Hindi Fiction Story. पसीने में डूबी हुई रेहाना ने घड़ी पर नजर डाली, तो देखा कि दोपहर के 3 बज रहे थे. अभी तो सिर्फ रसोईघर का काम निबटा था. उसे नहाधो कर जमाल की बीवी को देखने अस्पताल भी जाना था. उस ने एक बेटी को जन्म दिया था. अस्पताल से वापसी पर केक भी खरीदना था.
आज रेहाना और सलमान की शादी की 7वीं सालगिरह जो थी.
रेहाना अपनेआप को खुशनसीब मानती थी. उस की घर में बहुत इज्जत थी. 2 भाइयों सलमान और जमाल का यह घर मुहब्बत पर टिका था. दोनों भाइयों में बेहद लगाव था. जमाल की दुलहन रानी को रेहाना बहिन की तरह चाहती थी और रानी भी उस की हर बात मानती थी.
इस तरह की और वीडियो देखने के लिए सरस सलिल का चैनल सब्सक्राइब करें
जमाल दवा की एक कंपनी में एरिया मैनेजर था, तो सलमान एक बैंक में मैनेजर था. घर में किसी चीज की कमी नहीं थी. अगर कमी थी तो बस इतनी कि शादी के 7 साल बाद भी रेहाना और सलमान को औलाद का सुख नहीं था. वैसे बड़े से बड़े डाक्टर के मुताबिक दोनों में कोई कमी नहीं थी, पर शायद कुदरत को ही उन का मांबाप बनना मंजूर नहीं था.
घर के सूनेपन को जमाल के 4 बेटों ने दूर कर दिया था. शादी के 5 सालों में हर साल रानी और जमाल ने इस घर को एक फूल से सजाया था. शायद बेटी की तमन्ना में 4 बेटे हो गए थे. अब कुदरत ने उन्हें एक बेटी दे दी थी.
रेहाना जमाल के बच्चों को ही अपने बच्चे मानती थी. वह रानी से ज्यादा उन का खयाल रखती थी, लेकिन अपना बच्चा न होने की कसक उसे अकसर रुला देती थी.
कल रात रानी को ले कर रेहाना अस्पताल गई थी. रातभर उस के साथ जागती रही. सुबह के वक्त रानी ने एक बच्ची को जन्म दिया. जब दोनों मांबेटी सो गईं, तब डाक्टरों से इजाजत ले कर वह घर लौटी थी.
रेहाना ने तौलिया उठाया और झट से बाथरूम में घुस गई. ठंडे पानी से नहाने के बाद उस की तबीयत काफी हद तक तरोताजा हो चुकी थी. बालों को पोंछती हुई वह ड्रैसिंग टेबिल के सामने आ कर खड़ी हुई.
अपनी और सलमान की शादी की तसवीर देख कर उस का जेहन भटकने लगा. दोनों को कुदरत ने फुरसत से बनाया था. सलमान अगर मर्दाना खूबसूरती का बेहतरीन नमूना थे, तो वह भी किसी परी से कम नहीं थी. कालेज में उसे हर साल ‘मिस कालेज’ का खिताब मिलता था.
क्या वक्त इसी तरह गुजर जाएगा और रेहाना की कोख सूनी रह जाएगी? क्या सलमान इस बात को हमेशा बरदाश्त कर पाएंगे? वे उसे छोड़ तो नहीं देंगे? इन सारे सवालों के जवाब वह अपनेआप में ढूंढ़ने लगी.
रेहाना ने बड़े गौर से अपने चेहरे को देखा, बड़ीबड़ी ?ाल जैसी आंखें, नाजुक से होंठ, सुर्ख सफेद गालों के बीच तीखी नाक. ऐसा हसीन चेहरा, जिसे देख कर किसी के भी कदम बहक जाएं.
