Hindi Social Story: कैलाश अग्रवाल एक बहुत बड़े कारोबारी का बेटा था. उस ने निर्मला नाम की एक गरीब दलित लड़की को काम पर रखा, फिर उस के प्यार में पड़ गया. उन दोनों ने शादी कर ली, पर क्या निर्मला उस की उम्मीदों पर खरी उतर पाई?
सौम्या ने ड्राइवर को फोन कर गाड़ी निकालने को कहा और ड्रैसिंग रूम से बाहर निकल अपने रूम को लौक करते हुए लिफ्ट की ओर निकल गई.
त्रिवेणी सोसाइटी में सौम्या और उस के पति आकाश अग्रवाल का चारमंजिला मकान था. इस मकान को मकान कहना भी ठीक नहीं. त्रिवेणी सोसाइटी में आलीशान विलाज की कम्युनिटी थी. शानदार पार्क, जिम, स्पोर्ट्स क्लब और कई तरह की सुविधाओं से लैस यह सोसाइटी अमीरों की अलग दुनिया थी.
.आकाश के पिता दिवाकर अग्रवाल ने इस सोसाइटी में 2 मकान लिए हुए थे. एक में आकाश अपनी पत्नी सौम्या और 9 साल की बेटी तृषा के साथ रहता था और दूसरे मकान में उन का दूसरा बेटा कैलाश मांबाप के साथ रहता था. दोनों भाइयों के मकान आसपास ही थे.
आकाश अग्रवाल के छोटे भाई कैलाश अग्रवाल की शादी नहीं हुई थी. कैलाश ने जेएनयू से सोशियोलौजी की पढ़ाई की थी और शायद इसीलिए वह अग्रवाल समाज के दूसरे नौजवानों से बिलकुल अलग था.
जहां दूसरे नौजवान बिजनैस, गलफ्रैंड, पूजापाठ, तीर्थों और लग्जरी लाइफ को प्राथमिकता देते थे, वहीं कैलाश को किताबों का शौक था. हालांकि वह बिजनैस में भी पूरी दिलचस्पी रखता था, लेकिन खाली समय में ज्यादातर वह किताबों में खोया रहता था.
दिल्ली के चांदनी चौक में आकाश और कैलाश के पिता दिवाकर अग्रवाल की मशहूर ज्वैलरी शौप थी. दिवाकर अग्रवाल पिछले 5 साल से अपने बिजनैस का सारा जिम्मा दोनों बेटों के कंधों पर डाल कर लगभग रिटायरमैंट की जिंदगी जी रहे थे. दोनों बेटों ने पिता के बिजनैस को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया था और चांदनी चौक के अलावा करोलबाग में भी ‘दिवाकर ज्वैलर्स’ की ब्रांच खोल ली थी.
दिवाकर अग्रवाल के बिजनैस में अभी तक कोई बंटवारा नहीं हुआ था. मकान अलगअलग जरूर थे, लेकिन बाकी सभी चीजें सा?ा थीं. दोनों भाइयों के पास अलगअलग कारें थीं और मांबाप की जिम्मेदारियां भी बंटी हुई थीं. बूढ़े मांबाप कुंआरे बेटे कैलाश के घर में रहते थे. कैलाश अपने मांबाप का बहुत खयाल रखता था.
दोनों भाइयों में कभी बिजनैस को ले कर कोई मनमुटाव नहीं हुआ था. चांदनी चौक और करोलबाग दोनों जगह अच्छीखासी सेल होती थी. चांदनी चौक वाली शौप पर बड़ा भाई आकाश बैठता था और कैलाश ज्यादातर समय करोलबाग वाली ब्रांच पर रहता था.
हालांकि कभीकभी जब आकाश बिजनैस के काम से बाहर होता तो कैलाश चांदनी चौक वाली शाखा पर भी बैठता था. स्टाफ से मिलता, उन की समस्याओं को सुनता, जरूरी इंस्ट्रक्शन देता और जरूरी होने पर अपने एम्प्लौयी की मदद भी करता.
