Diwali Special: बॉयफ्रेंड के साथ दीवाली

दीवाली आते ही खुशियों का माहौल बनने लगता है. खुशियों को मिल कर मनाना चाहिए. ऐसे में दीवाली गर्लफ्रैंड और बौयफ्रैंड मिल कर मनाते हैं. आज समय बदल गया है. गर्लफ्रैंड और बौयफ्रैंड अब जौब वाले भी हैं. वे खुद पर निर्भर होते हैं. पहले गर्लफ्रैंड और बौयफ्रैंड टीनएज में होते थे तो उन के दायरे भी सीमित होते थे. आज युवा जल्दी ही जौब करने लगे हैं. इस के अलावा घरों से दूर होस्टल में या दूसरे शहरों में रह रहे हैं.

ऐसे में वे पहले के मुकाबले ज्यादा आजाद होते हैं. उन के सामने अब अवसर होते हैं कि वे आपस में मिल कर फैस्टिवल मना सकते हैं. पार्टीज करने के लिए जरूरी नहीं है कि महंगे होटल या पब में जाएं. किसी दोस्त के घर या छोटे होटल, पार्क में भी इस को कर सकते हैं.

प्रोफैशनल स्टडीज कर रही इसिका यादव कहती हैं, ‘‘गर्लफ्रैंड और बौयफ्रैंड ही नहीं, हम अपने सामान्य फ्रैंड्स के साथ भी दीवाली कुछ खास तरह से मना सकते हैं. कालेज और होस्टल में रहने वाले लोग छुटिट्यों में अपने घर जाते हैं. ऐसे में दीवाली से पहले दीवाली पार्टी और दीवाली के बाद भी पार्टी का आयोजन कर सकते हैं. उस में खास दोस्तों को बुला सकते हैं. पार्टी में डांस, म्यूजिक, गेम्स और कई तरह के प्राइजेज के साथ खानेपीने के अच्छे मैन्यू रख सकते हैं. युवाओं को यह अच्छा लगता है. दीवाली रोशनी यानी लाइटिंग का त्योहार होता है. पार्टी में लाइटिंग भी होनी चाहिए.’’

होस्टल में रहने वाले और कोचिंग के जरिए जौब की तैयारी करने वाले कुछ युवाओं की जब जौब लग जाती है तो वे अपनी तरफ से भी ऐसी पार्टी का आयोजन दीवाली सैलिब्रेशन के साथ कर लेते हैं जिस से उन की सक्सैस पार्टी भी हो जाती है और दीवाली की सैलिब्रेशन पार्टी भी. अपनी उम्र और अपनी पसंद के लोगों के साथ पार्टी करने का आनंद ही अलग होता है. ऐसे में दीवाली सैलिब्रेशन पार्टी बहुत अच्छी होती है. ज्यादातर लोगों की प्लेसमैंट के बाद इन्हीं महीनों में जौब लग चुकी होती है तो वह एक खास अवसर भी होता है.’’

अलग अंदाज में दें बधाई

दीवाली में बधाई देने का अंदाज पिछले साल से कुछ अलग हो, इस बात का खास खयाल रखें. पहले ग्रीटिंग कार्ड का जमाना था. इस के बाद एसएमएस आया और अब सोशल मीडिया आने के साथ व्हाट्सऐप के जरिए संदेश भेजे जाने लगे. कई बार लोग किसी और के भेजे गए बधाई संदेश आगे फौरवर्ड कर देते हैं.

ध्यान रखें, अब फौरवर्ड किए मैसेज में यह लिख कर आने लगा है कि यह मैसेज फौरवर्ड किया हुआ है. कुछ मैसेज में भेजने वाले का नाम लिखा होता है. कई बार जल्दी मैसेज भेजने के चक्कर में लोग दूसरे का नाम हटाना भूल जाते हैं. यह बहुत हास्यास्पद लगता है. जब भी किसी और का मैसेज आगे भेजते हैं तो उस को ध्यान से देख लें. गर्लफ्रैंड, बौयफ्रैंड ही नहीं, आम फ्रैंड्स को भी दीवाली की बधाई नए अंदाज में दें.

पूजा वाजपेई कहती हैं, ‘‘कोशिश करें कि खास दोस्तों को मिल कर बधाई दें. अगर दोस्त किसी और शहर में है तो फोन से बधाई दें. बधाई देने जाएं तो अपने साथ कुछ गिफ्ट जरूर ले कर जाएं. दोस्त किसी बाहरी शहर में है तो उस को कुरियर से गिफ्ट भेज सकते हैं.

‘‘आजकल औनलाइन गिफ्ट भेजना सरल हो गया है. दीवाली में गिफ्ट की कीमत की जगह आप के इमोशन दिखने चाहिए, यही युवाओं को पंसद आता है. पार्टी भी केवल कौफी की हो तो भी बेहद अच्छी लगती है. पार्टी में इस बात का खयाल रखें कि किसी भी तरह की नशे की चीजों का प्रयोग न करें. आजकल पार्टियों में नशे का प्रयोग होने लगा है. युवा ऐसी पार्टी से बच कर रहें.’’

उपहार में पैकिंग हो खास

उपहार देते समय इस बात का खास खयाल रखें कि गिफ्ट उस को पसंद आए. लड़कियों को डायमंड रिंग, नैकलैस, चौकलेट, परफ्यूम, एथनिक ड्रैसें पसंद आती हैं. ऐसे में अपने फ्रैंड की पसंद की चीजों को गिफ्ट में दें. किसी फ्रैंड को बुक्स बहुत अच्छी लगती हैं. आजकल तमाम तरह के गिफ्ट वाउचर भी हैं जिन को भी गिफ्ट की तरह से दे सकते हैं.

ब्यूटी सैलून के तमाम पैकेज होते हैं. वे अपनी गर्लफ्रैंड को दे सकते हैं. गिफ्ट आइटम की पैकिंग का काम करने वाली प्रीति शर्मा कहती हैं, ‘‘गिफ्ट देते समय इस बात का खास खयाल रखें कि उस की पैकिंग बेहद आकर्षक हो. आजकल ऐसे बहुत सारे प्रयोग होने लगे हैं जिन से दीवाली खास हो जाती है. पैकिंग को देने वाले या पाने वाले की रुचि के हिसाब से भी तैयार किया जा सकता है.‘‘

लड़कों को उपहार देना हो तो अच्छी ड्रैस दे सकते हैं. जैकेट, शर्ट और टीशर्ट आज के युवा बहुत पसंद करते हैं. उन्हें सिलवर या डायमंड के सिक्के भी दे सकते हैं व होम डैकोर की चीजें दे सकते हैं. वाल स्टीकर भी दिए जा सकते हैं. अलगअलग तरह की कैंडल्स भी दी जा सकती हैं. इन सब के साथ खानेपीने की चीजें भी उपहार में दें.

दीवाली में प्रदूषण को ले कर भी जागरूकता की जरूरत होती है. ऐसे में जरूरी है कि हम गिफ्ट में छोटेछोटे प्लांट या बोनसाई भी दे सकते हैं. घर में हरीभरी चीजें देखने को मिलती हैं तो बहुत अच्छा लगता है.

‘छप्पन भोग’ मिठाई शौप के मालिक नमन गुप्ता कहते हैं, ‘‘दीवाली गिफ्ट में अपने इलाके की मशहूर खानेपीने की चीजें दे सकते हैं. आज आसान बात यह है कि इन की औनलाइन शौपिंग कर के देशविदेश कहीं भी भेजा जा सकता है. ज्यादातर लोग एकजैसी खाने की चीजें ही भेजते हैं. सोहन पापड़ी को ले कर तमाम तरह के जोक्स बन चुके हैं. अगर आप अपने यहां की मशहूर खाने की चीजें उपहार में देंगे तो उस का अलग असर पड़ेगा.

‘‘अब कुरियर से तय समय और दिन में भी डिलीवरी देने का सिस्टम बन गया है. ऐसे में दीवाली के दिन शाम को सैलिब्रेशन के समय ही गिफ्ट खास दोस्त तक पहुंच सकता है.’’

सेक्स, क्या वाकई में प्यार है? आप भी जानिए

सच्चे प्रेम से खिलवाड़ करना किसी बड़े अपराध से कम नहीं है. प्रेम मनुष्य को अपने अस्तित्व का वास्तविक बोध करवाता है. प्रेम की शक्ति इंसान में उत्साह पैदा करती है. प्रेमरस में डूबी प्रार्थना ही मनुष्य को मानवता के निकट लाती है.

मुहब्बत के अस्तित्व पर सैक्स का कब्जा

आज प्रेम के मानदंड तेजी से बदल रहे हैं. त्याग, बलिदान, निश्छलता और आदर्श में खुलेआम सैक्स शामिल हो गया है.

प्रेम की आड़ में धोखा दिए जाने वाले उदाहरणों की शृंखला छोटी नहीं है और शायद इसी की जिम्मेदारी बदलते सामाजिक मूल्यों और देरी से विवाह, सच को स्वीकारने पर डाली जा सकती है. प्रेम को यथार्थ पर आंका जा रहा है. शायद इसी कारण प्रेम का कोरा भावपक्ष अस्त हो रहा है यानी प्रेम की नदी सूख रही है और सैक्स की चाहत से जलराशि बढ़ रही है.

विकृत मानसिकता व संस्कृति

आज के मल्टी चैनल युग में टीवी और फिल्मों ने जानकारी नहीं मनोरंजन ही परोसा है. समाज द्वारा किसी भी रूप में भावनाओं का आदर नहीं किया जाता. प्रेम का मधुर एहसास तो कुछ सप्ताह तक चलता है. अब तन के उपभोग की अपेक्षा है.

