देवर बना भाभी की जान का दुश्मन, सीना काट कर की हत्या

दूरदराज से रोजीरोटी के लिए महानगरों में आ कर रहने वाले लोग जरूरत पड़ने पर अपने रिश्तेदार, करीबी और अपने गांव के लोगों की यह सोच कर मदद कर देते हैं कि उन की भी रोजीरोटी का साधन बन जाएगा. लेकिन कई बार उन्हीं में कोई आस्तीन का सांप भी निकल आता है. हितेश कर्तकपांडी ऐसा ही सांप था…  

54 वर्षीय धनंजय नारायण तांडेल दक्षिण मुंबई के समुद्र किनारे बसी पौश कालोनी कोलाबा की सुंदर नगर बस्ती में अपने परिवार के साथ रहते थे. परिवार में उन के अलावा 2 बेटे और एक सुंदर सी बहू थी. उन की पत्नी का काफी समय पहले देहांत हो चुका था. उन का छोटा सा परिवार था, जहां सभी लोग सुखचैन से रह रहे थेधनंजय नारायण सुंदर नगर में करीब 30 सालों से रहते रहे थे. उन के प्रेमिल स्वभाव की वजह से बस्ती के सारे लोग उन के परिवार को खूब मानसम्मान देते थे.

धनंजय नारायण का बड़ा बेटा महेंद्र तांडेल मुंबई की एक प्रतिष्ठित कंपनी में काम करता था, जबकि छोटा बेटा चेतन कोलाबा के एक शोरूम में नौकरी करता था. तांडेल भी एक शोरूम में चपरासी थे. सभी लोग सुबह को अपनेअपने काम पर निकल जाने के बाद सब शाम को ही घर लौटते थे. महेंद्र की पत्नी श्वेता सुबह जल्दी उठ कर सब के लिए टिफिन और चायनाश्ता तैयार करती और उन के जाने के बाद घर के रोजमर्रा के कामों में जुट जाया करती थी.

घटना 10 मई, 2017 की है. हमेशा की तरह घर के सभी लोग अपनेअपने काम पर निकल गए थे. दोपहर लंच के बाद महेंद्र तांडेल ने अपनी आदत के अनुसार पत्नी श्वेता को फोन किया. यह उन का रोजाना का नियम था. काफी देर तक घंटी बजती रही. लेकिन श्वेता ने उस की काल रिसीव नहीं की. बारबार नंबर मिलाने के बाद भी जब श्वेता ने फोन रिसीव नहीं किया तो महेंद्र के दिल की धड़कनें तेज हो गईं, क्योंकि इस से पहले कभी ऐसा नहीं हुआ था.

वह हमेशा महेंद्र के फोन की राह देखा करती थी. श्वेता कहां है और क्या कर रही है, यह जानने के लिए महेंद्र ने अपने पड़ोसी को फोन कर के श्वेता के बारे में पूछा. कुछ समय बाद पड़ोसी ने महेंद्र को जो खबर दी, उस से वह चौंक गया. पड़ोसी ने बताया कि श्वेता ने घर का मुख्य दरवाजा बंद कर रखा है और घर के अंदर तेज आवाज में टीवी चल रहा है. दरवाजा थपथपाने और आवाज देने पर भी वह दरवाजा नहीं खोल रही. ऐसी क्या बात हो गई जो श्वेता दरवाजा बंद कर के तेज आवाज में टीवी देख रही है.

महेंद्र ने बिना देर किए अपने पिता धनंजय को सारी बातें बता कर उन्हें घर पहुंचने को कहा. बेटे की बात सुन कर धनंजय घर की तरफ निकल गए. किसी अनहोनी के खयाल से वह रास्ते भर परेशान रहे. घर पहुंचने के बाद उन्होंने जैसेतैसे कर के दरवाजा खोला तो अंदर का जो नजारा था,उसे देख कर उन के होश उड़ गए. बहू श्वेता की बाथरूम में लहूलुहान लाश पड़ी थी. उन्होंने यह जानकारी अपने दोनों बेटों को दी तो वे भी थोड़ी देर में रोतेपीटते घर पहुंच गए.

पड़ोसियों ने पूरे परिवार को धीरज बंधाते हुए मामले की खबर पुलिस कंट्रोलरूम को दे दी. कोलाबा के थानाप्रभारी विजय धोपावकर को जब पुलिस कंट्रोल रूम से यह जानकारी मिली तो वह पीआई इमाम शिंदे, सुभाष दुधगांवकर, एपीआई विजय जाधव, सुदर्शन चव्हाण, अमोल ढोले, महिला एसआई प्रियंका देवकर, कांस्टेबल प्रवीण भालेराव, निकम पाटिल के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए. उन्होंने इस की सूचना अपने उच्चाधिकारियों को भी दे दी थी.

घटनास्थल कोलाबा थाने से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर था, इसलिए पुलिस टीम करीब 10 मिनट में वहां पहुंच गई. तब तक धनंजय के मकान के पास मोहल्ले के तमाम लोग जमा हो चुके थे. पुलिस जब मकान में पहुंची तो घर का सारा सामान बिखरा पड़ा था. कांच के कई बरतन टूटे हुए थे. श्वेता का शव बाथरूम के अंदर पड़ा हुआ था. उस के गले और छाती पर चाकू के कई गहरे घाव थे. उस के बदन पर सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज था, जो कई जगह से फटा हुआ था, जिस से यह संभावना लग रही थी कि अभियुक्त उस के साथ मनमानी करना चाहता था. कमरे की स्थिति देख कर ऐसा लग रहा था जैसे मृतका और अभियुक्त के बीच काफी हाथापाई वगैरह हुई थी.

थानाप्रभारी अभी घटनास्थल का निरीक्षण और पूछताछ कर ही रहे थे कि डीसीपी मनोज कुमार शर्मा, एसीपी राजेंद्र चव्हाण भी वहां पहुंच गए. मौकामुआयना करने के बाद अधिकारियों ने वहां मौजूद लोगों से बात की. इस के बाद थानाप्रभारी ने घटनास्थल की काररवाई पूरी कर के लाश पोस्टमार्टम के लिए जे.जे. अस्पताल भेज दी. डीसीपी के दिशानिर्देश के बाद थानाप्रभारी विजय धोपावकर ने जांच की एक रूपरेखा तैयार की, जिस की जिम्मेदारी उन्होंने पीआई इमाम शिंदे और सुभाष दुधगांवकर को सौंप दी थी

घटनास्थल कोलाबा जैसे पौश इलाके में था, जहां सेना के तीनों अंगों के अधिकारियों की कालोनियां हैं. मामला कहीं तूल पकड़ ले, इसलिए डीसीपी ने कोलाबा पुलिस की सहायता के लिए माता रमाबाई अंबेडकर पुलिस थाने के तेजतर्रार थानाप्रभारी सुखलाल बर्पे को भी लगा दिया. थानाप्रभारी सुखलाल बर्पे ने मामले की समानांतर रूप से जांच शुरू कर दी. कोलाबा थाने की पुलिस टीम मृतक के ससुराल वालों से बातचीत कर परिजनों के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स का अध्ययन कर ही रही थी कि समानांतर जांच कर रहे पीआई सुखलाल बर्पे ने एक गुप्त सूचना के आधार पर श्वेता के कातिल का पता लगा कर उसे हिरासत में ले लिया

पीआई सुखलाल बर्पे ने अपने सहायकों के साथ अपनी जांच का मुख्य केंद्र मृतक श्वेता के परिवार को ही बनाया था, क्योंकि वह यह जानते थे कि इस तरह की घटना अधिकतर अपनी जानपहचान वालों के बीच ही घटती है. इसलिए उन्होंने घटनास्थल का बारीकी से अध्ययन किया थाइस विषय में उन्हें अधिक से अधिक जानकारी मृतका के परिवार वालों से ही मिल सकती थी. उन्होंने श्वेता के साथ रहने वालों की जन्मकुंडली को खंगाला. उन्हें अपनी इस मुहिम में कामयाबी भी मिली. तांडेल परिवार का करीबी और चेतन तांडेल का जिगरी दोस्त हितेश कर्तकपांडी उन के रडार पर गया.

14 मई, 2017 को पीआई सुखलाल बर्पे की जांच टीम ने उसे फोर्ट इलाके के एक शोरूम से हिरासत में ले लिया. पुलिस टीम के अनुसार, जिस दिन यह घटना घटी थी, उस दिन वह सब के साथ काम पर गया जरूर था लेकिन कुछ ही समय बाद वापस घर लौट आया. इस के अलावा वह पुलिस के एक भी सवाल का जवाब सही ढंग से नहीं दे पाया थाकोलाबा पुलिस और माता रमाबाई अंबेडकर थाने की संयुक्त टीम ने हितेश से पूछताछ शुरू की तो उस ने अपना गुनाह कबूल कर लिया. उस ने श्वेता की हत्या की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी.

23 वर्षीय हितेश कर्तकपांडी महाराष्ट्र के जिला पालघर के उसी गांव का रहने वाला था, जिस गांव के धनंजय नारायण तांडेल मूल निवासी थे. पारिवारिक स्थिति ठीक होने के कारण धनंजय तांडेल रोजीरोटी की तलाश में महानगर मुंबई गए थेवह कोई ज्यादा पढ़ेलिखे नहीं थे, इसलिए उन्हें कोई ढंग की नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने एक शोरूम में चपरासी की नौकरी कर ली. फिर वह सुंदर नगर बस्ती में किराए पर रहने लगे. बाद में वह अपने बीवीबच्चों को भी ले आए

उन के बीवीबच्चों को मुंबई आए अभी कुछ ही साल हुए थे कि अचानक उन की पत्नी की मृत्यु हो गई. पत्नी की मौत के बाद वह टूट से गए थे, लेकिन उन्होंने अपने बच्चों को नहीं टूटने दिया. दोनों बेटों को उन्होंने पढ़ालिखा कर इस काबिल बना दिया कि उन की नौकरी लग गई. परिवार में आमदनी बढ़ी तो उन्होंने सुंदरनगर में ही खुद का एक मकान खरीद लिया. धनंजय तांडेल की पत्नी के गुजर जाने के बाद घर सूनासूना सा हो गया था. ऐसे में उन्होंने अपने बड़े बेटे महेंद्र तांडेल का विवाह श्वेता से कर दिया. श्वेता देखने में जितनी सुंदर थी, उतनी ही पढ़ीलिखी और घर के काम में होशियार थी. 

श्वेता और महेंद्र के विचार आपस में खूब मिलते थे, इसलिए दोनों ही एकदूसरे को बहुत चाहते थे. औफिस पहुंचने के बाद भी महेंद्र को जब भी समय मिलता, वह श्वेता को फोन कर लेता था. उन की शादी के 2 साल कैसे बीत गए, पता ही नहीं चलाधनंजय अपने दोनों बेटों के साथ कभीकभी अपने पैतृक गांव भी जाते रहते थे. उन के छोटे बेटे चेतन की गांव के ही हितेश कर्तकपांडी से दोस्ती हो गई थी. दोनों ही हमउम्र थे. चेतन जब कभी अपने गांव जाता तो हितेश के साथ सैरसपाटा करता था.

जब हितेश कामधंधे की तलाश में मुंबई आया तो तांडेल परिवार ने उस की काफी मदद की. इतना ही नहीं, महेंद्र ने कोशिश कर के उस की कोलाबा के प्यूमा शोरूम में नौकरी भी लगवा दी. उस के घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, उस के रहने का बंदोबस्त भी उस ने अपने घर में ही कर दिया था. पहली मंजिल पर धनंजय, उन का बेटा चेतन और चेतन का दोस्त हितेश रहता था, जबकि नीचे के भाग में महेंद्र अपनी पत्नी श्वेता के साथ रहता था.

कुछ दिनों तक तो हितेश कर्तकपांडी ठीक रहा, लेकिन जैसेजैसे वह महेंद्र के परिवार में घुलता गया, उस की झिझक भी दूर हो गई. वह श्वेता से कुछ ज्यादा ही घुलनेमिलने लगा. देवर का रिश्ता होने की वजह से दोनों के बीच हंसीमजाक भी चलती रहती थी. हितेश श्वेता को अपने रंग में रंगने की कोशिश करने लगा. यानी वह श्वेता को मन ही मन चाहने लगा था, जबकि श्वेता केवल चेतन की तरह हितेश को अपना देवर ही मानती थी. इस से आगे और कुछ नहीं. पति और देवर की तरह वह हितेश का भी टिफिन तैयार कर देती थी.

घटना के दिन हितेश काम पर तो सब के साथ गया, लेकिन कुछ देर बाद वह घर वापस आ गया. श्वेता के पूछने पर उस ने सिरदर्द का बहाना बनाया. श्वेता ने उसे चाय के साथ सिरदर्द की गोली दे कर उसे ऊपर के कमरे में जा कर आराम करने को कहा और फिर वह घर के कामों में लग गई. उसे क्या मालूम था कि उस की मौत का वारंट निकल चुका था. हितेश ऊपर के कमरे में न जा कर कुछ देर तक श्वेता के सौंदर्य को निहारता रहा. इस के बाद जब श्वेता बाथरूम में चली गई तो उठ कर हितेश ने अपनी योजना के अनुसार टीवी की आवाज तेज कर दी, साथ ही एसी का टेंपरेचर भी हाई कर दिया. फिर वह श्वेता के साथ मनमानी करने के उद्देश्य से बाथरूम की तरफ गया.  

बाथरूम का दरवाजा खुलते ही वह श्वेता से मनमानी करने पर उतर आया. उस ने श्वेता को दबोच लिया और बोला, ‘‘भाभी, आज मुझे अपने मन की मुराद पूरी कर लेने दो. मैं ने जब से तुम्हें देखा है, तब से तड़प रहा हूं. दिन का चैन और रातों की नींद हराम हो गई है.’’

