Crime: जीबी रोड इलाके में एक नाबालिग लड़की वैश्यावृत्ति के दलालों के चंगुल से बच कर महिला कांस्टेबल के पास मदद मांगने गई और आरोपी पकड़ा गया. सवाल यह है की अगर वह चूक जाती तो क्या होता? इस मामले में दिल्ली पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया और एक नाबालिग बच्ची की जिंदगी तबाह होने से बच गई लेकिन यह बेहद गंभीर मामला है. दिल्ली पुलिस की नाक के नीचे न जाने कितनी लड़कियाँ इसी तरह बेच दी जाती होंगी.
7 अप्रैल 2026 को दिल्ली पुलिस के कमला मार्किट थाना की महिला पेट्रोलिंग टीम ने जीबी रोड पर 17 साल की नाबालिग लड़की को बचाया. बिहार के दरभंगा का शिवजी दास लड़की को नौकरी के झांसे में दिल्ली लाया था, घर पर छेड़छाड़ की, धमकाया और फिर उसे बेचने के लिए जीबी रोड ले गया. इसी दौरान लड़की हिम्मत और समझदारी दिखाते हुए महिला कांस्टेबल के पास मदद मांगने गई और आरोपी पकड़ा गया. अगर वह एक पल चूक जाती तो आज वह GB रोड के किसी ब्रोथेल में बिक चुकी होती और मामला शायद कभी सामने ही न आता.
दिल्ली पुलिस की नाक के नीचे GB Road जैसे इलाके में न जाने कितनी लड़कियां रोज इसी तरह बेची जा रही होंगी जिनकी कहानी कभी बाहर नहीं आती क्योंकि ज्यादातर पीड़ित इतनी डरी हुई होती हैं कि मदद मांगने का साहस ही नहीं कर पातीं.
GB Road का रिकॉर्ड पुराना है. यहाँ ट्रैफिकिंग, नाबालिगों की खरीद-बिक्री और जबरन वेश्यावृत्ति का नेटवर्क दशकों से चल रहा है. पुलिस रेड्स होती रहती हैं लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. NCRB के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली में मानव तस्करी के हर साल 100 के आसपास केस दर्ज होते हैं लेकिन असली संख्या कहीं ज्यादा है क्योंकि ज्यादातर केस रिपोर्ट ही नहीं होते. दिल्ली में हर साल सैकड़ों बच्चियां और महिलाएं लापता होती हैं और इनमें से कई ट्रैफिकिंग का शिकार बनती हैं इसलिए ऐसे मामलो में पुलिस की भूमिका पर सवाल उठना लाजमी है.
इस बार लड़की की हिम्मत से बचाव हो गया लेकिन यह प्रोएक्टिव पोलिसिंग नहीं बल्कि लड़की की हिम्मत का नतीजा था. अगर पुलिस का इंटेलिजेंस, CCTV मॉनिटरिंग, इनफॉर्मर नेटवर्क और GB Road पर डेली रूटीन में सख्त निगरानी होती तो शायद इस तरह आरोपी लड़की को वहाँ ले जाने की हिम्मत ही नहीं करता.
सच्चाई यह है कि इस तरह की मानव तस्करी गरीबी, बेरोजगारी, झूठे जॉब लालच और माफिया के संगठित नेटवर्क का नतीजा है लेकिन जब पुलिस की नाक के नीचे यह सब चलता रहता है तो कानून-व्यवस्था की जवाबदेही सवालों के घेरे में आ जाती है. इस मामले में यह दिल्ली पुलिस की उपलब्धि नहीं है बल्कि यह सिस्टम की गहरी खामी का मामला है. एक नाबालिग को खुद बचाव के लिए कांस्टेबल के पास जाना पड़ जाए, यह कोई जीत नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था की हार है.
कानून सिर्फ कागज पर नहीं, जमीन पर भी लागू होना चाहिए. GB Road जैसी जगहों पर और सख्त, निरंतर और बिना किसी समझौते की निगरानी की जरूरत है वरना कल कोई और लड़की चुपचाप बिक जाएगी और किसी को कानों कान खबर भी नहीं लग पायेगी.




