Editorial. महाराष्ट्र पब्लिक सर्विस कमीशन के फूड एंड ड्रग डिपार्टमैंट में भरती के लिए हुए एग्जाम को अब कैंसिल कर दिया गया है क्योंकि मार्च में हुए इस एग्जाम के पेपर लीक हो गए थे. नैशनल कांग्रेस पार्टी के रोहित पवार ने कहा है कि इस के पेपर 40 लाख रुपए में बेचे गए थे.

ये 40 लाख रुपए देने की हैसियत किस की है? क्या किसान, मजदूर, आटोरिकशा चलाने वाला, बस ड्राइवर, डिलीवरी मैन, फैक्टरी वर्कर इतने पैसे खर्च कर सकता है? नहीं न. तो ये पैसे खर्च किए होंगे किसी पैसे वाले सरकारी मुलाजिम ने अपने बेटे के लिए जो जानता है कि इस पोस्ट पर मोटी नहीं बहुत मोटी कमाई है.

फूड एंड ड्रग डिपार्टमैंट में सैकड़ों की नहीं लाखों की रिश्वतें मिलती हैं. महाराष्ट्र में जुलाईअगस्त में एक अफसर का नाम हुआ है जिस ने बीसियों होटल, रैस्टोरैंट, ढाबे बंद करा दिए कि वहां गंदगी थी या सड़ा सामान था. उस अफसर ने कोई महान काम नहीं किया क्योंकि उस के पीछे स्टेट की, सत्ता की पावर थी जिसे लागू करने में उसे कोई चाह कर भी नहीं रोक पा रहा था.

इसी पावर को भुना कर फूड एंड ड्रग डिपार्टमैंट के बड़े अफसर से ले कर छोटे इंस्पैक्टर तक बड़ा मोटा पैसा बनाते हैं और अपना रोब दिखा कर मुफ्त में रैस्टोरैंटों में खाते हैं, होटलों में रहते हैं.

ये सब ऊंची जातियों के ही होते हैं क्योंकि ओबीसी और एससी जमातों के पास इतना पैसा कहां से आएगा. ये चाहते हैं कि 51 फीसदी सीटों पर तो कम से कम ऊंची जातियों के ही बच्चे आएं और इसीलिए ऐसा सिस्टम बनाया गया है कि 51 फीसदी जनरल कोटे में कोई ओबीसी, एससीएसटी मैरिट पर न घुस सके.

न केवल पेपर लीक किया जाता है, पेपर में सवाल भी ऐसे पूछे जाते हैं तो सिर्फ कोचिंग वाले ही सम?ा सकते हैं. सरकारी स्कूल में 12वीं या सरकारी कालेज में बीए करने वाला सम?ा ही न सके.

इसीलिए ज्यादातर एग्जाम सैंट्रलाइज कर दिए गए हैं ताकि लीक करे पेपर्स कोचिंग क्लासों के जरीए ऊंची फीस देने वाले ऊंची जातियों के बच्चों को मोटी रकम ले कर दिए जा सकें. सैंट्रलाइज एग्जाम का एकजैसी परीक्षा लेने के दावे से कोई लेनादेना है ही नहीं.

पेपर लीक करना हमेशा पैसे वालों का खेल रहा है. यह पैसे वालों की साजिश है कि मैरिट और नंबर्स की आड़ में पौराणिक जाति को जिंदा रखा जा सके.  Editorial

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