Revenge story in hindi. उस रात का मंजर याद आते ही सईदा के तनबदन में अंगारे भर गए. उस ने चादर से अपना शरीर लपेट कर बांहों से चेहरा छिपा लिया और दहाड़ें मार कर रो पड़ी.
उस समय जब सईदा के साथ ऐसा हादसा गुजरा, वह इमारत की आखिरी मंजिल के कमरे में थी, जहां से चिल्लाने की आवाज नीचे तक नहीं पहुंच सकती थी.
इलाहाबाद के एक डिगरी कालेज में सईदा और दिलशाद छात्र थे. दोनों का मिलनाजुलना बढ़ता रहा, जिस ने एक रोज इश्क का रूप ले लिया. सईदा दिलशाद की मुहब्बत में गिरफ्तार हो चुकी थी.
एक दिन दिलशाद ने कहा, ‘‘सईदा, हम लोग बैठेबैठे बोर हो चुके हैं. चलो, बाहर घूम लें. होटल में चल कर खाना खाएंगे, फिर लौट आएंगे.’’
‘‘दिलशाद, कुछ देर में रात हो जाएगी. बेहतर होगा कि हम लोग दूसरे दिन का प्रोग्राम बना लें,’’ सईदा बोली.
‘‘इस वक्त मन हो तो चलो, फालतू बातों से कोई फायदा नहीं.’’
‘‘जिद करते हो तो चलो, लेकिन मेरा ज्यादा समय मत खराब करना.’’
दोनों चल दिए. रात का खाना होटल में खाया. ज्यादा रात होने लगी, तो दिलशाद ने कहा, ‘‘सईदा, मुझे अपने फ्लैट में कुछ जरूरी काम याद आ गया है. चलो, पहले उसे पूरा कर लूं, फिर तुम्हें घर तक छोड़ दूंगा.’’
‘‘मैं बाहर खड़ी रहूंगी. तुम अपना काम जल्द निबटा कर आ जाना,’’ सईदा ने कहा.
‘‘बाहर खड़ी रह कर क्या करोगी? कोई चोरउचक्का आ गया, तो नाहक परेशान करेगा. मुझे ज्यादा समय नहीं लगेगा,’’ वह हंस कर बोला.
दोनों लिफ्ट से दिलशाद के फ्लैट पर चले गए.
दिलशाद ने अपनी मुहब्बत का वास्ता दे कर सईदा को इतना मजबूर कर दिया कि उसे कुछ देर तक रुकना पड़ा.
बातोंबातों में वह उसे जिस्मानी संबंध बनाने को मजबूर करने लगा. तब सईदा को शक हुआ. उस ने इनकार करते हुए कहा, ‘‘शादी से पहले यह सब ठीक नहीं.’’
दिलशाद रूठ कर बोला, ‘‘तुम्हारे दिल में मेरे लिए सच्ची मुहब्बत नहीं है, इसलिए शादी का बहाना ढूंढ़ लिया. अगर तुम्हें एतराज है, तो चलो पहले तुम्हें घर छोड़ आऊं.’’
‘‘डार्लिंग, इस तरह नाराज मत हो.’’ ‘‘मैं तुम्हें मजबूर नहीं करता. कुछ देर रुको. कौफी पी कर चलेंगे.’’
दिलशाद ने गरमागरम कौफी ला कर सईदा को दी. कौफी पीने के बाद सईदा बेसुध हो गई.
जब सईदा होश में आई, तो उस ने अपने कपड़े ढीले पाए. वह दिलशाद की बांहों में पड़ी थी.
दिलशाद उसे बेतहाशा प्यार कर रहा था. सईदा भी सब भूल कर पूरे जोश के साथ दिलशाद से लिपट गई.
दिलशाद ने सिगरेट जलाई और कमरे से बाहर चला गया. उसी समय कमरे की बिजली चली गई. घुप अंधेरा छा गया. उस का चाहने वाला वापस लौट कर अंधेरे में फिर से उस के जिस्म से लिपट गया.
बैडरूम के अंधेरे में केवल उन की सांसों की गूंज थी. अचानक सईदा को उस अंधेरे में अजीब सा एहसास हुआ. उस के हाथ दिलशाद की कलाइयों पर थे. उसे यों लगा, जैसे ये दिलशाद की कलाइयां नहीं, किसी और की हों. उस के हाथ तेजी से दिलशाद के कंधों, गरदन और चेहरे पर दौड़ गए.
सईदा ने अंधेरे में आंखें फाड़ कर देखा, पर कुछ नजर नहीं आया, लेकिन उस के कांपते हाथ बहुतकुछ महसूस कर चुके थे. एक पल के लिए उस ने ऐसा महसूस किया, जैसे उस की धड़कन बंद हो जाएगी.
‘‘तुम कौन हो?’’ वह चीखी.
