Story. 30 साल का अहमद अभी शादी नहीं करना चाहता था. वह पेशे से डाक्टर था. एक दिन एक औरत उस के अस्पताल में अपने बीमार पति के साथ आई. वहां पति की मौत हो गई. इस के बाद अहमद और उस औरत के बीच एक रिश्ता बन गया. आगे क्या हुआ?

मुंबई के मलाड इलाके में 30 साल का अहमद अपने 2 भाई और एक बहन के साथ रहता था. अहमद पेशे से डाक्टर था और बहुत अच्छा सर्जन भी था.

अहमद के दोनों भाइयों और बहन की शादी हो चुकी थी और वे सब अपनेअपने परिवार के साथ खुशीखुशी रह रहे थे.

अहमद के अम्मीअब्बा को हमेशा अहमद की चिंता सताए रहती थी, क्योंकि घर में सब से बड़ा होने के बावजूद अभी तक वह शादी के बंधन में नहीं बंध पाया था.

पर आज अहमद के अम्मीअब्बा ने पक्का इरादा कर लिया था कि वे उसे शादी के लिए मना कर ही रहेंगे चाहे कुछ भी हो जाए.

अहमद जब घर वापस आया तो उस के अब्बा जिद पर अड़ गए और बोले, ‘‘बेटे, हमारी जिंदगी का अब कुछ भरोसा नहीं. मरने से पहले हमारी आखिरी तमन्ना यह है कि तेरा भी घर बस जाए, ताकि हम सुकून से मर सकें.’’ अहमद बोला, ‘‘ऐसी बातें क्यों कर रहे हो आप लोग.’’

अहमद के अब्बा बोले, ‘‘बेटा, अब हमारी उम्र हो गई है. तेरे सब छोटे भाईबहन की भी शादी हो गई पर तू अभी तक शादी करने से मना कर रहा है. अगर तू किसी से प्यार करता है तो हमें बता दे, हम उस से ही तेरी शादी करा देंगे.’’

अहमद ने कहा, ‘‘ऐसी कोई बात नहीं है. मैं ने कभी इस बारे में सोचा ही नहीं है.’’ अहमद की अम्मी बोलीं, ‘‘ठीक है, हम तेरी शादी के लिए कोई लड़की देखते हैं. अगर तु झे कोई लड़की पसंद आ जाए तो बता देना हम उस से तेरी शादी करा देंगे.’’ अहमद बोला, ‘‘ठीक है.’’

इस बात को अभी एक हफ्ता ही गुजरा था कि अहमद के हौस्पिटल में एक केस आया. दरअसल, एक औरत अकेली अपने शौहर को ले कर आई थी. शायद शौहर को दिल का दौरा पड़ा था. पर वहां आने से पहले ही वह शख्स मर चुका था.

जब उस औरत ने यह सुना तो वह चीखनेचिल्लाने लगी और रोती हुई बोली, ‘‘आप के जाने के बाद अब मेरा क्या होगा? कौन मेरी देखभाल करेगा? आप के सिवा इस दुनिया में मेरा कोई नहीं…’’

उस औरत का नाम रिहाना था, जो बहुत ही गरीब थी. उस का शौहर मजदूरी कर के अपना और उस का पेट भरता था. वे दोनों मलाड के मालोनी इलाके में एक  झुग्गी में रह कर अपना गुजारा कर रहे थे.

अहमद ने सब से पहले रिहाना से उस के रिश्तेदारों के बारे मे पूछा तो उस ने बताया कि उस का इस दुनिया में कोई नहीं है. अहमद ने रिहाना के शौहर के कफनदफन का सब काम निबटाया और रिहाना को उस के घर छोड़ दिया.

अहमद को पूरी रात रिहाना की बेबसी और तनहाई सताने लगी, तो वह सुबह उठते ही सब से पहले रिहाना के घर गया. रिहाना एक कोने मे बैठी रो रही थी. उस की टूटीफूटी  झुग्गी देख कर अहमद का बड़ा अचरज हुआ कि इतनी हसीन खूबसूरत औरत इस  झुग्गी मे रहती है और इतनी बेबसी में अपनी जिंदगी गुजार रही है.

