नई दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से स्पेशल राजधानी एक्सपे्रेस चली तो नीता अपने जीजाजी को नमस्कार कर अपनी सीट पर आ कर बैठ गई. एक हफ्ता पहले वह अपनी बीमार मां को देखने आई थी. मुंबई तक का सफर लंबा तो था ही, उस ने बैग से शरतचंद्र का उपन्यास ‘दत्ता’ निकाल लिया. सफर में किसी से ज्यादा बात करने की उस की आदत नहीं थी, सफर में उसे कोई अच्छा उपन्यास पढ़ना ही अच्छा लगता था.

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