Hindi Detective Story. देवा एक प्राइवेट जासूस था, जिसे कम ही केस मिलते थे. उस के कालेज की वकील दोस्त रानी उसे कुछ केस दिलवा देती थी. एक दिन डा. चौधरी अपनी बीवी पारुल के साथ उस से मिलने आए. उन का बेटा कुछ दिनों से लापता था. अब पढि़ए आगे…
‘‘बिलकुल सच,’’ रानी ने उसी अंदाज में जवाब दिया. उस शाम देवा ने रानी के फ्लैट पर जा कर उसी के हाथ का बना खाना खाया. रानी उसे ठीक उसी तरह परोस कर खिला रही थी, जैसे कोई बीवी अपने शौहर को.
खाना खाते समय रानी ने पूछा, ‘‘क्या कहते हो चौधरी के लड़के विनय के बारे में?’’ ‘‘यह अपहरण वाला चक्कर नहीं है.’’ ‘‘कैसे?’’ ‘‘अगर होता, तो अब तक चौधरी को फोन आ जाता.’’
‘‘हो सकता है कि बाद में करे?’’ ‘‘कोई चांस नहीं.’’ ‘‘क्यों?’’ ‘‘क्योंकि चौधरी इतना बड़ा आदमी नहीं है कि कोई उस के लड़के का अपहरण कर उस से फिरौती की रकम मांगे.’’
‘‘हुं…’’ रानी ने सहमति जताई, ‘‘तुम्हारा अगला कदम क्या होगा?’’ ‘‘मैं कल स्कूल जा कर पूछताछ शुरू करूंगा,’’ देवा बोला. इस के बाद देवा खापी कर वापस आ गया.
दूसरे दिन देवा विवेकानंद स्कूल पहुंचा. चपरासी से मुलाकात हुई. देवा ने चौथी क्लास की क्लास टीचर से मिलने की इच्छा जाहिर की. चपरासी ने उसे दूर से ही वह क्लास दिखाई, जहां पर चौथी क्लास की क्लास टीचर थीं.
क्लास टीचर ने विनय के बारे में कोई खास दिलचस्पी नहीं ली. देवा ने उस से कुछ सवाल पूछे.
‘‘क्या विनय से मिलने कोई आया था?’’ उस ने उत्तर से दक्षिण की ओर गरदन हिलाई.
‘‘विनय को उस दिन कोई ले गया था? इस वजह से वह गायब है या आप को किसी पर शक है?’’ उस ने फिर न में गरदन हिलाई.
देवा स्कूल के बाहर निकल रहा था कि उसे स्कूल बस आती दिखाई दी. ड्राइवर स्कूल बस से उतरा. देवा ने उसे रोका और अपना परिचय दिया. पहले प्यार से पुचकारा, फिर रोब डाला, फटकारा.
ड्राइवर ने बस इतना ही बताया कि उस ने विनय को उस के घर के पास वाली सड़क पर छोड़ दिया था. देवा को स्कूल से, टीचर से, ड्राइवर से कोई खास क्लू नहीं मिला.
देवा रानी से ली हुई मारुति कार में सवार हो कर उस सड़क की ओर चल दिया, जहां पर स्कूल बस विनय को छोड़ती थी. देवा ने कार सड़क के किनारे रोकी.
सड़क पर कुछ चायपान की दुकानें थीं. उस ने उन से पूछताछ की, तो इतना पता लगा कि सोमवार को स्कूल बस ने विनय को सड़क पर छोड़ा था और विनय को गली में दाखिल होते हुए देखा था. उस के बाद का पता नहीं.
इस बात से इतनी तसदीक तो हो गई थी कि विनय स्कूल से घर की सड़क तक ठीकठाक था. अब सवाल यह था कि घर के इतने पास से उसे कौन कहां ले गया था?
देवा ने गली के अंदर कदम रखा. 9 मकानों के बाद चौधरी का घर था. सभी के घरों के सामने लगी उन की नेमप्लेट इस बात का सुबूत थीं कि वे रईस लोग थे. देवा को सड़क से चौधरी के मकान तक पहुंचने में 3 मिनट लगे. वह वापस फिर उसी सड़क पर आया. उस ने पहले घर का दरवाजा खटखटाया. नेमप्लेट पर लिखा था ‘सिविल इंजीनियर सीताराम नागवंशी’. थोड़ी देर बाद खिड़की खुली.
