शिवानी वर्मा आगरा के सब से पुराने और मशहूर आगरा कालेज से बीएससी कर रही थी. पिता रविंद्र वर्मा फार्मासिस्ट थे और मां ऊषा घर संभालती थीं. उस के 2 भाई थे सचिन और शिवम. रविंद्र वर्मा का थाना सदर की ओम एन्क्लेव कालोनी में काफी अच्छा मकान था.

कुल मिला कर उन का छोटा और खुशहाल परिवार था. रविंद्र वर्मा शिवानी को उच्च शिक्षा दिलाना चाहते थे, ताकि उसे अच्छी नौकरी मिल सके. शिवानी भी मन लगा कर पढ़ रही थी. अचानक उस के साथ कुछ ऐसा घटा कि रविंद्र के सारे सपने धरे के धरे रह गए.

आगरा कालेज से ही शाहगंज के शंकरगढ़ का रहने वाला गौरव बीए कर रहा था. कालेज में कभी मुलाकात होने से शिवानी की गौरव से दोस्ती हो गई. कालेज में दोनों की अकसर मुलाकात हो जाती थीं.

गौरव गरीब घर का जरूर था, लेकिन पढ़ने में ठीकठाक था. उस के पिता रामस्नेही घर के बाहर फल का ठेला लगाते थे. उस के घर एक भैंस भी थी, जिस की देखभाल उस की मां करती थीं. भैंस के दूध से भी कुछ कमाई हो जाती थी. गौरव का एक भाई और 2 बहनें थीं.

शिवानी और गौरव जब भी मिलते, देर तक बातचीत करते थे. गौरव अपना कैरियर बनाने के लिए संघर्ष कर रहा था. लेकिन लगातार मिलने से उन के बीच प्यार की कोपलें फूटने लगीं. उन्हें महसूस होने लगा कि वे एकदूसरे को चाहने लगे हैं, वे एकदूसरे के लिए ही बने हैं.

लेकिन गौरव के दिल में एक बात खटकती थी कि वह दूसरी जाति का है. जब शिवानी को उस की हकीकत पता चलेगी तो कहीं वह मुंह न मोड़ ले. इस की एक वजह यह थी कि उस की जाति शिवानी की जाति से निम्न थी.

आगे कुछ गड़बड़ न हो, यह जानने के लिए एक दिन गौरव ने शिवानी से कहा, ‘‘शिवानी, हम दोनों एकदूसरे को कितना प्यार करते हैं, यह सिर्फ हम ही जानते हैं. पर आज मैं तुम्हें अपनी हकीकत बताना चाहता हूं. शिवानी मेरी जाति तुम से अलग है. कहीं तुम मुझे छोड़ तो नहीं दोगी?’’

गौरव की बात सुन कर शिवानी ने हंसते हुए कहा, ‘‘गौरव, तुम्हें पता होना चाहिए कि मैं ने तुम से प्यार किया है न कि तुम्हारी जाति से. तुम किस जाति के हो, किस धर्म के हो, मुझे कोई मतलब नहीं है. मैं सिर्फ तुम से प्यार करती हूं.’’

शिवानी की बात सुन कर गौरव ने उसे सीने से लगा कर कहा, ‘‘शिवानी अब हमारे प्यार में कितनी भी बाधाएं आएं, मैं तुम्हारा साथ कभी नहीं छोड़ूंगा. मैं मरते दम तक तुम्हारा साथ दूंगा.’’

जवाब में शिवानी ने भी कहा, ‘‘हमारे प्यार की राह में समाज, परिवार या कोई भी आए, मैं इस प्यार की खातिर सब को छोड़ दूंगी, पर तुम्हें नहीं छोड़ूंगी.’’

शिवानी के इरादे भले ही मजबूत थे, पर गौरव निश्चिंत नहीं था. कालेज के साथियों को गौरव के प्यार की खबर लगी तो किसी ने यह खबर शिवानी के पिता को दे दी. रविंद्र वर्मा को बेटी के प्यार का पता चला तो वह परेशान हो उठे. उस दिन शिवानी कालेज से लौटी तो उन्होंने पूछा, ‘‘शिवानी, आजकल तुम्हारा मन पढ़ाई में नहीं, कहीं और ही भटक रहा है?’’

‘‘क्या मतलब पापा?’’ शिवानी ने बेचैनी से पूछा.

