नाजायज संबंध : औनलाइन ज्यादा महफूज

ग्ली डेन एक डेटिंग एप है, जिस का इस्तेमाल देशभर के तकरीबन 20 लाख मर्दऔरतें कर रहे हैं. इस एप की पहुंच और पूछपरख बड़े शहरों से होते हुए अब छोटे शहरों और कसबों तक में होने लगी है. हालांकि अभी यह तादाद बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन बहुत जल्द हो जाएगी, क्योंकि कोई भी नई चीज, प्रोडक्ट, सर्विस या टैक्नोलौजी छोटी जगहों पर देर से पहुंचती है, लेकिन इस में नई या दिलचस्प बात क्या है?

इस सवाल का जवाब बेहद साफ है कि लोग जायज सैक्स के बाद नाजायज रिश्तों के लिए भी एप का सहारा लेने लगे हैं, जबकि आमतौर पर माना यह जाता है कि सैक्स संबंध, फिर वे जायज हों या नाजायज, जानपहचान वालों से ही बनते हैं.

ग्लीडेन एप के अलावा टिंडर, बंबल, ट्रूलीमैडली और लड़कियों द्वारा सब से ज्यादा इस्तेमाल किया जाने वाले डेटिंग एप बू के यूजर्स की कुल तादाद तो करोड़ों में है. इन एप के जरीए यूजर्स दोस्ती कर न केवल रोमांटिक और सैक्सी बातें करते हैं, बल्कि हमबिस्तरी करने के लिए भी पार्टनर ढूंढ़ते हैं.

ग्लीडेन ने हाल में ही जो आंकड़े जारी किए हैं, वे दिलचस्प भी हैं और चिंताजनक भी हैं. एक सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि देश की तकरीबन

77 फीसदी औरतें पति के अलावा भी गैरमर्दों से जिस्मानी ताल्लुक बनाती हैं और इस के लिए एप का सहारा लेती हैं.

मुमकिन है कि ये आंकड़े एक हद तक सच हों, क्योंकि औफलाइन भी अखबारों में ऐसी खबरों की भरमार रहती है, जिन में पत्नी ने प्रेमी के संग मिल कर पति की हत्या कर दी या पति ने पत्नी को बेरहमी से मार डाला और इस काम में माशूका ने उस का साथ दिया. ऐसी वारदात की बड़ी वजह नाजायज संबंधों से परदा उठ जाना या पार्टनर को सैक्स करते रंगेहाथ पकड़ लेना ज्यादा रहती है.

सवाल प्राइवेसी और सेफ्टी का डेटिंग एप इस लिहाज से बेहतर होते हैं कि इन में अपराधों की गुंजाइश कम रहती है, क्योंकि नाजायज संबंध ऐसे मर्द या औरत से बनना रहता है, जिस से कोई पहले से जानपहचान नहीं होती और दोनों का खास लेनादेना नहीं होता.

इस के अलावा ये रिश्ते हर समय नहीं बनते. सौदा मरजी का होता है, जिस में फारिग होते ही औरत व मर्द अपनेअपने रास्ते हो लेते हैं. बाद में या दोबारा सैक्स संबंध बनाना कोई मजबूरी और दबाव की बात नहीं होती, इसलिए पहचाने जाने और बदनामी का डर या खतरा नहीं होता.

औनलाइन हों या औफलाइन, नाजायज संबंध सदियों से बनते रहे हैं और ये कभी खत्म होंगे, इस की कोई गारंटी नहीं. इस सच को हजम करना आसान बात कभी नहीं रही, इसलिए आएदिन झगड़ेफसाद भी होते रहते हैं, जिन पर यह थ्योरी लागू होती है कि पकड़े गए तो बंटाधार, नहीं तो एक जुर्म का होना तय बात है.

कोई पति या पत्नी यह बरदाश्त नहीं कर पाते कि उस का जीवनसाथी बेवफाई करे, क्योंकि इस से उन की गैरत को धक्का लगता है और भरोसा भी टूटता है. साथ ही टूटता है घर और उजड़ती है जमीजमाई गृहस्थी, जिस से एक बड़ा नुकसान बच्चे अगर हों तो उन का होता है, क्योंकि मां या बाप में से कोई एक जेल और दूसरा हमेशा के लिए ऊपर जा चुका होता है.

ऐसा ही गाजियाबाद के फजलगढ़ गांव के बाशिंदे दिनेश कुमार के साथ हुआ था, जिस ने बीती 24 जनवरी को अपनी पत्नी अंजू की हत्या कर उस की लाश खेत में गाड़ दी थी और 30 जनवरी को पत्नी की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई थी.

लेकिन ठेले पर सब्जी बेच कर गुजारा करने वाला दिनेश कानून के हाथों से बच नहीं सका और 3 फरवरी को गिरफ्तार कर लिया गया. अब उस के दोनों बच्चे इधरउधर भटक रहे हैं. दिनेश को शक था कि अंजू के कहीं और नाजायज संबंध हैं.

मध्य प्रदेश के धार जिले के ढोलाना गांव में 13 जनवरी, 2023 को राधेश्याम पाटीदार की हत्या उस की ही पत्नी ने अपने प्रेमी मनसुख के साथ मिल कर कर दी थी.

राधेश्याम और मनसुख रिश्तेदार थे, जिस के संबंध राधेश्याम की बीवी से हो गए थे.

छोटी जगहों में ऐसे ताल्लुक ज्यादा छिपे नहीं रहते. लिहाजा, आसपास के तक में गांवों जल्दी ही यह बात फैल गई. राधेश्याम की भोंहें तिरछी होने लगीं, तो इन दोनों ने उसे रास्ते से हटाने के लिए जुर्म कर डाला.

नाजायज संबंधों की कुछ आम वजहें जगजाहिर हैं. मसलन, मियांबीवी में पटरी न बैठना, सैक्स में असंतुष्टि, पैसों की कमी, घर में कलह, जज्बाती लगाव न होना और मियांबीवी का एकदूसरे का ध्यान न रखना.

कई बार महज मौजमस्ती की

गरज से भी ऐसे संबंध बन जाते हैं, लेकिन वजह कोई भी हो, छोटी जगहों में ऐसा होना मुमकिन नहीं होता कि एकाध बार के बाद मुंह मोड़ा जा सके, क्योंकि मनमाफिक सैक्स की लत अकसर औरत और मर्द दोनों को लग जाती है.

चूंकि दोनों का अकसर ही आमनासामना होता रहता है, इसलिए दोनों की सैक्स की तलब फिर सिर उठाने लगती है और वे न चाहते हुए फिसल ही जाते हैं.

नाजायज संबंधों में अपराध और उस में भी हत्या की 90 फीसदी खबरें गांवदेहात या कसबों से ही आती हैं, क्योंकि वहां ये संबंध औफलाइन बनते हैं. खेत, जंगल या सुनसान इलाके इस

के लिए मुफीद होते हैं, लेकिन यह सिलसिला लंबा नहीं चल पाता, भले ही वहां सीसीटीवी न होते हों, लेकिन कोई न कोई, कभी न कभी देख ही लेता है और फिर दबी आवाज में इन की चर्चा चटकारे लेले कर होती है और एक दिन राज खुल ही जाता है.

उलट इस के बड़े शहरों में सहूलियत रहती है. औरत और मर्द हमबिस्तरी के लिए होटल या रिसोर्ट में ज्यादा जाते हैं, जहां बंद कमरे में अपनीअपनी प्यास बुझा कर दोनों अपनेअपने रास्ते हो लेते हैं. नजदीकी या दूर के रिश्ते का कोई फूफा, जीजा, मौसा या मामा वहां नहीं होता, जो हल्ला मचाए. लिहाजा, सारा प्रोग्राम बड़े सुकून और शांति से पूरा हो जाता है.