इसी वजह से दोनों जगह के ज्यादातर वर्कर्स, सेल्स गर्ल्स और टीम के लोग कैलाश को बेहद पसंद करते थे. स्टाफ की नजर में बड़ा भाई आकाश मालिक था, लेकिन कैलाश मालिक से कहीं बढ़ कर था.
आकाश की पत्नी सौम्या बेहद खर्चीली थी. शौपिंग करना तो उस के डेली रूटीन का हिस्सा था. आएदिन घर में पार्टी रखती और अपनी अमीर फीमेल फ्रैंड्स को पार्टी में इनवाइट करती. देर रात तक शोरशराबे के बाद देर रात जा कर घर में शांति कायम हो पाती.
सौम्या की 9 साल की बेटी तृषा तो डिस्टर्ब होती ही आकाश भी रोजरोज के हंगामे से तंग आ चुका था. आकाश सौम्या को सम?ाने की कोशिश करता, लेकिन उसे कोई फर्क नहीं पड़ता.
एक दिन आकाश ने सौम्या से कहा, ‘‘देखो सौम्या, रात को मैं तो जैसेतैसे अपने कमरे में कान पर तकिया रख कर सो जाता हूं, लेकिन तृषा के बारे में तो सोचो. अगर तुम्हें रोज पार्टी कर के घर को नरक बनाना ही है तो तृषा को बोर्डिंग में भेज दो.’’
सौम्या ने आकाश की बात का जवाब देते हुए कहा, ‘‘तृषा मेरी बेटी है, उसे हाई क्लास में रहने की आदत बचपन से ही डालनी जरूरी है, लेकिन अब मैं भी नहीं चाहती कि वह इस घर में रहे, क्योंकि जब मैं घर पर नहीं रहती तो तृषा अपने दादादादी के पास चली जाती है जो कि मु?ो बिलकुल पसंद नहीं. अच्छा रहेगा कि वह बोर्डिंग में ही रहे.’’
सौम्या तो पहले से ही और आजादी चाहती थी. उस की आजादी में तृषा पहले से ही रुकावट बन रही थी. सौम्या को अपने सासससुर बिलकुल पसंद नहीं थे. एक ही सोसाइटी में रहने के कारण वे लोग सौम्या की जिंदगी में दखल डालते थे. घर आनाजाना होता था और कई बार उसे मुफ्त की सलाह दी जाती थी. यह मुफ्त की सलाह सौम्या को फूटी कौड़ी नहीं सुहाती थी.
जल्द ही तृषा एक महंगे बोर्डिंग स्कूल में पढ़ने चली गई. अब सौम्या बिलकुल आजाद थी. अब वह तृषा को स्कूल से लाने ले जाने और उस का खयाल रखने की जिम्मेदारी से छूट गई थी. पूरे दिन शौपिंग, पार्टी और मौजमस्ती के बाद जब शाम को सौम्या घर आती तब उसे खाना तैयार मिलता. घर में 3 नौकर थे जो गार्डन से ले कर किचन तक का सारा काम करते थे, फिर भी सौम्या अपने किसी नौकर से कभी खुश नहीं रहती थी और महीने 2 महीने पर नौकरों को बदलती रहती थी. कैलाश को अपनी भाभी की इन्हीं आदतों से चिढ़ थी, लेकिन वह कहता कुछ नहीं था, बस दूरी बना कर रखता था.
मांबाप और बड़ा भाई आकाश चाहते थे कि जल्द कैलाश को कोई लड़की पसंद आए और वह शादी कर ले. सौम्या ने अपने पति आकाश से कई बार अपनी अमीर सहेली प्रीति की बेटी सोनाक्षी से कैलाश की शादी की बात की, लेकिन हर बार आकाश ने साफ मना कर दिया. एक तो आकाश को सौम्या की कोई भी सहेली पसंद नहीं थी. जितने को वह जानता था सभी घमंडी और संवेदनहीन थीं. दूसरी बात यह कि आकाश अरेंज मैरिज के खिलाफ था. वह चाहता था कि उस का भाई अपनी पसंद से शादी करे.
