Hindi Story. डाक्टर अशोक का अपना नर्सिंगहोम था. वे शहर के दिल की बीमारी के जानेमाने डाक्टर थे. वे 32 साल के हो गए थे, पर अभी तक उन्होंने शादी नहीं की थी और न ही वे इस बंधन में बंधना चाहते थे. वे काफी रंगीनमिजाज थे. उन के कई औरतों से नाजायज संबंध थे.

डाक्टर अशोक अपने नर्सिंगहोम में भी खूबसूरत जवान नर्सें रखते थे और किसी न किसी बहाने उन्हें अपने जाल में फांस कर उन से नाजायज संबंध बना लेते थे. जो भी लड़की उन के जाल में फंस जाती, तो उसे तभी उन के चंगुल से छुटकारा मिलता, जब खुद डाक्टर का मन उस से भर जाता था.

लतिका नई नर्स थी. उसे नर्सिंगहोम में आए हुए 4-5 दिन ही बीते थे कि डाक्टर अशोक ने उसे अपनी लच्छेदार बातों में फंसाना शुरू कर दिया.

दरअसल, लतिका ने इस से पहले किसी भी नर्सिंगहोम में काम नहीं किया था और न ही वह अपने काम के बारे में कुछ जानती थी. उसे तो डाक्टर साहब ने उस की गदराई जवानी और खूबसूरती के चलते अपने यहां अच्छी तनख्वाह पर रख लिया था. वह बहुत दिनों से टेस्ट बदलने की फिराक में थे. पुरानी नर्सें अब उन के लिए बासी हो गई थीं.

लतिका जब नर्स की सफेद स्कर्ट और शर्ट पहन कर आती, तो गजब की सैक्सी लगती थी.

एक हफ्ते बाद डाक्टर अशोक ने लतिका की नाइट ड्यूटी लगा दी. वह रात में उसे अपने चैंबर में बुला कर मीठीमीठी बातें करते थे. ऐसी बातें सुन कर लतिका शरमा जाती और केवल हां या नहीं में जवाब देती. डाक्टर अशोक उस की हिचक दूर करना चाहते थे. वे हर लड़की के साथ ऐसा ही करते थे.

एक दिन लतिका को ड्यूटीरूम में बैठेबैठे नींद आ रही थी. अचानक डाक्टर अशोक वहां आ पहुंचे. उसे ऊंघता देख कर उन्होंने कहा, ‘‘हैलो लतिका.’’

‘‘यस डाक्टर,’’ लतिका एकदम से आंखें मलती हुई हड़बड़ा कर उठ बैठी. उसे अपने ऊंघने पर शर्म आ रही थी कि डाक्टर अशोक क्या सोच रहे होंगे? पर वह कर भी क्या सकती थी? नींद पर किस का बस है? वैसे भी इस समय रात के 12 बज रहे थे.

लतिका को हैरानी हो रही थी कि इस समय डाक्टर साहब क्यों राउंड पर आए हैं? सब मरीजों की दवाएं तो वह पहले ही समय पर खिला चुकी थी. कोई गंभीर मरीज भी इस समय नर्सिंगहोम में भरती नहीं था.

‘‘लगता है, तुम्हें नींद आ रही है?’’ डाक्टर अशोक ने मुसकराते हुए पूछा.

‘‘सौरी सर,’’ लतिका ने किसी तरह कहा.

‘‘कोई बात नहीं… हो जाता है. रात की ड्यूटी करना बहुत मुश्किल काम है. आप ऐसा क्यों नहीं करतीं कि नींद और बोरियत से बचने के लिए कोई रोमांटिक मैगजीन या उपन्यास पढ़ा करें?’’

‘‘जी सर, पर रोमांटिक ही क्यों? जासूसी क्यों नहीं?’’ लतिका ने पूछा.

‘‘यह उम्र रोमांस करने की है. रोमांटिक उपन्यास पढ़ने से मन भी रोमांटिक होने लगता है. किसी को प्यार करने को जी चाहने लगता है,’’ डाक्टर अशोक ने कहा.

लतिका शरमाई सी खड़ी रह गई. वह कुछ कह न सकी.

‘‘क्या आप का कोई बौयफ्रैंड है?’’ डाक्टर अशोक ने अचानक पूछा.

‘‘नहीं सर, कोई नहीं है,’’ लतिका अचकचा कर बोली.

‘‘यह कैसे हो सकता है कि आप जैसी खूबसूरत और स्मार्ट लड़की का कोई बौयफ्रैंड न हो?’’

‘‘सच मानिए सर, कोई नहीं है,’’ अब लतिका भी मुसकराई.

