‘‘रही शिष्टाचार की बात, तो किसी सहकर्मी के घर उस की गैरहाजिरी में आना और उस की पत्नी को बेहूदा किताब भेंट करना क्या है? मैं तो कहती हूं कि समय के पहले आना भी अशिष्टता है.’’

‘‘तुम नहीं जानती कि किस से बात कर रही हो. मैं चाहूं तो एक क्षण में तुम्हारे पति को सड़क पर खड़ा कर सकता हूं.’’

‘‘और अगर मैं चाहूं, तो तुम्हें अटैंप्ट टू रेप के जुर्म में जेल भिजवा सकती हूं. मैं ने भी वकालत की डिगरी चोरी से हासिल नहीं की है.

‘‘जब तक कोर्ट में यह साबित होगा कि तुम ने मेरे साथ जिस्मानी संबंध बनाने की कोशिश की या नहीं, तब तक तुम्हारा मुंह पूरी तरह से काला हो चुका होगा. चुपचाप शांत बैठो और खाना पकने तक इंतजार करो.’’

जोनल मैनेजर साहब एकदम से दनदनाते हुए निकल जाना चाहते थे, लेकिन लग रहा था कि किसी ने सारी हवा निकाल दी हो. टांगें काम नहीं कर रही थीं. उन्हें बीके सिंह पर गुस्सा आ रहा था कि मनहूस कहां चला गया. अब तक उसे आ जाना चाहिए था. उस

को तो कलाकंद मिठाई लाने के लिए भेजा था, कोलकाता जाने को तो नहीं कहा था.

कलाकंद मिठाई का पैकेट लिए बीके सिंह आए तो देखा कि साहब किसी से फोन पर बात कर रहे हैं. उन्होंने बीके सिंह की ओर देखा भी नहीं और बोले, ‘‘आज का प्रोग्राम रहने दो, फिर कभी खा लेंगे. एक अर्जैंट फोन आ गया है…’’

बीके सिंह अभी बोलने के लिए उचित शब्द तलाश ही रहे थे कि साहब दनदनाते हुए निकल गए. भागते हुए बीके सिंह कार तक गए जरूर, लेकिन दरवाजा खोलने का भी मौका नहीं मिला.

अंदर आते ही बीके सिंह सुलोचना पर फुंफकारे, ‘‘तुम ने हमारे साहब की बेइज्जती की होगी. वह इतने गुस्से में क्यों थे?’’

सुलोचना, जो जोनल मैनेजर के जाने की खुशी मना रही थी, इस बेहूदा सवाल से झल्ला गई. उस ने कहा, ‘‘जोनल मैनेजर की बेइज्जती तो की ही, लेकिन उस के असली हकदार तुम हो. उस के कहने पर कलाकंद मिठाई लेने चले गए अकेली पत्नी को दांव पर लगा कर. बौस खुश हो गया, तो प्रमोशन हो जाएगा. क्यों?

‘‘तुम ने मुझे पहचाना ही नहीं आज तक, नहीं तो मुझे प्लेट में सजा कर पेश करने की हिम्मत नहीं दिखाते. अच्छा हुआ वह चला गया, नहीं तो चप्पल से खातिरदारी करती मैं उस की.’’

‘‘तुम समझती क्या हो अपनेआप को. बड़ा आदमी है, जरा हंसबोल लोगी, तो तुम्हारा यह रूप घिस नहीं जाएगा. वह अगले महीने मुझे ईस्ट जोन का सबमैनेजर बनाने वाला था. तुम ने सब गुड़गोबर कर दिया.’’

‘‘अपने बूते कुछ कर नहीं सकते, तो बीवी को ढाल बना लिया. मैं द्रौपदी

नहीं हूं कि दांव पर लगा दोगे और मैं कन्हैयाकन्हैया कर के रोने लगूंगी. मैं उस का मुंह नोच लूंगी. उस का भी और तुम्हारा भी. मुझे तो तुम्हारे चेहरे से घिन हो रही है.’’

बीके सिंह अभी इतने भी प्रैक्टिकल नहीं हुए थे कि बीवी की गालियां सुनने के बाद भी मुसकरा सकें. उन की नजर में जरा सा हंसबोल लेना गलत नहीं था. सभी करती हैं. यह जमाना ही कारोबार का है. जिस के पास जो बैस्ट है, दे रहा है. एक बार आदमी कामयाब हो जाए, तो कोई नहीं पूछता कि कामयाबी के सूत्र क्या थे?

