लेखक- दिनेश बैजल ‘राज’

उस ने यह बात प्रिंसिपल विजय कुमार को बताई तो उन्होंने 7 स्कूलों के संचालक सुरेंद्र लवानिया से सिफारिश कर के उसे 3 हजार रुपए महीना किराए पर स्कूल दिला दिया. लेकिन धीरज के मन में लालच आ गया और उस ने…

आगरा जनपद के थाना सिकंदरा की ओम विहार कालोनी निवासी सुरेंद्र लवानिया के सैनिक भारती इंटर  कालेज समेत 7 स्कूल हैं. इस के अलावा वह एक एफएम चैनल 90.8 के भी निदेशक हैं. उन का एक स्कूल थाना ताजगंज क्षेत्र के कौलक्खा में है. डा. बी.आर. अंबेडकर नाम के इस जूनियर हाईस्कूल को उन्होंने सेमरी निवासी धीरज को किराए पर दे रखा था.

धीरज ही इस स्कूल को चला रहा था. लेकिन पिछले 2 सालों से धीरज ने स्कूल के मालिक सुरेंद्र लवानिया को किराया नहीं दिया था. जब भी वह किराया मांगते तो धीरज कोई न कोई बहाना बना देता था.

28 जून, 2019 शुक्रवार की सुबह लगभग साढ़े 10 बजे इस स्कूल के संचालक धीरज ने सुरेंद्र कुमार लवानिया को फोन कर के कहा, ‘‘कहीं से मेरे पास पैसे आ गए हैं, आप स्कूल आ कर सारा किराया ले जाएं. आप अपने साथ प्रिंसिपल विजय कुमार को भी बुला लाएं गुरुजी के सामने पैसे दिए जाएंगे तो ठीक रहेगा.’’

धीरज विजय कुमार को गुरुजी कहता था. वह सुरेंद्र कुमार लवानिया के ही सैनिक भारती इंटर कालेज, उर्खरा में प्रिंसिपल थे और आगरा की इंदिरापुरम कालोनी में सपरिवार रहते थे. धीरज से किराए के पैसे मिलने की बात सुन कर सुरेंद्र लवानिया खुश हुए.

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उन्होंने उसी समय अपने एक कालेज के प्रिंसिपल विजय कुमार को फोन कर के कहा कि मैं धीरज के पास कौलक्खा पहुंच रहा हूं. तुम भी घर से सीधे धीरज के पास पहुंच जाओ. इस के बाद वह अपनी वरना कार से धीरज के पास जाने के लिए निकल गए.

पिं्रसिपल विजय कुमार उस समय सैनिक भारती इंटर कालेज में चौकीदार से सफाई कार्य करा रहे थे, क्योंकि पहली जुलाई को स्कूल खुलना था.

मूलरूप से दरभंगा, बिहार निवासी प्रिंसिपल विजय कुमार झा 25 साल पहले आगरा आए थे. सुरेंद्र लवानिया से उन का परिचय हुआ तो उन्होंने झा को सैनिक भारती इंटर कालेज का प्रिंसिपल बना दिया था. ईमानदार व मिलनसार स्वभाव के चलते बाद में विजय ही लवानिया के सभी स्कूलों की देखरेख की जिम्मेदारी संभालने लगे.

उन का बेटा मानवेंद्र उर्फ दीपक सीए की तैयारी कर रहा था. बेटी की वह शादी कर चुके थे. उन्होंने अपने बेटे से बता दिया था कि वे लवानिया साहब के साथ धीरज के पास जा रहे हैं. फिर वह बाइक ले कर निकल गए.

स्कूल मालिक और प्रिंसिपल  की रहस्यमय गुमशुदगी

शाम हो गई लेकिन न तो लवानिया साहब अपने घर लौटे और न ही विजय कुमार. सुरेंद्र लवानिया के घर वालों ने कई बार उन्हें फोन मिलाया लेकिन फोन स्विच्ड औफ था. उधर विजय कुमार का बेटा भी कई बार पिता का नंबर मिला चुका था पर उन का फोन स्विच्ड औफ होने की वजह से नहीं मिला. देर शाम सुरेंद्र लवानिया की पत्नी सुशीला ने प्रिंसिपल विजय के घर फोन किया.

विजय की पत्नी शीला ने उन्हें बताया कि उन के पति भी सुबह बाइक ले कर धीरज से मिलने की बात कह कर निकले थे, लेकिन उन का मोबाइल भी स्विच्ड औफ है. उन से संपर्क भी नहीं हो पा रहा है. शीला ने यह भी बताया कि धीरज को फोन किया था, घंटी जाने के बाद भी उस ने काल रिसीव नहीं की.

