Hindi Story. राजन ने दोपहर का खाना खाया और कुछ देर आराम करने के लिए बिस्तर पर लेट गया. तभी मोबाइल फोन की घंटी बज उठी. उस ने देखा कि पत्नी कमला की वीडियो काल थी. उस ने पूछा, ‘‘कमला, कैसी हो?’’
‘‘मैं तो ठीक हूं, लेकिन…’’ उधर से कमला की आवाज आई. ‘‘लेकिन क्या?’’ ‘‘राजू को चोट लग गई है सिर में.’’ ‘‘चोट लग गई राजू को, पर कैसे?’’
‘‘कुछ देर पहले बाहर टौफी लेने गया था, तभी एक बाइक वाले ने टक्कर मार दी और भाग गया. राजू सड़क पर गिर पड़ा.’’ ‘‘फिर?’’ राजन की आवाज में डर शामिल था.
‘‘कसबे में ही रहने वाले मनोज ने उसे उठाया और डाक्टर के पास ले जा कर पट्टी करा दी.’’ ‘‘ज्यादा चोट तो नहीं लगी राजू को? मुझे आना है क्या?’’
‘‘नहीं, तुम क्या करोगे आ कर. चोट भी मामूली है, माथे पर. अब राजू सो रहा है. मनोज ही राजू को यहां पर छोड़ कर गया है.’’
‘‘बहुत अच्छा आदमी है. जब वह आया तो तुम ने उसे चायवाय भी पिला दी थी न?’’ ‘‘हां, पिला दी थी.’’
‘‘ठीक है…’’ राजन ने कहा, ‘‘और सुना क्या हाल है?’’ ‘‘मुझे बहुत याद आती है तुम्हारी. कभीकभी तो रात को नींद भी नहीं आती अकेले में,’’ कमला ने कहा.
‘‘कमला, मैं सोचता हूं कि तुम्हें और राजू को यहां अपने पास ही लुधियाना बुला लूं. लेकिन यहां महंगाई बहुत है. मैं इतनी दूर यहां फैक्टरी में काम करने आया हूं. अब तो कुछ बचत भी हो रही है, फिर बचेगा ही क्या? मैं 2 महीने बाद आऊंगा.’’ ‘‘ठीक है,’’ कमला बोली.
‘‘राजू का और अपना ध्यान रखना,’’ राजन ने कहा. ‘‘तुम भी अपनी सेहत का ध्यान रखना,’’ कमला बोली.
‘‘हांहां, क्यों नहीं डार्लिंग.’’ ‘‘ओके माई डियर,’’ कमला ने कहा और हंसते हुए वीडियो काल बंद कर दी.
राजन ने मोबाइल बंद किया और आंखें बंद कर के लेटा रहा.
राजन आगरा के निकट एक कसबे का रहने वाला था. परिवार में मातापिता थे. पिता आगरा के एक कारखाने में मजदूरी करते थे. जब वह जवान हुआ तो उस की शादी कमला से करा दी गई. सांवले रंग की तीखे नैननक्श वाली कमला उस के मन को खूब भा गई थी. एक दिन एक बस दुर्घटना में राजन मां और पिता दोनों की मौत हो गई थी.
2 साल बाद एक बेटे का जन्म हुआ, जिस का नाम राजकुमार रखा, लेकिन प्यार से राजू कहा जाने लगा.
उस कसबे के कुछ नौजवान लुधियाना, पंजाब में हौजरी फैक्टरी में नौकरी करते थे. तनख्वाह भी अच्छी मिलती थी. 2 साथियों ने कहा तो राजन भी लुधियाना चला आया था.
उसे एक फैक्टरी में काम मिल गया था. जब कभी मन करता राजन कमला को काल या वीडियो काल कर लेता. कभी कमला की काल भी आ जाती.
राजन को यहां काम करते हुए 3 साल हो गए थे. 2-3 महीने में वह कमला से मिलने चला जाता था. अब तो राजू 5 साल का हो गया था. स्कूल जाने लगा था… इन विचारों में डूबतेतैरते राजन को नींद आ गई.
एक दिन कमला कुछ जरूरी सामान खरीदने के लिए आगरा गई. साथ में राजू भी था. तभी बाजार में कमला की नजर मनोज पर पड़ी, तो वह मुसकरा उठी.