सुलोचना थोड़ी पुराने खयालों की थी. वह अभी उतनी प्रैक्टिकल नहीं हुई थी. Story in Hindi

Honor Killing : ग्वालियर में बेटी को मारा

Honor Killing. नंदिनी यादव अपने सपनों को पूरा करने के लिए कर्नाटक गई थी. वह राखी के मौके पर ग्वालियर के पिछोर थाना क्षेत्र के पथरियापुरा गांव में लौटी थी, पर उस की अचानक हुई मौत के बाद इलाके में सनसनी फैल गई.

हैरानी की बात तो यह है कि इस मामले में नंदिनी यादव के ही परिवार के सदस्यों ने उस के पिता भगवान सिंह यादव और चाचा संतोष यादव पर हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है.

साथ ही यह भी कहा गया कि नंदिनी कर्नाटक में एक मौल में काम करती थी. वह राखी के मौके पर अपने घर आई थी. घर लौटने के बाद कर्नाटक में नौकरी करने को ले कर परिवार में झगड़े के हालात बने. पर साथ ही दबी जबान में यह भी सामने आया कि नंदिनी किसी लड़के से फोन पर बातचीत करती थी, जिसे ले कर घर में नाराजगी का माहौल था.

इतना ही नहीं, परिवार के लोगों को उस का रहनसहन और पहनावा भी पसंद नहीं था. वह बौयकट हेयर रखती थी और अपनी पसंद के मुताबिक कपड़े पहनती थी. बताया जा रहा कि उस के बाहर जा कर नौकरी करने को ले कर भी परिवार में नाराजगी थी.

परिवार वाले यह भी बोले कि देर रात झगड़े के बाद नंदिनी के पिता भगवान सिंह यादव और उस के चाचा संतोष यादव ने कथिततौर पर उस की साफी से गला दबा दिया और नंदिनी की मौत हो गई.

मामले में सब से चौंकाने वाली बात यह है कि नंदिनी यादव के भाई, बहन और मां ने ही उस की मौत के लिए उस के पिता और चाचा को जिम्मेदार ठहराया है. उन सब का कहना है कि नंदिनी की मौत सामान्य नहीं थी, बल्कि उस की हत्या की गई है.

पुलिस ने पिता भगवान सिंह यादव को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि चाचा संतोष यादव की तलाश जारी थी.  Honor Killing

Readers Problem: सच्ची सलाह -जीवन और रिश्तों के सवाल

Readers Problem –

सवाल :  मैं 21 साल की लड़की हूं. मेरा एक बौयफ्रैंड है और उस की उम्र 24 साल है. हम दोनों ने खूब हमबिस्तरी की है. पर अब मुझे लगता है कि वह लड़का मेरे लायक नहीं है. इस की वजह यह है कि वह शादी के नाम पर चुप हो जाता है और जब कभी बोलता भी है तो कहता है कि अभी वह शादी करने के मूड में नहीं है.

उस से दूर होने की वजह यह भी है कि मैं आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली जाना चाहती हूं और वह इस में अड़ंगा लगा रहा है. उसे लगता है कि अगर मैं दिल्ली गई तो किसी और के चक्कर में उसे भूल जाऊंगी. इतना ही नहीं, वह धमकी दे रहा है कि अगर मैं दिल्ली गई तो वह सब को हमारे बारे में बता देगा. मुझे  अब उस से डर लगने लगा है. मैं क्या करूं?

जवाब : आप का आशिक अब अपनी पर उतारू हो आया है, इसलिए उसे उस की ही जबान में समझाएं कि आप कोई उस की गुलाम या रखैल नहीं हैं. कई बार हमबिस्तरी कर लेने का यह मतलब नहीं कि वह आप को बीवी समझाने लगे. उलटे वह तो आप की जवानी के मजे लूटने के बाद शादी ही नहीं करना चाहता. जाहिर है कि उस की नीयत में खोट है और वह सरासर आप को ब्लैकमेल कर रहा है.

इस से डरें नहीं, बल्कि राज खोलने की धमकी का डट कर मुकाबला करें और उसे धमकी दें कि आप इस की रिपोर्ट पुलिस में करने से हिचकिचाएंगी नहीं. मुमकिन यह भी है इस से वह और आक्रामक हो जाए, इसलिए संभल कर रहें और धीरेधीरे उस से दूरी बनाते दिल्ली जा कर पढ़ाई पर फोकस करें.


