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Crime Story in Hindi : विश्वासघात

Crime Story in Hindi. दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी. सौम्या उस समय घर में अकेली थी. उस का पति करन दफ्तर जा चुका था.

सौम्या ने जब दरवाजा खोला, तो बाहर खड़े शख्स को देख कर वह चौंक पड़ी,    ‘‘अरे, आप…’’    ‘‘अंदर आने के लिए नहीं कहेंगी,’’ बाहर खड़े नौजवान ने मुसकरा कर कहा.   ‘‘मैं तो भूल ही गई. आइए, अंदर आइए,’’ वह झेपते हुए बोली.

वह नौजवान, जिस के बदन पर कीमती सूट था और बाएं हाथ की 2 उंगलियों में हीरे की अंगूठियां थीं, अंदर आ कर एक कुरसी पर बैठ गया.

‘‘आप कितने दिनों बाद आए हैं. लगता है, आप को हमारी याद ही नहीं आती,’’ सौम्या शिकायत करने लगी.

‘‘ऐसी बात नहीं है भाभीजी…’’ वह नौजवान बोला, ‘‘दरअसल, आप को तो मालूम है कि बाबूजी की मौत के बाद घर और कारोबार की सारी जिम्मेदारी मुझे ही संभालनी पड़ती है.’’ ‘‘मैं आप के लिए चाय बना कर लाती हूं,’’ सौम्या ने कहा.

कुछ देर बाद सौम्या नमकीन और चाय ले कर आ गई.

‘‘करन तो ड्यूटी पर गया होगा?’’ उस नौजवान ने पूछा. ‘‘हां,’’ सौम्या ने उसे चाय का कप पकड़ाते हुए कहा.

‘‘उस से तो मुलाकात हो ही नहीं पाती. काम में मसरूफ रहता हूं. आज दफ्तर मेें ज्यादा काम नहीं था, इसलिए उसे जल्दी निबटा कर यहां आ गया.’’ ‘‘आप रविवार को आइए, करन घर में ही मिलेंगे.’’

इधरउधर की बातें कर के उस नौजवान ने अपने कोट की जेब से एक अंगूठी निकाली और सौम्या की तरफ बढ़ाते हुए कहा, ‘‘मेरी तरफ से यह अंगूठी आप के लिए…’’

सौम्या ने खूब मना किया, पर वह नौजवान अंगूठी दे कर ही माना.

‘‘यह तो बहुत कीमती होगी?’’ ‘‘बिलकुल नहीं…’’ वह नौजवान मुसकराते हुए बोला, ‘‘आप के आगे तो यह बिलकुल सस्ती है.’’ सौम्या चाय के खाली कप उठाते हुए बोली, ‘‘खाना खा कर जाना.’’

चाय के कप उठाते समय सौम्या की साड़ी कंधे से नीचे खिसक गई थी. उस नौजवान ने देख लिया था. वह सकपका गई. उस ने फौरन साड़ी का पल्ला दुरुस्त किया.

तभी वह नौजवान खड़ा हो गया और बोला, ‘‘अभी मैं चलता हूं. खाना फिर कभी खाऊंगा.’’

उस 22 साला नौजवान का नाम दीप था. वह करन के बचपन का साथी था. वह बहुत अमीर था, जबकि करन पोस्ट औफिस में क्लर्क था. इस के बावजूद वे दोनों बहुत गहरे दोस्त थे.

करन के मांबाप बहुत पहले ही एक कार हादसे में मर चुके थे. सौम्या के साथ करन ने लव मैरिज की थी.

दुनिया में अच्छी दोस्ती और प्यार से जलने वालों की कमी नहीं है. करन और दीप की दोस्ती भी दुनिया वालों की नजरों में खटकती थी.

करन के घर के सामने वाली पान की दुकान के पास भीड़ का जमावड़ा रहता था. उन में से ज्यादातर लड़के मवालीगुंडे होते थे.

उन्हीं में से एक था राजू, जो अपने 3-4 दोस्तों के साथ अकसर वहां आता था. वह दीप और सौम्या के बारे में उलटीसीधी बातें किया करता था.

आज भी जब दीप करन के घर से निकल कर अपनी कार में बैठ कर जा रहा था, तो राजू पान की दुकान के पास खड़ा पान चबा रहा था.

जब कार आंखों से ओझल हो गई, तो राजू का एक दोस्त बोला, ‘‘राजू, यह लड़का यहां अकसर आता है.’’