‘‘कैसे हो राजू बेटे?’’ मनोज ने राजू की तरफ देख कर पूछा. ‘‘मैं ठीक हूं अंकल,’’ राजू बोला. ‘‘तुम आगरा कब आई?’’ मनोज ने कमला से पूछा. ‘‘एक घंटा पहले. कुछ जरूरी सामान खरीदना था.’’
‘‘उस दिन के बाद तुम से और राजू से मुलाकात ही नहीं हुई. समय नहीं मिला. अब कैसा है राजू बेटा?’’ ‘‘बिलकुल ठीक है.’’ ‘‘आओ, किसी ढाबे में चलते हैं. कुछ ठंडा पी लो. राजू से कुछ बातें भी हो जाएंगी,’’ मनोज बोला.
कमला जानती थी कि मनोज राजू से नहीं, बल्कि उस से बात करना चाहता था. मनोज के चेहरे में पता नहीं कौन सा आकर्षण था कि कमला मना नहीं कर पाई.
मनोज उन दोनों को एक ढाबे में ले गया. कुछ देर बाद वे बाहर आए. मनोज ने एक दुकान से राजू को कुछ खिलौने ले कर दे दिए. राजू बहुत खुश हो गया.
कमला मनोज से बात करते हुए जान चुकी थी कि मनोज अकेला रहता है. उस की शादी हुई थी लेकिन पत्नी की पहली डिलीवरी में ही मौत हो गई थी. बच्चा भी नहीं बच पाया था. वह किसी प्राइवेट कंपनी में जौब करता है. वह दिन कमला और राजू के लिए अच्छा बीता.
कुछ दिन वह कमला के फोन की घंटी बजी. देखा तो मनोज का फोन था. वह राजू से मिलने को आने के लिए कह रहा था. कमला मन ही मन मुसकरा कर रह गई. वह जानती थी कि राजू तो एक बहाना है मनोज उस से मिलने आ रहा है. उस ने खुश हो कर हां कर दी.
मनोज कुछ फल व मिठाई ले कर आया था. जब कमला ने टोका तो वह बोल उठा, ‘‘राजू से मिलने क्या खाली हाथ आता?’’
राजू भी खुश हो कर बोला, ‘‘अंकल, आप कितने अच्छे हैं.’’ ‘‘सच में?’’ मनोज ने पूछा. ‘‘हां अंकल, बहुत अच्छे हैं आप.’’ राजू खिलौनों से खेलने लगा और मनोज कमला से बातें करने लगा.
जाते हुए मनोज ने कहा, ‘‘कमला, तुम किसी तरह की चिंता न करना. कभी कुछ भी जरूरत हो मु?ो बता देना.’’
उस के बाद मनोज कभी आ जाता. दिन हो या रात उस के लिए कमला के दिल के दरवाजे भी खुल गए. रात को रोजाना मैसेंजर पर या व्हाट्सऐप पर चैटिंग करते. काल या वीडियो काल भी करते.
धीरेधीरे कमला ने सारी सीमाएं पार कर मनोज को वह सब दे दिया था, जिस पर केवल राजन का हक था.
कमला को भी लगने लगा था कि वह मनोज के बिना नहीं रह पाएगी. उसे राजन एक पति के रूप में बोझ सा लगने लगा. वह राजन से छुटकारा पाने के लिए सोचने लगी.
एक दिन मनोज ने कमला से कहा, ‘‘कमला, अब मैं तुम्हारे बिना रह नहीं सकता.’’ ‘‘मेरा भी यही हाल है. तुम मेरा कितना ध्यान रखते हो मनोज.’’
‘‘मैं तुम्हें हमेशा के लिए अपनी बनाना चाहता हूं.’’ ‘‘लेकिन कैसे? राजन हम दोनों के बीच दीवार है.’’
‘‘चिंता न करो. इस दीवार को हटा दें और किसी को पता भी नहीं चले.’’ ‘‘मैं हर तरह से तुम्हारे साथ हूं,’’ कमला का जवाब था.
एक शाम कमला के फोन की घंटी बजी. कमला ने देखा फोन राजन का था.
वह बोली, ‘हैलो, कैसे हो?’’ ‘‘यह मनोज कौन है?’’ उधर से राजन की आवाज सुनाई दी.
‘‘मनोज… यह मनोज तो वही है जिस ने राजू के सिर पर चोट लगने पर पट्टी कराई थी.’’ ‘‘तो क्या अभी तक राजू का इलाज चल रहा है?’’ ‘‘नहीं, अब तो राजू ठीक है.’’