हितेश की यह बात सुन कर श्वेता बुरी तरह घबरा गई थी. अपने आप को उस से बचाने के लिए वह पूरे कमरे में इधरउधर भागने लगी. वह अपने बचाव के लिए चीखचिल्ला भी रही थी लेकिन टीवी की तेज आवाज में उस की आवाज दब गई थी. हितेश के सिर पर वासना का भूत कुछ इस तरह सवार था कि उस के सोचनेसमझने की सारी शक्ति खत्म हो गई थी. वह श्वेता के जिस्म के लिए पागल सा हो गया था. हितेश की इस हरकत से श्वेता भी अपना आपा खो बैठी थी. वह कमरे में रखा सामान तोड़ने लगी ताकि आवाज सुन कर पड़ोसी जाएं.   

मुख्य दरवाजे पर आधुनिक लौक लगा था,जिसे वह जल्दबाजी में खोल नहीं सकी. उस समय श्वेता की ऐसी स्थिति थी, जैसे एक पिंजरे में बाघ के सामने बकरी की होती है. इस दौरान उस के कपड़े भी फट गए थे. अपने मकसद में कामयाब न होते देख हितेश को श्वेता पर गुस्सा आ गया. वह किचन में गया और वहां से सब्जी काटने वाला चाकू उठा लाया. उस चाकू से उस ने श्वेता के गले और सीने पर कई वार कर के उसे मौत के घाट उतार दिया और उस की लाश को बाथरूम के पास डाल दिया.

श्वेता की हत्या के बाद वह बुरी तरह डर गया था. कुछ समय तक वह वहीं बैठा रहा. इस के बाद उस ने बाथरूम में जा कर अपने हाथमुंह साफ किए, कपड़े बदले और कमरे को उसी स्थिति में छोड़ कर अपने काम पर चला गया. दरवाजा भिड़ते ही आधुनिक लौक फिर से बंद हो गया था. पुलिस टीम ने हितेश कर्तकपांडी से विस्तार से पूछताछ करने के बाद उस के खिलाफ भादंवि की धारा 302, 452 के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे पुलिस हिरासत में आर्थर रोड जेल भेज दिया.

जांच अधिकारी पीआई इमाम शिंदे और सुभाष दुधगांवकर ने अपनी जांच पूरी कर मामले का आरोपपत्र अदालत में दाखिल कर दिया. कथा लिखने तक मामला अदालत में विचाराधीन था.

—- फोटो काल्पनिक है, इसका घटना से कोई संबंध नहीं है

पहली गर्लफ्रेंड के साथ मिलकर की दूसरी गर्लफ्रेंड की हत्या

बी.फार्मा की पढ़ाई करने वाला 23 वर्षीय गौरव सरकार अपनी सहपाठी 19 वर्षीया सैयद सारा अली से एकतरफा प्यार करता था. जबकि उस की गर्लफ्रेंड 18 वर्षीय स्निग्धा मिश्रा नहीं चाहती थी कि गौरव सारा के करीब जाए. प्यार के इस मकडज़ाल में इन तीनों में से एक की हत्या हो गई. आप भी जानें कि किस ने रची हत्या की साजिश?

अप्रैल महीने के आखिरी सप्ताह की 25 तारीख थी. गरमी चरम पर थी, जबकि शाम ढलने को हो आई थी. सैयद साबिर अली अपने घर लौटे आए थे. आते ही उन्होंने अपनी बेगम शबाना से पसीना पोंछने के लिए तौलिया मांगा. बेगम जब तौलिया और एक गिलास पानी ले कर आई तब उन्होंने देखा कि बेगम के चेहरे पर चुहचुहा आई पसीने की बूंदें चमक रही हैं. चेहरे पर परेशानी के भाव साफ नजर आ रहे थे और चिंता झलक रही थी. 

साबिर अली तपाक से पूछ बैठे, ”क्या हुआ शबाना, काफी परेशान दिखाई दे रही हो? बाहर से आया मैं हूं और पसीना तुम्हारे चेहरे पर?’’

बात ही कुछ ऐसी है,’’ शबाना उदासी के साथ बोली.

सब खैरियत तो है न!’’ साबिर अली चिंतित आवाज में बोले.

खाक खैरियत होगी. आप की लाडली सारा अभी तक कालेज से लौट कर नहीं आई है?’’ शबाना बोली.

अरे आ जाएगी, इस में इतना परेशान होने की क्या जरूरत है?’’ साबिर अली सहजता के साथ शांत भाव से बोले.

”…लेकिन उस का मोबाइल बंद आ रहा है. रोज तो छुट्टी होते ही दोपहर बाद वह घर आ जाती थी. इस से पहले ऐसा कभी नहीं हुआ कि वह इतनी देर तक घर से बाहर रही हो?’’ परेशान लहजे में शबाना बोली.

अरे आ जाएगी, रास्ते में ट्रैफिक भी तो कम नहीं होता है…और फिर उस के साथ गौरव भी तो होगा. सारा का मोबाइल बंद है तो उस से पता कर लेती.’’ साबिर चेहरा पोंछते हुए तसल्ली के साथ बोले.

हां, उसी के संग घूम रही होगी कहीं. फिर भी पता नहीं क्यों मेरा दिल घबरा रहा है.’’ शबाना चिंता जताती हुई बोली.

तुम बिलकुल भी घबराओ नहीं, थोड़ी देर और इंतजार कर लो, सारा आ जाएगी.’’ साबिर बोले और इत्मीनान से पानी पीने लगे.

चिंतित शबाना कमरे में चहलकदमी करने लगी. वह बारबार दीवार पर टंगी घड़ी पर नजर दौड़ाने के साथ ही खिड़की से सड़क की तरफ टकटकी लगा कर देखने लगी. शबाना को अपनी बेटी सारा के लौटने का बेसब्री से इंतजार था. कुछ समय में अंधेरा भी घिर आया…

रात हो गई… और देर रात तक जब सारा घर नहीं लौटी, तब साबिर अली समेत परिवार के सभी सदस्य बेहद चिंतित हो गए. सभी की चिंता बढ़ती जा रही थी. वे समझ नहीं पा रहे थे कि क्या किया जाए? रात में सारा की तलाश कहां की जाए? इंदौर के चंदन नगर में रहने वाले सैयद साबिर अली इसी उधेड़बुन में पहले बेटी के एक्रोपोलिस कालेज गए, जहां से वह बी.फार्मा की पढ़ाई कर रही थी. कालेज में सिर्फ चौकीदार मिला. उस से सारा के बारे में कोई खास जानकारी नहीं मिल पाई. ऐसी स्थिति में वह निराश हो कर घर लौट आए. 

घर आ कर साबिर ने बीवी से उस के साथ पढऩे वाली लड़कियों के बारे में मालूम किया. बीवी को ही उन से बात करने को कहा. सारा की सहेलियों से ही सारा के उस दिन की गतिविधियों के बारे में थोड़ी जानकारी मालूम हुई. उन से मालूम हुआ कि सारा दोपहर में 3 बजे ही कालेज से चली गई थी. फिर तो उसे ज्यादा से ज्यादा 4 बजे तक घर पर पहुंच जाना चाहिए था. इस जानकारी से सारा को तलाशने में कोई खास मदद नहीं मिली, जबकि वह अगले दिन सुबह होने तक घर नहीं पहुंची थी.

शबाना अपने बेटे के साथ आसपास के घरों से ले कर बेटी की सहेलियों और गौरव के घर तक गई, लेकिन सारा का कहीं पता नहीं चल पाया. दिन गुजरने के साथसाथ सारा के लापता होने की खबर इंदौर के चंदन नगर में उस के जानने वाले तमाम लोगों के बीच फैल गई. सैयद सारा अली के परिवार से सहानुभूति रखने वाले लोग भी उसे ढूंढने में जुट गए. वह कालेज से कहां चली गई, इस बात को कोई नहीं जानता था. किसी को अंदाजा नहीं लग पा रहा था कि आखिरकार उस के साथ हुआ क्या है.

आखिर सारा गई तो गई कहां

जवान बेटी के रहस्यमय परिस्थितियों में गायब होने से साबिर का परिवार बहुत परेशान था, शबाना का बेटी के इंतजार में रोरो कर बुरा हाल था. हर आहट पर वह दरवाजे की तरफ देखने लगती थी. पूरी रात और दिन परेशानी में गुजरी थी. चारों ओर पता कर जब साबिर और उन का परिवार थक गया, तब वे 26 अप्रैल की सुबह 10 बजे के करीब शिप्रा थाने गए. एसएचओ बृजेंद्र सिंह को सारी बात बता कर उन्होंने बेटी की गुमशुदगी की तहरीर सौंप दी.

सैयद सारा अली की गुमशुदगी दर्ज कर के पुलिस अपनी काररवाई में जुट गई थी. पुलिस ने अनुमान लगाया कि सारा अपने परिचित या रिश्तेदार के घर चली गई होगी, लेकिन पुलिस का यह अनुमान गलत साबित हुआ. उस के बाद मामला रंजिश का होने की आशंका जताई गई. पुलिस ने साबिर और उस की पत्नी शबाना से इस बारे में पूछताछ की. उन्होंने किसी से भी दुश्मनी या रंजिश होने की बात से इनकार कर दिया. उन्होंने बताया कि उन की कभी भी किसी से तूतूमैंमैं तक नहीं हुई.

इस जानकारी से पुलिस उलझन में पड़ गई. अंत में पुलिस ने सारा का किसी के साथ प्रेम संबंध के बारे में पूछा. इस बारे में भी साबिर और शबाना ने सिरे से इनकार कर दिया. उन्होंने यहां तक कहा कि उन की बेटी निहायत ही शरीफ है. उसे पढ़ाई के अलावा और बातों में जरा भी दिलचस्पी नहीं है. सैयद सारा अली के बारे में घर वालों से मिले संतोषजनक जवाब के बाद पुलिस ने अपने स्तर से उस की तलाशी की योजना बनाई. घर वालों से उस का फोटो ले कर सभी थानों में भिजवा दिया. सारा के बारे में कोई सूचना कहीं से भी नहीं मिली, जबकि उस की गुमशुदगी के 20 दिन गुजर चुके थे. 

पुलिस सारा के बारे कुछ भी पता लगाने में असफल थी. पुलिस से ले कर परिवार के लोगों के सामने सब से बड़ा सवाल था कि सारा आखिर गई तो कहां गई. ऐसी स्थिति में सारा के घर वालों की निराशा बढ़ती जा रही थी और वे पुलिस पर नाराजगी भी जताने लगे थे. आखिरकार उन्होंने 15 मई, 2024 को एडवोकेट मुजाहिद मंसूरी के माध्यम से माननीय हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर दी. तब तक गुमशुदगी का यह मामला बहुचर्चित हो चुका था. कोर्ट में इस मामले की 28 मई को पहली सुनवाई हुई. 

हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पुलिस को विधिवत नोटिस जारी कर सारा गुमशुदगी मामले में प्रगति रिपोर्ट मांगी. एसएचओ प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर पाए. इस स्थिति में मामले की सुनवाई की अगली तारीख 3 जुलाई तय कर दी गई. इस तारीख को जब सुनवाई हुई, तब हाईकोर्ट ने शिप्रा थाने के एसएचओ को कड़ी फटकार लगाई. साथ ही यह मामला वरिष्ठ अधिकारी को ट्रांसफर करने की बात कहते हुए सारा को ढूंढने के लिए पुलिस को 2 सप्ताह की मोहलत दी.

पुलिस के लिए मामला पेचीदा होने के साथसाथ चुनौती भरा बन चुका था. सारा के लापता हुए करीब 2 माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी सैयद सारा अली का कहीं भी कोई सुराग का नहीं मिलना, चिंता का एक बड़ा कारण बन चुका था. पुलिस अब इस संशय में थी कि सारा जिंदा भी है, या नहीं? पुलिस अब इसी नजरिए से उस की जांचपड़ताल में जुट गई थी. एसपी (देहात) सुश्री हितिका वासल इस मामले को ले कर काफी गंभीर हो गई थीं. 

उन्होंने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को बुला कर जल्द से जल्द इस मामले को निपटाने के सख्त निर्देश दिए. यह मामला सिर्फ हाईकोर्ट ही नहीं, बल्कि स्थानीय अखबारों और न्यूज चैनलों में आने के कारण काफी चर्चा में आ गया था. इस से पुलिस की काफी छीछालेदर होने लगी थी. इस बाबत रूपेश द्विवेदी एडीशनल एसपी (ग्रामीण) ने शिप्रा थाना पुलिस को सारा की सुरागसी में लगा दिया था. एसपी (ग्रामीण) और एडीशनल एसपी (ग्रामीण) ने नए सिरे से जांच के तमाम बिंदुओं पर विचारविमर्श किया. 

ऐसे लोगों की फेहरिस्त तैयार करवाई, जिन का सारा के घर थोड़ा भी आनाजाना था. इस में एक नाम गौरव सरकार का सामने आया. पुलिस को पता चला कि वह भी सारा के साथ एक्रोपोलिस कालेज से बी.फार्मा की पढ़ाई कर रहा था. वह अकसर सारा के पास आता रहता था. वह सारा के अलावा परिवार के सभी सदस्यों से घुलामिला था. उस के बाद से जांच गौरव को लक्ष्य बना कर की जाने लगी. पुलिस उस के घर गई. उस के बारे में घर वालों से पूछताछ की. उन्होंने बताया कि वह नौकरी के सिलसिले में शहर से बाहर गया है. 

