Short Story. स्वामीजी हर छोटेबड़े नगर और कसबे में अपना कैंप लगाते थे. उन के चेले प्रचार करते रहते थे कि स्वामीजी हर किसी की मुराद पूरी करते हैं. वह अंधे को आंखें देते हैं, कोढ़ी को सुंदर काया, और जो औलाद सुख से महरूम हैं, उन्हें औलाद.
स्वामीजी के चेले अपने साथ प्रचार सामग्री के रूप में छपी परचियां भी रखते, जिन में उन लोगों का ब्योरा छपा होता था, जिन्हें स्वामीजी के आशीर्वाद से फायदा हुआ था.
अचानक पुलिस के कुछ खास मुखबिर स्वामीजी के खिलाफ सूचनाएं देने लगे, जिन में कहा जाता था कि औलाद सुख देने के नाम पर स्वामीजी औरतों को परेशान करते हैं.
पुलिस को स्वामीजी के खिलाफ अभी तक कोई ठोस सुबूत नहीं मिले थे, इसलिए वह उन के खिलाफ कोई काररवाई नहीं कर रही थी.
जहां स्वामीजी का कैंप लगा था, अचानक वहां के थाने में एक नया थाना इंचार्ज आया, जो नौजवान लड़कियों की तरह खूबसूरत था. कदकाठी भी लड़कियों जैसी ही थी, पर बदन में गजब की फुरती थी.
नए थाना इंचार्ज के मातहत मन ही मन उस पर हंसते थे कि यह क्या बदमाशों से लड़कियों की हिफाजत करेगा. दबंग इसे ही लड़की समझ कर उठा ले जाएंगे.
नए थाना इंचार्ज का नाम प्रवीण प्रताप सिंह था. उस ने स्वामीजी का नाम बहुत पहले से सुन रखा था. उस ने स्वामी से जुड़ी फाइलों को निकलवाया और उन की जांचपड़ताल करने लगा.
एक रात 12 बजे प्रवीण अपने कुछ खास आदमियों के साथ स्वामीजी के कैंप में पहुंचा. वह औरत के वेश में था. जब स्वामी के चेलों ने उन्हें स्वामीजी से मिलवाया, तो उन की आंखें खिल उठीं. उन्होंने अपने होंठों पर अपनी जीभ फेरी. ऐसा रूपरंग उन्होंने पहली बार देखा था.
स्वामीजी ने थाना इंचार्ज को इस तरह देखा, मानो वह उसे शरबत बना कर डकार जाएंगे.
‘‘कैसे आया बच्चा?’’ स्वामीजी ने प्रवीण से पूछा.
प्रवीण ने औरतों जैसी आवाज में कहा, ‘‘स्वामीजी, घर में सबकुछ है, पर औलाद का सुख नहीं है. समाज में बांझ कहलाई जाती हूं. ससुराल वाले मुझे अपमान भरी नजरों से देखते हैं.
‘‘आप का बहुत नाम सुना है. महाराज, मुझे आशीर्वाद दें, जिस से मेरी गोद भर जाए.’’
प्रवीण की बात सुन कर स्वामी की आंखों में चमक पैदा हो गई. उन्होंने प्रवीण को समझाया, ‘‘तुम्हारी इच्छा जरूर पूरी होगी बच्चा. हमें तुम्हारे लिए एक खास पूजा करनी होगी, जो रात 12 बजे से 2 बजे तक चलेगी. इस में 5 हजार रुपए का खर्चा आएगा.’’
‘‘खर्च की चिंता आप बिलकुल मत करें. उस की कोई दिक्कत नहीं है. आप कहें, तो अभी 5 हजार रुपए आप को भेंट कर दूं.’’
‘‘अगर ऐसा कर सको, तो आज ही पूजा शुरू हो सकती है.’’
जवाब में प्रवीण ने अपने ब्लाउज से 5-5 सौ के 10 नोट निकाल कर स्वामीजी को दे दिए.
स्वामीजी ने अपने एक शिष्य से कहा, ‘‘जल्दी से पूजा की तैयारी करो.’’
घंटेभर बाद ही उस शिष्य ने आ कर स्वामीजी को बताया कि सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं. प्रवीण को ले कर स्वामीजी पूजा वाली जगह पर पहुंचे, जहां एक ओर देवी की बड़ी सी मूर्ति लगी थी, बीच में लोहे का बना एक हवनकुंड था.
एक ओर बड़ी थाली में फूल, अक्षत, मिठाई, सुपारी व रोली रखी गई थी.
2 बरतनों में हवन का सामान था. हवनकुंड के पास छोटीछोटी कटी हुई लकडि़यां रखी थीं.
कुंड के पास बिछे आसन पर स्वामीजी बैठ गए. अपने ठीक सामने प्रवीण को बिठाया. हवनकुंड में आग जलाई गई, फिर आहुतियां दी जाने लगीं.
स्वामीजी मंत्र बोल रहे थे और प्रवीण समेत सभी शिष्य स्वाहा के साथ आहुतियां देने लगे. स्वाहा के स्वर चारों ओर गूंजने लगे. देखतेदेखते सारा पूजा स्थल सुगंध से भर उठा. इसी बीच स्वामीजी के किसी शिष्य ने प्रवीण की नाक पर एक रूमाल रख दिया.
प्रवीण को समझने में देर नहीं लगी कि रूमाल बेहोशी की किसी दवा से भीगा हुआ है. प्रवीण ने अपनी सांसें रोक लीं और बेहोश होने का नाटक करते हुए अपनी जगह पर लुढ़क गया.
उस के लुढ़कते ही उसे उठा कर स्वामी के कमरे में पहुंचा दिया गया. इसी के साथ पूजा खत्म हो गई.
स्वामीजी कमरे में पहुंचे, जहां एक बड़ा सा पलंग था.
हौले से स्वामीजी पलंग पर बैठ गए. जैसे ही उन्होंने गंदी हरकत के लिए अपना हाथ बढ़ाया, वैसे ही उन के मुंह पर तेज वार हुआ. स्वामीजी पीठ के बल गिरे. उन्हें चक्कर आ गया.
जब स्वामीजी थोड़ा संभले, तो देखा कि पलंग पर से वह मांसल कोमल काया गायब थी और उन के सामने एक पुलिस अफसर पिस्तौल ताने खड़ा था.
‘‘आप…’’ स्वामीजी हैरानी से बोले. ‘‘स्वामीजी, आप धोखा खा गए. मुझे खूबसूरत बाला समझ लिया आप ने. मैं थाना इंचार्ज प्रवीण हूं. औलाद सुख देने की आड़ में आप औरतों से बेहूदी हरकतें करते हैं. अब आप का गंदा खेल खत्म हुआ स्वामीजी.’’
अपनी बात कह कर प्रवीण ने तेज सीटी बजाई. उसी के साथ सादा वेश में पुलिस के जवान स्वामी के कमरे में घुस आए और उसे घसीटते हुए बाहर खड़ी मिनी बस में किसी मरे कुत्ते की तरह उछाल दिया.
स्वामीजी के तथाकथित दर्जनभर शिष्य इधरउधर दुबक गए थे. स्वामीजी को बड़ी उम्मीद थी कि उन के हजारों की तादाद में भक्त मदद के लिए आएंगे, पर ऐसा नहीं हुआ. स्वामीजी हवालात की हवा खा रहे थे. Short Story