‘‘कहिए, किस से मिलना है?’’ देवा के सामने एक गोरीचिट्टी औरत खिड़की खोल कर खड़ी थी. मांग में भरा सिंदूर इस बात का सुबूत था कि वह शादीशुदा थी.
देवा ने अपना परिचय दिया. ‘‘मैं आप की क्या मदद कर सकती हूं?’’ उस ने पूछा. ‘‘जी…’’ देवा ने अदब से कहा, ‘‘पिछले सोमवार को दोपहर के साढ़े 12 बजे आप ने मिस्टर चौधरी के लड़के विनय को गली में आते देखा था या…’’
‘‘देखिए, पिछले सोमवार को तो हमारे पति की छुट्टी थी. सो, हम दोपहर को फिल्म देखने चले गए थे. हम तो साढ़े 11 बजे ही घर से निकल गए थे.’’ ‘‘थैंक्यू,’’ कह कर देवा चल दिया.
देवा ने दूसरे घर का दरवाजा खटखटाया. एक बूढ़े ने दरवाजा खोला.
‘‘क्या बात है?’’ वह उखड़े मूड में बोला. देवा ने अपने आने की वजह बताई. ‘‘तो इस में मैं क्या कर सकता हूं?’’ बूढ़ा गुस्से से बोला.
‘‘आप पिछले सोमवार को दोपहर के साढ़े 12 बजे के बाद की बात बता सकते हो?’’ ‘‘मुझे कुछ नहीं मालूम,’’ बूढ़े ने कहा और दरवाजा बंद कर लिया.
देवा उदास चेहरा लिए तीसरे नंबर के घर पर जा पहुंचा. घंटी बजाई. दरवाजा खुला. एक मुसकराती हुई कुंआरी लड़की निकली.
‘‘कहिए…’’ उस लड़की ने देवा के दिल पर बिजली गिराते हुए कहा. ‘‘जी, मैं एक प्राइवेट डिटेक्टिव हूं…’’ देवा ने उसे बताया.
‘‘तो आप जासूस हैं. ओह, आइए न…’’ वह देवा को अंदर ले गई और अपनी मम्मी से मिलाया. झट चाय आई, फट से देवा ने पी.
‘‘पापा दफ्तर गए हैं, नहीं तो वह भी आप से मिल कर खुश होते,’’ मोना नाम की वह लड़की बोली. ‘‘जी, कोई बात नहीं, फिर कभी सही,’’ देवा ने कहा.
वैसे देवा को पापा से मिलने का कोई शौक नहीं था. देवा ने मतलब की बात पूछी, ‘‘क्या आप चौधरी के बेटे विनय के बारे में बता सकती हैं? क्या सोमवार की दोपहर आप ने उसे इस गली में देखा था… स्कूल से आते हुए?’’
दोनों मांबेटी ने यह कहते हुए न में सिर हिलाया कि दोपहर को आमतौर पर उन का दरवाजा बंद रहता है. ‘‘कोई बात नहीं,’’ देवा ने कहा और उन से रुखसत ली.
चौथे घर में ताला लगा था. अब वह 5वें घर पहुंचा. दरवाजा खुला था. नेमप्लेट से जाहिर होता था कि यह घर आरके मलिक का था, जो आकाशवाणी में एनाउंसर थे. देवा सीधे अंदर दाखिल हुआ.
‘‘क्या बात है?’’ सफेद बालों वाली एक मोटी सी बुजुर्ग औरत ने पूछा. ‘‘नमस्ते अम्मांजी,’’ देवा ने मसका लगाया. ‘‘नमस्ते बेटा,’’ बुजुर्ग औरत ने कहा, ‘‘क्या काम है बेटा? आओ, बैठो.’’ वह अंदर गया और बुजुर्ग औरत के पैर छुए.
‘‘जुगजुग जियो बेटा. राजन के दोस्त हो क्या?’’ ‘‘जी अम्मांजी,’’ देवा ने झूठ कहा. ‘‘बेटा, राजन तो है नहीं.’’
‘‘तो क्या आप अकेली…’’ ‘‘हां, बेटा.’’ ‘‘अम्मांजी, क्या आप हमेशा दरवाजा खुला रखती हैं?’’ ‘‘हां, दरवाजे से लोगों को आतेजाते देखती हूं, तो थोड़ा मन बहल जाता है.’’
