वेब सीरीज Purushapur में बोल्ड सीन का है भरमार, पढ़ें रिव्यू

रेटिंग: आधा स्टार

निर्माता :श्रेष्ठा भावना ,सचिन मोहिते वह आकांक्षा शुक्ला

निर्देशक : शचिंद्र वत्स

कलाकार : अनु कपूर, शिल्पा शिंदे ,मिलिंद सोमन ,साहिल  सेठिया, पालोमी दास, अनंत जोशी, शाहिर शेख, फ्लोरा सैनी ,लाल आदित्य, अस्मिता बक्शी ,कशिश राय वह अन्य

अवधि :7 एपिसोड ,(1 एपिसोड 28 मिनट बाकी लगभग 19 मिनट) कुल अवधि 2 घंटा 22 मिनट

ओटीटी प्लेटफार्म: आल्ट बालाजी और जी5

पुरुष प्रधान काल्पनिक राज्य पौरुषपुर की सेक्स व समलैंगिक संबंधों से सराबोर वेब सीरीज  पौरुषपुर लेकर शचिन्द वत्स आए हैं. यह लिंग असमानता के खिलाफ जंग ,पुरुष सत्ता, राज्य ,धोखे और बदले की फेंटेसी वेब सीरीज है.यह स्त्री के सम्मान, बोरिस के अपमान और मोहब्बत की लड़ाई है.

कहानी:

यह कहानी है दुष्ट कामुकता में डूबे रहने वाले राजा भद्र प्रताप (अन्नू कपूर) की, जिनकी पहली पत्नी मीरा वती (शिल्पा शिंदे) है. मगर राजा भद्र प्रताप कई शादियां कर चुके हैं. और हर रानी राजा के साथ सुहागरात मनाने के बाद राजमहल से गायब हो जाती है .पर हर बार राजा भद्र प्रताप के लिए नई रानी  को लेकर मीरावती ही लाती है. मीरा वती सत्ता की भूखी है  और गुप्त राजनीतिक षड्यंत्र रचती रहती है .राजा भद्र प्रताप औरतों को महज बिस्तर का खिलौना व पैर की जूती समझते हैं .राजकुमार रणविजय को राज महल की एक दासी कला (पालोमी दास) से प्यार है .राजकुमार रणविजय (आदित्य लाल )हर दिन अपने कमरे में कला को नि: वस्त्र बैठाकर तस्वीर बनाता है .इसकी भनक मीरावती को लग जाती है .तब मीरा वती, कला को रानी बनाने का आश्वासन देकर उसे महाराजा भद्र प्रताप की रानी बना देती है .और रणविजय के कान भर देती है. मगर भद्र प्रताप और कला की सुहागरात के दूसरे दिन रणविजय ,कला से कह देता है कि धोखे की शादी को नहीं मानता और वही उसका प्यार है. दोनों पानी के अंदर एकजुट होते हैं. राजा कला को मौत की सजा सुनाते हैं. पर फांसी के फंदे से एक नकाबपोश( शाहिर शेख )उसे बचाकर किन्नर बोरीस( मिलिंद सोमन) के नगर घर में पहुंचा देता है .बोरिस हिजड़ा है, पर उसका नगर घर वेश्यालय है. जहां वह सभी को मार्शल आर्ट व युद्ध की कौशल की भी शिक्षा देता है . वहीं दूसरा नकाबपोश उर्फ वीर सिंह ,रणविजय को तहखाने में पहुंचा देता है .जहां भद्र प्रताप की दूसरी रानी नयनतारा (फ्लोरा सैनी ) है.भानु (शाहिर शेख), राजकुमार आदित्य का जुनून है, मीरा वती का प्यार है और बारिश की मोहब्बत है .यानी कि भानु के इन सभी के साथ सेक्स  संबंध है. उधर मीरावती का अपनी दासी संग समलैंगिक संबंध है.वीर सिंह ,नयनतारा का मंगेतर है ,जिसे भद्र प्रताप ने जबरन उठाकर अपनी रानी बना लिया था. राजा भद्र प्रताप के राज्य में औरतों को सिर उठाने की इजाजत नहीं. इन सबके बीच बोरिस व राजा भद्र प्रताप की दुश्मनी है .राजा भद्र प्रताप को खत्म करने के लिए महारानी मीरावती ,बोरिस से मदद मांगती है. पर राजा भद्र प्रताप को बोरिस के हाथों मरवाने के बाद बोरिस की भी हत्या करवा देती है.

