Hindi Story. प्रधान जिले सिंह जब अपने गंदे इरादों में कामयाब नहीं हो पाया, तो उस ने रीना का तबादला गांव में करा दिया. स्कूल में टीचर रीना अपने अंधे पति के साथ जा पहुंची अनजान गांव में. वहां उसे मिला छबीला बदमाश. क्या हुआ इस के बाद?
रीना प्राइमरी स्कूल में टीचर थी. वह अपनी जिंदगी की गाड़ी अपने बिना आंखों वाले पति राजू के साथ आराम से गुजार रही थी कि अचानक उस का तबादला शहर से दूर एक मामूली से गांव में हो गया.
अंधे पति के साथ इतनी दूर गांव में अपनी घरगृहस्थी नए सिरे से शुरू करना उसे मुश्किल लग रहा था. उसे अपने से ज्यादा राजू की चिंता थी.
राजू शादी के 2 साल बाद एक हादसे में अपनी दोनों आंखें गंवा बैठा था. तब उसे लगा था कि उस की बाकी जिंदगी अंधेरी तनहाइयों में ही गुजर जाएगी.
एक अंधे के साथ जवान, खूबसूरत, पढ़ीलिखी रीना अपनी सारी जिंदगी खराब क्यों करेगी? उसे तो एक से बढ़ कर एक हमसफर मिल सकते हैं. वह भला अंधे की घरवाली कहलाना पसंद क्यों करेगी?
अब तो राजू एक पैसा भी कमाने के काबिल न रहा था. उस के अंधे होते ही रीना ने नौकरी के लिए भागदौड़ करनी शुरू कर दी. रातदिन की भागदौड़ ने रंग दिखाया और उसे एक प्राइमरी स्कूल में टीचर की नौकरी मिल गई.
राजू को रीना के नौकरी लग जाने की खुशी तो हुई, साथ ही अपनी अपाहिज जिंदगी पर आने वाले तूफान का डर भी सताने लगा. वह रीना के सामने डरासहमा व दबादबा सा रहता.
हादसे के बाद से राजू के अपनों ने भी उस का साथ छोड़ दिया. उस के मांबाप मर चुके थे. 2 बड़े भाई और एक बहिन थी. तीनों ने उस को अपनी दुनिया से अलग कर दिया था.
रीना को यह नौकरी टीचर संघ के प्रधान जिले सिंह ने दिलवाई थी. रीना ने अपने पति के अंधे होने की मजबूरी बताई, तो जिले सिंह की आंखों में चमक आ गई. उसे यकीन था कि खूबसूरत रीना उस के एहसान का बदला अपनी जवानी उसे सौंप कर चुकाएगी.
शुरू के 4-5 महीने तो यों ही गुजर गए. जिले सिंह ने अपनी बात रीना से कही नहीं. रीना भी अपने घरबार में मसरूफ हो गई. वह दिनभर स्कूल में नौकरी करती, शाम को घर आ कर पति को संभालती.
अंधा होने के बावजूद राजू घर के कामों में रीना की मदद करता. उसे पलपल यह डर भी सताता रहता कि एक दिन रीना उसे छोड़ कर चली जाएगी.
प्रधान जिले सिंह ने देखा कि अपना काम होने के बाद रीना ने तो उसे पूछा तक नहीं. वह ताव खाए बैठा था. एक दिन रीना को बुला कर पहले तो उसे बेइज्जत किया, फिर उस ने अपनी इच्छा जाहिर की. उस की बात न मानने पर बुरा नतीजा भुगतने की धमकी दी.
रीना अपनी उम्र से दोगुने अधेड़ जिले सिंह की गलत मंसा जान कर भड़क उठी. उस ने साफसाफ मना कर दिया. नौकरी जाती है तो जाए, मगर वह चरित्र से गिरेगी नहीं.
प्रधान जिले सिंह रीना को नौकरी से निकाल तो नहीं पाया, पर उस का तबादला दूर गांव में करा दिया. उसे यकीन था कि परेशान हो कर रीना उसी के पास आएगी और उस की इच्छा पूरी कर देगी.
इधर रीना अपनी बात पर टिकी रही. वह मुसीबतों का सामना करने को तैयार थी, मगर किसी पराए मर्द के सामने अपने को सौंपना उसे मंजूर नहीं.
उस ने राजू से गांव चलने को कहा, तो मानो वह नींद से जागा. उसे यकीन नहीं हो रहा था. उस ने सामने खड़ी रीना से पूछा, ‘‘क्या सच में तुम मुझे साथ ले कर चलोगी…’’
‘‘तो क्या मैं तुम्हें यहां दुखी होने के लिए छोड़ दूंगी? यह तुम ने कैसे सोच लिया?’’ रीना ने राजू के दोनों हाथ थाम कर अपने मन की बात कही.
‘‘मैं अंधा तुम्हारे साथ…’’ राजू आगे कुछ कह न सका.
‘‘कहीं यही डर तुम्हारे दिल में भूत बन कर तो नहीं बैठा था?’’ रीना ने प्यार से पूछा.
