Social Justice Story. गणपत ने जब से सुना है कि कलक्टर साहब इस गांव में आ रहे हैं, तब से उस की खुशी का ठिकाना नहीं है. उस ने सुन रखा था कि कलक्टर पूरे जिले का मालिक होता है. उन के हाथ में बहुत पावर होती है. सरकार ने उन को अधिकार दे रखे हैं. वे गांव की समस्या दूर करेंगे.

इस गांव में पीने के लिए साफ पानी की समस्या काफी गंभीर है. कहने को तो सरकार ने इस गांव में 8 हैंडपंप लगा रखे हैं, मगर सूखे की मार से 6 हैंडपंप बंद हो गए.

2 हैंडपंप सहीसलामत हैं. एक हैंडपंप दलित बस्ती में है और दूसरा ऊंची जाति वालों की बस्ती में है.

ऊंची जाति वाले दलितों को अपने हैंडपंप से पानी नहीं भरने देते. दलित बस्ती में जो हैंडपंप है, उस का पानी खारा है, इसलिए वे 3 किलोमीटर दूर से पीने का पानी लाते हैं.

कहने का मतलब यह है कि सब समस्या से परेशान हैं. वे कलक्टर के सामने किस तरह पेश होंगे, यही योजना बनाने में लगे हुए थे. जब कोई मंत्री इस गांव में आता, तब गांव का नक्शा ही बदल जाता. एक प्रशासनिक अफसर आ रहा था, इसलिए गांव में किसी तरह का रद्दोबदल नहीं किया गया.

गांव की सरपंच एक औरत गीता बाई है, मगर वह तो अपने पति की रबड़ की मुहर है. असली सरपंच तो उस का पति प्रभुदयाल बना हुआ है. उसी की पूरे गांव में चलती है, इसलिए वह किसी की भी सुनता नहीं है.

छुआछूत के अलावा इस गांव में जमीनजायदाद के ?ागड़े भी हैं. इन सारी समस्याओं से परेशान गांव जैसे इसी मौके के इंतजार में था.

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