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लेखन :

पितृसत्तात्मक सोच का विरोध और नारी उत्थान के नाम पर बनी पीरियड ड्रामा वेब सीरीज महज ब्लू फिल्म /सौफ्टपोर्न के अलावा कुछ नहीं है. हर एपिसोड में कम से कम 10 मिनट के सेक्स, संभोग, समलैंगिक सेक्स संबंध वाले दृश्य है .पटकथा का स्तर घटिया है. कहां कहानी के नाम पर शून्य है. संवाद भी सेक्स से सराबोर व साधारण है. लेखक ने शिल्पा शिंदे के किरदार महारानी मीरावती को नारी उत्थान का प्रतीक बताया है, मगर राजा भद्र प्रताप  की हवस व  प्रताड़ना के लिए नई-नई रानियां लड़कियां चुनकर वही लाती हैं, इसे उनका नारी उत्थान का कदम कहां जाएं? राजा की हवस का शिकार करवाने के बाद रानी को गायब कर बोरिस के वेश्या घर में पहुंचाना भी क्या नारी उत्थान है ? पर लेखक कि सोच यही है. लेखक निर्देशक का सारा ध्यान स्त्री देह कामोत्तेजक दृश्य और समलैंगिक स्त्री पुरुष के रति प्रसंग दिखाने पर पूरा ध्यान है ,परिणामता कहानी बिखरती रहती है .लेखकों ने सेक्स से भरपूर अश्लील दृश्यों के बनिस्बत कहानी पर ध्यान दिया होता, तो यह वेब सीरीज ठीक-ठाक बन जाती. संवाद के नाम पर अति सस्ती लाइनें हैं .किसी भी किरदार की कहानी उभर कर नहीं आती. यहां तक कि राज महल के षड्यंत्र भी ढंग से उजागर नहीं होते.

कला निर्देशक नितिन देसाई ने बेहतरीन काम किया है, जिससे वेब सीरीज की भव्यता है. घटिया ग्राफिक हैं.

निर्देशन

निर्देशन सही नहीं है. पर एडिटिंग जबरदस्त है .हर दृश्य को भव्यता के साथ फिल्माया गया है. वैसे भी कई फिल्मों व सीरियल के एडिटर शचींद्र वत्स ने पहली बार निर्देशन में कदम रखा है .यह वेब सीरीज देखकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या शचिंद्र वत्स अपनी पहचान सौफ्ट पोर्न वेब सीरीज फिल्म निर्देशक के रूप में स्थापित करना चाहते हैं.

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परिवार या बच्चों के साथ इसे नहीं देखा जा सकता.

शायद एकता कपूर और शोभा कपूर इस तरह की अश्लील वेब सीरीज  के साथ अपना नाम जोड़ने में शर्म महसूस करने लगी हैं. इसीलिए आल्ट बालाजी ने भले ही वेब सीरीज पौरुषपुर का निर्माण किया है, पर निर्माता के रूप में आल्ट बालाजी या शोभा कपूर या एकता कपूर का नाम नहीं दिया है. वैसे पौरुष पुरुष ने तो उल्लू एप को भी पीछे छोड़ दिया है.