डेटिंग एप इसीलिए ज्यादा लोकप्रिय हो रहे हैं, क्योंकि ये मर्द और औरत दोनों के लिए हिफाजत की गारंटी होते हैं कि बाद में कोई फसाद खड़ा नहीं होगा. संबंध बनाने वालों को इस बात की भी बेफिक्री रहती है कि न तो इस से उन का घर टूटना और न पार्टनर को इस की हवा लगना. हां, खर्च जरूर इस में ज्यादा होता है, लेकिन वह तमाम दुश्वारियों से बचाता भी है, इसलिए कोई इस की परवाह नहीं करता. फिर भी बचें

पकड़े नहीं जाएंगे या अभी तक पकड़े नहीं गए, तो इस का यह मतलब नहीं है कि नाजायज संबंध कोई अच्छी बात है और इन्हें धड़ल्ले से बनाया जाए. यह बहुत बड़ा गुनाह न सही, पर गलती जरूर है. आज नहीं तो कल इस का असर शादीशुदा जिंदगी और गृहस्थी पर पड़ सकता है.

दूसरे, आजकल टैक्नोलौजी के चलते फोटो खींच लेना या वीडियो बना लेना भी आम बात हो गई है, इसलिए ब्लैकमेलिंग का खतरा बना ही रहता है. लोग कितने ही सावधान हो जाएं, सैक्स संबंध बनाते समय लापरवाह हो ही जाते हैं.

अगर पतिपत्नी को एकदूसरे से कोई शिकायत है, तो उन्हें बिना झिझक बताना चाहिए, जिस से वक्त रहते उस का हल निकल सके. मर्दों की नामर्दी और औरत का सैक्स में ठंडापन अब बहुत बड़ी समस्याएं या हौआ नहीं रह गई हैं.

पति और पत्नी एकदूसरे का सहयोग करें, तो इन का इलाज अब मुमकिन है, इसलिए किसी दूसरे से रिश्ता बनाने से पहले एक बार संजीदगी से इस बात पर गौर करना चाहिए कि क्या इस के अलावा अब और कोई रास्ता नहीं.

अगर एक बार कोई रास्ता नजर आ जाएगा, तो न खेतखलिहान में चोरीछिपे जाने की जरूरत रह जाएगी और न ही किसी डेटिंग एप, फेसबुक या ह्वाट्सएप पर चैटिंग की जरूरत रह जाएगी.

आखिर क्या है पेड और वेब सेक्स, जानें यहां

सोशल वेबसाइट सर्वे करने वाली एक आईटी कंपनी की हालिया रिपोर्ट चौंकाती है, जिस में पोर्न बेस्ड सर्वे के आधार पर ये आंकड़े दिए गए हैं कि देश में 22 से 34 आयुवर्ग के युवा पोर्नोग्राफी, पेड सेक्स, बैव सेक्स चैट के जरिए अपनी पौकेट ढीली कर रहे हैं. उन की कमाई का लगभग 20 से 30त्न हिस्सा पेड सेक्स के लिए जा रहा है.

माध्यम चाहे जो भी हो, सेक्स के लिए मोटी रकम अदा करनी पड़ रही है यानी सेक्स अब सस्ता व सुलभ नहीं, बल्कि महंगा और अनअफोर्डेबल है. पेड सेक्स की बढ़ती लोकप्रियता व चलन ने सेक्स को आम लोगों की पहुंच से दूर कर दिया है. अब यह पैसे वालों का शौक बन गया है. सेक्स की बढ़ती मांग और आपूर्र्ति के बीच गड़बड़ाए तालमेल ने सेक्स बाज़ार के रेट आसमान पर पहुंचा दिए हैं. इस का दूसरा बड़ा कारण है मोटी जेब वालों की सेक्स तक आसान पहुंच. जहां जैसी जरूरत हो, मोटी रकम दे कर सेक्स बाज़ार से सेक्स खरीद लिया, नो बारगेनिंग, नो पचड़ा. इस का नतीजा हाई रेट्स पेड सेक्स के रूप में सामने आया. सेक्स वर्कर्स ने भी मांग के आधार पर अपनी दरें ऊंची कर लीं.

क्या है पेड सेक्स

सेक्स के लिए जो रकम अदा की जाती है उसे पेड सेक्स कहा जाता है. इस के कई रूप हो सकते हैं. वर्चुअल सेक्स से ले कर लाइव फिजिकल सेक्स तक. औनलाइन सेक्स मसलन, पोर्न वीडियो, पोर्नोग्राफी, औनलाइन पेड फ्रैंडशिप, वीडियो सेक्स, वैब औरिएंटेड सेक्स. औफलाइन सेक्स मसलन, ब्रोथल पिकअप सेक्स, कौलगर्ल औन डिमांड आदि. सेक्स के इन तमाम माध्यमों में कहीं न कहीं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पैसे इनवैस्ट किए जाते हैं. सेक्स के तमाम माध्यमों में सीधे इनवैस्टमैंट को पेड सेक्स कहते हैं.

सेक्स की राह नहीं आसान

कुछ दशक पहले तक सेक्स तक आम लोगों की आसान पहुंच थी. छोटीमोटी रकम अदा कर के यौनसुख का आनंद उठाया जा सकता था, पर सेक्स के विभिन्न मौडल सामने आने के बाद उस की दरों में कई गुणा वृद्धि हुई है.

क्या है इन की कैटेगरी व प्रचलित दरें

– औनलाइन पेड सेक्स : प्रति मिनट डेटा चार्जेज.

– फोन फ्रैंडशिप : 2 से 3 हजार रुपए प्रतिमाह सदस्यता.

–       कौलगर्ल औन डिमांड : 2 से 10 हजार रुपए प्रति घंटा.

–       स्कौर्ट सर्विस (श्रेणी एबीसी ) शुरुआती दर.

–       ब्रोथल सेक्स : 500 से 1,500 रुपए तक नाइट/आवर.

–       हाउस सर्विस : पर शौट (हाउसवाइफ, कालेज/वर्किंग वूमन)  3 से 5 हजार रुपए पर शौट.

मार्केट में चल रही इन दरों को देख कर आसानी से यह कहा जा सकता है कि ऐक्स्ट्रा मैरिटल सेक्स की चाह रखने वालों को अब मनी कैपेबिलिटी भी ऊंची रखनी होगी. यौनतृप्ति की राह आसान नहीं है. सेक्स के बाजार ने एक बड़ा रूप ले लिया है, जहां जिस की जितनी हैसियत है उस हिसाब से यौन संतुष्टि पा सकता है. आम व सामान्य लोगों के लिए यौनलिप्सा के दरवाजे लगभग बंद होते प्रतीत हो रहे हैं.

इतने समय तक सेक्स करना चाहती हैं महिलाएं

हम सोचते थे कि महिलाएं लंबे समय तक सेक्शुअल गतिविधि चाहती हैं, पर हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि पुरुषों को लगता है कि महिलाएं लंबा सेक्स नहीं चाहतीं.

पीनिस के आकार से लेकर सेक्स के दौरान अपने प्रदर्शन तक-पुरुष होना आसान काम नहीं है. अमेरिका में टार्जन कंडोम द्वारा हाल ही में कराए गए एक सर्वे के नतीजों में सामने आया कि 41 प्रतिशत पुरुषों ने कहा कि वे चाहते हैं कि सेक्स लंबे समय तक चले, जबकि ऐसा चाहनेवाली महिलाओं की संख्या 34 फीसदी ही थी.

अक्सर महिलाएं थोड़े समय के सेक्शुअल इंटरकोर्स से ही खुश रहती हैं, वे इसे लंबा नहीं रखना चाहती हैं, जबकि अधिकतर पुरुष इस प्रक्रिया को लंबा ही रखना चाहते हैं.