क्षणिक होता मुहब्बत का जज्बा

प्रेम अब सड़क, टाकीज, रेस्तरां और बागबगीचों का चटपटा मसाला बन गया है. वर्तमान प्रेम क्षणिक हो चला है, वह क्षणभर दिल में तूफान ला देता है और अगले ही पल बिलकुल खामोश हो जाता है. युवा आज इसी क्षणभर के प्रेम की प्रथा में जी रहे हैं.

एक शोध के अनुसार, 86% युवाओं की महिला मित्र हैं, 92% युवक ब्लू फिल्म देखते हैं, तो 62% युवक और 38% युवतियों ने विवाहपूर्व शारीरिक संबंध स्थापित किए हैं.

यही है मुहब्बत की हकीकत

एक नई तहजीब भी इन युवाओं में गहराई से पैठ कर रही है, वह है डेटिंग यानी युवकयुवतियों का एकांत मिलन.

शोध के अनुसार, 93% युवकयुवतियों ने डेटिंग करना स्वीकार किया. इन में से एक बड़ा वर्ग डेटिंग के समय स्पर्श, चुंबन या सहवास करता है. इस शोध का गौरतलब तथ्य यह है कि अधिकांश युवक विवाहपूर्व यौन संबंधों के लिए अपनी मंगेतर को नहीं बल्कि किसी अन्य युवती को चुनते हैं. पहले इस आयु के युवाओं को विवाह बंधन में बांध दिया जाता था और समय आने तक जोड़ा दोचार बच्चों का पिता बन चुका होता था.

अमीरी की चकाचौंध में मदहोश प्रेमी

मृदुला और मनमोहन का प्रेम कालेज में चर्चा का विषय था. दोनों हर जगह हमेशा साथसाथ ही दिखाई देते थे. मनमोहन की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी. वह मध्यवर्गीय परिवार से था, लेकिन मृदुला के सामने खुद को थोड़ा बढ़ाचढ़ा कर दिखाने की कोशिश में रहता था. वह मृदुला को अपने दोस्त की अमीरी और वैभव द्वारा प्रभावित करना चाहता था. दूसरी ओर आदेश पर भी अपना रोब गांठना चाहता था कि धनदौलत न होने पर भी वह अपने व्यक्तित्व की बदौलत किसी खूबसूरत युवती से दोस्ती कर सकता है.

लेकिन घटनाचक्र ने ऐसा पलटा खाया कि जिस की मनमोहन ने सपने में भी कल्पना नहीं की थी. उस की तुलना में अत्यंत साधारण चेहरेमुहरे वाला आदेश अपनी अमीरी की चकाचौंध से मृदुला के प्यार को लूट कर चला गया.

मनमोहन ने जब कुछ दिन बाद अपनी आंखों से मृदुला को आदेश के साथ उस की गाड़ी से जाते देखा तो वह सोच में पड़ गया कि क्या यह वही मृदुला है, जो कभी उस की परछाईं बन उस के साथ चलती थी. उसे अपनी बचकानी हरकत पर भी गुस्सा आ रहा था कि उस ने मृदुला और आदेश को क्यों मिलवाया.

कालेज में मनमोहन की मित्रमंडली के फिकरों ने उस की कुंठा और भी बढ़ा दी.

प्रेम संबंधों में पैसे का महत्त्व

प्रेम संबंधों के बीच पैसे की महत्ता होती है. दोस्ती का हाथ बढ़ाने से पहले युवक की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रख कर निर्णय लेना चाहिए. प्रेमी का यह भय सही है कि यदि वह अपनी प्रेमिका को महंगे उपहार नहीं देगा तो वह उसे छोड़ कर चली जाएगी. कोई भी युवती अपने प्रेमी को ठुकरा कर एक ऐसा नया रिश्ता स्थापित कर सकती है, जिस का आधार स्वाभाविक प्यार न हो कर केवल घूमनेफिरने और मौजमस्ती करने की चाह हो. युवकों को पैसे के अनुभव के बावजूद अपनी प्रेमिकाओं और महिला मित्रों को प्रभावित करने के लिए हैसियत से ज्यादा खर्च करना होगा.

प्रेम में पैसे का प्रदर्शन, बचकानी हरकत

छात्रा अरुणा का विचार है कि अधिकतर युवक इस गलतफहमी का शिकार होते हैं कि पैसे से युवती को आकर्षित किया जा सकता है. यही कारण है कि ये लोग कमीज के बटन खोल कर अपनी सोने की चेन का प्रदर्शन करते हैं. सड़कों, पान की दुकानों या गलियों में खड़े हो कर मोबाइल पर ऊंची आवाज में बात करते हैं या गाड़ी में स्टीरियो इतना तेज बजाते हैं कि राह चलते लोग उन्हें देखें.

हैसियत की झूठी तसवीर पेश करना घातक

अरुणा कहती है कि कुछ लोग प्रेमिका से आर्थिक स्थिति छिपाते हैं तथा अपनी आमदनी, वास्तविक आय से अधिक दिखाने के लिए अनेक हथकंडे अपनाते हैं. इसी संबंध में उन्होंने अपने एक रिश्तेदार का जिक्र किया जो एक निजी कंपनी में नौकरी करते थे. विवाह के तुरंत बाद उन्होंने पत्नी को टैक्सी में घुमाने, उस के लिए ज्वैलरी खरीदने तथा उसे खुश रखने के लिए इस कदर पैसा उड़ाया कि वे कर्ज में डूब गए. कर्ज चुकाने के लिए जब उन्होंने कंपनी से पैसे का गबन किया तो फिर पकड़े गए.

परिणामस्वरूप अच्छीखासी नौकरी चली गई. इतना ही नहीं, पत्नी भी उन की ऐसी स्थिति देख कर अपने मायके लौट गई. अगर शुरू से ही वह चादर देख कर पैर फैलाते, तो यह नौबत न आती.

समय के साथ बदलती मान्यताएं

मीनाक्षी भल्ला जो एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं, का कहना है कि प्यार में प्रेमीप्रेमिका दोनों ही जहां एकदूसरे के लिए कुछ भी कर गुजरने की भावना रखते हैं, वहीं अपने साथी से कुछ अपेक्षाएं भी रखते हैं.

व्यापार बनता आज का प्रेम

इस प्रकार के रवैए ने प्यार को एक प्रकार का व्यापार बना दिया है. जितना पैसा लगाओ, उतना लाभ कमाओ. कुछ मित्रों का अनुभव तो यह है कि जो काम प्यार का अभिनय कर के तथा झूठी भावुकता दिखा कर साल भर में भी नहीं होता, वही काम पैसे के दम पर हफ्ते भर में हो सकता है. अगर पैसे वाला न हो तो युवती अपना तन देने को तैयार ही नहीं होती.

नोटों की ऐसी कोई बौछार कब उन के लिए मछली का कांटा बन जाए, पता नहीं चलेगा. ऐसी आजाद खयाल या बिंदास युवतियों का यह दृष्टिकोण कि सच्चे आशिक आज कहां मिलते हैं, इसलिए जो भी युवक मौजमस्ती और घूमनेफिरने का खर्च उठा सके, आराम से बांहों में समय बिताने के लिए जगह का इंतजाम कर सके, उसे अपना प्रेमी बना लो.

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मोटी लड़कियां: खूबसूरती में अव्वल

Writer-  किरण बाला

माना कि हर लड़की छरहरा बदन चाहती है, लेकिन कई बार न चाहते हुए भी शरीर मोटा या भारी हो जाता है. तमाम कोशिशों के बावजूद मोटापा घटने का नाम नहीं लेता. ऐसे में आप क्या करें? क्या अपने को असुंदर या भद्दी मान कर अपने ही शरीर से नफरत करने लगें या शर्मिंदगी की वजह से घर से बाहर निकलना छोड़ दें? क्या इस का संताप पाल कर बैठ जाएं? ऐसा कुछ भी न करें. आप जैसी भी हैं, अच्छी हैं और उसी रूप में अपने को स्वीकारें.

मोटी युवतियां भी कम आकर्षक नहीं होतीं. भरा हुआ शरीर भी सुंदर लगता है. फिल्मी दुनिया में भी ऐसी कई अभिनेत्रियां हुई हैं जो मोटी होने के बावजूद लोकप्रिय रहीं. टीवी के रिऐलिटी शो में भी अनेक मोटी युवतियां और महिलाएं हैं जो अपनी विशिष्ट अदाओं से दर्शकों का मनोरंजन करती हैं या उन्हें लुभाती हैं.

शरीर से आप भले ही भारी हों लेकिन स्वभाव से हंसमुख हों तो मोटापे के बावजूद आप खूबसूरत लगेंगी. आप की मधुर मुसकान और मीठी वाणी सुंदरता को बढ़ाती ही है और व्यक्तित्व को आकर्षक भी बनाती है. आप अपनी व्यहारकुशलता से लोगों को अपनी तरफ खींच सकती हैं.

ऐसी बात नहीं है कि मोटी लड़कियों को प्यार करने वाले लड़के नहीं मिलते. प्यार किसी के मोटेपन या दुबलेपन को देख कर नहीं किया जाता. प्यार दिल से होता है. उन लड़कों की भी कमी नहीं है जिन की प्रेमिकाएं उन से कहीं अधिक भारी हैं. ऐसे शादीशुदा जोड़े भी कम नहीं हैं. मोटी लड़कियों की विवाहित जिंदगी भी सामान्य और सुखद होती है, इसलिए उन्हें किसी तरह की हीनभावना नहीं पालनी चाहिए.

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सुंदरता की कोई परिभाषा नहीं होती. जिस को जो भा जाए वही सुंदर है. यानी हर व्यक्ति के लिए सुंदरता की परिभाषा भिन्न होती है. कोई किसी के चेहरे से प्रभावित होता है तो कोई उस की कदकाठी से. इसी प्रकार कुछ वैयक्तिक गुणों को अहमियत देते हैं तो कुछ उस के रंगरूप को. कुछ की नजर में मोटी लड़कियां अधिक खूबसूरत होती हैं तो कुछ छरहरी लड़कियां पसंद करते हैं. इसलिए आप को चाहने वालों की कमी नहीं है.