अभिनय

जहां तक अभिनय का सवाल है 60 वर्ष की उम्र पार कर चुके दुष्ट, हवशी, कामुक राजा भद्र प्रताप के किरदार में अनु कपूर फिट नहीं बैठते. .औरतों को प्रताड़ित करने कि जिन दश्य को अनु कपूर ने निभाया है, कम से कम उन से ऐसी उम्मीद ना थी. अनु कपूर जैसे सम्मानित कलाकार ने इस अश्लील और सेक्स से सराबोर सीरीज में अभिनय क्या सोचकर किया है? यह समझ से परे है. इस सीरीज के  लगभग हर अश्लील दृश्य में उन्हें देखकर अविश्वसनीय लगता है. शिल्पा शिंदे रानी कम दासी ज्यादा नजर आती हैं. किन्नर बोरस के किरदार में मिलिंद सोमन का अभिनय जबरदस्त है. नाक में नथनी और माथे पर बिंदी लगाए  बोरस के रूप में मिलिंद सोमन लोगों का ध्यान बरबस आकर्षित करता है. नयनतारा के किरदार में फ्लोरा सैनी के हिस्से करने को कुछ रहा ही नहीं .अफसोस की बात है कि अन्नू कपूर शिल्पा शिंदे मिलिंद सोमन शाहिर शेख जैसे उत्कृष्ट व दिग्गज कलाकारों ने उस सॉफ्ट पॉर्न वेब सीरीज में अभिनय करने के लिए तैयार हुए.

‘कॉमेडी कपल’ : लिव इन रिलेशनशिप पर बनी फिल्म

रेटिंग : डेढ़ स्टार

निर्माता : यूडली फिल्मस

निर्देषक : नचिकेत सामंत

कलाकार : साकिब सलीम, श्वेता बसु प्रसाद, राजेश तैलंग, पूजा बेदी, आदर मलिक, सुभा राजपूत, जसमीत सिंह भाटिया, मधु सचदेवा और प्रणय मनचंदा व अन्य.

अवधिः  एक घंटा 57 मिनट

ओटीटी प्लेटफार्म : जी

महानगरों में आधुनिकता की बयार के चलते ‘लिव इन रिलेशनशिप’ का चलन बढ़ता जा रहा है, मगर लिव इन रिलेशनशिप में रहे वालों को किराए पर मकान मिलना बहुत मुश्किल है. इसी मूल मुद्दे पर काॅमेडी कपल के तौर पर स्टैंडअप काॅमेडी करने वाले दीप व जोया के इर्द गिर्द घूूमने वाली रोमांटिक काॅमेडी फिल्म ‘‘काॅमेडी कपल’’ लेकर आए हैं फिल्मकार नचिकेत सामंत. इस फिल्म को ओटीटी प्लेटफार्म ‘‘जी 5’’ पर 21 अक्टूबर से देखा जा सकता है. मगर इसे बच्चों के साथ देखना है या नहीं, यह सवाल भी अहम है.

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कहानी:

फिल्म की कहानी लिव-इन रिलेशनशिप में एक शहरी जोड़े की आधुनिक प्रेम कहानी है, जो भारत की पहली और सर्वश्रेष्ठ हास्य जोड़ी बनने की ख्वाहिश रखती है. कहानी गुड़गांव से शुरू होती है, जहां पर दीप शर्मा (साकिब सलीम) और जोया बत्रा (श्वेता बसु प्रसाद) लिव इन रिलेशनशिप में रहते हुए एक साथ स्टैंडअप काॅमेडी करते हैं. वह देश के पहले काॅमेडी कपल हैं. इनका मैनेजर सिद्धू (प्रणय मनचंदा)  है. दीप व जोया की जिंदगी की कहानी काफी अलग है. दीप शर्मा छोटी जगह बिलारी का रहने वाला है. उसके पिता मुकेश (राजेश तैलंग) और मां (मधु सचदेवा) ने किसी तरह उसे पढ़ाकर इंजीनियर बनाया.

दीप शर्मा गुडगांव में इंजीनियरिंग की नौकरी कर रहे थे. पर अचानक नौकरी छोड़कर जोया संग जोड़ी बनाकर स्टैंडअप काॅमेडी करने लगे. उधर जोया बत्रा की मां जोहरा (पूजा बेदी) पेरिस में रहती हैं. आत्मनिर्भर हैं और नग्न तस्वीरें बनाया करती हैं. जब जोया बहुत छोटी थी, तभी उसके पिता ने उन्हे छोड़ दिया था. जोया ने अपनी मां को दीप के बारे में सब कुछ बता रखा है. जोया की मां उसे समझाती रहती हैं कि दीप पर यकीन मत करना. सभी मर्द कमीने होते हैं. इधर दीप ने अपने माता पिता से सब कुछ छिपा रखा है.

