निशा बंजर भूमि बन कर रह गई. लेकिन भावनाओं का सोता मन में अभी भी फूटा हुआ था. बेटे के लिए ममता, किसी अपने के अपनत्व भरे हाथों का सहारा उसे भी चाहिए था लेकिन प्रकृति उसे क्या वह भी नहीं देना चाहती थी?