म्यूजिशियन गैविन फर्नांडिस स्वीकारते हैं कि वे सेक्स के दौरान अपने प्रदर्शन को लेकर दबाव महसूस करते हैं. ‘‘हमें पता है कि महिलाओं को मल्टीपल ऑर्गैज़्म (कई बार चरम) आ सकते हैं. फिर इस तरह की मान्यताएं भी हैं कि महिलाएं ऑर्गैज़्म का झूठा दिखावा भी करती हैं. ये बातें पुरुषों की मानसिकता को प्रभावित करने के लिए काफ़ी हैं,’’

वे कहते हैं. ‘‘कई बार सेक्शुअल संबंध बनाने के बाद मैं समझ ही नहीं पाता कि मैं अपनी गर्लफ्रेंड को संतुष्ट कर भी पाया हूं या नहीं. मैं चाहता हूं कि उसे संतुष्ट करने के लिए मैं और लंबे समय तक उसका साथ दे सकूं.’’

आनंद को लंबा रखने की चाहत

गैविन जैसे कई और पुरुष हैं. वर्ष 2009 में मेन्स हेल्थ मैग्ज़ीन द्वारा कराए गए सर्वे में पाया गया कि सेक्स के दौरान पुरुष 5 से 10 मिनट तक संयम बनाए रख सकते हैं, पर 71 प्रतिशत पुरुष चाहते हैं कि काश वे इससे कहीं अधिक समय तक ऐसा कर पाते.

जरनल औफ सेक्स मेडिसिन द्वारा कराए गए एक अलग अध्ययन के मुताबिक, वह इंटरकोर्स जो 7 से 13 मिनट के भीतर समाप्त हो जाता है, बेहतरीन माना जाता है. ‘‘कई पुरुष इस बात को लेकर शर्मिंदगी महसूस करते हैं कि वे लंबे समय तक संयम नहीं बनाए रख पाते,’’ कहना है चेन्नई की काउंसलर सुजाता रामकृष्णन का. ‘‘और मैं उन पुरुषों की बात नहीं कर रही हूं, जिन्हें प्रीमैच्योर इजेकुलेशन की समस्या है. सामान्य पुरुष, जिनका सेक्शुअल जीवन अच्छा है, वे भी सेक्स की प्रक्रिया को और लंबा बनाना चाहते हैं. इसकी वजह ये है कि ये पुरुष पौर्न देखते हुए बड़े हुए हैं और सेक्स के बारे में अपनी पिछले पीढ़ी से कहीं ज्यादा बातें करते हैं. ये बातें अब मीडिया में हैं, फिलम्स में हैं, किताबों में भी हैं. आज की महिलाएं भी यह बताने में संकोच महसूस नहीं करतीं कि उन्हें सेक्स के दौरान क्या पसंद है और क्या नापसंद. इस वजह से पुरुषों पर काफी दबाव होता है.’’

फोरप्ले का समय भी तो जोड़िए!

सेक्स एक्सपर्ट डॉ महिंदर वत्स कहते हैं कि यदि कुछ बदलाव किए जाएं तो सेक्स प्रक्रिया को लंबा बनाया जा सकता है. ‘‘हालांकि यूं देखा जाए तो ये बात सिर्फ़ आपकी दिमा़गी सोच पर निर्भर करती है, लेकिन आप सेक्शुअल इंटरकोर्स को थोड़ा लंबा बना सकते हैं,’’ वे कहते हैं. ‘‘क्विकी (झटपट सेक्शुअल संबंध बनाना) अच्छे तो होते हैं, पर हमेशा नहीं. सेक्स को लंबा बनाने के लिए सही समय और अपने शरीर के संकेतों को समझना बहुत जरूरी है. यही कारण है कि फोरप्ले का महत्व उससे कहीं ज्यादा बढ़ जाता है, जितना कि हम सोचते हैं. यदि सेक्शुल प्रक्रिया को लंबा बनाना चाहते हैं तो फोरप्ले का समय भी लंबा होना चाहिए. और लंबे समय तक चलने वाले फोरप्ले से कभी किसी महिला को शिकायत नहीं होती, बल्कि वे इसका आनंद लेती हैं.’’

ऑर्गैज़्म पर ध्यान देने के बजाए सेक्स के दौरान एक-दूसरे के साथ का आनंद उठाना ज़्यादा महत्वपूर्ण है. आप अलग-अलग सेक्शुअल पोज़ीशन्स अपना सकते हैं. अंतिम, लेकिन महत्वपूर्ण बात ये है कि इस दौरान पार्टनर्स एक-दूसरे से बातचीत करते रहें. तो अगली बार यदि वे कुछ ऐसा करें, जिससे आपको सुखद अनुभूति हो तो उनकी तारीफ करना बिल्कुल न भूलें.

सेक्स किसी पर कोई एहसान नहीं

ऐसा माना जाता है कि फिजिकल रिलेशन से फिजिकली कनैक्शन होता है. सैक्स किसी भी रिलेशनशिप के लिए बहुत आवश्यक है क्योंकि इस से पार्टनर एकदूसरे के और ज्यादा करीब आते हैं. इसलिए इसे एक खूबसूरत संबंध कहा जाता है.

कुदरत का तोहफा

परिधि और अंकुश पिछले 1 साल से रिलेशनशिप में हैं. दोनों ही अच्छी कंपनी में जौब करते हैं. अपनी रिलेशन के बारे में वे बताते हैं कि जब से उन के बीच में फिजिकल रिलेशन बना है उन के रिश्ते और अच्छे हुए हैं. परिधि कहती है कि इस के लिए अंकुश ने उन से कोई जोरजबरदस्ती नहीं की. यह दोनों की सहमति से बनाया गया था.

इंसान के लिए सैक्स को सब से ज्यादा सुख देने वाली अनुभूति माना जाता है. महिला और पुरुष दोनों के लिए इस के एहसास और माने अलगअलग होते हैं. हालांकि दोनों ही इस से संतुष्ट होते हैं, लेकिन इसे ले कर उन की सोच अलग होती है. पुरुष इसे तनाव दूर करने का एक जरीया सम झते हैं तो वहीं महिलाओं के लिए यह प्यार और आनंद है.

45 वर्षीय मनोज बताते हैं कि घर की जिम्मेदारी निभातेनिभाते कब उन की शादी की उम्र निकल गई उन्हें पता ही नहीं चला. जब वे आर्थिक रूप से स्ट्रौंग है तो वे अपनी लाइफ जीना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि वे अपने ही औफिस की 28 वर्षीय सेजल (बदला हुआ नाम) के साथ पिछले 8 महीने से रिलेशन में हैं. वे कहते हैं, ‘‘मैं सेजल की हर जरूरत का पूरा खयाल रखता हूं और वह मेरी जरूरत का. हमारे बीच सैक्सुअल रिलेशन भी है और यह दोनों की सहमति से है. न मैं उस की जरूरतों का ध्यान रख कर उस पर एहसान कर रहा हूं और न ही वह मु झ पर. हम बस एकदूसरे का साथ चाहते हैं.’’

बढ़ता है प्रेम

रिलेशनशिप में सैक्स करने का मतलब सिर्फ यौन संतुष्टि पाना ही नहीं होता है बल्कि अपने पार्टनर के साथ एक मजबूत रिश्ता कायम करना व प्यार को बढ़ाना होता है. एक रिसर्च से पता चलता है कि रिलेशनशिप में सैक्स करने से कपल के बीच एक स्वस्थ रिश्ता कायम होता है. इस से रिश्ते के टूटने का खतरा कम हो जाता है.

रिलेशनशिप ऐक्सपर्ट विशाल नेगी कहते हैं कि सैक्स रिश्ते को एक कदम और आगे ले जाता है. रिश्ते में शारीरिक आकर्षण का बहुत महत्त्व है. शुरुआती संबंध बनाने की बात हो या फिर हो प्यार बनाए रखने की बात, सैक्स रिश्ते में एक अहम रोल निभाता है. सैक्स से खुद के बारे में अधिक सकारात्मक धारणा बनती है.

