Alcohol Addiction Story. सलीम ने पैंट ले जा कर अलमारी में टांग दी. घड़ी में शाम के 7 बज रहे थे. वह काउंटर पर खड़े मास्टर के पास पहुंच गया.
मास्टर कपड़े की कटिंग कर रहा था. यह मास्टर का अच्छा बरताव ही है कि आज न जाने कितनी ही सिलाई की दुकानें बंद हो गई हैं, पर उस के यहां काम की कमी नहीं रहती. मास्टर ने कौपी निकाली, तो सलीम धीरे से बोला, ‘‘2 पैंट…’’ वह जानता है कि दूसरे कारीगरों में से सब से कम काम उसी का होता है. खाली पेट मशीन चलती ही नहीं.
सलीम सुबह चाय के साथ बासी रोटी का टुकड़ा खा कर आ जाता है. कई बार उसे बासी रोटी भी नहीं मिलती. वह सुबह के लिए आधा किलो चावल ले लेता है. उसे ही पका कर बच्चे थोड़ाथोड़ा खा लेते हैं. 7 बच्चों में आधा किलो चावल से होता ही क्या है, इसलिए वह चाय पी कर दुकान चला आता है.
मास्टर ने दराज में से कुछ रुपए निकाले और उस की कारीगरी के 130 रुपए उस के हाथ पर रख दिए.
रुपए मिलते ही सलीम के चेहरे पर खुशी तैर गई. वह तेज कदमों से शराब की दुकान की ओर चल दिया.
वहां वह 5 रुपए के पकौड़े ले कर शराब के साथ खा लेता है. इस खानेपीने में उस के 50 रुपए खर्च हो जाते हैं. बाकी पैसे ले जा कर थोड़ाथोड़ा आटाचावल वगैरह ले लेता है, जो परिवार के लिए पूरा नहीं पड़ता, तो उस की बीवी जुबैदा बड़बड़ाने लगती है.
इस से सलीम का पारा चढ़ने लगता है. वह गुस्से में चिल्लाने लगता है और फिर वह जुबैदा की पिटाई कर देता है.
सलीम अनपढ़ व नासमझ है, लेकिन इतना तो वह जानता ही है कि मुसलिम के लिए शराब पीना हराम है. जब कोई उस के शराब पीने के बारे में कुछ कहता है, तो वह कह देता है कि अब तो बहुत से मुसलिम शराब पीने लगे हैं.
उस दिन जब तौफीक की लाश गंदे नाले में मिली थी, तो उस के रोंगटे खड़े हो गए थे. उस दिन तौफीक शराब के ठेके पर मिला था. वह बहुत खुश था, क्योंकि उस दिन उस की अच्छी कमाई हो गई थी.
तौफीक ने ही उस से कहा था कि आज वह पिलाएगा. वह पी कर चला आया था, क्योंकि वह जानता था कि जब तक वह घर में पैसे नहीं देगा, चूल्हा नहीं जलेगा.
तौफीक मकसूद मियां का बड़ा लड़का था. 5 बेटियों और 2 लड़कों में वह सब से बड़ा और समझदार था. उस ने देखा था, घर में कईकई दिन चूल्हा नहीं जलता, तो वह मोटर मेकैनिक का काम सीखना छोड़ कर मजदूरी करने लगा था. उस का छोटा भाई भी पढ़ाई छोड़ कर एक दुकान में नौकरी करने लगा था, जिस से दोनों वक्त का चूल्हा जलने लगा था. अब मकसूद मियां के चेहरे पर संतोष झलकने लगा था.
तौफीक महल्ले के बड़े बाप के बिगड़ैल बेटों के साथ रह कर नशा करना सीख गया था. पहले चोरीछिपे, फिर खुल कर शराब पीने लगा था, क्योंकि वह खुद कमा रहा था.
उस दिन तौफीक ने अपने दिल की बात उस से कही थी कि वह भी बड़ा आदमी बनना चाहता है. उस ने सिर्फ इसलिए मोबाइल फोन खरीदा था कि वह दोस्तों को बता सके कि उस के पास भी मोबाइल है.
