Readers Problem-

सवाल : मैं 25 साल की लड़की हूं. मेरा एक बौयफ्रैंड है और उस की उम्र 30 साल है. हम दोनों ने खूब हमबिस्तरी की है. पर अब मुझे  लगता है कि वह लड़का एक और लड़की के साथ डेट कर रहा है और मेरी तरह उसे भी शादी के सपने दिखा रहा है. जब मैं इस बारे में उस से बात करती हूं तो वह एकदम मुकर जाता है कि यह सब मेरे मन का वह है, जबकि मुझे  पता है कि वह उस लड़की के साथ कब और कहां होता है. मुझे  बस एक बार क्लियर करना है कि वह असल में चाहता क्या है, ताकि मैं अपने भविष्य को ले कर कोई फैसला कर सकूं. मुझे अपने कैरियर पर फोकस करना है और अपनी नौकरी पर भी ध्यान देना है. मेरे घर वाले जल्द ही मेरी शादी कर देना चाहते हैं और मेरे लिए यह जानना जरूरी है कि वह लड़का आखिर चाहता क्या है? मैं क्या करूं?

जवाब : अब आप को सिवा रोनेकलपने के कुछ नहीं करना है. सीधी सी बात यह है कि अब आप के बौयफ्रैंड का मन आप से भर गया है. यह खूब हमबिस्तरी करने का साइड इफैक्ट है. उस ने शादी का वादा किया था, कोई स्टैंप पेपर पर लिखापढ़ी नहीं की थी जो आप उस पर कोई क्लेम कर सकें.

हो यही सकता है कि आप एक बार खुल कर बौयफ्रैंड से बात करें कि वह आखिर चाहता क्या है. अगर ब्रेकअप चाहता है तो आप जबरदस्ती उस के गले नहीं पड़ी रह सकतीं.

बात न बने तो बेहतर होगा कि अपना रास्ता अलग कर लें और पढ़ाईलिखाई व कैरियर पर फोकस करें. और इस बार कोई ऐसा बौयफ्रैंड ढूंढ़ें जो आम चूसने के बाद गुठली फेंकने वाला न हो.

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सवाल : मैं 21 साल की हूं और उत्तर प्रदेश के एक गांव में रहती हूं. मैं ने अंगरेजी विषय में ग्रेजुएशन किया है और यहां के बच्चों को ट्यूशन पढ़ाती हूं. पर हमारे यहां एक दिक्कत है कि बच्चे अंगरेजी विषय से बहुत ज्यादा डरते हैं या फिर झिझकते हैं कि कैसे अंगरेजी में बोलें या व्याकरण को समझें.

ऐसा नहीं है कि बच्चे इस भाषा को सीखना नहीं चाहते हैं, पर उन में एक डर घर कर गया है कि गरीब का बच्चा अंगरेजी कैसे बोल और पढ़ सकता है. मुझे  लगता है कि यह कमोबेश हर देहाती बच्चे की समस्या है. हमें ऐसा क्या करना चाहिए कि उन के मन से अंगरेजी का खौफ निकल जाए?

जवाब :  अब वह दौर जा रहा है जब यह कहा जाता था कि गरीब का बच्चा अंगरेजी नहीं पढ़ सकता या यह नहीं कर सकता या कि वह नहीं कर सकता. पढ़ने के लिए एकलौती चीज जज्बा चाहिए. चूंकि अंगरेजी हमारी मातृभाषा नहीं है, इसलिए उसे बोलने में झिझक  होती है. दूसरे गांवों में अंगरेजी बोलने का माहौल नहीं रहता.

लेकिन आप जब अंगरेजी की ट्यूशन पढ़ाती ही हैं तो कोई खास दिक्कत पेश नहीं आनी चाहिए. बच्चों को रोज 2 घंटे अंगरेजी बोलने की प्रैक्टिस कराइए. बच्चों को अंगरेजी भाषा में प्रकाशित होने वाली मैगजीन ‘चंपक’ शहर से नियमित मंगा कर दें और उन्हें उस की कहानिया बोल कर पढ़ने को कहें. इस से उन की अंगरेजी सुधरेगी, क्योंकि ‘चंपक’ की अंगरेजी बहुत सरल है. Readers Problem

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