हीरोइन आलिया भट्ट की सौतेली बड़ी बहन पूजा भट्ट भी अपने जमाने की मशहूर अदाकारा रही हैं. उन के चाहने वालों की तादाद भी आलिया भट्ट या किसी दूसरी हीरोइन से कम नहीं थी. मानने वाले मानते हैं कि पूजा भट्ट जैसी सादगी वाली लेकिन सैक्सी हीरोइनें फिल्म इंडस्ट्री में न के बराबर हुई हैं. पूजा भट्ट ने गिनीचुनी फिल्में ही की थीं और फिर उन्होंने फिल्मों को ‘बायबाय’ कह दिया था.

वही पूजा भट्ट कुछ दिन पहले फिर चर्चा में आई थीं जब उन्होंने अपनी निजी जिंदगी का यह राज उजागर किया था कि उन का भी एक बौयफ्रैंड था जिस के साथ वे कुछ दिन लिवइन में रही थीं.

पूजा भट्ट ने उस बौयफ्रैंड का नाम तो नहीं बताया लेकिन यह जरूर बताया कि वह अव्वल दर्जे का शराबी था और आएदिन नशे में उन के साथ मारपीट करता था.

बकौल पूजा भट्ट जब उन्होंने इस हकीकत को अपनी जानपहचान वालों से साझा किया तो उन्होंने पूजा को ही निशाने पर ले लिया कि वे क्यों शराबी बौयफ्रैंड के साथ रहते हुए उस की ज्यादतियां झेलती रहीं जबकि वे महेश भट्ट जैसे नामी फिल्ममेकर और डायरैक्टर की बेटी हैं?

इस पर पूजा भट्ट का जवाब यह था कि एक बड़े आदमी की बेटी होने से यह दुख कम नहीं हो रहा था और लोग जब सच बोलते हैं तो अपनों से ही घिर जाते हैं.

जाहिर है कि शराबी बौयफ्रैंड माशूका को कोई सुख नहीं दे सकता, उलटे वह उस के प्यार और भलमनसाहत का नाजायज फायदा ही उठाता है. फिर क्यों लड़कियां किसी शराबी को अपना बौयफ्रैंड या आशिक बनाती हैं? इस बात का अमीरीगरीबी, जातपांत या छोटेबड़े से कोई ताल्लुक नहीं है सिवा फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ के इस गाने को दोहराने के कि ‘दिल तो है दिल, दिल का एतबार क्या कीजे…’

एतबार के काबिल नहीं

शराबी बौयफ्रैंड कितनी बड़ी आफत होता है, इस की एक मिसाल भोपाल की सायना (बदला हुआ नाम) भी है.  भोपाल की एक प्राइवेट कंपनी में सायना 15,000 रुपए महीने की तनख्वाह पर नौकरी करती है. तकरीबन 3 साल पहले उस की मुलाकात आलोक (बदला हुआ नाम) से हुई, तो दोनों में प्यार हो गया. मेलमुलाकातें बढ़ीं तो वादों और इरादों की रस्में भी परवान चढ़ने लगीं. दोनों ने शादी का फैसला भी ले लिया.

पेशे से पेंटर आलोक भी उस की तरह जातपांत और धर्म में यकीन नहीं करता था और उसे अपनेआप पर गजब का भरोसा था कि अगर आदमी के इरादे पक्के हों तो वह दुनिया को अपने हुनर और उसूलों के सामने झुका सकता है.

आलोक की इसी सोच और अदा पर सायना मरमिटी थी, पर जल्द ही सायना को पता चल गया कि आलोक खुद रोज शाम को शराब के आगे झुक जाता है.

शुरूशुरू में तो आलोक ने अपने शराब के आदी होने की बात सायना से छिपाई, लेकिन जब छिपाना मुश्किल हो गया तो शराफत से खुद ही मान लिया.

यह सच सायना के लिए किसी सदमे से कम नहीं था, क्योंकि वह आलोक पर अपना सबकुछ न्योछावर कर चुकी थी और उसे अपने होने वाले शौहर के रूप में देखने लगी थी.