सवाल : मेरी उम्र 39 साल है. मैं लखनऊ, उत्तर प्रदेश में रहता हूं. मेरी शादी को 13 साल हो चुके हैं. मेरी पत्नी बहुत ही सरल स्वभाव की है और मां थोड़ी सख्तमिजाज. मेरी मां की सख्ती की वजह यह भी है कि मेरे कोई औलाद नहीं है और मेरी मां को लगता है कि उन की बहू बांझ है. पर डाक्टरी रिपोर्ट में ऐसा कुछ नहीं है. बच्चा न होने की कोई ठोस वजह डाक्टर ने नहीं बताई है.

पर इस सब में हमारे घर में हमेशा तनाव का माहौल रहता है. मेरी पत्नी को अपनी सास की जलीकटी सुननी पड़ती है. हम दोनों पतिपत्नी ऐसा क्या करें कि यह क्लेश खत्म हो जाए?

जवाब : इस क्लेश की असल वजह आप की मां हैं, जिस से छुटकारा पाना आसान काम नहीं. कई बार शादी के सालोंसाल बाद भी बच्चा नहीं होता, जबकि पतिपत्नी दोनों में कोई खोट नहीं होता. यह एक चांस की बात है, इसलिए आप डाक्टर के मशवरे के मुताबिक चलें.

मां को तो बस समझाया ही जा सकता है, जो अपने दौर में जीते हुए सोच रही हैं कि इस साल शादी हुई और दूसरे साल ही घर में किलकारी गूंजी.

पत्नी को भी कहें कि वह जितना हो सके सब्र से काम ले. इस पर भी बात न बने तो मां को भाई या बहन के यहां कुछ दिन के लिए बीचबीच में छोड़ दिया करें.


सवाल :  मेरी उम्र 21 साल है और मैं राजस्थान के सीकर शहर में रहती हूं. कालेज में मेरी एक सहेली है जो बहुत से लड़कों से दोस्ती बनाए हुए है. दोस्ती क्या वह उन के साथ घूमतीफिरती भी है. एक दिन उस ने मुझ से कहा कि उस का दोस्त मेरे चक्कर मे है और मुझे  फिल्म दिखाना चाहता है.

मैं ने मना किया तो बोली कि तू तो दकियानूसी सोच की है. लड़के के साथ डेट पर जाने से डरती है, जबकि यही उम्र है मजे करने की. कई बार तो मुझे  भी खुद पर शक होता है कि क्या मैं वाकई इतनी गई गुजरी हूं कि लड़के के साथ डेट पर जाने के नाम से ही मेरे हाथपैर फूल जाते हैं, पर फिर लगता है कि मैं जैसी हूं वैसी ही ठीक हूं. मुझे कुछ समझा  नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं? मैं कैसे इन हालात को हैंडल करूं?

जवाब : आप जैसी हैं वैसी ही ठीक हैं, जबरदस्ती अपनेआप को बदलने की कोशिश न करें. लड़कों से दोस्ती करना या उन के साथ डेट पर जाना कोई गुनाह भी नहीं. जब मन किसी लड़के से दोस्ती करने का हो तो बेहिचक करें, लेकिन अगर आप संस्कारों और सख्त परवरिश के दबाव में ऐसा करने से अपनेआप को रोकती हैं तो यह भी खुद के साथ ज्यादती ही है, इसलिए सोचसमझ कर फैसला लें और लड़कों में भी दिलचस्पी लेना शुरू करें.

सच्ची सलाह के लिए कैसी भी परेशानी टैक्स्ट या वौइस मैसेज से भेजें. मोबाइल नंबर : 08826099608

Family Problem: मेरा छोटा भाई पैसों के लिए मम्मी पर हाथ उठाने लगा है

Family Problem: अगर आप भी अपनी समस्या भेजना चाहते हैं, तो इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें.