अपने हुस्न पर खुद नजर लगाते हुए रेहाना ने अपने गाउन की डोरी खोल दी. अपने जिस्म को देख कर वह खुद ही शरमा गई. ऐसा लग ही नहीं रहा था कि किसी शादीशुदा औरत का बदन है. किसी अनछुई तरोताजा कली की तरह आज भी वह जवान थी.
‘‘क्या भाभी, आप अस्पताल…’’ कमरे में एकदम से दाखिल होते हुए जमाल के मुंह में ताला लग गया. ड्रैसिंग टेबिल के आईने में भाभी का अक्स उसे पागल कर देने के लिए काफी था.
इस से पहले कि रेहाना अपने गाउन की डोरी बांधती, जमाल उसे अपनी बांहों में भर चुका था, ‘‘भाभी, तुम कितनी हसीन हो… मैं ने आज तक इतनी खूबसूरती नहीं देखी.’’
रेहाना के होश जब तक काबू में आते, तब तक जमाल ने उसे करीब पड़े हुए बिस्तर पर लिटा दिया.
रेहाना ने अपने को आजाद कराने के लिए जमाल पर मुक्कों की बारिश कर दी. लेकिन इस वक्त जमाल उस के जिस्म को देख कर पागल हुआ जा रहा था और रेहाना के घूंसों के जवाब में उसे बेतहाशा चूम रहा था.
रेहाना के जेहन में अचानक यह खयाल आया कि जमाल उसे एक बच्चा दे सकता है और उस की सूनी जिंदगी में बहार आ सकती है. इस खयाल के आते ही वही हाथ जो अब तक जमाल पर मुक्के बरसा रहे थे, उस की कमर के इर्दगिर्द हलका सा गोला बन गए और वह बेसुध हो गई.
थोड़ी देर बाद जब जमाल की मोटरसाइकिल की आवाज दूर जाने लगी, तब वह उठी और फिर बाथरूम में चली गई.
बच्चे की उम्मीद ने जहां उसे बहुत सारी खुशियां दी थीं, वहीं उसे गुनाह का एहसास भी था. वह अपनेआप को समझाती रही कि इस में उस का क्या कुसूर है. उस ने जमाल को दावत तो नहीं दी थी. उस ने तो कभी जमाल को गलत निगाह से देखा भी नहीं था, जो कुछ हुआ सब अचानक हो गया.
अपने गुनाह के बोझ को कम करने के लिए रेहाना उस रात सलमान के साथ इस तरह पेश आई, जैसे जिंदगी में पहली बार वह उसे मिला हो.
आज ही सब्सक्राइब करें सरिता
आपके लिए स्पेशल छूट

सलमान उस की गर्मजोशी पर हैरान थे. उन्होंने उसे बांहों में भर कर पूछा, ‘‘आज जान लेने का इरादा है क्या?’’
ठीक 9 महीने के बाद रेहाना ने एक चांद सी बेटी को जन्म दिया. सारे घर में खुशियां थीं. सलमान के लिए तो जैसे ईद आ गई. एक लंबे अरसे के बाद अपनी औलाद जो हुई थी. लेकिन रेहाना उस तरह खुश न हो सकी, जिस तरह दूसरे खुश थे. बच्ची पर नजर पड़ते ही उसे सालगिरह वाली रात के बजाय दोपहर याद आ जाती.
वक्त गुजरता गया, रेहाना की बेटी चांदनी भी बड़ी होती गई. गोरेचिट्टे मांबाप की बेटी न जाने कहां से सांवला रंग ले आई थी. उस की आंखें तो बिलकुल जमाल जैसी थीं.
जमाल के बड़े बेटे फराज और चांदनी में दिनबदिन बढ़ती मुहब्बत ने रेहाना को बेचैन कर दिया था. एक बाप की 2 औलादों के बीच किस तरह शादी हो सकती थी? रेहाना ने कई बार चांदनी और फराज को समझाया, मगर दोनों ने अनदेखी की.
