Tragedy. दिल्ली सरकार ने हाल ही में अपनी होमस्टे पौलिसी के ड्राफ्ट पर सुझाव मांगे थे, जिस के तहत एयरबीएनबी जैसे मौडल को मंजूरी देने की तैयारी थी, ताकि घर मालिक अपने खाली कमरों में टूरिस्टों को ठहरा सकें और कानूनी रूप से एक्स्ट्रा इनकम कमा सकें.

पूरी दिल्ली में लागू होने वाली इस पौलिसी में लाइसैंस की वैलिडिटी 5 साल के लिए प्रपोज की गई थी. इस पौलिसी का मकसद टूरिज्म को बढ़ावा देना, होटलों पर बढ़ते दबाव को कम करना, आम लोगों को एक्स्ट्रा इनकम का मौका देना और टूरिस्टों को सस्ती और स्थानीय अनुभव वाली ठहरने की सहूलियत मुहैया कराना था.

हालांकि, इस पौलिसी के तहत बी एंड बी (बैड एंड ब्रेकफास्ट) यूनिटों को होटल, गैस्टहाउस या लौज की तरह चलाने करने की इजाजत नहीं थी. पर मालवीय नगर में बने एक होटल में लगी आग के बाद यह योजना ही सवालों के घेरे में आ गई.

यह अग्निकांड 3 जून, 2026 की सुबह हुआ था. होटल का नाम था ‘फ्लोरिश स्टे बी एंड बी’, जो मालवीय नगर के हौज रानी इलाके की एक तंग गली में बना था. आग इतनी भयंकर थी कि देखते ही देखते विकराल रूप ले बैठी और जब तक फायर बिग्रेड द्वारा राहत का काम किया जाता, तब तक जान और माल का नुकसान हो चुका था. 21 लोगों ने अपनी जान गंवा दी और बहुत से गंभीर रूप से घायल हो गए.

चश्मदीदों के मुताबिक, हादसे के दौरान धुएं के साथ आग इतनी तेजी से फैली कि ज्यादातर लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला. भीषण आग के चलते होटल का मेन गेट ही बंद हो गया. इस से लोग वहां से नहीं निकल पाए और ऊपर की ओर भागे. छत की ओर जाने पर 1-2 लोग ही निकल पाए, तब तक आग के चलते वह दरवाजा जाम हो गया. इस के बाद बाकी लोग वहीं फंस गए.

नतीजतन, जान बचाने के लिए होटल के कमरों में मौजूद कुछ लोगों ने खिड़कियां तोड़ कर नीचे छलांग लगा दी. इसी बीच स्थानीय लोगों ने सूझबूझ  दिखाते हुए नीचे गद्दे बिछा दिए थे, ताकि लोग उन पर कूद सकें और कम से कम घायल हों.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, मरने वालों में 10 भारतीय और 11 विदेशी नागरिक थे. इन में 9 अफ्रीकी और 2 तुर्कमेनिस्तान के थे. मरने वाले 10 भारतीयों में से 8 तो रिश्तेदार थे. इन में 3 राजस्थान के और 5 हरियाणा के रहने वाले थे.

आग की इस घटना ने दिल्ली में होटल को लाइसैंस देने की नीति और निगरानी सिस्टम की बड़ी खामी को उजागर कर दिया है. एक अखबार की खबर के मुताबिक, यह होटल जिस इमारत में चल रहा था, उस के पास न तो होटल चलाने का लाइसैंस था और न ही महानगर पालिका के रिकौर्ड में वह होटल के रूप में दर्ज था.

दिल्ली सरकार के टूरिज्म डिपार्टमैंट से ‘बैड एंड ब्रेकफास्ट’ का लाइसैंस और महानगर पालिका से चाय बेचने की इजाजत ले कर 25 कमरों का होटल चलाया जा रहा था.

महानगर पालिका के बड़े अफसरों के मुताबिक, ‘बैड एंड ब्रेकफास्ट योजना’ मूल रूप से निजी मकानों में सीमित संख्या में टूरिस्टों को ठहराने के लिए बनाई गई है, जिस में अधिकतम 4 कमरों तक मेहमान रखने की इजाजत होती है.

दमकल महकमे के मुताबिक, होटल ‘फ्लोरिश स्टे बीएंडबी’ में बेसमैंट में 2 कमरे और एक रसोई थी. ग्राउंड फ्लोर पर 3 कमरे और एक और रसोई बनाई गई थी. ऊपर की पांचों मंजिलों पर 4-4 कमरे बनाए गए थे.

इतना ही नहीं, इमारत में सही से इमर्जैंसी एग्जिट नहीं था. ज्यादातर खिड़कियां शीशों से पूरी तरह बंद थीं.

किसी भी मंजिल पर बालकनी नहीं थी. बेसमैंट के लिए बाहर की ओर बना एक्स्ट्रा एग्जिट गेट बंद था.

आग बेसमैंट से शुरू हुई और लपटें सीढि़यों के रास्ते ऊपर की मंजिलों तक फैल गईं. सीढ़ी आग की चपेट में आ गई, जिस से बाहर निकलना नामुमकिन हो गया.

इधर, घटना के कुछ घंटों बाद पुलिस ने होटल के मालिक लवकेश बजाज को हिरासत में ले लिया. उस ने बताया कि वह खुद होटल की निगरानी नहीं करता था. उस ने होटल के मैनेजमैंट, बिलिंग और अकाउंट्स का काम किसी और को दिया था. उस ने यह भी कहा कि होटल में कमरे बड़े करने और दूसरे बदलावों की सलाह भी किसी और ने ही दी थी.

