Hindi Story: रंगतेज पालजी को अपनी ताई की असीम कृपा से भारतीय नाट्यकला केंद्र में प्रवेश मिल गया. वहां होली के रंगोत्सव के लिए नाटक तैयार करने के लिए राइटर और डायरैक्टर साहब ने उन्हें जो रोल प्ले करने के लिए दिया उस में उन्हें अपनी कभी होली न खेलने वाली प्रेमिका को उस के घर जा कर रंग लगाना था. उन्होंने नाटक की स्क्रिप्ट बिना पढ़े ही अपना यह रोल करने की ठान ली.
दरअसल, जवानी के दिनों में होली पर रंगतेज पालजी ने अपना दिलफेंक पानी भरा गुब्बारा आसपड़ोस की जवान लड़कियों पर मारा था. यह बात अलग थी कि उन का पानी भरा गुब्बारा किसी एक को भी न लगा. हां, एक बार पड़ोस वाली सविता भाभी जरूर उन के फटे गुब्बारे के पानी पर फिसली थीं. उन की गोरी टांग में फ्रैक्चर हुआ तो उन्हें अपनी कार में उन की बनारसी साड़ी उन के घुटनों तक उठा कर आहिस्ता से बैठा कर अस्पताल ले जाना पड़ा था.
खबर पा कर जब तक सविता के पति अस्पताल पहुंचे तब तक तो अस्पताल के परचे में पति के नाम की जगह पर रंगतेज पाल का नाम दर्ज हो चुका था. सविता टूटा पैर लिए स्ट्रैचर पर बैठी थीं और रंगतेज पालजी उन को अपने हाथों से उन की पीठ से सरके पल्लू को साइड से और सरकाते हुए उन की कट स्लीव्स व ओपन गहरे कट वाले ब्लाउज से झांकती गुलाबी पीठ को अपने धड़ से लगा कर जकड़े हुए थे. उन के पति को आता देख वे संभले और बिल्ली रास्ता काट गई जैसी हालत से गुजर कर तुरंत सावधान हो गए.
खैर, बात चल रही थी होली के नाटक में रोल प्ले करने की तो अनुभवी रंगतेज पालजी ने अपनेआप को संभाला, रंगीन रंगों से लैस किया. राइटर और डायरैक्टर साहब ने बताया कि तुम्हें धोखे से होली न खेलने वाली अपनी प्रेमिका के घर में घुस कर उस के थानेदार बाप से बच कर उसे रंग लगाना है. ‘बुरा न मानो होली है’ कह कर सबक सिखाना है. उन की बांछें फिर खिल उठीं. वे तैयार होने लगे.
वाशरूम में 4-5 बार शेव बनाने के बाद जब उन्हें अपना चेहरा चिकना और सलोना लगने लगा तो मेकअपरूम में पहुंचे. आईने के सामने खड़े हो कर अपने माथे पर लाल बिंदी, आंखों में काजल, गालों पर गुलाबी चटक रोज, होंठों पर गहरी लाल लिपस्टिक और बौबकट बालों पर औरतों जैसी लंबी चुटिया वाली विग लगा कर अपनी मांग में चुटकीभर सिंदूर भी भर लिया.
चेहरे की खूबसूरती को पूरा करने के बाद उन्होंने पेटीकोट और साड़ीब्लाउज को पहनने के लिए उठाया और जैसे ही उन्होंने इधरउधर देख कर सावधानी से अपनी पैंट उतारने के लिए उस के आगे का बटन खोला और जिप के रोलर को नीचे की तरफ सर्र से सरकाया ही था कि एकाएक उन्हें ‘सावधानी हटी दुर्घटना घटी’ वाला मूलमंत्र याद आ गया, सो, उन्होंने तुरंत जिप के रोलर को सर्र से ऊपर की तरफ चढ़ाने के बाद आगे का बटन बंद कर लिया. अपने तन से पैंट और टीशर्ट को नहीं उतारा.
पैंट के ऊपर ही पेटीकोट पहन लिया और टीशर्ट के ऊपर जैसे ही ब्लाउज पहन साड़ी पहनने लगे तो उन का ध्यान आईने में चला गया. अपनी खूबसूरती पर इतराते हुए पहले तो भाभियों सी मुसकराहट मारी, देवर सी आंख मारी और इठलातेइतराते हुए ‘आंखों ही आंखों में इशारा हो गया, बैठेबैठे जीने का सहारा हो गया…’ गीत गाते हुए अपनी आंखों के इशारे से आड़ीतिरछी नैनकटारी मारने की प्रैक्टिस करने लगे.
आईने में ब्लाउज के एरिया पर ध्यान गया तो अपने सपाट हिस्से को भरने के लिए उन्होंने अटैंडैंट छोटू को भेज कर तुरंत 2 संतरे मंगवा लिए. छोटू के मेकअपरूम से बाहर जाते ही उन्होंने दोनों संतरे अपने ब्लाउज में फिट कर लिए. मगर अंदर ब्रा न पहने होने के कारण उन दोनों संतरों के निकल कर गिर जाने का डर उन के मन में समाया तो ?ाटपट उन्होंने राइटर और डायरैक्टर साहब को इंटरकौम कर के एक ब्रा का इंतजाम करवाया. फिर ब्रा पहन कर उस में संतरे महफूज रख लिए.