यदि आप का कद 5 फुट से कम है तो थोड़ा सा भी बढ़ता वजन आप को मोटी दिखा सकता है. यदि आप लंबे कद की हैं, तो उतना ही वजन बढ़ने पर भी आप मोटी नजर नहीं आएंगी. लेकिन कद को बढ़ाना अपने हाथ में नहीं है, इसलिए छोटे कद की लड़कियों को अपने वजन के प्रति सतर्क रहना चाहिए.

मोटापा आनुवंशिक भी हो सकता है. यदि ऐसा है तो इस में आप का कोई दोष नहीं. आप लाख कोशिश कर लें, मोटापा कम नहीं होगा. इसी प्रकार, हार्मोन की गड़बड़ी की वजह से भी मोटापा बढ़ सकता है.

कुछ युवतियों में डायबिटीज या थायराइड की वजह से भी मोटापा बढ़ जाता है. इस के अलावा भी कई कारण होते हैं मोटापे के. इन में सब से आम कारण है खानपान, जैसे खाने में अधिक तेल, घी, मक्खन आदि का सेवन करना, फास्ट फूड का शौकीन होना आदि.

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यदि आप आरामतलबी जिंदगी जीना पसंद करती हैं, शारीरिक गतिविधियां और व्यायाम से दूर रहती हैं तो भी आप के शरीर पर चरबी चढ़ती जाएगी.

हो सकता है कि कुछ लोग मोटापे की वजह से आप का मजाक उड़ाते हों लेकिन इस पर गुस्सा करने या नाराज होने के बजाय हंस कर टाल देने में समझदारी है.

मोटी युवतियों को अपने पहनावे पर विशेष ध्यान देना चाहिए. उन के स्तनों का आकार काफी बड़ा या भारी होता है, सो उन्हें अच्छी कंपनी की ब्रा पहननी चाहिए ताकि वे कसे हुए रहें. अन्यथा चलतेफिरते, दौड़भाग करते समय वे भद्दे लगते हैं. वैसे, ऐसी दवा नहीं है जिस से इन के आकार को घटाया जा सके.

आप को अपनी चालढाल पर भी ध्यान देना चाहिए. कई बार इस वजह से भी आप हंसी या उपहास का पात्र बनती हैं. यदि आप के नितंब काफी फैले हुए या बाहर की ओर निकले हुए हैं तो ऐसा पहनावा रखें जिस से उन के उभार नजर न आएं. यही बात पेट और कमर के बारे में है. आप अपने पहनावे से इन्हें छिपा सकती हैं. यदि आप मोटी हैं तो आप को अपना सालाना मैडिकल चैकअप यानी स्वास्थ्य परीक्षण कराना चाहिए तथा हर माह अपना वजन चैक करना चाहिए. आप को अपने डाक्टर और डाइटीशियन के निर्देशों का पालन करना चाहिए.

आप का मोटापा और न बढ़े, इस के लिए नियमित रूप से व्यायाम आदि करना चाहिए. चाहे तो इस के लिए जिम या व्यायामशाला जौइन कर सकती हैं.

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मोटापा घटाने के लिए डाइटिंग करने की नहीं, सही डाइट का चुनाव करने की जरूरत है. डाइटिंग करने से शरीर कुपोषण का शिकार हो जाता है. शरीर सुस्त और बेजान सा लगने लगता है. डाइटिंग का असर चेहरे पर भी देखा जा सकता है. चेहरे का नूर समाप्त हो जाता है तथा वह बुझाबुझा सा दिखाई देने लगता है. इसलिए संतुलित आहार लें, इस से आप आकर्षक तो दिखेंगी ही, चेहरे का तेज भी बना रहेगा.

उन लड़कियों की भी कमी नहीं है जो कि शादी के पूर्व सामान्य थीं, लेकिन शादी के बाद, खासतौर से एकदो बच्चे होने और औपरेशन करा लेने के बाद, वे मोटी हो जाती हैं. डिलीवरी के बाद उन का शरीर सामान्य अवस्था में नहीं आ पाता और पेट, कमर या नितंब बढ़े हुए ही रह जाते हैं. इसलिए इस बारे में सोचना छोड़ दें. पति के लिए पहले भी आप खूबसूरत थीं और आज भी हैं. उस के प्यार में कमी नहीं आएगी.

मोटापे को एक अभिशाप न मानें. अन्यथा जी नहीं पाएंगी. जो है, सो है. उसे वरदान या अभिशाप बनाना आप के हाथ में है. जैसा सोचेंगी, वैसा महसूस करेंगी. जिंदादिली से जिएं जिंदगी.

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बैंकिंग की 10 बातें महिलाओं के लिए

हर महिला के लिए यह आवश्यक है कि उसे अपने धन के बारे में पूरी जानकारी होने के साथसाथ उस पर पूरा नियंत्रण भी हो. धन और निजी फाइनैंस की बात की जाए तो ये बातें हर महिला को हमेशा याद रखनी चाहिए:

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क्या आप के पास अपना बैंक खाता है ?

यदि आप पहले कामकाजी थीं अथवा अभी भी काम कर रही हैं, तो अपने नाम का बैंक खाता होना चाहिए. इस खाते में आप अपनी बचत को सुरक्षित रख सकती हैं और अपने परिवार की आर्थिक मदद कर सकती हैं. इसी तरह यदि आप क्रैडिट कार्ड ले रही हैं तो उसे अपने नाम पर लीजिए. इस से आप का क्रैडिट स्कोर बेहतर होगा और किसी स्थिति में कर्ज लेने के वक्त यह आप के क्रैडिट का तीव्र रिकौर्ड उपलब्ध कराने में सहायता करेगा.

बडे़ निर्णयों में दें योगदान

महिलाओं की प्रवृत्ति होती है कि वे धन एवं निवेश संबंधी सभी मामलों को अपने पार्टनर या परिवार के कंधों पर डाल देती हैं. यदि आप इस कार्य के लिए किसी दूसरे को चुनती हैं तो आप को यह मालूम होना चाहिए कि आप के पैसे के साथ क्या हो रहा है. भरोसा अच्छी बात है, लेकिन जागरूक होना भी आवश्यक है. फिर चाहे घर खरीदना हो या बीमा पौलिसी लेनी हो, अपने वित्तीय सलाहकार अथवा औडिटर से बात करें. सुनिश्चित करें कि आप इन सभी बैठकों के दौरान अपने पार्टनर के साथ उपस्थित रहेंगी और उन के सामने अपने विचार भी रखेंगी.

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अपनी आयव्यय की जानकारी रखें

आप के लिए अपनी आमदनी एवं खर्चों के बारे में जानना बहुत महत्त्वपूर्ण है. अपने खर्च पर लगाम कसने के लिए हर महीने अपने धन पर पूरी नजर रखें. इस से आप को यह जानने में मदद मिलेगी कि आप कितना बचत कर सकती हैं. अपने खर्चों पर भी पूरी निगरानी रखें खासतौर से तब जब ये आप के औसत मासिक खर्च से काफी ज्यादा हो रहे हों.

बच्चों के लिए जल्द शुरू करें बचत

यदि आप का पार्टनर ऐसा नहीं कर रहा है, तो आप को अपने बच्चे की शिक्षा के लिए बचत करने के बारे में उन से बात करनी चाहिए और इस की जल्द से जल्द शुरुआत करनी चाहिए. इस बचत को नियमित रूप से करना चाहिए. अपने बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए  बचत के बारे में भी विचार करें. जब वह 15-16 साल का हो जाएगा तब बचत आरंभ करने में बहुत देर हो चुकी होगी, तब आप कम बचत कर पाएंगी.

रिटायरमैंट को न भूलें

आप घरेलू खर्च में व्यस्त हैं, लेकिन इस सब के बीच आप को यह नहीं भूलना चाहिए कि एक दिन आप भी आराम करेंगी. इसलिए सुनिश्चित करें कि आप और आप का पार्टनर अपनी सेवानिवृत्ति के लिए पर्याप्त बचत कर रहा है. रिटायरमैंट के लिए आप को कितनी बचत करनी होगी, इस बारे में सलाहकार से परामर्श लें. यह कतई न भूलें कि आप को मुद्रास्फीति का भी सामना करना होगा, इसलिए पर्याप्त बचत करें ताकि आप बिना किसी की मदद के पूरी आजादी के साथ अपने सेवानिवृत्त जीवन में रहनसहन के बढ़ते खर्च को पूरा करने में सक्षम हों.

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बचत करना काफी नहीं, निवेश पर भी दें ध्यान महिलाएं अच्छी बचतकर्त्ता हो सकती हैं और हर महीने का खर्च पूरा करने के बाद भी कुछ न कुछ रुपए बचा सकती हैं. लेकिन आप का धन तब तक नहीं बढ़ेगा जब तक कि आप उसे बेहतरीन कर दक्ष निधि निर्माण विकल्पों में निवेश नहीं करेंगी.

आधुनिक निवेश उत्पादों के बारे में जानें

पारंपरिक बैंक जमा और डाकघर योजनाएं अथवा गोल्ड आप के लिए निवेश के पसंदीदा विकल्प हो सकते हैं पर याद रखें कि बाजार में पैसा बनाने के लिए और अधिक आधुनिक, नियमित एवं बेहद दक्ष विकल्प भी मौजूद हैं. इन में म्यूचुअल फंड, बौंड और इक्विटीज शामिल हैं जोकि आप के धन को कई गुणा बढ़ाने में मददगार हैं. इन से आप पर कर का अधिक बोझ भी नहीं पड़ेगा. इन के बारे में वैब पर पर्याप्त जानकारी उपलब्ध है. अपना होमवर्क करने के लिए इन का उपयोग करें और अपने निवेश विकल्पों को विविधीकृत करने के लिए इन उत्पादों के बारे में विस्तारपूर्वक पढ़ें.