‘‘तुझे क्या दिक्कत है?’’ पान चबाते हुए राजू ने एक खास अंदाज में कहा, ‘‘अरे भाई, जिस के यहां माल होगा, उसी के यहां तो चोर आएंगे…’’

उस की बात पर सब हंस पड़े.

रविवार को जब दीप आया, तो करन घर में ही था. उस दिन दोनों ने बैठ कर खूब गपशप की और नाश्ता व खाना भी साथसाथ खाया.

खाना खाते समय दीप ने अगले शुक्रवार को शहर के सब से महंगे होटल में लंच कराने का औफर दिया.

‘‘वह तो बहुत महंगा है. वैसे सौम्या तो कई बार वहां चलने के लिए कह चुकी है, पर… इतने महंगे होटल में मैं नहीं जा सकता,’’ करन ने कहा.

‘‘उस की चिंता तुम क्यों करते हो? अरे, भाभीजी पर कुछ हक मेरा भी तो बनता है. क्या उन की एक ख्वाहिश को भी मैं पूरा नहीं कर सकता?’’ दीप पास खड़ी सौम्या की तरफ प्यार से देखते हुए बोला.

दीप की जिद के आगे करन को उस की बात माननी ही पड़ी.

जब शुक्रवार आया, तो करन को कुछ जरूरी काम पड़ गया और वह बाहर चला गया, लेकिन जाते समय फोन पर दीप से कह गया कि वह सौम्या को खाना खिलाने होटल ले जाए.

दीप सौम्या को ले कर जब उस महंगे होटल में पहुंचा, तो सौम्या की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. यहां आने के बारे में वह न जाने कब से सोच रही थी. दीप उसे होटल के एक शानदार कमरे में ले गया.

‘‘हम यहां कमरे में क्यों आए… लंच तो बाहर…’’ कमरे में पहुंच कर कुछ सोचते हुए सौम्या बोली.

‘‘बाहर भीड़ ज्यादा है और भीड़ में आप का दम घुटता है, इसलिए लंच का प्रोग्राम मैं ने इस कमरे में ही बनाया है. यह कमरा तो मैं ने कल ही बुक करवा दिया था.’’

‘‘तुम तो मेरी पसंदनापसंद को जानते हो,’’ सौम्या हंस कर बोली.

यह सुन कर दीप केवल मुसकरा दिया.

दीप ने एक वेटर को बुला कर लंच कमरे में ही मंगा लिया और शानदार पलंग पर बैठ कर दोनों खाना खाने लगे.

‘‘यह कोल्ड ड्रिंक पता नहीं कैसी… मुझे  चक्कर सा…’’ कोल्ड ड्रिंक पीने के बाद सौम्या अचानक सिर पकड़ कर बोली. ‘‘हां, स्वाद भी कुछ बदलाबदला सा…’’ दीप पलंग से उतरते हुए बोला, ‘‘मैं वेटर से पूछता हूं.’’

अभी दीप पलंग से उतरा ही था कि सौम्या भी पलंग से उतरी और कुछ दूर चलते ही उस के कदम लड़खड़ा गए. अगर दीप ने फौरन पलट कर उसे अपनी बांहों में थाम न लिया होता, तो वह गिर जाती.

उसी समय सौम्या को तेज हिचकी आई और वह ?ाटका खा कर दीप से लिपट गई. दीप ने उसे और कस कर जकड़ते हुए अपने सीने से लगा लिया.

सौम्या के शरीर को अपनी बांहों में जकड़े दीप को अपना शरीर जलता हुआ सा मालूम होने लगा. उसे ऐसा लगा, जैसे शरीर में अंगारे भर गए हों. उस का चेहरा लाल होने लगा.

दीप की बांहों का शिकंजा अपनेआप कसने लगा. 2 जिस्मों की गरमी से पूरा कमरा सुलगने लगा, लेकिन इस से पहले कि आग लग पाती, सौम्या घबरा कर दीप से अलग हो गई.

‘‘हमें घर चलना चाहिए,’’ सौम्या माथे से पसीना पोंछते हुए दरवाजे की तरफ बढ़ते हुए बोली. दीप भी उस के पीछेपीछे चल पड़ा.

सौम्या को घर छोड़ कर जब दीप बाहर निकला, तो वह काफी परेशान दिख रहा था. उस ने राजू व उस के दोस्तों को अपनी ओर घूरते हुए देखा. वह जल्दी से कार में बैठा और वहां से चला गया.