दीप व जोया के ‘लिव इन रिलेषनशिप’ और उनका खुलेआम एक दूसरे को किस करना, सेक्स की बातें करना आदि हरकतों के चलते भी किराए के मकान नहीं मिलते. एक बार झूठ बोलकर खुद को भाई बहन बताकर किराए का मकान पा गए. पर सोसायटी वालों ने दोनो को लिफ्ट में एक दूसरे को ‘किस’ करते हुए एक दूसरे में आकंठ डूबे देखकर निकाल बाहर कर दिया. नया किराए का मकान मिलने तक दीप अपने दोस्त रोहण (आदार मलिक) के यहां और जोया अपनी सहेली अदिति (सुभा राजपूत) के यहां रहती है.

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हर बार एक नया झूठ बोलकर वह किराए का मकान पाते रहते हैं. तो वहीं स्टैंडअप काॅमेडिन के तौर पर ‘गौ मूत्र’ को लेकर किए गए जोक्स के चलते पुलिस व गौशाला वाले पीछे पड़ जाते हैं. दीप को माफी मांगनी पड़ती है. उनका सच दीप के माता पिता के सामने आ जाता है. दीप के माता पिता नाराज होकर बिलारी लौट जाते हैं. इधर गुस्से में दीप हर बात के लिए जोया को दोषी ठहरा देता है. दोनों अलग हो जाते हैं पर फिर एक हो जाते हैं.

लेखन व निर्देशनः

नचिकेत सामंत का निर्देशन आम रोमांटिक मसाला फिल्मों का ही अनुसरण करता है. कथानक का उपचार, दिशा व संपादन सब कुछ बेकार है. यह रोमांटिक काॅमेडी फिल्म है, मगर कमजोर पटकथा के चलते दर्शक को हंसी आती ही नही है. रोमांस के नाम पर ‘सेक्स’की बातें और ‘किस’/चुम्मा चाटी के अलावा कुछ नही है. सारे जोक्स अति साधारण हैं. पूरी फिल्म अधपकी खिचड़ी की तरह है. फिल्म ‘लिव इन रिलेशनशिप’ की वजह से समस्यायों को भी ठीक से चित्रित नही कर पायी. क्योंकि लेखक व निर्देशक ने कोई शोधकार्य किए बगैर हवा में तीर चलाने का प्रयास किया है. दीप और जोया के बीच का संघर्ष सरल और सामान्य होने के बजाय यदि रचनात्मक और अलग होता, तो फिल्म कुछ ठीक हो सकती थी. इंटरवल के बाद बीस पच्चीस मिनट अवश्य कुछ सकून देते हैं अन्यथा तकलीफ देह है. फिल्म का क्लायमेक्स बहुत ही साधारण व सतही है.

फिल्मकार ने टीवी के समाचार चैनलों  और दक्षिणपंथी राजनीतिक संगठनों द्वारा कॉमिक्स के सेंसर को लेकर भी बहुत ही सतही ढंग से कटाक्ष करने का प्रयास किया है. फिल्म में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे पर बात करने का लेखक व निर्देशक ने असफल प्रयास किया है. लेखक व निर्देशक दोनों को ही काफी मेहनत करने की जरुरत थी.