‘‘अम्मांजी, 10 नंबर पर चौधरी साहब का मकान है. सुना है कि उन का बेटा लापता है?’’ ‘‘हां बेटा, सुना तो मैं ने भी है.’’
‘‘अम्मांजी, वह सोमवार से लापता है. सुना है कि स्कूल गया तो आया ही नहीं?’’ ‘‘नहीं बेटा, स्कूल से आते हुए सोमवार को तो मुझे दिखा था.’’ देवा चौंका.
‘‘सोमवार को?’’ ‘‘हां, बेटा.’’
देवा के दिमाग में बिजली कौंधी. अम्मां के झूठ बोलने का उसे कोई मकसद नजर नहीं आया. इस का मतलब था कि विनय अपने घर के बिलकुल करीब था और गायब… नहीं… देवा के दिमाग में सैकड़ों सवाल घूमने लगे.
उस ने फिर पूछा, ‘‘अम्मांजी, आप ने विनय को घर के अंदर दाखिल होते हुए देखा था?’’ ‘‘नहीं, बेटा.’’
‘‘लेकिन आप ने यह बात पुलिस को क्यों नहीं बताई?’’ ‘‘क्योंकि बेटा, न तो पुलिस ने मुझ से पूछा और मुझे तो बताया गया था कि विनय को मंगलवार के दिन कोई ले गया था.’’
‘‘किस ने बताया आप को?’’ देवा ने उत्सुकता से पूछा. ‘‘विनय की मां पारुल ने.’’ ‘‘क्या…’’ देवा के दिमाग में सैकड़ों बिजलियां कौंध गईं. उस ने यकीन के लिए फिर से पूछा, ‘‘अम्मांजी, क्या आप को अच्छी तरह याद है कि आप ने विनय को सोमवार को देखा था और विनय की मां पारुल ने आप से कहा था कि विनय मंगलवार से लापता है या उसे कोई ले गया है?’’
‘‘हां बेटा, लेकिन तुम इतना सब क्यों पूछ रहे हो?’’ ‘‘यों ही,’’ देवा ने बात को टालते हुए कहा और खड़ा हो गया. ‘‘अच्छा, अब मैं चलता हूं.’’ ‘‘अरे बेटा, राजन आता ही होगा.’’ ‘‘फिर कभी आऊंगा.’’ ‘‘अच्छा बेटा.’’
देवा बाहर निकल आया ऐसे सूत्र ले कर, जिस से उसे विनय के लापता होने का जवाब मिलने वाला था.
अब देवा ने निश्चय किया कि उसे सीधे 9वें घर में जाना चाहिए, क्योंकि 9वां घर 10वें घर यानी पड़ोसी मिस्टर चौधरी के घर के बारे में थोड़ीबहुत जानकारी जानेअनजाने जरूर जानता होगा.
देवा वहां से सीधा घर आ गया. पुलिस की नकली वरदी पहनी और दिन के ठीक 12 बजे रानी की कार में सवार हो कर सीधे गली के 9वें मकान के सामने रोक दी. उस ने कार में बैठेबैठे 9वें नंबर के मकान का जायजा लिया. दोपहर को आने की उस की वजह थी कि इस समय मर्द दफ्तर में होते हैं और घर की औरत अकेली ऐसे समय में, खासकर पुलिस की वरदी में बहुतकुछ बता सकती है.
देवा ने देखा कि 9 नंबर मकान से एक औरत खिड़की में से चौधरी के घर की ओर ताक रही थी. वह गाड़ी में से उतरा ही था कि अचानक उस ने देखा कि एक नौजवान तेजी से चौधरी के घर में घुस गया. चौधरी की गाड़ी नहीं थी. मतलब यह कि घर पर चौधरी नहीं था. ऐसे में यों चोर चाल से उस नौजवान का घुसना देवा के दिमाग में शक के कुछ और बीज बो गया.
फिर देवा ने सोचा कि हो सकता है कि वह कोई और हो. मसलन रिश्तेदार, भाई वगैरह. वह चौधरी के परिवार के सभी लोगों को तो जानता नहीं था. ऐसे में उसे उस बेचारी औरत पर, जो मां है, एक गमजदा मां, जिस का बेटा लापता है, के बारे में ऐसा नहीं सोचना चाहिए था.
वह 9 नंबर वाले घर की ओर बढ़ा. उसे अपनी ओर आता देख कर वह औरत खिड़की से हट गई.
