Hindi Superstition Story. मेरी नानी कहती हैं कि अगर सुबह दूध गिर जाए, तो बहुत अशुभ होता है. अम्मां खड़ीखड़ी पैर से ले कर सिर तक थरथर कांप रही थीं. मैं ने देखा कि उन के हाथ से सुबहसुबह आधा लिटर दूध गिर कर बहने लगा था.
दरअसल, अम्मां लो ब्लडप्रैशर की मरीज थीं. उन्हें चक्कर आना, दिल घबराना, पूरा जिस्म हिलना जैसी तमाम शिकायतें थीं. वे इतनी पतलीदुबली थीं कि झटका खाते ही गिर जाएं.
महीनेभर से अम्मां की तबीयत ज्यादा खराब थी. कमजोरी के चलते उन के हाथ से दूध का डब्बा गिर गया था.
अम्मां को अपनी जानकारी के मुताबिक मैं ने लंबाचौड़ा फलसफा सुनाया कि दूध गिरना बुरा नहीं है, बुरे तो इनसान के खयालात होते हैं.
अम्मां थोड़ी शांत हुईं, लेकिन तभी पीछे से नानी ने 5 नंबर चप्पल से मेरी पीठ पर निशाना लगाया.
मैं ने पीछे पलट कर देखा. नानी खतरनाक शिकारी बिल्ली की तरह कड़े तेवर लिए मु झे घूर रही थीं.
‘‘नानी…’’ मैं कुछ कहने ही जा रहा था कि उन्होंने एक जोरदार तमाचा मेरे गाल पर रसीद कर दिया.
‘‘बेहया, तु झे पता नहीं है कि दूध गिरना कितना अशुभ होता है. हाय…हाय, अब क्या होगा? कलमुंही, तु झे कितना सम झाया करूं,’’ नानी ने अम्मां को घूरते हुए कहा.
मेरे पिता बड़ेबड़े शहरों में बने मकानों की पुताई करते थे. वे साल में 1-2 बार आ कर हमारे ऊपर प्यार की बरसात कर देते थे. फिर मु झे और अम्मां को अपनी चहेती दकियानूसी सास के पास छोड़ कर चले जाते थे.
मैं जहर का घूंट पी कर रह गया. नानी कह रही थीं, ‘‘ऐसे ही मियांजी की पोती के हाथ से दूध गिर गया था और मियांजी का एकलौता बेटा मर गया था.’’
मियांजी के परिवार के साथ हुआ वह हादसा मैं भी कहां भूला था. बेचारी बीना को कितनी कठोर सजा भुगतनी पड़ी थी. उस हादसे को गुजरे 4 महीने बीत चुके थे, मगर लगता था कि कल की ही बात हो.
मेरी नानी के इस पक्के घर के अलावा इस गांव में सिर्फ 12-13 पक्के घर और थे. 50-60 घर कच्ची मिट्टी के बने हुए थे, जिन में से एक घर मियांजी का भी था. वे अपने छोटे से परिवार के साथ हंसीखुशी से रहते थे. उन के परिवार में उन की बीवी, एक बेटा, बहू और पोती बीना थी.
मियांजी बुजुर्ग थे. उन की सू झबू झ के पूरे गांव में चर्चे होते थे. मैं भी उन की सम झदारी का कायल था.
एक दिन मैं किसी काम से मियांजी के घर गया था. मियांजी ने बड़ी इज्जत से मु झे आंगन में बैठाया और अपनी जवान पोती से कहा, ‘‘बीना, जल्दी से बाबू के लिए दूध ले कर आओ. यह हमारे यहां कभीकभार ही आता है.’’
मियांजी ने मेरा नाम बेहद अपनेपन से ले कर कहा, तो मैं बहुत खुश हो गया था.
फिर 2-3 मिनट बाद अंदर से कुछ गिरने की आवाज आई, तभी बीना की मां और दादी लपक कर अंदर गईं. थोड़ी देर बाद भीतर से रोने की आवाज भी आने लगी. मैं घबरा गया और तुरंत मियांजी के साथ अंदर गया.
‘‘बीना, यह तू ने क्या किया?’’ बीना की मां बेदर्दी से उसे पीट रही थीं. दादी उसे कोस रही थीं.
‘‘यह आप क्या कर रही हैं?’’ मैं ने बीना की मां से कहा. दर्द से बेहाल बेचारी बीना बुरी तरह रो रही थी.
मियांजी ने जल्दी से दूध लाने को क्या कहा कि बीना हड़बड़ा गई. इसी जल्दबाजी में बीना का पैर ऊंचीनीची जगह पर आ गया और दूध के साथ नीचे आ गिरी. उस के दाएं पैर में मोच आ गई थी.