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अभिनयः

जोया बत्रा के किरदार में श्वेता बसु प्रसाद का अभिनय कमाल का है. श्वेता बसु प्रसाद ने एक बार फिर साबित कर दिखाया कि वह अपने समकालीन अभिनेत्रियों के मुकाबले एक पायदान ऊपर हैं. साकिब ने भी दीप के किरदार के साथ पूरा न्याय किया है. इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यही है कि साकिब सलीम और श्वेता बसु प्रसाद की ऑन स्क्रीन केमिस्ट्री जबरदस्त है. मगर दोनों ही कलाकारों को पटकथा व संवादों का सहारा नहीं मिला. दीप के पिता मुकेश के किरदार में राजेश तैलंग का अभिनय भी शानदार है. तैलंग ने दीप के सख्त, पारंपरिक पिता की भूमिका निभाई है, जो सोचते हैं कि विज्ञान सबसे अच्छा विषय है और एक इंजीनियर बनना एक पेशेवर कैरियर का चरम है. जबकि पूजा बेदी ने उदार, मुक्त उत्साही कलाकार माँ के छोटे किरदार में भी जान डाली है. अन्य कलाकारों का अभिनय ठीक ही है.

‘यारा’ फिल्म रिव्यू: काम न आया विद्युत जामवाल का एक्शन, जानें कैसी है फिल्म?

रेटिंग: एक स्टार

निर्माता: तिग्मांशु धूलिया और अजुरे इंटरटेनमेंट

निर्देशक: तिगमांशु धुलिया

 कलाकार: विद्युत जामवाल, श्रुति हासन, अमित साध, विजय वर्मा‌, केनी

ओटीटी प्लेटफॉर्म: Zee5

अवधि: 2 घंटे 10 मिनट

2011 की फ्रेंच फिल्म ‘ए गैंग स्टोरी’ (A Gang Story) का हिंदी रीमेक है ‘यारा’ (Yaara). इस फिल्म को रीमेक करने की तिग्मांशु धुलिया (Tigmanshu Dhulia) को जरूरत क्यों पड़ी, यह समझ से परे है? ‘यारा’ एक अपराध प्रधान नाटकीय फिल्म है, जिसकी कहानी भारत व नेपाल सीमा पर कार्यरत चार दोस्तों यानी  कि चौकड़ी गैंग के उतार-चढ़ाव की अति घटिया कहानी है.

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कहानी:

फ्रेंच फिल्म ‘द गैंग स्टोरी’ की रीमेक फिल्म ‘यारा’ की कहानी के केंद्र में 4 दोस्त हैं .बचपन में फागुन और मितवा राजस्थान से भागते हैं .चमन (संजय मिश्रा)  उन्हें भारत नेपाल सीमा पर तस्कर गिरोह से जोड़ देते हैं.जहां बचपन में ही फागुन, मितवा ,रिजवान और बहादुर स्मगलिंग करना शुरू करते हैं. बड़े होने पर फागुन (विद्युत जामवाल), मितवा (अमित साध), रिजवान (विजय वर्मा) और बहादुर (केनी सुमंतरी )पटना बैंक लूटने जाते हैं. कार चमन चला रहे थे. पुलिस मुठभेड़ में चमन मारे जाते है. पर यह चारों दोस्त बैंक से लूटी रकम लेकर वहां से भागने में सफल हो जाते हैं. अब स्मगलिंग के साथ साथ नक्सलियों को हथियार बेचने लगते हैं. नक्सली सुकन्या (श्रुति हासन) को फागुन दिल दे बैठा है. एक रात जब यह चारों सुकन्या के साथियों के साथ गांव में थे, तभी पुलिस आ जाती है. कई लोग मारे जाते हैं. फागुन, मितवा, रिजवान और बहादुर गिरफ्तार हो जाते हैं. सभी को अलग-अलग जेल में रखा जाता है. सबसे पहले मितवा जेल से छूटता है और वह भारत से बाहर जाकर शकील के लिए काम करने लगता है. शकील, फकीरा के लिए काम कर रहा है, जो कभी फागुन की चौकड़ी गैंग के साथ था.जेल से निकलने के बाद रिजवान, फागुन, बहादुर नई पहचान के साथ उद्योगपति बन गए हैं. 20 वर्ष गुजर जाते हैं.