घर खरीदने में न करें जल्दबाजी

अधिकांश लोगों का मानना है कि घर खरीदना जिंदगी पटरी पर आने का संकेत है और इसलिए वे घर खरीदना चाहते हैं. हालांकि उन्हें उन की जरूरतों के अनुसार घर मिल जाता है और वे अगले 10-15 सालों के लिए आसानी से लोन अदा कर सकते हैं, लेकिन यह उचित नहीं है. इस बात का भी ध्यान रखें कि आप कैरियर में ब्रेक ले सकते हैं और परिवार की आय कम हो सकती है. साथ ही सुनिश्चित करें कि आप का शादीशुदा जीवन भी स्थिर होना चाहिए ताकि आप अपने जीवनसाथी के साथ मिल कर घर खरीदने का फैसला कर सकें.

बीमा कराएं

परिवार के प्रत्येक सदस्य के साथ ही गृहिणी के पास भी बेसिक टर्म कवर होना चाहिए. अपने जीवनसाथी के टर्म कवर को देखें और सुनिश्चित करें कि आप भी पर्याप्त रूप से बीमित हैं. पौलिसी के नियमशर्तों की जानकारी रखें और सुनिश्चित करें कि आप की 8 वर्ष की आय कवर्ड हो, इस से किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से उबरने में मदद मिलेगी.

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अपने फाइनैंस को औनलाइन मैनेज करें

जब आप के पास देखभाल के लिए एक परिवार है, तो आप का हमेशा यही बहाना रहता है कि अपने धन को मैनेज करने के लिए आप के पास समय नहीं है. अपने धन के निवेश, उस पर निगरानी रखने और उसे रिडीम कराने के लिए औनलाइन तरीकों का उपयोग करें और अपनी निवेश जिंदगी को झंझटरहित बनाएं. ऐसे औनलाइन तरीकों को अपनाएं जो मेल/चैट अथवा काल्स के जरीए सलाह के साथ आते हैं. इस से आप का परिश्रम कम हो सकता है और आप खुद से बेहद स्मार्ट तरीके से निवेश में बनी रह सकती हैं.

जब सब की नजर में आप दिखना चाहें  नंबर वन

नया साल नई उम्मीद के साथ आता है, इसलिए लोग साल की शुरुआत को खुशनुमा तरीके से मनाते हैं. इस बार चीजें थोड़ी नियंत्रण में हैं तो एहतियात के साथ सजनासंवरना और खुशियां मनाना बनता है तो आइए जानते हैं क्या आउटफिट पहनें.

नए साल को हमेशा गर्मजोशी के साथ आमंत्रित किया जाता रहा है. उस दिन चारों तरफ रोशनी से पूरा देश जगमगा उठता है. लेकिन पिछले 2 सालों से कोविड ने सभी उत्सवों के सैलिब्रेशन पर पाबंदी सी लगा दी है. कोविड के कम होने और सभी लोगों के 2 वैक्सीन लग चुकी होने की वजह से इस बार सभी ने न्यू ईयर के सैलिब्रेशन को एक बार फिर अच्छी तरह से मनाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं. होटल और रैस्तरां सभी प्रीबुक हो चुके हैं. लेकिन कोविड के औमिक्रोन वैरिएंट के बढ़ने की वजह से महाराष्ट्र में 144 धारा लगा दी गई है ताकि लोग समूह में एक जगह इकट्ठा न हों. यह सही भी है, क्योंकि कोविड की दूसरी लहर का असर समने के पहले ही काफी लोगों ने अपनी जान गंवाई है. ऐसे में पूरा विश्व अब गलतियां करने से खुद को रोक रहा है पर इतना तय है कि इस बार नए साल को, हलके थोड़े में ही सही, पर मनाएंगे सभी अवश्य.

होड़ लेटैस्ट ट्रैंड की

फैशन हर साल मौसम के अनुसार बदलता रहता है. इसलिए हर साल के ट्रैंड को जानना आवश्यक है. इस बार नए साल की पार्टी में सभी ने कुछ न कुछ तैयारी अपने स्तर पर की है. सब से अधिक उत्साहित यूथ हैं. मुंबई की साक्षी कहती हैं, ‘‘मैं ने नए साल की पार्टी के लिए ब्लैक कलर का शिमरी गाउन सिलवाया है, क्योंकि इस बार यह फैशन में है.’’

22 साल की नूपुर ने लैदर स्कर्ट और लैदर जैकेट खरीदी है. इस के अलावा कुछ यूथ फैशन डिजाइनर्स के पास जा कर लेटैस्ट ट्रैंड की पोशाक खरीद रहे हैं, ताकि वे पार्टी में सैंटर औफ अट्रैक्शन बने रहें. गर्ल्स उस दिन लाइटवेट ड्रैस अधिक प्रिफर करती हैं. न्यू ईयर पार्टी में अधिकतर वैस्टर्न वियर ही पहने जाते हैं. इस में वन पीस, शौर्ट ड्रैस पहनने से इसे संभालना आसान होता है.

एंजौय करना है प्राथमिकता

नए साल के फैशन ट्रैंड के बारे में पूछे जाने पर सैलिब्रिटी डिजाइनर श्रुति संचेती कहती हैं, ‘‘कोविड की वजह से सभी ने पिछले 2 सालों से घर के कपड़े पजामा और टीशर्ट के साथ ही नए साल का स्वागत किया था, लेकिन इस साल सभी ने एंजौय करने को सोचा था, लेकिन औमिक्रोन ने इस पर थोड़ी पाबंदी लगा दी है. मेरे हिसाब से कमोबेश सभी नजदीक के रैस्तरां और होटलों में जाएंगे, लेकिन छोटे ग्रुप्स में जाएंगे और कोविड में वही सही भी रहेगा. इस बार चीयरफुल, ग्लिटरी, सीक्वैंस, शाइनी और शिमर वाली ड्रैसेस फैशन में हैं. ट्रैंड में रैड और ब्लैक पार्टी कलर हावी रहेगा, क्योंकि इन दोनों रंगों की ड्रैस काफी स्टाइलिश हैं, जो पार्टी में काफी हौट और बोल्ड लुक देती हैं.’’

ब्राइट कलर्स, जिस में बरगंडी, वाइन, बौटल ग्रीन, पर्पल और रौयल ब्लू जैसे डार्क कलर्स आते हैं और जो विंटर के चर्चित रंग हैं, उन की प्राथमिकता रहेगी. इस के अलावा सीक्वैंस के जैकेट, एक ही रंग के पैंट, जैकेट और टौप होंगे. ये इस साल यूथ को बहुत पसंद आ रहे हैं. ये नए साल के फैशन ट्रैंड में भी हैं. इन में भी डार्क कलर्स के साथ ब्राइट प्रिंट होने पर उत्सव का रंग उन में दिखेगा. लोग घर पर रहरह कर थक चुके हैं, इसलिए वे थोड़ाबहुत फैशन के मूड में हैं.

डिजाइनर श्रुति संचेती आगे कहती हैं, ‘‘जो लोग घर से दूर किसी स्थान पर नए साल को मनाने जाते हैं, वे मैक्सी, कफ्तान, शौर्ट्स आदि पहन सकते हैं. इस साल में बदलाव बहुत आया है.

‘‘एक्सेसरीज की अगर बात करें तो एकसाथ कई चेन्स गले में पहनना या एक अच्छे कान के सैट को पहनना ट्रैंड में है. अधिक एक्सेसरीज इस बार फैशन में नहीं है. इसलिए ड्रैस के अनुसार एक्सेसरीज पहनें. इस बार सभी उत्साहित हैं, पार्टियां छोटी रहेंगी पर स्पिरिट उतनी ही हाई रहेगी.’’

ट्रैंड फ्लौवरी फैशन का

डिजाइनर राहुल मिश्रा के कपड़े हाईएंड क्लासी फैशन में आते हैं. लेकिन इस साल उन्होंने नए साल के लिए भी कुछ नए क्रिएशंस मार्केट में उतारे हैं. उन का कहना है कि नए साल में मुंबई जैसे शहर, जहां कम ठंड होती है, में गर्ल्स लाइट फ्रीफ्लोइंग, फ्लौवरी, शिफौन की ड्रैस, फ्रौक्स पहन सकती हैं. लेकिन ठंड वाले स्थानों पर फुलस्लीव शौर्ट ड्रैस, लैदर जैकेट, शौर्ट स्कर्ट, गाउंस आदि पहनें तो अच्छा रहेगा. वाइब्रैंट कलर्स, जिस में औरेंज, रैड, ब्लैक, ग्रीन आदि प्रमुख होने के साथसाथ, उस पर मोटिफ्स, एंब्रौयडरी, नैट्स, सीक्वैंस आदि किसी को भी एक नया लुक दे सकते हैं.

इस बार नए साल में खूबसूरत पोशाक के साथ मेकअप ट्रैंड हलका और न्यूड ही रहेगा, ताकि ड्रैस के साथ मेकअप मैच करते हुए एक खूबसूरत मुसकान हो. लेकिन इन सब के साथसाथ फौलो करना होगा कोविड के नियम, ताकि आप बाद में भी स्वस्थ रहें और नए साल को एंजौय करें.