मियांजी बिना कुछ कहे कमरे से निकल कर चले गए. उन्होंने अपनी बीवी को सम झाने की जरा भी कोशिश नहीं की. मु झे लगा कि इन औरतों से ज्यादा तो मियांजी अंधविश्वासी हैं.
मैं अपना सा मुंह ले कर घर लौट आया.
शाम को मैं ने अम्मां से कहा, ‘‘अम्मां, चाय के साथ पकौड़े भी बना दो. मु झे भूख लग रही है.’’
‘‘अम्मां… भूख,’’ मैं ने दोबारा लाड़ से अम्मां का ध्यान अपनी ओर खींचने की कोशिश की.
‘‘चुप रहो. 3 दिन तक रसोई में न कड़ाही चढ़ेगी, न सब्जी में किसी तरह का तड़का लगेगा,’’ अम्मां के बजाय नानी ने आ कर मु झे 8-10 साल के बच्चे की तरह लताड़ दिया.
‘‘क्यों नानी?’’ मैं ने पूछा.
‘‘किस दुनिया में रहता है. कुछ खबर है. मियांजी का एकलौता बेटा बस हादसे में मर गया.
‘‘अरे, बस हादसे का नाम है. उसे तो दूध गिरने के अशुभ ने खा लिया. बेचारे मियांजी कितने गरीब हैं. 2 हजार रुपए मौलवी को दे दिए थे इस अशुभ को उतरवाने के वास्ते, लेकिन दूध का घोर अशुभ उतरा ही नहीं,’’ नानी पिघला हुआ लोहा मेरे कानों में उड़ेल कर अम्मां को साथ लिए मियांजी के घर चली गईं.
अब मु झे बीना की चिंता होने लगी. ये बेदर्द समाज बीना को कहां छोड़ने वाला था. मैं ने बीना को बचाने की खातिर एक फैसला ले लिया.
मैं ने उस बस हादसे की पूरी छानबीन कर डाली और मियांजी को सम झाने की हर मुमकिन कोशिश की कि नशे में धुत्त ड्राइवर तेज बस चला रहा था. मगर मेरे लाख सम झाने पर भी किसी ने मेरी बात नहीं मानी.
दूध गिरना अशुभ नहीं था, लेकिन बीना को 2 दिन तक खाना नहीं दिया गया, वह यकीनन अशुभ था.
अब मैं ने तय कर लिया था, यह घटना मैं दोबारा नहीं होने दूंगा. बीना 2 दिन तक भूख झेल गई, मगर मेरी अम्मां इतनी बीमार थीं कि शाम तक ही मर जातीं और मेरे लिए यह सब से बड़ा अशुभ दिन होता.
तब मैं ने कड़े तेवर अपनाते हुए नानी से कहा, ‘‘खबरदार, जो मेरे बाप की मेहनत की कमाई किसी झोलाछाप, पाखंडी मौलवी के आगे डाली. अगर आप ने मेरी बात नहीं मानी और मेरी अम्मां के साथ जुर्म किया या उन्हें किसी तरह परेशान किया, तो हम आप को इस उम्र में छोड़ कर चले जाएंगे. फिर शायद आप की जिंदगी का यह सब से बड़ा अशुभ दिन होगा.’’
मैं अम्मां को अपने साथ लिए कमरे में आ गया. उन्हें खाट पर लिटा कर चादर ओढ़ाई. जैसे ही मैं पलटा, हैरानी के कई झटके खातेखाते बचा.
तावीज के बजाय नानी कसबे के अस्पताल की लेडी डाक्टर के साथ खड़ी थीं. कब्रिस्तान में धकेल देने वाली नानी अब सुखशांति के बौर्डर पर खड़ी लग रही थीं. मु झे लगा कि मौके पर दी गई धमकी अब निशाने पर जा लगी थी.
डाक्टर ने चैकअप कर के दवा लिखी और परची नानी के हाथ में थमा कर चली गईं.
मैं ने खुश हो कर नानी से कहा, ‘‘अच्छा हुआ, आप सुधर गईं, वरना…’’ इस से आगे मैं कुछ और कहता कि नानी ने फिर जोरदार थप्पड़ से मेरा गाल लाल कर दिया.
‘‘मु झे छोड़ कर मत जाना. मैं किसी को नहीं भड़काऊंगी,’’ इतना कह कर नानी रोने लगीं.
आग या पानी, मैं नानी को सम झ नहीं पाया. पहले गुस्सा, फिर रोना. खैर, मैं ने नानी को कंधे से थाम लिया, क्योंकि वे सुधर जो गई थीं. Hindi Superstition Story