कैलाश को कोई लड़की भाती ही नहीं थी. वह अमीर होने के बावजूद अमीरों के कल्चर से दूरी बना कर रखता था. अपने औफिस जा कर स्टाफ के साथ बैठ कर लंच कर लेता और वीकएंड पर किसी नाइट क्लब में जाने के बजाय अपने किसी दोस्त के साथ पहाड़ों पर घूमने निकल जाता.
कैलाश के ज्यादातर दोस्त तो उस के अपने वर्कर्स या मैनेजर्स ही थे. उस में ऊंचनीच का भाव बहुत कम था जो उस की सोशियोलौजी की पढ़ाई का नतीजा था.
कुछ दिनों से करोलबाग वाली ब्रांच पर एक लड़की की जरूरत थी. कैलाश ने क्वालिफिकेशन के साथ अखबार में विज्ञापन दिया. शनिवार को उस ने इंटरव्यू की तारीख रखी. काफी लड़कियां आई हुई थीं. खूबसूरत, बिंदास और एजुकेटेड. सभी इंटरव्यू के लिए ऐसे आई थीं जैसे किसी फंक्शन में पहुंची हो.
इन्हीं में से एक थी निर्मला. साधारण से सूटसलवार में वह अलग ही लग रही थी. उस ने नपेतुले शब्दों में हर सवाल का जबाब दिया. उस के 12वीं और बीए में मार्क्स बहुत अच्छे थे. आगे वह और पढ़ना चाहती थी, लेकिन घर के हालात ठीक नहीं थे, इसलिए उसे नौकरी की सख्त जरूरत थी.
कैलाश को निर्मला में न जाने क्या दिखा कि उस ने इंटरव्यू के बाद ही निर्मला को जौइनिंग लैटर थमा दिया और बोला, ‘‘निर्मला, तुम मंडे से जौइन र लेना.’’
निर्मला को तो यकीन ही नहीं हो रहा था. वह हैरान थी कि बीसियों लड़कियों में वह कैसे सिलैक्ट हो गई? उस ने कैलाश को ‘थैंक्स’ कहा और अपनी फाइल टेबल से उठाते हुए औफिस से बाहर निकल गई.
निर्मला के जाने के बाद काफी देर तक कैलाश निर्मला के डौक्यूमैंट्स पर नजरें गड़ाए बैठा रहा. वैसे तो निर्मला एससी परिवार से थी लेकिन कौन्फिडैंस, एजुकेशन और बरताव में काफी ऊपर के क्लास की थी. इंटरव्यू के लिए आई बाकी लड़कियों में नौकरी की जरूरत सब से ज्यादा निर्मला को ही थी, इसलिए कैलाश ने उसे चुना. बाकी लड़कियां तो बस शोरूम में बनठन कर स्मार्ट सेल्स गर्ल की नौकरी करना चाहती थीं.
निर्मला ने इंटरव्यू में आने से पहले ही न केवल कैलाश के शोरूम की जानकारी ले ली थी, उस ने गोल्ड की कैमिस्ट्री के बारे में भी पढ़ लिया था. कैलाश तभी इंप्रैस हुआ था कि निर्मला को तो कैरेट ही नहीं, गोल्ड में डाले जाने वाले कैमिकल्स के बारे में भी पता था.
कुछ ही दिनों में निर्मला ने करोलबाग ब्रांच में अपनी मेहनत, गोल्ड की समझ और बरताव की बदौलत अच्छी जगह बना ली. वह अकसर कैलाश से इजाजत ले कर कारीगरों की भट्ठी के सामने बैठने भी चली जाती. जब भी कैलाश औफिस आता, वह निर्मला से गोल्ड बिजनैस के साथ दूसरे विषयों पर भी ढेरों बातें करता. लंच के समय अकसर कैलाश का टिफिन पास के रैस्टोरैंट से असलम ले कर आता, जिसे कैलाश अपने केबिन में बैठ कर खाता.
एक दिन असलम टाइम पर लंच ले कर नहीं आया तो कैलाश औफिस से बाहर निकला. उस ने देखा कि निर्मला अपना लंच खोल कर बैठ चुकी थी. उस की मेज पर कैमिस्ट्री औफ गोल्ड और हिस्ट्री औफ गोल्ड की 2 मोटी किताबें भी रखी थीं.
