Editorial. कहने को अमेरिका के प्रैजिडैंट डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के सब से ज्यादा ताकतवर देश अमेरिका के सब से ज्यादा सेफ होने चाहिए पर जिस ईरान पर उन्होंने अंधाधुंध बमबारी कर के उस के बड़े नेताओं को एकएक कर के मार डाला पर फिर भी उसे हरा नहीं पाए, अब उस से डरे हुए हैं.
अभी कुछ दिन पहले वे फ्रांस से अपने निजी हवाईजहाज में लौट रहे थे तो उन्हें बताया गया है कि ईरान इस हवाईजहाज पर मिसाइल दाग सकता है. बेचारे राष्ट्रपति ट्रंप को पहले इस हवाईजहाज में, जिसे एयरफोर्स वन कहते हैं, बैठाया गया फिर चुपके से खाने की ट्रौली में छिप कर दूसरे हवाईजहाज में बैठाया गया और दोनों हवाईजहाज अमेरिका लौटे.
पूरे अमेरिका मे इस बात पर खूब खिल्ली उड़ रही है. तरहतरह के चुटकुले बन रहे हैं, मीम बन रहे हैं.
ऐसा ही कुछ हमारे यहां गृह मंत्री अमित शाह के साथ हो रहा है. वे लोकसभा में मानसून सैशन में नहीं आए क्योंकि राहुल गांधी की अगुआई में पूरी ओपोजिशन इस बात को जानने की मांग कर रही थी कि जंतरमंतर पर कौकरोच जनता पार्टी के धरने प्रदर्शन के दौरान आखिर किस ने लाठीचार्ज का हुक्म दिया? किस ने छर्रे वाली गन चलाने का हुक्म दिया? किस ने आंसू गैस के गोले छोड़ने का हुक्म दिया?
दिल्ली पुलिस गृह मंत्री के आदेश पर काम करती है तो जवाब उन्हीं के पास होगा पर जिस भीड़ को इंस्टाग्राम पर अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘फ्रैंड्म’ पर रील बना कर पुचकार रहे हैं उसे मारनेकूटने का हुक्म भी किस ने दिया, उन्हें मालूम होना चाहिए.
जैसे ईरान डोनाल्ड ट्रंप को अपने सब से बड़े नेताओं की हत्या के लिए निजी तौर पर जिम्मेदार मान रहा है और उन से बदला आज नहीं तो कल लेने वाला है वैसे कौकरोच जनता पार्टी के नाम पर जागे युवा उन पुलिस वालों के नाम, अफसरों के नाम, मंत्रियों के नाम जान कर ही रहेंगे जिन्होंने लाठी चलवाईं, आंसू गैस के गोले छोड़े, पैलेट गन चलवाई.
डैमोक्रेसी हो या न हो, निहत्थे 18-20-25 साल के युवाओं को पीटना वह भी तब जब वे सिर्फ नारे लगा रहे हों, सिर्फ बैरियर हटा कर अपने खड़े होने की जगह ढूंढ़ रहे हों, एकदम गलत है. ये युवा अपने को कौकरोच कहने से नाराज हैं. ये युवा सरकार के थोपे हुए एग्जामों में होने वाली गड़बडि़यों से नाराज हैं. ये युवा महंगी होती पढ़ाई पर नाराज हैं. ये युवा बेरोजगारी के बढ़ने से नाराज हैं. ये तख्ता नहीं पलट रहे सरकार का, सिर्फ अपना कल सुधारना चाहते हैं.
इन्हें पीटना चाहे दिल्ली में हो, लखनऊ में हो, पटना में हो, रांची में हो गलत है. ये ज्यादा नहीं मांग रहे, बस ठीक रहे यह मांग रहे हैं, ये सिर्फ सरकार के सही तरह से काम करने के लिए कह रहे हैं. इन को पीटने वाला डोनाल्ड ट्रंप की तरह डरा है, यह थोड़े अचरज की बात है. देश के युवा कोई ईरान तो नहीं हैं जिन के पास मिसाइलें हैं. ओपोजिशन अगर पूछ रही है कि पुलिस को किस ने हुक्म दिया तो गलत क्या है?
असल में यह बड़ी पीढ़ी इस बात पर टिकी है कि हम ने जो कहा उसे चैलेंज न करो. हम से पूछो न. हमें कुछ न कहो. हम ने जैसेतैसे, चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट को धमका कर चुनाव जीत लिया तो हम राजा बन गए हैं जो सीता को बिना वजह से निकाल सकते हैं. पांडवों को वनवास में भेज सकते हैं. अपने मनचाहों को ऋषिमुनियों की तरह अरबों के उद्योग दे सकते हैं. कोई कुछ पूछे नहीं.
यह तानाशाह भी नहीं करते, क्योंकि उन्हें भी जनता को कुछ हद तक खुश रखना पड़ता है. आज के युग में आप जबरन किसी से हवाईजहाज नहीं चलवा सकते क्योंकि वह जब चाहे उसे गिरा सकता है. आप की बिजली एक छोटा सा मैनेजर ब्रेकडाउन कह कर काट सकता है. एक अदना सा आप का फोन हैक कर सकता है. आज सब को साथ ले कर चलने का जमाना है. हिंदूमुसलिम, ब्राह्मणअछूत करने का टाइम नहीं है. जो ऐसा करेगा, वह डर रहा है तो मतलब है कि आज के युवा में दम है. आज नहीं तो कल वे बड़ा देश जरूर बनाएंगे. Editorial