अहमद ने रिहाना से पूछा, ‘‘तुम्हारी उम्र तो अभी 25 के करीब है जबकि तुम्हारे शौहर की उम्र 35 के करीब थी, फिर तुम दोनों की शादी कैसी हुई और तुम्हारा कोई रिश्तेदार भी नहीं है?’’ रिहाना ने जो कहानी सुनाई उस से अहमद के रोंगटे खड़े हो गए.

रिहाना ने बताया, ‘‘मैं असम की रहने वाली हूं. मेरी अम्मी का मेरे बचपन में ही इंतकाल हो गया था. अब्बा ने दूसरी शादी कर ली थी. ‘‘सौतेली मां हमेशा मु झ पर जुल्म करती और अब्बा कहते कि ‘तू मनहूस है. तू अपनी मां को खा गई’.

‘‘इसलिए मैं न पढ़ सकी और न ढंग से जी सकी. जैसेतैसे मैं 18 साल की हुई तो मेरे अब्बा का भी इंतकाल हो गया. इस के बाद मेरी सौतेली मां ने मु झे एक अमीर आदमी को 50,000  रुपए में बेच दिया.

‘‘वह आदमी मु झे मुंबई ले आया और एक कमरे मे बंद कर दिया. वह औरतों का दलाल था जो किसी औरत से मु झे 2 लाख रुपए में बेचने की बात कर रहा था. जब मैं ने उस की बात सुनी, तो मैं घबरा गई और मौका देख कर वहां से भाग गई.

‘‘उस के बाद मैं उस आदमी के हाथ न लगी और भागते समय जब मैं एक खंडहर के पास छिपी जहां कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा था. ‘‘शाम का समय हो गया था. सब लोग जा चुके थे. बस, सोनू वहां अकेला बचा था. मैं अंधेरा होने का इंतजार कर रही थी ताकि उस दलाल की निगाह मु झ पर न पड़े और मैं अपनी इज्जत बचा सकूं.

‘‘तभी सोनू की निगाह मु झ पर पड़ी जो वहां मजदूरी करता था और अपने घर जा रहा था. ‘‘उस ने मु झे देख कर पूछा कि तुम कौन हो और यहां क्या कर रही हो तो मैं ने उसे सारी बात बताई. फिर उस ने मु झ से पूछा कि तुम भूखी होगी. चलो, पास में ही मेरा घर है. हम वहां चल कर कुछ खा लेते हैं.

‘‘मैं सोनू के साथ उस की  झोंपड़ी में चली गई, पर मु झे डर भी लग रहा था कि पता नहीं यह कैसा इनसान है… कहीं मु झे अकेली देख कर मेरी इज्जत न लूट ले.

‘‘फिर मैं ने यह सोच कर हिम्मत कर के उस के साथ रहना शुरू दिया कि इज्जत तो मेरी उसी वक्त लुट जाती जब मेरी सौतेली मां ने मु झे उस दरिंदे के हाथ बेच दिया था.

‘‘इसलिए मैं सोनू के साथ रहने लगी. वह दिनभर काम करता. मैं घर का काम करती. खाना बनाती. साफसफाई करती.

‘‘इस तरह सोनू के साथ रहते हुए मु झे 2 महीने हो गए, पर उस ने कभी मेरी इज्जत पर हाथ नहीं डाला. हां, आसपास के लोगों ने यह कहना शुरू कर दिया था कि यह कौन है जो तुम ने इसे अपने साथ रखा हुआ है.

‘‘सोनू लोगों के तानों से परेशान हो गया, तो एक दिन उस ने मु झ से कहा कि हम दोनों शादी कर लेते हैं, ताकि आसपास के लोगों का मुंह बंद हो जाए.

‘‘मैं ने हां कर दी और हम दोनों ने निकाह कर लिया. पर जब हमारी सुहागरात का वक्त आया तो मु झे एक नई बात पता चली, जो मैं ने कभी भी नहीं सोची थी.

‘‘पहले तो सोनू मेरे करीब नहीं आया, वह अलग अपना बिस्तर ले कर लेट गया, जैसे पहले लेटता था. मैं खुद ही उस के पास गई और उस की बांहों में बांहें डाल कर लेट गई तो सोनू ने मु झे चूमना शुरू कर दिया, पर जब मैं उसे अपने ऊपर खींचने लगी तो वह पीछे हट गया और बोला कि बस, मैं इस से आगे कुछ नहीं कर सकता.

‘‘उस के अंग में जरा सी भी हरकत नहीं हुई थी. इस तरह हम दोनों कई साल तक एकदूसरे की इज्जत करते रहे और एकदूसरे को दिलोजान से प्यार करते रहे. फिर अचानक वह इस दुनिया से चला गया.’’

इतना सुन कर अहमद की आंखों में आंसू आ गए. उस ने रिहाना से कहा, ‘‘कभी किसी चीज की जरूरत पड़े तो मु झे बता देना. तुम चाहो तो मेरे साथ मेरे घर पर रह सकती हो.’’

रिहाना बोली, ‘‘अभी नहीं. अभी सोनू का इंतकाल हुए कुछ ही वक्त गुजरा है. अभी मैं घर से बाहर नहीं जा सकती. आप बस कुछ महीने तक मेरे खानेपीने का बंदोबस्त कर दो. मेरी 4 महीने 10 दिन की इद्दत पूरी हो जाएगी तो फिर मैं खुद काम कर लूंगी.’’

अहमद लगातार रिहाना के घर जाता और जरूरत का घरेलू सामान पहुंचाता रहता.

आज रिहाना की इद्दत के पूरे 4 महीने 10 दिन हो गए. हलकीहलकी बारिश हो रही थी. अहमद रिहाना के घर की तरफ पंहुचा ही था कि बारिश ने कोहराम मचा दिया. अहमद भीगतेभागते रिहाना के घर के अंदर पहुंच गया.

हवा के साथ बारिश और जोर से होने लगी. रिहाना का टूटाफूटा घर पानी से टपकने लगा, तो अहमद बोला, ‘‘चलो, घर चलते हैं.’’

रिहाना अपना जरूरी सामान उठा कर पोटली बांधने लगी कि तभी जोरदार बारिश के साथ बिजली की गड़गड़ाहट ने रिहाना को डरा दिया और वह फौरन अहमद से लिपट गई.

कुछ देर बाद रिहाना अहमद से अलग हुई तो अहमद उस की खूबसूरती देख कर दंग रह गया.

भीगे और फटे हुए कपड़ों में रिहाना का बदन गुलाब की तरह चमक रहा था. उस के गोरे बदन को देख अहमद बेकाबू हो गया और उस ने आगे बढ़ कर उसे अपनी बांहों मे भरते हुए कहा, ‘‘रिहाना, मैं तुम से प्यार करता हूं और तुम से शादी करना चाहता हूं.’’ यह सुनते ही रिहाना ने भी अहमद को अपनी बांहों मे भर लिया और मंजूरी दे दी.

अहमद ने रिहाना की गोरी नाजुक गरदन पर अपने गरमगरम होंठ रख दिए और उसे चूमते हुए अपने दांतों से रिहाना के लव बाइट का एक निशान बना दिया. रिहाना ने अहमद को कस कर अपनी बांहों में भर लिया.

इस के बाद उन दोनों ने एकदूसरे के जिस्म का भरपूर मजा लिया. अहमद को इस दौरान पता चल गया कि भले ही रिहाना शादीशुदा थी, पर उस का बदन अभी तक कुंआरा था. वह दर्द से छटपटा रही थी. थोड़ी देर के बाद वे बिस्तर पर निढाल पड़ गए.

आज रिहाना ने भी अपने कुंआरे बदन का पहली बार किसी मर्द से वह मीठा दर्द महसूस किया जिस की उस ने कल्पना भी नहीं की थी.

कुछ दिनों के बाद अहमद ने अपने घर वालों की मौजूदगी में रिहाना से निकाह कर लिया. एक साल बाद रिहाना ने एक चांद से बेटे को जन्म दिया तो पूरा घर खुशी से  झूम उठा.

इस तरह अहमद को शादीशुदा औरत का भी कुंआरा बदन मिला. वह रिहाना को पा कर बहुत खुश था. Story

-अंसारी जीशान अहमद

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