‘‘तो कोई बात नहीं. अगर आप बुरा न मानें, तो मैं आप का बौयफ्रैंड बन जाऊं?’’ डाक्टर अशोक ने जाल फेंका.

‘‘आप भी सर, कैसी बातें कर रहे हैं?’’ लतिका ने शरमा कर कहा.

‘‘क्यों, क्या मैं आप को पसंद नहीं? आप खूबसूरत हैं, तो मैं भी हैंडसम हूं,’’ डाक्टर अशोक ने हंसते हुए कहा.

‘‘जी हां सर, इस में क्या शक है?’’ लतिका झेंपते हुए बोली. इस से पहले किसी ने भी उस से ऐसी रोमांटिक बातें नहीं की थीं. उस के दिल में एक अजीब सी गुदगुदी होने लगी. डाक्टर अशोक उसे बेहद जिंदादिल आदमी लगे.

‘‘कम औन माई डियर लतिका, हम लोग अपने इस नए संबंध को ऐंजौय करते हैं,’’ डाक्टर अशोक ने उस की तरफ हाथ बढ़ाते हुए कुछ रोमांटिक अंदाज में कहा.

‘‘मतलब?’’ पूछते हुए लतिका खुद में ही सिकुड़ गई.

‘‘अरे भई, अब तुम हमारी गर्लफ्रैंड हो. गर्लफ्रैंड को कौफी पिलाना चाहिए या नहीं?’’ डाक्टर अशोक का रोमांटिक मूड बरकरार था.

लतिका मुसकराई. वह सोच रही थी कि कितनी आसानी से डाक्टर ने उसे अपनी गर्लफ्रैंड बना लिया है. अब इस खुशी में कौफी पिलाना चाहते हैं. उसे क्या करना चाहिए? वैसे, इस समय कौफी पीने में हर्ज क्या है? वह कौफी पीने के लिए तैयार हो गई. इस के सिवा और कोई चारा भी नहीं था.

डाक्टर अशोक उसे अपने केबिन में ले गए. वहां कौफी बनाने का सारा इंतजाम था. उन्होंने केबिन में पहुंच कर वहां लगा टैलीविजन चालू कर दिया और लतिका को कुरसी पर बैठा कर खुद कौफी बनाने लगे.

‘‘लाइए सर, मैं कौफी बनाती हूं,’’ लतिका ने कहा.

‘‘नो माई डार्लिंग, आज तो तुम मेरे हाथ की बनी कौफी पी कर देखो,’’ डाक्टर अशोक ने बड़ी अदा से उसे टाल दिया.

लतिका उन की इस अदा पर मुसकराई और सोफे पर बैठी टैलीविजन पर फिल्म देखने लगी.

कुछ ही देर में डाक्टर अशोक ने इलैक्ट्रिक केतली में 2 कप कौफी तैयार कर ली.

‘‘यह लो डार्लिंग, बताओ कौफी कैसी बनी है?’’ एक कप कौफी और तले हुए काजू लतिका की तरफ बढ़ाते हुए डाक्टर अशोक ने पूछा.

लतिका को समझ  नहीं आ रहा था कि आज डाक्टर अशोक उस पर इतने मेहरबान क्यों हैं?

कौफी अच्छी बनी थी. लतिका ने कौफी पीते हुए डाक्टर अशोक की तारीफ की, तो वे मुसकराए. दोनों फिल्म देखते हुए कौफी पीने लगे. फिल्म बहुत रोमांटिक थी. हीरोहीरोइन के प्यार के संबंध दिखाए जा रहे थे. दोनों के दिलों में कुछकुछ होने लगा.

उस कौफी में ऐसा न जाने क्या मिला था कि लतिका अपने होशोहवास खोने लगी. शायद डाक्टर अशोक ने उस में कोई नशीली दवा मिला दी थी.

लतिका को नींद सी आने लगी. उसी समय डाक्टर अशोक ने उसे लपक कर अपनी बांहों में भर लिया. वह उन की बांहों में कसमसाने लगी, पर जल्दी ही अपने होश खो बैठी.

लतिका को जब होश आया, उस समय सुबह के 5 बज रहे थे. वह हड़बड़ा कर उठी. उस के कपड़े अस्तव्यस्त थे. अपनी ऐसी हालत देख कर वह हैरान रह गई.

डाक्टर अशोक ने उसे कहीं का नहीं छोड़ा था. उस की इज्जत तारतार कर के रख दी थी. अपनी ऐसी हालत देख कर उस की आंखों से आंसू निकल आए.