सवाल –

मेरी उम्र 20 साल है और मैं बिहार का रहने वाला हूं. हमारे घर में मेरे मांबाप और हम 2 भाई रहते हैं. मेरा भाई मुझसे छोटा है और उसकी उम्र 17 साल है. मेरा भाई ज्यादातक वक्त अपने दोस्तों के साथ ही बिताता है और देर रात घर आता है. हाल ही में मुझे अपने दोस्तों से पता चला कि मेरा भाई अपने दोस्तों के साथ मिलकर नशे करने लगा है. जब हमें यह पता चला तो मम्मी पापा ने उसे पैसे देना बंद कर दिया. ऐसा करने से वे सबके साथ बद्तमीजी करने लगा और यहां तक की मांबाप का लिहाज किए बिना घर में गालियां भी देने लगा. उसकी गालियों से ही पता चल रहा था कि वे किसी गलत संगत में है. जब 2-3 दिन हमने उसे पैसे नहीं दिए तो उसने जो कदम उठाया जो हम कभी सोच भी नहीं सकते थे. वे मम्मी से पैसे छीनने लगा और जब मम्मी ने नहीं दिए तो उसने मम्मी को धक्का तक दे दिया और पैसे छीन के भाग गया. उसके ऐसा करने से मम्मी को चोट तक आ गई लेकिन उसे इस बात का कोई पछतावा नहीं हुआ. मुझे समझ नहीं आ रहा मैं क्या करूं क्योंकि उसका ऐसा रूप हमने पहले कभी नहीं देखा था.

जवाब –

आज के समय में अक्सर ऐसा सुनने और देखने को मिल रहा है कि बच्चे अपने ही मांबाप पर हाथ उठाने लगे हैं. जहां एक तरफ अब मांबाप यह सोचते हैं कि बच्चों पर हाथ नहीं उठाना चाहिए तो ऐसे में अब उल्टा बच्चे ही यह सब कर रहे हैं और समझ नहीं आता आखिर वे ऐसा सीख कहां से रहे हैं.

आपके भाई की बात की जाए तो आपकी बातों से साफ पता चल रहा है कि वे अपने यारों दोस्तों के साथ अय्याशी और नशा करने में इतना डूब चुका है कि उसे सही और गलत की पहचान ही नहीं रही. जब आप सबने उसे पैसा देने से मना किया तो जाहिर है कि वे नशे नहीं कर पा रहा होगा जिसके चलते जब उसे नशा करने की तलब हुआ तो उसने अपनी ही मां की जान जोखिम में डाल कर पैसे ले भागा.

अभी आप उसे कुछ भी समझाएंगे या फिर मारेंगे भी तो उसे कुछ समझ नहीं आएगा. आप किसी डौक्टर या काउंसलर की सलाह लेकर उसकी काउंसलिंग कराएं और जरूरत पड़े तो उसे नशा मुक्ति केंद्र भी भेजें क्योंकि हो सकता है वे नशे में इस कदर डूब चुका है कि वे क्या कर रहा है उसे खुद समझ नहीं आ रहा. आप उसके दोस्तों के मांबाप के पास भी जा सकते हैं और पूछताछ कर सकते हैं क्योंकि जाहिर है कि उसके दोस्तों के मांबाप भी परेशान होंगे.

व्हाट्सऐप मैसेज या व्हाट्सऐप औडियो से अपनी समस्या इस नम्बर पर 8588843415 भेजें. Family Problem

Social Awareness: जब गले की हड्डी बने बीवी का आशिक

Social Awareness: कहते हैं कि सौत तो पुतले की भी नहीं भाती, लेकिन अब यह कहावत पतियों पर ज्यादा लागू होने लगी है, जो अपनी पत्नियों के आशिकों को पचा नहीं पा रहे हैं.

गांवदेहात से ले कर बड़े शहरों तक शादीशुदा औरतें अब इफरात से उसी तरह इश्क फरमा रही हैं, जिस तरह अब से कोई 30 -40 साल पहले तक मर्द सब्जी मंडी के छुट्टे सांड़ की तरह इधरउधर मुंह मारते फिरते थे और बीवी चूं भी नहीं कर पाती थी.

अब तसवीर बदल रही है. मीडिया में आएदिन ये हैडिंग सुर्खियों में रहती हैं कि पत्नी ने प्रेमी संग मिल कर पति की हत्या की. 3 बच्चों की मां आशिक संग भागी या फिर इस के उलट पति ने पत्नी के प्रेमी को बेरहमी से ठिकाने लगाया या फिर शौहर ने बदचलन बीवी की हत्या की.

नाजायज रिश्ते हमेशा से ही तकलीफदेह हो कर घर उजाड़ते रहे हैं, फिर चाहे वे पति के हों या पत्नी के. इन का अंत कभी सुखद नहीं होता, बल्कि आमतौर पर खूनखराबे से ही होता है.