‘‘सुनो…’’ देवा ने उसे आवाज दी. ‘‘जी…’’ वह घबराते हुए बोली. ‘‘क्या देख रही थीं?’’ ‘‘जी, कुछ नहीं.’’
‘‘मैं एक पुलिस अफसर हूं.’’ देवा ने रोब डालते हुए कहा, ‘‘अंदर कर दूंगा, अगर तुम ने मेरी बातों का सहीसही जवाब नहीं दिया तो…’’ ‘‘जी, लेकिन मैं ने क्या किया है?’’
देवा के रोब का उस पर असर हुआ, यही वह चाहता भी था. देवा ने पूछा, ‘‘मिस्टर चौधरी का बच्चा गायब है. क्या जानती हो बच्चे के बारे में, सचसच बताओ?’’
‘‘जी, मैं कुछ नहीं जानती. मैं ने कुछ भी नहीं किया,’’ वह जरूरत से ज्यादा डर गई.
‘‘देखो,’’ देवा ने कुछ नरम हो कर कहा, ‘‘विनय को तो जानती होगी?’’ ‘‘जी… जी…’’ उस ने थूक निगलते हुए कहा.
‘‘वह सोमवार से गायब है. तुम कहां थीं सोमवार को?’’ ‘‘जी, मैं घर पर ही थी.’’
‘‘तुम ने विनय को सोमवार को देखा था.’’ ‘‘जी… जी…’’ ‘‘कब, कितने बजे?’’ ‘‘स्कूल से आते समय.’’
‘‘क्या…’’ देवा के दिमाग में फिर सैकड़ों बिजलियां कौंधीं. ‘‘कितने बजे?’’ देवा ने पूछा. ‘‘जी… जितने बजे रोज लौटता था. साढ़े 12 बजे के आसपास.’’
‘‘पक्का?’’ ‘‘पक्का.’’ ‘‘तुम्हें कब मालूम हुआ कि विनय लापता है?’’ ‘‘जी, मंगलवार को.’’
‘‘किस ने बताया?’’ ‘‘जी… पारुल ने.’’ ‘‘यह आदमी, जो अभी चौधरी के घर के अंदर गया है, कब से आ रहा है?’’ ‘‘बहुत समय से.’’
‘‘कितने समय से?’’ ‘‘जी, पक्का तो नहीं मालूम.’’ ‘‘अंदाजन ही बताओ?’’ ‘‘जी… करीब एक साल से.’’
‘‘इतने ही बजे जितने बजे आज आया है?’’ ‘‘जी.’’ ‘‘और समय भी आता है?’’
‘‘जी, पहले तो डाक्टर चौधरी के साथ आता था, फिर…’’ उस ने वाक्य अधूरा छोड़ दिया. देवा समझ गया.
‘‘तुम्हें क्या लगता है?’’ देवा ने उस से पूछा, ‘‘कौन है यह?’’ ‘‘अजी होगा यार उस का,’’ अब की बार उस ने बगैर झिझके कहा.
‘‘तुम कैसे कह सकती हो?’’ ‘‘अजी, मर्द की गैरहाजिरी में इस तरह और कौन आ सकता है?’’
‘‘हुं… काफी समझदार हो,’’ देवा के मुंह से यह सुनते ही वह थोड़ा मुसकराई. देवा उसे मुसकराता छोड़ गाड़ी की तरफ बढ़ गया.
दूसरे दिन सुबहसवेरे देवा मिस्टर चौधरी के घर पहुंचा. मिस्टर चौधरी और पारुल चौधरी और वह आदमी नाश्ते की टेबिल पर थे.
‘‘हेलो, चौधरी साहब.’’ ‘‘आइए देवा साहब, आइए,’’ मिस्टर चौधरी ने गर्मजोशी से देवा का स्वागत किया.
‘‘नमस्ते, मेरे बेटे के बारे में कुछ पता लगा?’’ पारुल ने पूछा. ‘‘जी, कुछ नहीं,’’ देवा ने कहा.
‘‘और पूरापूरा कब पता लगेगा?’’ वह आदमी बोला. ‘‘आप की तारीफ?’’ देवा ने कुछ नाराज होते हुए पूछा.
‘‘अजी यहीं तो हैं, जिन्होंने मुझे आप का पता दिया था. मेरे दोस्त श्रीकांत वर्मा,’’ मिस्टर चौधरी ने देवा का परिचय करवाया.