‘‘हां रीना. सच पूछो तो मुझे दिनरात तुम्हारे खोए जाने का डर नाग बन कर डस रहा है. मैं अंधा तुम्हारे लायक रहा भी हूं या नहीं,’’ राजू ने सहमी आवाज में अपनी परेशानी बताई.
‘‘अगर मैं अंधी हो जाती, तो क्या तुम मुझे दुनिया की भीड़ में भूखीप्यासी मरने के लिए छोड़ देते?’’ रीना ने भावुक होते हुए पूछा.
‘‘नहीं रीना. क्या कोई अपने जीवनसाथी को ऐसे छोड़ सकता है?’’
‘‘तो मैं तुम्हें कैसे अकेला छोड़ सकती हूं. तुम हमेशा मेरे साथ रहोगे. जब तक तन में सांस है…’’ कहते हुए रीना ने राजू को अपनी बांहों में कस लिया.
दोनों ने अपना सामान बांधा और शहर से दूर गांव में आ गए. गांव का शांत माहौल, मनभावन हरियाली, खुली आबोहवा उन्हें बहुत अच्छी लगी.
गांव में उन्होंने एक मकान किराए पर लिया. घर से स्कूल और स्कूल से घर आ कर पति की बांहों में ही रीना की दुनिया थी.
स्कूल जाते समय रीना ने महसूस किया कि गांव में तो शहर जैसी आवारगी, गुंडागर्दी और बदमाशी फैली हुई है. गांव के आवारा लड़के उस पर फिकरेबाजी करते. 1-2 बार तो छबीला नामक एक लड़के ने रीना का रास्ता रोक कर गन्ने के खेत में चलने को कहा, पर उस ने कोई जवाब नहीं दिया.
एक दिन दोपहर को तेज धूप थी. वैसे तो आवारा लड़कों के डर से रीना स्कूल के बच्चों के साथ ही चली आती थी, पर उस दिन बच्चों के टैस्ट पेपर जांचतेजांचते देर हो गई, इसलिए वह अकेले ही स्कूल से घर आ रही थी.
रास्ते में छबीला अपने 4-5 दोस्तों के साथ आ कर उस के सामने खड़ा हो गया. वह रीना का हाथ पकड़ कर बोला, ‘‘अरे क्यों अपनी सुलगती जवानी अपने अंधे पति के लिए खराब कर रही है. हमारे साथ चल. इतना प्यार करेंगे कि तेरा दिल खुश हो जाएगा. नहीं मानी तो जबरदस्ती उठा ले जाएंगे, कोई बचाने भी नहीं आएगा.’’
रीना इन लड़कों को देख घबरा गई. उसे लगा कि अब अपनी इज्जत बचाना मुश्किल है. सुनसान रास्ते में कोई भी नजर नहीं आ रहा था. उस ने दिमाग से काम लेने की सोची.
‘‘देखो, आज मुझे परेशान मत करो. मेरी तबीयत ठीक नहीं है. 2-4 दिन रुक जाओ. अब गांव में रहना है, तो मिलजुल कर रहना होगा. आप के कहने से बाहर थोड़े ही हूं, फिर कभी…’’ रीना ने अपनेआप को बचाना चाहा.
‘‘लगता है, समझदार हो… मेरी ताकत का तुम्हें एहसास हो गया है. ये चारों मेरे गुलाम हैं. मेरी मरजी के बिना परिंदा भी पर नहीं मार सकता. हमें खुश करोगी, तो तुम्हारे अंधे पति की हम सब मदद करते रहेंगे,’’ छबीला मूंछों पर हाथ फेरते हुए बोला.
रीना को छबीला पर गुस्सा तो बहुत आया, मगर मन मसोस कर रह गई. हालात ने उसे मजबूर कर दिया था. आज अगर राजू की आंखें सलामत होतीं, तो वह छबीला जैसे बदमाशों को ठीक कर सकती थी.
उस समय तो वहां से बच निकली और सीधे गांव के सरपंच से मिली. पर सरपंच तो पहले ही शराब पी कर अपने घर में हंगामा कर रहा था. जब गांव का सरपंच ही शराबी होगा, तो उस की फरियाद कौन सुनेगा. अपने मकान मालिक से बात की, तो वहां से निराशा ही हाथ लगी. हैरानपरेशान वह घर से निकली, तो सामने पड़ोस की पंडिताइन चाची मिल गईं.
रीना ने पंडिताइन को अपनी परेशानी बताई, तो उन्होंने उसे बहादुरी से उन बदमाशों से सामना करने की सलाह दी. उन्होंने दिलासा दी कि उन का चचेरा भाई विधायक रह चुका है. उस से कह कर वे उस का तबादला वापस शहर में कराने की कोशिश करेंगी.
‘‘चाची, मेरा तबादला तो जब होगा, तब देखा जाएगा. अभी जो बदमाश मेरे पीछे पड़े हैं, उन की अक्ल कैसे ठिकाने लगाऊं?’’ रीना ने छबीला की धमकी का जिक्र किया, तो पंडिताइन चाची ने बदमाशों की अक्ल सुधारने की एक योजना समझाई.