आनंद  का एहसास

योगा इंस्ट्रक्टर कपिल कहते हैं कि जब एक लड़का और लड़की आपसी सहमति से कपल के रूप में एक रिलेशनशिप में आते हैं तो वे अपने प्यार को जाहिर करने के अलगअलग तरीके अपनाते हैं. इन में से ही एक तरीका सैक्स भी है. वे कहते हैं कि इस से न केवल शारीरिक बल्कि भावनात्मक रूप से भी उन्हें आपस में जुड़ाव महसूस होता है.

अपनी राय देते हुए वे कहते हैं कि सैक्स में कोई किसी पर एहसान नहीं करता. यह दोनों के शरीर की न सिर्फ जरूरत है बल्कि यह प्यार को ऐक्सप्रैस करने का एक तरीका है. इस से शरीर हमेशा ऐक्टिव मोड में रहता है.

अहम रोल प्ले करता है

आईटी मैनेजर सारांश कहते हैं कि लाइफ में सैक्स एक अहम रोल प्ले करता है. अगर कोई इसे एहसान के तौर पर लेता है तो वह छोटी सोच का शिकार है. यह किसी पर कोई एहसान नहीं है. यह एक सामूहिक अनुभूति है जो 2 लोगों के बीच प्यार को बढ़ावा देती है.

कुछ लड़कियां ऐसी भी होती हैं जो यह सम झती हैं कि अगर उन का पार्टनर उन के सारे खर्चे उठाएगा तभी वे उन्हें सैक्स का सुख देंगी. ऐसी लड़कियों के बारे में मुक्ता कहती है कि ये लड़कियां अगर फिजिकल रिलेशन बना रही हैं तब भी इस में उन की सहमति है. वे यह रिश्ता अपनी सहमति से बना रही हैं. उन से कोई जोरजबरदस्ती नहीं कर रहा. चाहे वे यह रिश्ता अपनी जरूरत के लिए ही क्यों न बना रही हों.

कानपुर से दिल्ली आ कर पढ़ने वाली 20 वर्षीय जाह्नवी (बदला हुआ नाम) बताती है कि वह एक लड़के के साथ 1 साल से रिलेशनशिप में है. वह बताती है कि वह लड़का उन के सारे खर्चे उठाता है जैसे मोबाइल रिचार्ज, शौपिंग, ब्यूटीपार्लर, ट्रैवल. यहां तक की उस की कालेज की फीस भी और बदले में वह उस के साथ घूमती है, उसे भरपूर प्यार देती है. वह बताती है कि ऐसा कर के वह दोनों की जरूरतें पूरी कर रही है न कि एहसान.

जब प्यार में धोखा मिला

30 वर्षीय दीप्ति (बदला हुआ नाम) बताती है कि अपने ऐक्स से धोखा खाने के बाद वह डिप्रैशन में चली गई थी. इस से निकलने के लिए वह डेंटिग साइट ‘टिंडर’ के जरीए लोगों से मिलने लगी. एक दिन ऐसे ही उस की मुलाकात 29 वर्षीय संकल्प से हुई. चूंकि संकल्प अच्छी बौडी के साथसाथ एक अमीर परिवार से भी था, इसलिए दीप्ति उस से प्रभावित हुए बिना न रह पाई.

दोनों की सहमति के बाद उन्होंने शारीरिक संबंध बनाए. दीप्ति कहती हैं कि हम दोनों अडर्ल्ट हैं और यह हमारी सहमति से बनाया गया रिश्ता था. इसलिए इसे किसी भी तरह गलत नहीं कहा जा सकता है.

एक आंकडे के अनुसार, दुनियाभर में लोकप्रिय डेंटिग ऐप टिंडर के 2021 में 9.6 मिलियन ग्राहक थे. इस के 75 मिलियन मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं. टिंडर ने 2021 में 1.6 बिलियन कमाया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 17% अधिक था. टिंडर के 60% उपयोगकर्ता 35 वर्ष से कम आयु के हैं. इस के तीनचौथाई उपयोगकर्ता पुरुष हैं, लेकिन महिलाएं भी बड़ी संख्या में इस में शामिल हैं.

इसी तरह बंबल और ट्रूली मैडली डेटिंग ऐप्स भारत में सब से लोकप्रिय डेटिंग ऐप्स में से हैं. इन के अलावा फेसबुक ने भी डेटिंग के लिए अलग से सुविधा दी है. ही ही, हैपन, दिलमिल, मैच डौट कौम जैसे डेटिंग ऐप पर भी युवा बड़ी संख्या में रोमांस कर रहे हैं.

इन दिनों शुगर डैडी का एक कौंसपर्ट चलन में है. इस का प्रभाव पश्चिमी देशों में ज्यादा है. इस में एक अमीर बूढ़ा व्यक्ति उस के साथ डेट करने वाली महिला को महंगे गिफ्ट देता है. बदले में वह उस का अकेलापन दूर करती है. इस में सैक्स संबंध भी शामिल है.

मरजी से बनाते हैं संबंध

बैंगलुरु की रहने वाली 23 वर्षीय अदिति (बदला हुआ नाम) बताती है कि 3 साल कड़ी मेहनत करने के बाद भी उन की प्रमोशन नहीं हो रही थी तब उसे पता चला कि उस के बौस अपने साथ सैक्स करने वाली लड़कियों का जल्दी प्रमोशन कर देते हैं. कैरियर में जल्दी ग्रोथ पाने के लिए उस ने भी ऐसा ही किया. कैरियर में ग्रोथ पाने के लिए कई मौडल, फैशन डिजाइनर और मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े लड़केलड़कियां अपने बौस, मैनेजर, सीनियर्स के साथ सैक्स करने को तैयार हो जाते हैं. ऐसा उन से कोई जबरदस्ती नहीं करवाता वरन अपनी मरजी से करते हैं.

अदालतों में कई ऐसे केस दर्ज होते हैं जिन में लड़की की उम्र 18 साल से कम होने के कारण उस के बौयफ्रैंड को गिरफ्तार कर लिया जाता है, जबकि ऐसे रिश्ते में सैक्स दोनों की मरजी से होता है. कानूनन सहमति से सैक्स की उम्र 18 साल है. इस का मतलब हुआ कि अगर 18 साल की कम उम्र की लड़की के साथ भले ही उस की सहमति से संबंध बनाए गए हों, तो वह अपराध की श्रेणी में आएगा. अगर पाक्सो (प्रोटैक्शन औफ चिल्ड्रन फ्रौम सैक्सुअल औफैंस ऐक्ट) इस कानून के तहत 18 साल से कम उम्र के लोगों को ‘बच्चा’ माना गया है.

इसी कानून में सहमति से सैक्स की उम्र 18 साल है. अगर 18 साल से कम उम्र की कोई लड़की अपनी सहमति से संबंध बनाती है तो भी उस की सहमति माने नहीं रखती. ऐसे मामलों में लड़के को गिरफ्तार कर लिया जाता है और उन पर रेप का केस चलाया जाता है.

सुख का एहसास

वहीं कई ऐसे भी लोग हैं जो एक पार्टनर के होते हुए किसी दूसरे व्यक्ति के साथ सैक्सुअल रिलेशन रखते हैं. वे इसे गलत नहीं मानते. 2014 में ग्लोबल डेटिंग वैबसाइट एश्ले मैडीसन भारत में लौंच किया गया था. इस वैबसाइट ने भारत में एक सर्वे कराया था. सर्वे में यह बात सामने आई कि 76 फीसदी महिलाएं और 61 फीसदी पुरुष अपने पार्टनर को धोखा देने को गलत नहीं मानते हैं.