सायना ने आलोक को बहुत बार समझाया कि शराब बेहद बुरी चीज है जो पैसे और सेहत दोनों का नुकसान करती है.

समझाने पर आलोक मान जाता था लेकिन 2-3 दिन बाद ही फिर शराब का दामन थाम कर नशे में डूब जाता था.

सायना को यह बात नागवार गुजरने लगी कि आलोक के लिए शराब उस के प्यार और समर्पण से ज्यादा अहम है लेकिन उस ने कोशिशें नहीं छोड़ीं. उस का एक दूसरा बड़ा डर यह भी था कि अगर शादी के बाद भी आलोक ने शराब नहीं छोड़ी, जिस की उम्मीद ज्यादा थी, तो उस की जिंदगी दुश्वार हो जाएगी.

सरस सलिल विशेष

आलोक अपनी कमाई का बहुत बड़ा हिस्सा शराब पीने में उड़ा देता था यानी किसी भी लिहाज से वह भरोसेमंद इनसान नहीं था.

तंग आ कर जब शायना ने यह कहना शुरू किया कि वह या तो शराब को चुन ले या उसे, तो आलोक मायूस और बेबस हो कर कहता था कि वह न तो शराब छोड़ सकता है और न ही उसे. शराब उस की जरूरत है और सायना उस का प्यार.

लेकिन सायना को अब समझ आने लगा था कि आलोक की जरूरत जिंदगी पर भारी पड़ने लगी है तो उस ने आलोक को छोड़ने का फैसला ले लिया और धीरेधीरे उस से किनारा कर लिया.

आलोक के प्यार और वादों की पोल और कलई भी जल्द ही खुल गई जब नजरअंदाज किए जाने से गुस्साया आलोक कभी भी उस के होस्टल आ कर हुड़दंग और गालीगलौज करने लगा. अब तो वह दिन में भी शराब पीने लगा था और इस का जिम्मेदार सायना की बेवफाई को ठहराने लगा था.

एक दफा शराब के नशे में आलोक का ऐक्सिडैंट हुआ जिस में उस का एक पैर हमेशा के लिए खराब हो गया. एक बार फिर सायना की मुहब्बत अंगड़ाई लेने लगी और उसे लगा कि अब शायद आलोक सुधर जाए.

लिहाजा, सायना ने आलोक से मिलने का फैसला कर लिया. लेकिन उस की एक सहेली ने उसे समझा कर रोक लिया और दलील यह दी कि अब कोई फायदा नहीं एक ऐसा दोस्त या आशिक, जिसे अपनी गर्लफ्रैंड की इज्जत की परवाह न हो, उस की तरफ तरस खा कर वापस लौटना कोई समझदारी वाला काम नहीं है. अब हो सकता है कि आलोक सायना के पैसे से ही नशा करने लगे.

दूसरा कड़वा सच यह भी सायना को समझ आया कि अपनी बदहाली का जिम्मेदार वह खुद है जो लाख समझाने पर भी नहीं माना. अगर पैर ठीक नहीं हुआ तो उस की जिम्मेदारी भी सायना को ही उठानी पड़ेगी. इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि अब वह शराब पीना छोड़ ही देगा.

जल्द लें फैसला

दिल कड़ा कर के सायना ने शराबी बौयफ्रैंड से कभी न मिलने की कसम खा ली और अब उसे भूलने की कोशिश में कामयाब भी हो रही है. अब उसे जिंदगी में दोबारा दिलचस्पी पैदा हो रही है.

सायना बताती है कि जब भी वह आलोक से मिलती थी तो उस के शराब के आदी होने का खौफ हमेशा दिलोदिमाग पर छाया रहता था जिस से रोमांस का जज्बा खत्म सा हो चला था.

सायना को अपने फैसले पर अब कोई पछतावा नहीं है, उलटे वह दूसरी लड़कियों को मशवरा देती है कि अगर उन का बौयफ्रैंड शराबी है, तो वे ऐसा जरूर करें:

* पहले देख लें कि जिस से दोस्ती या प्यार करने जा रही हैं वह शराबी तो नहीं है. और अगर है भी तो शराब की लत किस हद तक है. अगर छूट सकती हो तो ही कदम आगे बढ़ाएं.