उस आदमी ने तेज सांस ली और कमरे का गेट खोल कर बाहर चला गया.
सईदा चीख कर बेहोश हो गई. होश में आने पर उस ने दिलशाद को कुरसी पर बैठे सिगरेट पीते देखा.
उस ने गुस्से में पूछा, ‘‘तुम्हारे अलावा दूसरा साया किस का था, जिस ने मुझ पर घोर जुल्म किया?’’
दिलशाद ने कहा, ‘‘वह मेरा जिगरी दोस्त था. सईदा, जो कुछ हुआ, उसे भूल जाओ. शादी तो मैं तुम से ही करूंगा. वह मेरा दोस्त दुग्गल ईरानी शुरू से ही मेरी हर चीज में साझेदार था. वह अपनी माशूका का प्यार मुझे दिलाता था. मैं ने अपनी माशूका का प्यार उसे दे कर सारा कर्ज चुका दिया. यकीन करो, फिर कभी तुम्हें ऐसी शिकायत का मौका नहीं दूंगा.’’
‘‘तुम्हारे कहने का मतलब मेरी समझ में अच्छी तरह आ गया. तुम लोग किसी लड़की से मुहब्बत न कर के फरेब करते रहे हो. मुझे भी भरोसे में ले कर तुम ने मेरे साथ अच्छा नहीं किया. इतना बड़ा गुनाह किया, जिस की जितनी भी सजा दी जाए, कम होगी.’’
‘‘तुम्हारी हर सजा मंजूर होगी. बस, रूठना बंद करो और आगे अपना वही प्यार लेतीदेती रहो.’’
‘‘शर्म नहीं आती ऐसी बातें जबान से निकालते हुए. क्या अब भी उम्मीद करते हो कि तुम मुझ से कभी प्यार पा सकोगे? लानत है, तुम्हारी जिंदगी पर…’’ वह चिल्लाई.
दिलशाद ने आगे बढ़ कर सईदा को अपनी बांहों में लेना चाहा, तो वह चीख पड़ी, ‘‘खबरदार, जो तुम ने मुझे छूने की कोशिश की. तुम औरत को नहीं जानते. जब आग और शोला बन कर किसी पर गिरती है, तो उस पर कयामत आ जाती है, जिसे आदमी बरदाश्त नहीं कर सकता.
‘‘तुम इनसान नहीं हैवान हो, जिस के सीने में दिल नहीं है. अब तो तुम प्यार के काबिल नहीं रह गए. मेरी इज्जत का खजाना तुम दोनों ने मिल कर लूट लिया,’’ फिर वह लिफ्ट से उतर कर चली गई. कुछ दिनों तक वह कालेज नहीं गई.
एक रोज वह कैंटीन में उदास बैठी चाय पी रही थी. दिलशाद उस के पास आ कर बैठ गया. उस ने काफी मिन्नत की, माफी मांगी, ‘‘जो हुआ उसे भूल जाओ.’’
‘‘दिलशाद, तुम दोनों ने मेरे साथ जो किया, शायद उसी की वजह से मेरे बूढ़े बाप पर कहर टूट पड़ा. उन का इंतकाल हो गया. थोड़ी सी जमीन जो उन के पास थी, किसी दूसरे ने उन की बीमारी की हालत में लिखवा कर घर में चोरी करा दी,’’ सईदा मायूसी से बोली.
‘‘यह सब सुन कर मुझे सदमा पहुंचा,’’ दिलशाद ने कहा.
‘‘अब तो मेरे गांव में भी कुछ नहीं बचा, इसलिए कालेज छोड़ कर इतनी दूर चली जाऊंगी, जहां से फिर यहां लौटना मुश्किल होगा,’’ सईदा मायूसी से बोली.
‘‘मैं पैसों का इंतजाम कर दूंगा. कालेज छोड़ने की जरूरत नहीं होगी,’’ दिलशाद ने दिलासा देते हुए कहा.
‘‘मुझे अब पढ़ना ही नहीं है. पैसों की जरूरत नहीं पड़ेगी. मुझे इतना गरीब मत समझो कि भीख मांगनी पड़े,’’ सईदा बोली.
‘‘तुम ने तय कर लिया है, तो जोर नहीं दे सकता. केवल यही फरियाद करूंगा कि एक रोज मेरे गरीबखाने पर आखिरी डिनर ले कर ही जाना,’’ वह नाटकीय अंदाज में बोला.
‘‘शायद यह तुम्हारी दूसरी चाल होगी, ताकि तुम मेरे जिस्म से खिलवाड़ कर सको,’’ सईदा ने हिकारत से कहा.
‘‘मैं कान पकड़ कर वादा करता हूं, फिर वैसा नहीं होगा,’’ दिलशाद बोला.
