Hindi Love Crime Story. ‘‘अरे, मुझे दुकान जाने में देर हो रही है. खाना तैयार हुआ कि नहीं?’’ रमेश की बात का कोई जवाब उन की पत्नी लीला दे पातीं, इस से पहले ही फोन जोर से घनघनाया. फोन पर बात करती लीला को बीच में टोकने के लिए जैसे ही रमेश उन के पास पहुंचे, तो उन के चेहरे पर आनेजाने वाले भावों को देख कर चुप हो गए. लीला के चेहरे पर घबराहट साफ दिख रही थी.
फोन रख माथे पर आई पसीने की बूंदों को अपने पल्लू से पोंछते हुए लीला बोलीं, ‘‘सुनते हो, गजब हो गया. बड़ी भाभी का फोन था. वे कह रही थीं कि हमारी बेटी किसी यादव के लड़के के साथ घूम रही है. वह जो गांव के बाहर पुराना शिव मंदिर है न, उस के पंडित ने उन्हें कई बार साथ देखा है.’’
‘‘यह तुम क्या कह रही हो लीला? ऐसा कैसे हो सकता है? हमारी बेटी ऐसा कैसे कर सकती है?’’ रमेश को अभी भी यकीन नहीं हो रहा था.
‘‘भला, बड़ी भाभी झठ क्यों बोलेंगी? उन की हम से कोई दुश्मनी थोड़े ही है,’’ लीला का सब्र जवाब दे रहा था.
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‘‘तुम्हारी लाड़ली है कहां… बुलाओ उसे. अभी सब साफ हो जाएगा. हमारे संस्कारों की इस तरह कैसे वह धज्जियां उड़ा सकती है,’’ रमेश किसी चोट खाए सांप की तरह फुफकार रहे थे.
‘‘वह क्या घर में है, जो उसे बुलाऊं. कब की कालेज जा चुकी है. कह रही थी कि आजकल किसी समारोह की तैयारी चल रही है, इसलिए रोज सुबह जल्दी जा रही है और रात को भी देर से आती है.’’
लीला की यह बात सुन कर रमेश और भड़क उठे, ‘‘यानी कालेज जाने के नाम पर गुलछर्रे उड़ा रही है. बात और फैले, उस से पहले ही उस का घर से निकलना बंद कर दो. मैं जल्दी ही कोई अपनी बिरादरी का लड़का देख कर उस की शादी तय कर देता हूं.’’
अपने कागज संभालते हुए रमेश बिना खाना लिए ही दुकान के लिए निकल गए. बेटा अभी तैयार हो रहा था. रोज की तरह उस के लिए भी नहीं ठहरे.
लीला काफी देर तक अपना सिर पकड़े यों ही बैठी रहीं.
‘‘क्या बात है अम्मां, ऐसे क्यों बैठी हो?’’ महेश ने पूछा. उस के पीछे बहू भी खाने का डब्बा थामे खड़ी थी.
‘‘अम्मां, बाऊजी आज इन के लिए ठहरे नहीं? क्या कहीं और जाना था उन्हें?’’ बहू ने पूछा, तो लीला की आंखों से आंसुओं की धार बह निकली.
‘‘अब क्या बताऊं तुम दोनों को. आभा ने हमारे मुंह पर कालिख पोत दी है. वह किसी जोगिंदर नाम के यादव के लड़के से मिलतीजुलती है. तुम्हारी ताई का फोन आया था. वे बता रही थीं कि पुराने शिव मंदिर का पंडित यह बात सब से कहता फिर रहा है और उस ने तो पंचायत बुलाने की भी धमकी दी है?’’
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यह सुनते ही महेश एकदम भड़क उठा, ‘‘काट दूंगा उस यादव के बच्चे को. मेरी बहिन की ओर आंख उठा कर देखने की उस की हिम्मत भी कैसे हुई. लगता है, वह अपनी औकात भूल गया है. तुम तो बस आभा को समझाओ. वह अभी नादान है, जरूर यादव के लड़के ने उसे बरगलाया होगा.’’
महेश तो बौखलाता हुआ दुकान के लिए निकल गया, पर घर में तो जैसे मातम छा गया था. इस बीच बड़ी भाभी का फोन फिर आया था. वे बता रही थीं कि उन के पड़ोस में रहने वाली श्यामा काकी को पंडित मिला था और कह रहा था कि आभा और जोगिंदर तो घर से भाग कर शादी करने का प्रोग्राम बना रहे हैं.
यह सुन कर लीला और परेशान हो गई थीं.
शाम को जब आभा घर लौटी, तो घर के माहौल में हुए बदलाव को उस ने साफ महसूस किया.
‘‘आ गई गुलछर्रे उड़ा कर. अपने मांबाप की इज्जत दांव पर लगाते तुझे शर्म नहीं आई. क्या इसी दिन के लिए तुझे पालपोस कर बड़ा किया था,’’ लीला आभा के सामने तन कर खड़ी हो गई थीं.