* जो बौयफ्रैंड अपनी माशूका के लिए उस के प्यार से समझाने पर शराब जैसी बुराई नहीं छोड़ सकता तो वह कतई भरोसे के काबिल नहीं कहा जा सकता.

* शराबी बौयफ्रैंड तभी तक शरीफ रहता है जब तक उसे प्यार मिल रहा है. जब माशूका शराब को ले कर झूठी या सच्ची जैसी भी नाराजगी दिखाती है तो वह हिंसक हो उठता है जिस से इस रिश्ते की बदनामी ही होती है. नशा उतरने के बाद माफी मांगने या गिड़गिड़ाने से माशूका को पसीजना नहीं चाहिए, क्योंकि जो शख्स थूक कर चाट सकता हो, वह कुछ भी कर सकता है.

* शराब के नशे में बौयफ्रैंड किसी से भी झगड़ा कर सकता है. ऐसे में बात अगर पुलिस तक जाती है तो माशूका को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. अप्रैल, 2018 में सोशल मीडिया पर एक दिलचस्प वीडियो वायरल हुआ था जिस में हैदराबाद की एक लड़की पुलिस वालों से उलझती नजर आ रही थी. हुआ इतना भर था कि इस लड़की के बौयफ्रैंड ने नशे में हैदराबाद के जुबली हिल्स इलाके में ऐक्सिडैंट कर दिया था.

टै्रफिक पुलिस ने पूछताछ की तो नशे में चूर बौयफ्रैंड तो कुछ नहीं बोला लेकिन मामला दर्ज होने पर लड़की पुलिस वालों से भिड़ गई. बाद में मामला आयागया हो गया, लेकिन यह तो साबित हो ही गया कि शराबी बौयफ्रैंड कभी भी मुसीबत की वजह बन सकता है.

  • शराबी बौयफ्रैंड को सुधारने की कोशिश करें लेकिन उस की हदें और मीआद तय कर लें.
  • शराबी बौयफैंन्ड से बहस करने से कोई फायदा नहीं, क्योंकि नशे में तुक या समझ की कोई बात आज तक न तो किसी शराबी ने समझी है और न ही उस पर अमल किया है. अकसर शराबी बौयफ्रैंड माशूका को खोने के डर से उस की हां में हां मिलाता जाता है लेकिन हकीकत में कोई इत्तिफाक उस से नहीं रखता.

शराब या प्यार

कहते हैं कि प्यार में बड़ी ताकत होती है लेकिन लाख में से एकाध मामला ही ढूंढ़े से ऐसा मिलेगा जिस में किसी शराबी ने प्यार या दोस्ती के लिए शराब छोड़ी हो, तो फिर शराबी से दोस्ती या प्यार क्यों?

इस सवाल के जवाब में दिमागी बीमारियों के माहिर भोपाल के मशहूर डाक्टर विनय मिश्रा कहते हैं कि शराबी बौयफ्रैंड हो या शौहर, ऐसे रिश्ते में शराब जहर का ही काम करती है, इसलिए सोचसमझ कर फैसला लेना चाहिए.

जज्बात की रौ में बहने से बेहतर है कि समझदारी से काम लिया जाए, नहीं तो जिंदगीभर पछताने के अलावा हाथ में कुछ नहीं रह जाता.

शराबी बौयफ्रैंड के मामले में यह थ्योरी बेमानी है कि किसी को अगर चाहो तो उसे उस की कमजोरियों के साथ अपनाओ, जबकि होना यह चाहिए कि किसी को चाहो तो उस की कमजोरियों को दूर करने की कोशिश करो और वे दूर न हों तो उसे छोड़ दो.

यह बात भी अपनी जगह ठीक है कि जरूरी नहीं कि हर शराबी बुरा आदमी हो लेकिन यह बात किसी सुबूत की मुहताज नहीं कि अकसर शराब दूसरे ऐब भी साथ ले कर आती है. मसलन, जुआ, जुर्म और तंगी. इसलिए बेहतर और खुशहाल जिंदगी के लिए शराबी बौयफ्रैंड से तोबा करना ही मुनासिब रहता है.

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