Gen Z Story. ‘‘अरे, मैं जेनजी हूं और अपने मम्मीपापा को दिखा दूंगी कि जेनजी जो ठान लेते हैं, वह कर के ही दम लेते हैं,’’ बुदबुदा उठी थी वीरा और सिर झुका कर अपने मोबाइल में कुछ सर्च करने लगी थी, पर इंटरनैट धीमी रफ्तार से चल रहा था, इसलिए वीरा को बारबार कोफ्त हो रही थी.
झुंझुलाते हुए वीरा ने मोबाइल अपनी जींस की पौकेट में रख लिया. अभी वह कुछ सोच ही रही थी कि उसे अपने पीछे किसी का हाथ छुता हुआ सा महसूस हुआ. तेजी से पलट पड़ी थी वीरा. उस ने देखा कि पीछे खड़ा आदमी सफेद बालों वाला अधेड़ सा था जो वीरा के पलटते ही थोड़ा सा डर गया और वहां से तेज कदमों से चल कर भागने की कोशिश करने लगा.
वीरा की समझ में नहीं आया कि वह क्या करे और इस बुड्ढे की बदतमीजी पर क्या कहे? वैसे भी पिछले कुछ दिनों से वह मानासिक रूप से परेशान थी.
18 साल की वीरा लगातार अपने मांबाप से 500 रुपए हर महीने पौकेटमनी के तौर पर मांग रही थी, पर उस के मांबाप अपने टाइट बजट का हवाला दिए जा रहे थे और उसे पौकेटमनी देने से साफ मना कर रहे थे.
वीरा का कहना था कि उस के साथ पढ़ने वाली सभी लड़कियों को तो उन के मांबाप पौकेटमनी देते हैं और बदले में उन पैसों का कोई हिसाबकिताब भी नही मांगते और यही बात जब वीरा ने अपने मम्मीपापा के सामने ऊंची आवाज में कह दी तो पापा ने भी गुस्से में कह दिया कि उन के पास पैसे नहीं हैं और अगर तुम्हें ज्यादा ही पैसों की जरूरत है तो जा कर कमा लो.
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