जब 2 पार्टनर अपनी सहमति से सैक्स करते हैं तो वह जबरदस्ती नहीं कहलाता. वह यह अपनी खुशी से करते हैं और इस के लिए वे खुद जिम्मेदार हैं. इसे किसी एहसान की तरह देखना गलत होगा. यह एक शारीरिक सुख है जिसे हर व्यक्ति भोगना चाहता है.

पिछला प्रेम और सेक्स

‘लव, सैक्स और धोखा’ यह सिर्फ फिल्मी लफ्फाजी नहीं, आजकल युवाओं की जिंदगी इन्हीं 3 शब्दों के इर्दगिर्द है. रिश्तों की जरूरत को न समझने की आदत अब हमारे जीवन का हिस्सा बन रही है, जिस से रिश्ते कमजोर हो रहे हैं.

प्रेम, विछोह और पुनर्मिलन के परंपरागत कौन्सैप्ट से दूर रंगीन परदे पर अब लव, सैक्स और धोखे का तड़का ही ज्यादा नजर आता है. आजकल इंस्टैंट लव और उस के बाद इंस्टैंट सैक्स नैटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो के जरखरीद प्लेटफौर्मों का ट्रैंड बन गया है.

प्रेम आधारित शो में वासना, कामुकता, स्वार्थ और धोखे का रंग ज्यादा नजर आता है. उन में समर्पण, विश्वास, संयम, प्रेम जैसी भावनाएं नहीं बल्कि बिंदासपन हावी है.

हिंदी सिनेमा ने प्यार पर आधारित बेहतरीन फिल्में दी हैं. ‘मुगलेआजम’, ‘पाकीजा’, ‘लैला मजनू’, ‘सोनी महिवाल’ जैसी फिल्मों को याद करिए. उस परंपरा से बिलकुल अलहदा आज की फिल्में या धारावाहिक प्यार और सैक्स की सीमाओं को तोड़ते नजर आते हैं.

प्यार का अर्थ है सैक्स और तृप्ति, जो बैडरूम की सीमा से बाहर भी कहीं भी हो सकता है. अब हर शो में कन्फ्यूज्ड प्रेमियों की कहानी परोसी जा रही है, जो तार्किक रूप से रिश्तों के साथ इंसाफ नहीं कर पाती. असलियत यह है कि आज की फिल्में व शो रिश्तों को ज्यादा छिछला बना रहे हैं. ये प्यार और सैक्स जैसी बेशकीमती भावना को बहुत हलका कर रहे हैं.

‘मनमरजियां’ ऐसी हिंदी फिल्म थी जिस में प्यार की कहानी टिंडर और फेसबुक से शुरू हुई थी. उस के बाद प्रेमीप्रेमिका छिपछिप कर मिलने लगते हैं. उन का मिलन अपनी सारी हदें लांघ जाता है. विवाहपूर्व शारीरिक संबंधों पर दोनों को कोई एतराज नहीं, बल्कि वे इसे ही प्यार समझते हैं. लड़की के परिवार वाले उसे रंगेहाथों पकड़ भी लेते हैं, लेकिन प्यार को हलके में लेने वाले, गैरजिम्मेदार और लापरवाह लड़के के लिए शादी कर के जिम्मेदारी लेना एक आफत होती है. इस तरह के लड़के कहते हैं कि प्यार के लिए शादी की क्या जरूरत. मगर लड़कियां आज भी प्रेमी से कमिटमैंट चाहती हैं. कमिटमैंट पर वे उस के साथ भागने को भी तैयार हो जाती हैं.

लड़कियों को जब एहसास होता है कि प्रेमी जिम्मेदार साथी बनने के लायक नहीं है क्योंकि उस की जेब खाली है और भविष्य में उसे जीवनयापन के लिए क्या करना है, इस की भी कोई रूपरेखा उस ने तैयार नहीं की है, तो उसे छोड़ कर उन्हें वापस लौटना पड़ता है.

इस के बाद उन के जीवन पर काला धब्बा पड़ा रहता है. उन्हें अपनी गलती का एहसास रहता है. उन्हें किसी भी नए जने से मिलने में हिचकिचाहट होती है. जिस रिश्ते में सीमाओं की गरिमा और परिवार की इज्जत की कोई परवा न हो और लड़की बिंदास जीवन जीने की आदी हो तो वह हमेशा उसी मोल्ड में वापस जाने को बेचैन रहती है जिस में पहला प्रेमी मिला था. परिवार तो साथ देते ही हैं चाहे उन की संतान कैसी भी हो.

शारीरिक सुख पाने की हवस में लड़की की आंखों पर ऐसा परदा पड़ जाता है कि वह अपने प्रेमी की असलियत नहीं समझ पाती.उस में इंसान की परख करने की क्षमता नहीं रहती है. वह बारबार नए आदमी के साथ हमबिस्तर होती है, वह भी खुलेआम. जबकि, लड़का उस से शादी कर के परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए तैयार नहीं है और जो व्यक्ति उस से शादी कर के जिम्मेदारी उठाने को तैयार है, यानी पुराने साथी के प्रति भी वह वफादार नहीं रह पाती है.

हालांकि उस की और उस के प्रेमी के बीच शारीरिक संबंधों की जानकारी होने पर ‘कोई बात नहीं’ कह कर वह स्वीकार कर ले मगर जिस वफादारी की उसे अपने साथी से उम्मीद हो, वह उस पर भी खरा न उतरे तो जिंदगी फिर एक बो  झ बन जाती है.

लड़कियों को ध्यान रखना चाहिए कि जिस के लिए प्यार का मतलब सिर्फ सैक्स है, वह उन के मतलब का नहीं. जिम्मेदारी लेना, रिश्तों को निभाना उस के बस में होना चाहिए. ऐसे लड़के कम होते हैं जो बेवफाई देख कर भी खामोशी ओढ़े रहें, उस के खून में जैसे कोई गरमी ही न हो, जैसे उस की रीढ़ की हड्डी न हो. दब्बू और कायर प्रेमी, जो अपनी प्रेमिका की तमाम गलत हरकतें देखते हुए भी खामोशी ओढ़े रहें, कम ही होते हैं. हर हाल में माफ करने और उस के साथ रहने को लालायित प्रेमी भी नहीं मिलते, याद रखें.

हमारे पुराण ऐसी कहानियों से भरे हैं जिन में ऋषिमुनि शारीरिक मिलन की बेताबी के आगे जगह और वक्त भी नहीं देखते, पर उस का खमियाजा ही लड़कियां भोगती रही हैं. आज भी वह बात बेटों में मौजूद है और ऐसे लड़कों की कमी नहीं. उन का प्रेम शारीरिक संबंध बनाने भर पर खत्म होता है.

प्रेमी महज डीजे है, जिस की कोई स्थायी कमाई नहीं है. बस ‘खाओ, खेलो’ के सिद्धांत पर चलने वाले लक्ष्यहीन और लापरवाह प्रेमी बहुत हैं. फिर भी उन्हें प्रेमिकाएं मिल जाती हैं. यहां तक कि उन्हें अपनी दूसरी प्रेमी के सामने प्यार का इजहार करने में कोई डर,  ि झ  झक या शर्मिंदगी नहीं होती. ऐसी लड़कियां भी कम नहीं हैं जो स्वार्थी हों और सिर्फ अपने मन की करने में विश्वास रखती हों, जिन्हें अपने परिवार की इज्जत की कोई परवा न हो. उन के आगे लौजिक की कोई लाइन नहीं खिंची है. उन्हें, दरअसल, लड़कों की परख नहीं है. यही वजह है कि वे बारबार अपने प्रेमियों से धोखा खाती हैं पर बारबार उन के साथ हमबिस्तर भी होती हैं क्योंकि उन्हें वही मोमैंट अच्छे लगते हैं.