पुलिस ने घर वालों से गौरव का मोबाइल नंबर लिया, लेकिन उसे काल कर बात करना जरूरी नहीं समझा. पुलिस ने पहले उस के फोन नंबर की काल डिटेल्स के साथसाथ पिछले 2 महीनों की लोकेशन रिपोर्ट निकलवाई. इस आंकड़े का विश्लेषण करने के बाद पता चला कि सैयद सारा अली के लापता होने वाले दिन गौरव की सारा और स्निग्धा मिश्रा से कई बार बातें हुई थीं. इस जांच में यह भी पता चला कि सारा के लापता होने वाले दिन सारा, गौरव और स्निग्धा के फोन की लोकेशन एक साथ ही थी, जो शाम 4 बजे तक उन तीनों की लोकेशन महू के हरसोला फाटा के जंगल में पाई गई. इस के बाद सारा का मोबाइल फोन स्विच्ड औफ हो गया था.

सहपाठी क्यों आए शक के घेरे में

पुलिस समझ गई कि सारा के लापता होने का राज गौरव और स्निग्धा से मालूम हो सकता है.  उन से पूछताछ के लिए हिरासत में लेने की तैयारी की गई. गौरव के बारे में उस के घर वालों से कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई थी. पुलिस ने 10 जुलाई, 2024 को गौरव को तब गिरफ्तार कर लिया, जब वह नासिक के एक रेस्टोरेंट में वेटर का काम कर रहा था. इसी तरह से स्निग्धा को पिपल्याहान स्थित उस के घर से हिरासत में ले लिया. पुलिस ने उन दोनों से कई घंटों तक पूछताछ की. उन से सारा के बारे में घुमाफिरा कर कई सवाल किए गए. उन्होंने भी हर सवाल का जवाब घुमाफिरा कर दिया. 

उन की बातों से पुलिस ने महसूस किया कि ये दोनों सारा के बारे में कुछ अधिक बताने से कतरा रहे हैं. जबकि कई बातों से पुलिस ने अनुमान लगा लिया था कि उन की सारा से अच्छी और गहरी जानपहचान थी. पुलिस इतना जरूर समझ गई कि दोनों बेहद ही शातिर हैं. फिर क्या था, पुलिस ने सीधेसीधे गौरव और स्निग्धा पर सारा की गुमशुदगी में उन का हाथ होने का आरोप लगा दिया. जब उन पर कानूनी धाराएं लगा कर उन के खिलाफ काररवाई करने की बात कही गई, तब वे घबरा गए. उन की जुबान खुलवाने का तरीका काम कर गया. 

दोनों समझ गए अब पुलिस से ज्यादा देर तक सच छिपाया नहीं जा सकता. दोनों ने पुलिस के सामने घुटने टेक दिए और सच उगल दिया. उन्होंने जो बताया वह बेहद चौंकाने वाला था. उन्होंने कहा, ”सैयद सारा अली अब इस दुनिया में नहीं है.’’ यह सुन कर पुलिस अधिकारी चौंक गए, उन्हें अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा था. उन्होंने दोनों से पूछा, ”क्या हुआ उस के साथ? कब हुई घटना? उस में किसकिस की क्या भागीदारी थी? क्यों ऐसा किया गया सारा के साथ? उस की लाश कहां है?’’ 

पुलिस ने इस तरह के कई सवालों के जवाब जानने के लिए दोनों से लंबी पूछताछ की. गौरव ने बताया कि उस ने स्निग्धा के साथ मिल कर सारा की हत्या कर दी थी. स्निग्धा उस की गर्लफ्रेंड है. एक समय में सारा उस की प्रेमिका हुआ करती थी और उस की सहपाठी थी. सारा को मार कर उन्होंने ही उस की लाश महू क्षेत्र के हरसोला के जंगल में फेंक दी थी. अपना अपराध कुबूल करने के बाद गौरव ने परतदरपरत सारा की हत्या का राज खोल दिया कि उस ने कैसे उसे मौत के घाट उतारा. कैसे उस की गर्लफ्रेंड स्निग्धा ने इस काम में उस का सहयोग किया. गौरव के इस बयान के आधार पर एसएचओ ने सारा सैयद (19) की गुमशुदगी के प्रकरण को हत्या में तब्दील कर गौरव सरकार और स्निग्धा मिश्रा को नामजद कर हत्या कर लाश छिपाने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कर ली.

पुलिस को सारा का शव तो नहीं मिला लेकिन दोनों आरोपियों गौरव सरकार ( 23) और उस की गर्लफ्रेंड स्निग्धा मिश्रा (18) की निशानदेही पर महू क्षेत्र के हरसोला के जंगल में सघन तलाशी अभियान चला कर सारा के शव की हड्ïिडयां, बाल, कपड़ों के कुछ टुकड़े और ब्रेसलेट के अलावा हत्या में इस्तेमाल किए गए चाकू को बरामद करने में सफलता हासिल कर ली. गौरव द्वारा अपनी सहपाठी से मोहब्बत की बुनियाद पर रची गई उस की हत्या की खतरनाक साजिश की पूरी कहानी इस प्रकार सामने आई

सैयद साबिर अली मध्य प्रदेश के शहर इंदौर के चंदन नगर में अपनी बीवी शबाना बी और 2 बच्चों के साथ रहते थे. बच्चों में बड़ी बेटी का नाम सैयद सारा अली और बेटा सैयद जावेद अली (बदला नाम) थे. साबिर छोटे से परिवार के साथ वह हंसीखुशी से रह रहे थे. साबिर अपने बच्चों को अच्छी तालीम देना चाहते थे. वह चाहते थे कि उन के दोनों बच्चे पढ़लिख कर लायक बन जाएं. यही कारण था कि उन्होंने बेटी सारा को उस की मरजी के मुताबिक आजादी दी थी. उस के पसंद की पढ़ाई फार्मासिस्ट करवाने के लिए कालेज में नाम लिखवा दिया था. वह इंदौर-देवास बाईपास स्थित एक्रोपोलिस कालेज से बी. फार्मा की पढ़ाई कर रही थी. इसी कालेज से गौरव सरकार भी बी. फार्मा कर रहा था.

गौरव दोस्ती को प्यार समझने की कर बैठा भूल

दोनों की मुलाकात और जानपहचान की शुरुआत कालेज की कैंटीन से हुई थी. गौरव ने सैयद सारा अली को एक बार क्या देखा, उस पर रीझ गया था. उस की खूबसूरती उसे भा गई थी. उस के बात करने के लहजे में उर्दू जुबान का वह कायल हो गया था. जब वह बातें करती थी, तब गौरव को ऐसा महसूस होता था, जैसे पुराने जमाने की कोई फिल्म की हीरोइन हो. हर बात नपेतुले अंदाज में अदाकारी के साथ करती थी. साधारण कपड़ों में भी उस का ग्लैमर निखर कर सामने आ जाता था. जल्द ही दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई और वह सारा से प्रेम करने लगा. सारा उस से प्रेम करती थी या नहीं, इस का गौरव को पता नहीं था. सारा एक बिंदास स्वभाव की लड़की थी. उस पर पढ़ाई का भूत सवार रहता था. इस बारे में किसी से भी बातें करने से नहीं हिचकती थी. यही कारण था कि कालेज के सीनियर छात्रों से भी उस ने जानपहचान कर ली थी. उसे लोगों से संपर्क बनाना बहुत अच्छा लगता था.

गौरव मन ही मन में सारा से मोहब्बत करने लगा था, जबकि सारा प्यारमोहब्बत की बातों से बेखबर थी. हां, गौरव की हर बात का जवाब हंस कर जरूर देती थी. उस के चेहरे पर मुसकान फैली रहती थी. एक बार उस ने गौरव को अपनी अम्मी और अब्बू से मिलवा दिया था. सारा के अब्बूअम्मी ने गौरव और सारा की दोस्ती को प्रोफेशनल पढ़ाई के लिए जरूरी समझा और उन की जानपहचान पर जरा भी ऐतराज नहीं किया. उलटे उन्होंने गौरव से कहा कि कालेज में वह सारा का ध्यान रखा करे.

गौरव को क्यों चुभी सारा की तल्खी

इस के बाद तो गौरव सारा पर अपना अधिकार कुछ अधिक ही जताने लगा. बातबात पर उसे टोकने लगा और अच्छेबुरे का सबक देने लगा. एक बार तो गौरव ने हद ही कर दी. उस ने कैंटीन में सारा को कोने की एक टेबल पर अजीम नाम के स्टूडेंट के साथ बैठे देख लिया था. वह उस के साथसाथ हंसहंस कर बातें कर रही थी. गौरव ने महसूस किया कि सारा उसे देख कर भी उसे अनदेखा कर रही है. गौरव उस वक्त चुपचाप वहां से चला आया. रोज सभी क्लास खत्म होने के बाद जब सारा घर जाने को हुई, तब गौरव ने उस का क्लास रूम के बाहर लंबे बरामदे में रास्ता रोक लिया और सीधा सवाल दाग दिया, ”क्यों, अब तुम ने यह नया बौयफ्रेंड बना लिया है?’’

क्या फिजूल की बातें कर रहे हो?’’ सारा ने भी तपाक से उल्टा सवाल कर दिया. बोलने लगी, ”बिना कुछ जानेसमझे तुम कुछ भी बोलोगे? आखिर तुम होते कौन हो मुझ यह पूछने वालेï?’’ गौरव को जरा भी उम्मीद नहीं थी कि सारा उस के साथ इतनी तल्खी से बात करेगी और उसी से सवाल कर बैठेगी. वह सन्न रह गया. आगे कुछ नहीं बोल पाया और पैर पटकता हुआ चला गया. सारा भी चुपचाप अपने घर आ गई. घर आते ही उस ने अम्मी से खाना लगाने को कहा. शबाना ने भी कह दिया, ”बेटा, आ गई! जाओ, हाथमुंह धो लो, खाना लगा देती हूं. आज मैं ने तुम्हारे पसंद की सब्जी पकाई है.’’

सारा चुपचाप अपने कमरे में चली गई. पीछेपीछे अम्मी भी आ गई, ”सारा, क्या बात है, तुम्हारा गौरव से झगड़ा हुआ है क्या? वह फोन पर तुम्हारे अब्बू को कुछ बता रहा था, तुम्हारे बारे में!’’ अरे कुछ नहीं अम्मी, वह नहीं चाहता है कि मैं अपने सीनियर से जानपहचान रखूं. आज उस ने मुझे एक सीनियर के साथ देख लिया था. उसी के बारे में अब्बू से मेरी शिकायत की होगी.’’ अरे, शिकायत नहीं की है. उस का कहना था कि उसे जो भी जरूरत हो उसे बताए वह पूरी कर देगा.’’ अम्मी बोली. वह क्यों करेगा? वह कौन है मेरा? कोई रिश्तेदार है क्या? उस से दोस्ती को ले कर सहेलियां मुझे ही उस के हिंदू होने का ताना मारती हैं और वह भी नहीं चाहता है कि मैं किसी अपने धर्म के लड़के से जानपहचान बनाऊं.’’ सारा बिफर गई.

”कोई बात नहीं बेटा, होता है यह सब! मैं गौरव को समझा दूंगी. चलो, हाथमुंह धो कर खाना खा लो.’’ शबाना बोली. उस दिन सारा का मूड बिगड़ा रहा. वह अगले दिन कालेज नहीं गई. 2 दिनों बाद कालेज गई. उस रोज गौरव कालेज नहीं आया था, लेकिन उस की दूसरी दोस्त स्निग्धा मिश्रा ने उसे गौरव के कालेज नहीं आने की जानकारी दी. यह भी बताया कि गौरव उस से नाराज चल रहा है. गौरव की बात आते ही सारा नाराज हो गई. उस ने नाराजगी दिखाते हुए कह दिया, ”वह कौन होता है मुझ से नाराज होने वाला? मुझ पर धौंस दिखाने वाला? …और तुम कौन हो, जो मुझ से उस की तरफदारी कर रही हो?’’

सारा के इस रूप को देख कर स्निग्धा सकपका गई. दरअसल, गौरव अगर सारा को चाहता था और उन के बीच एकतरफा प्रेम पनप चुका था तो स्निग्धा भी गौरव से प्यार करने लगी थी. वह इंदौर के ही एक कालेज के प्रोफेसर की बेटी थी और गौरव की सहपाठी हुआ करती थी. दोनों राउ के कालेज में साथ पढ़ते थे.  किसी कारणवश गौरव को उस कालेज से निकाल दिया गया था. इस के बाद उस ने बाईपास स्थित इस कालेज में दाखिला लिया था, जहां उस की मुलाकात सारा से हुई थी. स्निग्धा को जब सारा के प्रति गौरव का झुकाव दिखा, तब भीतर ही भीतर जलभुन गई थी.

सारा को पसंद नहीं थी गौरव की दखलअंदाजी

दूसरी तरफ गौरव को सैयद सारा अली के दूसरे लड़कों से मिलनाजुलाना पसंद नहीं था. इस का विरोध जताने लगा और उसे एहसास दिलाने की कोशिश भी करने लगा कि वही उस का सच्चा प्रेमी है. इस पर सारा ने एक बार साफ लहजे में कह दिया था कि उन के धर्म अलगअलग हैं. उन के बीच दोस्ती हो सकती है, प्रेम संबंध कतई नहीं हो सकते. उनके प्रेम को दोनों के समाज और परिवार वाले पसंद नहीं करेंगे. यह सच भी था. दोनों के सामाजिक स्तर में जमीनआसमान का अंतर था, इस के अलावा वे अलगअलग धर्मों से भी थे. कहने को तो सारा की अम्मी शबाना खुल कर सारा की गौरव से दोस्ती का विरोध नहीं करती थी, लेकिन गौरव की हरकतों को देख कर वह उस पर नजर रखने लगी थी. उस ने यह बात अपने भाई करामत अली और बहन अफसाना को भी बता दी थी. वे सारा पर नजर रखने लगे थे. 