‘‘आइए, बैठिए. नाश्ता करिए,’’ पारुल चौधरी ने कहा. ‘‘आप का शुक्रिया जनाब,’’ देवा ने श्रीकांत वर्मा से कहा.
‘‘किस बात का?’’ उस ने कहा. ‘‘अजी, बिना जानपहचान के आप ने हमें यह केस दिलवा दिया,’’ देवा ने कहा.
‘‘जी हां, केस तो दिलवा दिया,’’ श्रीकांत बोला, ‘‘पर अब कुछ कर के दिखाइए.’’ ‘‘जरूर दिखाएंगे साहब,’’ देवा ने कहा. देवा उन तीनों के साथ नाश्ते की टेबिल पर बैठ गया.
‘‘मैं आप लोगों से कुछ सवाल करना चाहता हूं,’’ देवा ने कहा. ‘‘हांहां करिए,’’ मिस्टर चौधरी ने कहा.
‘‘सब से पहले मिसेस पारुल चौधरी, आप से मैं यह पूछना चाहता हूं कि आप का बेटा सोमवार को गायब हुआ… ठीक?’’
‘‘जी,’’ मिसेस चौधरी ने उदास लहजे में कहा. ‘‘यह तो सभी जानते हैं,’’ श्रीकांत ने कहा.
‘‘मैं मिसेस चौधरी से पूछ रहा हूं. आप का नंबर भी आएगा. फिलहाल आप शांत रहें, तो बड़ी मेहरबानी होगी.’’ श्रीकांत ने बुरा सा मुंह बनाया, पर चुप रहा.
‘‘हां तो मिसेस चौधरी, आप का बेटा गायब हुआ सोमवार को, ठीक?’’ ‘‘जी.’’
‘‘फिर आप ने अपने पड़ोसियों से यह क्यों कहा कि आप का बेटा मंगलवार को गायब हुआ?’’ ‘‘जी… जी… मैं ने… उन्होंने गलत सुना, मैं ने तो…’’
देवा ने बात काटते हुए कहा, ‘‘जी हां, मिसेस चौधरी, आप ने कहा कि आप का बेटा मंगलवार को गायब हुआ है. क्यों कहा आप ने? क्यों झूठ बोला आप ने?’’ मिसेस चौधरी ने श्रीकांत की ओर देखा.
‘‘यह ऐसा क्यों कहेंगी? और कहा भी तो इस से क्या साबित करना चाहते हैं आप?’’ श्रीकांत ने देवा से पूछा.
‘‘मिस्टर श्रीकांत, इन्होंने ऐसा कहा, क्यों कहा यह तो ये ही बेहतर बता सकती हैं. वैसे मैं इतना बता दूं कि सोमवार को दोपहर साढ़े 12 बजे विनय अपने घर वापस आ गया था.’’ ‘‘क्या…’’ मिस्टर चौधरी चौंके.
‘‘जी हां मिस्टर चौधरी, यह बात सड़क के पास वाले दुकानदारों ने की और आप की गली में रहने वाले पड़ोसियों ने भी कहा कि सोमवार को उन्होंने विनय को स्कूल से आते देखा और घर में दाखिल होते हुए भी देखा, इसलिए मिसेस चौधरी ने 5वें नंबर वाली और 9वें नंबर वाली औरतों से कहा कि विनय मंगलवार से गायब है.’’
देवा ने गौर किया कि मिसेस चौधरी और श्रीकांत वर्मा की नजरें बारबार मिल रही थीं.
‘‘आप कहना क्या चाहते हैं मिस्टर देवा,’’ पारुल चौधरी चीखीं, ‘‘मैं ने आप को काम सौंपा कि आप मेरे बच्चे को ढूंढ़ लाएं और बजाय ढूंढ़ने के जमानेभर की बातें कर रहे हैं. चलो, मान लो कि मैं ने सोमवार की जगह मंगलवार कहा तो?’’ ‘‘क्यों कहा?’’
‘‘हो सकता है कि परेशानी की हालत में मुंह से निकल गया हो. मेरा एकलौता बेटा खो गया और आप…’’ पारुल चौधरी जोरजोर से रोने लगीं. डाक्टर चौधरी उन्हें चुप कराने लगे.
देवा ने फिर कहा, ‘‘मिस्टर चौधरी, मैं तो फिलहाल चला जाऊंगा, मगर यह बता दूं कि आप का बेटा सोमवार को स्कूल से घर आ चुका था. गायब बाहर से नहीं, घर से हुआ है.’’