राजू के चेहरे पर आज कुछ ज्यादा ही खुशी झलक रही थी.

सुबह का समय था. दीप अपने दफ्तर में बैठा एक फाइल मेें उल?ा हुआ था, तभी मेज पर रखा फोन बजा.

‘‘हैलो,’’ दीप ने ही फोन उठाया.  ‘‘हैलो,’’ उधर से एक भारीभरकम आवाज सुनाई दी.

‘‘मैं दीप भारती बोल रहा हूं… आप कौन?’’ दीप ने पूछा.    ‘‘यह मत पूछो कि मैं कौन बोल रहा हूं. मैं ने फोन क्यों किया, यह पूछो?’’

दीप कुछ चौंका, फिर भी उस ने कहा, ‘‘क्यों किया फोन?’’    ‘‘तुम्हारी मेज पर… तुम्हारे बिलकुल ठीक सामने जो फाइल रखी है, उसे खोल कर देखो…’’

अब दीप चक्कर में पड़ गया कि आखिर माजरा क्या है? हकीकत जानने के लिए उस ने एक हाथ बढ़ा कर मेज पर रखी फाइल उठा ली और जब उसे खोल कर देखा, तो उस में एक बड़ा सा लिफाफा रखा था.

जब दीप ने लिफाफा खोल कर देखा, तो उस के पूरे शरीर में करंट सा दौड़ गया. दिल की धड़कनें बढ़ गईं, चेहरे पर पसीने की बूंदें झलकने लगीं.

‘‘क्यों, देख लिया?’’ फोन करने वाले शख्स ने हंस कर पूछा. ‘‘तुम कौन हो? क्या चाहते हो?’’ दीप घबरा गया था.

‘‘अभी भी नहीं समझे. मुझे पैसा चाहिए. अगर तुम चाहते हो कि लिफाफे में रखे तुम्हारे और सौम्या के फोटो तुम्हारे बचपन के दोस्त करन के पास न पहुंचें, तो मु?ो पूरे 20 लाख रुपए दो.’’

‘‘20 लाख…’’ दीप चौंका. ‘‘हां, तुम्हारी घटिया हरकत के मुकाबले यह रकम ज्यादा नहीं है.’’

दीप हिम्मत जुटा कर बोला, ‘‘तुम्हें एक पैसा भी नहीं मिलेगा.’’ ‘‘पैसा, अरे पैसे से क्या होता है आजकल? मुझे पूरे 20 लाख रुपए चाहिए,’’ उधर से धमकी भरी आवाज सुनाई दी.

दीप सोचने लगा, ‘अगर करन ने ये तसवीरें देख लीं, तो वह मेरे और सौम्या के बारे में क्या सोचेगा. उस का बसाबसाया घर बरबाद हो जाएगा. नहीं, यह नहीं होना चाहिए.’

‘‘क्या सोचने लगे?’’ कुछ देर बाद उधर से पूछा गया.

पहले दीप ने सोचा कि फोन काट दे, फिर यह सोच कर कि फोन काट देने से यह समस्या हल नहीं होगी, उस ने पूछा, ‘‘ठीक है, पैसे कहां पहुंचाने हैं?’’

‘‘परसों रात के 11 बजे रुपए तैयार रखना. मैं बता दूंगा कि रुपए कहां पहुंचाने हैं, लेकिन कोई होशियारी नहीं होनी चाहिए.’’

‘‘नहीं होगी, पर उस के नैगेटिव?’’ ‘‘परसों रात को ही मिल जाएंगे.’’

उधर से फोन काट दिया गया. पर दीप 2 दिन बेचैन रहा.

जब तयशुदा समय पर रात के ठीक 10 बजे ब्लैकमेलर का फोन आया और दीप को रुपए ले कर शहर के बिलकुल बाहर सुनसान जगह पर बने खंडहरों में आने के लिए कहा गया, तो दीप, जिस ने रुपए का इंतजाम पहले ही कर लिया था, कार से बताए गए पते की ओर चल पड़ा.

खंडहरों तक पहुंचने में दीप को आधा घंटा लग गया.

दीप ने कार से उतर कर पहले उस खतरनाक जगह का मुआयना किया. वह सूटकेस हाथ में लिए हुए था.