पत्नी की नाक काटी

लेकिन यह खबर जरा हट कर थी, जिस में पति ने अपनी बेवफा पत्नी की नाक ही चबा डाली. दिलचस्प लेकिन चिंताजनक घटना उत्तर प्रदेश के हरदोई इलाके की बीती 18 जून की है.

32 साला पूजा की शादी देवरिया के एक प्रसिद्धनगर गांव के 36 साला रामखिलावन के साथ कोई 10 साल पहले हुई थी. शादी के बाद 9 साल ठीकठाक और हंसीखुशी गुजरे. दोनों के 2 साल के अंतर से 2 बेटे हुए जिन के नाम उन्होंने पवन और रमन रखे.

लेकिन पिछले एक साल से पूजा गांव के ही 37 साला सुशील कुमार को दिल दे बैठी. प्यार का यह खेल कब और कैसे शुरू हुआ, इस की भनक भी रामखिलावन को नहीं लगी और जब लगी तब तक पानी सिर से गुजर चुका था.

सुशील की पत्नी की मौत कुछ महीने पहले ही हुई है, इस के बाद से वह अकेला था. यह तनहाई पूजा ने दूर कर दी, जिस का जरीया मोबाइल फोन बना. दोनों नएनवेले प्रेमियों की तरह घंटों बतियाने लगे.

जब इस तरफ रामखिलावन का ध्यान गया तो उस ने पूजा को टोकना शुरू कर दिया, जिस पर पूजा यह बहाना बना कर बात को टरका जाती थी कि मायके वालों से बात हो रही है.

गलत नहीं कहा जाता कि इश्क और मुश्क यानी कस्तूरी छिपाए नहीं छिपते. यही पूजा और सुशील के साथ हुआ, जिन पर रामखिलावन को शक तो था, लेकिन कोई सुबूत नहीं था. लिहाजा, वह इस ताक में रहने लगा कि दोनों को रंगे हाथ पकड़ कर उन की पोल खोली जाए और सबक भी सिखाया जाए.

यह मौका रामखिलावन को 18 जून की शाम मिल भी गया, जब पूजा सुशील से मिलने उस के घर चली गई. तब उसे तनिक भी एहसास नहीं हुआ कि रामखिलावन, जो कई दिनों से जासूसों की तरह उस पर नजर रखे हुए है, दबे पैर पीछेपीछे चला आ रहा है.

अभी पूजा सुशील के पास जा कर बैठी ही थी कि झट से पति प्रकट हो गया और उस के बेवक्त सुशील के यहां होने के बाबत सवालजवाब करने लगा. उस ने पूजा से घर चलने को कहा तो पूजा ने जाने से इनकार कर दिया.

इस इनकार ने रामखिलावन के गुस्से में घी डालने जैसा काम किया. बात बढ़ी और बहस से होते मारपीट तक पहुंच गई. हल्ला मचा तो गांव के लोग भी मुफ्त का तमाशा देखने की गरज से इकट्ठा हो गए.

भीड़ देख पूजा ने भी शर्मलाज या लिहाज जो भी कह लें का घूंघट उतार फेंका और रामखिलावन पर ही आरोप लगाने लगी. बेवफाई के बाद की इस बेहयाई पर रामखिलावन और ज्यादा बौखला गया और उस की तरफ झपटा तो अपनी माशूका को बचाने के लिए सुशील बीच में आ गया.

इसी धक्कामुक्की और झगड़े के दौरान गुस्साए रामखिलावन ने पूजा की नाक चबा डाली, जिस से भीड़ भी दहशत में आ गई. पुलिस आई और मामला दर्ज हुआ पूजा और सुशील ने कटी नाक एहतियात से डब्बी में संभाल कर रख ली.

पहले सीएचसी और फिर हरदोई मैडिकल कालेज में पूजा को इलाज के लिए भरती किया गया, जहां डाक्टरों ने उस की नाक की मरहमपट्टी कर उसे लखनऊ रैफर कर दिया. लखनऊ मैडिकल कालेज के डाक्टर उस की कटी नाक जोड़ने की कोशिश में जुट गए.