कैलाश उन किताबों को देखने के लिए रुक गया और फिर कैलाश ने निर्मला की इजाजत के बिना ही उस के लंच बौक्स से एक रोटी उठाई और सब्जी के साथ खाना शुरू कर दिया.
असल में कैलाश को भूख तो लग रही थी और सब्जी की खुशबू इतनी जबरदस्त थी कि वह खुद को रोक नहीं पाया. यह निर्मला के लिए बेहद हैरान कर देने वाला पल था. सबकुछ अचानक हुआ था. उस ने कैलाश को आते हुए भी नहीं देखा था. वह अकेले ही खाना खाती थी. बाकी स्टाफ पीछे के कमरे में खाना खाता था.
निर्मला को ऐसा लगा जैसे निवाला उस के हलक में ही अटक गया हो. वह कुछ कह पाती इस से पहले ही कैलाश ने कहा, ‘‘वाह, क्या सब्जी है? तुम ने बनाई?’’
निर्मला ने कहा, ‘‘नहीं सर, मुझे सब्जी बनाने नहीं आती. घर में मेरा छोटा भाई है, फिलहाल खाना तो वही बनाता है.’’
कैलाश ने हैरानी जाहिर करते हुए कहा, ‘‘आप के भाई तो बेहतरीन शैफ हैं यार. इतनी अच्छी सब्जी बनाना उन्होंने कहां से सीखा?’’
निर्मला ने हलक में अटके हुए निवाले को पानी के गिलास के साथ निगल लिया और फिर गहरी सांस लेते हुए बोली, ‘‘सर, मेरे भाई को बचपन से ही कुकिंग का शौक है, उस ने ग्रेजुएशन कर लिया है, अब वह किसी इंस्टिट्यूट से कुकिंग का कोर्स करना चाहता है.
‘‘उसे शैफ बनना है, लेकिन वह अभी जानता नहीं है कि वह जिस कम्युनिटी से आता है, उस समाज के लोग शैफ नहीं बन सकते.’’
कैलाश ने कहा, ‘‘निर्मला, यह तुम से किस ने कह दिया कि दलित समाज के लोग शैफ नहीं बन सकते? जब एससी का बेटा देश का राष्ट्रपति बन सकता है, तो शैफ क्यों नहीं बन सकता? मैं जानता हूं कि समाज में हर लैवल पर जातिवाद होता है, लेकिन जातिवाद किसी के स्किल को नहीं हरा सकता.’’
कैलाश जाति व्यवस्था के सच को बेहद गहराई से समझता था. उसे पढ़ने का बेहद शौक था और जेएनयू की व्यवस्था ऐसी ही थी जिस के कारण वह समाज की इस कड़वी सच्चाई को बखूबी जानने लगा था. जाति व्यवस्था पर उस ने कई किताबें पढ़ी थीं और जेएनयू जैसे संस्थान में पढ़ने के दौरान कैलाश के करीबी दोस्तों में कई दलित और वामपंथी भी थे.
निर्मला की बात सुन कर कैलाश को समझते देर नहीं लगी. उस ने निर्मला से कहा, ‘‘अपने भाई से कहना कि इस शनिवार को वह मुझ से इसी औफिस में आ कर मिलें.’’
कैलाश ने निर्मला के छोटे भाई नवीन का एडमिशन हयात रैजिडैंसी में करवा दिया. 3 साल के कोर्स का सारा खर्च उस ने पहले ही इंस्टिट्यूट को अदा कर दिया. यह निर्मला और उस के भाई नवीन के लिए किसी सपने के पूरा होने जैसा था.
निर्मला की नजर में अब कैलाश सिर्फ बौस नहीं रह गया था. वह निर्मला के दिल में कहीं गहरी जगह बना चुका था.
धीरेधीरे एक साल बीत गया. इस बीच निर्मला ने जहांगीरपुरी की झुग्गियों को छोड़ कर करोलबाग के नजदीक की एक कालोनी में किराए पर फ्लैट ले लिया था. निर्मला के बूढ़े मांबाप अपनी बेटी की कामयाबी से बेहद खुश थे और निर्मला भी ‘दिवाकर ज्वैलर्स’ को ही अपनी जिंदगी मान बैठी थी.