‘‘देख कमला, मुझे सब पता चल चुका है तेरी और उस की हरकतों का. राजू को पट्टी कराने की कीमत वह तुझ से वसूल कर रहा है.’’
कमला चुप रही. वह समझ गई कि किसी ने फोन कर के राजन को सब बता दिया है. चलो, कोई बात नहीं, एक न एक दिन तो पता चलना ही था.
‘‘बोल अब चुप क्यों है? मुझे तुझ से ऐसी उम्मीद नहीं थी कमला. तू ने मुझे धोखा दिया है. मैं यहां अकेला मेहनतमजदूरी कर रहा हूं और तू अपने यार के साथ रंगरेलियां मना रही है.’’ ‘‘और क्या पता तू भी वहां रंगरेलियां मनाता हो,’’ कमला ने भी पलट कर जवाब दिया.
‘‘मुझ से जबान लड़ाती है. मैं कल ही आ रहा हूं. तुझे और तेरे उस यार को देखूंगा.’’ ‘‘हां, देख लेना. मेरे और मनोज के बीच में कुछ नहीं है,’’ कमला ने कहा और फोन बंद कर दिया.
अगले दिन राजन के फोन की घंटी बजी. उस ने फोन उठा कर कहा, ‘‘हैलो.’’ ‘‘मैं मनोज बोल रहा हूं,’’ उधर से मनोज की आवाज सुनाई दी.
‘‘क्या कहना है? मेरी कमला को अपने जाल में फंसा कर मेरा घर बरबाद करने वाले तू क्या चाहता है?’’ ‘‘मैं बस कमला को सहारा दे रहा हूं. मेरा उस से कोई खराब रिश्ता नहीं है. वह तेरी पत्नी है और मेरे किस काम की है.’’
‘‘तू झूठ बोल रहा है. तेरी कमला के साथ आशनाई चल रही है… वहां आ कर मैं पुलिस में रिपोर्ट करूंगा,’’ राजन बोला.
‘‘मेरी बात सुन राजन, पुलिस में तो रिपोर्ट जब करेगा जो तू जिंदा बचेगा. तू ने अखबारों में नहीं पढ़ा क्या? बहुत केस हो रहे हैं, जिन में पत्नी अपने प्रेमी के साथ मिल कर अपने पति को हमेशा के लिए गहरी नींद सुला देती है.’’ ‘‘तुम दोनों मुझे जान से मारोगे?’’
‘‘अगर जरूरत पड़ी तो मारना ही पड़ेगा. देख राजन, कमला किसी भी समय तुझे बेहोशी की दवा खिला सकती है. बेहोश होने पर गला घोंट कर मैं रात को तेरी लाश यमुना नदी में फेंक दूंगा. यमुना नदी यहां से ज्यादा दूर नहीं है. सुबह तक तेरी लाश पता नहीं कहां पहुंच जाएंगी. यहां कह दिया जाएगा कि तू रात ही वापस चला गया था, इसलिए मैं चाहता हूं कि…’’
‘‘क्या चाहता है?’’ सुन कर सचमुच राजन डर गया. ‘‘बस, कमला मुझे दे दे. अगर तू अपनी जिंदगी चाहता है. पहले वह तेरी ही थी लेकिन अब वह मेरी हो गई है. क्या समझे?’’ मनोज का जोरदार स्वर सुनाई पड़ा. फोन बंद हो गया.
राजन के दिल की धड़कन बढ़ गई. गला खुश्क हो गया. वह बुरी तरह घबरा रहा था. उसे लग रहा था कि कहीं सचमुच ही कमला मनोज से मिल कर उस की हत्या न करा दे.
रात को बिस्तर पर लेट कर राजन को नींद नहीं आ रही थी. उसे बारबार लग रहा था कि कमला और मनोज दोनों मिल कर उसे मार डालेंगे. आजकल इस तरह के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं. बाद में वे दोनों पकड़े भी गए और उन को सजा भी होगी तो क्या होगा. राजू की जिंदगी भी खराब हो जाएगी. आखिर क्या करना चाहिए उसे? वह सोचता रहा और आखिर में उस ने मन ही मन एक फैसला ले लिया.
अगले दिन राजन ने कमला को फोन पर सूचना दे दी कि आज वह ट्रेन से चल कर कल सुबह आगरा पहुंच जाएगा. उस के बाद घर तक पहुंचने में 2 घंटे लग जाएंगे.
राजन घर पहुंचा तो 11 बज रहे थे. उसे कमला के चेहरे पर सबकुछ बनावटी लगा. कमला का हंसना व बात करना नकली लग रहा था.