दोनों के घर वालों को चिंता हुई. उन्होंने अपने परिचितों को भी फोन कर के उन के बारे में पूछा. फिर उन्हें संभावित जगहों पर तलाश करने लगे. लेकिन दोनों का कोई सुराग नहीं लगा. तलाश में भटक रहे परिजन दूसरे दिन शनिवार 29 जून को ताजगंज थाने पहुंचे.

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स्कूल मालिक सुरेंद्र लवानिया व प्रधानाचार्य विजय कुमार के परिजनों ने सुरेंद्र लवानिया के गायब होने की बात सुन कर थानाप्रभारी भी हैरान रह गए, क्योंकि शिक्षा जगत में सुरेंद्र लवानिया बड़ा नाम था. जिले में उन के 7 स्कूल और कालेज थे. 5 साल पहले उन्होंने खंदारी में एक एफएम चैनल भी शुरू किया था.

वह सपरिवार आगरा के सिकंदरा क्षेत्र की ओमविहार कालोनी में रहते थे. उन के परिवार में पत्नी सुशीला के अलावा 2 बेटियां और एक बेटा था. बड़ी बेटी की वह शादी कर चुके थे. सुरेंद्र लवानिया उत्तर प्रदेश शिक्षण संस्थान प्रबंधक परिषद के सदस्य भी थे. वे संगठन की प्रत्येक गतिविधि में हिस्सा लेते थे.

स्कूल स्वामी सुरेंद्र लवानिया व प्रधानाचार्य विजय कुमार के परिजनों ने थानाप्रभारी को घटना से अवगत कराया. मामला गंभीर था, इसलिए थानाप्रभारी ने सुरेंद्र और विजय की गुमशुदगी दर्ज कर के इस घटना की जानकारी अपने उच्चाधिकारियों को दे दी. दोनों के लापता होने की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में खलबली मच गई. हालात को देख कर अपहरण की आशंका थी. एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने इस मामले की कमान खुद संभाल ली. इस के तुरंत बाद पुलिस दोनों की खोज में लग गई.

वैसे सुरेंद्र लवानिया मूलरूप से मंसा की मढैया, धिमिश्री, शमसाबाद के रहने वाले थे. उन का 400 वर्ग गज में बना डा. बी.आर. अंबेडकर जूनियर हाईस्कूल, कौलक्खा, थाना ताजगंज में था. 2 साल पहले यह स्कूल ताजगंज के गांव सेमरी निवासी धीरज जाटव ने 3 हजार रुपए मासिक किराए पर लिया था.

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धीरज को यह स्कूल विजय कुमार झा ने ही सुरेंद्र लवानिया से सिफारिश कर के किराए पर दिलवाया था. धीरज ने 2 साल से स्कूल का किराया नहीं दिया था. सुरेंद्र लवानिया जब भी उस से किराया मांगते तो वह टालमटोल कर देता था. 28 जून, 2019 को धीरज ने लवानिया साहब को फोन कर के किराया ले जाने के लिए बुलाया था.

29 जून, 2019 की सुबह जब शीला ने धीरज को फोन किया तो धीरज ने फोन उठा लिया. विजय के बारे में पूछने पर धीरज ने शीला को बताया कि प्रिंसिपल साहब और  लवानियाजी उस के पास आए ही नहीं थे.

इस के कुछ देर बाद धीरज शीला के घर  पहुंच गया. वहां उस ने चाय भी पी. शीला ने धीरज से कहा, ‘‘बेटा, यदि तुम से कोई गलती हो गई है तो कोई बात नहीं है. हम तुम्हें बचा लेंगे. उन के साथ कुछ करना मत.’’ शीला ने यह बात कहते हुए मन ही मन सोचा था कि यदि धीरज ने किसी वजह से दोनों का अपहरण कर लिया होगा तो वह समझाने पर मान जाएगा.

इस पर धीरज ने कहा, ‘‘आप कैसी बात कर रही हैं? वह मेरे गुरु हैं, मेरे अन्नदाता हैं. मैं कभी उन के साथ गलत नहीं कर सकता.’’

इस बीच धीरज पर शक होने पर शीला ने पुलिस को सूचना दे दी. कुछ ही देर में पुलिस वहां पहुंच गई. शीला के घर से निकलते ही पुलिस ने धीरज को हिरासत में ले लिया. थाने ला कर उस से सुरेंद्र लवानिया और विजय कुमार के बारे में पूछताछ की गई.