लतिका किसी तरह उठी. अपने कपड़े ठीक किए और केबिन से बाहर निकल कर मरीजों को सुबह की दवाएं देने लगी. उस ने मन ही मन फैसला कर लिया कि वह डाक्टर अशोक को उस की इस हरकत के लिए सबक सिखा कर ही रहेगी. वह ऐसी लड़की नहीं थी कि हालात से समझौता कर के घुटघुट कर जीने के लिए मजबूर हो जाए.

लतिका ने बहुत सोचसमझ  कर एक योजना बनाई और उस में एक और नर्स मुक्ता को भी शामिल कर लिया.

लतिका ने पता लगा लिया था कि इस नर्सिंगहोम में काम करने वाली मुक्ता भी डाक्टर अशोक के हाथों छली गई थी और उस से बदला लेने के लिए बेताब थी.

दूसरी ओर डाक्टर अशोक अपनी कामयाबी पर बहुत खुश थे. जब कई दिनों तक लतिका ने इस बारे में कोई शिकायत नहीं की, तो उन्होंने समझा  लिया कि वह चालू लड़की है और इस तरह के संबंधों से उसे कोई एतराज नहीं है.

एक दिन रात को राउंड लेते समय लतिका ने बड़ी अदा से मुसकराते हुए डाक्टर अशोक से कहा, ‘‘कौफी पिलाए तो बहुत दिन हो गए हैं डाक्टर साहब. अपनी गर्लफ्रैंड को क्या इतनी जल्दी भूल गए?’’

‘‘नहीं…नहीं… ऐसी कोई बात नहीं है डार्लिंग. मैं तो समझा था कि कहीं तुम उस दिन की बात का बुरा तो नहीं मान गई हो?’’ डाक्टर अशोक ने बड़ी बेताबी से कहा

‘‘बुरा तो मान गई थी डाक्टर. प्यार करने के लिए भला नशे की गोली देने की क्या जरूरत थी? खुद तो पूरा मजा ले लिया, मैं प्यासी की प्यासी ही रह गई,’’ आंखों में शरारत भर कर लतिका ने कहा.

‘‘ओह, तो आज जी भर कर प्यार कर लेना डार्लिंग. बंदा आप की सेवा में हाजिर है,’’ डाक्टर अशोक खुश होते हुए बोले.

रात को तकरीबन 12 बजे लतिका ने मुक्ता से गुपचुप कुछ सलाहमशवरा किया, फिर वह डाक्टर अशोक के केबिन में दाखिल हुई. वह बहुत बेसब्री से उसी का इंतजार कर रहे थे.

‘‘आओ डार्लिंग, बहुत देर लगा दी,’’ उसे देख कर वह मुसकराए.

‘‘इंतजार में ही तो मजा है. अब फिक्र मत करो. सारी रात ही अपनी है,’’ बड़ी अदा से आंखें मटकाते हुए लतिका बोली.

डाक्टर अशोक उसे अपनी बांहों में लेने को बेचैन हो उठे, लेकिन उस ने उन्हें झटक दिया.

‘‘जरा रुकिए, पहले एक कप कौफी हो जाए, तो जरा शरीर में ताजगी आए. थकान से मेरा अंगअंग टूट रहा है. आप मुझ से बहुत काम लेते हैं डाक्टर. आप बहुत जालिम हैं. पहले जरा मूड बनने दीजिए,’’ वह नखरे दिखाते हुए डाक्टर की बांहों में आने से बचते हुए बोली. फिर वह बड़ी अदा से अपने कूल्हे मटकाती हुई इलैक्ट्रिक केतली में कौफी बनाने चली गई.

उस की ऐसी अदाएं देख कर डाक्टर अशोक उसे पाने को बेचैन हो उठे थे. वे टैलीविजन में आती हुई रोमांटिक फिल्म देखने में मशगूल हो गए.

कौफी पीने के बाद डाक्टर अशोक को अपना सिर घूमता हुआ सा महसूस हुआ. अभी वे कुछ समझ  पाते कि बेहोश हो कर अपने केबिन में बिछे बैड पर ढह गए.

इस के 2 दिन बाद जब डाक्टर अशोक अपने केबिन में बैठे मरीज देख रहे थे, उसी समय लतिका उन के पास आई. उस ने उन्हें एक लिफाफा दे कर उसे देख लेने को कहा.

डाक्टर अशोक ने लिफाफा खोल कर देखा. उस में कुछ फोटो थे. उन फोटो को देख कर उन की सिट्टीपिट्टी गुम हो गई. उन फोटो में वे एकदम नंगे थे और लतिका भी साथ थी. ये फोटो उस रात को कौफी में नशे की गोलियां मिला कर मुक्ता की मदद से खींचे गए थे.

