Entertainment. ‘‘आज भी वह सीन मेरी आंखों के सामने से नहीं जाता, जब मेरा बेटा बर्फ की सिल्लियों पर लेटा हुआ था. किसी भी मातापिता के लिए इस से बड़ा दुख क्या हो सकता है कि उन्हें अपने ही बच्चे को कंधा देना पड़े. मुझे  लगता था कि समय के साथ यह दर्द कम हो जाएगा, लेकिन यह और गहरा होता गया.’’

यह कथन फिल्म कलाकार शेखर सुमन का है, जब उन के बड़े बेटे आयुष की असमय मौत हो गई थी. पर कहते हैं, जिंदगी कभी रुकती नहीं है. शेखर सुमन ने इस दर्द को अपनी दवा बनाया और आज जब वे अपने लेटेस्ट शो ‘शेखर टुनाइट’ में देशदुनिया की खबरों पर व्यंग्य बाण चलाते हैं, तो लगता है कि इस शो के जरीए शेखर सुमन ने कई साल के बाद एक प्रमुख होस्ट और व्यंग्यकार के रूप में स्क्रीन पर जबरदस्त वापसी की है.

शेखर सुमन ने इस शो में बिना नाम लिए एक ऐसे ‘अहंकारी राजा’ की कहानी सुनाई, जो अपनी नाकामियां छिपाता है और सवाल पूछने वाले को ‘देशद्रोही’ करार देता है.

12,000 करोड़ रुपए की लागत वाली सड़कों की बदहाली पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि सड़कें अब बड़ी बेशर्म हो गई हैं, जो कुछ घंटों की बारिश के बाद गड्ढों के रूप में वियोग छोड़ जाती हैं

महंगाई पर बात करते हुए शेखर सुमन का मानना है कि सरकारें अमीरों से प्यार करती हैं, क्योंकि पैट्रोलडीजल महंगा होने पर अमीर कभी सड़कों पर आ कर ‘अमीर एकता जिंदाबाद’ के नारे नहीं लगाते.

व्यंग्य और तीखे सवालों के चलते शेखर सुमन के शो को बंद कराने की अटकलों के बीच, उन के करीबी सहयोगी और फिल्म निर्माता धर्मेश सांगानी के ठिकानों पर ईडी ने छापेमारी की. इन छापों के बाद भी शेखर सुमन का कटाक्ष जारी है और उन का मानना है कि उन की आवाज को दबाया नहीं जा सकता.

पटना में जनमे शेखर सुमन ने अपने कैरियर की शुरुआत साल 1984 में फिल्म ‘उत्सव’ से की थी, जिस में हीरोइन रेखा लीड रोल में थीं. इस के अलावा साल 1986 में उन की फिल्म ‘अनुभव’ आई थी, जो एक सैक्स कौमेडी कही जा सकती है. इस फिल्म की हीरोइन पद्मिनी कोल्हापुरे और रिचा शर्मा थीं. मतलब, उन की पहली दोनों फिल्मों का मुख्य केंद्र कामवासना था.

पर हिंदी फिल्मों में जब दाल नहीं गली तो शेखर सुमन ने जल्द ही टैलीविजन को अपना कार्य क्षेत्र चुन लिया था. ‘देख भाई देख’, ‘रिपोर्टर’, ‘वाह जनाब’, ‘छोटे बाबू’, ‘अमर प्रेम’ आदि शो में वे काफी कामयाब रहे थे. इस के अलावा वे ‘ग्रेट इंडियन कौमेडी शो’, ‘डायल वन और जीतो’, ‘कौमेडी सर्कस’ जैसे कई शो का भी हिस्सा रहे.

इतना ही नहीं 1990 और 2000 के दशक में शेखर सुमन ने राजनीतिक व्यंग्य, सैलिब्रिटी इंटरव्यू और मनोरंजन को एकसाथ पेश किया था. उन का टीवी शो ‘मूवर्स एंड शेकर्स’ उस दौर के सब से चर्चित टौक शोज में गिना जाता है.

शेखर सुमन ने राजनीति में भी अपना हाथ आजमाया था. साल 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर बिहार की पटना साहिब सीट से चुनाव लड़ा था.

करीब 15 साल बाद, मई 2024 में शेखर सुमन ने भाजपा की सदस्यता ली थी. हालांकि, भाजपा में शामिल होने के 24 घंटे के भीतर ही उन्होंने खुद को उस से अलग कर लिया था.

अब जबकि शेखर सुमन अपने शो में हर मुद्दे पर मजाकिया लहजे में बात रखते हैं, तो इस में कोई गलत बात नहीं है, पर जब सरकार अपनी बुराई सुनने की हिम्मत नहीं रखती है, तो फिर शेखर सुमन और ज्यादा मुखर हो कर सरकार को लपेटते हैं. यही उन के शो की खासीयत है. Entertainment

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