लवकेश बजाज ने यह दावा भी किया कि सलाह देने वाले आदमी ने उस से कहा था कि होटल में ये सारे मौडिफिकेशन नौर्मल हैं और दिल्ली में सब चलता है.

यह ‘सब चलता है’ वाली सोच ऐसे हादसों की जड़ बन जाती है. एक खबर के मुताबिक, दिल्ली हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में दावा किया गया है कि राजधानी दिल्ली में तकरीबन 1,000 लाइसैंसी होटल और गैस्टहाउस हैं, लेकिन केवल 52 के पास लीगल फायर नो औब्जैक्शन सर्टिफिकेट है. इस साल 7 जनवरी को कोर्ट ने दिल्ली सरकार, महानगर पालिका और नई दिल्ली नगर पालिका को फायर सेफ्टी पर कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया था.

याचिका दायर करने वाले एडवोकेट अर्पित भार्गव का कहना था कि बड़ी तादाद में होटल और गैस्टहाउस जरूरी अग्नि सुरक्षा मानकों के बिना चल रहे हैं. सुनवाई के तकरीबन 5 महीने बाद अब हादसा हो गया.

इन बातों का जरूर रखें खयाल 

* हर कमरे, लौबी, किचन, स्टोर में धुआं उठते ही अलार्म बजने का सिस्टम लगा हो.

* हर फ्लोर पर मैन्युअल काल पौइंट को आग लगने पर कोई भी बजा सके.

* स्प्रिंकलर सिस्टम लगा हो, जो पूरे होटल में सीलिंग पर आग पर औटोमैटिक पानी गिराता है.

* हर 15 मीटर पर फायर एक्सटिंग्विशर लगा हो. यह किचन आदि में छोटी आग तुरंत बुझाने के काम आता है.

* फायर हाइड्रैंट सिस्टम हो ताकि आग लगने पर बिल्डिंग के बाहर फायर ब्रिगेड डायरैक्ट पानी ले सके.

* हर सीढ़ी के पास हर फ्लोर के लिए फायर वाले पाइप लगा कर ऊपर तक पानी पहुंचाने का इंतजाम हो.

* हर फ्लोर से निकलने के लिए 2 अलग सीढि़यां हों. एक में आग लगे तो दूसरी इस्तेमाल हो. फायर एग्जिट पर ताला कभी मत लगाओ.

* ग्रीन ग्लो साइन से ‘एग्जिट’ का निशान हो. कमरे के गेट के पीछे फ्लोर का मैप चिपका होना चाहिए. ‘आप यहां हैं, सब से पास का एग्जिट उधर है’ की जानकारी जरूर हो.

* बिजली जाते ही बैटरी वाली लाइट चालू हो जाए. धुएं में सीढ़ी दिखनी चाहिए.

*होटल से तकरीबन 50 मीटर दूर खुली जगह पर ‘एसैंबली पौइंट’ तय करो. आग लगे तो सब वहीं इकट्ठा हों, ताकि गिनती हो सके.

* आग में लिफ्ट इस्तेमाल कभी नहीं करें.

* छत पर कम से कम 10,000 लिटर का अलग फायर टैंक रखो.

* अगलबगल के दुकान वालों का फोन नंबर रखो. आग लगे तो वे भी अपनी दुकान खाली कर दें.

* होटल के बाहर साइन बोर्ड या एयरकंडीशनर के कारण फायर ब्रिगेड की सीढ़ी न अटके. होटल का फ्रंट खुला रखो.

* ऐसा पाया गया है कि रात 11-6 के बीच सब से ज्यादा आग लगती है. इस शिफ्ट में अलर्ट स्टाफ रखो, सोने वाला गार्ड नहीं चलेगा.

भीड़भाड़ वाले इलाके के होटल में आग से बचाव के उपाय

भीड़भाड़ वाले इलाके में बने होटल में आग लगने का रिस्क दोगुना होता है. पहला आग लगी तो भगदड़ और दूसरा आसपास की इमारतों में फैलने का खतरा. पर चूंकि बहुत सारे होटल ऐसे ही भीड़भाड़ वाले इलाकों में बने हैं, तो आग लगने जैसी आफत कभी भी आ सकती है. तो फिर उपाय क्या है?

बचाव ही इलाज है. इस के लिए होटल वाले हर 6 महीने में लाइसैंस्ड इलैक्ट्रिशियन से वायरिंग चैक कराएं. ओवरलोडिंग रोकने को एमसीबी, आरसीसीबी लगवाएं. सस्ती लोकल वायर या स्विच इस्तेमाल न करें.

अगर लगने की दूसरी वजह किचन हो सकती है, इसलिए कमर्शियल किचन में चिमनी के ऊपर आटो फायर सप्रेशन सिस्टम लगवाएं. एलपीजी पाइपलाइन आईएसआई मार्क वाली हो, लीकेज डिटेक्टर लगा होना चाहिए. गैस बैंक किचन से बाहर खुली जगह में हो.

तुरंत आग पकड़ लेने वाले सामान को सावधानी से सुरक्षित जगह पर रखें. डीजल, पेंट, थिनर स्टोररूम में होटल से अलग हो तो बेहतर रहता है या फिर सब से ऊपर की मंजिल पर रखा जाना चाहिए. होटल में स्मोकिंग जोन बालकनी में बना हो. कमरों में बीड़ीसिगरेट पीना सख्त मना हो.

इस के अलावा स्टाफ को भी आग बुझाने की ट्रेनिंग मिली होनी चाहिए. हो सके तो हर महीने मौक ड्रिल की जाए और हर शिफ्ट में 2 लोग फायर फाइटर ट्रेंड हों. उन्हें पता हो कि मेन बिजली और गैस कहां से बंद होती है.

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