Story in Hindi. रामपुरा गांव में नीम के पेड़ के नीचे चबूतरे के चारों ओर गांव वालों की भीड़ थी. चबूतरे पर भगवा कपड़े पहने साधु से दिखने वाले 2 आदमी बैठे थे. उन में से एक अधेड़ था और दूसरा जवान, यानी एक गुरु और एक चेला.

गुरु की आंखें बंद थीं और चेला आनेजाने वालों के बारे में बताने ही वाला था कि ‘अनर्थ हो गया. इस गांव में जो नहीं होना था, सो हो गया…’ जोरजोर से कहते हुए गुरु ने आंखें खोलीं, तो सब का ध्यान उधर चला गया.

‘‘क्या अनर्थ हो गया महाराज?’’ चेले ने सिर   झुका कर पूछा.

‘‘इस गांव में पिछले एक हफ्ते के अंदर किसी नौजवान की अकाल मौत हुई है बच्चा,’’ कहते हुए बाबा फिर से ध्यान में बैठ गए.

‘‘बात बिलकुल सच है, पर आप को कैसे पता?’’ एक पढ़ेलिखे नौजवान ने पूछा, तो चेला बोला, ‘‘हमारे गुरु ने हिमालय पर जा कर सालों तपस्या की है. ये वहां की कई जड़ीबूटियों के जानने वाले और अमोघ मंत्र के स्वामी हैं.

‘‘ये सर्पदंश यानी सांप के डसने की घटना को तो हवा में सूंघ कर जान लेते हैं. यहां तक कि कब्र में दफन हो चुके मुरदों को भी फिर से जिंदा किया है.’’

‘‘क्या बात करते हो… मरने के बाद भी कोई जिंदा होता है क्या? यह सब बकवास है,’’ एक नौजवान ने कहा, तो चेले के बोलने के पहले ही तमाम गांव वालों ने यह कह कर उस की खिलाफत की कि आजकल के लड़कों ने चार अक्षर क्या पढ़ लिए, उन के लिए तंत्रमंत्र सब   झूठे हो गए.

‘‘नहींनहीं, इन का कोई दोष नहीं है, जमाना ही ऐसा है. तमाम ठग लोग तरहतरह के भेष में घूमते हुए लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं, इसीलिए लोग सच पर भी यकीन नहीं कर पाते.

‘‘हम ठहरे परदेशी. अभी थोड़ी देर में यहां से चले जाएंगे, पर हमें भी उन्हीं   झूठों में शामिल कर लिया जाए, यह हमें कतई बरदाश्त नहीं.

‘‘हमारी सचाई का एक सुबूत तो यह रहा…’’ कहते हुए उस चेले ने थैले से एक डायरी निकाली और बोला, ‘‘भाई साहब, इस डायरी में उन सांप से डसे लोगों के नामपते व फोन नंबर हैं, जिन्हें हमारे इन्हीं गुरु ने कब्रों से निकाल कर जिंदा किया है. लीजिए नंबर और बात कर के तसल्ली कर लीजिए.’’

उस नौजवान ने मोबाइल से 2 नंबरों पर बात की. एक ने खुद को मिर्जापुर का और दूसरे ने अपने को कन्नौज का बताया. बाबा का नाम सुनते ही दोनों ने उन की तारीफों के पुल बांध दिए.

मोबाइल का स्पीकर चालू था, इसलिए सभी ने सुना. ज्यादातर लोगों ने बाबा के सामने सिर   झुका दिया और उस नौजवान को बुरी नजर से देखने लगे, तो वह वहां से चुपचाप चला गया.

यह खबर पूरे गांव में फैल गई. थोड़ी देर बाद फकीरे लाल नामक एक शख्स बाबा के सामने खड़ा था.

‘‘महाराज, मेरा बेटा सांप के काटने से मरा है. अगर आप उसे जिंदा कर देंगे, तो मैं अपना सबकुछ आप को देने के लिए तैयार हूं.’’

‘‘हमें कुछ नहीं चाहिए. हम तो लोगों के भले के लिए यह सब करते हैं,’’ गुरु बोला.

‘‘लेकिन महाराज, वह तो दफनाया जा चुका है. उसे 10 दिन पहले सांप ने डसा था,’’ फकीरे लाल ने कहा.

‘‘10 क्या, 25 दिन से भी कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि सांप डसे शख्स की लाश 40 दिन तक खराब नहीं होती. तुम्हारे बेटे को मैं जरूर जिंदा करूंगा, पर आज नहीं.’’

‘‘क्यों महाराज?’’ फकीरे लाल ने पूछा, तो बाबा ने बताया, ‘‘वह इसलिए, क्योंकि हमें अगले 7 दिन तक कब्र पर पूजा करनी होगी, फिर 8वें दिन लाश बाहर निकाल कर हम आप के बेटे को नई जिंदगी दे सकेंगे. बस, आप हमारे रहने का अलग इंतजाम करें और पूजा का सामान ला दें.’’

फकीरे लाल ने हां में हां मिलाई और उन दोनों को घर ले जा कर उन के ठहरने का इंतजाम कर दिया.