सेक्स के लिए घातक है इंफेरियारिटी कॉम्प्लेक्स

एक नहीं अनेक बातों और सदंर्भों से यह स्पष्ट है कि सेक्स की प्रक्रिया में शरीर से ज्यादा प्रभावी भावनाओं की भूमिका होती है. क्योंकि सेक्स भले शरीर के जरिये संभव होता हो, लेकिन उस शरीर को इसके लिए तैयार मन करता है, भावनाएं करती हैं. इसलिए इस प्रक्रिया में शरीर से ज्यादा मन और भावनाओं की सक्रियता की जरूरत होती है. जब हम किसी बात को लेकर इंफीरियर्टी काॅम्प्लेक्स में होते हैं यानी हीनताबोध का शिकार होते हैं, तो भले मजदूरी कर लें, भले बोझा उठा लें, भले गाड़ी चला लें, लेकिन सेक्स नहीं कर सकते. क्योंकि सेक्स में सिर्फ मांसपेशियों की ताकत से काम नहीं चलता. इसके लिए मन में एक खास किस्म की भावनात्मक लहर का होना जरूरी है और भावनात्मक लहर मैकेनिकल नहीं होती. उसका कोई मैकेनिज्म नहीं है कि हर बार उसे एक ही तरीके से दोहरा दिया जाए.

मन की लहर एक ऐसी स्वतंत्र और मौलिक प्रक्रिया है जो भावनाओं के प्रवाह में ही पैदा होती है. यह प्रवाह तकनीकी रूप से पैदा तो नहीं की जा सकती, पर तकनीकी रूप से इसे कई सामाजिक और मानसिक बाधाएं रोक जरूर देती हैं. जब हममें डर, भय, अपराधबोध और निम्न होने की भावना होती है, तो हमारे अंदर पैदा होने वाली खुशी की तरंगे नहीं पैदा होतीं. ऐसे में हम गुस्से की तमाम चीजें तो कर सकते हैं, लेकिन खुशी और प्यार नहीं जता सकते. इसीलिए हम सेक्स भी नहीं कर सकते. क्योंकि सेक्स करना अंततः मन का खुशियों और भावनाओं से भरा होना होता है. नकारात्मक भावनाएं खुशियों को छीन लेती हैं और मन में पैदा होने वाली लहर से हमें वंचित कर देती हैं. इसलिए शरीर तरंगित नहीं होता और सेक्स के लिए तैयार नहीं होता.

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क्योंकि सेक्स में जिन सक्रिय और उत्तेजित इंद्रियों अथवा अंगों की मुख्य भूमिका होती है, उन्हें सक्रिय और उत्तेजित होने के लिए मन में एक लहर और खुशी देने वाले उन्माद पैदा होना जरूरी है. हीनभावना एक नकारात्मकता है, इसलिए यह हममें भावनात्मक अंतरंगता खत्म करती है, जिससे हममें शारीरिक स्फूर्ति या इंद्रियोचित स्फूर्ति नहीं बनती. नतीजतन हम डिप्रेशन में, हीनभावनाओं के शिकार होने पर या ऐसे ही दूसरे तनाव के क्षणों में सेक्स के लिए सक्षम नहीं होते. कुदरत ने इस मामले में डीलडौल को या बहुत ताकतवर को यह विशिष्टता नहीं बख्शी है कि वह किसी भी मानसिक और शारीरिक स्थिति में सेक्स कर सके. अच्छे से अच्छे पहलवान, बड़े से बड़े एथलीट के दिमाग में भी अगर यह बात बैठ जाए कि वह सही परफोर्मेंस नहीं कर पायेगा, तो फिर चाहे कुछ भी हो जाए, वह सेक्स नहीं कर सकता. सेक्स वास्तव में भावनाओं की ड्राइव है और इसमें जरा सा भी किसी भावना को ठेस लग जाए, जरा सी हिचक आ जाए, संशय या द्वंद पैदा हो जाए तो फिर कुछ नहीं हो सकता.

दरअसल हीन भावनाएं हमारे दिल दिमाग में कई तरह से आती हैं, एक कारण तो सामाजिक होता है, जिसमें हमें बचपन से ही ठंूस ठंूसकर दिमाग में भरा जाता है कि ये छोटा है, ये बड़ा, ये ऊंची जात का है, ये नीची जात का है. यह श्रेष्ठ है, यह गैर श्रेष्ठ है. फिर एक कर्मकांडों की भूमिका होती है. छोटी बड़ी उम्र और सामाजिक रिश्तों की भी एक लक्ष्मण रेखा होती है, कई बार वह सही होती है, कई बार वह मन का बहम होती हैं. लेकिन सेक्स के मामले में जो सबसे बड़ी हीनभावना होता है, वो ऐसे दुष्प्रचारों से आयी हुई है, जिन दुष्प्रचारों के जरिये कुछ लोग अपनी रोटी सेंकते हैं. मतलब यौन दुर्बलता, शारीरिक कद, रंग, हैसियत, ये सब दिमाग में भरे गये ऐसी ऐसी हीनभावनाएं हैं, जो हमें सेक्स के मामले में कमजोर बनाती हैं.

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हीनभाव से मुक्ति के लिए आत्मविश्वास की आवश्यकता होती है. अपनी सामथ्र्य को पहचानने तथा अपनी शक्ति का मूल्यांकन करने से भी हीनताबोध से उबरा जा सकता है. ऐसे उपाय न करने से हीनता के भाव आपके पूरे जीवन पर छाये रहेंगे, जो आपकी पूरी सामथ्र्य को खोखला बनाते रहेंगे. हीनताबोध यौन क्रीड़ा को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है. क्योंकि हीनताबोध का शिकार व्यक्ति अपने दिल दिमाग में एक तनाव लिये रहता है कि वह सही से सहवास नहीं कर पायेगा. यह चिंता हर समय किसी न किसी रूप मंे दिमाग में हथौड़ा बजाती रहती है, इसलिए वह वास्तव में सहवास नहीं कर पाता, फिर चाहे वह कितना ही सक्षम क्यों न हो.

इस मानसिक विकार को जितनी शीघ्रता से हो, खत्म करना चाहिए. अक्सर यह बोध भ्रामक धारणा से उत्पन्न होता है. ऐसी अवस्था में पुरुष या स्त्री के मन में यह बात बैठ जाती है कि उससे सफल सहवास नहीं हो पायेगा. इस भ्रामक धारण के चलते वह वास्तव में सेक्स में सक्षम नहीं हो पाता. व्यवहारिक दृष्टि से ऐसी धारणाएं इन बातों से आती है. शिश्न को छोटा समझकर हीनभावना से ग्रस्त होना. स्त्री की श्रेष्ठता का ख्याल करना. उसके अच्छे पद तथा उसकी स्थिति को लेकर हीनग्रस्त रहना. परिवार का धनवान अथवा निर्धन होना. अनमेल आर्थिक स्थिति आदि.

ये तमाम धारणाएं सहवास के लिए बेहद नकारात्मक है. एक बात समझ लीजिए कि शिश्न की लंबाई-मोटाई सहवास को कदापि प्रभावित नहीं करती. छोटे शिश्न वाले व्यक्ति को जान लेना चाहिए कि स्त्री की योनि की बनावट ऐसी होती है जिसमें हर प्रकार का शिश्न पूर्ण आनंद देता है. पुरुष को इस गलत धारणा से ध्यान हटाकर सहवास की सही तकनीक के अनुसार रमण करना चाहिए. यदि पुरुष इस धारणा को नहीं त्यागेगा तो उसे सहवास में विफलता ही मिलेगी. वह अपनी सहयोगी स्त्री को पूर्ण संतुष्टि नहीं दे पायेगा. स्त्री संतुष्ट होगी, तो हीनता का भाव अपने आप खत्म हो जायेगा.

स्त्री की श्रेष्ठता का ख्याल रखकर अपने को हीन मान लेना भी गलत है. स्त्री का अधिक पढ़ा-लिखा होना, आर्थिक स्थिति का अच्छा होना अथवा उसका ऊंचा पद भी यौन क्रीड़ा के लिए कोई महत्व की वस्तु नहीं है. अतः उसका पद या कद मैथुन क्रिया में विचारना एकदम नासमझी है. सहवास में दोनों बराबर के स्तर पर आकर आनंद प्राप्त कर सकते हैं. सहवास के मधुर क्षणों को और भी मधुर बनाने के लिए दोनों स्त्री-पुरुष एक धरातल पर आकर इस यौन प्रक्रिया को संपादित करके मानसिक तथा शारीरिक आनंद प्राप्त कर सकते हैं.  जहां तक जाने-अनजाने में किए गये गलत कार्यों से उपजा हीनताबोध या अपराधबोध है, उससे पीड़ित रहकर बेकार ही तनाव मोल लेना है. जो हो चुका, उसे भूलना ही बेहतर होता है.

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प्यूबिक एरिया ऐसे रखें सौफ्ट

Writer- किरण आहूजा

शरीर के अनचाहे बालों को हटाने के लिए लड़कियां वैक्ंिसग तो करती हैं लेकिन लड़कियों में प्यूबिक एरिया के बालों को हटाने का ट्रैंड अब काफी बढ़ गया है. इसे बिकिनी वैक्स कहते हैं. बिकिनी वैक्स का मतलब प्राइवेट पार्ट और उस के आसपास के अनचाहे बालों को वैक्स की मदद से साफ करने की प्रक्रिया से है.

स्विमिंग करने वाली लड़कियों के बीच इस वैक्स का चलन ज्यादा है. बिकिनी वैक्स कराने के बाद प्यूबिक एरिया और उस के आसपास की स्किन साफ, कोमल और चिकनी हो जाती है. इस के अलावा, यदि आप बिकिनी पहनने की प्लानिंग कर रही हैं तो आप को यह वैक्स जरूर करानी चाहिए. लेकिन हाथ व पैरों की वैक्ंिसग करने या कराने के मुकाबले बिकिनी लाइन की वैक्ंिसग कराने में कुछ बातों का खास ध्यान रखने की जरूरत है.

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तरहतरह की बिकिनी वैक्स-

प्यूबिक हेयर को हटाने के लिए कई प्रकार की वैक्स उपलब्ध हैं.

ह्ल नौर्मल बिकिनी वैक्स : इस में पैंटीलाइन के आसपास के बाल साफ होते हैं. यह जांघ के ऊपर वाला एरिया होता है. स्विमिंग करने वाली ज्यादातर लड़कियां इस का इस्तेमाल करती हैं. इस का फायदा यह है कि स्विम सूट पहनने पर बाल नजर नहीं आते और आप बिना किसी फिक्र के स्विमिंग को एंजौय कर सकती हैं.

ह्ल ब्राजीलियन बिकिनी वैक्स : इस में सारे प्यूबिक हेयर साफ हो जाते हैं. पैंटी पहनने के बाद कोई बाल दिखाई नहीं देता. सफाईपसंद लड़कियों के लिए यह अच्छा विकल्प है क्योंकि इस से प्राइवेट एरिया की त्वचा साफ और चिकनी हो जाती है.

ह्ल फ्रैंच बिकिनी वैक्स : इस से प्राइवेट पार्ट के सभी बाल साफ तो हो जाते हैं लेकिन फ्रंट पर यह एक हेयरस्ट्रिप को छोड़ देता है जिस का आकार आकर्षक होता है.

ह्ल मिनी ट्रायंगल बिकिनी वैक्स : पार्टनर को आकर्षित करने के लिए यह एक अच्छा स्टाइल साबित होता है. इसे फुल ब्राजीलियन वैक्स भी कहते हैं. इस में वैजाइना के ठीक ऊपर त्रिकोण छोड़ कर बचे बालों को वैक्स कर के निकाला जाता है.

बिकिनी वैक्स के फायदे

बिकिनी के फायदे सुंदर दिखने के साथ ही सेहत के लिए भी महत्त्वपूर्ण हैं. वैक्स करने या कराने से बिकिनी एरिया में गंदगी जमा नहीं हो पाती. नतीजतन उस एरिया में इन्फैक्शन होने का खतरा नहीं रहता. प्राइवेट पार्ट और आसपास की स्किन साफ व मुलायम हो जाती है. इस के अलावा और भी कई फायदे हैं.

प्राइवेट पार्ट क्लीन रहने से पीरियड के दौरान भी किसी तरह की इरिटेशन नहीं होती है और अच्छा महसूस होता है.

शेविंग की तुलना में ज्यादा बेहतर है. इस से स्किन एक्सफोलिएट हो जाती है और दोबारा आने वाले बाल पतले व कमजोर होते हैं.

प्यूबिक एरिया पर कालेपन को कम करने में यह मदद करती है.

बाल जड़ से हट जाते हैं. किसी तरह के कठोर बाल नहीं रहते, बल्कि बिकिनी एरिया की स्किन स्मूथ हो जाती है.

न केवल बाल रिमूव होते हैं बल्कि इस हिस्से की डेड स्किन सैल्स से छुटकारा पाने में भी मदद मिलती है.

बिकिनी वैक्स के बाद क्या करें –

अगर आप सोच रही हैं कि सिर्फ वैक्स करने से आप का काम खत्म हो गया तो आप गलत हैं क्योंकि बाकी शरीर के मुकाबले बिकिनी वैक्स के बाद ज्यादा खयाल रखने की जरूरत होती है, जैसे-

पार्लर में प्यूबिक हेयर हटाने के बाद खास क्रीम या फिर तेल की मालिश की जाती है ताकि वहां की त्वचा ड्राई न हो. घर पर बिकिनी वैक्स करने के बाद त्वचा को पानी से साफ करें और एलोवेरा जेल या फिर कोई अच्छा सा मौइश्चराइजर लगा लें.

अगर आप को बिकिनी एरिया में जलन हो रही है तो आप टी बैग लगा कर इसे शांत कर सकती हैं या फिर बर्फ से भी सिकाई कर सकती हैं.

वैक्स की गई स्किन को तुरंत धूप के संपर्क में न लाएं खासतौर से शुरू के 24 घंटे तक. अगर आप पूल या बीच पर जाने की प्लानिंग कर रही हैं तो वैक्ंिसग के एक दिन बाद जाने का प्लान बनाएं.

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अगर वैक्ंिसग के कुछ दिनों तक प्यूबिक एरिया में इन्फैक्शन, बुखार, दर्द और सूजन महसूस हो तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करें.

एक्सफोलिएटिंग स्क्रब आप की त्वचा पर बैक्टीरिया और तेल की मात्रा को कम कर के पोस्ट वैक्सिंग जलन को कम करने में मदद कर सकता है.

पैनक्रियाटिक रोगों की बड़ी वजहें

 लेखक- डा. विकास सिंगला

युवा कामकाजी प्रोफैशनल्स में अल्कोहल सेवन, धूम्रपान के बढ़ते चलन और गालस्टोन के कारण पैनक्रियाटिक रोगों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. पैनक्रियाज से जुड़ी बीमारियों में एक्यूट पैनक्रियाटाइटिस, क्रोनिक पैनक्रियाटाइटिस और पैनक्रियाटिक कैंसर के मामले ज्यादा हैं. लेकिन आधुनिक एंडोस्कोपिक पैनक्रियाटिक प्रक्रियाओं की उपलब्धता और इस बीमारी की बेहतर सम झ व अनुभव रखने वाली विशेष पैनक्रियाटिक केयर टीमों की बदौलत इस से जुड़े गंभीर रोगों पर भी अब आसानी से काबू पाया जा सकता है.

आधुनिक पैनक्रियाटिक उपचार न्यूनतम शल्यक्रिया तकनीक के सिद्धांत पर आधारित है और इसे मरीजों के लिए सुरक्षित व स्वीकार्य इलाज माना जाता है.

पेट के पीछे ऊपरी हिस्से में मौजूद पैनक्रियाज पाचन एंजाइम और हार्मोन्स (ब्लडशुगर को नियंत्रित रखने वाले इंसुलिन सहित) को संचित रखता है. पैनक्रियाज का मुख्य कार्य शक्तिशाली पाचन एंजाइम को छोटी आंत में संचित रखते हुए पाचन में सहयोग करना होता है. लेकिन स्रावित होने से पहले ही जब पाचन एंजाइम सक्रिय हो जाते हैं तो ये पैनक्रियाज को नुकसान पहुंचाने लगते हैं जिन से पैनक्रियाज में सूजन यानी पैनक्रियाटाइटिस की स्थिति बन जाती है.

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एक्यूट पैनक्रियाटाइटिस इन में सब से आम बीमारी है, जो प्रतिदिन 50 ग्राम से ज्यादा अल्कोहल सेवन, खून में अधिक वसा और कैल्शियम होने, कुछ दवाइयों के सेवन, पेट के ऊपरी हिस्से में चोट, वायरल संक्रमण और पैनक्रियाटिक ट्यूमर के कारण होती है. गालब्लैडर में पनपी पथरी पित्तवाहिनी तक पहुंच सकती है और इस से पैनक्रियाज नली में रुकावट आ सकती है, जिस कारण एक्यूट पैनक्रियाटाइटिस होता है. बुजुर्गों में ट्यूमर ही इस का बड़ा कारण है. इस में पेट के ऊपरी हिस्से से दर्द बढ़ते हुए पीठ के ऊपरी हिस्से तक पहुंच जाता है. कुछ गंभीर मरीजों को सांस लेने में तकलीफ और पेशाब करने में भी दिक्कत आने लगती है.

इस बीमारी का पता लगने पर ज्यादातर मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल में रहना पड़ता है. मामूली पैनक्रियाटाइटिस आमतौर पर एनलजेसिक और इंट्रावेनस दवाइयों से ही ठीक हो जाती है. लेकिन थोड़ा गंभीर और एक्यूट पैनक्रियाटाइटिस जानलेवा भी बन सकती है और इस में मरीजों को लगातार निगरानी व सपोर्टिव केयर में रखना पड़ता है.

ऐसी स्थिति में मरीज को नाक के जरिए ट्यूब डाल कर भोजन पहुंचाया जाता है. पैनक्रियाज के आसपास की नलियों से संक्रमित द्रव को कई बार एंडोस्कोपिक तरीके से या ड्रेनट्यूब के जरिए बाहर निकाला जाता है. उचित इलाज और विशेषज्ञों की देखरेख में एक्यूट पैनक्रियाटाइटिस से पीडि़त ज्यादातर मरीज जल्दी स्वस्थ हो जाते हैं.

इस बीमारी की पुनरावृत्ति से बचने के लिए अल्कोहल का सेवन छोड़ देना चाहिए और गालब्लैडर से सर्जरी के जरिए पथरी निकलवा लेनी चाहिए. लिपिड या कैल्शियम लैवल को दवाइयों से नियंत्रित किया जा सकता है. इस के अलावा, क्रोनिक पैनक्रियाटाइटिस की डायग्नोसिस और इलाज में एंडोस्कोपिक स्कारलैस प्रक्रियाओं की अहम भूमिका होती है. इस में मरीज को लगातार दर्द या पेट के ऊपरी हिस्से में बारबार दर्द होता है. लंबे समय तक बीमार रहने पर भोजन पचाने के लिए जरूरी पैनक्रियाटिक एंजाइम की कमी और इंसुलिन के अभाव में डायबिटीज होने के कारण डायरिया की शिकायत हो जाती है. पैनक्रियाज और इस की नली की जांच के लिए इस में एमआरसीपी और एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड जैसे टैस्ट कराने पड़ते हैं.

पैनक्रियाटिक ट्यूमर भी धूम्रपान, डायबिटीज मेलिटस, क्रोनिक पैनक्रियाटाइटिस और मोटापे के कारण होता है. इस के लक्षणों में पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, पीलिया, भूख की कमी और वजन कम होना है. ऐसे मरीजों का सब से पहले सीटी स्कैन किया जाता है. जरूरत पड़ने पर ही ईयूएस और टिश्यू सैंपलिंग कराई जाती है. इस में लगभग 20 फीसदी कैंसर का पता लगते ही सर्जरी कराई जाती है, बाकी मरीजों को कीमोथेरैपी दी जाती है.

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कीमोथेरैपी के बाद बहुत कम जख्म रह जाता है और फिर मरीज की सर्जरी की जाती है. कीमोथेरैपी से पहले मरीज के पीलिया के इलाज के लिए कई बार ईआरसीपी और स्टेंटिंग भी कराई जाती है. ईआरसीपी के दौरान पित्तवाहिनी में स्टेंट डाला जाता है ताकि ट्यूमर के कारण आए अवरोध को दूर किया जा सके.

पैनक्रियाटिक कैंसर से पीडि़त कुछ मरीजों को तेज दर्द भी हो सकता है. ऐसे में उन्हें दर्द से नजात दिलाने के लिए ईयूएस गाइडेड सीपीएन (सेलियक प्लेक्सस न्यूरोलिसिस) कराया जाता है.

(लेखक मैक्स सुपरस्पैशलिटी हौस्पिटल, साकेत, नई दिल्ली के गैस्ट्रोएंट्रोलौजी विभाग के निदेशक हैं.)     

  ब्रेन पावर के लिए खाएं ये फूड्स

हमारा ब्रेन पावर बढ़ाने में खानपान की अहम भूमिका होती है. अपने खानपान में निम्न चीजों को शामिल कर के आप तेज याद्दाश्त और दिमाग पा सकते हैं :

हरी पत्तेदार सब्जियों, जैसे पालक आदि में मैग्नीशियम और पोटैशियम प्रचुर मात्रा में होता है. इन के सेवन से मैमोरी शार्प होती है और दिमाग की क्षमता भी बढ़ती है.

नट्स और बीज में कई पोषक तत्त्व पाए जाते हैं और इन में विटामिन ई, स्वस्थ वसा और प्रोटीन होते हैं जोकि दिमाग के लिए काफी फायदेमंद हैं.

मसाले एंटीऔक्सीडैंट के अच्छे सोर्स होते हैं. हलदी, दालचीनी और अदरक का सेवन दिमाग के लिए फायदेमंद रहता है और ये मस्तिष्क में आने वाली सूजन को भी कम करते हैं.

कौफी मूड को अच्छा और शरीर को एक्टिव रखने में मदद कर सकती है. कैफीन और एंटीऔक्सीडैंट गुणों के कारण अल्जाइमर जैसी कुछ बीमारियों से भी कौफी बचाती है.

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वसायुक्त मछली, जैसे सैल्मन, ट्यूना या कौड ओमेगा-3 फैटी एसिड के अच्छे स्रोत हैं. याद्दाश्त तेज करने और मूड को बेहतर बनाने में ओमेगा-3 एस की अहम भूमिका है.

कई अध्ययनों से साफ हो चुका है कि दिमाग की ताकत बढ़ाने के लिए ब्लैकबेरी का सेवन फायदेमंद रहता है. शौर्ट टर्म मैमोरी लौस वाले इस का सेवन कर सकते हैं.

– किरण आहूजा   

सेक्स करने का ये फायदा शायद ही कोई जानता हो

आज के जमाने में लोग अपनी सेहत को लेकर काफी जागरुक हो गए हैं और महिला और पुरुष अपने वजन को लेकर चौकन्ने रहते हैं. इसके लिए वे न सिर्फ अपने खानपान पर खास ध्यान देते हैं बल्कि फिट रहने के लिए हजारों रुपये भी खर्च करते हैं. लेकिन एक नए शोध के अनुसार अब आपको वजन कम करने के लिए न तो घंटों जिम में जाकर पसीना बहाने की जरूरत है और न ही घंटों जॉगिंग की. सेक्स एक ऐसा जरिया है जो आपको वजन बढ़ने की परेशानी से बचा सकता है.

कई शोधों से यह बात साबित हो चुकी है कि सेक्स करके आसानी से वजन कम किया जा सकता है. सेक्स करने से तेजी से कैलोरी बर्न होती है जिससे वजन कम होता है. हम यहां आपको बता रहे हैं कैसे सेक्स मददगार होता है वजन घटाने में.

एक शोध में यह सामने आया है कि अगर पुरुष 25 मिनट तक सेक्स करे तो इससे वह 101 कैलोरी जला सकता है जबकि इतने ही समय तक सेक्स करके महिला 70 कैलोरी बर्न करती है. इस अध्ययन के मुताबिक जवान और स्वस्थ पुरुष औसतन सेक्स के दौरान एक मिनट में 4.2 कैलोरीज बर्न करते हैं, जबकि ट्रेडमिल में 9.2 कैलोरीज बर्न होती हैं. वहीं महिलाएं सेक्स के दौरान एक मिनट में 3.1 कैलोरीज बर्न करती हैं.

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जॉगिंग ही नहीं सेक्स भी जलाती है कैलोरीज

सेक्स करके भी आप अपनी कैलोरी बर्न कर सकते हैं. अपने पार्टनर के साथ एक घंटे तक मस्ती करके आप 70 कैलोरी जलाते हैं. इस एक घंटे में फोरप्ले करके यौन संबंध को मस्ती के साथ और भी रोचक बना सकते हैं. अगर अधिक कैलोरी बर्न करना चाहते हैं तो अपने सेक्स के तरीकों को बदलें.

सेक्स कम करता है चर्बी

नियमित रूप से सेक्स संबंध बनाने से कार्टिसोल का स्तर सामान्य रहता है. कार्टिसोल ऐसा हार्मोन है जो आपकी भूख बढ़ाता है. इस हार्मोन के अधिक स्राव होने के कारण भूख अधिक लगती है. जबकि कार्टिसोल का स्तर कम रहने से शरीर से अतिरिक्त फैट जलता है.

बेहतर सेक्स और खानपान

सेक्स के मामले में अगर आप अपनी इमेज अच्छी रखना चाहते हैं और चाहते हैं कि आपका पार्टनर आपसे खुश रहे तो अपना खानपान जरूर सुधारें. आपको तले हुए खाने से बचना चाहिए और ऐसा भोजन लेना चाहिए जिससे वसा न बढ़ता हो. इसके अलावा फिटनेस पर विशेष ध्यान देना चाहिए.

सेक्स करता है बीमारियों से बचाव

सेक्स करने से न केवल वजन कम होता है बल्कि कई सामान्य और गंभीर बीमारियों से भी बचाव होता है. सेक्स से हार्ट अटैक की संभावनाएं कम होती हैं और ब्लड प्रेशर भी काबू में रहता है. महिलाओं में मासिक धर्म में परेशानी नहीं होती.

तो अब आप वजन कम करने के लिए बाहर जाने की बजाय अपने पार्टनर को प्यार करें और अपने वजन को काबू में रखें, इससे आपकी सेक्स लाइफ भी खुशहाल रहेगी और आप सेहतमंद भी रहेंगे.

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रिलेशनशिप: ब्रेकअप से टूटता है पुरुषों का दिल भी

समीर (बदला हुआ नाम) कुछ महीनों से काफी डिप्रैशन में रहने लगा है. हंसमुख मिजाज का और दूसरों को भी खुश रखने वाला समीर न तो अब किसी से ज्यादा बातें करता है और न ही कहीं आताजाता है. औफिस से आते ही वह अपने कमरे में बंद हो जाता है. कारण, कुछ महीने पहले उस का अपनी गर्लफ्रैंड से ब्रेकअप हो गया, जिस के कारण वह काफी डिप्रैस्ड रहने लगा है. समीर का कहना है जब उस की गर्लफ्रैंड से उस का ब्रेकअप हुआ तो लगा मानो उस की पूरी दुनिया ही उजड़ गई. वह अपने ब्रेकअप के दर्द से बाहर नहीं आ पा रहा है.

यह कहना गलत नहीं होगा कि भागतीदौड़ती जिंदगी के बीच रिश्ते भी बहुत तेजी से बदल रहे हैं, आजकल जितनी जल्दी लोगों को प्यार हो जाता है, उतनी ही जल्दी रिश्ते टूट भी जाते हैं. लव अफेयर में जब ब्रेकअप होता है, तो इस का महिलाओं के जीवन पर बहुत बुरा असर होता है. वे डिप्रैशन और असुरक्षा की भावना का शिकार हो जाती हैं. उन में उदासी घर कर जाती है. ब्रेकअप के कारण कई बार वे सुसाइड जैसे खतरनाक कदम भी उठा लेती हैं, क्योंकि पुरुषों की तुलना में महिलाएं अधिक भावुक और संवेदनशील होती हैं.

वहीं माना जाता है कि पुरुषों पर ब्रेकअप का कुछ खास असर नहीं पड़ता. लेकिन ऐसा नहीं है. कई बार पुरुष भी ब्रेकअप से प्रभावित होते हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि ब्रेकअप होने पर महिलाएं अपना दर्द व्यक्त कर पाती हैं, जिस से उन के दिल का बोझ कुछ कम हो जाता है, जबकि पुरुष अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं और ब्रेकअप के दर्र्द अकेले ही झेलते हैं. कईर् बार पुरुष ब्रेकअप से इस कदर टूट जाते हैं कि वे लोगों से मिलनाजुलना खानापीना तक छोड़ देते हैं.

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ब्रेकअप का पुरुषों पर असर

खुद को दोषी मानने लगना : ब्रेकअप होने के बाद ज्यादातर पुरुष खुद को ही दोषी मानने लगते हैं. भले ही लोगों के सामने वे कुछ भी कह लें, पर मन ही मन ब्रेकअप के लिए खुद को ही जिम्मेदार मानते हैं. इस से वे गहरे तनाव में आ जाते हैं. अधिक तनाव में रहने के कारण उन के सोचनेसमझने की क्षमता पर नैगेटिव असर पड़ने लगता है. जो पुरुष अधिक संवेदनशील होते हैं, वे अपने पार्टनर की गलती होते हुए भी, उस की गलती न मान कर खुद को ही दोषी ठहरा देते हैं. ब्रेकअप के बाद ऐसे संवेदनशील लोग भीतर से टूट जाते हैं.

अकेलापन : पुरुष ब्रेकअप के बाद अकसर ज्यादा अकेलापन महसूस करते हैं. वे अपना दुख जाहिर नहीं कर पाते और ऐसे में उन्हें सांत्वना देने वाला कोई नहीं होता. जबकि महिलाएं अपने दिल का हाल अपनों से बांट लेती हैं. इस से उन का दर्द कम हो जाता है. पर पुरुषों के साथ ऐसा नहीं होता है.

नशे का सहारा लेते हैं : ब्रेकअप के बाद तनाव और डिप्रैशन का शिकार सिर्फ महिलाएं ही नहीं होतीं, बल्कि पुरुष भी होते हैं. भले ही ब्रेकअप के तुरंत बाद वे आजादी महसूस करते हों, पर धीरेधीरे वे अकेलापन और तनाव महसूस करने लगते हैं. इस के कारण वे खुद को शराबसिगरेट में डुबो लेते हैं. उस से उन का तनाव घटता नहीं, बल्कि और बढ़ता जाता है.

गलतियां दोहराते हैं : पुरुष ब्रेकअप के बाद खुद को दोषी जरूर मानते हैं, लेकिन वे खुद में बिलकुल सुधार नहीं करते हैं. जहां ब्रेकअप के बाद महिलाएं किसी नए रिलेशनशिप में नहीं पड़ना चाहतीं, वहीं पुरुष ब्रेकअप के गम को भुलाने के लिए किसी दूसरे पार्टनर की तलाश में लग जाते हैं, जबकि कई बार यह तलाश सही साबित नहीं होती है. लेकिन पुरुष किसी सहारे की खोज में होते हैं, अगर उन्हें कोईर् पार्टनर मिल भी जाता है तो ब्रेकअप के बाद पुरुष जल्दी उस पर भरोसा नहीं कर पाते और टाइमपास करने लगते हैं. ऐसे रिलेशन ज्यादा समय तक नहीं टिकते और फिर टूट जाते हैं.

अपने एक्स को याद कर के बेचैन हो जाना : यह देखा गया है कि ब्रेकअप के बाद भी ज्यादातर पुरुष को यह उम्मीद होती है कि उन की प्रेमिका फिर लौट कर उन के पास वापस आएगी और इस के लिए वे प्रयास भी करते हैं. इस मामले में वे काफी धैर्य दिखाते हैं. मौका मिलने पर वे अपनी एक्स से माफी भी मांग लेते हैं ताकि रिश्ता फिर से सुधारा जा सके.

काम से लेते हैं ब्रेक : कई पुरुष ब्रेकअप के बाद इतने दुख में डूब जाते हैं कि उन्हें कुछ करने का मन नहीं होता, यहां तक कि औफिस में भी उन का मन नहीं लगता और वे काम से छुट्टी ले लेते हैं. लेकिन इस से भी उन्हें चैन नहीं मिलता, क्योंकि खाली बैठेबैठे फिर वही ब्रेकअप की बातें उन्हें परेशान करने लगती हैं और उन का दर्र्द घटने के बजाय और बढ़ने लगता है, वहीं, महिलाएं मानसिक परेशानी के बावजूद अपने काम बेहतर ढंग से करती रहती हैं.

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ब्रेकअप के दर्द से कैसे उबरें पुरुष

किसी भी रिश्ते को भुलाना आसान नहीं होता. उस से हमारी भावनाएं जुड़ी होती हैं. खासकर जब रिश्ता प्यार का हो. जब हम किसी अपने से अलग होते हैं, तो उस दर्द को बरदाश्त कर पाना आसान नहीं होता. हम उस रिश्ते से निकलना चाहते हैं, पर हमारी भावनाएं हम पर हावी रहती हैं. यही भावनाएं डिप्रैशन का कारण बनती हैं. हम उसे भुलाने की कोशिश करते हैं, पर बारबार उस की याद आती है.

ऐसे में अकसर हम वे गलतियां कर जाते हैं जो हमें नहीं करनी चाहिए. जैसे, बारबार हम अपने एक्स को फोन लगाते हैं, उसे मैसेज करने लगते हैं. कभी खुद को कमरे में बंद कर लेते हैं, तो कभी नशे में डूब जाते हैं. ब्रेकअप का वक्त बहुत बुरा होता है. हम किसी से इतने इमोशनली अटैच होते हैं कि हर वक्त उस की आदत होती है और जब वह अचानक साथ छोड़ जाता है, तो यह हम से बरदाश्त नहीं होता है. मन की उदासी सारी ताकत चूस लेती है. लेकिन यह सचाई स्वीकार करनी होगी कि अब वह आप के साथ नहीं है और अब आप को जीवन में आगे बढ़ना होगा.

भूलने की कोशिश न करें : अपने प्यार को भुलाना आसान नहीं होता. तो आप उसे भूलने की कोशिश भी न करें, क्योंकि ऐसा करने से उस की और ज्यादा याद आएगी. उसे अपने और दोस्तों की तरह ही समझें, ताकि आप के मन में उस के लिए कुछ अलग महसूस न हो.

अकेले न रहें : ब्रेकअप के बाद अकसर लोग अकेले रहना पसंद करते हैं. यह सही नहीं है. दोस्तों से मिलें, परिवार को समय दें, उन के साथ थोड़ा वक्त बिताएं. घूमने जाएं. इस से आप के मन में सुकून मिलेगा और आप खुश भी रहेंगे.

अपने कैरियर पर ध्यान दें : ब्रेकअप का असर कभी भी अपने कैरियर पर न पड़ने दें. अकसर लोग ब्रेकअप के बाद अपने काम में मन नहीं लगाते और पर्सनल के साथ प्रोफैशनल लाइफ भी खराब कर लेते हैं. यह गलती करने से बचें, क्योंकि जिसे आप के जीवन से जाना था, चला गया. तो, उसे भूल जाएं और अपने काम पर फोकस करें.

खुद को दोष देना बंद करें : आप का ब्रेकअप हुआ है, इस का यह मतलब नहीं कि सारी गलती आप की ही थी. हर इंसान का अपनाअपना नेचर होता है. हो सकता है आप दोनों का नेचर मेल नहीं खाता हो, इसलिए आप दोनों का ब्रेकअप हो गया, तो यह तो एक दिन होना ही था, ऐसा सोचिए और कि जो कल होना था, आज हो गया. सो, अब अपनी गलतियों से सीख लें और सैल्फ गिल्ट में न जीएं.

हमेशा पौजिटिव रहें : यह सोचें कि जो हुआ, अच्छा हुआ, जो होगा, अच्छा ही होगा, की सोच के साथ खुद को खुश रखने की कोशिश करें. कहते हैं, हम जैसा सोचते हैं, वैसे ही होता है. इसलिए, हमेशा पौजिटिव सोच रखें.

जरा सोशल बनें : खुद को अच्छा महसूस कराने के लिए वह करें जिस से आप को खुशी मिली है. आप अपनी पसंद की कोई हौबी चुनें और उस में व्यस्त रहें.

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परिस्थिति का सामना करना सीखें: अपनी परिस्थिति को स्वीकार कर आगे बढ़ने में ही भलाई है. इसलिए पिछली कड़वी यादों को भुला दें. इस सोच के साथ आगे बढ़ें कि जो होगा, सही होगा.

नशे को दोस्त न बनाएं : अकसर लोग ब्रेकअप के बाद उसे भुलाने के लिए नशे का सहारा लेने लगते हैं, जो गलत है. ब्रेकअप हुआ, कोई जिंदगी खत्म नहीं हो गई. रास्ते और भी हैं. बस, चलने की ताकत रखिए. नशे में कुछ देर तक अपने एक्स को भुलाया जा सकता है, लेकिन उस के बाद फिर क्या. इसलिए नशे से खुद को दूर रखिए.

अपनी कमियों को सुधारें : आप का ब्रेकअप क्यों हुआ? यह सोचें और सबक लें, ताकि आगे यह गलती न हो पाए. ज्यादा पजैसिव न हों.

साइकोलौजिस्ट की सलाह लें : अपनी फीलिंग्स हर किसी से शेयर न करें. क्योंकि जितने मुंह उतनी बातें

होंगी, जाने कौन आप की बातें किस तरह से ले. अच्छा है आप किसी अच्छे साइकोलौजिस्ट से कंसल्ट करें, वे आप को सही सलाह देंगे.

आप बीमार नहीं हैं, यह याद रखें : हर बात पर दवाइयां लेना उचित नहीं. इसलिए डिप्रैशन की दवाइयों में न उलझें. यह परिस्थिति ऐसी है जो धीरेधीरे वक्त के साथ ठीक हो जाएगी, अगर नींद नहीं आती है तो किसी अच्छे लेखक की किताब पढि़ए, पत्रिकाएं पढि़ए, म्यूजिक सुनिए. याद रखिए. जब वह वक्त नहीं रहा, तो यह वक्त भी गुजर जाएगा.

ब्रेकअप को करें सैलिब्रेट : हर छोटीबड़ी खुशियों को सैलिब्रेट करना जैसे जरूरी है, वैसे ही अपने ब्रेकअप को भी एंजौय करें. खुद को ट्रीट दें. आप को अच्छा महसूस होगा.

आप को शायद पता नहीं, फेसबुक डेटा से साबित हो चुका है कि एक खास दिन को प्रेमी, एकदूसरे से अलग होने का उत्सव मनाते हैं. यह दिन है 11 दिसंबर, जब कई प्रेमी युगलों ने रिश्ता खत्म किया होगा. साइकोलौजिस्ट के मुताबिक, जो एकतरफा प्यार में होते हैं वे लोग साल के अंत में यानी दिसंबर में अपना रिश्ता खत्म कर देते हैं. इस वजह से दिसंबर में ब्रेकअप डे मनाया जाता है.

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