अचानक मितवा फिर भारत पहुंचता है और सीबीआई उसे गिरफ्तार कर लेती है.शकील को भी मितवा की तलाश है. रिजवान, फागुन व बहादुर दोस्ती निभाते हुए सीबीआई के चंगुल से मितवा को छुड़ा लेते हैं .शकील से दुश्मनी हो जाती है. परिणामत: सुकन्या, रिजवान व बहादुर मारे जाते हैं, पर अंतत फागुन फ्रांस जाकर शकील व फकीरा को मार देता है.

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लेखन व निर्देशन :

फ्रेंच फिल्म का भारतीय करण करते हुए इसकी कहानी, पटकथा व संवाद तिगमांशु धुलिया ने ही  लिखी है, जो कि अतीत घटिया है. इस तरह की कहानी पर हजारों फिल्में बन चुकी हैं. कहानी में नयापन नहीं लेखन व निर्देशन बहुत स्तरहीन है.’यारा’ देखकर कहीं से भी यह अहसास नहीं होता कि यह फिल्म तिगमांशु धुलिया ने निर्देशित की  है, जिन्होंने कभी ‘हासिल’ या ‘पान सिंह तोमर’ जैसी यादगार फिल्में निर्देशित कर चुके हैं. ‘यारा’ एक अपरिपक्व निर्देशन और लेखन वाली फिल्म है.फिल्म अपराध कथा है, पर कहीं कोई रोमांच पैदा नहीं होता. विद्युत जामवाल जैसे एक्शन स्टार के बावजूद फिल्म में एक भी सही ढंग का एक्शन दृश्य नहीं है. कहानी पूरी तरह चूं-चूं का मुरब्बा बना दी गयी है. गैंगवार, सेक्स, स्मगलिंग, हिंसा,  नक्सलवाद सहित कई मसाले डाले गए हैं, मगर किसी को भी सही ढंग से कहानी का हिस्सा नहीं बनाया गया है.फिल्म में रोमांस भी ढंग से नहीं उभरता. गाने भी घटिया हैं.

अफसोस की बात है कि एक दृश्य में फिल्मकार ने रिजवान के किरदार को एक पुरानी फिल्म के अमिताभ बच्चन के किरदार की नकल करते हुए भी दिखा दिया, वह भी अति घटिया स्तर की मिमिक्री.

फिल्म में कहीं भी एक्साइटमेंट नहीं है. फिल्म अति बोरियत के अलावा कुछ नहीं है. बतौर निर्देशक तिग्मांशु धूलिया एक साधारण स्तर की गैंगस्टर व अपराध फिल्म देने में भी बुरी तरह से विफल रहे हैं.

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अभिनय:

फिल्म में विद्युत जामवाल ,विजय वर्मा ,अमित साध, श्रुति हासन जैसे कलाकार है, पर किसी की भी अभिनय क्षमता प्रभावित नहीं करती. यह चरित्र चित्रण की कमी के साथ-साथ निर्देशन क्षमता का अभाव के कारण किसी की भी अभिनय प्रतिभा उभर नहीं पायी. विद्युत जामवाल ने क्या सोचकर यह फिल्म की, यह तो  वही जाने.

Zee5 पर देखिए भोजपुरी एक्ट्रेस रानी चटर्जी की ये 5 सुपरहिट फिल्में बिल्कुल फ्री

जैसा कि हम सब जानते हैं कि पूरे विश्व में कोरोना वायरस (Corona Virus) नाम की बिमारी फैली हुई है जिसकी वजह से कुछ समय के लिए सभी कामों को बंद कर दिया गया था. हालांकि अर्थव्यवस्था को नजर में रखते हुए सरकार ने काफी हद तक लॉकडाउन (Lockdown) खोल दिया है लेकिन सभी के सिरों पर कोरोना वायरस (Corona Virus) जैसी बिमारी का खतरा तो बना ही हुआ है. ऐसे में सरकार ने अभी तक सिनेमाघरों को खोलने की इजाजत नहीं दी है और साथ ही सभी फिल्मों और वेब सीरीज (Web Series) की शूटिंग भी बंद है.

