सुरेंद्र के कुछ सपने थे, अरमान थे. लेकिन इंद्रा ने तो जैसे उस के हर सपने को पांव तले रौंदने की ठान ली थी. पत्नी की गलतियों को नजरअंदाज करते हुए वे सोचते रहते कि धीरेधीरे सब ठीक हो जाएगा.
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