कितनी ही लड़कियां प्रेमी के चक्कर से नहीं छूटना चाहतीं. वे चोरीछिपे मिलती रहती हैं और शारीरिक संबंध बनाती रहती हैं चाहे दूसरा प्रेमी भी हो या शादी हो गई हो. दरअसल, उन्हें ट्रौफी गर्ल, जो ड्राइंगरूम की शोभा बनती है, रैस्तरां में दूसरे लड़कों में ईर्ष्या पैदा करती हैं, बनना अच्छा लगता है और वे इसे मानती हैं कि जीवन सफल हो गया. प्यार की जटिलताओं को सम  झने में सैक्स का तड़का ठीक नहीं, इस से जीवन स्थिर नहीं होता.

आज ऐसे परिवारों की गिनती बढ़ती जा रही है जहां परिवार के बुजुर्ग अपनी मनमरजी करने वाली बेटी या बेटे के कारण बारबार निराश व अपमानित होते हैं. अनिश्चितता से घिरी एक लड़की, जो सैक्स और प्रेम में विभेद न जाने, जिस के लिए परिवार की इज्जत और जिम्मेदारी कोई माने नहीं रखती है,  कितनी दूर तक जीवन के पक्के रिश्ते को निभा पाएगी, यह सवाल उठ खड़ा हो जाता है.

एक नए समाज की शुरुआत तो हो गई है. पर न मर्ज पता है, न इलाज. अब यह आम है, बस इसे स्वीकार कर लो. इस के परिणाम की चिंता न करो. पतिपत्नी बन जाओ तो कैसे तनाव से दिन गुजरेंगे, तलाक होंगे, बच्चे भटकेंगे आदि की चिंता युवाओं को नहीं है. यह गलती है, भटकाव है क्योंकि आज की थोड़ी सेफ जिंदगी में भी जवानी 40-50 में ढलने लगेगी ही. उस के बाद के सालों में क्या होगा, यह 15-20 साल वालों को आज एहसास नहीं है.

उम्र के हर पड़ाव पर लें सेक्स का मजा

शादी के बाद सेक्स का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको एक दूसरे के घर पर छिप-छिपकर अजीबोगरीब समय पर जाने की या खामोशी से और्गेज्म पाने की जरूरत नहीं होती. हालांकि छुपकर किए जानेवाले सेक्स से रोमांचक कुछ और हो ही नहीं सकता, लेकिन कई बार सेक्स करने का मन होने पर उचित जगह की कमी अच्छे हार्मोन्स को व्यर्थ कर सकती है. यदि आप अपने पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताने के लिए लोगों की मदद पर आश्रित हैं तो यहां हम बता रहे हैं कि एक खुशनुमा शादी के बाद किन चीजों की उम्मीद करें.

1. शादी की रात

आपने न अपनी शादी में सफेद गाउन पहना और ऐसा भी नहीं है कि आप पहली बार सेक्स करने जा रही हैं. लेकिन तब भी शादी की रात तो शादी की रात होती है. यह बतौर पति-पत्नी आपकी पहली रात है और इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आप अपने पति के शरीर के हर निशान, तिल और टैटू से परिचित हैं. शादी का सर्टिफिकेट पाने के बाद बतौर विवाहित जोड़ा सेक्स करने का अपना अलग मजा होता है. हर पुरुष की कल्पना होती है, अपनी दुल्हन के साथ उसके सफेद गाउन या लाल रंग की साड़ी में सेक्स करना. चाहे आप शादी के दिन कितनी ही थकी हुई क्यों न हो, आप अपने जोश पर काबू नहीं पा सकती हैं.

2. हनीमून

क्या क्रुगर नेशनल पार्क, दक्षिण अफ्रीका के पास किसी टेंट में मिशनरी मुद्रा में संबंध बनाना भी अलहदा हो सकता है? शर्तिया अलग होगा. लेकिन हम आपको नोट्स बनाने के लिए नहीं कह रहे हैं. बस कुछ खुशनुमा हार्मोन्स जो आपके दिमाग पर छाए हुए हैं उन्हें अपना काम करने दें. टूर गाइड की बकबक के बीच कुछ किस चुरा लें, टूर ग्रुप से अलग हो जाएं, अफ्रीका की धूप में कुछ यादें बनाएं और सुनसान जगहों की तलाश कर वहां प्यार की नई दास्तां लिखें.

3. हमने एक दिन सेक्स नहीं किया

आपकी रोजमर्रा की जिंदगी अच्छी तरह चल रही थी, लेकिन एक दिन औफिस के लिए कैब पकड़ते वक्त अचानक ही आपने महसूस किया कि आपने आज सेक्स नहीं किया. आप ख़ुद से वादा करती हैं कि आगे से ऐसा कभी नहीं होगा और पिछली रात की भूल को सुधारने के लिए औफिस के लंच समय का इस्तेमाल करती हैं. अपने पति को फोन करती हैं और दोपहर के रोमांस के लिए किसी करीब होटल में एक कमरा बुक करती हैं.

4. जब हो व्यस्तता

यह वह समय है जब आपकी टु-डू लिस्ट कुछ इस तरह की होती है: प्रिया का संगीत, सास को एयरपोर्ट छोड़ना, टपकते हुए बेसिन के नल को ठीक कराना, सेक्स, छुट्टियों के लिए टिकट्स बुक करना. आपने एक निश्चित दिनचर्या बना ली है, जिसमें सेक्स के लिए एक निश्चित समय, जैसे-सप्ताह में दो बार या दिन में एक बार तय कर लिया है! आपको मालूम होता है कि आप वास्तव में कब सेक्स करनेवाली हैं.

5. प्रेग्नेंसी के दौरान

सेक्स करना कोई भूलता नहीं. निस्संदेह गर्भवती महिलाएं भी नहीं. हो सकता है आप मां बननेवाली हों, लेकिन अचानक ही आपके हार्मोन्स आपको पुराने रोमांचपूर्ण दिनों को फिर से जीने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. आपके पति नहीं समझ पाते कि अचानक आपको क्या हो गया है, लेकिन वे आपकी सेक्स करने की इच्छा से इतने खुश हैं कि वे आपको हमेशा गर्भवती रखना चाहते हैं. वे फुटबौल भी नहीं देख रहे, केवल एक नादान मुस्कान के साथ यहां-वहां घूम रहे हैं. क्रुगर की यादों में.

6. जब ढर्रे पर चले दिनचर्या

सुबह उठते ही आप अपने मुंह पर कुछ गीला महसूस करती हैं और आपको पता लगता है कि आप जो सोच रही हैं यह वह नहीं है. आपके कुत्ते को आपका सुबह का चेहरा पसंद आया और उसने खुद को आपके दो बच्चों, सॉफ़्ट टौय और मखमली चादर के बीच फिट बिठा लिया है. आपके पति जो कुछ ही देर पहले आपसे एक हाथ दूर लेटे थे, अब हौल के काउच पर खर्राटे ले रहे हैं. आपके बच्चे इस बात का सबूत हैं कि आप दोनों के बीच कभी गर्मजोशीभरा सेक्स हुआ करता था. लेकिन आप बहुत ज्यादा निश्चिंत नहीं हो सकतीं.

