प्रणव अपूर्वा की अदाओं और काबिलीयत पर फिदा था, पर अपने मन की बात कह नहीं पा रहा था. एक दिन उस ने अजीब सा रूप धर कर लाइब्रेरी में अपूर्वा से बात करनी चाही.