2 रास्ते या कोई तीसरा भी

लेकिन समाज में जो नाक कटी उस को दुनिया का कोई डाक्टर नहीं जोड़ सकता. एक झटके में एक अच्छीखासी बसीबसाई गृहस्थी उजड़ गई. क्या पूजा या किसी शादीशुदा औरत को गैरमर्द से प्यार करने का हक नहीं? इस सवाल से ही जुड़ा एक अहम सवाल यह भी है कि जब शौहर बीवी की आशिकी से वाकिफ हो जाए तो वह बेचारा क्या करे?

जिन्हें लगता है कि घरवाली ही उन की मर्दानगी को कठघरे में खड़ा कर उन की गैरत और घरखानदान की इज्जत को मिट्टी में मिला रही है. रामखिलावन जैसे पतियों की रात की नींद और दिन का चैन छिन जाता है, जब उन्हें यह पता चल जाता है कि उन की पत्नी किसी गैरमर्द के पहलू में बैठी मौज कर रही है और डंके की चोट पर कर रही है, तो वह बेचारे क्या करे? खामोशी से बीवी को गुलछर्रे उड़ाते देखता रहे या फिर बीवी और उस के आशिक का कत्ल ही कर दे?

पति इन 2 रास्तों में से ज्यादातर दूसरा रास्ता चुनने के लिए मजबूर हो जाते हैं, जिस से उन्हें भी कुछ हासिल नहीं होता सिवा जेल जाने के. लेकिन एक तीसरा रास्ता भी है, जिसे जानने से पहले एक निगाह कुछ उन ताजा हादसों पर डालना जरूरी है, जिन से पता चलता है कि कैसे अब बीवी का आशिक शौहर के गले की हड्डी बनता जा रहा है :

* बैतूल, मध्य प्रदेश. 16 जून, 2025. इस दिन एक शादीशुदा औरत रानी (बदला नाम) अपने आशिक राजा के साथ गुजरात से वापस लौट रही थी. शाहपुर बसस्टैंड पर घेर कर राजा और रानी की जम कर धुनाई पति बलदेव नागले और उस के दर्जनभर साथियों ने की, जिन्होंने रानी को तो कम ही मारा, लेकिन राजा की धुनाई इतनी बेरहमी से की गई कि मौके पर ही उस की मौत हो गई. पुलिस ने 11 लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

* अलीगढ़, उत्तर प्रदेश. 17 जून, 2025. शहर के गंगीरी इलाके में रहने वाले पेशे से ट्रक ड्राइवर ऋषि की हत्या उस की पत्नी ललिता ने अपने आशिक नीरेश के साथ मिल कर की. नीरेश रिश्ते में ललिता का देवर भी लगता है.

इस मामले में ललिता और नीरेश के संबंध काफी पहले से थे, जिन्हें ले कर ऋषि आएदिन ललिता की पिटाई किया करता था. इस से तंग आ कर ललिता और नीरेश ने उसे रास्ते से ही हटा दिया. अब दोनों प्रेमी जेल में हैं.

* कोटद्वार, उत्तराखंड. 5 जून, 2025. इस दिन एक लाश कोटद्वार, दुगड्डा रोड पर मिली थी, जिस की शिनाख्त दिल्ली के वसंतकुंज के बाशिंदे रविंद्र कुमार के तौर पर हुई. पुलिस जांच में पता चला कि रविंद्र कुमार की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उस की ही बीवी रीना सिंधु ने अपने आशिक परितोष कुमार के साथ मिल कर की थी और लाश को उत्तराखंड में यह सोचते हुए फेंक दिया था कि कुछ दिनों में मामला आयागया हो जाएगा और दोनों कहीं और रहने लगेंगे. हत्या करने के बाद वे बिजनौर में रहने भी लगे थे. लेकिन अब वे जेल में हैं.

* भवानी मंडी, झलावाड़, राजस्थान. 20 जून, 2025. पति मनीष और पत्नी सरोज के बीच आ गया था उन का किराएदार रामसेवक, जिस पर सरोज मरमिटी थी. मनीष एक समझदार पति की तरह सरोज को समझाता भी रहता था कि यह सब ठीक नहीं लेकिन सरोज समझनेसमझाने की स्टेज से काफी आगे निकल चुकी थी.