7. नीरसता को कहें अलविदा

रूखे दिन काफी लंबे खिंच गए हैं और आपने इसे खत्म करने का निश्चय कर लिया है. आप औफिस के प्रसाधन गृह में जाती हैं और अपने फोन पर एनएसफडब्ल्यू (नौट सेफ फौर वर्क) पेज पर जाती हैं और अपनी कल्पनाओं के लिए जल्दी-जल्दी देखती हैं. क्या आप केवल ट्रेंच कोट और हील्स में अपने पति के औफिस अचानक मिलने के लिए पहुंच सकती हैं? या उनके घर आने के बाद सरप्राइज की योजना बना सकती हैं? या दोनों? अपने बच्चों को उस दोस्त के यहां सोने के लिए कहें, जिसपर आपकी मदद उधार हो, तुरंत सलून जाएं, नई लॉन्जरी, खाने की अपनी पसंदीदा चीजें खरीदें. हम मानते हैं कि नीरस दिनों के बाद सेक्स करना आपातकालीन जरूरत है. क्या आपका बहाना समय की कमी है? या शरीर में आए बदलाव आपको हतोत्सिहित कर रहे हैं? विश्वास करें, आप अब भी तैयार हैं. इन सभी कारणों को भूल जाएं और इस दूरी को मिटाने के लिए सेक्स के लिए तैयार हो जाएं. सेक्स के बाद साथ में लिपटकर सोने का मजा ही कुछ और होता है.

8. अब भी वक्त है

जब आप दोनों ही सही फौर्म में हों तो आपको क्रोशिया पकड़ने और उन्हें क्रौसवर्ड हल करके समय बिताने की तरूरत क्या है? यदि आपको यह करना ही है तो उनके साथ नटखट क्रौसवर्ड खेलें और रोमांचपूर्ण अंदाज में क्रोशिया थामें. उम्र के चौथे, पांचवे और छठें दशक में रसिक न होने का कोई कारण नहीं है. खुद को आजाद छोड़ दें, रोकने की कोशिश न करें.

इस तरह बनाएंगे संबंध तो मिलेगा डबल मजा

एक अंतरंग संबंध या एक यौन संबंध याने जोड़ों का शारीरिक और भावनात्मक रूप से अच्छी तरह से शामिल होना हो सकता हैं. इसको मुख्यतः प्यार और प्रतिबद्धता के अलावा जुनून और आकर्षण द्वारा निर्धारित किया जाता है.

एक रिश्ते में अंतरंगता जोड़े को भावनात्मक रुप से एक दूसरे सें कितने संलग्न है, यह तय करने में और सुरक्षा की अपनी भावना का निर्धारण करने में मदद करती हैं. इसके अलावा, एक अंतरंग संबंध एकसाथ रहने की इच्छा को केवल शारीरिक स्तर से परे एक भावनात्मक स्तर पर बरकरार रखते हैं. उसमें अपनेपन और स्नेह की भावना होती है.

निम्नलिखित मुद्दों से आपको यह संकल्पना समझने में मदद मिलेगी:

1. जोड़े उनके रिश्ते में अंतरंगता का आनंद लेते है, वह एक दूसरे पर निर्भर हो जाते हैं.

2.  एक अंतरंग संबंध में हमेशा आवश्यकता की पूर्ति की भावना होती है. यह पूर्ताता भावनात्मक, सामाजिक और यौन हो सकती हैं.

3. एक अंतरंग संबंध कभी कभी आकर्षण, मोह, और जुनून के अन्य संकल्पना के साथ उलझ सकता है. अंतरंगता का आनंद ले रहे लोगों को इससे सतर्क होना चाहिये, जिससे वह बादमें दर्द और अविश्वास से बच सकते हैं.

4.  इसके अलावा, एक अंतरंग संबंध हमेशा एक यौन संबंध नहीं हो सकता हैं. एक संतोषप्रद शारीरिक संबंध बनने के लिए एक भावनात्मक रूप से संलग्न होना बहूत जरुरी होता हैं, और इसलिए अंतरंगता को बहुत ज्यादा व्यक्तिगत स्तर पर परिभाषित किया जाता हैं. एक अंतरंग जोड़े अपने साथी की पसंद और नापसंद के बारे में स्वाभाविक रुप से जानते है, और इसलिए साथ रहने का हर अनुभव पूर्ण बनाते हैं.

5. शोधकर्ताओं के अनुसार, एक अंतरंग संबंधों में शामिल व्यक्ति खुद को बेहतर समझने में भी सक्षम होते है, जिससे कारण उनको अपने साथियों से जुड़ा होने के अलावा उनको क्या चाहिए यह पता होता हैं.

मैं 2 बार रिलेशनशिप में रह चुकी हूं, यह जान कर मेरा दोस्त मुझसे कटने लगा है, क्या करूं?

सवाल

मेरी उम्र 18 वर्ष है. मैं बीकौम प्रथम वर्ष की छात्रा हूं. कालेज के तीसरे महीने में ही मेरी मुलाकात एक लड़के से हुई. वह देखने में हैंडसम और पढ़नेलिखने में बहुत इंटैलिजैंट है. उस ने मुझ से मेरे बारे में पूछा तो मैं ने उसे अपनी पहचान बताते हुए यह भी बताया कि मैं पहले भी 2 बार रिलेशनशिप में रह चुकी हूं. यह जान कर वह मुझ से कटने लगा है.

अब पहले की तरह बात नहीं करता. उस की पहले कभी कोई गर्लफ्रैंड नहीं रही, शायद इसीलिए वह यह एक्सैप्ट नहीं कर पा रहा कि लड़की हो कर मैं रिलेशनशिप में कैसे रही. क्या मैं ने पहले रिलेशनशिप में आ कर गलती की? क्या मुझे उस लड़के से बात करनी चाहिए या माफी मांगनी चाहिए? मैं उसे बेहद पसंद करने लगी हूं और उस का मेरे साथ परायों जैसा व्यवहार मेरे लिए असहनीय होता जा रहा है. कृपया सुझाव दें.

जवाब

पहले तो मैं आप को यह बताना चाहूंगी कि आप ने पहले 2 बार रिलेशनशिप में आ कर कोई गलती नहीं की और इस के लिए आप को किसी भी तरह से गिल्टी फील करने की या किसी से माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं है. रही बात उस लड़के की तो यदि वह पहले रिलेशनशिप में नहीं आया तो इस में प्रौब्लम ही क्या है. ऐसा भी नहीं है कि आप उसे जज कर रही हों जो वह आप को दोष दे. आखिर खुद को जज करना, आप से अपनी तुलना करने वाला है भी तो वह खुद ही. आप उस से बात करना चाहें तो करें लेकिन जिस लड़के की सोच यह हो कि लड़कियों को रिलेशनशिप में नहीं आना चाहिए या केवल एक ही रिलेशनशिप में रहना चाहिए तो ऐसा लड़का आप को डिजर्व नहीं करता. किसी का हैंडसम होना या इंटैलिजैंट होना ही सबकुछ नहीं होता, व्यक्ति की सोच अच्छी होनी भी जरूरी है. मेरा सुझाव यही है कि आप उस से बात करें. अपनी बात कौन्फिडैंस के साथ रखें, डरें नहीं, झिझकें नहीं. जब तक आप अपनी बात रखेंगी नहीं, तब तक कुछ भी क्लीयर नहीं होगा. आप की उलझन बढ़ती जाएगी और आप पसोपेश में फंसी रहेंगी.

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मैं एक समलैंगिक लड़का हूं लेकिन…

सवाल

मैं एक समलैंगिक लड़का हूं और मेरी बहन के देवर के साथ मेरा जिस्मानी रिश्ता है. उस ने अपने दोस्तों को भी मेरे बारे में बता दिया है. वे सब मेरा मजाक उड़ाते हैं. कभीकभार तो मेरा खुदकुशी करने का मन करता है. कोई उपाय बताएं?

जवाब

अब समलैंगिकता को कानूनी मंजूरी मिल गई है. अगर आप का पार्टनर तैयार हो तो उसे शादी के लिए कहें. रही बात मजाक की तो दुनिया वालों की परवाह न करें, कुछ दिनों बाद सब शांत हो जाएंगे. खुदकुशी का खयाल दिल से निकाल दें, क्योंकि आप ने कोई गुनाह नहीं किया, बल्कि प्यार किया है.

मेरे पति चाहते हैं रोजाना सैक्स संबंध बनाऊं, मैं क्या करूं?

