अकेलापन मुझे अवसादग्रस्त कर रहा है. मुझे अपना जीवन निरर्थक लगने लगा है. मेरी बातें सुनने वाला कोई है ही नहीं. क्या मुझे सभी से बात करनी चाहिए, क्या कोई मेरी बात समझेगा?