रीना ने भी अक्ल से काम लेने का मन बना लिया. 4-5 दिन तो छबीला उस के सामने आया नहीं, पर कुछ दिन गुजर जाने के बाद एक दिन दोपहर के समय वह अकेला ही उस के सामने आ गया और उसे पकड़ कर जबरन गन्ने के खेतों में ले जाने लगा.
‘‘ऐसे जबरदस्ती मत करो. मैं तो खुद तुम्हें पसंद करती हूं, मगर तुम्हारे बदमाश दोस्त परसों मुझे जबरदस्ती खेतों में ले जाने लगे थे. मैं ने उन से बहाना बना कर अपनी जान बचा ली. रविवार की रात खेतों में मिलने का वादा किया, तब जा कर उन्होंने मेरी जान छोड़ी.
‘‘अरे, उन का इतनी हिम्मत कि तेरे साथ जबरदस्ती करें. मैं उन की अभी खबर लेता हूं,’’ गुस्से के मारे छबीला के हाथ लाठी पर कस गए.
‘‘ऐसे नहीं छबीला, इस तरह वे सावधान हो जाएंगे. वे तेरे बारे में काफी अनापशनाप बातें कर रहे थे. रविवार की रात बुलाया है. मौका देख कर उन की मरम्मत करना. फिर मैं तुम्हारी हूं. तुम्हीं से प्यार करती हूं,’’ कहते हुए रीना ने उस के सामने अंगड़ाई ली, तो छबीला उस की जवानी देख घायल हो गया.
‘‘मेरी जानेमन, मैं उन गद्दारों की अर्थी उठा कर ही तेरे पास आऊंगा. अपनी बात से मुकर मत जाना,’’ कहते हुए छबीला जोश में आ गया था.
शाम के समय रीना चौक की दुकान से सामान ले कर आ रही थी कि रास्ते में छबीला के दोस्त उस का रास्ता रोक कर खेतों में मिलने की कहने लगे. थोड़ी देर में रात होने वाली थी.
रीना ने चारों लड़कों में से एक सेहतमंद और ताकतवर लड़के का हाथ पकड़ते हुए सब को छबीला के खिलाफ भड़का दिया. रीना ने यह भी कहा कि छबीला ने उसे रविवार की रात को खेत में बुलाया है और न आने पर हत्या करने की धमकी भी दी है.
इतना सुन कर वह कद्दावर गुंडा रीना के गालों को थपकाता हुआ गरजा, ‘‘तुम चिंता मत करो. तुम छबीला से मिलने का वादा कर लेना. बस जाना नहीं, फिर हम देखेंगे उस को. हत्या कर के खेतों में दबा देंगे.’’
सब की हमदर्दी रीना के साथ थी. सभी सोच रहे थे कि अगर खूबसूरत रीना के कहने पर वे छबीला की हड्डीपसली तोड़ देंगे, तो यकीनन उन सब पर मेहरबान हो कर वह अपनी जवानी लुटा देगी. सब का गुस्सा देख रीना ने डरीसहमी आवाज में कहा, ‘‘छबीला को पता नहीं लगना चाहिए कि मैं ने तुम से उस की शिकायत की है, वरना वह मेरा गांव में रहना मुश्किल कर देगा.’’
‘‘अरे, तुम चिंता मत करो. उस को चलनेफिरने के काबिल छोड़ेंगे, तभी तो वह तुम्हें परेशान कर पाएगा. देखना, हम उस की कैसी हालत करते हैं. घर बैठी तमाशा देखना तुम. बस, हमारा खयाल रखना. हम सब को खुश कर देना,’’ उस लड़के ने कहा.
पंडिताइन चाची के कहने पर रीना ने यह नाटक तो खेला था, मगर नतीजे से मन ही मन डर रही थी.
2 दिन तो आराम से गुजर गए. रीना ने राजू को कुछ नहीं बताया. उसे मालूम था कि अगर राजू को बता दिया, तो वह परेशान हो जाएगा.
रविवार की रात गुजर गई. उस रात काफी देर तक रीना सोई नहीं. उसे डर लग रहा था कि कहीं उस की योजना फेल हो गई, तो सभी बदमाश उस के घर आ धमकेंगे. ऐसे में वह अपने साथ राजू को भी मुसीबत में डाल देगी. उसे पंडिताइन चाची पर गुस्सा आने लगा. आज छुट्टी का दिन भी बेचैनीपरेशानी में गुजरा था.
सुबह वह देर तक सोती रही. उसे स्कूल जाने में भी देर हो गई थी. वह घर से स्कूल जाने को निकली. गांव की चौपाल पर गांव वालों की भीड़ थी. पुलिस की 3-4 गाडि़यां खड़ी थीं. उस का दिल धड़क उठा. वह तेजी से स्कूल की तरफ चली गई. स्कूल में बच्चों से पता चला कि रात को गांव के बदमाश लड़कों में झगड़ा हुआ. 4 अस्पताल में हैं बाकी जेल में.
वह मन ही मन पंडिताइन चाची का शुक्रिया अदा कर रही थी. उन्होंने मुसीबत के समय में उस का हौसला जो बढ़ाया था. Hindi Story