तभी आवाज आई, ‘‘जहां खड़े हो, सूटकेस वहीं रख दो और सामने खड़े बबूल के पेड़ के पास जाओ. तुम्हें वहीं फोटो के नैगेटिव मिल जाएंगे.’’

दीप ने सूटकेस वहीं रख दिया और बबूल के पेड़ की तरफ बढ़ गया. तभी कोई अंधेरे को चीरते हुए आया और सूटकेस उठा ले गया.

‘‘यहां तो कुछ नहीं है,’’ बबूल के पेड़ के पास कुछ न पा कर दीप बौखला गया और चीखा.

‘‘तुम सही कह रहे हो. नैगेटिव वहां नहीं हैं, जहां तुम ढूंढ़ रहे हो.’’ ‘‘फिर कहां हैं?’’ ‘‘दूसरी तरफ देखो.’’

दीप कुछ आगे बढ़ कर जब दूसरी तरफ पहुंचा, तो उसे एक सफेद लिफाफा पड़ा हुआ मिल गया, जिस में नैगेटिव थे.

वह नैगेटिव ले कर घर आ गया. उन्हें चैक किया और जला दिया. जब 2-3 महीने तक ब्लैकमेलर का फोन नहीं आया, तो वह निश्चिंत हो गया.

इसी बीच दीप की शादी तय हो गई. दीप शादी का कार्ड ले कर जब करन के घर पहुंचा, तो उन दोनों को बिस्तर पर बैठा पाया.

दीप ने दरवाजे पर दस्तक दे कर उन का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए जैसे ही हाथ उठाया, तो ठिठक गया. अंदर से आ रही आवाजों ने उसे वहीं रुकने पर मजबूर कर दिया.

‘‘देखा मेरे दिमाग का कमाल,’’ करन कह रहा था. ‘‘इस में मेरा भी तो योगदान है,’’ सौम्या हंसते हुए बोली.

‘‘हां जानेमन…’’ करन उस के गालों को चूम कर बोला, ‘‘तुम अगर अपना रोल ठीक से नहीं निभातीं, तो हम कभी अमीर नहीं बन पाते.’’

‘‘हां, लेकिन तुम ने यह अंदाजा कब लगा लिया था कि दीप हमारे जाल में फंस जाएगा?’’ सौम्या ने पूछा.

‘‘जब पहली बार वह तुम से मिलने आया था,’’ करन ने कहा.

‘‘वैसे, तुम्हारी चाल थी बेहद शानदार. कैसे तुम ने होटल में वेटर को पैसे दे कर कोल्ड ड्रिंक में शराब मिलवा कर भिजवाई. दीप तो शराब को हाथ भी नहीं लगाता है. वह जरा सी शराब में ही बहकने लगा था.

‘‘बहकने की तो मैं ने भी शानदार ऐक्टिंग की. उसे क्या पता कि मु?ो तो शराब पीने का बहुत पहले से शौक रहा है,’’ सौम्या ने कहा.

‘‘फिर छिप कर मैं ने ही तुम दोनों की तसवीरें खींचीं और ब्लैकमेलर बन कर दीप से 20 लाख रुपए भी झटक लिए,’’ इतना कह कर करन जोर से हंसा और उस ने सौम्या को दोबारा चूम लिया.

विश्वासघाती करन की हंसी बाहर खड़े दीप के कानों में पिघले हुए गरम कांच की तरह उतर रही थी.  Crime Story in Hindi

– अनुराग कुमार जीनियस

गांव का फंडा: प्यार करो समझबूझ कर

जब रेखा की तबीयत खराब होने लगी तो उस के घर वाले उसे डाक्टर के पास ले कर गए. डाक्टर ने रेखा की जांच की तब पता चला कि वह तो पेट से है.

यह बात जब रेखा के घर वालों को पता चली तो उन लोगों ने उसे मारनापीटना शुरू कर दिया. डाक्टर ने घर वालों को यह सब करने से मना किया और उस का पेट साफ कराने यानी गर्भपात के बारे में बताया. रेखा 12वीं में पढ़ती थी. वह पढ़ाई में बहुत अच्छी थी. घर के लोग भी उस पर पूरा भरोसा करते थे. इस वजह से उसे कहीं भी आनेजाने की छूट थी.