मकसूद मियां तौफीक के बरताव से दुखी रहने लगे थे, क्योंकि उस की अम्मी जब भी उस से पैसे मांगतीं, तो वह मना कर देता और दोस्तों पर खर्च करने में शान समझता.
उस दिन सलीम शराब पी कर घर चला आया था, पर तौफीक वहीं बैठा पीता रहा था. रात में जब तौफीक घर आ रहा था, तो नाले में गिर पड़ा था. नशे के चलते वह उठ नहीं पाया था और सुबह महल्ले वालों ने उस की लाश नाले से निकाली थी.
तौफीक की कीचड़ से सनी लाश को देख कर सलीम ने खुद को समझाया था कि वह इतनी पीता ही नहीं कि होश न रहे.
‘‘अरे मास्टर, बड़ी जल्दी में हो.’’
सलीम ने चौंक कर देखा, रामप्रसाद आ रहा था. वह रुक गया. वह जानता था कि रामप्रसाद भी शराब पीने जा रहा है. अंधेरा काफी हो गया था. खंभों पर जल रही ट्यूबलाइट से अंधेरा छंट गया.
उस ने देखा कि वह रेडलाइट एरिया में था. यह धंधेवालियों का महल्ला था. यहीं शराब की दुकान है, जहां वह हर रोज शराब पीने आता है.
‘‘यह नई लड़की धंधे में आई है,’’ रामप्रसाद ने खंभे के पास खड़ी लड़की की ओर इशारा करते हुए बताया.
सलीम ने उधर देखा, खंभे के पास एक लड़की खड़ी थी. उसे लगा कि वह उस लड़की को जानता है. उस ने अपने दिमाग पर जोर दिया और उसे याद आ गया कि वह सुलेमान की बेटी है.
वह जानता है कि सुलेमान बोझा ढोने का काम करता है. उस के 8-9 बच्चे हैं. थकान उतारने के लिए सुलेमान शराब पीता है. अब तो मुसलिमों की शादीबरातों में भी लोग शराब पीने लगे हैं.
उस दिन मकसूद मियां ने कहा था कि जिन बरातों में शराब पी जाए, उस बरात का निकाह किसी मौलाना को नहीं पढ़ना चाहिए. उन का जवान बेटा नशे की भेंट चढ़ गया था, वे तो शराब के खिलाफ बोलेंगे ही.
‘‘यह तो सुलेमान की लड़की है,’’ वह बोला.
‘‘सुलेमान तो अपनी सारी कमाई शराब में ही उड़ा देता है, तो बच्चे कब तक भूखे मरें, इसीलिए यह धंधे में आ गई,’’ रामप्रसाद बोला.
सलीम को जैसे झटका लगा, उस के बच्चे भी पेटभर रोटी नहीं पाते. पड़ोसी भी कब तक भूखे बच्चों को रोटी देंगे. उस की भी कई लड़कियां हैं, जो बड़ी हो रही हैं. ऐसा न हो कि भुखमरी और परेशानी से मजबूर हो कर उस की भी लड़कियां एक दिन रेडलाइट एरिया के धंधे में आ जाएं.
सलीम वहीं ठिठक कर रुक गया.
‘‘क्या बात है, चलो देर हो रही है,’’ रामप्रसाद बोला.
‘‘नहीं, मैं नहीं जाऊंगा. आज से शराब को छुऊंगा भी नहीं. मैं नहीं चाहता कि मेरे बच्चे भुखमरी से तंग आ कर गलत रास्ते पर जाएं, इसलिए मैं वापस जा रहा हूं,’’ वह मजबूती भरे लहजे में बोला.
‘‘बात तो तेरी सही है. चल, मैं भी वापस चल रहा हूं,’’ कहते हुए रामप्रसाद भी उस के साथ हो लिया. Alcohol Addiction Story.
— साबिर हुसैन