साड़ी पहनी तो फिर मन में खयाल आया कि क्यों न बेबी बंप भी बना लिया जाए. आड़े वक्त में काम आएगा. अगर दुष्ट सास यानी प्रेमिका की मां सामने आ गईं तो मेरा बेबी बंप देख तरस खा कर कुछ न बोलेंगी. उन्होंने अपना बेबी बंप बनाने के लिए तुरंत पेटीकोट को ऊपर की तरफ चढ़ाया और अपने मजबूत अंडरवियर व बनियान का सहारा ले कर सोफासैट के एक कुशन को उस के अंदर सैट किया तो उन का बेबी बंप कभी ज्यादा ऊपर की तरफ उठा हुआ दिखे तो कभी नीचे की तरफ ?ाका हुआ.
खैर, कस कर साड़ी लपेटने के बाद साड़ी के पल्लू की मदद से वे अपना नया बेबी बंप बनाने में कामयाब हो गए. मेकअप रूम से बाहर निकल वे मंच पर पहुंच गए. प्ले चालू हो चुका था. उन का रोल आया तो वे अपना नया बेबी बंप संभाल आहिस्ता से मंच पर चढ़े. रोल के मुताबिक, सब से पहले उन का सामना हुआ होने वाले खुर्राट थानेदार ससुर से. मगर वह उन को पहचान न पाया और सामने आती प्रैग्नैंट लुगाई को देख अपना सिर नीचे की ओर कर के घर से बाहर निकल गया.
फिर सामना हुआ होने वाली सास यानी प्रेमिका की मां से. तो वे अपने बेबी बंप पर हाथ फेर उन से बोले, ‘‘चाची, होली मुबारक हो. महल्ले में नई आई हूं. ये तो अपने औफिस के दोस्तों के साथ होली खेलने बाहर निकल गए तो मैं ने सोचा, होली का मौका है, मां भी साथ में नहीं है. ऐसे में आप से ही मिल कर होली की शुभकामनाएं बांट लूं, आप का आशीर्वाद ले लूं.’’ चाची को भी अपने जमाने का बेबी बंप याद आ गया, वे बोलीं, ‘‘आओ, पलंग पर संभल कर बैठ जाओ. मैं तुम्हारे लिए होली के पकवान ले कर आती हूं.’’
चाची रसोई में जाने से पहले अपनी हसीन बिटिया रजनी को आवाज दे कर बुलाती हैं और नई पड़ोस वाली प्रैग्नैंट भाभी से परिचय करवाती हुई कहती हैं, ‘‘रजनी, बैठ जा इन के पास और कुछ गुर ले ले इन से. आज नहीं तो कल तु?ो भी ससुराल जा कर ऐसे ही पेट फुला कर मेरे पास बच्चा जनने आना होगा.’’ रजनी शरमा जाती है और अपनी मम्मी के रसोई में जाते ही उन के पास ही पलंग पर बैठ जाती है.
प्रैग्नैंट भाभी को मौके की तलाश थी. रजनी को पलंग पर अकेला साथ बैठा हुआ देख मानो, अंधे को दो नैन मिल गए हों, ऐसा महसूस करते हुए उन्होंने अपनी प्रेमिका को अपनी भरपूर बांहों में प्यार से जकड़ा. सिर पर हाथ फेरते हुए उस के बदन को नीचे तक सहलाया. उस के साथ गले लग कर ?ामे और नजर बचा कर अपना पेटीकोट उठा कर उस के नीचे पहनी हुई पैंट की जेब से रंगगुलाल निकाल उस को जम कर ‘बुरा न मानो होली है’ कहते हुए पोत दिया लेकिन होली खेलने के चक्कर में वे औरतों वाली दबी हुई आवाज में बोलना भूल गए और एकाएक मर्दाना आवाज में सबकुछ बोल गए.
रजनी को शक हुआ और इस बार उस ने प्यार से भाभी को थोड़ा जोर से गले लगाया कि तभी उन के दोनों संतरे ब्रा में से निकल जमीन पर गिर पड़े. संतरे बाहर निकल गिरते हुए देख वे तुरंत दौड़ कर घर से बाहर निकलने लगे तो उन का बेबी बंप भी ज्यादा नीचे लटक गया. यह सब देख रजनी को अब दाल में कुछ काला नजर आ गया. उस ने रंग लगा कर लालपीला कर के जाती हुई भाभी की चुटिया को पीछे से आहिस्ता से पकड़ कर वापस रोकना चाहा तो चुटिया ही हाथ में आ गई. तब सारा मामला सम?ा रजनी चौंकी और उस के मुंह से निकला, ‘‘अरे, तुम?’’
‘‘बुरा न मानो रजनी, तुम्हारे प्यार ने मेरा यह हाल कर दिया जो मेरे साथ शादी करने के बाद तुम्हारा हाल होना चाहिए था. इस होली के मौके पर तुम्हें रंगने के चक्कर में मेरा हो गया. ‘‘अब मु?ो जाने दो. मेरा काम तो हो गया. वैसे भी, कहीं मांजी आ गईं और उन को सब पता चल गया तो दिन में रात हो जाएगी. वे लातों से मारमार कर मु?ो काला भूत बना देंगी.’’ तभी रजनी ने आंगन में रखी पानी से भरी बालटी अपनी पड़ोस वाली प्रैग्नैंट भाभी पर यह कहते हुए उड़ेल डाली, ‘‘जाओ, अब घर जाओ. अब कभी चोर नहीं, असली मर्द बन कर सामने आना. मैं तभी तुम से शादी करूंगी वरना अगली होली तक किसी और की हो लूंगी.’’ Hindi Story