‘‘मतलब कि तुम्हारा मन पढ़ाई में नहीं लग रहा है. बेटा, मैं ने तो सोचा था कि तुम मन लगा कर पढ़ाई करोगी, जिस से कोई ढंग की नौकरी मिल जाएगी, उस के बाद हम तुम्हारी शादी कर देंगे.’’

‘‘पापा, पहले पढ़ाई तो पूरी हो जाए, शादी की बात बाद में सोचेंगे.’’ शिवानी ने कहा.

अचानक रविंद्र ने गुस्से में पत्नी से कहा, ‘‘ऊषा, इस लड़की को संभालो. आजकल इस की दोस्ती कालेज के लड़कों से कुछ ज्यादा ही हो गई है. कहीं ऐसा न हो हम धोखा खा जाएं.’’

सरस सलिल विशेष

शिवानी समझ गई कि पापा को गौरव के बारे में पता चल गया है, इसलिए बिना कुछ कहे वह अपने कमरे में चली गई. इस के बाद ऊषा और रविंद्र काफी देर तक बातें करते रहे. ऊषा ने पति को आश्वासन दिया कि वह शिवानी को समझाएंगी कि फालतू के चक्करों में न पड़ कर वह अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे.

शिवानी कमरे से ही मम्मीपापा की बातें सुन रही थी. उन की बातों से वह समझ गई कि अब मम्मीपापा उस पर बंदिशें लगाएंगे. उस ने गौरव को फोन कर के कह दिया कि अब वह थोड़ा सतर्क रहे, क्योंकि घर वालों को उन के संबंधों की जानकारी हो गई है.

अगले दिन शिवानी कालेज जाने के लिए तैयार हो रही थी तो ऊषा ने कहा, ‘‘अब तुम्हें कालेज जाने की क्या जरूरत है, जब तुम्हारा पढ़ाई में मन ही नहीं लग रहा तो घर बैठो.’’

‘‘मम्मी, आप लोग गलत सोच रहे हैं. ऐसा कुछ भी नहीं है. मैं अपनी पढ़ाई को ले कर पूरी तरह गंभीर हूं.’’ शिवानी ने कहा.

‘‘बेटा, मैं जो कह रही हूं, तुम्हारे भले के लिए कह रही हूं. समझो या न समझो, तुम्हारी मरजी.’’ ऊषा ने कहा.

‘‘ठीक है मम्मी, अब मैं कालेज जाऊं?’’ कह कर शिवानी कालेज चली गई.

कालेज पहुंच कर शिवानी ने गौरव को सारी बात बता कर कहा, ‘‘गौरव, मम्मीपापा के तेवरों से लगता है कि वे बहुत जल्दी मेरी शादी कहीं कर देंगे. मेरी शादी कहीं और हो, उस के पहले ही हमें कुछ करना होगा.’’

‘‘लेकिन शिवानी अभी तो हमारी पढ़ाई भी पूरी नहीं हुई है.’’ गौरव ने चिंता जताई तो शिवानी ने कहा, ‘‘इतना भी परेशान होने की जरूरत नहीं है. दुनिया की कोई भी ताकत हमें एकदूसरे से अलग नहीं कर सकती.’’

इस के बाद रविंद्र को लगातार लोग बताने लगे कि उन्होंने उन की बेटी को एक लड़के के साथ घूमतेफिरते और हंसहंस कर बातें करते देखा है. लगातार शिकायतें मिलने की वजह से एक दिन रविंद्र ने शिवानी से साफ कह दिया कि अगर वह नहीं मानी तो उस की पढ़ाई बंद करा दी जाएगी. शिवानी को लगा कि घर वाले उस के प्यार में रोड़ा डाल रहे हैं तो उस ने गौरव से बात कर के भाग जाने का फैसला कर लिया.

इस के बाद योजना बना कर एक दिन शिवानी गौरव के साथ भाग गई. आगरा के कैंट स्टेशन के पास दोनों को किसी ने देख लिया तो उस ने यह बात रविंद्र को बता दी. खबर मिलते ही रविंद्र कैंट स्टेशन पहुंचे और वहां दोनों को पकड़ लिया. गौरव को उन्होंने डांटफटकार कर भगा दिया और शिवानी को घर ले आए. इस के बाद उन्होंने शिवानी को घर में ही कैद कर दिया.