उन्होंने सारा से सीधे तौर पर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन इशारों से जरूर समझा दिया था कि उस का गौरव से अधिक मिलना ठीक नहीं है. सारा मां का इशारा समझ भी गई थी. यही वजह थी कि उस ने गौरव से मिलनाजुलना कम कर दिया था. वह जब भी गौरव से मिलती तो काफी सावधानी बरतती थी. सारा के मामा ने भी सारा को समझाया और गौरव को मर्यादा में रहने की नसीहत दे दी. गौरव सारा के मामा की नसीहत से और भी तिलमिला गया. गौरव पर इश्क का भूत सवार हो चुका था. ऐसे में सारा की बेरुखी ने उसे भीतर से जख्मी कर दिया था. उसे सारा का कालेज के किसी लड़के से बातचीत करना एकदम अच्छा नहीं लगता था. एक वक्त आया जब गौरव और सारा के बीच बातचीत भी बंद हो गई. इस के बाद जब गौरव ने सारा को कालेज के लड़कों के साथ सिर्फ बातचीत करते ही नहीं, बल्कि पार्क में घूमते हुए देखा, इस से उस का गुस्सा सातवें आसमान पर जा पहुंचा.

स्निग्धा क्यों हुई खूनी योजना में शामिल

23 अप्रैल, 2024 को तो इस बात को ले कर गौरव कई घंटों तक बेचैन रहा. दिमाग में अजीब तरह की खलबली मची हुई थी. आखिरकार अपने मन की बात उस ने स्निग्धा को बताई कि उस ने सारा को ले कर क्या योजना है? स्निग्धा पहले से ही सारा को मन ही मन गौरव के दिलोदिमाग से निकालना चाहती थी. वह गौरव की योजना सुन कर खुश हो गई. इतना ही नहीं, वह उस का साथ देने को तैयार हो गई. अपनी योजना को अंजाम देने के लिए गौरव ने 25 अप्रैल की सुबह सारा के मोबाइल पर काल किया. उस वक्त सारा अपने कमरे में गहरी नींद में थी. सारा ने आधी नींद में ही फोन का डिसप्ले देखे बगैर काल रिसीव कर ली.

सारा, में गौरव बोल रहा हूं.’’  गौरव की आवाज सुनते ही सारा झल्ला गई. नाराजगी के साथ बोल पड़ी, ”इतनी सुबहसुबह तुम ने मुझे फोन क्यों किया? कान खोल कर सुन लो, मैं तुम से अब किसी तरह के ताल्लुकात नहीं रखना चाहती.’’ गौरव उस की बातों को नजरंदाज करते हुए बोलने लगा, ”सारा, आज के बाद तुम पर किसी तरह का शक नहीं करूंगा… किसी से भी बातचीत करने पर डांटफटकार नहीं लगाऊंगा… और कोई धमकी नहीं दूंगा…’’ यह सुन कर सारा थोड़ी शांत हुई. सामान्य आवाज में बोली, ”चलो अच्छा है, तुम क ो अक्ल आ गई. तुम में इतनी तो समझ आ गई कि दूसरों की जिंदगी में दखल नहीं देनी चाहिए.’’ 

इसी के साथ गौरव ने सारा से माफी मांग ली. नरमी दिखाते हुए सारा ने गौरव को माफ कर दिया. फिर उन के बीच कालेज, पढ़ाई, दोस्तों आदि की बातें होने लगीं. काफी समय तक बातें होती रहीं. बातचीत के सिलसिले में गौरव ने महू घूमने का प्रस्ताव रख दिया. न जाने क्या सूझी सारा ने भी हामी भर दी. उस रोज वह बहुत खुश थी. तय प्रोग्राम के मुताबिक 25 अप्रैल, 2024 की दोपहर 3 बजे भाड़े की कार ले कर गौरव सारा को लेने एक्रोपोलिस कालेज पहुंच गया था. सारा उस की राह देख रही थी. सारा चहकती हुई कार में बैठ गई. इस के बाद गौरव तय कार्यक्रम के मुताबिक अपनी गर्लफ्रेंड स्निग्धा मिश्रा को लेने पिपल्याहान स्थित उस के घर गया. उसे भी कार में अपने साथ बैठा कर महू में जंगल की तरफ निकल पड़े. अपनी योजना को कामयाब बनाने के लिए गौरव ने सारा का मोबाइल स्विच्ड औफ करवा दिया.

सुनसान इलाके में कार खड़ी की और मौका देख कर गौरव की गर्लफ्रेंड स्निग्धा ने सैयद सारा अली के हाथ पीछे से पकड़ लिए. तभी गौरव ने उस का गला दबा दिया. जब उसे लगा कि वो ऐसे नहीं मरने वाली है तो गौरव ने साथ लाए चाकू से उस का गला भी रेत दिया. उस के बाद सारा के शव को एक बोरी में भरकर महू क्षेत्र के हरसौला के जंगल में झाडिय़ां में फेंक दिया. हत्या के 78 दिनों बाद पुलिस को अहम सुराग मिला. पुलिस दोनों आरोपियों गौरव सरकार और स्निग्धा मिश्रा को ले कर हरसौला फाटा के जंगल इलाके में गई. उन की निशानदेही पर पुलिस ने उस स्थान की छानबीन की, जहां उन्होंने शव फेंका था. करीब 18 घंटे तक चले सर्च औपरेशन के बाद पुलिस को मानव हड्डियाँ, बाल और एक ब्रेसलेट बरामद हुआ. 

कथा लिखे जाने तक हड्ïिडयों की डीएनए जांच होनी बाकी थी, लेकिन दूसरे बरामद अवशेष सारा के ही थे. आगे की जांच के लिए पुलिस ने दोनों आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लिया. उन से कुछ और सबूत हासिल किए. विस्तार से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों गौरव सरकार और उस की प्रेमिका स्निग्धा मिश्रा को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

—- फोटो काल्पनिक है, इसका घटना से कोई संबंध नहीं है

17 टुकडें कर ली जान, साऊदी से इंडिया लौटे प्रेमी को मिला मौत का तोहफा

26 वर्षीय मोहम्मद वसीम अंसारी अपनी 17 वर्षीया गर्लफ्रेंड नरगिस से मिलने के लिए बेताब था. उस से मिलने की खातिर वह सऊदी अरब से इंडिया आया. यहां उस की 17 टुकड़ों में कटी लाश पुलिस ने बरामद की. आखिर किस ने और क्यों की वसीम अंसारी की हत्या?

पहली नजर में दिल दे बैठा वसीम

वसीम और नरगिस की मुलाकात करीब 2 साल पहले बिलासपुर से रांची जाते हुए ट्रेन में हुई थी. वसीम अपनी एक रिश्तेदारी में बिलासपुर आया था. वहां से लौटते हुए ट्रेन की भीड़भाड़ वाले कोच में जिस सीट पर वह बैठा था, उस के सामने ही एक गोरीचिट्टी कमसिन लड़की बैठी थी. लड़की अपनी मां के साथ थी. वसीम की निगाह उस पर से हट नहीं रही थी. हालांकि उस की मां से नजरें बचा कर वसीम लड़की को बीचबीच में गहरी निगाह से घूर लेता था.

वसीम अकेला था. यह कहें कि वसीम की निगाह लड़की के चेहरे से हट नहीं पा रही थी. थोड़ी ही देर बाद लड़की मां से बोली, ”मुझे प्यास लग रही है.’’  उन के पास पानी नहीं था. इस कारण उस की मां इधरउधर देखने लगी. वसीम ने अपने बैग से पानी की बोतल निकाली और आगे बढ़ा दी. लड़की ने बोतल को थाम लिया. पानी पीने के बाद बोतल वापस करती हुई मुसकरा कर बोली, ‘थैंक यू!

इस पर वसीम ने सिर हिलाते हुए उस की आंखों में आंखें डाल कर कहा, ”कोई बात नहीं, पानी ही तो है.’’ लड़की की मां भी झेंपती हुई लड़की से बोली, ”पानी वाला आएगा, तब एक बोतल खरीद लेना.’’ ”अम्मा, ट्रेन में पानी वाला नहीं आएगा, अगले स्टेशन से लेना होगा. कोई बात नहीं, मैं जा कर ला दूंगा.’’ ”हांहां…’’ लड़की बीच में ही बोल पड़ी. इस तरह से वसीम और उस लड़की के बीच बातचीत भी शुरू हो गई.

वसीम ने बातों ही बातों में उस से पूछ लिया, ”क्या नाम है आप का? पढ़ती हो?’’ ”मैं नरगिस सुलतान हूं. पढ़ाईलिखाई छूट गई है.’’ ”नरगिस सुलतान. वाह! कितना प्यारा नाम है. मगर पढ़ाई छूट गई, यह तो गलत बात हुई. अभी तो तुम्हारी उम्र ही क्या है? भला क्यों छूटी पढ़ाई?’’ इस पर नरगिस चुप हो गई, लेकिन उस की मां सकुचाती हुई बोली, ”घर में गमी हो गई थी बेटा, इस के बाद सब कुछ तहसनहस हो गया था…’’ यह कहतेकहते वह अपनी आंखें पोंछने लगी.

”ओह..! सौरी अम्मीजान, मैं ने आप का दिल दुखा दिया.’’ वसीम बोला. थोड़ी देर उन के बीच चुप्पी बनी रही. वसीम गाड़ी के बाहर भागते पेड़ों और खेतों को देखने लगा. नरगिस भी दूसरी खिड़की से बाहर देखने लगी थी. उसी ने चुप्पी तोड़ी. अनायास बोल पड़ी, ”अम्मी, देखो तो बाहर कितनी अच्छी हवा बह रही है.’’ ”हां, बिलकुल सही कह रही हो. मौसम सुहावना बना हुआ है.’’ 

वसीम ने हां में हां मिलाई. उस के बाद उन के बीच फिर से बातचीत का सिलसिला शुरू हो गया. इस बार वे दूसरी बातें करने लगे. तुम क्या करते हो बेटा, काफी पढ़ेलिखे मालूम देते हो!’’ नरगिस की अम्मी बोली. ज्यादा नहीं.’’ वसीम बोला. काम क्या करते हो?’’ नरगिस ने पूछा. मैं बहुत जल्द सऊदी अरब जाने वाला हूं, वहीं नौकरी करूंगा. मुझे खूब रुपएपैसे कमाने हैं.’’ वसीम बोला. इस पर नरगिस आश्चर्य से वसीम को देखने लगी. मजाकिया लहजे में नरगिस बोल पड़ी, ”मेरे लिए भी वहां कोई काम मिल सकता है क्या?’’

क्यों नहीं?…वहां तो हर किसी के लिए कुछ न कुछ काम होता है.’’ वसीम बोला. अच्छा… मुझ जैसी अनपढ़ को भी!’’ नरगिस की आंखें आश्चर्य से फैल गईं. बातोंबातों में वसीम और नरगिस ने अपने मोबाइल नंबर एकदूसरे को दे दिए. कुछ घंटे बाद दोनों अपनेअपने स्टेशनों पर उतर गए. वसीम और नरगिस अलगअलग शहरों में रहते हुए एकदूसरे से मोबाइल के जरिए जुड़े हुए थे. वसीम रांची का रहने वाला था, जबकि नरगिस बिलासपुर की थी.  एक बार उस ने नरगिस को बताया कि वह सऊदी जा चुका है. उसे बहुत सारा पैसा कमाना है. 

जब नरगिस के पाई कौल 

सऊदी अरब से कोरबा के पाली गांव की रहने वाली नरगिस के पास एक काल आई, ”हैलो…हैलो नरगिस, मैं वसीम बोल रहा हूं. कैसी हो?’’ काल का जवाब नरगिस शिकायती लहजे में देते हुए बोली, ”मैं कैसी हूं, यह पूछ रहे हो? बस, समझो जिंदा हूं.’’

”ऐसा क्यों कह रही हो नरगिस?’’ आश्चर्य से वसीम बोला. नरगिस कुछ नहीं बोली. वसीम ही दोबारा बोला, ”ऐसा मत कहो.’’ नरगिस का जवाब फिर शिकायत के साथ नाराजगी भरा था, ”इतने दिनों बाद तुम्हें मेरी याद आ रही है. मैं तो हमेशा तुम्हें याद करती हूं तुम्हें… नंबर भी दिया था, मगर?’’ बात पूरी किए बगैर चुप हो गई. इस पर वसीम ने कहा, ”नाराज मत हो नरगिस, जिस दिन से यहां आया हूं, सच कहो तो मैं तुम्हें कभी भूल नहीं पाया. यहां दम्मन, सऊदी अरब में इतना काम है कि मत पूछो…’’  वसीम मानो हाथ जोड़ कर के मनुहार कर रहा हो.

अच्छा, वहां काम में ही मन लगा रहता है, यह बात है. सिर्फ काम और पैसा ही तुम कमाते रहो और मैं तुम से बात भी नहीं करूं.’’  इतराती हुए नरगिस बोली. अरे, ऐसा नहीं है यार! मैं तो 24 घंटे तुम्हें याद करता रहता हूं. तुम्हारी सूरत मेरी आंखों के सामने घूमती रहती है. मैं संकोच में था कि फोन तुम उठाओगी या नहीं. हमें भूल तो नहीं गई होगी?’’ वसीम सहजता से बोला.

अच्छा! सीधा कहो न कि रुपयों से प्यार है, जो इतना दूर चले गए हो. तुम से तो प्यार करना फिजूल है.’’ नरगिस का ताना मारना वसीम पर असर कर गया.  वह बोला, ”अच्छा, मैं बहुत जल्दी तुम से मिलने आ रहा हूं… बस कुछ और रुपए और जोड़ लूं!’’ रुपए जोडऩा तो अच्छी बात है, तुम मेरे लिए क्या लाओगे?’’ नरगिस उस से जानना चाहती थी. अरे नरगिस, मैं आ रहा हूं यह क्या कम है. …और रुपएपैसे की क्या बात है. यहां जो मैं कमाता हूं वो घर भी भेज देता हूं. तुम्हारे लिए मैं ऐसी चीज लाऊंगा कि तुम खुश हो जाओगी! …और हां, अभी एक गिफ्ट मैं यहां से तुम्हें भेज रहा हूं. अब तो खुश हो जाओ.’’

