Film. भारत जैसे देश में किसी लड़के का सीटी बजाना बड़ा ही अमर्यादित समझा जाता है, गली का मवाली समझा लिया जाता है, जो हर लड़की को देख कर सीटी बजा दे. पर जब यही सीटी सुरीली हो जाए, तो कोई नागेश सुर्वे बेनाम सा हो कर भी अमर हो जाता है. पर कैसे?
हिंदी फिल्मों के इन कुछ गानों पर गौर फरमाइए… ‘फना’ फिल्म का ‘सुभानअल्लाह…’, ‘सौदागर’ का ‘ईलूईलू…’, ‘दिल तो पागल है’ का ‘अरे रे अरे…’, ‘सत्या’ का ‘सपने में मिलती है…’, ‘मोहब्बतें’ का ‘चलतेचलते यों ही…’, इसी तरह 1,600 गाने, जिन में शब्दों और म्यूजिक की कारीगरी तो थी ही, पर इन के बीच में बजने वाली सीटी ने भी लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा था.
यह कारनामा किया है नागेश सुर्वे ने. वे सिर्फ सीटी ही नहीं बजाते हैं, बल्कि उन्हें सुरों की भी गहरी समझा है. फिर सीटी बजाने की यह कला कैसे विकसित हुई? इस सवाल के जवाब में नागेश सुर्वे ने एक इंटरव्यू में बताया था कि जहां उन का बचपन बीता था, उस महल्ले में सभी सीनियर लड़कों का सीटी बजाने का अनोखा तरीका होता था, जो एकदूसरे को बुलाने के लिए संकेत का काम करता था.
अलगअलग ग्रुप के अलगअलग संकेत थे. शरारत के तौर पर मैं ने हर समूह के सिगनल पर सीटी बजाई और सभी को नीचे ले आया.
पर तब नागेश सुर्वे यह नहीं जानते थे कि एक दिन मशहूर गायक किशोर कुमार भी उन की सीटी के कायल हो जाएंगे. अपने एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि उन की आवाज से मशहूर सिंगर किशोर कुमार इतना हैरान हो गए थे कि उन्होंने उन्हें कहा था कि ‘तुम्हारी आवाज मेरे गानों की तरह यूनिक है, इसे बना कर रखना’.
इतना ही नहीं, फिल्म ‘सौदागर’ के गाने ‘ईलूईलू…’ में बजी सीटी को अनुपम खेर ने जब पहले बार सुना तो उन्हें यह यकीन ही नहीं हुआ कि यह सीटी किसी इनसान ने बजाई है. बाद में उन्होंने नागेश सुर्वे से कहा था कि ‘मुझे अपना शागिर्द बना लीजिए’.
नागेश सुर्वे के सीटी बजाने के टैलेंट को किस ने सब से पहले जाना और उन्हें कौन सा गाना मिला था, जिस में अपनी सीटी का जलवा दिखाया?
इस सवाल के जवाब में नागेश सुर्वे ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन के बचपन के दोस्त हुआ करते थे म्यूजिक डायरैक्टर प्यारे लाल और साथ ही एक मशहूर म्यूजिक डायरैक्टर भी उन के महल्ले में आते थे, इसलिए उन का बचपन म्यूजिकल माहौल में गुजरा. प्यारे लाल के पिता से उन्होंने वायलिन बजाने सीखा था. शुरुआत में उन्होंने म्यूजिक डायरैक्टरों के लिए वायलिन बजाने का काम किया.
एक दिन जब नागेश सुर्वे का एक म्यूजिक शैड्यूल कैंसिल हो गया तो सभी ने मिल कर पिकनिक का प्लान बनाया. मनोज शर्मा बड़े म्यूजिक अरेंजर थे, जो आरडी बर्मन के लिए काम करते थे. उस पिकनिक में नागेश मस्ती में सीटी बजा रहे थे, तो मनोज शर्मा ने उन से पूछा कि क्या गाने में सीटी बजाएगा?
नागेश ने कहा कि ‘हां, मैं कर सकता हूं’. इस तरह पहली बार उन्होंने जिस हिंदी फिल्म में सीटी बजाई वह फिल्म थी ‘जूली’ और गाना था ‘दिल क्या करे…’
आज नागेश सुर्वे अपनी बेटी के साथ हिंदी फिल्मों में सीटी बजा रहे हैं. उन की छोटी बेटी रुपाली सुर्वे भी कई मशहूर गानों में सीटी बजा चुकी हैं. अपने सीटी बजाने के हुनर पर नागेश सुर्वे ने एक इंटरव्यू में बताया था कि बचपन में जब वे सीटी बजाते थे, तो उन की दादी कहती थीं कि सीटी मत बजा, सांप निकल आएगा.
सांप का तो पता नहीं, पर जब नागेश सुर्वे सीटी बजाते हैं, तो सुर लय में थिरकते जरूर दिखते हैं. Film