धीरज ने पुलिस से कहा, ‘‘उन दोनों के लापता होने के पीछे मेरा कोई हाथ नहीं है. हो सकता है कि उन का अपहरण हो गया हो, आप उन के मोबाइल को सर्विलांस पर लगवा दें, शायद उन की लोकेशन का पता चल जाए.’’

उधर पुलिस को दोनों के ही घर वालों ने बताया था कि सुरेंद्र लवानिया धीरज के बुलावे पर ही घर से अपनी वरना कार से धीरज से किराया लेने निकले थे, दूसरी ओर विजय कुमार झा अपनी बाइक से गए थे. दोनों के अपहरण के कयास पर पुलिस दोनों के वाहनों की सरगर्मी से तलाश में जुट गई.

गांव वालों से मिली संदेहास्पद जानकारी

पुलिस अधिकारियों को लग रहा था कि या तो दोनों का अपहरण हुआ है या फिर उन के साथ कोई अनहोनी हो गई है. एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने सीओ (सदर) विकास जायसवाल के नेतृत्व में 3 टीमें बनाईं. एक टीम का नेतृत्व इंसपेक्टर (ताजगंज) अनुज कुमार को करना था, दूसरी टीम को इंसपेक्टर (सदर) कमलेश सिंह के साथ करना था, इन के साथ एक टीम क्राइम ब्रांच की भी थी. एसपी (सिटी) प्रशांत वर्मा को तीनों टीमों की मौनिटरिंग करनी थी.

इस बीच पुलिस ने विजय और सुरेंद्र के मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगा दिया था पता चला कि दोनों फोन नंबर घटना वाले दिन दोपहर 2 बजे से बंद हैं. यह बात भी सामने आई कि दोपहर 2 बजे मृतकों व धीरज के मोबाइलों की लोकेशन कौलक्खा स्थित स्कूल में ही थी.

पुलिस ने गांव वालों से पूछताछ की तो कुछ लोगों ने बताया कि उन्होंने सफेद रंग की एक कार स्कूल तक आती देखी थी. पुलिस को यह भी पता चला कि धीरज स्वयं को डा. बी.आर. अंबेडकर जूनियर हाईस्कूल का मालिक बताता था.

इन सब बातों से पुलिस को शक हुआ कि धीरज जरूर ही कुछ छिपा रहा है. पुलिस धीरज से प्यार से पूछताछ कर चुकी थी पर उस ने कुछ नहीं बताया था. लिहाजा उस के साथ सख्ती जरूरी थी. पुलिस की सख्ती के आगे धीरज टूट गया और उस ने सब उगल दिया.

उस ने बताया कि उस ने उन दोनों की गला घोंट कर हत्या करने के बाद उन के शवों को स्कूल परिसर में ही गड्ढा खोद कर दफन कर दिया है.

दोहरे हत्याकांड की बात सुन कर पुलिस अधिकारी सन्न रह गए. पुलिस ने दोनों के घर वालों को केस खुलने की सूचना दे दी. हत्या की जानकारी होते ही दोनों के परिवार में कोहराम मच गया. पुलिस ने धीरज के साथ हत्या में शामिल 3 अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया. आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस स्कूल पहुंच गई और रात में ही खुदाई का काम शुरू कर दिया.

खुदाई कर पुलिस ने निकाली लाशें

आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने 3 घंटे की खुदाई के बाद स्कूल के कमरे के बाहर गड्ढे से दोनों शव बरामद कर लिए. मौके की काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने सुरेंद्र लवानिया और विजय कुमार के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. एसपी (सिटी) प्रशांत वर्मा ने अभियुक्तों से पूछताछ की तो सुरेंद्र लवानिया और विजय कुमार की हत्या की जो कहानी सामने आई, कुछ इस तरह थी—

करीब 2 साल पहले प्रिंसिपल विजय कुमार झा की सिफारिश पर सुरेंद्र कुमार लवानिया ने 3 हजार रुपए प्रतिमाह किराए पर अपना एक स्कूल धीरज को दे दिया था. धीरज बीएससी करने के बाद बीएड कर रहा था. वह महत्वकांक्षा था. 2 माह पैसा देने के बाद उस ने किराया देना बंद कर दिया था.

किराया मांगने पर वह टालमटोल कर देता था. स्कूल के मालिक सुरेंद्र कुमार लवानिया उस पर किराया देने का दबाव बना रहे थे. उन्होंने कह दिया था कि किराया दो नहीं तो इस साल जुलाई से हम स्कूल वापस ले लेंगे.