उम्र के इस नाजुक मोड़ पर रेखा की दोस्ती अपने ही गांव के रहने वाले एक ऐसे लड़के से हुई जो उसे कैरियर में आगे बढ़ाने में मदद करता था. प्रमोद नाम के इस नौजवान के साथ रेखा का साथ बहुत अच्छा बीतने लगा. दोनों के बीच बना यह रिश्ता कब गहराने लगा, पता ही नहीं चला. प्रमोद ने रेखा को इस बात का भरोसा दिलाया कि वह उस के साथ शादी करेगा. रेखा ने यह नहीं सोचा कि गांव में उन दोनों का जो रिश्ता है उस के चलते उन की शादी होना मुश्किल है.

प्रमोद ने प्यार का बहाना बना कर रेखा के साथ जिस्मानी संबंध बना लिए. रेखा ने जब प्रमोद से कहा कि इस संबंध से उन को बच्चा हो सकता है तो प्रमोद ने जवाब दिया कि बिना शादी किए बच्चा नहीं होता है. रेखा को लगा कि प्रमोद सच कह रहा होगा, पर नतीजा उलटा ही निकला.

डाक्टर ने रेखा का पेट गिरा कर उस की परेशानी तो दूर कर दी, पर इस के बाद रेखा की पूरी जिंदगी ही बदल गई. कल तक गांव में सब से आगे रहने वाली रेखा अब दिमागी तौर पर बीमार रहने लगी. वह कभी प्रमोद की चालाकी के बारे में सोचती तो कभी अपनी नासमझी के बारे में.

रेखा की छोटी सी गलती ने उस का पूरा कैरियर खत्म कर दिया. बहुत दिनों तक घर वालों ने उस को नातेरिश्तेदारों के पास रखा और कुछ समय बाद उस की शादी कर दी.

आज जब रेखा उस एक भूल के बारे में सोचती है तो उस को लगता है कि अगर उस से वह गलती न हुई होती तो वह भी दूसरी लड़कियों की तरह पढ़लिख कर आगे बढ़ चुकी होती. इस तरह के हालात से गुजरने वाली रेखा अकेली नहीं है. गांव में रहने वाली कई लड़कियों की परेशानियां शहर में रहने वाली लड़कियों से ज्यादा होती हैं. गांव के माहौल, रहनसहन और शारीरिक मेहनत का नतीजा यह होता है कि लड़कियां कम उम्र में ही जिस्मानी रूप से जवान हो जाती हैं. उन्हें सैक्स संबंधों के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं होता है. लड़के भी इन की नासमझी का फायदा उठाने की तलाश में रहते हैं.

गांव के लड़केलड़कियों को इस बात की भी पूरी सहूलियत रहती है कि उन को जिस्मानी संबंध बनाने लायक जगह आसानी से मिल जाती है. इस के लिए खेतखलिहान, बागबगीचे या फिर टूटेफूटे खंडहर पड़े घरों का ये लोग इस्तेमाल करते हैं. प्यार में रहें सावधान 13 साल से 19 साल की उम्र के बीच प्यार नाम की बीमारी ज्यादा फैलती है. किसी लड़के को देख कर उस के बारे में लगातार सोचने और बिना उस के मन न लगने के हालात हों तो समझ लेना चाहिए कि प्यार हो गया है.

दरअसल, प्यार के बारे में तमाम तरह की गलतफहमियां फैली हुई हैं. सब से बड़ी बात यह है कि प्यार किया नहीं जाता हो जाता है. इस बात में कोई सचाई नहीं होती. अगर यह बात सच होती तो भाईबहन में प्यार हो जाता. कभी कोई किसी बदसूरत लड़की से लड़का प्यार नहीं करता.

पहली नजर में होने वाला प्यार केवल एक आकर्षण होता है. प्यार सोचसमझ कर किया जाना चाहिए. प्यार करते समय यह देख लेना चाहिए कि जिस से आप प्यार कर रहे हैं उस के साथ आगे का समय कैसा गुजरेगा.

आप के बरताव में कितनी समानता है. प्यार किया जाता है, राह चलते किसी से हो नहीं जाता है. अकसर प्रेमी इस बात को कहते हैं कि प्यार बिना किसी लालच के होता है. लालच का मतलब धनदौलत ही नहीं होती है.

अगर ऐसा होता तो प्यार के बदले लड़कालड़की कुछ नहीं चाहते. क्या सच में ऐसा होता है? अपने मन से पूछिए तो आप को इस बात का जवाब मिल जाएगा. हम जिस को प्यार करते हैं उस से बहुतकुछ चाहते हैं. इस में चाहत, साथ घूमनाफिरना, जिस्मानी संबंध बनाना तक शामिल होता है. प्यार करते समय यह जरूर विचार करें कि आने वाले दिनों में जब आप शादी कर लेंगे तो आप की जिंदगी कैसे गुजरेगी.