‘‘अब आप को पता लग ही गया है, तो अच्छा ही है. वैसे भी कुछ दिनों बाद मैं आप को बताने वाली थी. जोगिंदर अच्छा लड़का है, पढ़ालिखा है, अच्छा कमाता है. हमारी बिरादरी वालों की तरह आप को दहेज भी नहीं जुटाना पड़ेगा. उसे कुछ नहीं चाहिए.
‘‘वैसे भी शहर में उस की नौकरी लग गई है, हम शादी कर के वहीं चले जाएंगे. इस में आप की नाक कैसे कट गई?’’ आभा का बेबाक जवाब सुन कर सासबहू के सीने पर सांप लोटने लगे.
‘‘और अम्मां, साफ सुन लो, हम कोई गुलछर्रे उड़ाने कहीं नहीं जाते हैं. किस ने कह दिया तुम्हें कि हम गांव के बाहर कहीं जाते हैं. हम दोनों एकदूसरे को चाहते हैं, यह सच है,्र पर अभी मेरा सारा ध्यान पढ़ाई पर है.’’
‘‘बस बहुत हो गई तेरी पढ़ाई. आज से तेरा घर से निकलना बंद. तेरे बाऊजी का हुक्म है यह. और सुन ले, जल्दी ही अपनी बिरादरी के लड़के से हम तेरी शादी कर देंगे. उस जोगिंदर की बात भी मन से निकाल दे. तुम दोनों की शादी नहीं हो सकती,’’ लीला की आवाज में इस बार थोड़ी नरमी थी. वे चाहती थीं कि बात बिना बिगड़े सुलझ जाए. आभा ने खुद को कमरे में बंद कर लिया.
आभा का घर से निकलना बंद हो गया था. रमेश और महेश लगातार जोगिंदर को धमका रहे थे कि वह गांव छोड़ कर चला जाए.
बड़ी भाभी जब लीला से मिलने आईं, तो उन्होंने कहा कि पंडित ने उन्हें आभा के लिए अपनी बिरादरी का एक लड़का सुझाया है. ज्यादा पढ़ालिखा तो नहीं है, लेकिन बात फैले, उस से पहले उसी से आभा को बांध देना ठीक रहेगा.
अपनी बेटी को यों ही किसी के साथ ब्याह देने की बात हालांकि लीला को पसंद नहीं आई, पर जेठानी के सामने वे चुप ही रहीं.
आभा ने जिद पकड़ ली थी कि वह अगर शादी करेगी तो सिर्फ जोगिंदर से, वरना अपनी जान दे देगी.
जोगिंदर पर भी लगातार दबाव बढ़ रहा था और उस के परिवार वाले भी उसे समझा रहे थे कि वह यह बेवकूफी न करे, पर दोनों मानने को तैयार नहीं थे.
समाज की खोखली परंपराओं और धर्म के नाम पर फैलाए जाने वाले जातिवाद के दोनों ही पक्ष में नहीं थे.
2 दिन बाद एक खेत में दोनों की लाशें मिलीं. सब कह रहे थे कि उन्होंने आत्महत्या कर ली, पर आसपास कहीं सुसाइड नोट नहीं मिला था.
आभा के सिर पर गोली लगी थी और जोगिंदर की कनपटी पर. खबर सुनते ही बड़ी भाभी दौड़ी चली आईं.
‘‘लीला, वह पंडित कह रहा था कि जोगिंदर ने पहले आभा को गोली मारी और फिर अपनी जान ले ली. वे दोनों शायद भागने की तैयारी कर रहे थे, पर किसी ने उन्हें देख लिया था.’’
अपनी बेटी की मौत की खबर से दुखी लीला को समझ नहीं आ रहा था कि वे अपने दुख में रोएं या घर की इज्जत बच जाने पर राहत की सांस लें. क्या हो जाता, अगर जोगिंदर से आभा की शादी की सब मंजूरी दे देते. वे जोरजोर से रोने लगीं.
लीला इस बात को कैसे किसी को बतातीं कि जिसे लोग आत्महत्या समझ रहे हैं, वह हकीकत में हत्या है. समाज में अपनी इज्जत बचाने और यह साबित करने के लिए हत्या की गई कि धर्म के साथ खिलवाड़ कभी नहीं हो सकता.
तभी बगल वाली रमा चाची उन के कंधे थपथपाते हुए बोलीं, ‘‘दुख न कर लीला, कल ही मैं ने एक चैनल पर सुना था कि बाबा अमृतानंदजी प्रवचन देते हुए कह रहे थे कि मृत्यु का क्या शोक मनाना. जो आया है, वह जाएगा भी.’’
लीला को लगा कि उन के भीतर की फांस की चुभन बढ़ती ही जा रही है. Hindi Love Crime Story