रेहाना को कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था. क्या उसे अपने बच्चों के सामने अपने अतीत को नंगा करना होगा या वह अपना वजूद ही खत्म कर ले. यही सब सोचती हुई वह जमाल के कमरे तक आ गई.
आज 20 साल बाद वह जमाल के कमरे में दाखिल हुई थी. उस घटना के बाद से दोनों के बीच में इतनी दूरी हो गई थी कि वे सिर्फ जरूरत पड़ने पर ही बात करते थे.
जमाल की बीवी रानी का 4 साल पहले इंतकाल हो गया था. रेहाना को देख कर जमाल ने पूछा, ‘‘क्या भाभी, खैरियत तो है न? इतनी रात को?’’
‘‘हां, 20 साल पहले हमारे बीच जो हुआ था, मैं उसे याद दिलाने आई हूं. क्या गुनाह का एक सिलसिला हमेशा चलता रहेगा?’’ रेहाना ने जमाल से नजरें चुराते हुए कहा.
‘‘मैं समझा नहीं, आप क्या कह रही हैं? वैसे उस हादसे के लिए मैं अभी तक शर्मिंदा हूं,’’ जमाल ने अपनी सफाई पेश की.
‘‘तुम्हारी शर्मिंदगी से कोई फायदा नहीं होगा. अब यह सोचो कि आगे शर्मिंदगी न उठानी पड़े.’’
जमाल ने रेहाना से पूछा, ‘‘आप कहना क्या चाहती हैं?’’
‘‘बस इतना कि फराज तुम्हारा बेटा है और चांदनी भी तुम्हारी औलाद है. दोनों की शादी कैसे हो सकती है?’’ रेहाना ने हकलाते हुए बात पूरी कर दी.
जमाल ने बड़े सुकून से कहा, ‘‘आप का खयाल गलत है. चांदनी मेरी बेटी नहीं है.’’
‘‘यह कैसे कह रहे हो कि चांदनी तुम्हारी बेटी नहीं है. अगर तुम्हें वह दोपहर याद नहीं, तो चांदनी के चेहरे को देखो, हुबहू तुम्हारे जैसी है. उस की आदतें, उस का अंदाज सब तुम्हारे जैसा है.’’
‘‘यह सच है कि चांदनी को देख कर कोई भी कह देगा कि वह मेरी कार्बन कौपी है, फिर भी वह मेरा खून नहीं है,’’ जमाल ने इतमीनान से कहा.
‘‘तुम कहना क्या चाह रहे हो?’’ रेहाना झुंझला गई.
‘‘यही कि 20 साल पहले आप की इज्जत से खेलने का गुनाह मैं ने जरूर किया था, जिस के लिए मैं सारी उम्र शर्मिंदा रहूंगा. हो सके, तो मुझे माफ कर दीजिएगा.
‘‘रही बात चांदनी की, तो उस वक्त बच्चे पैदा करने की मेरी ताकत खत्म हो चुकी थी. अपनी बेटी शाजिया की पैदाइश से 6 महीने पहले ही मैं ने औपरेशन करा लिया था. चूंकि रानी का 3 बार सीजेरियन हो चुका था, इसलिए आगे बच्चे पैदा न करने के लिए मुझे अपना औपरेशन कराना पड़ा था.’’
जमाल ने सुबूत के तौर पर अपनी मेज की दराज से अस्पताल का सर्टिफिकेट निकाल कर रेहाना को दिखाया.
जमाल ने सर्टिफिकेट क्या दिखाया, रेहाना को जैसे राहत मिल गई. 20 साल से वह जिस परेशानी से गुजर रही थी, वह पलभर में दूर हो गई.
रेहाना तेज कदमों से चलते हुए चांदनी के कमरे में आई, जहां वह हर उलझन से दूर बेखबर सो रही थी. रेहाना उसे बेइंतिहा चूमने लगी. Hindi Fiction Story