प्यार के साइड इफैक्ट

जिस उम्र में प्यार होता है, कैरियर बनाने की उम्र भी वही होती है. प्यार में कामयाबी कम लोगों को और नाकामी ज्यादा लोगों को मिलती है. ऐसे में कैरियर का बहुत नुकसान होता है, इसलिए मांबाप प्यार का विरोध करते हैं.

जिंदगी चलाने के लिए रुपयापैसा भी चाहिए. इस तरह के प्यार का सब से बड़ा नुकसान यह होता है कि जिस्मानी संबंधों का खमियाजा लड़कियों को बिन शादी की मां बन कर चुकाना पड़ता है. इस को समाज सही नजरों से नहीं देखता है. इस तरह की लड़कियों की शादी होना भी मुसीबत बन जाती है, जिस से चिंता और बढ़ जाती है और कैरियर तबाह हो जाता है.

कभीकभी शादी के पहले का प्यार शादी के बाद की जिंदगी में नासूर बन जाता है. प्यार की निशानी प्रेमपत्र और प्रेम कहानी जब पति के पास तक पहुंच जाती है तो शादी के बाद की जिंदगी खराब हो जाती है.

प्यार करते समय इस बात का पूरा खयाल रखना चाहिए. अगर लड़की पेट से हो जाए तो ज्यादातर प्रेमी इस बात का पता चलते ही भाग जाते हैं. इस के बाद अकेले लड़की को ही सबकुछ झेलना पड़ता है. इस में फंस कर लड़की अपनी जान तक देने की कोशिश कर जाती है.

पेट गिराना आसान काम नहीं होता है. लड़की को भी तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. अगर लड़कालड़की भाग कर शादी कर भी लेते हैं तो तमाम तरह की कानूनी परेशानियां सामने आ जाती हैं.

प्यार में क्या न करें

* कभी भी प्रेमपत्र न लिखें. प्रेमी के साथ कोई फोटो न खिंचाएं. उस के लाख दबाव डालने पर भी जिस्मानी संबंध न बनाएं.

* आजकल मोबाइल फोन का जमाना है. लोग मोबाइल फोन से ही फोटो खींच कर या वीडियो बना कर आप को ब्लैकमेल करना शुरू कर देते हैं. कोशिश यह करें कि उस के साथ कभी इतना अकेले में न जाएं जिस से वह मनमानी कर सके.

* अगर आप को यह लगे कि आप शादी कर के एकदूसरे के साथ जिंदगी गुजारे लेंगे तब मातापिता से अपने प्यार के बारे में बताएं. अगर मातापिता से सीधे बात करने में कोई परेशानी हो तो किसी के जरीए भी बात कर सकते हैं.

* किसी भी हालात में घर से भागें नहीं. अगर घर वाले राजी न हों तो आप शादी के लिए दिमागी, माली और कानूनी रूप से तैयार हो कर वकील से बात करें और अदालती शादी के बारे में सोचें.  द्य

इन बातों का रखें खयाल

* हमारे समाज में बहुत से परिवारों में लड़की को अनचाही औलाद माना जाता है. उस को घर में प्यार नहीं किया जाता. उस के साथ बराबरी का बरताव नहीं किया जाता. इस वजह से लड़की जब बड़ी होती है, कोई उस से प्यार से बोल देता है, उस की तारीफ करता है तो वह उस की ओर झुकने लगती है. यहीं से प्यार पनपने लगता है.

* हम लड़की को प्यार और उस से होने वाली परेशानियों के बारे में नहीं बताते हैं. वह समझ नहीं पाती कि उस का शोषण किस तरह हो जाता है. दूसरी बात अनमेल या बेमेल शादी का शिकार लड़के भी होते हैं. वे दूसरी लड़की में अपनी खुशी तलाशने लगते हैं. यहीं से शोषण की शुरुआत होती है.

* सब से पहले तो मांबाप को इस बारे में बताया जाए कि बच्चों के साथ कैसा बरताव रखें. सैक्स के बारे में भी लड़कियों को बताया जाए. लड़की का शोषण किस तरह से हो सकता है, यह उस को खुल कर बताया जाए तो लड़की अपनी देखभाल खुद कर सकती है.

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