रविंद्र ने उस व्यक्ति का आभार व्यक्त किया, जिस की सूचना पर उन की इज्जत बच गई थी, वरना अच्छीखासी बदनामी हो जाती. इस के बाद रविंद्र ने शिवानी के लिए लड़का ढूंढना शुरू कर दिया.

जबकि शिवानी पिंजरे में कैद चिडि़या की तरह उड़ने के लिए व्याकुल थी. वह चोरीछिपे गौरव से फोन पर बातें कर लेती थी. शिवानी उस कैद से मुक्त होना चाहती थी. वह घर से भाग निकलने का मौका तलाश रही थी.

रविंद्र वर्मा बेटी के लिए बेहद चिंतित थे, क्योंकि एक दिन शिवानी ने मां से साफ कह दिया था कि वह बालिग है और अपना अच्छाबुरा सोच सकती है. इसलिए वह अपनी पसंद के लड़के से ही शादी करेगी.

बेटी का यह कदम उन की समाज में बनी इज्जत को धूल में मिला सकता था, इसलिए उन्होंने तय कर लिया कि कुछ भी हो, वह जल्दी ही कहीं शिवानी की शादी कर देंगे. लेकिन वह शादी कर पाते, उस के पहले ही 18 फरवरी, 2016 को शिवानी गौरव के साथ भाग कर दिल्ली चली गई, जहां उत्तमनगर में किराए का कमरा ले कर रहने लगी. उन्होंने कोर्ट में शादी भी कर ली.

बेटी के इस तरह घर से गायब होने से रविंद्र समझ गए कि उसे गौरव ही बहलाफुसला कर भगा ले गया है, उन्होंने गौरव के खिलाफ भादंवि की धारा 366 के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. मुकदमा दर्ज होने के बाद गौरव के परिवार वालों पर पुलिस ने लड़की को बरामद कराने का दबाव डाला.

गौरव के पिता रामस्नेही सीधेसादे आदमी थे. वह अपनी रिश्तेदारियों में उसे तलाश करने लगे. गौरव कहीं नहीं मिला. काफी भागदौड़ के बाद उन्हें गौरव और शिवानी के दिल्ली में होने की जानकारी मिली. इस के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस दिल्ली पहुंच गई और दिल्ली पुलिस की मदद से गौरव और शिवानी को उत्तमनगर से बरामद कर लिया. इस तरह 45 दिनों बाद वे पुलिस की पकड़ में आ गए.

पुलिस ने दोनों को अदालत में पेश किया, जहां शिवानी ने अपने बयान में कहा कि वह बालिग है और अपनी मरजी से गौरव के साथ गई थी. वह गौरव से प्यार करती है और उस ने उस से कोर्ट में शादी भी कर ली है. शिवानी के इसी बयान के आधार पर अदालत से गौरव को जमानत मिल गई.

रविंद्र ने बेटी को अपने संरक्षण में लेने के लिए अदालत में अरजी लगाई तो शिवानी ने विरोध किया कि मांबाप उसे घर ले जा कर मार डालेंगे. लेकिन रविंद्र ने अदालत से कहा कि वह बेटी को घर ले जा कर सामाजिक रीतिरिवाज से उस की शादी कर देंगे. लड़की को पढ़ने के लिए भी भेजेंगे. रविंद्र के इस बयान पर मजिस्ट्रैट ने शिवानी को उस के पिता को सौंप दिया.

रविंद्र ने अदालत में जो कुछ कहा था, घर आने पर पलट गए. उन्होंने शिवानी पर बंदिशें लगा दीं. इस के अलावा वह उस के लिए लड़का भी ढूंढने लगे. आखिर मुरैना में उन्हें एक लड़का पसंद आ गया. शिवानी को जब पता चला तो उस ने विरोध किया. उस के विरोध के बावजूद उन्होंने उस का रिश्ता पक्का कर दिया.

6 फरवरी, 2018 को शिवानी की शादी का दिन भी तय कर दिया गया. दिन तय होने के बाद शिवानी परेशान रहने लगी. वह किसी भी तरह घर से निकलना चाहती थी, लेकिन बाहर जाने का उसे कोई रास्ता नजर नहीं आ रहा था. उधर गौरव भी काफी परेशान था. उन्हें 6 फरवरी से पहले ही घर से भाग जाने का कोई रास्ता निकालना था.