एक साल में 2 बार निर्मला की सैलरी बढ़ी थी, क्योंकि वह पूरे करोलबाग की शौप पर सब से अच्छा काम कर रही थी. उस ने कारीगरों को नई मशीनें भी ले कर देने के लिए कैलाश को तैयार कर लिया. अब वे 8 कैरेट सोने के आभूषण बनाने लगे थे, जो सस्ते तो थे, मगर चमक असली जैसी ही थी. इस से करोलबाग शोरूम की सेल पहले से दोगुना हो गई थी.
निर्मला के टेबल पर आने वाले ज्यादातर ग्राहक कुछ न कुछ खरीद कर ही जाते थे. यह निर्मला की स्किल थी या उस के बरताव में ही ऐसा कुछ था कि कोई भी उस के आकर्षण से बच नहीं पाता था.
निर्मला के इस आकर्षण से ब्रांच का मालिक कैलाश ही नहीं बच पाया, तो ग्राहकों की बात ही क्या थी. वह हर ग्राहक को सोने की बारीकियों को बताती और ग्राहक सिर्फ जानकारी के कारण सही फैसले लेते.
करोलबाग शौप के मैनेजर समेत बाकी स्टाफ के लोग कही न कही निर्मला से जलन रखते थे, लेकिन वे लोग अपने बौस कैलाश से बेहद प्यार करते थे. स्टाफ को लगता था कि निर्मला जानबूझ कर कैलाश पर डोरे डाल रही है, लेकिन सच तो यह था कि कैलाश खुद ही निर्मला पर मरने लगा था.
रविवार की एक सुबह सौम्या ने अपने पति आकाश से कहा, ‘‘आकाश, आज मेरी सहेली प्रीति अपनी बेटी सोनाक्षी के साथ घर आ रही हैं. मैं चाहती हूं कि तुम मम्मीपापा को बुला लो और कैलाश को भी फोन कर दो, क्योंकि उस का आना ज्यादा जरूरी है.’’
आकाश को सौम्या की बात समझते देर नहीं लगी. वह सौम्या को अचरज से देखते हुए बोला, ‘‘सौम्या, तुम्हें पता है न कि कैलाश पर मैं शादी के लिए किसी तरह का दबाव नहीं बना सकता. तुम्हें प्रीति को इनवाइट करने से पहले एक बार मुझ से सलाह तो लेनी चाहिए थी न?’’
सौम्या ने कहा, ‘‘आकाश, तुम्हारा भाई कही न कहीं तो शादी करेगा ही न, अगर वह एक बार सोनाक्षी को देख लेगा तो झट शादी के लिए राजी हो जाएगा, यह मेरी गारंटी है.’’ न चाहते हुए भी आकाश को वह सब करना पड़ा जो वह कभी नहीं चाहता था.
दोपहर तक सौम्या के घर में कैलाश और उस के मम्मीपापा आ चुके थे. साथ ही प्रीति और उस के पति के साथ उन की बेटी सोनाक्षी भी आ चुकी थी. सभी ने साथ में लंच किया और काफी देर गपशप के बाद आखिरकार प्रीति के घर के लोग चले गए.
इस बीच कैलाश और सोनाक्षी के बीच कोई खास बातचीत नहीं हुई. कैलाश ने ही कोई इंट्रस्ट नहीं दिखाया और सोनाक्षी को देख कर भी ऐसा लगा जैसे वह भी बेमन से ही यहां आई हो.
प्रीति के परिवार के जाते ही सौम्या ने कैलाश से कहा, ‘‘कैलाश, कैसी लगी सोनाक्षी?’’
कैलाश ने अपनी भाभी की ओर मुसकराते हुए देखा और बोला, ‘‘बेहद अच्छी लड़की है वह भाभी. लेकिन शायद मैं सोनाक्षी के लायक नहीं हूं, इसलिए आप अब मेरी टैंशन लेना छोड़ दीजिए, क्योंकि मैं ने अपने लिए लड़की पसंद कर ली है.’’