डाक्टर अशोक ने हड़बड़ाहट में सब को केबिन से बाहर निकाला. उन का चेहरा एकदम सफेद पड़ गया था.

‘‘आखिर तुम चाहती क्या हो?’’ डाक्टर ने सहमे अंदाज में लतिका से पूछा.

‘‘अपनी बेइज्जती का बदला लेना है,’’ लतिका ने कहा.

‘‘तुम जितनी चाहो, उतनी दौलत ले लो, लेकिन ये फोटो और इन के नैगेटिव मुझे दे दो,’’ डाक्टर अशोक ने उसे रुपयों का लालच देते हुए कहा.

‘‘डाक्टर अशोक, तुम ने क्या मुझे ऐसीवैसी लड़की समझ  रखा है? तुम ने क्या समझ  था कि तुम धोखे से मेरे जिस्म से खिलवाड़ कर लोगे और मैं चुप रह जाऊंगी या आंखों में आंसू भर कर तुम्हारे सामने गिड़गिड़ाऊंगी?

‘‘नहीं… मैं इतनी कमजोर नहीं हूं. केवल 10 साल की उम्र में मैं ने अपने पिता को खो दिया था. तब से मैं जिंदगी में आने वाली तमाम मुश्किलों का सामना अकेली कर रही हूं,’’ लतिका ने गुस्से से कहा.

‘‘तो तुम करोगी क्या? इस से तो तुम्हारी ही बदनामी होगी? इस से अच्छा है कि तुम रुपए ले लो, नहीं तो फिर तुम्हारे पल्ले कुछ नहीं पड़ेगा. मैं ने तुम जैसी लड़कियां बहुत देखी हैं,’’ एक बार फिर उसे झांसे में लेने की कोशिश करते हुए डाक्टर अशोक ने धमकाया.

‘‘नहीं, मैं तुम को इतनी आसानी से नहीं छोड़ूंगी. होने दो बदनामी. मैं तो लुट ही चुकी हूं. मैं अब अपनी बदनामी से डरने वाली नहीं हूं. लेकिन कल जब ये फोटो सभी अखबारों में छपेंगे, तो तुम कहीं के नहीं रहोगे डाक्टर.

‘‘लोग तुम्हारे नाम पर थूकेंगे. यह दौलत और शोहरत एक ही दिन में तुम से छिन जाएगी. बलात्कार करने के जुर्म में तुम्हें जेल अलग से होगी. मैं ही नहीं, कई दूसरी लड़कियां भी तुम्हारे खिलाफ बयान देंगी.’’

इतना सुनते ही डाक्टर अशोक घबरा गए. उन्हें अपने पैरों के नीचे से जमीन खिसकती नजर आई. उन की बोलती बंद हो गई.

वे गिड़गिड़ाते हुए बोले, ‘‘मुझे  माफ कर दो. मुझ  से बहुत बड़ी गलती हो गई है. प्लीज, ऐसा मत करो, नहीं तो मैं कहीं का नहीं रहूंगा. मेरी डाक्टरी की डिगरी तक छिन जाएगी.’’

‘‘मैं ऐसा ही करूंगी. मैं तुम्हें दरदर का भिखारी बना कर छोड़ूंगी, ताकि तुम किसी औरत की तरफ गलत निगाह से देखने की कभी हिम्मत भी न कर सको,’’ लतिका ने उन्हें धमकी दी. वह उन्हें गिड़गिड़ाता देख कर बहुत खुश थी. यही तो वह चाहती थी.

‘‘मैं तुम्हारे पैर पड़ता हूं. तुम जो भी कहोगी, मैं मानने को तैयार हूं, लेकिन मेरी बदनामी मत करो,’’ उस के पैरों पर झकते हुए डाक्टर अशोक बोले.

‘‘तुम ने मेरी इज्जत लूटी है, इसलिए अब मुझे  समाज में अपनी बीवी का दर्जा देना पड़ेगा. तुम्हें मंजूर है?’’ लतिका ने कहा.

कुछ देर तक डाक्टर अशोक सोचते रहे, फिर बोले, ‘‘ठीक है लतिका, मैं तुम से शादी करूंगा.’’

‘‘देखो, अपनी बात से मुकरना मत. तुम्हारी सारी बातें अब मेरे इस मोबाइल में टेप हो चुकी हैं,’’ अपना मोबाइल दिखाते हुए लतिका बोली.

डाक्टर अशोक अब पूरी तरह से अपनी हार मान चुके थे. अब उन के सामने लतिका को बीवी बनाने के अलावा कोई चारा नहीं बचा था.  Hindi Story

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