रविंद्र ने कई बार गौरव को अपने घर के आसपास घूमते देखा था. आखिर एक दिन उस ने गौरव को धमकाया कि अब वह इधर कतई दिखाई न दे. फिर एक दिन हिम्मत कर के शिवानी ने पिता से कह दिया, ‘‘पापा, जब मेरी शादी गौरव से हो चुकी है तो आप मेरी शादी दूसरी जगह क्यों कर रहे हैं?’’

बेटी की बात को अनसुना कर रविंद्र बाहर चले गए. अब शिवानी ऐसा कुछ करना चाहती थी, जिस से उस का रिश्ता टूट जाए. इस बारे में उस ने गौरव से बात की तो उस ने कहा कि वह उस की हर तरह से मदद करेगा. एक दिन शिवानी का ममेरा भाई मनीष पत्नी के साथ उन के घर आया और रविंद्र से गोवर्धन परिक्रमा के लिए चलने को कहा.

रविंद्र पत्नी के साथ गोवर्धन परिक्रमा के लिए जाना तो चाहते थे, लेकिन वह शिवानी को घर में अकेली नहीं छोड़ना चाहते थे. इसलिए उन्होंने शिवानी को भी चलने को कहा. उस ने कपड़े वगैरह बैग में रख कर तैयारी तो कर ली, लेकिन मौका मिलते ही गौरव को फोन कर के कह दिया कि शाम 6 बजे घर के सभी लोग गोवर्धन परिक्रमा के लिए जा रहे हैं. उन्हें लौटने में 4 घंटे तो लग ही जाएंगे.

रविंद्र वर्मा के घर के निचले हिस्से में पंकज सिंह भदौरिया पत्नी और 2बच्चों के साथ किराए पर रहते थे. वह अध्यापक थे. उन की पत्नी भी अध्यापक थीं. शाम को जब सभी गोवर्धन परिक्रमा के लिए घर से निकलने लगे तो योजना के अनुसार शिवानी ने तबीयत ठीक न होने का बहाना कर के कहा कि अब वह नहीं जा सकती. घर वालों ने भी उस से ज्यादा जिद नहीं की.

घर से निकलते समय रविंद्र ने किराएदार पंकज सिंह और उन की पत्नी से शिवानी का ध्यान रखने के लिए कह दिया. घर वालों के जाने के बाद शिवानी गौरव का इंतजार करने लगी. उस ने दरवाजा खुला ही छोड़ दिया था. जैसे ही गौरव आया, उस ने उस से छत पर बैठ कर इंतजार करने को कहा.

रात 10-11 बजे सभी लोग लौटे तो घर के मेनगेट में ताला लगा कर रविंद्र वर्मा निश्चिंत हो गए. थके होने की वजह से सभी को जल्दी ही नींद आ गई. लेकिन शिवम मोबाइल पर गेम खेल रहा था.

शिवानी उस के सोने के इंतजार में करवटें बदलती रही. ऊपर पड़ोसी की छत पर बैठा गौरव शिवानी का इंतजार कर रहा था. काफी देर बाद शिवम सो गया तो शिवानी उठी और छत पर पहुंच गई. दोनों एकदूसरे की बांहों में समा गए. उस समय दोनों दुनियाजहान से बेखबर थे.

रविंद्र सुबह सैर के लिए जाते थे, इसलिए उन्होंने मोबाइल फोन में अलार्म लगा रखा था. जैसे ही अलार्म बजा, शिवानी गौरव से यह कह कर नीचे आ गई कि पापा घूमने चले जाएंगे तो वह उसे यहां से निकाल देगी.

नीचे आ कर शिवानी अपने बैड पर लेट गई. तभी गौरव का शिवानी के फोन पर मैसेज आया कि उसे प्यास लगी है. शिवानी ने पिता के कमरे में नजर डाली तो वहां कोई दिखाई नहीं दिया. वह पानी की बोतल ले कर छत पर चली गई. रविंद्र उस समय घर में ही थे. उन्होंने शिवानी को छत पर जाते देख लिया था. वह भी उस के पीछेपीछे छत पर पहुंच गए.

रविंद्र ने शिवानी और गौरव को एक साथ देखा तो उन का खून खौल उठा. पिता को देख कर शिवानी डर से कांपने लगी. गौरव भी घबरा गया. बेटी की इस करतूत से उन के सिर पर खून सवार हो गया, फिर उन्होंने कुछ ऐसा किया कि वहां मौत का तांडव मच गया. शिवानी अचानक सीढि़यों पर गिरी और वहां खून ही खून फैल गया.

