Alcohol Poisoning. 6 सितंबर, 2026 की सुबह तकरीबन साढ़े 4 बजे मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र के नौराज, गूगरा खुर्द, पाटन, छापरी और बमूरा भेड़ा जैसे गांवों से लोगों के बीमार पड़ने की खबरें आने लगीं तो आसपास के इलाकों में हडकंप मच गया.
दरअसल, 5 सितंबर की रात शराब पीने वाले गांव के लोगों को दूसरे दिन सुबह उलटी, सिरदर्द, धुंधलापन और शरीर अकड़ने के लक्षण दिखे थे. बमुराबेड़ा गांव में तो शराब पीने वाले 3 लोगों की तबीयत आधे घंटे में इतनी बिगड़ी कि उन की मौत हो गई. मौतों का सिलसिला शुरू हुआ तो 2-3 दिन में ही 28 लोगों की मौत हो गई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बड़ी मात्रा में मेथेनौल मिलने की बात सामने आई.
जानकार बताते हैं कि शराब में नशा एक ही चीज से आता है, वह है अल्कोहल. अल्कोहल भी एक जैसा नहीं होता, 2 तरह के अल्कोहल हैं, एक शरीर के लिए, दूसरा फैक्टरी के लिए. पीने वाले अल्कोहल को एथेनौल भी कहा जाता है. हर वैध शराब में यही होता है. शरीर इसे धीरेधीरे तोड़ना जानता है, इसीलिए यह जानलेवा नहीं होता. जहर वाला अल्कोहल मेथेनौल होता है. यह पीने के लिए बना ही नहीं है, यही कैमिकल पेंट थिनर, वाइपर फ्लूइड और फर्नीचर पौलिश में इस्तेमाल होता है. देखने, सूंघने और चखने में यह एथेनौल से मुश्किल से अलग पहचाना जा सकता है.
जिस शराब में असली एथेनौल की जगह मेथेनौल मिला दिया जाता है उसे ही नकली शराब कहा जाता है. शराब में मेथेनौल मिलाने की वजह उस की कम कीमत है. असली शराब पर एक्साइज ड्यूटी लगती है, जबकि मेथेनौल औद्योगिक इस्तेमाल के लिए सस्ता और आसानी से मिल जाता है. ऐसे हादसे हमेशा इसी वजह से होते हैं, नकली कारोबारी असली ब्रांड की बोतल और लेबल जस की तस कौपी कर लेते हैं और अंदर यही जहर भर देते हैं.
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