‘‘क्या बात कर रहे हैं देवा साहब? घर से कौन ले जा सकता है?’’ मिस्टर चौधरी ने कहा. ‘‘श्रीकांत साहब ले जा सकते हैं.’’
‘‘क्या बकवास कर रहे हैं आप?’’ श्रीकांत चीखा. ‘‘बकवास नहीं, सच कह रहा हूं,’’ देवा ने कहा.
‘‘क्या सच नहीं है कि डाक्टर चौधरी के घर से जाने के बाद 11 से 12 के बीच आप मिसेस चौधरी से मिलने आते थे और विनय की छुट्टी भी उसी समय होती थी…’’
‘‘यह क्या बकवास किए जा रहे हैं आप?’’ श्रीकांत चीखा, ‘‘और सुदर्शन, तुम भी यह सब सुन रहे हो. तुम्हारे दोस्त की बेइज्जती हो रही है. निकालो इस आदमी को घर से.’’
‘‘श्रीकांत, तुम ने ही तो मुझे इस केस में लगाने के लिए कहा था चौधरी से.’’ ‘‘मुझे मालूम नहीं था कि तुम इतने बेवकूफ साबित होगे.’’
‘‘मिस्टर श्रीकांत…’’ देवा चीखा, ‘‘आप ने तो यही सोचा था कि प्राइवेट डिटेक्टिव बेवकूफ होते हैं, पैसा खींचते हैं. लेकिन तुम यह नहीं जानते थे कि मैं यहां तक पहुंच जाऊंगा, इसलिए तुम ने चौधरी को यह सलाह दी, ताकि तुम पर शक भी न हो, क्यों?’’
‘‘यह कैसा जासूस है, बेसिरपैर की बातें कर रहा है.’’ ‘‘मिस्टर देवा,’’ मिस्टर चौधरी ने कहा, ‘‘आप मुझे मेरे बेटे के बारे में बताइए.’’
‘‘पहले मिसेस चौधरी से एक सवाल और.’’ किसी ने कुछ नहीं कहा. मिसेस चौधरी ने देवा की ओर देखा.
‘‘हां तो पारुलजी, जब आप का बेटा साढ़े 12 बजे घर आ चुका था, तो आप ने अपने पति को 2 बजे फोन पर यह क्यों कहा कि विनय घर पर नहीं आया?’’
‘‘क्योंकि विनय घर पर नहीं आया था,’’ मिसेस चौधरी बोलीं.
‘‘आप झूठ बोल रही हैं, क्योंकि विनय घर पर आ चुका था.’’ ‘‘विनय नहीं आया था.’’
‘‘मैं कहता हूं कि विनय घर पर आ चुका था.’’ ‘‘नहीं आया था.’’
‘‘आ चुका था.’’ ‘‘नहीं आया था,’’ पारुल फिर रोने लगीं.
‘‘मैं फिर कहता हूं कि वह आ चुका था.’’ ‘‘नहीं आया था,’’ श्रीकांत बोल उठा.
‘‘आप को कैसे पता?’’ ‘‘क्योंकि मैं… मैं…’’
‘‘ओह, क्योंकि आप उस समय डाक्टर की गैरहाजिरी में यहां मौजूद थे, क्यों है न?’’
‘‘हां था, तो क्या हुआ?’’ श्रीकांत संभलते हुए बोला, ‘‘मेरे दोस्त का घर है. मैं कभी भी आजा सकता हूं.’’
‘‘खासकर दोस्त की गैरहाजिरी में,’’ देवा ने कहा. श्रीकांत चुप रहा.
‘‘मिस्टर श्रीकांत, अब तुम चुप रहेंगे. अगर मुंह से एक भी शब्द निकाला, तो मैं तुम्हें गोली मार दूंगा,’’ देवा ने अपना 6 राउंड का रिवाल्वर श्रीकांत की ओर तान दिया. चौधरी चुप रहा. यह इसलिए जरूरी था कि देवा पारुल चौधरी पर इमोशनल प्रभाव डालना चाहता था. इस के लिए श्रीकांत का चुप रहना जरूरी था. वह चुप हो गया.