चेला फकीरे लाल से रुपए ले कर बाजार से पूजा का सामान ले आया. फिर दोनों ने कब्र के चारों ओर लाल   झंडियां लगाईं. अगरबत्तियां जला कर फकीरे लाल से पूजा करवाई.

यह सिलसिला 5 दिन तक चला, पर छठे दिन एक नई घटना घट गई.

हुआ यह कि वहां से तकरीबन 3 किलोमीटर दूर अलियापुर गांव में रात को एक गरीब आदमी को कोबरा सांप ने डस लिया.

तमाम   झाड़फूंक वाले ओ  झा और सयाने जमा हुए. रातभर इलाज होने के बाद भी पीडि़त की हालत नहीं सुधरी, तो आखिर में, ‘इसे सांप ने नहीं, काल ने डसा है, इसलिए हमारा इलाज नहीं चल पा रहा,’ कहते हुए   झाड़फूंक वाले एकएक कर के चलते बने.

थोड़े समय बाद वह शख्स भी चल बसा. घर वालों में हाहाकार मच गया.  जिस ने भी सुना, दौड़ा चला आया.

एक आदमी ने सब को शांत करते हुए बताया कि रामपुरा गांव में 2 बाबा आए हुए हैं. वे इस समय 10 दिन पहले सांप के काटने से मरे लड़के को जिंदा करने के काम में लगे हुए हैं. जब वे कब्र के मुरदे को जिंदा कर सकते हैं, तो इसे क्यों नहीं?

ऐसा सुन कर घर वालों में उम्मीद जगी और उन्होंने एक आदमी से रामपुरा जाने को कहा. बस फिर क्या था, वहां जा कर मोटरसाइकिल से आदमी ने उस बाबा के चेले को आधे घंटे में ही ला कर खड़ा कर दिया.

चेले ने नब्ज पकड़ी, आंखें देखीं, फिर बोला, ‘‘यह तो मर चुका है. अगर आप पहले आ गए होते, तो जहर उतारा जा सकता था.

‘‘अब हम इसे अकेले नहीं जिंदा कर सकते. इस में हमें अपने गुरु की जरूरत पड़ेगी.’’

‘‘यह तो हम ने वहीं बताया था कि आदमी मर चुका है, फिर तुम अकेले क्यों आए?’’ लाने वाले शख्स ने कहा, ‘‘चलिए, अभी गुरु को भी ले आते हैं.’’

‘‘नहीं…नहीं, अब वे यहां नहीं आ सकते, क्योंकि वे वहां एक मरे हुए को जिंदा करने में जुटे हैं.

‘‘अगर अब वे वह जगह छोड़ देंगे, तो वह शख्स जिंदा नहीं हो सकेगा. पर घबराइए नहीं, मेरे पास दूसरा उपाय है. हमारे दादा गुरु कानपुर में हैं. आप इन के शरीर को गाय के गोबर से ढक कर सुरक्षित करें. मैं अभी जा कर उन्हें ले आऊंगा. बस, किराएभाड़े व पूजा का सामान खरीदने के लिए आप हमें 2 हजार रुपए दे दें.’’

उस समय वहां लोग काफी जमा थे. पीडि़त परिवार के पास उतने रुपए थे नहीं. गांव के वैद्यजी के नाम से मशहूर एक सज्जन बोले, ‘‘बाबाजी, आप की बात ठीक है, लेकिन आप कानपुर अकेले नहीं जाएंगे. हम आप के साथ चलेंगे. मैं अपने घर से अभी रुपए ले कर आया.’’

कानपुर के लिए बस पकड़ने के लिए बसअड्डा जाना था. सो, एक मोटरसाइकिल वाले को साथ ले कर थोड़ी देर में वैद्यजी हाजिर हो गए. उन्हें देख कुछ लोग मुसकराए, तो ज्यादातर लोग हैरत में पड़ गए.

चेले को बीच में बिठाया, वैद्यजी पीछे बैठे और उन्हें बसअड्डे तक पहुंचाने हेतु मोटरसाइकिल चल पड़ी.

रास्ते में वैद्यजी बोले, ‘‘बाबाजी, सच यही है कि मरने के बाद आज तक कोई जिंदा नहीं हुआ. अच्छा होगा, अब तुम अपनी असलियत हमें बता दो, वरना देखो आगे पुलिस चौकी है, वहां…’’

‘‘माफ करें आप. यह सम  झो कि यह हमारा एक तरह का ठगी का धंधा है,’’ कहते हुए चेला वैद्यजी के पैरों पर गिर गया.

‘‘नहीं…नहीं, हम तुम्हें ऐसे नहीं जाने दे सकते. वहीं चलो, सब के सामने अपनी कहानी बताओ.’’

थोड़ी देर बाद चेला गांव वालों के सामने रोरो कर माफी मांग रहा था.

इधर गांव वालों का गुस्सा सातवें आसमान पर था. आखिरकार लोगों ने उसे पिटाई कर के ही जाने दिया.

इस तरह चेला तो पिट कर खाली हाथ गया, पर रामपुरा में दूसरे साधु ने अपनी करामात दिखा ही दी. वह पीडि़त से मिला और आखिरी पूजा के लिए सामान खरीदने के नाम पर 2 हजार रुपए और साइकिल ले कर फरार हो गया. Story in Hindi

-रामसागर वर्मा

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