यह सुन कर के नरगिस बड़ी खुशी से बोली, ”देखो, कोई अच्छी सी गिफ्ट भेजना, नहीं तो मैं वापस भेज दूंगी वहीं, सऊदी अरब.’’ वसीम और नरगिस के बीच होने वाली ये बातें कोई पहली बार नहीं हो रही थीं. वे अकसर काफी देर तक रोजाना मोबाइल पर बात करते थे. एक दिन भी इस में चूक होने पर नरगिस शिकायती लहजे में ताना भी मार देती थी. तब वसीम माफी मांगता और फिर दोनों फोन पर ही जीनेमरने की कसमें खाने लगते. एक दिन फेसबुक लाइव में बातों ही बातों में नरगिस बोली, ”वसीम, तुम्हारी बहुत याद आ रही है.’’

इसी के साथ उस ने अपने बदन को अधखुला कर दिया. इस का असर वसीम पर भी हुआ…और देखते ही देखते दोनों बेपरदा हो गए. एकदूसरे को देख शर्मसार भी हुए…

हजारों किलोमीटर की दूरी से इस अनुभूति का दोनों ने वीडियो कालिंग को थैंक्स बोला. छूटते ही वसीम ने नरगिस को फेसबुक, इंस्टाग्राम के लिए रील बनाने की सलाह दे डाली.

वसीम ने गर्लफ्रेंड को दी खुशखबरी

बात 26 जून, 2024 की है. शाम के वक्त नरगिस के मोबाइल पर वसीम की काल आई, ”रेहाना, मैं अगले महीने 2 जुलाई को आ रहा हूं.’’ सच विश्वास नहीं हो रहा, लेकिन तुम कहां आओगे? मेरे पास ही न!’’ हां, मैं रांची प्लेन से आ रहा हूं, उस के बाद सीधा तुम्हारे पास आ जाऊंगा, तुम मिलोगी न!’’ कैसी बात करते हो, तुम इतनी दूर से आ रहे हो और मैं भला नहीं मिलूंगी. तुम ने मेरे लिए इतने सारे गिफ्ट भेजे हैं, साडिय़ां भेजी हैं… क्या मैं तुम्हें भूल सकती हूं. लेकिन यह तो बताओ कि तुम अब वहां से मेरे लिए क्या बेशकीमती चीज ला रहे हो?’’ नरगिस मचलती हुई बोली.

कुछ सेकेंड तक वसीम चुप रहा, फिर धीरे से बोला, ”तुम दिल छोटा न करो… सऊदी अरब से आ रहा हूं, कुछ अच्छा ही लाऊंगा तुम्हारे लिए. तुम्हें तो मालूम है कि यहां पैसा ही पैसा है. हवा में उड़ता है पैसा, कोई पकडऩे वाला होना चाहिए. मैं यहां पैसे कमाने ही तो आया हूं और तुम्हारी दुआ से मैं यहां बहुत खुश हूं, मगर तुम्हारे प्यार के कारण आ रहा हूं.’’ इस के बाद वसीम ने अपने घरपरिवार के बारे में बातें कीं. बातों ही बातों में उस ने बताया कि उस के परिवार वाले उस के निकाह की तैयारी कर रहे हैं. लड़की तलाश रहे हैं. यह सुन कर नरगिस रुआंसी हो गई.

वसीम ने बताया कि वह पहले उस से मिलने के लिए आ रहा है, उस के बाद ही वह अपने घर रांची, झारखंड जाएगा. इस पर नरगिस सुलतान ने कहा, ”ठीक है, जैसे ही रांची से रवाना होना, मुझे बताना. मैं बिलासपुर आ जाऊंगी.  और फिर हम वहां से चैतमा आ जाएंगे.’’ 2 जुलाई, 2024 नरगिस को वसीम ने फोन किया, ”रेहाना, मैं इंडिया आ चुका हूं और शाम तक रांची हमारा प्लेन लैंड करने वाला है.’’

यह सुन कर के नरगिस बहुत खुश हो गई. वसीम भी नरगिस से मिलने की बात सोच कर बहुत ही प्रसन्न था. नरगिस ने भी कह दिया, ”मैं बिलासपुर आ रही हूं और वहां से हम लोग आगे का प्लान बना लेंगे.’’  वसीम ने संशय से कहा, ”तुम फिजूल ही क्यों आ रही हो, मैं गाड़ी ले कर के तुम से मिलने आ जाऊंगा.’’ ”अरे नहीं, मेरे एक मुंहबोले भाई हैं न बादशाह, उन के पास गाड़ी है. घूमतेफिरते आ जाएंगे. रांची से सिर्फ 50 किलोमीटर ही तो है बिलासपुर.’’

”तब ठीक है. मैं शाम को 3 बजे के आसपास बिलासपुर पहुंच जाऊंगा. तुम्हारा इंतजार रहेगा. नरगिस, तुम से मिलने के लिए मैं कितना बेताब हूं, इस का तुम्हें शायद अंदाजा नहीं है… कब होगी मुलाकात और कब मैं तुम्हें अपनी बांहों में भरूंगा. हरदम इसी कल्पना में खोया रहता हूं.’’ ”अच्छा, अब मैं फोन रखती हूं.’’ इठलाते हुए नरगिस ने काल डिसकनेक्ट कर दी.

17 टुकड़ों में मिली लाश

बुधवार के दिन 10 जुलाई, 2024 को छत्तीसगढ़ के जिला कोरबा के थाना पाली में किसी ने फोन कर के सूचना दी कि गोपालपुर डैम के पास एक पिट्ठू बैग में कोई संदिग्ध चीज है. बैग के ऊपर मक्खियां भिनभिना रही हैं और तेज बदबू फैल रही है. यह सूचना मिलते ही एसएचओ चमन लाल सिन्हा कुछ पुलिसकर्मियों को ले कर गोपालपुर डैम के पास पहुंच गए. उन्होंने जब वह बैग खुलवाया तो किसी युवक की टुकड़ों में कटी लाश निकली. उस का सिर और कुछ अंग गायब थे. 

पुलिस की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि बरामद लाश को धारदार हथियार से टुकड़ों में काटा गया था. एसएचओ ने यह जानकारी कोरबा के एसपी सिद्धार्थ तिवारी के साथसाथ कोटघरा शहर की एडिशनल एसपी नेहा वर्मा और एसडीओपी पंकज ठाकुर को भी दे दी गई. एफएसएल यूनिट प्रभारी सत्यजीत कोसरिया और थाना पाली, चौकी चैतमा सहित साइबर टीम को सूचना दे दी गई. एसपी के निर्देश पर उपरोक्त अधिकारियों की टीम मौके पर गई. वहां की गई सूक्ष्म जांच के सिलसिले में गोताखोरों ने डैम में दोपहर तक मृतक का सिर व अन्य लापता अंगों से भरी एक बोरी तलाश ली. बरामद बैग में लाश के टुकड़ों के साथ एक आधार कार्ड, पासपोर्ट एवं एक फ्लाइट टिकट भी मिली.

उन दस्तावेजों की जांच के आधार पर मृतक की पहचान मोहम्मद वसीम अंसारी पुत्र मोहम्मद जमीर अंसारी के रूप में हुई. उस की उम्र 26 साल थी और वह कांता तोला, रांची, झारखंड का निवासी था. वहीं से उस के भाई का फोन नंबर भी मिल गया. पुलिस ने उन के बड़े भाई मोहम्मद तहसीन से फोन पर बात की. उन्हें घटना की जानकारी दे कर कोरबा बुलाया गया. फोन पर ही तहसीन ने बताया कि उस का भाई मोहम्मद वसीम पिछले 2 सालों से सऊदी अरब में सुरक्षा अधिकारी की नौकरी कर रहा था. वह वहां से कब आया, इस की उसे कोई जानकारी नहीं है.

वसीम की नृशंस तरीके से की गई हत्या कोरबा से ले कर रांची तक में चर्चा का विषय बन गई. आम और खास लोग यह जानने को उत्सुक थे कि आखिर किस ने और क्यों इस तरह मासूम नौजवान वसीम अंसारी को मार डाला? उस से किस की क्या दुश्मनी थी, जो उस के सऊदी से लौटते ही हत्या हो गई? क्या कोई पहले से ही घात लगाए बैठा था?

लोग तरहतरह की चर्चाएं कर रहे थे. इधर समय बीता जा रहा था. चौतरफा सनसनी बढ़ती जा रही थी. पुलिस जांच टीम तत्परता से बड़ी सतर्कता के साथ काम कर रही थी.  कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए पुलिस जांच को आगे बढ़ा रही थी. जुड़े पहलुओं की जांच पर यह तथ्य उजागर हुआ कि मृतक की सोशल मीडिया के माध्यम से बांसटाल चैतमा, थाना पाली की एक अवयस्क बालिका नरगिस से कई बार बातचीत हुई है. उन के बीच बातचीत इंटरनैशनल वीडियो काल, वाट्सऐप काल से हुई थी. बरामद मोबाइल में संयोग से उन दोनों की बातचीत के रिकार्डिंग क्लिप्स भी थे.

क्यों की गई वसीम की हत्या

पुलिस ने जब नरगिस के बारे में खोजबीन की, तब वह अपने घर से गायब मिली. उस के बारे में यह भी पता चला कि वह अपने किसी राजा खान उर्फ बादशाह नाम के प्रेमी के साथ फरार है. पुलिस नरगिस के साथसाथ राजा खान की भी तलाश करने लगी. जल्द उन का पता चल गया. वे ओडिशा के राउरकेला में एक होटल से पकड़े गए. उन्हें कोरबा ला कर पूछताछ शुरू की गई. नरगिस सुलतान के चेहरे से मासूमियत झलक रही थी, जो शायद कमसिन उम्र का तकाजा था. चेहरे की ताजगी बता रही थी कि वह बेकुसूर है. वह डरीसहमी थी. उस ने वसीम के साथ किसी तरह की जानपहचान होने से साफसाफ इनकार कर दिया. बड़े सामान्य ढंग से उस ने पुलिस को बताया कि वह मोहम्मद वसीम नाम के किसी व्यक्ति से मिली ही नहीं है.

मगर पुलिस के पास उस की और वसीम की बातचीत के सबूत थे. पुलिस जांच टीम के एक सदस्य ने सख्ती के साथ पूछताछ की और मोबाइल ट्रेस की जानकारी सामने रखी तो वह टूट गई. इस के बाद उस ने जो घटनाक्रम बयान किया, उस से वसीम की हत्या की तसवीर भी सामने आ गई.  महज 17 साल की नरगिस ने बताया कि वह राजा से मोहब्बत करती है और अपने परिवार को छोड़ चुकी है. दोनों साथ रहते हैं. इसी के साथ उस ने बताया कि उस ने पैसों के लालच में प्रेमी के साथ मिल कर वसीम की हत्या की.

नरगिस के इस बयान के बाद पुलिस ने राजा खान के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कर ली. आरोपी राजा खान उर्फ बादशाह 20 साल का नवयुवक था. वह बांसटाल चैतमा थाना पाली, जिला कोरबा का निवासी है. उस ने पुलिस से नरगिस के बारे में जो भी बातें बताईं, उस से यह साबित हो गया था कि वह और नरगिस एकदूसरे को बेइंतहा चाहते हैं.  दोनों अपनी मरजी से साथसाथ रह रहे थे. उस ने यह भी बताया कि नरगिस से उसे वसीम के बारे में जानकारी मिली थी और उस के कहने पर ही उस की योजना में शामिल हो गया था.

राजा खान ने बताया कि नरगिस ने उसे  मोहम्मद वसीम के सऊदी अरब से वापस आने की जानकारी दी थी. नरगिस ने उसे यह भी बताया था कि वसीम उस के रूपजाल पर लट्टू है और उसे दिलोजान से चाहता है. उस ने 2 सालों के भीतर सऊदी में रह कर बहुत पैसा कमाया है. उन पैसों को वह साथ ले कर आने वाला है. इसी लालच में उस ने वसीम को अपने जाल में फंसा लिया था. नरगिस उस से प्रेम का दिखावा करती थी.

नरगिस के कहने पर ही राजा खान ने बोलेरो गाड़ी किराए पर ली थी. उस पर सवार हो दोनों बिलासपुर गए थे. वसीम से मिलने पर नरगिस ने राजा का परिचय मुंहबोले भाई के रूप में दिया था. उस के बाद वे तीनों राजा के घर चैतमा आ गए. उस रोज मोहम्मद वसीम बहुत खुश था. राजा ने बताया कि वसीम ने बातों ही बातों में उस से कहा था कि उस की जिंदगी का खुशनुमा दिन आया है. उस ने यह भी कह डाला कि नरगिस से वह बेइंतहा मोहब्बत करता है. आज की रात वह उस के साथ गुजारेगा. उस वक्त घर में राजा और नरगिस के अलावा कोई नहीं था. नरगिस भी खुश नजर आ रही थी. वसीम ने आते ही उसे एक अच्छा गिफ्ट का पैकेट पकड़ा दिया था. इस पर नरगिस बोली थी, ”मैं आज तुम लोगों के लिए खाने में चिकन बना देती हूं.’’

इस तरह से की गई वसीम की हत्या

थोड़ी देर बाद रात होने पर सभी ने एक साथ खाना खाया था. उस के बाद राजा खान बाहर चला गया. नरगिस ने वसीम को बताया कि राजा अपने दोस्त के घर गया है, सुबह आएगा. वसीम यह सुन कर खुश हो गया. उसे नरगिस के साथ एकांत में रात गुजारने का मौका मिल गया था. दोनों खुशी से बातें करने में मशगूल हो गए. तभी पीछे के दरवाजे से राजा खान अचानक घर में आ घुसा. वसीम नरगिस से बातें करते हुए उस के काफी करीब आ चुका था.

