Hindi Kahani: पहली मुलाकात में ही प्रदेश के जेल मंत्री जयप्रकाश यादव बाबा सुखानंद के पांचसितारा होटल जैसे आलीशान आश्रम में जब कजरी से मिले, तो उन की लार टपकने लगी.
मंत्रीजी बाबा सुखानंद से बोल पड़े, ‘‘वाह बाबाजी, वाह, आज आप ने मेरे लिए क्या बुलबुल परोसी है. बिलकुल संगमरमर जैसी चमक रही है. यह तो रस भरी मदमस्त जवानी की मालकिन है.’’
बाबाजी ठहाका लगा कर बोले, ‘‘मंत्रीजी, आप तो जानते ही हैं कि हमारे आश्रम के बगल में एक पुराना मंदिर है. यहां हर साल मेला लगता है. इस मेले के बंदोबस्त के लिए शहर के तमाम आला अफसर मेरी इस कुटिया में पहले आ कर मु झ से बातचीत कर के काम को आगे बढ़ाते हैं. तमाम फोर्स लगाने के बाद ही मेला शुरू होता है.
‘‘मेरे ऊपर पिछले चुनाव में हमला हो चुका है, लेकिन मैं उस हमले में बालबाल बच गया था. इस बार विपक्षी पार्टी के लोग अगर मेरे ऊपर हमला करते हैं, तो मेरे गुरगे उन को वहीं ढेर कर देंगे, क्योंकि इस बार हम ने भी पूरी तैयारी कर ली है. आप ठहरे जेल मंत्री, तो जेलर आप की मुट्ठी में है…
‘‘अब आप जाइए, कजरी आप का इंतजार कर रही है… रात के 11 भी बज चुके हैं.’’
‘‘ठीक है स्वामीजी, मुझे भी सुबह जल्दी जाना है,’’ कहते हुए मंत्रीजी वहां से कजरी के कमरे में चले गए.
कजरी को बांहों में भरते हुए जेल मंत्री बोले, ‘‘तुम तो बहुत लाजवाब चीज हो. मैं अकसर इस आश्रम में आ कर इस कमरे में शराब और शबाब का मजा लेता रहा हूं, लेकिन अब तक तुम जैसी कोई नहीं मिली…’’
कजरी भी मटकते हुए बोली, ‘‘क्या करूं मंत्रीजी, मेरा पति ही नकारा है. दिनभर सेठ के यहां काम करतेकरते थक जाता है और रातभर मैं जल बिन मछली की तरह करवटें बदल कर प्यासी ही तड़पती रहती हूं.
‘‘शादी के 4 साल बाद भी मुझे कोई बच्चा नहीं हुआ. लेकिन हां, मेरा पति कभीकभार ही हलकीफुलकी मर्दानगी दिखा पाता है.’’
‘‘कोई बात नहीं कजरी… तुम्हारे पास मोबाइल फोन है न? नहीं है, तो मैं दुकान से मंगवा देता हूं,’’ मंत्रीजी ने कहा.
‘‘हां, है न मेरे पास मोबाइल फोन. आजकल मोबाइल का जमाना है. जब बाबाजी को जरूरत पड़ती है, तो वे मु झे मोबाइल से फोन कर के बुला लेते हैं,’’ कजरी ने कहा.
‘‘बाबा को मैं भी सवेरे फोन पर बोल देती हूं कि आज पति की नाइट ड्यूटी है. जरूरत पड़े तो याद कीजिएगा.
‘‘शाम को घूमने के बहाने मैं अपनी सहेली रमिया के साथ यहां आ जाती हूं. इस आश्रम में शाम को बहुत लोग आते हैं.’’
‘‘यह रमिया कौन है?’’ मंत्रीजी ने चौंकते हुए पूछा.
‘‘वह इस समय दूसरे कमरे में बाबाजी के साथ मौजमस्ती कर रही होगी. वह यहां पर साफसफाई का काम करती है,’’ कजरी अपने कपड़े उतारते हुए बोली.
कजरी की पीठ पर हाथ फेरते हुए मंत्रीजी बोले, ‘‘कजरी, तुम कहां की रहने वाली हो?’’
‘‘मेरा घर तो जौनपुर में है. यहां इलाहाबाद में मेरा पति एक सेठ के यहां काम करता है. शादी होने के एक साल बाद ही मेरा पति मुझे यहां ले आया था. घर पर बूढ़े सासससुर, जेठजेठानी और उन के 3 बच्चे हैं.
‘‘रमिया से गहरी दोस्ती होने पर उस ने मुझे यहां पर लाना शुरू किया. मंदिर में मन्नत मांगने के बहाने रात में हम दोनों साथ आ जाती हैं और काम निबटा कर साथ ही घर चली जाती हैं.’’
मंत्रीजी बोले, ‘‘ठीक है, जल्दी करो. मुझे देर हो रही है. सुबह दौरे पर भी जाना है. तुझे देख कर तो मेरा मन उतावला हो रहा है,’’ यह कह कर वे कजरी की कमर में हाथ डालते हुए उस को पलंग की तरफ ले जाने लगे.
कुछ देर बाद तूफान थम चुका था. कजरी और रमिया दोनों घर आ गईं. रमिया भी बाबा सुखानंद को दूसरे कमरे में जा कर भरपूर सुख दे कर लौटी थी.
रास्ते में दोनों ने मैडिकल स्टोर से दर्द दूर करने की दवा खरीदी और अपनीअपनी दवा खाने के बाद सोईं, तो फिर सुबह ही उन की आंख खुली.
सुबह कजरी का चेहरा खिलाखिला सा लग रहा था. अब मौका मिलते ही किसी अफसर या मंत्री से कोई खास काम करवाना रहता, तो बाबा सुखानंद कजरी को उस के आगे परोस देते. इस के लिए बाबा मनोवैज्ञानिक तरीका ही अपनाते थे.
कुछ दिन बाद कजरी के पैर भारी हो गए, तो वह बहुत खुश हुई.
सुबहसुबह उलटी करते देख कजरी का पति मनोज बोला, ‘‘क्या बात है? उलटी क्यों कर रही हो?’’
कजरी बोली, ‘‘यह तो खुशी की बात है. तुम बाप बनने वाले हो.’’ यह सुन कर मनोज बहुत खुश हुआ.
कजरी बोली, ‘‘यह बाबा सुखानंद के आशीर्वाद का नतीजा है.’’ Hindi Kahani:




