मर्द ही नहीं औरत भी ले सैक्स का मजा

‘‘और्गेज्म क्या होता है? क्या यह सैक्स से जुड़ा है? मैं ने तो कभी इस का अनुभव नहीं किया,’’ मेरी पढ़ीलिखी फ्रैंड ने जब मुझ से यह सवाल किया तो मैं हैरान रह गई.

‘‘क्यों, क्या कभी तुम ने पूरी तरह से सैक्स को एंजौय नहीं किया?’’ मैं ने उस से पूछा तो वह शरमा कर बोली, ‘‘सैक्स मेरे एंजौयमैंट के लिए नहीं है, वह तो मेरे पति के लिए है. सबकुछ इतनी जल्दी हो जाता है कि मेरी संतुष्टि का तो सवाल ही नहीं उठता है, वैसे भी मेरी संतुष्टि को महत्त्व दिया जाना माने भी कहां रखता है.’’

यह एक कड़वा सच है कि आज भी भारतीय समाज में औरत की सैक्स संतुष्टि को गौण माना जाता है. सैक्स को बचपन से ही उस के लिए एक वर्जित विषय मानते हुए उस से इस बारे में बात नहीं की जाती है. उस से यही कहा जाता है कि केवल विवाह के बाद ही इस के बारे में जानना उस के लिए उचित होगा. ऐसा न होने पर भी अगर वह इसे प्लैजर के साथ जोड़ती है तो पति के मन में उस के चरित्र को ले कर अनेक सवाल पैदा होने लगते हैं. यहां तक कि सैक्स के लिए पहल करना भी पति को अजीब लगता है.

इस की वजह वे सामाजिक हालात भी हैं, जो लड़कियों की परवरिश के दौरान यह बताते हैं कि सैक्स उन के लिए नहीं बल्कि मर्दों के एंजौय करने की चीज है.

सैक्स चर्चा है टैबू

भारत में युगलों के बीच यौन अनुभवों के बारे में चर्चा करना अभी भी एक टैबू माना जाता है, जिस की वजह से यह एक बड़ा चिंता का विषय बनता जा रहा है. दांपत्य जीवन में सैक्स संबंध जितने माने रखते हैं, उतनी ही ज्यादा उन की वर्जनाएं भी हैं. एक दुरावछिपाव व शर्म का एहसास आज भी उन से जुड़ा है. यही वजह है कि पतिपत्नी न तो आपस में इसे ले कर मुखर होते हैं और न ही इस से जुड़ी किसी समस्या के होने पर उस के बारे में सैक्स थेरैपिस्ट से डिस्कस ही करते हैं. पुरुष अपनी कमियों को छिपाते हैं. भारत में लगभग 72% स्त्रीपुरुष यौन असंतुष्टि के कारण अपने वैवाहिक जीवन से खुश नहीं हैं.

मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि जब भी महिलाएं अपनी किसी समस्या को ले कर उन के पास आती हैं और वजह जानने के लिए उन के सैक्स संबंधों के बारे में पूछा जाता है तो 5 में से 1 महिला इस बारे में बात करने से इनकार कर देती है. यहां तक कि अगली बार बुलाने पर भी नहीं आती. कानूनविद मानते हैं कि 20 फीसदी डाइवोर्स सैक्सुअल लाइफ में संतुष्टि न होने की वजह से होते हैं. पुरुष अपने साथी को यौनवर्धक गोलियां लेने के बावजूद संतुष्ट न कर पाने के कारण तनाव में रहते हैं.

पुरुष अपने सैक्सुअल डिस्फंक्शन को ले कर चुप्पी साध लेते हैं और औरतें अपनी शारीरिक इच्छा को प्रकट न कर पाने के कारण कुढ़ती रहती हैं. वैवाहिक रिश्तों में इस की वजह से ऐसी दरार चुपकेचुपके आने लगती है, जो एकदम तो नजर नहीं आती, लेकिन बरसों बाद उस का असर जरूर दिखाई देने लगता है.

सैक्स से जुड़ी है सेहत

एशिया पैसेफिक सैक्सुअल हैल्थ ऐंड ओवरआल वैलनैस द्वारा एशिया पैसेफिक क्षेत्र में 12 देशों में की गई एक रिसर्च के अनुसार एशिया पैसेफिक क्षेत्र में 57 फीसदी पुरुष व 64 फीसदी महिलाएं अपने यौन जीवन से संतुष्ट नहीं हैं. इस में आस्ट्रेलिया, चीन, हांगकांग, भारत, इंडोनेशिया, जापान, मलयेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, ताइवान आदि देशों को शामिल किया गया था.

यह रिसर्च 25 से ले कर 74 वर्ष के यौन सक्रिय स्त्रीपुरुषों पर की गई थी. सब से प्रमुख बात, जो इस रिसर्च में सामने आई, वह यह थी कि पुरुषों में इरैक्टाइल हार्डनैस में कमी होने के कारण पतिपत्नी दोनों ही सैक्स संबंधों को ले कर खुश नहीं रहते हैं. ऐसा इसलिए, क्योंकि इरैक्टाइल हार्डनैस का संबंध सैक्स के साथसाथ प्यार, रोमांस, पारिवारिक जीवन व जीवनसाथी की भूमिका निभाने के साथ जुड़ा है. जीवन के प्रति देखने का उन का नजरिया भी काफी हद तक सैक्स संतुष्टि के साथ जुड़ा हुआ है.

सिडनी सैंटर फौर सैक्सुअल ऐंड रिलेशनशिप थेरैपी, सिडनी, आस्ट्रेलिया की यौन स्वास्थ्य चिकित्सक डा. रोजी किंग के अनुसार, ‘‘एशिया पैसेफिक के इस सर्वे से ये तथ्य सामने आए हैं कि यौन जीवन संतुष्टिदायक होने पर ही व्यक्ति पूर्णरूप से स्वस्थ रह सकता है. आज की व्यस्त जीवनशैली में जबकि यौन संबंध कैरियर की तुलना में प्राथमिकता पर नहीं रहे, पुरुष व महिलाओं दोनों में ही यौन असंतुष्टि उच्च स्तर पर है. इस की मूल वजह अपनी सैक्स संबंधित समस्याओं के बारे में न तो आपस में और न ही डाक्टरों से बात करना है. चूंकि सैक्स संबंधों का प्रभाव जीवन के अन्य पहलुओं पर भी पड़ता है, इसलिए सैक्स के मुद्दे पर बोलने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया जाना चाहिए.’’

जीवन के इस महत्त्वपूर्ण पक्ष को नजरअंदाज कर के युगल जहां एक तरफ तनाव का शिकार होते हैं, वहीं संतुष्टिदायक सैक्स संबंध न होने के कारण उन के जीवन के अन्य पहलू भी प्रभावित होते हैं. स्वास्थ्य के साथसाथ उन की सोच व जीवनशैली पर भी इस का गहरा असर पड़ता है. यौन संतुष्टि संपूर्ण सेहत के साथसाथ प्रेम व रोमांस से भी जुड़ी है.

कम होती एवरेज

कामसूत्र की भूमि भारत में, जहां की मूर्तियों तक पर सदियों पहले यौन क्रीडा से जुड़ी विभिन्न भंगिमाओें को उकेरा गया था, अभी भी अपने यौन अनुभव के बारे में बात करना एक संकोच का विषय है. भारतीय पुरुष के जीवन में सैक्स जीवन की प्राथमिकताओं में 17वें नंबर पर आता है और औरतों के 14वें नंबर पर.

आज अगर हम शहरी युगलों पर नजर डालें तो पाएंगे कि वे दिन में 14 घंटे काम करते हैं, 2 घंटे आनेजाने में गुजार देते हैं और सप्ताहांत यह सोचते हुए बीत जाता है कि सफलता की सीढ़ियां कैसे चढ़ें. इन सब के बीच सैक्स संबंध बनाना एक आवश्यकता न रह कर कभीकभी याद आ जाने वाली क्रिया मात्र बन कर रह जाता है.

लीलावती अस्पताल, मुंबई के ऐंड्रोलोजिस्ट डा. रूपिन शाह का इस संदर्भ में कहना है, ‘‘प्रत्येक 2 में से 1 भारतीय शहरी पुरुष में पर्याप्त इरैक्टाइल हार्डनैस नहीं होती, फिर भी 40 से कम उम्र के पुरुष अपनी कमजोरी मानने को तैयार नहीं हैं. 40 से कम उम्र की औरतों की सैक्स की मांग अत्यधिक होने के कारण वे एक तरफ जहां अपनी सैक्स संतुष्टि को ले कर सजग रहती हैं, वहीं वे पार्टनर के सुख न दे पाने के कारण परेशान रहती हैं. नीमहकीमों के पास जाने के बजाय डाक्टर व काउंसलर की मदद से यौन संबंधों में व्याप्त तनाव को दूर किया जा सकता है.’’

ड्यूरैक्स सैक्सुअल वैलबीइंग ग्लोबल सर्वे के अनुसार भारतीय पुरुष व महिलाएं अपने सैक्स जीवन से संतुष्ट नहीं हैं. और्गेज्म तक पहुंचना प्रमुख लक्ष्य होता है और केवल 46 फीसदी भारतीय मानते हैं कि उन्हें वास्तव में और्गेज्म प्राप्त हुआ है, जबकि ऐसी महिलाएं भी हैं, जो यह भी नहीं जानतीं कि और्गेज्म होता क्या है, क्योंकि एक महिला को इस तक पहुंचने में पुरुष से 10 गुना ज्यादा समय लगता है. पुरुष 3 मिनट में संतुष्ट हो जाता है, ऐसे में वह औरत को और्गेज्म प्राप्त होने का इंतजार कैसे कर सकता है. वैसे भी आज भी भारतीय पुरुष के लिए केवल अपनी संतुष्टि माने रखती है.

संवाद व सम्मान आवश्यक

असंतुष्टि की वजह कहीं न कहीं पतिपत्नी के बीच मानसिक जुड़ाव का न होना भी है. आपस में निकटता को न महसूस करना, सम्मान न करना भी उन की संतुष्टि की राह में बाधक बनता है. सैक्स के बारे में खुल कर बात न करना या किस तरह से उस का भरपूर आनंद उठाया जा सकता है, इस पर युगल का चर्चा न करना या असहमत होना भी यौन क्रिया को मात्र मशीनी बना देता है. अपने साथी से अपनी इच्छाओं को शेयर कर सैक्स जीवन को सुखद बनाया जा सकता है, क्योंकि यह न तो कोई काम है और न ही कोई मशीनी व्यवस्था, बल्कि यह वैवाहिक जीवन को कायम रखने वाली ऐसी मजबूत नींव है, जो प्लैजर के साथसाथ एकदूसरे को प्यार करने की भावना से भी भर देती है.

जानें क्या हैं यौन रोग के शुरुआती लक्षण

शादी के कुछ समय के बाद रेखा के अंदरूनी अंग से कभीकभी कुछ तरल पदार्थ निकलने लगा, पर उस ने इस तरफ खास ध्यान नहीं दिया. मगर कुछ दिनों बाद जब उसे उस तरल पदार्थ से बदबू आने का एहसास होने लगा और अंग में खुजली भी होने लगी तो वह तुरंत डाक्टर के पास गई.

डाक्टर ने जांच कर के रेखा को बताया कि उसे यौन रोग हो गया है, पर घबराने वाली कोई बात नहीं है क्योंकि समय पर दिखा लिया. इलाज पर कम पैसा खर्च कर बीमारी ठीक हो जाएगी.

सीमा जब अपने पति के साथ शारीरिक संबंध बनाती तो उसे दर्द होता. उस ने इस परेशानी के बारे में डाक्टर को बताया. डाक्टर ने सीमा के अंगों की जांच कर के बताया कि उसे यौन रोग हो गया है. समय से इलाज कराने पर सीमा की बीमारी दूर हो गई.

यौन रोग पतिपत्नी के संबंधों में बाधक बन जाते हैं. यौन रोग के डर से लोग संबंध बनाने से डरने लगते हैं. कई बार यौन रोगों से अंदरूनी अंग से बदबू आने लगती है, जिस की वजह से सैक्स संबंधों से रुचि खत्म हो जाती है. ऐसे में पतिपत्नी एकदूसरे से दूर जा कर कहीं और संबंध बनाने लगते हैं.

क्या है यौन रोग

यौन रोग शरीर के अदरूनी अंगों में होने वाली बीमारियों को कहा जाता है. यह एक पुरुष और औरत के साथ संपर्क करने से भी हो सकता है और बहुतों के साथ संबंध रखने से भी हो सकता है. यौन रोग से ग्रस्त मां से पैदा होने वाले बच्चे को भी यह रोग हो सकता है. ऐसे में अगर मां को कोई यौन रोग है, तो बच्चे का जन्म डाक्टर की सलाह से औपरेशन के जरीए कराना चाहिए. इस से बच्चा योनि के संपर्क में नहीं आता और यौन रोग से बच जाता है.

कभीकभी यौन रोग इतना मामूली होता है कि उस के लक्षण नजर ही नहीं आते हैं. इस के बाद भी इस के परिणाम खतरनाक हो सकते हैं, इसलिए यौन रोग के मामूली लक्षण को भी नजरअंदाज न करें. मामूली यौन रोग कभीकभी अपनेआप ठीक हो जाते हैं, पर इन के बैक्टीरिया शरीर में रह जाते हैं, जो कुछ समय बाद शरीर में तेजी से हमला करते हैं. यौन रोग शरीर की खुली और छिली जगह वाली त्वचा से ही फैलते हैं.

यौन रोग का घाव इतना छोटा होता है कि उस का पता ही नहीं चलता है. पति या पत्नी को भी इस का पता नहीं चलता है. यौन रोगों का प्रभाव 2 से 20 सप्ताह के बीच कभी भी सामने आ सकता है. इस के चलते औरतों को माहवारी बीच में ही आ जाती है. यौन रोग योनि, गुदा और मुंह के द्वारा शरीर में फैलते हैं. यौन रोग कई तरह के होते हैं. इन के बारे में जानकारी होने पर इन का इलाज आसानी से हो सकता है.

हार्पीज: हार्पीज बहुत ही आम यौन रोग है. इस रोग में पेशाब करते समय जलन होती है. पेशाब के साथ कई बार मवाद भी आता है. बारबार पेशाब जाने को मन करता है. बुखार भी हो जाता है. टौयलेट जाने में भी परेशानी होने लगती है. जिसे हार्पीज होता है उस के मुंह और योनि में छोटेछोटे दाने हो जाते हैं. शुरुआत में ये अपनेआप ठीक भी हो जाते हैं. अगर ये दोबारा हों तो इलाज जरूर कराएं.

व्हाट्स: व्हाट्स में शरीर के तमाम हिस्सों में छोटीछोटी फूलनुमा गांठें पड़ जाती हैं. व्हाट्स एचपीवी वायरस यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के चलते फैलता है. यह 70 प्रकार का होता है. अगर ये गांठें अगर शरीर के बाहर हों और 10 मिलीमीटर के अंदर हों तो इन्हें जलाया जा सकता है. 10 मिलीमीटर से बड़ा होने पर औपरेशन के जरीए हटाया जाता है.

योनि में फैलने वाले वायरस को जैनरेटल व्हाट्स कहते हैं. यह योनि में बच्चेदानी के मुख पर हो जाता है. अगर समय पर इलाज न हो तो यह घाव कैंसर का रूप ले लेता है. अगर यह हो तो 35 साल की उम्र के बाद एचपीवी का कल्चर जरूर करा लें. इस से घाव का पूरा पता चल जाता है.

गनेरिया: इस रोग में पेशाब की नली में घाव हो जाता है, जिस से पेशाब की नली में जलन होने लगती है. कई बार खून और मवाद भी आने लगता है. इस का इलाज ऐंटीबायोटिक दवाओं के जरीए किया जाता है. अगर यह बारबार होता है तो इस का घाव पेशाब की नली को बंद कर देता है, जिसे बाद में औपरेशन के द्वारा ठीक किया जाता है.

गनेरिया को साधारण बोली में सुजाक भी कहा जाता है. इस के होने पर तेज बुखार भी आता है. इस के बैक्टीरिया की जांच के लिए मवाद की फिल्म बनाई जाती है. अगर यह बीमारी शुरू में ही पकड़ में आ जाए तो इलाज आसानी से हो जाता है. बाद में इलाज कराने में मुश्किल आती है.

सिफलिस: यह यौन रोग भी बैक्टीरिया के कारण फैलता है. यह यौन संबंध के कारण ही होता है. इस रोग के चलते पुरुषों के अंग के ऊपर गांठ सी बन जाती है. कुछ समय के बाद यह ठीक भी हो जाती है. इस गांठ को शैंकर भी कहा जाता है. शैंकर से पानी ले कर माइक्रोस्कोप द्वारा ही बैक्टीरिया को देखा जाता है. इस बीमारी की दूसरी स्टेज पर शरीर में लाल दाने से पड़ जाते हैं. यह कुछ समय के बाद शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित करने लगता है.

इस बीमारी का इलाज तीसरी स्टेज के बाद मुमकिन नहीं होता है. खराब हालत में यह शरीर की धमनियों को प्रभावित करता है. धमनियां फट भी जाती हैं. यह रोग आदमी और औरत दोनों को हो सकता है. इस का इलाज दवा और इंजैक्शन से होता है.

सैक्स में जल्दी पस्त

रमेश और प्रदीप बहुत अच्छे दोस्त थे. रमेश की शादी पहले हो गई थी. उस के बाद प्रदीप की शादी हुई. दोनों के बीच पतिपत्नी के आपसी संबंधों पर भी बात होती थी. इन में सब से बड़ा मुद्दा पत्नी के साथ सैक्स का होता था. इस में भी सब से हौट टौपिक यह होता था कि सैक्स में कितना समय लगता है. दोस्त होने के चलते वे दोनों खुल कर बात कर लेते थे.

एक दिन प्रदीप ने कहा, ‘‘यार, मेरा तो कई बार जल्दी ही डिस्चार्ज हो जाता है. अब तो पत्नी भी थोड़ा अलग तरह से सोचने लगी है. मैं ने कई जगह पढ़ा, सुना और देखा कि लोग लंबेलंबे समय तक संबंध बनाते हैं. जल्दी डिस्चार्ज नहीं होते. मैं ने सोचा कि क्यों न तुम से ही पूछ लिया जाए. तुम्हारी शादी को तो काफी समय हो गया है.’’

इस पर रमेश बोला, ‘‘दोस्त, यह सबकुछ आपसी तालमेल और अनुभव पर निर्भर करता है. इस को ऐसे समझो कि जैसे बचपन में साइकिल चलाना सीखते हैं तो पहले गिरते हैं, फिर संभलते हैं, तब कहीं जा कर अच्छी साइकिलिंग कर पाते हैं.

‘‘शादी के बाद पतिपत्नी दोनों को अनुभव कम होता है. ऐसे में कई बार नाकामी हाथ लगती है. आदमी जल्दी पस्त हो जाता है, जिसे शीघ्रपतन भी कहते हैं. पत्नी का सहयोग इस परेशानी को दूर करने का सब से अच्छा रास्ता होता है. यह कोई बीमारी नहीं है. यह तजरबे की कमी होती है.’’

शीघ्रपतन केवल प्रदीप की समस्या नहीं है. ऐसे तमाम नौजवान हैं, जो यह मानते हैं कि सैक्स में वे जल्दी पस्त हो जाते हैं. ऐसे लोग कई बार मानसिक रोग के शिकार हो जाते हैं. उन्हें लगता है कि वे सैक्स में अपने साथी को संतुष्ट नहीं कर सकते हैं. यह सोच जब दिमाग पर हावी होती है, तो परेशानी और ज्यादा बढ़ जाती है.

जल्दी पस्त होने की वजह
लखनऊ के डाक्टर जीसी मक्कड़ कहते हैं, ‘‘सैक्स आपसी तालमेल और अनुभव पर ही सुंतष्टि देता है. शीघ्रपतन के कई कारण होते हैं. इस के लिए जरूरी है कि पहले उस के लक्षणों को पहचाना जाए और उस के अनुसार इलाज किया जाए. कई बार केवल समझाने से ही समस्या का समाधान हो जाता है. अगर दिक्कत शारीरिक है, तो उस का अलग इलाज होता है.’’

30 से 40 फीसदी लोग इस परेशानी से पीड़ित हैं. जल्दी पस्त होने के कारणों में तनाव, अवसाद, शारीरिक कमजोरी, स्तंभन दोष यानी नपुंसकता प्रमुख होते हैं. शारीरिक कारण जैसे ब्लड प्रैशर में बढ़ोतरी, मधुमेह, थायराइड की समस्या या प्रोस्टैट रोग आदि भी हो सकते हैं.

दिमागी कारणों में शुरुआती यौन अनुभव, यौन शोषण, शीघ्रपतन की चिंता करना, गलत सोच, जो हस्तमैथुन को बढ़ावा देती है, शराब या नशीली दवाओं का सेवन और नींद न आना भी शामिल हैं. हस्तमैथुन के कारण भी कई बार जल्दी स्खलन हो जाता है.

खानपान और खराब जीवनशैली के कारण भी यह परेशानी होती है. खानपान की आदत का खराब होना, उचित मात्रा में समय पर भोजन न करना, विटामिन की कमी होना, पाचन तंत्र कमजोर होना और लगातार पेट खराब रहना, लंबे समय तक कब्ज रहना और खून व भूख की कमी से हार्मोन बहुत ज्यादा प्रभावित होते हैं, जिस से शरीर में वीर्य कम मात्रा में बनता है. अंग की नसें सिकुड़ जाती हैं, जिस से वीर्य का स्खलन जल्दी हो जाता है.

कैसे जानें यह होता है
सैक्स के दौरान समय से पहले वीर्य का जल्दी निकल जाना शीघ्रपतन कहलाता है. इसी को जल्दी पस्त होना कहते हैं. इस में अंग के योनि में प्रवेश के समय ही स्खलन होने लगता है. कई बार यह 1-2 बार अंग के प्रवेश पर ही हो जाता है. इस से कई तरह की परेशानियां होने लगती हैं.

आत्मग्लानि, हीनभावना, असंतुष्ट होना और नैगेटिव सोच मन में भर जाती है. लोग अपने को कमजोर समझने लगते हैं. उन्हें लगता है कि साथी उन को छोड़ कर कहीं और जा सकता है.

कई बार बढ़ती उम्र की वजह से अंग की नसें कमजोर व ढीली हो जाने से उस में ढीलापन आ जाता है. इस वजह से यह वीर्य को रोके रखने में कामयाब नहीं होता और शीघ्रपतन हो जाता है.

शीघ्रपतन की परेशानी केवल मर्दों में होती है. औरतों को यह नहीं होता है. शीघ्रपतन का कोई निश्चित मापदंड नहीं है. यह हर इनसान के मानसिक और शारीरिक हालात पर निर्भर होता है.

समझदारी से लें काम
ज्यादातर लोग ब्लू फिल्में देखने, किताबों में गलत जानकारी पढ़ने से यह मान लेते हैं कि वे जल्दी पस्त हो जाते हैं. ब्लू फिल्मों में जो दिखाया जाता है, वह सच नहीं होता. वे फिल्में होती हैं और उन में दिखाए जाने वाले ऐक्टर होते हैं. ऐसे में उन से तुलना करना ठीक नहीं होता है.

कई जगहों पर नीमहकीम यह बताते हैं कि स्वप्नदोष और हस्तमैथुन के चलते लोग सैक्स में जल्दी पस्त हो जाते हैं, जो कि गलत सोच है.

आपसी सहयोग और समझदारी से जल्दी पस्त होने की परेशानी से बचा जा सकता है. सैक्स करने से पहले उस की तैयारी करें, जिसे फोरप्ले कहते हैं. साथी से यह जानने की कोशिश करें कि उसे क्या पसंद है.

सैक्स में जल्दबाजी न करें. सैक्स के लिए ऐसी जगह हो, जहां किसी तरह की असुरक्षा का माहौल न हो. इस तरह से जल्दी पस्त होने की परेशानी से बचा जा सकता है.

मैं अपने मंगेतर से बहुत प्यार करती हूं, पर समझ नहीं आ रहा है कि उसके शक को कैसे दूर करूं?

सवाल

मेरी सगाई हो चुकी है. पहले मेरा एक प्रेमी था, जिस ने मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाए थे, पर बाद में उस ने मुझे धोखा दे दिया. जिस से मेरी सगाई हुई, उस के साथ भी शादी से पहले मेरा जिस्मानी संबंध हुआ, पर जब खून नहीं आया तो उसे शक हुआ. पूछने पर मैं ने मना कर दिया कि मैं ने पहले ऐसा नहीं किया था, मगर ज्यादा जोर देने पर मैं ने कह दिया कि मेरे साथ रेप हुआ था और वह लड़का कई साल तक मुझ से जबरदस्ती करता रहा, अब नहीं करता. बाद में मैं ने कहा कि मैं तो मजाक कर रही थी. अब मंगेतर मेरा यकीन नहीं करता और पूछता है कि उस का नाम तो बता दो और यह भी कि कितने सालों तक किया. मैं अपने मंगेतर से बहुत प्यार करती हूं, पर समझ नहीं पा रही हूं कि उसे कैसे समझाऊं?

जवाब

आप ने गलत काम भी किया और खुद अपनी इमेज बिगाड़ ली. बारबार झूठ बोल कर आप ने अपने मंगेतर का भरोसा भी खो दिया. न तो आप को उस धोखेबाज प्रेमी से संबंध बनाना चाहिए था, न ही मंगेतर से. शायद आप की जिस्मानी भूख ही ज्यादा थी, फिर भी मंगेतर से रेप की बात कर के आप ने खुद ही बात बिगाड़ ली. अगर मंगेतर शक्की है, तो अपनी मंगनी तोड़ दें.

लड़की के शादी और सैक्स से जुड़े सवाल और उन के हल

शादी तय होते ही हर लड़की के मन में जहां एक तरफ अनकही खुशी होती है वहीं दूसरी ओर मन में डर भी रहता है कि न जाने नया घर, वहां के रीतिरिवाज, घर के लोग कैसे होंगे? क्या मैं उस माहौल में सहज महसूस कर पाऊंगी? ऐसे तमाम सवालों के साथसाथ एक अहम पहलू यानी सैक्स जीवन को ले कर भी मन में अनगिनत जिज्ञासाएं होती हैं, जिन के बारे में वह हर बात को शेयर करने वाली मां से भी नहीं पूछ पाती है और न ही भाभी या बहन से.

सेक्स संबंधी जिज्ञासाएं एक विवाहयोग्य लड़की के मन में होना आम बात है. इसी विषय पर बात करते हुए 2 महीने पूर्व विवाह के बंधन में बंधी रीमा कहती है कि विवाह तय होते ही मैं ने मां से पूछा कि मां पहली रात के बारे में सोच कर घबराहट हो रही है, क्या होगा जरा बताइए?

तब मां ने झुंझलाते हुए जवाब दिया कि घबराओ नहीं, सब ठीक होगा. जब विवाहित सहेली से पूछा तो उस ने कहा कि संबंध बनाते समय बड़ा दर्द होता है. पर अब अपने अनुभव से कह सकती हूं कि यदि आप मानसिक और शारीरिक रूप से सहज हैं, साथ ही पति का स्नेहपूर्ण स्पर्श है, तो कोई समस्या नहीं आती.

भले आज कितनी ही प्रीमैरिटल काउंसलिंग संस्थाएं खुल गई हों पर जरूरी नहीं कि हर लड़की का परिवार एक बड़ी फीस दे कर अपनी बेटी को वहां भेज सके. मगर सवाल उठता है कि भावी दुलहन अगर मन की जिज्ञासाओं को अपनी मां से नहीं पूछ सकती, भाभी, बहन और सहेली भी उसे ठीक से नहीं बताएंगी और बताएंगी भी तो वे उन के निजी अनुभव होंगे और जरूरी नहीं कि भावी दुलहन के साथ भी वैसा ही हो, ऐसे में वह क्या करे?

हम ने विवाहयोग्य लड़कियों व जिन के विवाह होने वाले हैं, ऐसी कई लड़कियों से उन के मन की जिज्ञासाओं को जाना कि वे मोटेतौर पर मन में किस प्रकार की जिज्ञासाएं रखती हैं. प्रस्तुत हैं, उन की जिज्ञासाएं…

जिज्ञासाएं कैसी-कैसी

हर लड़की के मन में जिज्ञासा उपजती है कि क्या प्रथम मिलन के दौरान रक्तस्राव होना जरूरी है? क्या यही कौमार्य की पहचान है? क्या प्रथम मिलन पर बहुत दर्द होता है? इन के अलावा यदि विवाहपूर्व किसी और से शारीरिक संबंध रहा है तो क्या पति को उस का पता चल जाएगा? क्या माहवारी के दौरान सैक्स किया जा सकता है? क्या रात में 1 से अधिक बार शारीरिक संबंध स्थापित करने पर शरीर में कमजोरी आ जाती है? कौन सा गर्भनिरोधक उपाय अपनाएं ताकि तुरंत गर्भवती न हो? आदि.

इन सभी प्रश्नों के उत्तर देते हुए मदर ऐंड चाइल्ड हैल्थ स्पैशलिस्ट व फैमिली प्लानिंग काउंसलर डा. अनीता सब्बरवाल ने बताया कि प्रथम समागम के समय खून आने का कौमार्य से कोई संबंध नहीं होता. दरअसल, बढ़ती उम्र में खेलकूद या व्यायाम आदि के दौरान भी हाइमन नाम की पतली झिल्ली फट जाती है और लड़कियों को इस का पता भी नहीं चलता. इस के अलावा जो लड़कियां हस्तमैथुन करती हैं उन की झिल्ली भी फट सकती है. अत: विवाहयोग्य लड़कियों को मन से यह बात निकाल देनी चाहिए कि खून न आने से कौमार्य पर प्रश्नचिह्न लग सकता है.

इसी तरह प्रथम मिलन पर दर्द होना भी जरूरी नहीं है. अकसर शर्म और झिझक के कारण लड़कियां सैक्स के दौरान सहज नहीं हो पातीं, जिस के कारण योनि में गीलापन नहीं आ पाता और शुष्कता के कारण दर्द होता है. इसलिए संबंध बनाते समय पति का साथ दें. विवाहपूर्व बने शारीरिक संबंधों के बारे में पति को तब तक पता नहीं चल सकता जब तक पत्नी स्वयं न बताए.

ऐसे ही माहवारी के दौरान सैक्स करने से कोई हानि नहीं होती. फिर भी सैक्स न किया जाए तो अच्छा है, क्योंकि एक तो पत्नी वैसे ही रक्तस्राव, पीएमएस जैसी तकलीफों से गुजर रही होती है, उस पर कई पति ओरल सैक्स पर जोर डालते हैं, जो सही नहीं है.

अधिकांश लड़कियों के मन में यह जिज्ञासा भी बहुत रहती है कि सैक्स अधिक बार करने से कमजोरी आती है. दरअसल, ऐसा नहीं है, पत्नियां पतियों की सैक्स आवश्यकता से अनजान होती हैं. इस कारण उन्हें लगता है कि अधिक बार सैक्स करना हानिकारक होगा, जबकि ऐसा कुछ नहीं है. हां, फैमिली प्लानिंग उपाय के लिए अच्छा होगा कि पत्नी किसी स्त्रीरोग विशेषज्ञा से मिले ताकि वह शादी के बाद तुरंत गर्भवती न हो कर वैवाहिक जीवन का पूर्ण आनंद उठा सके.

ध्यान देने योग्य बातें

–सेक्स संबंधी जानकारी इंटरनैट पर आधीअधूरी मिलती है. अत: उस पर ध्यान न दें.

–फैंटेसी में न जिएं और ध्यान रखें कि हर चीज हर किसी को नहीं मिलती.

–यदि कोई बीमारी है जैसे डायबिटीज, अस्थमा आदि तो उस की जानकारी विवाहपूर्व ही भावी पति को होनी चाहिए. इसी तरह पति को भी कोई बीमारी हो तो उस का पता पत्नी को होना चाहिए.

–मन की यह जिज्ञासा कि ससुराल वाले कैसे होंगे तो ध्यान रखें, हर घर के तौरतरीके अलग होते हैं. जरूरी यह है कि बड़ेबुजुर्गों को सम्मान दें, घर के तौरतरीकों को अपनाने की कोशिश करें तथा अपनी मुसकराहट व काम से सब का दिल जीतें. मन में जितनी भी सेक्स संबंधी जिज्ञासाएं हैं उन्हें किसी अच्छी पत्रिका के सैक्स कौलम के अंतर्गत प्रकाशित होने वाले लेखों को पढ़ कर शांत करें.

–यदि किसी समस्या का समाधान लेखों में न मिले तो उसे किसी पत्रिका के ‘सैक्स कौलम’ में लिख कर भेजें. ऐसे कौलमों की समस्याओं के समाधान योग्य डाक्टरों से पूछ कर ही प्रकाशित किए जाते हैं.

सैक्स स्प्रे : दे मजबूती चरम तक

अच्छा सैक्स पार्टनर वही है, जो दूसरे को चरम तक पहुंचाए, लेकिन कई मर्द पहले ही ढेर हो जाते हैं. ऐसे में सैक्स स्प्रे आप की मदद कर सकता है.

अकसर कई लोगों के दिमाग में यह सवाल चलता रहता है कि पोर्न फिल्मों में दिखाए गए मर्द इतनी ज्यादा देर तक लगातार सैक्स कैसे कर लेते हैं? वे अपनी कल्पना के घोड़ों को दौड़ाते हैं और सोचते रहते हैं कि इतने लंबे समय तक सैक्स करने से उन्हें अच्छाखासा टाइम मिल जाता है और वे सैक्स की हर पोजीशन को ऐंजौय कर पाते हैं.

सैक्स एक ऐसा मुद्दा है, जिस में आम आदमी पोर्न फिल्मों से तो सैक्स की अलगअलग पोजीशन सीख लेते हैं और मन में अपनी पार्टनर के साथ उसी तरह की सैक्स पोजीशन ट्राई करने को मन उबाल मार रहा होता है, पर जब बात सच में अपनी पार्टनर के साथ बिस्तर पर समय बिताने की आती है, तो मुश्किल से 2 मिनट भी टिक नहीं पाते और जल्दी पस्त हो जाते हैं.

उत्तर प्रदेश के 34 साल के मिथिलेश कुमार की भी कुछ ऐसी ही कुंठाएं थीं. पहले पढ़ाई, फिर कमाईधमाई की जद्दोजेहद में शादी देर से हुई. 30 साल का हुआ, परिवार को पालने लायक बना तो शादी की.

सैक्स को ले कर मिथिलेश के मन में कई अरमान थे कि पत्नी के साथ ऐसे होगा, वैसे होगा. दोस्तों से भी टिप्स लीं, पोर्न साइट पर सैक्स पोजीशन खूब देखीं. शादी से 2 महीने पहले दूध में हलदी डाल कर खूब पिया, पर शादी की रात वह पत्नी के सामने जल्दी ढेर हो गया. उसे पता चला कि उस की माइलेज इतनी नहीं है. उस के अंग का तनाव 15-20 सैकंड में ही ढीला पड़ गया.

मिथिलेश को पहले यह शादी की घबराहट जैसा लगा, लेकिन बाद में भी उस का काम बहुत जल्दी हो जाता, जबकि पत्नी अभी शुरू भी नहीं हो पाती थी. इस से उसे लगा कि वह सैक्स में अच्छा नहीं है.

मिथिलेश जैसे कई मर्दों के मन में यह चीज ठहर जाती है और वे तनाव महसूस करने लगते हैं. इस तनाव में वे सैक्स को ले कर और ज्यादा भ्रमित करने वाली चीजों का इस्तेमाल करने लगते हैं.

कई तो नीमहकीम के चक्कर लगाने शुरू कर देते हैं और अपनी जेब कटवा रहे होते हैं. सही जानकारी की कमी में वे गलत तरीके अपनाने लगते हैं और आखिर में होता यह है कि वे अपनी सैक्स लाइफ ही बरबाद कर बैठते हैं.

हर मर्द चाहता है कि वह सैक्स के दौरान लंबे समय तक टिक सके या सैक्स का लंबे समय तक मजा उठा सके. वैसे तो सैक्स में आधा काम साइकोलौजी यानी मन के विज्ञान का होता है यानी मन पर काबू कर के सही टाइमिंग से सैक्स का मजा उठाया जा सके, जैसे लंबे समय तक सैक्स के लिए कहां और कैसे ऊर्जा खर्च करनी है, कितना फोरप्ले करना है, कब इंटरकोर्स करना है और उस दौरान कब खुद पर काबू पाना है वगैरह.

पर अगर ऐसा न हो पाए तो? इस के लिए बाजार में ऐसे बहुत से प्रोडक्ट हैं, जिन से सैक्स का ज्यादा समय तक मजा उठाया जा सकता है. बस समस्या आती है सही जानकारी की कि ऐसे प्रोडक्ट हैं कौन से और इन का इस्तेमाल कैसे किया जाए. बहुत से लोगों को सही प्रोडक्ट मिल भी जाते हैं, पर वे उन का इस्तेमाल ठीक से नहीं कर पाते हैं, जिस के चलते बात वहीं की वहीं आ ठहरती है.

ऐसे में हम बताएंगे कि अंग को लंबे समय तक तनाव में रखने वाले वे प्रोडक्ट, जिन से अच्छे सैक्स का मजा उठाया जा सके.

बहुत से लोग लंबी सैक्स ड्राइव के लिए सिर्फ वियाग्रा गोली को ही जानते हैं. चूंकि यह गोली होती है, जिसे निगलना होता है, तो बहुत से लोग घबराते हैं कि कहीं इस के साइड इफैक्ट न हो जाएं. निराश मत होइए, क्योंकि बाजार में ऐसे बहुत सारे सैक्स स्प्रे हैं, जिन का इस्तेमाल खूब होता है.

क्या है सैक्स स्प्रे

कई मर्द अपनी सैक्स टाइमिंग बढ़ाना चाहते हैं, क्योंकि लंबे समय तक सैक्स करने से चरमसुख मिलता है. यह औरत साथी को काफी अच्छा लगता है.

हर मर्द यह चाहता है कि सैक्स के दौरान उस की पार्टनर उस से संतुष्ट हो, क्योंकि सैक्स का मजा तभी दोगुना होता है, जब सैक्स के दौरान दोनों पार्टनर एकदूसरे में खो जाएं, इसलिए अपनी पार्टनर को खुश करने के लिए मर्द इस तरह के स्प्रे का इस्तेमाल कर सकते हैं.

यह स्प्रे मर्दों के लिए बनाया गया है. अगर आप सैक्स दवाएं खाने से बचना चाहते हैं, तो इस तरह के स्प्रे का इस्तेमाल करना बेहतर रहता है.

स्प्रे का इस्तेमाल ऐसे अमेजन पर दी गई जानकारी के मुताबिक, सैक्स स्प्रे का इस्तेमाल 21 साल या उस से ज्यादा उम्र के मर्द कर सकते हैं. यह शरीर पर लगाने वाले डियोड्रैंट की तरह होता है. इस को अपने प्राइवेट एरिया यानी मर्दाना अंग के ऊपर स्प्रे करना होता है.

उदाहरण के लिए बोल्ड केयर का टौपिकल स्प्रे है. यह मर्दों के लिए बना स्प्रे है. इस को सैक्स करने के 10-15 मिनट पहले अपने अंग के ऊपरी हिस्से पर 10 सैंटीमीटर की दूरी से स्प्रे करना होता है. इसे एक से ले कर 4 बार ही स्प्रे करना होता है.

कंपनी का दावा है कि इस से अंग पूरी तरह से सख्त हो जाता है. तकरीबन 100 ग्राम स्प्रे की कीमत 300 रुपए से ले कर 500 रुपए के बीच होती है.

अंग के सख्त हो जाने के बाद एक टिशु से अंग को साफ करना होता है. ऐसे ही अपने हाथ धो लेने होते हैं. इस स्प्रे से सैक्स टाइमिंग बढ़ जाती है.

बाजार में मिलने वाले सैक्स स्प्रे

कई लोग इस बात की चिंता में रहते हैं कि वे इसे ले लें, पर उन्हें पता नहीं होता कि इस तरह के स्प्रे कौन से ब्रांड के मुहैया हैं. ऐसे में कई कंपनियां हैं, जो सैक्स स्प्रे बनाती हैं, जिन के कुछ नाम यहां बताते हैं, जैसे जोवान कंपनी का ‘सैक्स अपील’ स्प्रे है. यह 150 मिलीलिटर में आता है. इस की कीमत बाजार में 500 से 1,000 रुपए के बीच है.

बोल्ड केयर का ‘गोल्ड टौपिकल स्प्रे’ है. यह काफी बेहतर माना जाता है.  इस कंपनी का 20 ग्राम का स्प्रे तकरीबन 500 रुपए तक में आता है.

किंडले का ‘सैक्स स्प्रे’ है. यह नौनअल्कोहोलिक है. इसे खूब पसंद किया जाता है. इस 20 ग्राम के स्प्रे की कीमत 400 रुपए के आसपास है.

मैन मैटर्स का ‘एंडयोर स्प्रे’ है. इस की कीमत 400 रुपए है. यह 14 ग्राम की स्प्रे बोतल में आता है. डाक्टर मोरपेन ‘डिले एक्सीग्रा स्प्रे’ की कीमत 400 रुपए के आसपास है, यह 20 ग्राम का है. ऐसे ही एक ‘विगोर स्प्रे’ भी आता है.

कैसे काम करता है

अब जानना जरूरी है कि यह स्प्रे काम कैसे करता है. दरअसल, यह स्प्रे स्किन को हलके से सुन्न करता है, जिस से सैक्स टाइमिंग बढ़ती है और क्लाइमैक्स को कंट्रोल करने में मदद मिलती है.

यह लिडोकेन और आइसोप्रोपिल अलकोहल से बना होता है. यह स्प्रे 10 मिनट के भीतर अपना असर दिखाना शुरू करता है. इतना ही नहीं, यह नौनट्रांसफरेबल फार्मूले पर काम करता है यानी पार्टनर को इस का अहसास नहीं होता है.

प्रीमैच्योर इजैकुलेशन जैसी समस्या में यह स्प्रे गेम चेंजर साबित हो सकता है. यह स्किन पर एनेस्थैटिक के रूप में काम करता है, जो संवेदनशीलता को तो कम करता है, लेकिन मजे को कई गुना बढ़ा देता है. इस से मर्द के पस्त होने में देरी होती है.

ऐसे हालात में न करें इस्तेमाल

क्लाइमैक्स स्प्रे का इस्तेमाल करने से साइड इफैक्ट हो सकते हैं, लेकिन ये साइड इफैक्ट आमतौर पर महसूस नहीं होते. ऐसे में ध्यान रहे, जब भी त्वचा पर चकत्ते आएं, खुजली हो, इस्तेमाल वाली जगह पर जलन महसूस हो या अनिद्रा जैसे लक्षण दिखें, तो इसे इस्तेमाल करना रोक दें. बेहतर होगा कि तुरंत डाक्टर से सलाह लें, जिस से कि आप को कोई गंभीर समस्या न हो.

ऐसे में कुछ तरह की सावधानियां इस तरह के स्प्रे इस्तेमाल करते हुए बरतें, जैसे :

* यह स्प्रे मर्दों के इस्तेमाल के लिए होता है.

* अगर आप ग्लूकोमा की बीमारी से पीडि़त हैं या आप हाइपर सैंसेटिव हैं, तो इस स्प्रे का इस्तेमाल न करें.

* यह स्प्रे अंग पर लगाने के लिए है और केवल बाहरी इस्तेमाल के लिए होता है.

* इस स्प्रे को इस्तेमाल करते समय आंखों को दूर रखें. सांसों से भी दूर रखना चाहिए.

* स्प्रे को 10 बार से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करना चाहिए और सैक्स करने के बाद अंग को अच्छे से साफ करना चाहिए.

* अगर आप को इस में मौजूद सामग्री से एलर्जी है, तो इस का इस्तेमाल न करें.

* अगर आप पहले से ही कोई विटामिन ले रहे हैं, तो इस स्प्रे का इस्तेमाल करने से पहले डाक्टर की सलाह जरूर लें.

* इस स्प्रे को अलकोहल के साथ इस्तेमाल में न लें.

 

सैक्स की गोलियां : कितनी कारगर कितना नुकसान

32  साल के निर्मल के सामने यह दिक्कत थी कि जब भी वह अपनी पत्नी के पास हमबिस्तरी के लिए जाता था, जल्दी ही पस्त हो जाता था. यह बात उस ने अपने दोस्त संदीप को बताई, तो वह बोला, ‘‘दिक्कत की कोई बात नहीं. तू किसी भी मैडिकल स्टोर पर जा कर सैक्स की गोली मांग लेना. एक घंटे पहले खा लेना, फिर देखना कि कितना असर होता है. रातभर भी थकेगा नहीं.’’

संदीप की बात सुन कर निर्मल ने वही किया. पर इस के बाद उसे अलग तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा. गोली खाने के बाद उस के अंग में तनाव तो आ गया, पर उस की सांसें तेज चलने लगीं, मन घबराने लगा, जिस से वह हमबिस्तरी कर ही नहीं पा रहा था.

जब थोड़ी देर तक यही माहौल बना रहा, तो संदीप पास वाले डाक्टर के पास गया और पूरी बात बताई.

डाक्टर ने जांच की और बताया, ‘‘तुम्हें ब्लड प्रैशर की बीमारी है. दवा खाने से ब्लड प्रैशर बढ़ गया है. जब ब्लड प्रैशर नौर्मल होगा, तभी यह परेशानी दूर होगी.’’

बिना सलाह न लें सैक्स की दवाएं

सैक्स के दौरान अंग जब सही तरह से उत्तेजित नहीं होता, तो सैक्स करने में मजा नहीं आता. कई बार अंग औरत में प्रवेश ही नहीं कर पाता. इस की वजह से शीघ्रपतन भी हो जाता है.

यह समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है. सब से बड़ी दिक्कत यह होती है कि इस मुद्दे पर खुल कर बात नहीं होती है. लोग चोरीछिपे दवाओं का इस्तेमाल करते हैं, डाक्टर की सलाह नहीं लेते हैं. आधीअधूरी जानकारी हासिल कर के सैक्स की गोलियों का सेवन करते हैं.

सैक्स के लिए सब से मशहूर और कारगर दवा का नाम ‘वियाग्रा’ है, पर दूसरी दवाओं की तरह इस के बेवजह इस्तेमाल के खतरनाक नतीजे हो सकते हैं. लिहाजा, बिना सोचेसमझे सैक्स की गोलियों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. खासकर नौजवान अपनी मर्दानगी बढ़ाने, लंबे समय तक मजा लेने और अपने पार्टनर के सामने शर्मिंदा न हों, इस डर से ‘वियाग्रा’ जैसी दवा का सेवन करते हैं, जो जोखिम भरा कदम भी हो सकता है.

अब ‘वियाग्रा’ जैसी कई गोलियां बाजार में बिक रही हैं. इन दवाओं को बेचने वाले ही इस के सब से बड़े प्रचारक होते हैं, जबकि इन गोलियों का बिना जानेसमझे इस्तेमाल करना बड़ा ही खतरनाक होता है.

बढ़ सकती है समस्या

सैक्स की गोलियों का इस्तेमाल अमूमन उन लोगों को करना चाहिए, जिन्हें नामर्दी की समस्या हो. अगर किसी आदमी को थोड़ी सी मेहनत से छाती में दर्द होता हो और उस की सांस लेने की गति तेज हो जाती हो, तो उसे बिना डाक्टर की सलाह के सैक्स की गालियों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि कभीकभी इस के खतरनाक साइड इफैक्ट हो जाते हैं, जो जिंदगीभर के लिए तकलीफ की वजह बन जाते हैं.

तमाम लोग इन सैक्स की गोलियों के आदी होते हैं, जिस से वे कई तरह की बीमारियों से घिर जाते हैं. इस के साइड इफैक्ट बेहद ही खतरनाक हो जाते हैं. आंखों पर इस का बुरा असर पड़ सकता है, जिस से इनसान हमेशा के लिए अंधा भी हो सकता है.

कब न लें सैक्स की गोलियां

सैक्स की गोलियों के सेवन से कई बार अंग में लंबे समय तक उत्तेजना बनी रहती है. ऐसे में अंग की नसों पर खराब असर पड़ता है. इस के साथ ही सिरदर्द, चक्कर आना, आंखों पर प्रभाव, गरमी लगना, नाक का बंद होना और जी मिचलाना जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं.

इस के साथ ही साथ सीने में दर्द, सांस की समस्या, घुटन, पलक और चेहरे में सूजन और हार्ट अटैक तक आ सकता है.

एचआईवी के मरीज अगर रिटोनविर नाम की दवा ले रहे हैं, तो वे सैक्स की गोलियों का इस्तेमाल करने से बचें. अगर आप को हार्ट अटैक या फिर स्ट्रोक हो चुका है, तो सैक्स की गोलियो का मनमाना इस्तेमाल बेहद खतरनाक हो सकता है.

जो लोग ब्लड प्रैशर की दवा ले रहे हैं या जिन्हें डाइबिटीज है, तो उन्हें भी ऐसी दवाओं का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. किडनी की परेशानी है, तो डाक्टर की सलाह के बिना सैक्स की दवाएं कदापि न लें.

सैक्स की गोलियों में नाइट्रिक औक्साइड का इस्तेमाल किया जाता है. यह शरीर की नसों पर खतरनाक असर डालता है. अंग में तनाव के लिए गोली शरीर में खून का संचार बढ़ा देती है, जो कई बार खतरा पैदा कर देता है.

सैक्स की गोलियां खाली पेट लेते हैं, तो वे जल्दी असर करती हैं. खाना खाने के बाद असर कम होता है. ऐसे में ज्यादातर लोग खाली पेट उन्हें लेते हैं, जिस से दवा शरीर पर बुरा असर डालती है. सैक्स की गोलियां सैक्स के एक घंटे पहले लेनी चाहिए. कई बार इस्तेमाल के बाद भी अंग में तनाव और दर्द 4 घंटे से ज्यादा बना रहता है.

बाजार में कई तरह की नकली दवाएं भी बेची जाती हैं. उन से भी नुकसान होता है. ऐसे में सैक्स की गोलियों का इस्तेमाल डाक्टर की सलाह पर बहुत सावधानी से करें.

नसबंदी से भरम

साल 2017 में एक हिंदी फिल्म आई थी ‘पोस्टर बौयज’. यह फिल्म ज्यादा तो नहीं चली थी, पर इस फिल्म में उठाया गया मुद्दा बड़ा ही दिलचस्प था.

इस फिल्म में 3 नौजवान सनी देओल, बौबी देओल और श्रेयस तलपड़े तब मुश्किल हालात में फंस जाते हैं, जब उन की तसवीरें मर्दों की नसबंदी के लिए दिए गए एक सरकारी इश्तिहार में छप जाती हैं, जबकि उन की नसबंदी हुई ही नहीं होती है.

जैसेजैसे कहानी आगे बढ़ती है, तो अपने दोस्तों और रिश्तेदारों द्वारा बेइज्जत होने के बाद वे तीनों दोस्त व्यवस्था के खिलाफ लड़ते हैं. हालांकि यह फिल्म कौमेडी से भरपूर थी, पर इस में दिखाया गया था कि नसबंदी को ले कर समाज में किस तरह का डर और भरम फैला हुआ है. इतना ज्यादा कि इसे मर्दानगी की कमी से जोड़ दिया जाता है, तभी तो आज भी भारत में मर्दों के अनुपात में औरतें ज्यादा नसबंदी कराती हैं.

मध्य प्रदेश में नसबंदी के आंकड़ों से यह बात समझते हैं. स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए गए स्क्रीनिंग प्रोग्राम और आंकड़ों में खुलासा हुआ कि साल 2017 में सिर्फ 200 मर्दों ने नसबंदी कराई थी, जबकि 18,000 औरतों की नसबंदी की गई थी.

इस का मतलब साफ है कि जब भी ‘छोटा परिवार सुखी परिवार’ की बात पर अमल करना होता है, तब पति अपनी पत्नी को आगे कर देता है. उसे शुक्रवाहिका नामक अपनी 2 ट्यूब कटवाने में आफत आती है, जबकि ऐसा करना एक आसान और महफूज तरीके से मुमकिन है. इस के लिए अस्पताल में भरती होने की जरूरत भी नहीं पड़ती है.

मध्य प्रदेश से सटे छत्तीसगढ़ में मर्द को नसबंदी कराने के एवज में 3,000 रुपए दिए जाते हैं, जो उस के बैंक खाते में जमा होते हैं. नसबंदी के लिए

4 पात्रताएं होनी चाहिए. पहली, मर्द शादीशुदा होना चाहिए. दूसरी, उस की उम्र 60 साल या उस से कम हो. तीसरी, पतिपत्नी के पास कम से कम एक बच्चा हो, जिस की उम्र एक साल से ज्यादा हो. चौथी, पति या पत्नी में से किसी एक की ही नसबंदी होती है.

इतना ही नहीं, अगर किसी की नसबंदी नाकाम हो जाती है, तो मुआवजे के तौर पर 60 हजार रुपए की धनराशि दी जाती है. नसबंदी के बाद 7 दिनों के अंदर मौत हो जाने पर 4 लाख रुपए की राशि दी जाती है. नसबंदी के 8 से 30 दिन के अंदर मौत हो जाने पर एक लाख रुपए की राशि दी जाती है. नसबंदी के बाद

60 दिनों के अंदर बड़ी दिक्कत पैदा होने पर इलाज के लिए 50,000 रुपए तक की राशि दी जाती है.

भरम न पालें

मर्द नसबंदी, जिसे वैसेक्टोमी भी कहते हैं, में इजैकुलेशन के दौरान स्पर्म रिलीज नहीं होते हैं. इस में मर्दों के शरीर में मौजूद अंडकोष से स्पर्म को ले कर यूरेथ्रा तक ले जानी वाली नली को या तो सील कर दिया जाता है या फिर काट दिया जाता है.

मर्दों में नसबंदी से जुड़ा सब से बड़ा भरम यह होता है कि इस से कमजोरी आती है और बीमार भी हो सकते हैं. पर यह सच नहीं है. मर्द पहले जैसा ही दिखता है और उस में किसी तरह की मर्दाना कमजोरी नहीं आती है. वह पहले की तरह सैक्स का भरपूर मजा ले सकता है. वह मेहनत के दूसरे काम भी बिना किसी थकावट के पूरे कर सकता है.

अमूमन ऐसा मान लिया जाता है कि नसबंदी करना जोखिम से भरा और तकलीफदेह होता है, पर हकीकत में लोकल एनेस्थीसिया दे कर मर्दों की नसबंदी का आपरेशन किया जाता है और इस में सिर्फ कुछ मिनट का समय लगता है. यह बेहद कम रिस्क वाली सर्जरी है और इस में ज्यादातर मरीजों को थोड़ीबहुत सूजन या अंडकोष में बेहद हलका दर्द महसूस होता है.

1-3 हफ्ते के अंदर सूजन और दर्द की यह समस्या अपनेआप ठीक हो जाती है. अगले 10-15 दिनों तक मरीज को भारी चीजें उठाने या ज्यादा मेहनत वाले काम न करने की सलाह दी जाती है.

नसबंदी करवाने वाले के मन में यह डर होता है कि इस से प्रोस्टैट कैंसर का खतरा बढ़ जाता है, लेकिन एक स्टडी में बताया गया है कि मर्द नसबंदी और प्रोस्टैट कैंसर होने के बीच संबंध बेहद कमजोर है. साथ ही, नसबंदी को टैस्टिकुलर कैंसर का जोखिम कारक भी नहीं माना जाता है.

इन बातों का रखें खयाल

* मर्दों में नसबंदी करवाना एक परमानैंट फैसला माना जाता है, क्योंकि इसे पलटना 100 फीसदी पक्का नहीं है. जब आगे बच्चे न पैदा करने हों, तभी नसबंदी कराएं.

* नसबंदी करवाने के कुछ दिन बाद तक गर्भ निरोध के दूसरे तरीके इस्तेमाल करने पड़ सकते हैं. टैस्ट द्वारा पुख्ता होने पर कि आप के वीर्य में शुक्राणु नहीं हैं, तब वे तरीके इस्तेमाल करने बंद किए जा सकते हैं.

* नसबंदी के बाद अंडकोष में खून इकट्ठा होना, शुक्राणु इकट्ठा होना, संक्रमण और अंडकोष में दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. इस पर डाक्टर की सलाह जरूर लें.

* मर्दों में नसबंदी करवाने के बाद भी सैक्स से फैलने वाली बीमारियों से बचाव नहीं होता है, इसलिए आप को कंडोम का इस्तेमाल करना पड़ता है.

याद रखें कि बढ़ती आबादी पर काबू पाने के लिए नसबंदी एक जरूरी और कारगर उपाय है, पर इसे करवाने से पहले और बाद में डाक्टर की कही बातों पर अमल जरूर करें.

जब बेड पर अग्रैसिव हो पति

जब से देश में फिल्मों के साथसाथ वैब सीरीज बनने का सिलसिला शुरू हुआ है, तब से उन में गालीगलौज, गोलीबारी और गरमागरम सीन दिखाने का मानो लाइसैंस मिल गया है. ऐसी ही एक वैब सीरीज आई थी ‘मिर्जापुर सीजन 1’, जिस में मुन्ना त्रिपाठी नाम का किरदार अपने घर की नौकरानी को भी नहीं छोड़ता है.

नशे में वह बिस्तर पर दरिंदा बन जाता है और नौकरानी लड़की घर की भाभी के सामने हाथ जोड़ कर कहती है कि वह मुन्ना का बिस्तर गरम नहीं करेगी, क्योंकि वह उसे पूरी तरह निचोड़ देता है और जिस्म का बुरा हाल कर देता है.

किसी लड़की को कोई मर्द पूरी तरह से संतुष्ट कर दे, यह सब सुनने में बहुत अच्छा लगता है और पहली बार में यही जताता है कि जब कोई लड़की या औरत बिस्तर पर संतुष्ट हो जाती है, तो अपने पार्टनर का साथ पूरी जिंदगी निभाती है.

पर, जब यही मर्द पार्टनर शैतान बन कर उस के जिस्म पर हावी हो जाता है, उसे नोंच डालता है, तो वह ‘मिर्जापुर’ वाली नौकरानी लड़की की तरह हाथ जोड़ जाती है.

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यह तो फिल्मी सीन है या समस्या है, पर अगर असली जिंदगी में कोई औरत या लड़की किसी के सामने ऐसी ही गुहार लगाए तो क्या होगा? दिल्ली प्रैस की लोकप्रिय पत्रिका ‘सरस सलिल’ के एक कौलम ‘सच्च्ची सलाह’ में बहुत सी पाठिकाएं ऐसे ही सवाल करती हैं. जैसे एक औरत का सवाल आया था कि ‘मैं 36 साल की शादीशुदा औरत हूं. मेरे 2 बच्चे हैं. मेरे पति सैक्स के दौरान काफी जोश में आ जाते हैं. वे मेरे शरीर को खेल का मैदान बना देते हैं और हवस के जोश में मेरे बदन पर यहांवहां काटते हैं और नाखून से नोंचते हैं.

‘इस से मु झे काफी दर्द होता है. कभीकभी तो मेरी नाभि भी हिल जाती है. जब भी मैं उन से अपने दिल का हाल बताती हूं, तो उन का एक ही जवाब होता है कि हमबिस्तरी के दौरान वे खुद पर काबू नहीं रख पाते हैं. मैं क्या करूं?’

ऐसे सवाल का अमूमन जवाब दिया जाता है कि ‘बहुत से जोड़े इस तरह की अग्रैसिव हमबिस्तरी का मजा लेते हैं, पर इस में उन दोनों की रजामंदी होना जरूरी है, पर चूंकि यह आप की इच्छा के मुताबिक नहीं हो रहा है और आप के लिए मजे से ज्यादा सजा बन गया है, तो पति को प्यार से सम झाएं. अगर वह नहीं मानता है, और आप को ज्यादा सताता है तो किसी माहिर काउंसलर से सलाह लें.’

ऐसा क्यों होता है कि दिनभर शांत सा दिखने वाला पति बिस्तर पर इतना ज्यादा उतावला हो जाता है कि पत्नी ‘हायहाय’ करती रह जाती है? यह ‘हायहाय’ तब और ज्यादा भयावह हो जाती है, जब कोई पत्नी रात में अपने ही बैडरूम में घुसने से पहले कतराती है. उसे पति द्वारा खरीदा हुआ एक ‘सैक्स गुलाम’ सम झ लिया जाता है. सैक्स के नाम पर वह उसे थप्पड़ मारता है, दांतों से काटता है, छाती पर जख्म दे देता है और नाजुक अंग को भी नहीं छोड़ता है.

सैक्स में पति का अग्रैसिव होना किसी हद तक दुखदायी नहीं होता है, क्योंकि एक रिसर्च के मुताबिक, 70 फीसदी लोग इस हद तक रफ सैक्स या ‘बिस्तर पर बदमाशी’ को ऐंजौय करते हैं कि वे अपने पार्टनर खासकर महिला पार्टनर को बांधने से ले कर कई ऐसी चीजों का इस्तेमाल करते हैं, जिस से दोनों पार्टनर को भरपूर मजा मिलता है.

लेकिन, जब इस में महिला पार्टनर की रजामंदी न हो तो यह सैक्स नहीं, बल्कि सामने वाले को चोट पहुंचाना माना जाता है. लिहाजा, आप को इस बात का ध्यान रखना होगा कि आप जबरदस्ती कुछ न करें. जो चीजें करना आप के पार्टनर को पसंद न हों, तो उस पर किसी तरह का दबाव न बनाएं. इस के लिए पार्टनर के साथ बात करना बेहद जरूरी है.

अल्फा वन एंड्रोलौजी के डायरैक्टर और फैलो औफ यूरोपियन कौंसिल औफ सैक्सुअल मैडिसिन के डाक्टर अनूप धीर का मानना है, ‘शादी के बाद सैक्स को ले कर मची कलह तब ज्यादा जोर पकड़ती है, जब कोई पति अपनी पत्नी के सामने बिस्तर पर ऐसी डिमांड रखता है, जो प्यार करना तो बिलकुल नहीं होती है. पत्नी ऐसी डिमांड को सिरे से खारिज कर देती है.

‘सही कहें तो पति की ऐसी मांग बिलकुल नाजायज होती है, जबकि उन के दिमाग में यह घुस चुका होता है कि सैक्स करने का यही तरीका उन्हें संतुष्ट कर सकता है या मजा दे सकता है और वे बिस्तर पर आक्रामक हो जाते हैं.

‘जब पत्नी अपने पति की ऐसी बेहूदा मांग को पूरा करने से मना कर देती है, तो वे किसी भी जायज और नाजायज तरीके से अपनी बात मनवाने की कोशिश करते हैं, जिस में जिस्मानी चोट पहुंचाने के साथसाथ जोरजबरदस्ती करना भी शामिल रहता है.

‘इस से शादी पर बहुत बुरा असर पड़ता है. कभीकभी तो बात तलाक लेने तक पहुंच जाती है. लिहाजा, पति की ऐसी दरिंदगी पर पत्नी को किसी काउंसलर का सहारा लेना चाहिए और अगर बात न बने तो फिर पुलिस या महिला आयोग की शरण में जाना चाहिए.’

बहुत से पति अपनी पत्नी को बैडरूम में ‘स्वीटहार्ट’ कह कर पुकारते हैं. जब वही ‘स्वीटहार्ट’ बिस्तर पर पति से संबंध बनाते हुए ‘स्वीट सैक्स’ चाहती हैं, तो पति को उन की भावनाओं का खयाल रखना चाहिए और अपने प्यार के पलों को हवस के जोश में रौंदने से बचना चाहिए.

गीले सैक्सी सपनों का जोश है स्वप्नदोष

अपनी फेवरेट ऐक्ट्रैस को पहलू में देख कर उस लड़के को यकीन ही नहीं हुआ. दूरदूर तक कोई नहीं था. तनहाई में वे दोनों एकदूसरे से लिपटे हुए थे.

मौका देख कर उस लड़के ने ऐक्ट्रैस के कपड़े उतारने शुरू कर दिए, जिस पर उस ने कोई एतराज नहीं जताया, उलटे उस का साथ देने लगी. जल्द ही वह लड़का ऐक्ट्रैस पर छाने लगा और उस के नाजुक अंगों से खेलने लगा.

लेकिन एकाएक ही वह ऐक्ट्रैस उस लड़के को पीछे धकेलने लगी और वह लड़का तेजी से उस पर हावी होने की कोशिश करने लगा, जिस से उस की सांस धौंकनी की तरह चलने लगी. आज हाथ आया सुनेहरा मौका वह खोना नहीं चाहता था, इसलिए पूरी ताकत से कोशिश करने लगा, लेकिन अंजाम तक पहुंच पाता, इस के पहले ही…

उस लड़के की नींद टूट गई. हकीकत समझ आई तो न वह ऐक्ट्रैस थी, न उस का सैक्सी संगमरमरी जिस्म था और न ही वह आधीअधूरी हमबिस्तरी थी. था तो चिपचिपा वीर्य, जिस से उस का अंडरवियर गीला हो गया था.

खुद को काबू करने की कोशिश करते हुए वह लड़का एहतियात से आसपास का जायजा लेने लगा. जब यह इतमीनान हो गया कि सभी सो रहे हैं, तो वह आहिस्ता से उठ कर बाथरूम में गया, अंडरवियर उतार कर पोंछा और फिर पहन लिया. बिस्तर तक वापस आते हुए वह खुद पर और सपने पर झल्ला रहा था कि यह सब हमेशा की तरह आधाअधूरा क्यों रह गया?

यह कोई नई बात नहीं थी. उस लड़के के साथ अकसर ऐसा पिछले कुछ दिनों से हो रहा था कि नींद में कोई ऐक्ट्रैस, लड़की, पड़ोसन भाभी या कोई अनजान औरत सपने में आती थी और सैक्स करती थी, लेकिन बीच में ही सपना टूट जाता था और अंडरवियर गीला हो जाता था.

इस से उस लड़के को पूरा मजा नहीं आता था. जल्द ही उसे पता चल गया था कि यह स्वप्नदोष यानी नाइट फाल है, जिस पर उस का कोई जोर नहीं चलता.

जिन्हें नहीं होता

ऐसा उस एक लड़के के साथ नहीं, बल्कि जवानी में दाखिल होते तकरीबन सभी लड़कों के साथ होता है. यह और बात है कि उन के सैक्सी सपने अलगअलग होते हैं. कुछ लोगों का वीर्य के साथ थोड़ा पेशाब भी निकल जाता है और कुछ लड़कों की सपना देखने के बाद तुरंत नींद नहीं खुलती. उन्हें सुबह पता चलता है कि बीती रात उन का स्वप्नदोष हुआ था. कुछ को तो यह दिन में भी हो जाता है.

लेकिन जैसा भी हो, स्वप्नदोष अफसोस या टैंशन की नहीं, बल्कि निहायत ही कुदरती बात है, जिस के होने पर नहीं, बल्कि न होने पर चिंता करनी चाहिए.

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के रिटायर्ड सर्जन डाक्टर केके श्रीवास्तव बताते हैं कि उन्होंने अपनी 50 साल की डाक्टरी प्रैक्टिस में हजारों ऐसे नौजवानों का इलाज किया है, जो स्वप्नदोष से हैरानपरेशान थे.

क्या इलाज किया? इस सवाल पर डाक्टर केके श्रीवास्तव ने बताया कि इलाज के नाम पर सिर्फ मशवरा दिया कि यह कोई बीमारी ही नहीं है. इस में किसी दवा की जरूरत नहीं, बल्कि थोड़ा एहतियात से रहने की जरूरत है. यह तो मर्दानगी का सुबूत है कि आप का अंग उत्तेजित होता है और आप के शरीर में वीर्य बनता है. रही बात सैक्सी सपनों की तो वे तो इस उम्र में आना कुदरती बात है. हालांकि, कुछ मामलों में बड़ी उम्र वालों को भी स्वप्नदोष होता है.

क्या और क्यों

यह तो बड़ी आसानी से समझ आता है कि स्वप्नदोष क्या है और यह कैसे होता है. लेकिन यह क्यों होता है? इस सवाल का साफ जवाब किसी के पास नहीं. हकीकत के नजदीक जो जवाब हैं, उन का सार यही है कि जवानी में सैक्स की ख्वाहिश भी आम और कुदरती बात है, लेकिन जब सैक्स संबंध नहीं बनते हैं, तो वीर्य अपने बाहर निकलने का रास्ता खुद ही ढूंढ़ लेता है.

इसे समझने के लिए पानी से भरे गिलास की मिसाल भी ली जा सकती है कि जब गिलास लबालब भर जाता है, तो और डालने पर पानी उस में से छलकने लगता है.

इसे डाक्टर हार्मोनल बदलाव कहते हैं, जिस में अंडकोष में शुक्राणु बनने लगते हैं यानी वीर्य बनना शुरू हो जाता है, जो शरीर में लगातार बनता रहता है और बाहर न निकले तो छलकने लगता है.

आमतौर पर स्वप्नदोष कुंआरे लड़कों में ज्यादा होता है, क्योंकि वे सैक्स के बारे में अधिक सोचते रहते हैं. खासतौर से सोते समय जब वे पोर्न फिल्म देखते हैं, तो स्वप्नदोष होने के चांस बढ़ जाते हैं.

लेकिन कई शादीशुदा मर्दों को भी कभीकभी इस से दोचार होना पड़ता है. बीवी जब मायके गई होती है या किसी दूसरी वजह से लंबे समय तक सैक्स संबंध नहीं बन पाते, तो उन्हें भी स्वप्नदोष हो सकता है.

यह कोई बीमारी नहीं

भोपाल के दिमागी बीमारियों के माहिर सीनियर डाक्टर विनय मिश्रा बताते हैं कि स्वप्नदोष कोई बीमारी नहीं है, इसलिए किसी भी नौजवान को इसे ले कर टैंशन नहीं पालनी चाहिए, क्योंकि इस से न तो किसी किस्म की कमजोरी आती है और न ही नामर्दी आती है. अंग के साइज से भी इसका कोई लेनादेना नहीं होता है और नही स्पर्म काउंट पर इस का कोई असर पड़ता है.

अब अगर स्वप्नदोष कोई बीमारी ही नहीं है और इस से कोई नुकसान नहीं होता है, तो इसे ले कर इतनी गलतफहमियां क्यों हैं कि नौजवानों को इस से दहशत होने लगती है और वे तरहतरह की चिंताओं से घिर जाते हैं?

इस सवाल का सीधा सा जवाब यह है कि नीमहकीमों ने दूसरी सैक्स समस्याओं की तरह इस का भी डर बना रखा है, जिस से वे देशी दवाओं, झाड़फूंक और तंत्रमंत्र के जरीए पैसा कमाया करते हैं.

वे लोग इसे धात रोग के नाम से मशहूर कर चुके हैं. अगर इन लोगों की बातों पर यकीन किया जाए तो धात रोग एक खतरनाक बीमारी है, जिस से नामर्दी, कमजोरी और तरहतरह की दूसरी बीमारियां शरीर को घेर लेती हैं.

पहले डराओ और फिर डर से पैसा कमाओ के उसूल पर चलते ये लोग नौजवानों को बेवकूफ बना कर अपने स्वप्न उन के स्वप्नदोष से पूरे किया करते हैं.

ये लोग तंबुओं से ले कर इंटरनैट तक पर अपनी दुकान चलाते हैं, जिन के झांसे में आने से फायदा तो कोई होता नहीं, उलटे पैसों के अलावा सेहत से जुड़े नुकसान जरूर हो जाते हैं.

ये नीमहकीम इस बात का खूब प्रचार कर चुके हैं कि वीर्य इतने या उतने बूंद खून से बनता है, जिस का बरबाद होना बहुत बड़े नुकसान के बराबर है, जबकि विज्ञान यह साबित कर चुका है कि खून और वीर्य का दूरदूर तक कोई रिश्ता नहीं है.

 इन बातों का रखें ध्यान

स्वप्नदोष आम और कुदरती है, इसलिए इस से बचा नहीं जा सकता, लेकिन यह जरूरत से ज्यादा होने लगे तो चिंता होना लाजिमी है.

स्वप्नदोष की तरह हस्तमैथुन भी कोई बुरी या हर्ज की बात नहीं है, लेकिन इसे भी बेलगाम हो कर किया जाए तो नुकसान और तनाव हो सकता है. इसी तरह अगर महीने में 6-7 बार तक स्वप्नदोष हो तो यह चिंता की बात नहीं है, लेकिन बहुत ज्यादा होने लगे तो इन बातों को अमल में लाना चाहिए :

* सोते समय सैक्सी बातें सोचने से बचना चाहिए.

* सोते समय ब्लू फिल्म भी नहीं देखनी चाहिए.

* खानपान साफसुथरा और सादा होना चाहिए, खासतौर से रात का खाना ज्यादा मसालेदार नहीं होना चाहिए.

* सोने से पहले पेशाब करना चाहिए.

* रोजाना कसरत करनी चाहिए.

* टाइट अंडरवियर पहन कर नहीं सोना चाहिए.

* हफ्ते में एक या 2 बार हस्तमैथुन कर लेना चाहिए, जिस से बन चुका वीर्य बाहर निकल जाए.

* अगर कब्ज रहती हो, तो उस का इलाज कराना चाहिए.

* स्वप्नदोष को ले कर किसी तरह का वहम या डर नहीं पालना चाहिए. ज्यादा समस्या हो तो माहिर डाक्टर से ही इलाज कराएं.

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