‘‘हां तो पारुलजी,’’ देवा ने आगे कहा, ‘‘आप और श्रीकांत के जायज संबंध थे. मिस्टर चौधरी के जाने के बाद श्रीकांत उस दिन भी आप से मिलने आया था. वासना में अंधे हो कर आप दोनों दरवाजा बंद करना भूल गए थे. आप दोनों एकदूसरे से लिपटे हुए थे, तभी अचानक विनय आ गया. आप दोनों सकते में आ गए. विनय कुछ समझता कि आप ने…’’
पारुल रो पड़ीं. देवा ने आगे कहा, ‘‘पारुलजी, विनय स्कूल से छूटते ही अपनी मां के पास आया था, लेकिन आप खुद विनय की मौत बन गईं. कत्ल कर दिया आप ने अपने बच्चे का. कलंक हैं आप मां के नाम पर.’’
पारुल जोरजोर से रोने लगीं, ‘‘हांहां, मैं कातिल हूं. खून कर दिया है मैं ने अपने बच्चे का.’’
‘‘श्रीकांत साहब, मैं आप को सुबूत देता हूं,’’ देवा ने कहा और खून से सनी सफेद ड्रेस टेबिल पर रख दी.
‘‘यह रहा सुबूत. विनय की स्कूल डे्रस.’’ ‘‘क्या?’’ मिस्टर चौधरी रो पड़े, ‘‘मेरा बच्चा…’’
‘‘जी हां चौधरी साहब,’’ देवा ने कहा, ‘‘विनय अब इस दुनिया में नहीं है. उस का कत्ल उस की मां और आप के दोस्त ने किया है.’’
तभी रानी पुलिस को ले कर आ गई. पारुल के टूटते ही श्रीकांत ने भी जुर्म कबूल कर लिया.
श्रीकांत ने बताया, ‘‘उस दिन सोमवार को पारुल और मैं लिपटे थे. दरवाजा बंद करना भूल गए थे, तभी विनय आ गया. मैं ने पास पड़ी लोहे की सलाख से विनय पर वार कर दिया. विनय ने वहीं दम तोड़ दिया.
‘‘मैं घबरा गया. पारुल रो पड़ी. मगर मैं ने उसे समझाया कि रोनेधोने से काम नहीं चलेगा. हम दोनों की सलामती के लिए इसे ठिकाने लगाना जरूरी है.
‘‘मैं ने और पारुल ने विनय को एक पेटी में बंद किया. घर का खून साफ किया और कार में पेटी को रखा. हमें सुनसान सी जगह ढूंढ़ने में एक घंटा लग गया. लाश को पेटी सहित एक गहरी दलदल में फेंक कर मैं और पारुल वापस आ गए.
‘‘उस के बाद मैं और पारुल 2 बजे के आसपास घर पहुंचे और योजना के मुताबिक पारुल ने 2 बजे चौधरी को क्लिनिक फोन किया’’
श्रीकांत और पारुल के बताए अनुसार विनय की लाश निकाली गई. लाश भी थी और कबूल कर चुके अपराधी भी. पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया. मिस्टर चौधरी बहुत दुखी थे, इसलिए देवा ने तत्काल उन से अपनी बकाया रकम के बारे में कुछ नहीं कहा.
वह रानी के साथ लौट आया. रानी ने उस से रास्ते में पूछा, ‘‘लाश तो पुलिस ने निकाल ली, फिर वह डे्रस उस पर खून…’’
‘‘वह ड्रेस मैं ने बाजार से खरीदी थी और उस पर लाल रंग लगा कर मैं यह साबित करना चाहता था कि मुझे लाश मिल चुकी है. तभी तो श्रीकांत जल्दी टूट गया.’’
रानी ने देवा की ओर प्यार से देखा. ये ही उस के लिए काफी था.
‘‘तुम्हें शक कैसे हुआ?’’ रानी से पूछा.
‘‘पारुल के बोले गए झूठ से और श्रीकांत का छिपछिप कर चौधरी की गैरमौजूदगी में पारुल से मिलना. यही 2 वजह थी कि मुझे पूरा यकीन हो गया था कि विनय घर से ही गायब हुआ है और फिर मेरी वह पूछताछ जो पड़ोसियों से हुई थी, शक पैदा करने के लिए काफी थी.’’
दूसरे दिन मिस्टर चौधरी ने खुद आ कर देवा को धन्यवाद और बाकी 5 के हजार रुपए दिए.
देवा ने सब का कर्जा चुकाया. चैन की सांस ली. रानी की नजरों में उस की कीमत और बढ़ गई. Hindi Detective Story




