दिल्ली के एक होटल में 2 युवाओं ने 14 जुलाई को आत्महत्या कर ली और चूंकि उन्होंने कोई नोट नहीं छोड़ा, सो, यही लगता है कि उन्हें डर रहा होगा कि उन का प्यार दोनों के घर वाले स्वीकार न करेंगे. उन की उम्र अभी ऐसी न थी कि वे शादी कर घर बसा लेते पर प्यार की पार्टनरशिप चालू हो गई थी बिना शर्तों के पहचाने जाने.

प्यार में यही खराबी है कि शर्तें बाद में लिखी जाती हैं, पार्टनरशिप पहले हो जाती है. आम पार्टनरशिप में शर्तों की लंबी लिस्ट बन जाती है और भविष्य में परेशानी हो तो लिस्ट ले कर अदालत का दरवाजा खटखटाया जा सकता है. अभी हाल में बर्गर की बादशाह कंपनी मैक्डोनल्ड और उस की भारतीय सहयोगी विक्रम बक्शी की कंपनी के बीच पार्टनरशिप का विवाद चल रहा है और उन का विवाह टूटने पर है. लेकिन आत्महत्या की नौबत आएगी, ऐसा नहीं लगता.

शर्तों वाला प्यार दरअसल प्यार की भावना के खिलाफ होता है. पर दिक्कत है कि शर्तों का पिटारा दोनों के मन में होता है जो प्यार के परिपक्व होने पर या विवाह होने के बाद परतदरपरत खुलता है. दोनों को नहीं मालूम होता कि उस का पार्टनर प्यार और उस के बाद विवाह से क्याक्या चाहेगा और उसे कैसे पूरा किया जाएगा.

सदियों पुराने धर्मों ने शादी के बाद के तो कुछ नियम बना रखे हैं पर प्यार के बाद के नियमों के बारे में वे चुप हैं या उसे नकारते हैं. शायद उन्हें एहसास है कि प्यार के नियमकानून बनाना कठिन है. इसलिए वे कहते हैं कि भई, प्यार मत करो, शादी कर लो, फिर हम देख लेंगे.

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