कैलाश की यह बात सुन कर सौम्या के चेहरे की खुशी गायब हो गई. उस के सपने चकनाचूर हो गए. उस ने कैलाश से पूछा, ‘‘कौन है वह लड़की? क्या वह सोनाक्षी से ज्यादा खूबसूरत है?’’
कैलाश ने जवाब दिया, ‘‘भाभी, दुनिया का हर इनसान अलग होता है. किसी से किसी की तुलना नहीं हो सकती. सोनाक्षी अपनी जगह है. मैं ने जो लड़की पसंद की है, वह मेरी नजर में मेरे लिए सब से खूबसूरत है.’’
कैलाश के मुंह से इतना सुनते ही सौम्या का मूड पूरी तरह औफ हो गया. कैलाश के जाते ही उस ने सारा गुस्सा आकाश पर उतारा और पार्किंग से गाड़ी ले कर घर से निकल गई.
बहुत ज्यादा हंगामे और हफ्तों तक रूठारूठी के बाद दिवाकर अग्रवाल ने बिलकुल सादा माहौल में कैलाश ने निर्मला से शादी कर दी. हर तरफ इस शादी की चर्चा थी. कई लोगों का तो यह कहना था कि कैलाश ने करोड़ों के दहेज पर लात मार दी. किसी ऊंचे घर से लड़की लाया होता, तो वह कैलाश के स्टेटस पर फिट बैठती. ऐसे लोगों में ज्यादातर सौम्या के करीबी लोग थे.
सौम्या ने रिश्तेदारों और जानने वालों में कैलाश और निर्मला की शादी को ले कर तमाम तरह की अफवाहें फैलाई थीं, लेकिन इस से कैलाश को कोई फर्क नहीं पड़ा था.
सौम्या को निर्मला की जाति से दिक्कत थी और उस की जाति को ले कर भी उस ने रिश्तेदारों को भड़काया था, लेकिन असल में कैलाश के मम्मीपापा अपने बेटे के फैसले के साथ थे, चाहे मरे मन से ही, क्योंकि निर्मला अब तक एससी वाला रंगरूप छोड़ चुकी थी. वह इंटरव्यू के बाद से बिलकुल अलग लगती थी, लंबी, मसल्स वाली, सम?ादार, सैल्फ कौन्फिडैंट.
सौम्या की जलन बढ़ती चली गई. आखिरकार नौबत बंटवारे तक पहुंची. वैसे तो दोनों भाइयों के मकान और शौप अलगअलग थे. यह व्यवस्था दोनों के पिता दिवाकर अग्रवाल ने 5 साल पहले ही कर दी थी, लेकिन बिजनैस के बहुत से कामों में अभी भी दोनों की साझेदारी थी.
सौम्या ने इसी साझेदारी को खत्म करने के लिए घर में इतना ड्रामा शुरू किया कि आखिरकार दोनों भाइयों को कोर्ट में हलफनामा दे कर अपने अपने बिजनैस को अलगअलग करना पड़ा. अब चांदनी चौक की शौप पूरी तरह आकाश की थी और करोलबाग का शोरूम कैलाश के हिस्से में था.
इस बंटवारे से सौम्या बेहद खुश थी, क्योंकि चांदनी चौक की शौप दिवाकरजी की पुश्तैनी जमीन पर थी, जिस से उस शौप की कीमत करोड़ों में थी, वहीं करोलबाग का शोरूम किराए पर था. फिर भी इस बंटवारे के खिलाफ कैलाश और उस की पत्नी निर्मला ने कोई एतराज नहीं जताया. दोनों खुश थे और बंटवारे के बाद अपने बिजनैस की ग्रोथ में जीजान से जुट गए थे.
आकाश मन ही मन इस बंटवारे से खुश नहीं था, लेकिन सौम्या की वजह से उसे यह करना पड़ा. बंटवारे के बाद सौम्या के खर्चे भी बढ़ते जा रहे थे. बंटवारे के तुरंत बाद ही सौम्या ने नई गाड़ी खरीद ली, जिस की कीमत 50 लाख थी. हालांकि आकाश का बजट गड़बड़ा गया था, लेकिन वह घर में शांति बनाए रखने के नाम पर सौम्या की हर बात मानने को मजबूर था.
मई, 2026 में अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता से अपील की कि सोनाचांदी न खरीदें. इस अपील के बाद से दोनों भाइयों की सेल पर असर पड़ा. आकाश तो पहले से ही मुश्किलों में घिरा हुआ था, प्रधानमंत्री की इस अपील के बाद उसे गहरा धक्का लगा. चांदनी चौक की शौप से उस ने स्टाफ की छंटनी शुरू कर दी. 9 लोगों को नौकरी से निकाल दिया.
इधर करोलबाग में भी प्रधानमंत्री की अपील का गहरा असर पड़ा. ग्राहकों की तादाद 90 फीसदी तक घट गई. कैलाश को समझ नहीं आ रहा था कि ऐसे हालात का मुकाबला कैसे करें? घर पर कैलाश के पिता कि तबीयत भी बिगड़ने लगी. इस वजह से कैलाश को पूरे दिन हौस्पिटल के चक्कर काटने पड़ते, इसलिए उस ने शोरूम पर जाना कम कर दिया.
निर्मला अपनी कार से शोरूम जाती और पूरे दिन काम करने के बाद घर आती. यह कार उसे कैलाश ने ही शादी पर गिफ्ट की थी. निर्मला ने जल्द ही इस घाटे से निबटने का हल निकाल लिया.
निर्मला ने अपनी कार बेच दी और इन पैसों से कई तरह की नई स्कीमें निकालीं. पुराने कस्टमर्स से कौन्टैक्ट कर उन्हें नई स्कीमों के बारे में और नई टैक्नोलौजी के इस्तेमाल को समझा ने के लिए स्टाफ की कई लड़कियों को काम पर लगाया.
निर्मला ने अपने बिजनैस के प्रचार के लिए सोशल मीडिया का जम कर इस्तेमाल किया. स्टाफ के बाकी लोगों को भी उस ने शोरूम के प्रचार और नई स्कीमों को समझाने में लगा दिया. वह 16-16 घंटे शोरूम में या कारीगरों के पास रहती.
रिजल्ट सामने था. धीरेधीरे हालात बदलने लगे. ग्राहकों का भरोसा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुका था. इस में पूरी मेहनत निर्मला की थी. बिजनैस की गाड़ी पटरी पर आना शुरू हो गई. कैलाश बेहद खुश था. उसे निर्मला पर गर्व था और यह गर्व मुसीबत के समय निर्मला के जूनून को देख कर कई गुना बढ़ गया था. निर्मला की यह लगन देख कर वे तमाम रिश्तेदार सदमे में पहुंच गए थे जो कभी निर्मला के बारे में गलत सोच रखते थे.
इधर आकाश का बिजनैस पूरी तरह चौपट हो चुका था. घर में क्लेश बढ़ चुके थे. आकाश अपनी बेटी तृषा के बोर्डिंग की फीस तक नहीं भर पा रहा था. निर्मला को अपने जेठ और जेठानी के हालात का पता था. उस ने तृषा का एडमिशन नजदीक के सब से अच्छे प्राइवेट स्कूल में करवा दिया और उस की फीस की जिम्मेदारी उठा ली.
सौम्या का सारा घमंड टूट चुका था. बिजनैस घाटे में था. कर्ज का भार बढ़ रहा था जिस की वजह से आकाश को अपनी तीनों कारें बेचनी पड़ी थीं. अब सौम्या की शौपिंग के लिए भागदौड़ भी खत्म हो चुकी थी.
यह निर्मला जैसी गरीब घर की लड़की की काबिलीयत थी जो उस ने बुरे समय में भी समझदारी से काम लिया और यह कैलाश की समझदारी थी जो उस ने निर्मला पर भरोसा किया. कैलाश की किताबों से दोस्ती के चलते ही उस ने निर्मला को पहचानने में देर नहीं की और एक निचली जाति की लड़की को अपना लाइफ पार्टनर बनाया जो अब अपने स्किल और हुनर की बदौलत कैलाश की बिजनैस पार्टनर भी बन चुकी थी. Hindi Social Story