लेकिन धीरज की नीयत खराब हो चुकी थी. वह स्कूल को कब्जाने के साथ ही किराया भी नहीं देना चाहता था. इस के लिए उस ने अपने भाइयों संदीप, नीरज और गांव के ही दोस्त विजय के साथ मिल कर एक खतरनाक योजना बना ली थी.

योजना के अनुसार उस ने स्कूल के मालिक लवानिया साहब को फोन पर किराया देने की बात कही. उस ने उन से कहा कि आप अपने साथ प्रिंसिपल विजय को भी ले आए ताकि उन के सामने रुपए दिए जाएंगे तो ठीक रहेगा. इस के साथ ही धीरज अपने भाइयों संदीप, धीरज और नीरज के साथ स्कूल पहुंच गया. पूर्वाह्न 11 बजे से पहले प्रधानाचार्य विजय कुमार झा अपनी बाइक से स्कूल पहुंच गए. उन्होंने स्कूल के औफिस में बैठ कर में धीरज से किराए के रुपए मांगे. इसी बीच धीरज और प्रिंसिपल विजय में कहासुनी हो गई. जिस के चलते दोनों में हाथापाई होने लगी. तभी धीरज ने अपने भाइयों और दोस्त की मदद से विजय को दबोच लिया और गला घोंट कर हत्या कर दी.

कुछ ही देर में स्कूल मालिक सुरेंद्र लवानिया भी धीरज के पास पहुंच गए. तब तक आरोपियों ने विजय की लाश कमरे में ही परदे के पीछे छिपा दी थी.

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सुरेंद्र ने धीरज से पूछा कि विजय कुमार झा अभी नहीं आए. तब धीरज ने मना कर दिया कि अभी नहीं आए. इस बीच हत्यारों ने विजय की बाइक भी छिपा दी थी.

बारीबारी से मार डाला दोनों को

सुरेंद्र लवानिया ने धीरज से किराए के रुपए मांगे तो धीरज फिर टालमटोल करने लगा. इस पर लवानिया भड़क गए. उन्होंने कहा कि तुम ने फोन पर रुपए देने की बात कही थी. यदि तुम रुपए नहीं दोगे तो स्कूल नहीं चला पाओगे. इस पर धीरज उन से भिड़ गया और हाथापाई करने लगा.

सरस सलिल विशेष

सुरेंद्र लवानिया अकेले थे और आरोपी 4 थे. इस बीच सुरेंद्र फर्श पर गिर गए. गिरने के दौरान उन्हें परदे के पीछे छिपी विजय की लाश दिखाई दी तो उन के मुंह से चीख निकल गई.

इस के बाद धीरज और उस के भाइयों के सिर पर खून सवार हो गया. भेद खुलने के डर से उन लोगों ने सुरेंद्र को पकड़ लिया और धीरज ने एक कपड़े से उन का गला घोंट दिया.

घटना के बारे में धीरज के पिता पप्पूराम को जानकारी हुई तो वह भी स्कूल आ गया. सुरेंद्र की कार हुंडई वरना को धीरज और उस का पिता पप्पूराम ले गए. कार को ये लोग सैंया में लादूखेड़ा के पास राजस्थान बार्डर पर खड़ी कर आए.

बाइक को संदीप का दोस्त विजय अपने साथ ले गया. इस के बाद 9 बजे धीरज और उस के भाई फिर स्कूल पहुंचे और 4 फीट लंबा और 4 फीट गहरा गड्ढा खोद कर दोनों शवों को उस में दफन कर दिया.

29 जून की सुबह एक टै्रैक्टर ट्रौली मिट्टी मंगवा कर स्कूल के कमरों के सामने डाल दी. जिस से किसी को शक न हो. मोबाइल, पर्स व अन्य कागजात भी आरोपियों ने जला कर शवों के साथ गडढे में दबा दिए थे. पुलिस ने जले मोबाइल फोन, कार, बाइक, गला घोंटने वाला कपड़ा, फावड़ा आदि भी बरामद कर लिए.

इस दोहरे हत्याकांड का परदाफाश करने वाली टीम में क्राइम ब्रांच प्रभारी अरुण बालियान, एसआई अशोक कुमार, रमित कुमार, प्रदीप कौशिक, अरुण, कांस्टेबल हृदेश, आदेश त्रिपाठी, अजीत, करणवीर, विवेक, प्रशांत कुमार, पंकज, दीपू शामिल थे. गुमशुदगी की रिपोर्ट को हत्या की रिपेर्ट  में तरमीम कर पुलिस ने चारों हत्यारोपियों को न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.   द्य

— कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

(कहानी सौजन्य मनोहर कहानी)

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