सवाल

मैं 49 वर्षीय महिला हूं. 18 की उम्र में ही शादी हो गई थी. मेरे 2 बच्चे हैं. दोनों बड़े और सैटल हैं. पति अभी भी मुझे बहुत प्यार करते हैं. वे चाहते हैं कि मैं रोजाना सैक्स संबंध बनाऊं. पीरियड्स के दिनों भी पति सैक्स करना चाहते हैं. मैं क्या करूं?

जवाब

आप के पति आप को इतना प्यार करते हैं, यह तो बेहद अच्छी बात है. पतिपत्नी के बीच नियमित सहवास न सिर्फ आपसी संबंधों को मजबूती देता है, दांपत्य जीवन सदैव खुशहाल रहता है. दूसरा, सैक्स कुदरत का दिया एक अनमोल तोहफा है और शरीर के लिए शानदार टौनिक भी. पति के साथ सैक्स संबंध का जम कर आनंद उठाएं. रही बात पीरियड्स में सैक्स करने की तो इस से कोई शारीरिक नुकसान नहीं होता. इन दिनों भी आप सैक्स का लुत्फ उठा सकती हैं.

सवाल

मैं 30 साल की शादीशुदा औरत हूं. मैं ज्यादातर अपने मायके में ही रहती हूं क्योंकि मेरा पति शराबी है और बेवजह मुझ से मारपीट भी करता है. जब मैं अपनी ससुराल में थी, तब भी उस के भाई ही हमारा खर्च चलाते थे. इस से मुझे बहुत तकलीफ होती थी. क्या मुझे तलाक मिल सकता है?

जवाब

यह बात सही है कि शराबी पति निकम्मा भी हो तो किसी गंभीर समस्या से कम नहीं होता. बेवजह नशे में मारपीट करने वाले पतियों से निभाना मुश्किल ही होता है. आप को अगर लगता है कि अब और नहीं निभ पाएगी, तो तलाक मिल सकता है. अपने शहर के किसी अच्छे वकील से मिल कर आप तलाक का मुकदमा दायर कर सकती हैं, लेकिन बच्चे अगर हों तो उस को रास्ते पर लाने की कोशिश करें. अगर बात न बने तो फिर अदालत जाएं. अदालतों से भी तलाक आसानी से नहीं मिलता. वहां कई साल लग जाते हैं.

मैरिड लाइफ में सैक्स कितना है जरुरी

अंजली के पति अजय को अधिकतर अपने व्यवसाय के सिलसिले में दौरे पर रहना पड़ता है. जब भी वे दौरे से लौटने वाले होते हैं, अंजली को खुशी के बजाय घबराहट होने लगती है क्योंकि लंबे अंतराल के बाद सैक्स के समय उसे दर्द होता है. इस कारण वह इस से बचना चाहती है.

इस मानसिक तनाव के कारण वह अपनी दिनचर्या में भी चिड़चिड़ी होती जा रही है. अजय भी परेशान है कि आखिर क्या वजह है अंजली के बहानों की. क्यों वह दूर होती जा रही है या मेरे शहर से बाहर रहने पर कोई और आ गया है उस के संपर्क में? यदि शारीरिक संबंधों के समय दर्द की शिकायत बनी रही तो दोनों ही इस सुख से वंचित रहेंगे.

दर्द का प्रमुख कारण स्त्री का उत्तेजित न होना हो सकता है. जब वह उत्तेजित हो जाती है तो रक्त का प्रवाह तेज होता है, सांसों की गति तीव्र हो जाती है और उस के अंग में गीलापन आ जाता है. मार्ग लचीला हो जाता है, संबंध आसानी से बन जाता है.

फोरप्ले जरूरी

बगैर फोरप्ले के संबंध बनाना आमतौर पर महिलाओं के लिए पीड़ादायक होता है. फोरप्ले से संबंध की अवधि व आनंद दोनों ही बढ़ जाते हैं. महिलाओं को संबंध के लिए शारीरिक रूप से तैयार होने में थोड़ा समय लगता है. उसे इसे सामान्य बात मानते हुए किसी दवा आदि लेने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए.
यह देखा गया है कि कुछ दवाएं महिलाओं के गीलेपन में रुकावट पैदा करती हैं. इसीलिए सैक्स को भी एक आम खेल की तरह ही लेना चाहिए. जिस तरह खिलाड़ी खेल शुरू करने से पहले अपने शरीर में चुस्ती व गरमी लाने के लिए अभ्यास करते हैं उसी तरह से वार्मअप अभ्यास करते हुए फोरप्ले की शुरुआत करनी चाहिए. पुरुषों की तुलना में महिलाओं पर इस का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. महिलाओं के शरीर में कुछ बिंदु ऐसे होते हैं जिन्हें हाथों या होंठों के स्पर्श से स्पंदित किया जा सकता है. हलके स्पर्श से सहला कर उन की भावनाओं को जाग्रत किया जा सकता है.

अगर पर्याप्त फोरप्ले के बावजूद गीलापन न हो, उस स्थिति में चिकनाई वाली क्रीम इस्तेमाल की जा सकती है, जो एक प्रकार की जैली होती है. इस को लगाने के बाद कंडोम का प्रयोग करना चाहिए. कुछ कंडोम ऐसे होते हैं जिन के बाहरी हिस्से में चिकना पदार्थ लगा होता है. इस से पुरुष का अंग आसानी से प्रवेश हो जाता है.

चिकनाईयुक्त कंडोम

यहां यह सावधानी बरतने योग्य बात है कि यदि सामान्य कंडोम प्रयोग किया जा रहा हो तो उस स्थिति में तेल आधारित क्रीम का प्रयोग न करें क्योंकि तेल कंडोम में इस्तेमाल की गई रबड़ को कमजोर बना देता है व संबंध के दौरान कंडोम के फट जाने की संभावना बनी रहती है. कई बार कंडोम का प्रयोग करने से योनि में दर्द होता है, जलन या खुजली होने लगती है. इस का प्रमुख कारण कंडोम में प्रयोग होने वाली रबड़ से एलर्जी होना हो सकता है. पुरुषों के ज्यादातर कंडोम रबड़ या लैटेक्स के बने होते हैं.

आमतौर पर एक से दो फीसदी महिलाओं को इस से एलर्जी होती है. वे इस के संपर्क में आने पर बेचैनी, दिल घबराना यहां तक कि सांस रुकने तक की तकलीफ महसूस करती हैं. सो, यदि पति द्वारा इस्तेमाल कंडोम से ये लक्षण दिखाई पड़ें तो बेहतर है उन्हें अपने कंडोम का ब्रैंड बदलने को कहें.

इस का कारण कंडोम के ऊपर शुक्राणुओं को समाप्त करने के लिए जो रसायन लगाया जाता है, वह भी एलर्जी का कारण हो सकता है. सामान्य कंडोम का प्रयोग कर के भी इस एलर्जी से नजात पाई जा सकती है. इस के बावजूद यदि समस्या बनी रहे तो पुरुष कंडोम की जगह पत्नी स्वयं महिलाओं के लिए बनाए गए कंडोम का प्रयोग करे.

महिलाओं के कंडोम रबड़ की जगह पोलीयूरेथेन के बने होते हैं. वैसे बाजार में पुरुषों के लिए पोलीयूरेथेन कंडोम भी उपलब्ध हैं. इन के साथ एक बड़ी समस्या यह है कि ये आम रबड़ के बने कंडोम की तुलना में कमजोर होते हैं, संबंध के दौरान इन के फटने की आशंका बनी रहती है. यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि संबंध के दौरान कंडोम के प्रयोग से अनेक लाभ होते हैं. इस के कारण अनचाहे गर्भ से छुटकारा मिलता ही है, रोगों के संक्रमण से भी नजात मिल जाती है.

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