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सुबह कोई सवा 5 बजे पुलिस कंट्रोलरूम को सूचना मिली कि ओम एन्क्लेव कालोनी में एक लड़की ने आत्महत्या कर ली है. यह इलाका थाना सदर के अंतर्गत आता था. पुलिस कंट्रोलरूम ने यह सूचना थाना सदर पुलिस को दे दी. थानाप्रभारी नौरत्न गौतम उस दिन छुट्टी पर थे. थाने का चार्ज एसएसआई अखिलेश सिंह के पास था. वह किसी मामले की तफ्तीश में कहीं गए हुए थे.

एसएसपी की सूचना पर चौकीप्रभारी अरुण कुमार पुलिस बल के साथ ओम एन्क्लेव कालोनी स्थित घटनास्थल पर पहुंच गए. डौग स्क्वायड, फोरैंसिक टीम को भी सूचित कर दिया गया.

सूचना पा कर एसएसआई अखिलेश सिंह भी रविंद्र वर्मा के घर पहुंच गए. पुलिस ने निरीक्षण किया तो सीढि़यों पर रविंद्र की 20 साल की बेटी शिवानी की गरदन कटी लाश मिली.

लाश के आसपास काफी खून फैला था. वहीं पर एक पेपर कटर पड़ा था. वहां संघर्ष के निशान भी दिखाई दिए. पूछताछ में रविंद्र ने बताया कि उन की बेटी शिवानी ने आत्महत्या कर ली है.

अखिलेश सिंह ने पेपर कटर को कब्जे में ले लिया. फोरैंसिक टीम आई तो पेपर कटर उस के हवाले कर दिया गया. कुछ ही देर में एसपी (सिटी) कुमारी अनुपमा सिंह और महिला थाने का स्टाफ भी आ गया. पुलिस ने ध्यान से देखा तो शिवानी की लाश के पास खून से गौरव लिखा था.

पुलिस ने रविंद्र वर्मा से गौरव के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि वह किसी गौरव को नहीं जानते. सूचना पा कर इंसपेक्टर रकाबगंज संजीव भी वहां आ गए. फोरैंसिक टीम ने बताया कि खून सने पैरों के जो निशान हैं, ये अलगअलग आदमी के हैं. लेकिन छत तक पैरों के जो निशान गए हैं, वे एक ही आदमी के हैं.

पेपर कटर की मूठ पर एक हाथ का निशान था, लेकिन लोहे वाले हिस्से पर 2 हाथों के निशान थे. इस से साफ हो गया कि वहां शिवानी के अलावा 2 लोग थे. घर के सिंक की जांच की गई तो वहां खून के निशान पाए गए. इस का मतलब कत्ल कर के कातिल ने वहां हाथ धोए थे. किराएदार पंकज भदौरिया ने बताया कि उन्हें तो रविंद्र वर्मा ने जगा कर बताया था कि उन की बेटी ने आत्महत्या कर ली है. इस के अलावा उन्हें घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं है.

रविंद्र वर्मा ने बताया कि गैस की दुर्गंध आने पर वह रसोई में गए और लाइट जलाने के बजाय पंखा औन कर दिया. इस के बाद ऊपर जाने लगे तो देखा कि बेटी की लाश पड़ी है. वह घबरा कर नीचे आ गए और किराएदार को जगा कर सारी बात बताई. इस के बाद पुलिस कंट्रोलरूम को सूचना दे दी.

रविंद्र की इस कहानी पर पुलिस को विश्वास नहीं हो रहा था. उन के कपड़े उतरवा कर देखा गया तो बनियान पर खून के निशान नजर आए. उन के पैरों पर भी खून लगा था. वह शक के दायरे में आ गए. घटनास्थल की काररवाई निपटा कर पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया.

पुलिस रविंद्र को पूछताछ के लिए थाने ले आई. अज्ञात के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने रविंद्र से पूछताछ शुरू की तो वह यही कहते रहे कि बेटी ने आत्महत्या की है. जबकि पुलिस की नजरों में यह सीधे हत्या का मामला था, क्योंकि कोई भी व्यक्ति खुद अपना गला नहीं रेत सकता.