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यानी कि फिलहाल सभी एक्टर/एक्ट्रेसेस अपने अपने घरों में ही बैठे हैं और सिर्फ सोशल मीडिया से ही अपने फैंस को फोटोज और वीडियोज के जरिए एंटरटेन कर रहे हैं. इस कड़ी में सभी लोग ओटीटी प्लेटफोर्म्स (OTT Platforms) का जमकर फायदा उठा रहे हैं और घर बैठे अपनी पसंदीदा फिल्में और वेब सीरीज ओटीटी प्लेटफोर्म्स पर ही देख रहे हैं जैसे कि- नेटफ्लिक्स (Netflix), अमेजोन प्रोइम वीडियो (Amazon Prime Video), जी5 (Zee5), एम एक्स प्लेयर (MX Player), आदी.

 

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आपको बता दें, भोजपुरी इंडस्ट्री (Bhojpuri Industry) की जानी मानी एक्ट्रेस रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) आज किसी पहचान की मोहताज नहीं है बल्कि उनकी फैन फौलोविंग इस कदर है कि इनके फैंस उनकी हर फोटो, हर वीडियो, हर फिल्म को खूब पसंद करते हैं और ना सिर्फ पसंद करते हैं बल्कि उनके फैंस उन्हें दीवानों की तरह चाहते हैं. रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) के फैंस के लिए ओटीटी प्लेटफोर्म जी5 (Zee5) की तरफ से एक सरप्राइज आया है जिसमें वे अपनी पसंदीदी एक्ट्रेस रानी चटर्जी की यह चुनिंदा फिल्में बिल्कुल फ्री में देख पाएंगे.

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राउडी रानी (Rowdy Rani)

2014 में रिलीज हुई फिल्म ‘राउडी रानी’ भोजपुरी इंडस्ट्री की सुपरहिट फिल्मों में से एक रही है. इस फिल्म का निर्देशन इकबाल बक्श ने किया था और लीड रोल में एक्ट्रेस रानी चटर्जी के साथ संभावना सेठ (Sambhavna Seth) और अमरीश सिंह (Amrish Singh) दिखाई दिए थे.

रंगबाज (Rangbaaj)

https://www.youtube.com/watch?v=JKo6iouS0Rs

2017 में रिलीज हुई रानी चटर्जी की सुपर हिट फिल्म ‘रंगबाज’ शिवराम यादव के डायरेक्शन में बनी थी. इस फिल्म में रानी चटर्जी के साथ लीड रोल हैदर काजमी ने निभाया था.

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चोर मचाए शोर (Chor Machaye Shor)

रानी चटर्जी की इस फिल्म को दर्शकों द्वारा खूब तारीफें मिली थी और खूब पसंद किया गया था. इस फिल्म में एक्ट्रेस रानी चटर्जी के साथ आकाश सिंह यादव (Akash Singh Yadav), काजल राघवानी (Kajal Raghavani), अंजना सिंह (Anjana Singh) और मनोज टाइगर (Manoj Tiger) जैसे कई कलाकर अहम किरदार में दिखाई दिए थे.

देवरा बड़ा सतावेला (Devra Bada Satavela)

2010 में रिलीज हुई रानी चटर्जी की इस फिल्म को खूब सफलता मिली थी. इस फिल्म में सुपरस्टार रवि किशन (Ravi Kishan) और रानी चटर्जी की जोड़ी को खूब पसंद किया गया था. रानी और रवि के अलावा इस फिल्म में भोजपुरी इंडस्ट्री की बेहद पौपुलर एक्ट्रेस मोनालिसा (Monalisa) और एक्टर पवन सिंह (Pawan Singh) भी लीड रोल में नजर आए थे.

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जानम (Jaanam)

भोजपुरी इंडस्ट्री की सबसे पौपुलर जोड़ियों में से एक रानी चटर्जी (Rani Chatterjee) और खेसारी लाल यादव (Khesari Lal Yadav) की इस फिल्म ने तो जैसे सिनेमाघरों में घमाल ही मचा दिया था. ना केवल फिल्म बल्कि इस फिल्म के सभी गाने भी काफी लोकप्रिय रहे थे. इस फिल्म का निर्देशन अजय कुमार झा ने किया था.

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