नरगिस को वह अपनी बांहों में कसना ही चाहता था कि राजा खान ने मुरगी काटने वाले छुरे से वसीम अंसारी की गरदन पर पीछे से वार कर दिया. अचानक हुए वार से वसीम तिलमिला गया. वह बुरी तरह जख्मी हो गया और तड़पता हुआ कभी नरगिस को तो कभी राजा खान को देखने लगा. उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि उस के साथ यह क्या हो रहा है? हंसते हुए राजा खान बोला, ”तुम नरगिस को चाहते हो, मेरी नरगिस को, हाहाहा… नरगिस सिर्फ मेरी है. नरगिस, बताओ इस बेवकूफ को जो तुम्हें पाने के लिए यहां आ गया है.’’

राजा की बातों में हां में हां मिलाते हुई बोली, ”तुम्हारा सारा पैसा अब हमारा होगा, हम दोनों जिंदगी भर ऐश करेंगे. हाहाहा.’’  नरगिस की इस हरकत पर वसीम तड़पता हुआ बोला, ”धोखा! मेरे साथ धोखा कर रही हो, ठीक नहीं होगा.’’ यह सुनना था कि राजा ने वसीम पर छुरे से लगातार 3-4 ताबड़तोड़ वार कर दिए. नरगिस ने तड़पते वसीम के पैर दबोच लिए थे. राजा खान ने ताबड़तोड़ वार कर उस का सिर धड़ से अलग कर दिया.  उस के बाद दोनों ने मिल कर वसीम के हाथों और पैरों को धड़ से अलग कर दिया. शव को 17 टुकड़ों में काट डाला. इस के लिए राजा ने पहले से ही छुरे के अलावा आरी ब्लेड ला कर घर में छिपा कर रख दिया था. वसीम की लाश के कटे टुकड़ों को उन्होंने प्लास्टिक की बोरी में भर लिया.

नरगिस और राजा ने बोरी को पिट्ठू बैग और एक ट्रौली बैग में बांध कर बाइक पर रख डैम में फेंकने की योजना बनाई. यह सब करतेकरते सवेरा हो गया था. शव के कुछ टुकड़े बच गए थे. वो उन्होंने घर के फ्रिज में छिपा कर रख दिए. अगले रोज 3 जुलाई, 2024 की रात में करीब लगभग 11 बजे स्पलेंडर बाइक से गोपालपुर डैम में फेंक कर दोनों घर वापस आ गए. वसीम की पहनी हुई सोने की चेन और अन्य सामान घर में छिपा दिया. 

नरगिस ने बातोंबातों में वसीम के मोबाइल का पासवर्ड पता कर लिया था. मोबाइल से यूपीआई आईडी चैक किया तो दोनों के होश उड़ गए. कारण, उन्होंने सोचा था कि सऊदी अरब में नौकरी करने के कारण कम से कम 50 लाख रुपए तो उस के एकाउंट में होंगे ही. मगर मिले सिर्फ 3 लाख रुपए. यह देख कर दोनों निराश हो गए. कुछ पैसे ही अपने खातों में ट्रांसफर कर पाए. आरोपी नरगिस सुलतान और राजा खान उर्फ बादशाह को पूछताछ करने के बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. उन की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल छुरा, बाइक आदि सामान जब्त कर लिया गया. 

राजा खान को 12 जुलाई, 2024 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रैट के समक्ष पेश कर दूसरी आरोपी नरगिस सुलतान को नाबालिग होने के कारण किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे बालसुधार गृह भेज दिया गया. उक्त अपराध का खुलासा करने वाले एसपी (सिटी) दर्री नगर रविंद्र कुमार मीना के मार्गदर्शन में एसएचओ (पाली) चमन लाल सिन्हा, चौकीप्रभारी चैतमा चंद्रपाल खांडे, विमलेश भगत, एसआई पुरुषोत्तम उइके, कांस्टेबल अनिल कुर्रे, आशीष साहू तथा साइबर टीम के हैडकांस्टेबल राजेश कंवर, चंद्रशेखर पांडेय, आर. रवि चौबे, डेमन ओग्रे, बिरकेश्वर प्रताप सिंह, आलोक टोप्पो, सुशील यादव, लेडी कांस्टेबल सुषमा डहरिया एवं चौकी चैतमा के इंचार्ज की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही.

—कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित. कथा में नरगिस परिवर्तित नाम है.

लालच का जंजाल, नौजवान बेहाल

छत्तीसगढ़ में शेयर ट्रेडिंग टिप्स सीखने के फेर में साकेत कालोनी, दुर्ग का एक नौजवान तकरीबन 15 लाख रुपए की ठगी का शिकार हो गया.

जांच करने वाले पुलिस अफसर ने बताया कि 35 साल का सौरभ स्वर्णकार एक औनलाइन इश्तिहार देखने के बाद शेयर ट्रेडिंग की जानकारी लेने की कोशिश करने लगा. उसे टैलीग्राम एप के जरीए संपर्क किया गया. एक लिंक के द्वारा 19 दिसंबर, 2023 को एक एप डाउनलोड करा कर केवाईसी के लिए आधारकार्ड और पैनकार्ड के फोटो भी अपलोड कराए गए.

उन लोगों के द्वारा पीडि़त को ह्वाट्सएप ग्रुप में भी जोड़ा गया. इसी के जरीए शेयर की खरीदीबिक्री की जानकारी दी जाने लगी. शेयर खरीदने के लिए जो पैसे लगने थे, उन्हें जो एप डाउनलोड कराया गया था, उस में रिचार्ज के जरीए रुपए का भुगतान करना होता था.

रिचार्ज करने के लिए टैलीग्राम चैनल में कस्टमर सर्विस के नाम से एक चैनल बनाया गया, जहां रिचार्ज की रकम पूछी जाती थी, फिर एक खाता नंबर में रुपए ट्रांसफर करने होते थे. रिचार्ज होने पर वह रकम उन के एप में दिखाई पड़ती थी.

हर रिचार्ज के समय अलगअलग खाते बताए गए. 19 जनवरी, 2024 को एक आईपीओ लौंच हुआ. सौरभ को इस में एप्लाई करने को कहा गया. मुनाफा अच्छा होने का चांस बता कर लालच भी दिया गया.

सौरभ स्वर्णकार पर दबाव बना कर एकमुश्त 13 लाख रुपए उस के बताए खाते में आरटीजीएस कराया गया. सौरभ स्वर्णकार को जमा रकम उस के एप में दिखाई दे रही थी, मगर कुछ दिनों बाद वह अपनेआप बदल गया. पूछने पर कोई सही जवाब नहीं आया.

ठगी का एहसास होने पर सौरभ स्वर्णकार ने मोहन नगर थाने में शिकायत दर्ज की. उस के साथ कुल 14 लाख, 65 हजार रुपए की ठगी हुई थी.

ऐसा है ठगी का खेल

दरअसल, जब सौरभ स्वर्णकार पूरी तरीके से उन के ?ांसे आ गया, तो उस के 2 अलगअलग अकाउंट खुलवाए गए, फिर धीरेधीरे एक करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम खातों में जमा कराई गई.

इधर, पीडि़त को लग रहा था कि उस की रकम बढ़ रही है और वह देखते ही देखते करोड़पति हो जाएगा और इस तरह वह लालच में फंसता चला गया. लेकिन जब जरूरत पड़ी और पीडि़त ने पैसे निकालने की कोशिश की, तो उसे रुपए नहीं मिले. उलटा, उस से नए आईपीओ के नाम पर और रकम मांगी गई.

पुलिस के मुताबिक, आमतौर पर लोगों के साथ धोखाधड़ी के मामले उन के लालच की वजह से होते हैं. जैसे, एक आदमी के साथ 22 करोड़ रुपए का साइबर कांड हुआ. उस ने इंवैस्टमैंट के नाम पर पैसा डबल होने के लालच में नुकसान झेला.

दरअसल, जैसे धार्मिक अंधश्रद्धा में फंस कर लोग अपना सबकुछ गंवा बैठते हैं और बाद में खुद को लुटा हुआ पाते हैं, वैसे ही आजकल कारोबार का जामा पहन कर लूटे जाने की वारदातें आम हो गई हैं.

एक सिरफिरे ने ली मासूम की जान

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में एक सिरफिरे शख्स ने अपने 4 साल के मासूम बेटे की बेरहमी से गला रेत कर हत्या कर दी. इस वारदात की वजह अंधविश्वास बताया गया है. शख्स की दिमागी हालत कुछ दिनों से ठीक नहीं थी. एक रात उस ने परिवार वालों से कहा भी था, “सुनोसुनो, मैं किसी की बलि दे दूंगा.”

उस शख्स की बात पर तब किसी ने तवज्जुह नहीं दी थी. सब को लगा था कि यह कुछ का कुछ बोल रहा है. पर एक रात उस शख्स ने चाकू से पहले एक मुरगे को काटा, फिर अपने मासूम बेटे का भी गला काट दिया.

यह दिल दहला देने वाला मामला शंकरगढ़ थाना क्षेत्र का है. पुलिस ने इस सिलसिले में बताया कि शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के तहत आने वाले गांव महुआडीह का रहने वाला 26 साल का कमलेश नगेशिया पिछले 2 दिनों से पागलों की तरह हरकत कर रहा था. उस ने परिवार वालों से कहा था कि उस के कानों में अजीब सी आवाजें सुनाई दे रही हैं, कोई उसे किसी की बलि चढ़ाने के लिए बोल रहा है.

एक दिन कमलेश नगेशिया चाकू ले कर घूम रहा था और उस ने अपने परिवार वालों से कहा था कि आज वह किसी की बलि लेगा, पर उस की दिमागी हालत को देखते हुए परिवार वालों ने इस बात को नजरअंदाज कर दिया था.

रात को खाना खाने के बाद कमलेश नगेशिया की पत्नी अपने दोनों बच्चों को ले कर कमरे में सोने चली गई. कमलेश के भाइयों के परिवार बगल के घर में रहते हैं. वे भी रात को सोने चले गए.

देर रात कमलेश नगेशिया ने घर के आंगन में एक मुरगे का गला काट दिया, फिर कमरे में जा कर वह 4 साल के अपने बड़े बेटे अविनाश को उठा कर आंगन में ले आया. उस ने बेरहमी से अपने बेटे अविनाश का चाकू से गला काट दिया. अविनाश की मौके पर ही मौत हो गई.

सुबह के तकरीबन 4 बजे जब कमलेश की पत्नी की नींद खुली तो उसे अविनाश बगल में नहीं मिला. उस ने कमलेश से बेटे अविनाश के बारे में पूछा तो उस ने पत्नी को बताया कि उस ने अविनाश की बलि चढ़ा दी है.

इस वारदात की जानकारी मिलने पर घर में कुहराम मच गया. सूचना मिलने पर शंकरगढ़ थाना प्रभारी जितेंद्र सोनी की अगुआई में पुलिस टीम मौके पर पहुंची. पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया. बच्चे के शव को पंचनामा करने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया.

थाना प्रभारी जितेंद्र सोनी ने बताया कि परिवार से पूछताछ कर उन लोगों का बयान दर्ज किया गया है. आरोपी 2 दिनों से ही अजीब हरकत कर रहा था. पहले वह ठीक था, फिर एक शाम उस ने परिवार के सामने किसी की बलि चढ़ाने की बात कही थी, लेकिन उन लोगों ने इस बात को गंभीरता से नहीं लिया. इस मामले में पुलिस ने धारा 302, और धारा 201 का अपराध दर्ज किया है.

इस मामले में परिवार वालों ने समझदारी से काम लिया होता और इस की शिकायत पहले ही पुलिस में की होती या फिर कमलेश को डाक्टरी सलाह के लिए भेज दिया गया होता, तो मासूम अविनाश की जिंदगी बच सकती थी.

एक पुलिस अफसर के मुताबिक, गांवदेहात में इस तरह की वारदातें हो जाती हैं, जिन का कुसूरवार जहां एक तरफ परिवार होता है, वहीं दूसरी तरफ आसपास के रहने वाले भी कुसूरवार समझे जाते हैं, मगर पुलिस सिर्फ एक हत्यारे पर कार्यवाही कर के मामले को बंद कर देती है.

कुलमिला कर ऐसे मामले सिर्फ एक खबर के रूप में समाज के सामने आते हैं और फिर लोग उन्हें भूल जाते हैं. इस दिशा में अब सरकार के पीछेपीछे दौड़ने या यह सोचने से कि सरकार कुछ करेगी, ऐसी उम्मीद छोड़ कर हमें खुद आगे आना होगा, ताकि फिर आगे ऐसी कोई वारदात न हो.

सेना के फर्जी जवान, ठगी से डाक्टर हलाकान

सेना के फर्जी जवान बन कर खासतौर पर डाक्टरों से ठगी करने वाला गिरोह इन दिनों अनेक लोगों को अपना शिकार बना चुका है. बतौर सावधानी जरूरी है कि अगर आप के पास ऐसा कोई फोन आता है और भुगतान के लिए यूपीआई नंबर की मांग की जाती है, तो सावधान हो जाएं.

दरअसल, डाक्टरों से ठगी करने वाला गिरोह छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में कांड करता है. ऐसी कुछ घटनाएं पिछले कुछ सालों में भी हुई थीं, जिन में कोई भी अपराधी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाया. अब पिछले कुछ समय से गिरोह के सदस्य दोबारा जवानों की जांच कराने के नाम पर किसी भी डाक्टर को फोन करते हैं. जवानों की तादाद बता कर वे फीस के बारे में पूछते हैं और फिर डाक्टर से ठगी करते हैं.