‘‘ठीक है, अगर तुम ने फिर से वही बेहूदा हरकत करनी चाही, तो मैं तुम्हारे फ्लैट की आखिरी मंजिल से कूद पड़ूंगी और तुम्हें हत्या के इलजाम में जेल जाना पड़ेगा,’’ सईदा ने धमकी दी.
‘‘भरोसा रखो, ऐसी नौबत नहीं आएगी. वैसे, कब जा रही हो?’’ दिलशाद ने पूछा.
‘‘2 दिन बाद,’’ सईदा ने कहा.
‘‘तो कल शाम को मेरी दावत कबूल करो,’’ दिलशाद ने गुजारिश की.
‘‘एक शर्त पर. तुम अपने दोस्त दुग्गल ईरानी को भी दावत में बुलाओगे, जिसे मैं उस के अत्याचार करते समय नहीं देख पाई थी. अंधेरे में वह भाग गया था. वह मुझ से माफी मांग लेगा, तो मुझे जातेजाते सुकून मिलेगा.
‘‘किसी तीसरे को मत बुलाना, वरना मेरी चेतावनी याद रखना,’’ सईदा ने धमकी के अंदाज में कहा.
‘‘तुम जैसा चाहती हो, वैसा ही होगा. तुम कल रात 8-9 बजे के बीच आ जाना.’’
‘‘मेरी इज्जत तो लूट ही ली गई, अब किसी का डर नहीं,’’ सईदा ने कहा.
उसी प्रोग्राम के मुताबिक टेबल के एक ओर सईदा बैठी थी और दूसरी ओर दिलशाद और दुग्गल ईरानी बैठे थे. खाना टेबल पर सजा था. दुग्गल ईरानी ने हाथ जोड़ कर माफी मांगी और तीनों खाना खाने लगे.
‘‘तुम दोनों समझते हो कि किसी औरत की इज्जत लूट लेने के बाद माफीनामे से उस की वही रौनक फिर लौट आएगी, पर ऐसा नहीं है. औरत खिलौना नहीं है कि जब चाहा खेला और फेंक दिया.
‘‘मैं भी एक इज्जतदार औरत थी, जिसे तुम लोगों ने मिनटों में धोखा दे कर तबाह कर दिया,’’ हंसते हुए सईदा खाना खाने के साथसाथ कहती जा रही थी.
‘‘तुम लोग औरत को नहीं जानते, वह बड़ी नरम, कमजोर और बुजदिल भी कही जाती है, लेकिन जब वह इंतकाम लेने पर तुल जाती है, तो उस समय उस से खतरनाक और खौफनाक कोई चीज नहीं होती.’’
सईदा ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘अब तुम लोगों ने माफी मांग ही ली है, तो बात खत्म हो गई. वैसे, हम लोग इस वक्त 8वीं मंजिल पर आखिरी डिनर ले रहे हैं. तुम लोग अगर मेरे साथ कोई ज्यादती करना चाहोगे, तो मेरी चीखपुकार नीचे तक नहीं पहुंचेगी.’’
‘‘क्या तुम ऐसी उम्मीद करती हो?’’ दिलशाद नाटकीय लहजे में बोला.
‘‘किसी का क्या भरोसा? पिछली बार भी तो भरोसे पर ही यहां मुझे लाया गया था. खैर, छोड़ो उन बातों को. मैं भी तुम लोगों के लिए अपने हाथ से बनाई खीर लाई हूं. इजाजत हो तो दूं. इस में कोई नशा नहीं, जो मुझे कौफी में दिया गया था.’’
सईदा ने 2 डब्बों के ढक्कन खोले. एक डब्बे की खीर उस ने दिलशाद के चेहरे पर फेंकी और दूसरे डब्बे की खीर बिना समय गंवाए दुग्गल ईरानी के चेहरे पर फेंक कर चिल्लाई, ‘‘हैवानो, देख लो तुम लोगों द्वारा बेइज्जत की गई औरत का इंतकाम. तुम दोनों दर्द से चिल्लाते रहोगे, पर कोई यहां तक जल्दी नहीं पहुंच सकेगा.
‘‘जब तक तुम दोनों नीचे पहुंचोगे, तुम्हारी आंखें जवाब दे चुकी होंगी. मुझे तुम लोग कभी नहीं पा सकोगे.’’
अपनी बात पूरी कर के सईदा ने बाहर निकल कर दरवाजे की सिटकिनी बंद की और चली गई. दोनों डब्बों में खीर के बजाय तेजाब था.
दिलशाद और दुग्गल ईरानी कमरे में चिल्लातेछटपटाते और तड़पते रहे. एक रोज सईदा भी उन दोनों के जोरजुल्म से खूब छटपटाई थी.
दिलशाद और दुग्गल ईरानी से बदला लेने के लिए शायद सईदा के पास केवल यही एक आखिरी साधन बचा था. Revenge story in hindi