बारबार पूछने के बाद भी रविंद्र ने गौरव के बारे में कुछ नहीं बताया, जबकि पुलिस के लिए फर्श पर लिखा गौरव एक महत्त्वपूर्ण सुराग था. पुलिस को इसी से आगे बढ़ने का रास्ता मिल सकता था.

पोस्टमार्टम के बाद शिवानी का शव रविंद्र वर्मा को सौंप दिया गया था. उन्होंने उस का दाहसंस्कार भी कर दिया. इस बीच पुलिस के सामने काफी कुछ साफ हो गया था. पुलिस को गौरव के बारे में पता चल गया था कि वह शिवानी का दोस्त था और उस के साथ पढ़ता था. वह आगरा के शाहगंज में रहता है.

अगले दिन इंसपेक्टर संजीव सिंह और चौकीप्रभारी अरुण कुमार को एसपी सिटी ने गौरव से पूछताछ करने के निर्देश दिए. पुलिस गौरव के घर पहुंची तो उस के पिता रामस्नेही ने बताया कि कुछ देर पहले ही वह घर से निकला है. पिता ने फोन कर के उसे घर बुला लिया. पुलिस पूछताछ के लिए उसे थाने ले आई.

गौरव ने अपना सिर मुंडवा रखा था. वह काफी डरा हुआ था. थाने आते ही उस ने कहा, ‘‘साहब, आप मुझे मारिएगा मत, मैं आप को सब कुछ सचसच बता दूंगा. मैं ने शिवानी को नहीं मारा है. मैं तो उस से प्यार करता था. हम ने कोर्टमैरिज भी कर ली थी. उसी के बुलाने पर 28 अक्तूबर, 2017 को मैं उस के घर गया था. दुर्भाग्य से उस के पिता ने दोनों को एक साथ देख लिया.’’

गौरव ने आगे जो बताया, उस के अनुसार, रविंद्र उसे मारना चाहते थे, लेकिन शिवानी उसे बचाने के लिए बीच में आ गई. रविंद्र वर्मा के हाथ से उस ने पेपर कटर छीनने की कोशिश की, जिस से उस की 2 अंगुलियां कट गईं. इस के बाद गुस्से में रविंद्र ने पेपर कटर चलाया तो शिवानी फिर सामने आ गई, जिस से पेपर कटर उस के गले में लगा और उस का गला कट गया.

रविंद्र वर्मा पर खून सवार था. शिवानी घायल हो कर सीढि़यों पर गिर गई, इस के बावजूद वह उस की ओर झपटा. तब शिवानी ने अपना गला पकड़े हुए कहा, ‘‘गौरव, भाग जाओ, वरना यह तुम्हें भी मार देंगे.’’

उस हालत में गौरव को कुछ नहीं सूझा. वह भाग कर छत पर गया और किसी तरह वहां से कूद कर भाग खड़ा हुआ. लेकिन शिवानी के बारे में सोचसोच कर वह परेशान होता रहा. अगले दिन गौरव ने पुलिस के डर से अपना सिर मुंडवा लिया. गौरव ने जो बताया था, वह पुलिस को सही लगा. गौरव से पूछताछ के बाद पुलिस ने रविंद्र वर्मा को थाने बुला लिया. थाने में गौरव को देख कर रविंद्र के पसीने छूट गए.

अब कहनेसुनने को कुछ नहीं था. पूछताछ में रविंद्र ने कहा कि शिवानी की हत्या करने का उस का इरादा नहीं था, पर गुस्से में पेपर कटर चल गया. उस ने यह भी स्वीकार किया कि बेटी के दूसरी जाति के लड़के के साथ संबंध उसे स्वीकार नहीं थे. वह अपनी बेटी की शादी अपनी ही जाति के लड़के के साथ करना चाहता था. लेकिन शिवानी बहुत जिद्दी थी, जिस का अंजाम अच्छा नहीं हुआ और डोली उठने से पहले उस की अर्थी उठ गई.

रविंद्र ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया तो पुलिस ने उसे जेल भेजने की तैयारी कर ली. पुलिस उसे ले जा रही थी, तभी उस के घर की महिलाओं ने थाने के बाहर हंगामा शुरू कर दिया. पुलिस के उच्चाधिकारियों ने उन्हें समझाबुझा कर शांत किया और रविंद्र वर्मा को 30 अक्तूबर को न्यायालय में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया.

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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