डाक्टर के फीस बताने पर ठग पेटीएम के जरीए एडवांस यूपीआई नंबर मांगते हैं. यूपीआई नंबर बताते ही ठगी का खेला शुरू हो जाता है. अब डाक्टर के खाते में फीस जमा होने के बजाय उस के खाते की रकम ठग के खाते में जाना शुरू हो जाती है.

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव, दुर्ग और राजधानी रायपुर में डाक्टरों के पास इन दिनों ऐसे फोन आ रहे हैं. ट्रु कौलर पर सेना की वरदी पहने आदमी का फोटो देख कर डाक्टरों को यही महसूस होता है कि फोन करने वाला सेना का कोई अफसर होगा, मगर ऐसा कुछ नहीं होता है और डाक्टर ठगी का शिकार हो जाते हैं.

मार्च, 2024 के पहले हफ्ते में राजनांदगांव के एक संस्थान में ऐसा ही फोन आया. ट्रु कौलर पर सेना के अफसर का फोटो देख कर शहर के एक नामचीन डाक्टर वर्मा (बदला हुआ नाम) ने इज्जत के साथ बातचीत की और बाद में वे खुद ठगी का शिकार हो गए.

ऐसे ही एक और मामले में डाक्टर माखीजा ने फोन रिसीव किया, तो सामने वाले ने खुद को सेना का अफसर बताते हुए कुछ सेना के जवानों की शारीरिक जांच कराने की चर्चा की. जब उस अफसर ने फीस का भुगतान पेटीएम से करने की कह कर यूपीआई नंबर मांगा, तो डाक्टर मखीजा को शक हो गया और उन्होंने तत्काल फोन काट दिया.

इसी तरह स्टेशनरी और टेलरिंग की एक दुकान से भुगतान के लिए यूपीआई नंबर ले लिया गया और बाद में कारोबारी का खाता खाली होता चला गया.

भुगतान करने की कह कर एक कारोबारी के यूपीआई नंबर अकाउंट को आर्मी के खाते से लिंक कराने के एक और मामले में आर्मी के अफसर के नाम से ठगी की कोशिश हुई. उस कारोबारी को किसी ठग ने खुद को आर्मी का अफसर बताते हुए वरदी के और्डर देने की बात कही. ठग ने नियम का हवाला दे कर पेमेंट के लिए यूपीआई नंबर या बैंक अकाउंट नंबर देने की बात कही और ओटीपी आने पर उन्हें वह ओटीपी बताने की बात कही, जिस पर शक होने पर उस कारोबारी ने अपने दोस्त की सलाह ली और किसी भी तरह की जानकारी देने से मना कर दिया और दुकान पर आ कर पेमेंट कैश कर और्डर कंफर्म करने की बात कही. इस पर ठग ने बकवास करते हुए गालीगलौज करना शुरू कर दिया. यह सारा मामला पुलिस की जानकारी में आ चुका है और अभी तक आरोपी पकड़े नहीं गए हैं.

ऐसी ठगी भी होती है

एक मामले में 45 साल के वी. सिंह, जो आम्रपाली सोसाइटी, लालपुर, रायपुर में रहते थे, ठगी का शिकार हो गए. उन के पास सुबह 10 बजे एक फोन आया. फोन करने वाले ने अपना नाम दीपक पवार बताते हुए खुद को आर्मी अफसर बताया. उस ने किराए पर घर लेने की इच्छा जताई. इस के बाद उस ने अपना आधारकार्ड, पैनकार्ड उन्हें ह्वाट्सएप कर दिया. फिर उस ने एडवांस पैसा जमा करने के लिए अकाउंट नंबर मांग लिया.

पीड़ित ने अपनी मां का अकाउंट नंबर दे दिया. इस के बाद उस ने कहा कि यूपीआई ट्रांजेक्शन करना है, इसलिए अकाउंट नंबर कंफर्म करने के लिए एक रुपया भेजने के लिए कहा और उस के बदले में उस ने 2 रुपए भेज दिए.

अब ठग ने कहा कि आर्मी अकाउंट का नियम है है कि आप एक रुपया भेजोगे तो डबल भेजेंगे. उस ने घर किराए की एडवांस रकम 54,000 रुपए प्रार्थी को भेजने के लिए कहा. उस ने वैसा ही कर दिया. पैसे डालने के बाद उस ने कहा कि गलत ट्रांजैक्शन हो गया है, एक रुपया कम कर के भेजना था.

इस के बाद पीड़ित ने 45,999 रुपए भेज दिए. तभी के शिकार हो चुके शख्स ने पुलिस को बताया कि इस के बाद वह फोन करता रहा, लेकिन ठग ने फोन उठाना बंद कर दिया. मगर पीड़ित से कुल 99,999 रुपए ठग लिए गए थे.

नोटों की बारिश का झांसा

हमारे आसपास बहुत से लोग सज्जन और भोलेभाले होते हैं, जो किसी की भी बातों में आ जाते हैं और ठगी का शिकार हो जाते हैं. हाल ही में ऐसी अनेक घटनाएं घटी हैं.

पहली घटना

छत्तीसगढ़ के रतनपुर, बिलासपुर में लड़कियों को दैवीय शक्ति से पैसों की बारिश होने का झांसा दे कर पूजापाठ करने के नाम पर ठगी की गई.

दूसरी घटना

‘चांदी ले कर आओ उसे हम सोना बना देंगे,’  कह कर जिला कोरबा के पाली थाना इलाके में 2 लोगों ने कई औरतों को ठग लिया.

तीसरी घटना

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के कटोरा तालाब थाना इलाके के तहत रुपयों को दोगुना बनाने का झांसा दे कर ठगी कर ली गई.

ये कुछ घटनाएं बताती हैं कि आज के पढ़ेलिखे समाज में भी लगातार ठगी की घटनाएं हो रही हैं. इस का सीधा सा मतलब यह है कि 21वीं सदी में भी वही हालात हैं, जो कई साल पहले हुआ करते थे. आखिर इस के पीछे वजह क्या है और इसे कैसे रोका जा सकता है?

रुपए की बरसात

2 नाबालिग लड़कियों को दैवीय शक्ति से पैसों की बारिश होने का झांसा दे कर पूजापाठ करने और फिर रेप करने वाले 4 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया. पुलिस की अपील है कि झांसा देने वाले ऐसे लोगों से सभी को सावधान रहना चाहिए, जिस से भविष्य में ऐसी घटना न हो.

दरअसल, हुआ यह था कि छत्तीसगढ़ के रतनपुर थाना इलाके के तहत 14 फरवरी, 2024 को पीडि़ता के परिवार द्वारा रिपोर्ट दर्ज की गई कि उन के गांव के 2 लोगों द्वारा उन्हें बताया गया था कि एक ठाकुर बाबा हैं, जो कुंआरी कन्याओं के साथ पूजापाठ करते हैं, जिस से पैसा बरसने लगता है.

इस झांसे में आ कर वे लोग रतनपुर के मदनपुर इलाके में एक घर में आए, जहां पूजापाठ के बाद बाबा द्वारा उन बच्चियों को अकेले कमरे में ले जा कर  जिस्मानी शोषण किया गया. अपने घर जाने पर उन बच्चियों ने यह बात अपने परिवार वालों को बताई, जिस पर उन के द्वारा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई.

थाना रतनपुर में पुलिस टीम गठित कर संदेहियों को लोकल मुखबिर के आधार पर आरोपियों का पता लगाकर गिरफ्तारी के लिए 3 अलगअलग टीमें बनाई गईं और 4 आरोपियों को बालपुर, भाठागांव थाना सरसींवा जिला सारंगढ़, बिलाईगढ़ व लिगिंयाडीह और मदनपुर जिला बिलासपुर से गिरफ्तार किया गया.

पुलिस से यह भी जानकारी मिली कि सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के बाशिंदे धनिया बंजारे और हुलसी रात्रे तकरीबन 2 महीने पहले से 2 अलगअलग जगह की नाबालिग बच्चियों और उन के मातापिता को कुंआरी लड़की की पूजा करा कर और उस के ऊपर दैवीय शक्ति बैठाने से लाखोंकरोड़ों रुपए की बारिश होती है कह कर अपने विश्वास में लिया गया.

11 फरवरी, 2024 को उन 2 नाबालिग बच्चियों को उन के परिवार के साथ बिलासपुर बसस्टैंड ले कर गए और वहां पूजा करने वाले पंडित कुलेश्वर राजपूत उर्फ पंडित ठाकुर और उन के साथी कन्हैया से मिलवा कर उन के द्वारा ही पूजापाठ करा कर पैसे बरसाने वाली बता कर मुलाकात कराई गई, जहां से वे लोग उन दोनों नाबालिग बच्चियों को मदनपुर रानीगांव के पास गणेश साहू के मकान में ले कर गए. वहां सभी ने गणेश साहू के घर खाना खाया.

बाद में पंडित कुलेश्वर ठाकुर उन दोनों नाबालिग बच्चियों में से एक बच्ची को मकान के अंदर कमरे में ले गए और पूजा के बहाने उस लड़की के साथ जबरदस्ती जिस्मानी संबंध बनाया और उस घटना के बारे में किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी देते हुए कमरे के बाहर छोड़ दिया.

इसी तरह दूसरी नाबालिग लड़की को भी पूजा कराने के बहाने अंदर कमरे में ले जा कर जबरदस्ती रेप किया. इस के बाद पंडित कुलेश्वर ठाकुर द्वारा उन लड़कियों के परिवार वालों को बताया गया कि पूजापाठ से महज 2-4 हजार रुपए की ही बारिश हो पाई है और पैसे दे दिए.

दोनों नाबालिग बच्चियां इस घटना से इतनी ज्यादा डरीसहमी थीं कि वे अपने परिवार वालों को कुछ भी नहीं बता पाईं.

पर बाद में बिलासपुर बसस्टैंड से अपने घर लौटते समय इस घटना के संबंध में दोनों नाबालिग लड़कियों ने अपने परिवार को बताया. रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड विधान की धाराओं के तहत मामला बना कर आरोपियों को गिरफ्तार कर उन्हें जेल भेज दिया.

 

जुनून में हो रहे खून

महाराष्ट्र के पुणे शहर में 21 जनवरी, 2024 को एक सिरफिरे आशिक ने प्यार का विरोध करने पर अपनी प्रेमिका की मां की गला घोंट कर हत्या कर दी. कत्ल के लिए उस ने कुत्ते की बैल्ट का इस्तेमाल किया. प्रेमिका की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया.

यह वारदात पुणे के पाषाण सुस रोड पर बनी एक सोसाइटी में हुई. वहां 58 साल की वर्षा अपनी 22 साल की बेटी मृण्मयी के साथ रहती थीं. जनवरी महीने की पहली तारीख को वर्षा के पति की मौत हो गई थी. उन की बेटी एक कंप्यूटर इंजीनियर है, लेकिन 1 जनवरी को पिता की मौत के बाद उस ने अपनी नौकरी छोड़ दी थी.

मृण्मयी की तकरीबन 7 महीने पहले एक डेटिंग एप पर शिवांशु के साथ मुलाकात हुई थी. फिर वे दोनों एकदूसरे से प्यार करने लगे थे, लेकिन कुछ महीने बाद ही मृण्मयी को पता चला कि उस का प्रेमी डिलीवरी बौय है.

मृण्मयी की मां वर्षा उन दोनों के रिश्ते के खिलाफ थीं. वे लड़के की नौकरी और माली हालत को अपनी हैसियत के बराबर नहीं समझाती थीं, इसलिए उन्होंने अपनी बेटी मृण्मयी से इस रिश्ते से बाहर निकलने के लिए कहा.

पिता को खो चुकी मृण्मयी ने अपनी मां की बात मान ली. उस ने शिवांशु से ब्रेकअप कर लिया और उस से मिलनाजुलना भी बंद कर दिया. इस बात से नाराज शिवांशु एक रात मृण्मयी के घर पहुंच गया.

मृण्मयी की मां वर्षा शिवांशु को पहले से जानती थीं, इसलिए उन्होंने दरवाजा खोल कर उसे अंदर बुला लिया. घर में घुसने के बाद शिवांशु ने पहले तो मां को शादी के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन जब वे नहीं मानीं, तो उस ने कुत्ते की बैल्ट से गला घोंट कर उन की हत्या कर दी.

इसी तरह दिल्ली के रोहिणी इलाके में एक 24 साल के लड़के ने अपनी 19 साल की प्रेमिका की गला रेत कर हत्या करने की कोशिश की. बाद में खुद की भी जान ले ली.

दरअसल, अमित नाम का यह सिरफिरा आशिक उसी दफ्तर में काम करता था, जिस में लड़की काम करती थी. उसे लड़की से एकतरफा प्यार हो गया था. परेशान हो कर लड़की ने अमित से बात करना बंद कर दिया.

अमित यह बेरुखी सह नहीं सका. उस ने चाकू से लड़की पर हमला किया और उस का गला रेतने की कोशिश की. लेकिन औफिस के दूसरे लोगों ने उसे बचा लिया. फिर अमित ने खुद को एक कमरे में बंद कर लिया और फांसी लगा कर खुदकुशी कर ली.

इस तरह के अपराध होने की वजह क्या है? दरअसल, आजकल हमारे पास अच्छी सोच विकसित करने के लिए कोई जरीया नहीं है. न हमारे पास वैसे लेखक हैं, जो समाज को सुधारने की बातें कहते हों या जिन के लेखन में कोई पैनापन झलकता हो. न हमारे पास पढ़ने के लिए वैसी किताबें हैं, जो हमें अच्छा नागरिक बनाएं.

हम बस विश्वास या कहें कि अंधविश्वास के सहारे चल रहे हैं. तभी हम कहते हैं कि धर्म ने ऐसा कहा, इसलिए यही सही है या प्यार ऐसे ही होता है और हम ऐसे ही प्यार करेंगे. इसी पर हमारा विश्वास है.