कोई हल न निकलते देख मनीष ने रामसेवक से यह सोचते हुए अपना घर खाली करवा लिया कि दोनों दूर रहेंगे तो चोंच लड़ाना बंद हो जाएगा, लेकिन हुआ उलटा. सरोज और रामसेवक ने सोते हुए मनीष पर खौलता तेल डाल कर उस की हत्या करने की कोशिश की. सरोज ने यूट्यूब पर बौयलिंग औयल वीडियो सर्च कर के यह आइडिया लिया था. अब वह भी जेल में है. पर इस बंदे का गजब काम इन हत्याओं की गिनती दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है. पति बदले की आग में जलता रहता है, दूसरी तरफ पत्नी और उस का प्रेमी भी चैन और सुकून से नहीं रह पाते, क्योंकि उन्हें प्यार जताने के अलावा सैक्स सुख के रास्ते में सब से बड़ा रोड़ा पति ही लगता है. ऐसे में उन्हें हत्या के सिवा कोई दूसरा रास्ता नहीं सूझता.

कुछ ऐसा ही हाल जौनपुर के अरविंद बिंद नाम के नौजवान का था, जिस की शादी कुछ दिनों पहले ही रीता से हुई थी.

शादी के बाद ही अरविंद को पता चल गया था कि रीता ने मजबूरी और दबाव में उस से शादी की थी, वरना तो वह उन की ही बिरादरी के यशवंत बिंद से प्यार करती थी. शादी के कुछ दिन बाद तक रीता ससुराल में रही पर फिर यशवंत के साथ रहने चली गई.

एक मजबूर और सम?ादार पति की तरह अरविंद ने रीता को समझाने की कोशिश की लेकिन इस का उस पर कोई असर नहीं हुआ. उलटे उस ने साफसाफ कह दिया कि वह ससुराल में नहीं रहना चाहती और अगर इस बाबत ज्यादा जोरजबरदस्ती की गई, तो वह खुदकुशी कर लेगी.

इस पर अरविंद ने सब्र नहीं खोया, न ही उस ने हत्या जैसा कोई हिंसक रास्ता अख्तियार किया, उलटे उस ने यह फैसला लेते हुए सब को चौंका दिया कि वह खुद अपनी बीवी की शादी उस के आशिक के साथ करवाएगा. अपने कहे पर उस ने अमल भी किया और 16 जून को जौनपुर के दुर्गा मंदिर में रीता और यशवंत की शादी करा दी.

इस अनूठी शादी की चर्चा देशभर में हुई और हर किसी ने अरविंद के फैसले और पहल की तारीफ की.
तलाक है तीसरा रास्ता अरविंद की इस समझदारी से फायदा यह हुआ कि बेकार का खूनखराबा होने से बच गया, जबकि दूसरे मामलों से समझ यही आता है कि हर मामले में हत्या हुई या फिर हिंसा हुई, क्योंकि किसी को कोई हल नहीं सूझ रहा था.

यह भी ठीक है कि हर कोई अरविंद जितनी दिलेरी, बुद्धिमानी और दरियादिली नहीं दिखा सकता, लेकिन इतना तो कर ही सकता है कि न मानने या न समझाने पर पत्नी को तलाक दे दे, जिस से पत्नी भी चैन से अपने आशिक के साथ रहे और वह खुद भी दूसरी शादी कर सके.

यह ठीक है कि तलाक में सालोंसाल लग जाते हैं, लेकिन इस से बचने का भी आसान रास्ता यह है कि तलाक दोनों की रजामंदी से लिया जाए. हिंदू मैरिज ऐक्ट की धारा (13 बी) में यह इंतजाम है कि पतिपत्नी दोनों अदालत जा कर यह दरख्वास्त दें कि अब हमारा साथ रहना मुमकिन नहीं, इसलिए हमे तलाक की डिक्री दी जाए. आमतौर पर इस धारा के तहत एक साल के अंदर तलाक मिल जाता है और अदालतें ज्यादा सवालजवाब भी नहीं करतीं.

जब वजह कुछ भी खासतौर से किसी और से इश्क ही क्यों न हो, जिस के चलते पत्नी साथ नहीं रहना चाहती तो उसे जबरन रहने के लिए मजबूर करना एक हादसे या वारदात को न्योता देने जैसा ही काम है, जिस का खात्मा किसी की हत्या और फिर जेल ही होता है. फिर जिंदगी का भी कोई माने या सुख नहीं
रह जाता.

आपसी रजामंदी से तलाक में ये सारे झंझट आपसी समझौते कर दूर किए जा सकते हैं इन की भी लिखापढ़ी को तलाक के मसौदे में शामिल कर लेना चाहिए. Social Awareness

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें