मंच की चकाचौंध में डांस करती और्कैस्ट्रा गर्ल्स (Orchestra Girls) की जिंदगी में तमाम तरह के अंधेरे होते हैं.
क्या होती है इन की हसरतों की कीमत?
और्कैस्ट्रा गर्ल्स शादीब्याह, धार्मिक आयोजनों या मेलों में भीड़ के सामने डांस करती हैं. वे आमतौर पर हिंदी या भोजपुरी गीतों पर डांस करती हैं. इन कार्यक्रमों का मुख्य केंद्र बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड, दिल्ली और आसपास के राज्यों में है. गांवदेहात से ले कर बड़े शहरों के पंडालों तक, इन की मांग हर जगह है.
सामाजिक बैकग्राउंड
इन लड़कियों की बैकग्राउंड बेहद साधारण और गरीब परिवारों से जुड़ी होती है. अकसर इन के पिता मजदूर, रिकशा चालक, खेतिहर या बेरोजगार होते हैं. कई मामलों में परिवारों की माली हालत इतनी खराब होती है कि पढ़ाई बीच में छूट जाती है और पेट भरने के लिए इन लड़कियों को मजबूरी में मंच पर आना पड़ता है.
किसी की मां घरेलू नौकरानी है, किसी का भाई मजदूरी करता है, तो किसी की शादी की जिम्मेदारियां सिर पर हैं. जातीय लैवल पर देखें तो पिछड़ी, अनुसूचित जाति, अति पिछड़ी जाति की लड़कियां ज्यादा तादाद में आती हैं, पर यह पूरी तरह वर्गीय विभाजन नहीं है, कभीकभी मध्यमवर्गीय परिवारों की लड़कियां भी अपनी आजादी, प्रेम संबंध या पारिवारिक झगड़ों के चलते इस प्रोफैशन में आती हैं.
दलालों का जाल
ज्यादातर लड़कियां और्कैस्ट्रा में खुद पहल कर के नहीं जातीं. दलाल, दोस्त या जानपहचान का कोई शख्स गरीब और मजबूर लड़कियों को अच्छी जिंदगी और पैसे का लालच दिखा कर या धोखे से ले जाता है. कभीकभी खुद आपदा या पारिवारिक मौत के हालात में लड़कियां मजबूर हो कर इस पेशे की तरफ आती हैं.
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