घर से निकलते हुए राजन ने कहा, ‘‘कमला, मैं ने तुम दोनों के बारे में सोच लिया है.’’ ‘‘क्या?’’ कमला ने पूछा. ‘‘कुछ देर बात पता चल जाएगा. मैं अभी आता हूं,’’ राजन ने इतना कहा और बाहर चला गया.
कमला समझ नहीं पाई कि राजन का अगला कदम क्या होगा? अब वह कहां गया है? उस ने मनोज को फोन मिला कर बता दिया. ‘‘तू फिक्र न कर कमला, मैं तेरे आसपास ही हूं. जो भी होगा मैं देख लूंगा,’’ मनोज ने कमला को कह दिया.
राजन घर से निकल कर सीधा पुलिस स्टेशन जा पहुंचा. सामने कुरसी पर बैठे इंस्पैक्टर वीरेंद्र सिंह के आगे हाथ जोड़ कर खड़ा हो गया और बोला, ‘‘नमस्ते साहबजी, मेरा नाम राजन है. मैं इसी कसबे में रहता हूं. मुझे मरने से बचा लो साहब. मैं मरना नहीं चाहता. आप ही मुझे बचा सकते हैं. मैं आप के पैर पकड़ता हूं,’’ इतना कह कर राजन ने इंस्पैक्टर वीरेंद्र सिंह के पैर पकड़ लिए.
‘‘अरे उठ, बता मामला क्या है? कौन तुझे मारना चाहता है?’’ इंस्पैक्टर वीरेंद्र सिंह ने राजन को उठाते हुए कहा. ‘‘मेरी घरवाली कमला और उस का यार मुझे मारना चाहते हैं,’’ राजन ने पूरा मामला बताने के बाद मनोज की बातचीत की रिकौर्डिंग भी सुना दी.
इंस्पैक्टर वीरेंद्र सिंह ने कहा, ‘‘आजकल जिधर देखो इस तरह के मामले बढ़ते जा रहे हैं. तुम ऐसा करो कि एक कागज पर लिख कर दे दो. एफआईआर दर्ज हो जाएगी, दोनों को जेल भेज दिया जाएगा. जेल जा कर प्यार का भूत उतर जाएगा.’’
राजन ने हाथ जोड़ कर कहा, ‘‘नहीं साहब, मैं ऐसा नहीं चाहता.’’ ‘‘फिर कैसा चाहता है? क्या उन दोनों की शादी करा दूं?’’
‘‘बिलकुल ठीक कहा आप ने. मैं भी यहीं चाहता हूं कि उन दोनों की शादी हो जाए. मैं कमला को मनोज के हवाले करना चाहता हूं. कमला अब मेरी नहीं उस की हो गई है. मगर मैं ने ऐसा कर दिया तो मेरी जान बच जाएगी, मेरे बेटे राजू का भविष्य खराब होने से बच जाएगा.’’
‘‘तू तो बहुत समझदारी की बात कर रहा है, लेकिन बिना तलाक के कमला की शादी कैसे हो सकती है?’’
‘‘साहबजी, मैं लिख कर दे दूंगा कि अब मेरा कमला से कोई संबंध नहीं है. बस आप इन दोनों को बुला कर इन की शादी करा दीजिए. आप के सामने यह सब होगा. अब आप के हाथों में मेरी जान और मेरे बेटे का भविष्य है साहबजी.’’
‘‘ठीक है, आज एक नया प्रयोग यह भी कर लेते हैं,’’ इंस्पैक्टर वीरेंद्र सिंह ने कहा.
कुछ देर बाद कमला और मनोज को पुलिस स्टेशन बुला लिया गया. कसबे के कुछ खास लोगों को भी बुलाया गया.
कागजी लिखापढ़ी के बाद कमला और मनोज ने एकदूसरे के गले में माला डाल कर साथ निभाने का वादा किया. राजन ने अपने हाथों से कमला की विदाई की.
अगले दिन महल्ले में एक ही बात लोगों की जबान पर थी पति ने पत्नी व प्रेमी की शादी कराई पुलिस थाने में. अब यह न कहना कि यह शादी हिंदू मैरिज एक्ट के हिसाब से सही नहीं. मियांबीबी राजी तो क्या करेगा काजी.
2 दिन बाद राजन नया जीवन जीने के लिए राजू को साथ ले कर लुधियाना जा पहुंचा.