आज हमारे पास देखने के लिए जो फिल्म या सीरियल की कहानियां हैं, उन में तिकड़मबाजी, लालच और जबरदस्ती दिखाई जाती है. कुछ गिनीचुनी किताबें जो हम पढ़ते हैं, उन की कहानियों में भी आज इसी तरह के ही किरदार दिखाई देते हैं.

आज हमारे पास पढ़ने को बचा क्या है? लेदे कर एक मोबाइल है, जो सब के हाथों में होता है. हम उस में आंखें गड़ाए रखते हैं. उस में जो भी बेसिरपैर की बातें पढ़ने को मिलती हैं, वही हमारे मन में बैठती जाती हैं.

मोबाइल में ऐसी बेहूदा चीजें भी होती हैं, जिन का हमारी जिंदगी पर नैगेटिव असर पड़ता है. मगर हम उसे ही फौरवर्ड किए जाते हैं. इस में केवल विश्वास को बढ़ावा दिया जाता है. बस, इसी विश्वास के आधार पर हमारी सोच विकसित होती है. हम वैसा ही करने लग जाते हैं, जैसा हमें समझाया जा रहा है.

गलती हमारी नहीं, बल्कि गलती है हमारे माहौल की. गलती है समाज के बदलते हुए नजरिए की जिस ने हमें तिकड़मबाजी, लालच, बेईमानी जैसी बुराइयां सिखाई हैं.

आज कुछ पत्रिकाएं हैं, जो अच्छी सोच को समाज सुधारने का आधार मानती हैं. दिल्ली प्रैस की पत्रिकाएं ऐसी ही हैं, मगर समस्या यह है कि हम पढ़ने के लिए समय ही नहीं निकालते हैं. हम मोबाइल में लगे रहते हैं.

जब तक हम मोबाइल के जंजाल से पीछा नहीं छुड़ाएंगे, तब तक कुछ भी सही होने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं?

चसका पराई औरत का

नंदू का अपने गांव की विधवा कमला से जिस्मानी संबंध अब लोगों में चर्चा की बात बन चुका है. नंदू की बीवी तारा इस वजह से अपने बच्चों को ले कर 2 महीने से मायके में बैठी हुई है.

सारा समाज नंदू की इस हरकत पर थूथू कर रहा है, लेकिन नंदू है कि विधवा कमला से अपने जिस्मानी संबंध तोड़ने को तैयार नहीं है.

मायके जाने से पहले नंदू की बीवी तारा भी कमला को समझाने और पति नंदू से जिस्मानी रिश्ता तोड़ लेने की गुहार लगाने कमला के पास गई थी, लेकिन कमला ने उस की एक नहीं सुनी और कहा, ‘‘तू अपने मर्द को बांध कर रख ले. मैं उस के पास नहीं जाती, वही मेरे पास आता है.’’

शबनम की शादीशुदा जिंदगी भी बुरी तरह गुजर रही है. वजह, शबनम का शौहर शब्बीर अपने चाचा की बीवी तनाज की जवानी में खोया रहता है. शब्बीर अपने घर न रह कर अकसर चाचा के घर ही पड़ा रहता है और वहां तनाज के जिस्मानी रूप का जाम पीता रहता है. चाचा की रोकटोक नहीं होने और तनाज की हामी के चलते शब्बीर की ये करतूतें मजे से चल रही हैं.

शब्बीर ने अपनी सारी दौलत तनाज को खुश करने में लुटा रखी है. तनाज की अदाओं के सामने शब्बीर अपनी बीवी को भी भुला बैठा है.

शब्बीर ने समाज के बंधनों को भी ताक पर रख दिया. बस, तनाज और उस के जिस्मानी रिश्तों को वह अपनी जिंदगी मानने लगा है और तनाज है कि शब्बीर को बेवकूफ बना कर उसे दोनों हाथों से लूट रही है.

दूसरे की औरत सभी मर्दों को अच्छी लगती है. पराई बीवी में मर्द को जवानी और जोश का सैलाब दिखता है. पराई औरत को भोगने की इच्छा तकरीबन सभी मर्दों में पाई जाती है. इस के लिए वे इज्जत को ताक पर रख जिस्मानी मजा लेने के लिए उतावले हो जाते हैं.

कुछ मर्दों को दूसरे की बीवी के ब्लाउज से झाकते उभार पसंद आते हैं, तो किसी को उस के हिलते हुए कूल्हे. कोई गैर की बीवी के कसे हुए जिस्म पर मरता है, तो कोई उस की नशीली अदाओं का शिकार हो जाता है.

ऐसा दर्शन पा कर उस पर लट्टू मर्द को अपनी बीवी बेकार लगने लगती है. उसे तब अपनी बीवी में न जवानी दिखती है और न ही सैक्सी अदाएं नजर आती हैं.

बदमाश किस्म की औरतें ऐसे मर्दों की तलाश में रहती हैं, जो उन के हुस्न पर पैसा लुटाए और जरूरत पड़ने पर उन की जिस्मानी प्यास को भी बुझाए.

इन औरतों का अपना कोई दीनईमान नहीं होता है. जब तक उन्हें पराए मर्द से पैसा मिलता है, तब तक वे उन के करीब रहती हैं. कंगाल मर्द को वे दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल कर बाहर फेंक देती हैं.

सच यही है कि दूसरे की बीवी के चक्कर में पड़ने के बाद वह अपनी बीवी और समाज की नजर में गिर जाता है. बीवी भी अपने मर्द को दिल से माफ नहीं कर पाती है.

पराई औरत से जिस्मानी रिश्तों के चक्कर में ऐसे मर्दों को आखिर में बदनामी ही मिलती है. उन्हें हमेशा गलत नजर से देखने की जो आदत पड़ जाती है, वह भी आसानी से नहीं छूटती है.

दूसरे की बीवी से जिस्मानी रिश्ता बनाने के चलते मर्दों को कई अंदरूनी बीमारियों का शिकार होते भी देखा गया है. अनजाने में उस मर्द की बीवी भी शिकार हो जाती है. बीमारी के बढ़ने पर ही पता चलता है, लेकिन तब तक देर हो चुकी होती है.

गैर की बीवी गैर की ही होती है. सबकुछ लुटा देने के बाद भी वह गैर की रहती है. ऐसे में उस के लिए अपना घरपरिवार और जिंदगी बरबाद करना समझदारी वाली बात नहीं है. जो सुख पराई बीवी देती है, उस से कहीं ज्यादा मजा खुद की बीवी दे सकती है, फिर क्यों घर से बाहर दूसरे की बीवी में जिस्मानी सुख तलाशा जाए?

अच्छी बात तो यह होगी कि दूसरे की बीवी को अपनी बांहों में भरने की गलत आदत को छोड़ें. अपनी बीवी को प्यार करें, ताकि बीवी तो खुश रहे ही, घरपरिवार में भी सुख बना रहे.

जिस्मानी रिश्तों को अपनी जिंदगी से ज्यादा अहमियत न दें. दूसरे की बीवी अगर गलत इरादे से करीब आना चाहे, तो उस से दूरी बना कर रखें.

पटना ट्रिपल मर्डर, कैसे बना वह हथौड़े वाला हत्यारा

सुबह के 10 बज रहे थे. 50 साला अलीना सिंह अपनी दोनों बेटियों को स्कूल और कालेज भेज कर घर का काम निबटा रही थीं. उस समय घर में उन का सौतेला बेटा देवेश कुमार उर्फ रिंटू ही मौजूद था. अचानक देवेश कुमार ने अलीना के चेहरे पर कपड़ा लपेट दिया और सिर पर हथौड़ा मारमार कर उन्हें जान से मार डाला.

11 बजे अलीना की 11 साला छोटी बेटी पूर्णिमा स्कूल से घर आई, तो देवेश ने दरवाजा खोला. उस के बाद उस ने पूर्णिमा के सिर पर भी चादर लपेट कर हथौड़ा मारमार उस की जान ले ली.

दोपहर 1 बजे अलीना की 18 साला मझली बेटी सोनाली कालेज से घर लौटी और डोरबैल बजाई. देवेश ने दरवाजा खोला और उस का भी वही हाल किया, जो अलीना और पूर्णिमा का किया था.

15 दिसंबर को पटना के इंद्रपुरी महल्ले के जीरो नंबर रोड पर एक के बाद एक 3 कत्ल करने के बाद देवेश कुमार अपने पिता गोपाल शरण सिंह के पास पहुंचा.

दरअसल, देवेश ने ही गोपाल को सुबह 8 बजे उन के दोस्त धर्मपाल महतो के घर भेज दिया था.

देवेश ने गोपाल से कहा कि दिल्ली चलना है. जल्दी तैयार हो जाइए. उस के बाद दोनों पटना जंक्शन पहुंचे. देवेश ने किसी तरह से पटनादिल्ली राजधानी ऐक्सप्रैस ट्रेन में टिकट का इंतजाम किया और दोनों दिल्ली की ओर चल पड़े.

जब ट्रेन कानपुर के पास पहुंची, तो देवेश ने अपने पिता से कहा कि उस ने अपनी सौतेली मां समेत दोनों बहिनों को मार डाला.

गोपाल को तो पहले बेटे की इस हैवानियत पर यकीन नहीं हुआ, लेकिन जब सारा मामला उन्हें समझ में आया, तो वे जोरजोर से रोने लगे.

देवेश ने अपने हाथों से उन का मुंह दबा कर कहा कि वे रोएं नहीं, वरना वह पकड़ा जाएगा. इस के बाद देवेश ट्रेन से नीचे उतर गया.

ट्रेन जब दिल्ली पहुंची, तो गोपाल अपने छोटे बेटे ओंकार सिंह उर्फ चिंटू के कालकाजी इलाके में बने घर पहुंचे और उसे सारा माजरा बताया.

दिल्ली से ही गोपाल ने पटना में अपने पड़ोसी जोगिंदर को फोन कर के कहा कि वह उन के घर जा कर देखें कि वहां कुछ गड़बड़ तो नहीं है, क्योंकि घर में कोई भी फोन नहीं उठा रहा है.

जोगिंदर जब गोपाल के घर पहुंचा, तो चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ था. गेट खोल कर वह अंदर गया, तो कमरे में पड़ी 3 लाशों को देख कर वह सन्न रह गया.

हड़बड़ी में वह भाग कर बाहर निकला और गोपाल को फोन कर सारा माजरा बताया. इस के बाद उस ने महल्ले वालों से बात कर पाटलीपुत्र थाने में खबर दी.

पटना के एसएसपी अमृतराज ने बताया कि हत्या करने का क्रूर तरीका बता देता है कि हत्यारा अलीना, सोनाली और पूर्णिमा से काफी नफरत करता था. हत्या को लूट का रंग देने के लिए उस ने कमरे में रखे बक्सों को उलटपुलट कर रख दिया था. इस मर्डर केस की जड़ में जायदाद का झगड़ा ही है.

रिटायर्ड क्लर्क गोपाल शरण सिंह का पटना के इंद्रपुरी महल्ले में डेढ़ कट्ठा यानी तकरीबन 2 हजार वर्ग फुट जमीन पर मकान बना हुआ है, जिस की कीमत तकरीबन 80 लाख रुपए है. इस के अलावा कटिहार के राजपूताना इलाके में 55 कट्ठा जमीन भी है, जिस की कीमत भी करोड़ों रुपए की आंकी गई है.

देवेश चाहता था कि पिता गोपाल शरण सिंह अपनी जायदाद का बंटवारा कर दें. पिता गोपाल बंटवारे को तैयार थे, पर अलीना इस के लिए तैयार नहीं थीं. वे चाहती थीं कि सोनाली और पूर्णिमा की शादी के बाद ही जायदाद का बंटवारा हो.

अलीना ने जमीन और मकान के सारे कागजात अपने कब्जे में कर रखे थे. इस मामले को ले कर अकसर घर में हल्लाहंगामा होता रहता था.

गोपाल के पड़ोसी बताते हैं कि गोपाल की पहली बीवी की मौत 20-22 साल पहले हो गई थी. इस के बाद उन्होंने अलीना से दूसरी शादी की. अलीना से उन की 3 बेटियां हुईं, जबकि पहली बीवी से 2 बेटे थे.

अलीना जब ब्याह कर घर आईं, तो उसी समय से उन्होंने गोपाल के बेटों को परेशान करना शुरू कर दिया. इस को ले कर अलीना और गोपाल में अकसर बकझक होती रहती थी. हार कर गोपाल ने अपने दोनों बेटों को हौस्टल में भेज दिया था. शुरुआती पढ़ाई करने के बाद गोपाल ने दोनों बेटों को पढ़ने के लिए दिल्ली भेज दिया था. दोनों भाई पिछले 12 सालों से दिल्ली में रह रहे थे.

कई पड़ोसियों ने बताया कि अलीना काफी सख्त मिजाज की औरत थीं और गोपाल उन के सामने घुटने टेके रहते थे. अलीना ने दोनों बेटों की शादी में भी गोपाल को नहीं जाने दिया था.

सौतेली मां और 2 बेटियों की हत्या करने में हैवानियत की हद पार कर देवेश फरार है. उस की शादी हो चुकी है और पिछले महीने ही वह बाप बना था.

मनोविज्ञानी अनिल पांड्या कहते हैं कि अपने परिवार के लोगों का कत्ल कर के देवेश हैवानियत की तमाम हदें पा कर गया. इस से पता चलता है कि उस के मन में अलीना को ले कर इस कदर नफरत थी कि वह उस की बेटियों को भी नहीं देखना चाहता होगा.

घरेलू झगड़ों के बढ़ते मामलों के बीच परिवार वालों को देखना समझना होगा कि ऐसे झगड़ों को तूल न पकड़ने दें और न ही ऐसे मामलों को लटका कर रखें.

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